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धर्म संसार / शौर्यपथ / पौंड्र नगरी का राजा पौंड्रक नकली श्रीकृष्ण बनकर खुद को वासुदेव कहता था। पौंड्रक को उसके मूर्ख और चापलूस मित्रों ने यह बताया कि असल में वही परमात्मा वासुदेव और वही विष्णु का अवतार है, मथुरा का राजा कृष्ण नहीं। कृष्ण तो ग्वाला है। बहुत समय तक श्रीकृष्ण उसकी बातों और हरकतों को नजरअंदाज करते रहे, बाद में उसकी ये सब बातें अधिक सहन नहीं हुईं तो श्रीकृष्ण की आज्ञा से हनुमानजी ने अपनी लीला का प्रदर्शन किया पौंड्र नगरी में।
वे पौंड्र नगरी में पहुंचकर उत्पात मचाते हैं और पौंड्रक के खास महाबली दूर्धर का वध कर देते हैं। हनुमानजी पौंड्रक की सभा में पहुंचकर पौंड्रक को चेतावनी देकर कहते हैं कि पौंड्रक मैं जा रहा हूं और यदि तुम शीघ्र ही धर्म के मार्ग पर नहीं लौटे तो मैं लौटकर आऊंगा। फिर हनुमानजी हाथ जोड़कर जय श्रीराम बोलकर अदृश्य हो जाते हैं।
हनुमानजी से परेशान होकर पौंड्रक ने अपने मित्र वानर द्वीत का आह्वान करता है। फिर पौंड्रक गैलरी के आकाश में देखकर कहता है- मित्र द्वीत हम वासुदेव पौंड्रक तुम्हें प्रकट होने की आज्ञा देते हैं, प्रकट हो द्वीत प्रकट हो। तभी आसमान से हनुमानजी जैसा ही एक विशालकाय वानर प्रकट हो जाता है और कहता है- प्रणाम वासुदेव।
पौंड्रक अपने मित्र वानर द्वीत को श्रीकृष्ण और हनुमाजी के बारे में बताता है तो वह कहता है कि वह तो मेरे बहुत पुराना शत्रु है। अब वक्त आया है उसका वध करने का। कहां छुपा है वह दुष्ट।
वानर द्वीत सबसे पहले तो द्वारिका जाकर वहां खुब उत्पात मचाता है। बलरामजी से उसका सामना होता है तो वह कहता है कि पौंड्रक ही है असली वासुदेव श्रीकृष्ण। यह सुनकर बलरामजी चौंक जाते हैं। वानर द्वीत वहां से चला जाता है।
हनुमानजी को ढूंढते ढूंढते वानर द्वीत गंधमादन पर्वत पर पहुंच जाता है। वहां हनुमाजी और वानर द्वीत में घमासान युद्ध होता है। हनुमानजी उसे बुरी तरह धो देते हैं तब वह अंत में एक मायावी अस्त्र निकालता है। वह भी निष्फल हो जाता है तब हनुमानजी उसकी छाती पर पैर रखकर उसका वध करने वाले रहते हैं तो वह कहता है- रुक जाओ हनुमान, रुक जाओ..तुम्हें श्रीराम की सौगंध हैं। यह सुनकर हनुमानजी चौंक जाते तब श्रीकृष्ण संकेतों से हनुमानजी को उसका वध करने से रोक देते हैं और मानसिक रूप से हनुमानजी कहते हैं कि ये अच्छा अवसर है। आपके संकेत के अनुसार मैं इसे छोड़ देता हूं। ये पाखंडी अवश्य मेरे साथ धोखा करेगा और मुझे बंदी बनाएगा। इस बहाने मैं इसके साथ चला जाऊंगा और पौंड्रक के पास पहुंचकर उसे अंतिम चेतावनी दूंगा कि यदि उसने अपने आप को वासुदेव समझना नहीं छोड़ा तो फिर मेरे प्रभु उसका वध कर देंगे। मुझे आज्ञा दीजिये। तब श्रीकृष्ण आशीर्वाद देते हैं।
फिर जैसे ही हनुमानजी उस द्वीत को छोड़ते हैं वह अपनी माया से हनुमानजी को बंदी बना लेता है और हनुमानजी को पौंड्रक की सभा में ले जाता है। तब पौंड्रक कहता है कि हम भरे दरबार में उस हनुमान का भांडा फोड़ना चाहते हैं और महारानी तारा को यह बताना चाहते हैं कि जिसे तुम हनुमान समझ रही थी वह तो एक बहुरूपिया है। इस तरह दोनों में वाद विवाद होता है।
तब हनुमानजी कहते हैं- पौंड्रक तुम मूर्ख हो। तुम इतना भी नहीं जानते की हनुमान को कोई बंदी नहीं बना सकता। मैं पवनपुत्र हूं और पवन और हनुमान को कोई अपनी मुट्ठी में बंद नहीं कर सकता।...यह सुनकर पौंड्रक कहता है- अब तो तुम मेरी मुठ्ठी में आ गए हो और अब हम तुम्हें चुटकी में मसल देंगे किसी मच्छर की भांति।...फिर सभी वहां पर वासुदेव पौंड्रक की जय-जयकार करते हैं।
तब हनुमानजी कहते हैं- पौंड्रक मैंने तुम्हें चेतावनी दी थी कि तुम धर्म के रास्ते पर आ जाओ और श्रीकृष्ण को भगवान मान लो परंतु तुमने मेरी बात नहीं मानी। मैंने तुम्हें सीधे रास्ते पर आने का अवसार दिया था परंतु तुमने उसका लाभ नहीं उठाया और अब तुम दंड के पात्र बन गए हो। ऐसा कहने के बाद हनुमानजी पौंड्रक के महल को उजाड़ देते हैं उसी तरह जिस तरह उन्होंने रावण की लंका को उजाड़ा था।
फिर हनुमानजी कहते हैं कि पौंड्रक तू भगवान श्रीकृष्ण का अपराधी है और तेरा अंत उन्हीं के हाथों निश्चित है। मैं चाहूं तो तुझे और तेरे इस वानर द्वीत का अभी वध कर सकता हूं परंतु मेरे प्रभु की आज्ञा नहीं है। ऐसा कहकर हनुमानजी अदृश्य हो जाते हैं।
फिर एक दिन वानर द्वीप द्वारिका पहुंच जाता है और उसका सामना बलरामजी से होता है। बलरामजी उसका वध कर देते हैं।
इसके बाद बहुत समय तक श्रीकृष्ण पौंड्रक की हरकतों को नजरअंदाज करने के बाद में उन्होंने पौंड्रक की युद्ध की चुनौती स्वीकार कर ली। युद्ध के मैदान में नाटकीय ढंग से युद्धभूमि में प्रविष्ट हुए इस 'नकली कृष्ण' को देखकर भगवान कृष्ण को अत्यंत हंसी आई। इसके बाद युद्ध हुआ और पौंड्रक का वध कर श्रीकृष्ण पुन: द्वारिका चले गए।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / ग्रीन फिल्ड सीआईटी स्कूल, जिला राजनांदगांव में शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत प्रवेशित 60 से अधिक गरीब बच्चे विगत 360 दिनों से निःशुल्क शिक्षा पाने जिला शिक्षा अधिकार हेतराम सोम के चक्कर काट रहे है, क्योंकि हेतराम सोम ने ग्रीन फिल्ड स्कूल बंद कराया दिया, लेकिन उसमें प्रवेशित गरीब बच्चों को किसी अन्य स्कूल में प्रवेश दिलाने में कोई रूचि नहीं दिखाया गया, जिससे इन गरीब बच्चों का एक वर्ष बर्बाद हो गया।
पीड़ितगणों का कहना है कि विगत एक वर्ष से जिला शिक्षा अधिकारी हेतराम सोम के समक्ष उपस्थित होकर यह लिखित आवेदन कर रहे है कि उनके बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं किया जाए, उन्हें किसी अन्य स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाए, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया और पूरे एक वर्ष से इन गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखा गया और इस प्रकार गरीब बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन किया गया और उनके जीवन व भविष्य को बर्बाद कर दिया गया।
पीड़ित पालक तिलक राम साहू का कहना है कि हेतराम सोम के द्वारा अपने कर्त्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही और उदासीनता बरता गया और अब हम न्याय चाहते है, क्योंकि हमको यह समझ नहीं आ रहा है कि हमारे बच्चों को किस स्कूल का रिजल्ट मिलेगा और और किस कक्षा में प्रवेश मिलेगा . क्योंकि पूरा एक वर्ष बीत गया और हमारे बच्चें को किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं दिलाया गया और हम अब यह जानना चाहते है कि इस दोषी जिम्मेदार अधिकारी जिसने हमारे बच्चों का जीवन व भविष्य बर्बाद कर दिया है उस पर क्या और कब कार्यवाही होगी।
पीड़ित पालकगणों ने नवपदस्थ कलेक्टर से निवेदन किया है कि जिला शिक्षा अधिकारी हेमराम सोम पर सख्त कार्यवाही करने स्कूल शिक्षा सचिव को पत्र प्रेषित कर उनके बच्चों को उनके उम्र के अनुसार किसी अन्य स्कूलों में प्रवेश दिलाने की समुचित व्यवस्था किया जाए।
दुर्ग । शौर्य पथ ।
अय्युब खान पूर्व अध्यक्ष युवा कांग्रेस लोकसभा दुर्ग ने बताया कि दुर्ग कलेक्टर सर्वेश भूरे से हमारा प्रतिनिधिमंडल मिलकर पत्र सौंपा की आपको ज्ञात करवाना चाहते है की दुर्ग भिलाई के अनेक निजी स्कूल कोरोना संकट काल में भी ग़ैर मानवता वाली पालकों पे दाबव बना रहे पिछले देड साल से कोरोना संकट और लॉकडाउन कई पालकों का व्यापार संकट है बेरोज़गार हो रहे तब भी कई निजी स्कूल अनेको तरीक़ों से पालकों से ज़बरिया फ़ीस वसूलना चाह रहे है जैसे की — 1. बच्चों फ़ीस जमा ना करने पर ऑनलाइन क्लास बंद करने की धमकी भरा मेसजेस और फ़ोन कॉल पलकों को कर रहे है । 2 जो पालक फ़ीस जमा करने चाहते माली हालत ठीक ना होने के बावजूद भी लेक़िन किस्तों में जमा करने चाहते है पर निजी स्कूल प्रबंधन एक साथ जमा करने का दबाव बना रहे है । 3 , कुछ निजी स्कूल तो टूइशन फ़ीस के अलावा स्कूल डेवलोपिंग फ़ीस और अधर ऐन्यूअल चार्ज लगा कर पालकों से फ़ीस वसूल रहे है । 4 कोरोना पीड़ित पालक एवं कोरोना संक्रमण में जान गँवा चुके बच्चों के पालकों के बच्चों को भी फ़ीस जमा करने का मेसजेस और फ़ोन काल कर रहे है । हमारा प्रतिनिधि मंडल मिलकर माँग करते है की ज़िले के सभी निजी स्कूलो को निर्देशित करे की किस्तों में फ़ीस जमा लेवे , ऑनलाइन क्लास बंद करने की धमकी भरा मेसजेस काल ना भेजे ,टूइशन फ़ीस के अलावा अन्य कोई चार्ज ना लेवे और सबसे महतपूर्ण करोना संकट से जिन पालकों का व्यापार ख़त्म हो गया है जो बेरोज़गार हो चुके है करोना से जो संक्रमित हो चुके है और जिनका दुखद निधन हो चुके उन बच्चे के पालकों फ़ीस जमा करने के दबाव ना डालकर सहानुभूतिपूर्वक इस समस्या का हल निकाले ताकी स्कूल प्रशासन को भी नुक़सान ना हो और दोनो पक्ष इस समस्या का हल सुलझा सके पत्र सौंपने प्रतिनिधिमंडल के रूप अय्युब खान , राकेश दुबे , संदीप बक्शी , अभिषेक शर्मा ,परसोत्तम सोनवानी आदि उपस्तिथ थे ।
सेहत /शौर्यपथ / अधिकतर लोग चाय के बहुत शौकीन होते हैं। सुबह की शुरुआत चाय से करना ही पसंद करते ताकि दिनभर एक्टिव और तरोताजा महसूस कर सकें। लेकिन यदि ऐसी चाय के बारे में हम आपको बताएं जिसके सेवन से आपको ताजगी भी मिले, साथ ही आपके स्वास्थ्य को बेहतर करने में भी चाय मदद करे तो? जी हां, हम बात कर रहे हैं नींबू की चाय की। इसके रोज सुबह सेवन करने से आपको कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं।
नींबू की चाय आपके लिए सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है। नींबू की चाय आसानी से तैयार की जाती है और कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है। यह आपके शरीर के टॉक्सिन को निकालने में मदद करती है और आपके शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। इसके अलावा आपको रिफ्रेशमेंट भी महसूस करवाती है।
नींबू की चाय कैसे बनाएं?
* नींबू की चाय का सेवन से आपके वजन को कंट्रोल करने में मदद करता है। यदि आप नींबू की चाय नियमित पीते हैं, तो आपको वजन नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
* नींबू में विटामिन सी पाया जाता है, जो आपकी त्वचा के लिए फायदेमंद है। इसके नियमित सेवन से चेहरे पर चमक और मुंहासे की समस्या में राहत मिलती है।
* नींबू की चाय में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से बीमारियों के उपचार में मदद मिलती है।
* नींबू की चाय पीने पर आपको सर्दी-जुकाम से राहत मिलती है, साथ ही यह प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /नींबू विटामिन सी का बेहतर स्त्रोत है।आपकी सेहत के लिए केवल थोड़े से नींबू का सेवन करना फायदेमंद साबित होगा। आप किसी भी रूप में इसका नियमित सेवन कर सकते हैं, चाहे तो अपने भोजन में इसे शामिल करें या चाहे तो नींबू-पानी बनाकर पिएं।
1. नींबू पानी विटामिन सी का एक बेहतरीन स्त्रोत है। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे आप कई तरह के रोग और बैक्टीरिया से बचे रहते हैं।
2. अगर आप सुबह फ्रेश होने से पहले गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीते हैं, तो आपका पेट आसानी से साफ होगा और कब्ज की समस्या नहीं होगी।
3. नींबू विटामिन सी का स्त्रोत है इसलिए यह त्वचा को स्वस्थ बनाने के साथ ही लिवर के लिए भी यह बेहतर होता है।
4. नींबू पानी में कई तरह के मिनरल्स जैसे आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, पोटैशियम और जिंक पाए जाते हैं।
5. नींबू पानी पीने से शरीर को रिहाइड्रेट होने में मदद मिलती है और यह यूरीन को पतला रखने में मदद करता है।
6. नींबू पानी हाई शुगर वाले जूस व ड्रिंक का बेहतर विकल्प है। खासतौर से उनके लिए जो डायबिटिक या वजन कम करना चाहते हैं।
7. नींबू पानी में मौजूद नींबू का रस हाइड्रोक्लोरिक एसिड और पित्त सिक्रेशन के प्रोडक्शन में वृद्धि करता है, जो पाचन के लिए आवश्यक और पाचनक्रिया में फायदेमंद
है।
8. प्रतिदिन सुबह गर्म नींबू पानी पिएं और पूरे दिन कॉन्स्टीपेशन की समस्या से दूर रहें।
9. नींबू पानी को गुनगुना करके पीने से गले की खराबी या फैरिन्जाइटिस में आराम पहुंचाता है।
10. नींबू पानी पीने से मसूड़ों से संबंधित समस्याओं से राहत मिलती है। नींबू पानी में एक चुटकी नमक मिलाकर पीने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
11. नींबू पानी में एंटी ट्यूमर गुण होते हैं, जिससे की कैंसर का खतरा कम हो जाता है।
12. इसमें ब्लड प्रेशर को कम करने के गुण के साथ ही तनाव,डिप्रेशन और अवसाद कम करने के गुण पाये जाते हैं। नींबू पानी पीने से तुरंत ही आपको आराम का अनुभव होगा।
13 हल्के गर्म पानी में शहद-नींबू डालकर पीने से गले के इंफेक्शन से भी छुटकारा मिलता है। नींबू कफ को बाहर निकालने में मददगार साबित हो सकता है वहीं शहद में एंटी-बैक्टेरियल तत्व होते हैं। जो थ्रोट इंफेक्शन से राहत पाने के लिए इस ड्रिंक को पीने की सलाह दी जाती है।
14 अगर आप सुबह फ्रेश होने के बाद यानि बिल्कुल खाली पेट इसका प्रयोग करते हैं, तो यह आपकी बढ़ी हुई चर्बी कम करने में मददगार साबित होगा और आपका वजन भी कम होगा।
15 यह आपके पाचन तंत्र को फायदा पहुंचाएगा और पाचन क्रिया पहले से बेतर होगी। इसके चलते आपको पेट की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
16 गर्म नींबू पानी का सेवन आपके शरीर की अंदर से सफाई करता है और हानिकरक तत्वों को शरीर से बाहर करने में मदद करता है। यह प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है।
17 नींबू पानी सेवन का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह आपको मुंह और सांसों की दुर्गंध से भी निजात दिलाएगा और आप ताजगी महसूस करेंगे। इसमें मौजूद विटामिन सी भी आपको कई फायदे देगा।
18 नींबू में विभिन्न विटामिन्स जैसे थियामिन, रिबोफ्लोविन, नियासिन, विटामिन बी- 6, फोलेट और विटामिन-ई की थोड़ी मात्रा मौजूद रहती है। यह खराब गले, कब्ज, किडनी और मसूड़ों की समस्याओं में राहत पहुंचाता है।
19 नींबू ब्लड प्रेशर और तनाव को कम करता है।
20 त्वचा को स्वस्थ बनाने के साथ ही लिवर के लिए भी यह बेहतर होता है।
21 नींबू पानी, हाई शुगर वाले जूस व ड्रिंक का बेहतर विकल्प माना जाता है। खासतौर से उनके लिए जो डायबिटीज के मरीज हैं या वजन कम करना चाहते हैं। यह शुगर को गंभीर स्तर तक पहुंचाए बिना शरीर को रिहाइड्रेट व एनर्जाइज करता है।
22 साथ ही यह किडनी स्टोन बनने के किसी भी तरह के खतरे को कम करता है।
23 हर सुबह शहद के साथ गुनगुना नींबू पानी पीने से अतिरिक्त वजन आसानी से कम किया जा सकता है।
24 यदि आप दिनभर फ्रेश महसूस करना चाहते हैं, तो आपको रोजाना नींबू पानी पीना चाहिए। यह आपको फ्रेश रखता हैं। इसलिए अपनी आदत बनाए की नियमित रूप से नींबू पानी का सेवन करें।
25 आपकी खूबसूरती को बढ़ाने के लिए नींबू पानी बहुत कारगर है। यह त्वचा को फायदा पंहुचाता है। नियमित इसे पीने से चेहरे पर ग्लो आता है।
सेहत /शौर्यपथ / कोरोना वायरस का प्रकोप धीरे-धीरे कम होने लगा है। लेकिन खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। जिसे लेकर अभी भी सावधानियां बरतना जरूरी है। वयस्कों और बूढ़ों को वैक्सीन लग रही है जिससे संक्रमित होने का खतरा कम हो सकता है। लेकिन क्या बच्चों को भी वैक्सीन लगना चाहिए? इसे लेकर चर्चा जारी है। तो क्या 2 साल से भी कम बच्चों को मास्क लगाना होगा? यह बड़ा सवाल है। आइए जानते हैं वैज्ञानिकों का इस पर क्या मत है?
अमेरिका की सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार वयस्क की तरह कोरोना बच्चों को भी हो सकता है। संक्रमण से बचाव के लिए सामाजिक दूरी बेहतर उपाय है। अगर बच्चों को बाहर ले जाया जाता है तो उन्हें भी मास्क पहनाया जा सकता है लेकिन 2 साल से कम उम्र के बच्चों को मास्क पहनाने से उन्हें घुटन हो सकती है।
अन्य विशेषज्ञ का कहना है कि 2 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों को मास्क पहनाना खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि बच्चों की सांस नली संकरी होती है, जिस वजह से उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और मास्क लगाने से उन्हें सांस लेने में अधिक जोर लगाना पड़ सकता है। इसलिए बेहतर है बच्चों को घर में ही रखें।
किड्स हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार जारी गाइडलाइन में नन्हें बच्चों को मास्क न पहनने की सलाह दी गई है। अगर छोटे बच्चे मास्क पहनते हैं तो उन्हें सांस लेने में तकलीफ होगी। वह बारबार अपने चेहरे से मास्क को हटाने की कोशिश करेंगे। साथ ही अपने मुंह और नाक पर हाथ लगाएंगे। इससे बेहतर है बच्चों को घर में ही रखा जाएं। जिससे जोखिम कम होगा।
चाइल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की ओर से एडवाइजरी जारी की गई जिसमें कहा गया कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को मास्क नहीं पहनाना चाहिए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक बच्चों की सांस नली काफी छोटी होती है जिससे उन्हें सांस लेने में परेशानी आती है।
सेहत /शौर्यपथ गर्मी के दिनों में कच्ची कैरी कई बीमारियों से बचाने में सहायक होती है। इसका सेवन भी अधिक किया जाता है। सेहत के लिहाज से भी और खाने में भी। कई लोग कच्ची कैरी इसलिए भी नहीं खाते कि दांत खट्टे हो जाते हैं लेकिन आज आपको बताते हैं कच्ची कैरी खाने के कुछ खास फायदे -
- कच्ची कैरी में विटामिन सी की प्रचुर मात्रा होती है। इसके सेवन से शरीर में ब्लड का संचार अच्छे से होता है। साथ ही यह नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी मददगार होती है।
- कच्ची कैरी की लौंजी, सब्जी और अचार बनाया जाता है और बड़े चाव से खाते हैं। खाने में स्वाद बढ़ाने के साथ यह रोग प्रतिरोधक की क्षमता भी बढ़ाती है।
- लौंजी के रूप में कैरी का सेवन करने से आंतों में होने वाले संक्रमण दूर होते हैं। इससे लिवर दुरस्त होता है।
- गर्भावस्था में कच्ची कैरी का सेवन करना लाभदायक रहता है। इससे कब्ज, एसिडिटी, उल्टी जैसी समस्या नहीं होती है। कच्ची कैरी खाने से महिलाओं में एंटीऑक्सीडेंट बढ़ती है, जो कई बीमारियों में शिशु और मां दोनों को बचाने में सहायक होती है।
- कच्ची कैरी के सेवन से स्कर्वी रोग को कम करने में निजात मिलती है। इसमें मौजूद विटामिन सी की कमी पूरी होती है। स्कर्वी एक प्रकार का रोग है जो विटामिन सी की कमी से होता है। इससे शरीर पर चकत्ते पड़ने लग जाते हैं।
- कच्ची कैरी के सेवन से दांत मजबूत होते हैं। जी हां, इसमें मौजूद विटामिन सी दांतों को मजबूती प्रदान करते हैं और मसूड़ों से खून निकलना बंद हो जाता है। अगर आप कच्ची कैरी खाते हैं तो यह मुंह की बदबू को भी दूर करने में सहायक है।
- कच्ची कैरी का सेवन करने से डीहाइड्रेशन, धूप और लू नहीं लगती है। पानी में इसे उबालकर ठंडा करके इसका पना बनाया जाता है। जिसमें चीनी और जीरा डालकर पिया जाता है। गर्मी में इसे पीने से ताजगी बनी रहती है। साथ ही पसीने के बदबू में राहत मिलती है।
- कच्ची कैरी डायबिटीज मरीजों के लिए लाभदायक मानी जाती है। इसके सेवन से शुगर लेवल कम होता है। साथ ही यह शरीर में आयरन की कमी को भी पूर्ण करता है। हालांकि शुगर मरीज डॉ की सलाह से ही इसका सेवन करें।
- कच्ची कैरी का सेवन करने से बाल घने और चमकदार होते हैं। इसी के साथ त्वचा में भी कसावट आती है।
- कच्ची कैरी के सेवन से बवासीर में फायदा हो सकता है। जी हां, बवासीर को पाचन तंत्र से जोड़कर देखा जाता है। कच्ची कैरी पाचन प्रक्रिया को मजबूत करती है। यह फाइबर का अच्छा स्त्रोत माना जाता है। इससे कठोरता कम होती है और आराम मिलता है।
शौर्यपथ / बेडरूम यानी शयन कक्ष वह कमरा होता है जहां आप अपनी दुनिया भर की चिंताएं भूल कर शांति से आराम और दांपत्य जीवन में प्यार घोलना चाहते हैं। लेकिन कई बार आपको पता नहीं है कि बेडरूम में रखी कुछ चीजें आपकी शांति में बाधक बन रही हैं।
बेडरूम में आते ही आपको घुटन हो, तनाव हो, आपस में कलह हो, नींद न आती हो तो आपको देखना चाहिए कि कहीं आपके कमरे में भी यह 10 चीजें तो नहीं रखी हैं।
1.जूते : गलती से भी अपने जूते-चप्पल सोने के कमरे में न रखें। इनसे निकलने वाली दूषित तरंगे आपका जीवन तबाह कर सकती हैं।
2. झाड़ू : आपके कमरे में झाड़ू रखी है मतलब आपके बीच रोजाना कलह मचता है। झाड़ू को तुरंत कमरे से बाहर स्टोर रूम में रखें।
3. फटे कपड़े : अगर आप भी अपने बेडरूम में फटे कपड़े जमा करते हैं तो इन्हें पहली फुरसत में बाहर करिए.. यह आपको कंगाली और तंगहाली का का जीवन देते हैं।
4. ढेर सारा प्लास्टिक और पोलिथीन : आपकी भी आदत प्लास्टिक और पोलिथीन जमा करने की है तो इन्हें कहीं और रखें बेडरूम में नहीं...इ नसे नकारात्मक किरणें निकलती हैं जो आपको बेचैन कर सकती हैं।
5. टीवी : आजकल घरों में फैशन है टीवी को बेडरूम में रखने का, लेकिन यह घातक है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक चीजों से भी नेगेटिव वाइब्स आती हैं. . अगर इन्हें रखना आपकी मजबूरी हैं तो सोते समय इन्हें ढांक कर रखें।
अन्य : इनके अलावा धूल, मिट्टी, मकड़ी के जाले, पुराने कॉस्मेटिक्स, खाली डिब्बे, डिब्बी,कनस्तर, पोंछे, टूटे कांच, क्रॉकरी, पालतु पशु, खराब बिस्तर तकिया,तीखे कलर की चीजें,
टूटे और आवाज करने वाले पंखें
आदि को भी बारह का रास्ता दिखाइए।
वास्तु शास्त्र/ शौर्यपथ / वास्तु शास्त्र में कई तरह के वेध बताए गए हैं। जैसे, स्तंभवेध, वृक्षवेध आदि। उन्हीं में से एक है छायावेध। छायावेध अर्थात घर पर पड़ने वाली छाया से किसी प्रकार का वास्तुदोष निर्मित होना। यह छाया अच्छी भी हो सकती है और बुरी भी। ज्योतिष में छाया को राहु और केतु माना गया है। छायावेध के कारण परिवार में रहने वाले सदस्य अक्सर बीमार रहते हैं, कभी-कभी यह रोग घातक भी होते हैं, जैसे- मन्द बुद्धि, हृदय रोग, लकवा आदि गंभीर रोग हो सकते हैं। छायावेध के कारण गृहपति का विनाश हो सकता है या सभी तरह की उन्नती रुक सकती है।
हालांकि यह देखना जरूरी होता है कि घर के उपर किसकी छाया पड़ रही है और किस दिशा से और किस प्रहर में छाया होती है। उसी से लाभ या नुकसान का पता चलता है। यह छाया मंदिर, पेड़, पहाड़, ध्वज, मकान आदि की हो सकती है। यदि 10 से 3 बजे के बीच किसी मंदिर, नकारात्मक वृक्ष, ध्वज, अन्य ऊंचा भवन, पहाड़, स्तूप, खंभे आदि की छाया पड़े तो इसे छायावेध कहते हैं। छाया 2 प्रहरसे ज्यादा लगभग 6 घंटे मकान पर पड़ती है तो वास्तुशास्त्र में उसे छाया वेध कहते हैं। अत: सभी प्रकार के वेध जानकर ही गृह का निर्माण करें। छायावेध मुख्यतः पांच प्रकार का होता है। 1.मंदिर, 2.वृक्ष, 3.पर्वत, 4.भवन और 4. ध्वज।
1.ध्वज छाया : मंदिर से 100 फीट की दूरी के भीतर बनाए गए मकान ध्वज छाया वेध से पीड़ित रहते हैं, परंतु यह निर्भर करता है मंदिर की ऊंचाई और ध्वज की ऊंचाई पर क्योंकि हो सकता है कि मंदिर छोटा हो और उसके ध्वज की छाया आपके मकान पर नहीं पड़ रही हो। अगर मंदिर की ध्वजा की ऊंचाई से दो गुनी जगह छोड़कर घर बना हो तो दोष नहीं लगता।
2.मंदिर छाया : यदि मकान पर प्रातः 10 बजे से 3 बजे तक किसी मंदिर की छाया पड़ रही है तो इसको छाया वेध कहा जाता है। इस तरह के छायावेध के कारण परिवार में अशांति, व्यापार में नुक्सान और विवाह व संतान में देरी बनी रहती है।
3.पर्वत छाया : यदि आपके घर के पास पहाड़, पहाड़ी या कोई टिला है जिसकी छाया आपके भवन पर पड़ रही है तो यह भी देखना होगा कि किस दिशा से पड़ रही है। किसी भी भवन के पूर्व दिशा में स्थित पर्वत की छाया मकान पर पड़ना ही पर्वत छाया वेध कहलाता है बाकि दिशाओं से कोई असर नहीं होता है। पर्वत छाया वेध के कारण मुख्य रूप से प्रगति में रूकावट आती है और लोकप्रियता घटती है।
4.भवन छाया वेध : यदि आपके मकान से कोई दूसरा बड़ा मकान है तो उसकी छाया आपके मकान पर रहेगी। लेकिन इसमें दिशा का ज्ञान होना भी जरूरी है। मकान की छाया यदि आस-पास किसी बोरिंग या कुंए पर पड़ती है तो इसको भवन छाया वेध कहा जाता है, इस प्रकार के वेध के कारण धन हानि होती होती है। यह भी कहा जाता है कि एक घर से दूसरे घर में वेध (छायावेध) पड़ने पर गृहपति का विनाश होता है।
5.वृक्ष छाया वेध : प्रातः 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक यदि किसी वृक्ष की छाया मकान पर पड़ती है तो ही यह नुकसान दायक होती है। इसमें भी दिशा का ज्ञान होना जरूरी है। इस वेध से उन्नति रुक जाती है। घर की आग्नेय दिशा में वट, पीपल, सेमल, पाकर तथा गूलर का वृक्ष होने से पीड़ा और मृत्यु होती है। नकारात्मक वृक्षों की छाया से रोग और शोक निर्मित होते हैं।
आस्था /शौर्यपथ /घर में कई तरह की प्रतिमाएं होती हैं जिसमें से कुछ वास्तु अनुसार होती है और कुछ नहीं। जो नहीं होती है उसके नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं। आओ जानते हैं कि वास्तु अनुसार कौनसे 7 प्राणियों की प्रतिमा घर में रख सकते हैं।
1. हाथी की मूर्ति : घर में आप हाथी की मूर्ति रख सकते हैं। यह मूर्ति ठोस चांदी की या पीतल की होना चाहिए। हाथी ऐश्वर्य का प्रतीक है। शयनकक्ष में पीतल की प्रतिमा रखने से पति पत्नी के बीच मतभेद खत्म होते हैं और चांदी का हाथी रखने से राहु संबंधी सभी दोष दूर रहो जाते हैं। यह पंचम और द्वादश में बैठे राहु का उपाय है। फेंगशुई अनुसार भी हाथी की तस्वीर या मूर्ति घर में रखने से सकारात्मक उर्जा के साथ-साथ धन प्राप्ति के स्रोत बनते हैं।
2. हंस की मूर्ति : घर में अतिथि कक्ष में हंस के जोड़ों की मूर्ति स्थापित करें जिससे अपार धन समृद्धि की संभावनाएं बढ़ जाएगी और घर में हमेशा शांति बनी रहेगी। दो हंसों के जगह आप दो बत्तख या दो सारस के जोड़े की मूर्ति भी लगा सकते हैं। इससे दांपत्य जीवन में भी सामंजस्य बना रहता है।
3. कछुआ : फेंगशुई के अनुसार घर में कछुआ रखने से उन्नती के साथ ही धन-समृद्धि का योग बनता है। इसे रखने से आयु भी लंबी होने की मान्यता है। पूर्व और उत्तर दिशा कछुए की स्थापना हेतु सर्वोत्तम मानी गई है। ड्राइंग रूम में कछुआ रख सकते हैं किसी पात्र में जल भरकर। कछुआ धातु का होना चाहिए लकड़ी का नहीं।
4. तोता की मूर्ति : वास्तु के अनुसार तोते की मूर्ति या तस्वीर को अध्ययन कक्ष में रखना चाहिए या जहां बच्चे पढ़ाई करते हैं वहां रखना या लगाना चाहिए। तोता पालना नहीं चाहिए बल्की उसी तस्वीर या प्रतिमा घर में रखने से फायदा होता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा में तोते की तस्वीर को लगाने से पढ़ाई में बच्चों की रुचि बढ़ती है, साथ ही उनकी स्मरण क्षमता में भी इजाफा होता है। तोता प्रेम, वफादारी, लंबी आयु और सौभाग्य का प्रतीक होता है। अगर आप घर में बीमारी, निराशा, दरिद्रता और सुखों का अभाव महसूस कर रहे हैं तो तोते का चित्र या मूर्ति घर में स्थापित करें। पति और पत्नी में प्रेम संबंध स्थापित करने के लिए भी फेंगशुई के अनुसार तोते के जोड़े को स्थापित किया जाता है। फेंगशुई के अनुसार तोता 5 तत्वों का संतुलन स्थापित करने में मददगार साबित होता है। तोते के रंग-बिरंगे पंख वास्तव में पृथ्वी, अग्नि, जल, लकड़ी और धातु के प्रतीक हैं। तोता सौभाग्य की वृद्धि करता है।
5. मछली की मूर्ति : कई लोग घर में एक्वेरियम में मछली पालते हैं परंतु उससे ज्यादा बेहतर होता है मछली की पीतल या चांदी की मूर्ति बनवाकर घर में रखना। वास्तु और फेंगशुई दोनों के अनुसार यह मूर्ति घर में खुशहाली और शांति को कायम करके उन्नती के रास्ते खोलती है। मछली अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, धन और शक्ति का प्रतीक है। इस मूर्ति को आप अपने घर की उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में ही रख सकते हैं।
6. गाय बछड़े की मूर्ति : बहुत से घरों में बछड़े को दूध पिला रही कामधेनु गाय की पीतल की मूर्ति होती है। गाय की मूर्ति रखने से संतान प्राप्ति के साथ ही मानसिक शांति मिलती है। फेंगशुई में भी इसका महत्व बताया गया है। पढ़ाई में एकाग्रता के लिए भी इस मूर्ति को गर में स्थापित करते हैं।
7. ऊंट की मूर्ति : ऊंटी की मूर्ति भी घर में रखने का प्रचलन है। ऊंटों के जोड़े की मूर्ति को ड्राइंगरूम या लिविंग रूम में उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर रखा जाता है। ऊंट कठिन परिश्रम का प्रतीक है। करियर में उन्नती हेतु या व्यावसायीक प्रतिष्ठानों में ऊंटों की मूर्ति या तस्वीर रखी जाती है। यह मन को स्थिर रखकर सफलता प्रदान करता है। परिवार के लोग मानसिक रूप से सुदृड़ और रिलैक्स रहते हैं।
नोट : बहुत से लोगों के घरों में वस्तु के रूप में बैल, भैसा, शेर, चुहे, घोड़े, नर्मदा शिवलिंग, श्वेतार्क गणपति, सिंघम लक्ष्मी शंख, नजर बट्टू, द्वारिका शिला, नागमणि, पारद शिवलिंग, हीरा शंख, गोमती चक्र, श्रीयंत्र, गौरोचन, मछलीघर, शिवलिंग, शालिग्राम, दक्षिणावर्ती शंख, मणि, नग, कौड़ी, समुद्री नमक, हल्दी की गांठ, रुद्राक्ष, हाथाजोड़ी, पारद शिवलिंग आदि सैकड़ों वस्तुएं हो सकती हैं, लेकिन घर में क्या और कहां कौन-सी वस्तु रखें इसके लिए वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लें।
सेहत /शौर्यपथ / चाय के साथ बिस्किट, ब्रेड, नमकीन खाना आम बात है। वहीं ज्यादातर लोग नाश्ते के साथ चाय पीते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाली पेट चाय पीने से भी ज्यादा खतरनाक है, चाय के साथ कुछ ऐसी चीजों का सेवन जिनसे आपको कई परेशानियां घेर सकती हैं। आइए, जानते हैं कि चाय के साथ क्या नहीं खाना चाहिए-
हरी पत्तेदार सब्जियां
कई लोग खाने के साथ चाय पीते हैं, जिनमें रोटी के साथ हरी सब्जियां भी होती है। हरी पत्तेदार सब्जियों में मौजूद गोइट्रोजन दरअसल थायरॉयड ग्रंथि द्वारा आयोडीन को लेने में रुकावट डालता है और आयोडीन की कमी का कारण बन सकता है। गोभी, फूलगोभी, हरे पत्तों, मूली, सरसों, ब्रोकली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, शलजम और सोयाबीन जैसी सब्जियों में गोइट्रोजन होते हैं।
कच्ची चीजें
कच्ची चीजें जैसे सलाद, अंकुरित अनाज या फिर उबला हुआ अंडा जैसी चीजें भी चाय के साथ लेना आपकी सेहत और पेट को नुकसान पहुंचा सकता है।
हल्दी वाली चीजें
अगर आप चाय के साथ या चाय पीने के तुरंत बाद ऐसी चीजों का सेवन करते हैं जिसमें हल्दी की मात्रा अधिक हो, तो यह भी आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसका प्रमुख कारण है चाय और हल्दी में मौजूद रासायनिक तत्व, जो आपस में क्रिया करके आपके पेट में रासायनिक क्रिया कर पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
नींबू
चाय के साथ किसी ऐसी चीज का प्रयोग भी न करें जिसमें नींबू की मात्रा हो, यह नुकसानदायक है। कई लोग चाय में नींबू निचोड़कर लेमन टी बनाकर पीते हैं लेकिन यह चाय एसिडिटी और पाचन संबंधी और गैस की समस्या भी पैदा कर सकती है। कभी-कभी चाय में नींबू मिलाकर पीने से पेट में बनने वाला रसायन जहर जितना घातक हो सकता है।
ठंडी चीजें
चाय के पहले पानी पीना तो ठीक है, लेकिन चाय के साथ या फिर चाय पीने के बाद पानी या किसी भी ठंडी चीज का सेवन किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है। चाय पीने के तुरंत बाद पानी पीना, पाचन तंत्र पर बुरा असर डालता है और गंभीर एसीडिटी की समस्या या पेट की अन्य समस्या भी पैदा कर सकता है।
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / हम में से बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जिनका शरीर तो जवां लगता है लेकिन उनके चेहरे पर रौनक नहीं होती। इसके अलावा उनके चेहरे पर बहुत कम उम्र में झुर्रियां आने लगती है। बदलते मौसम में तो चेहरे का रुखापन बढ़ने से कई परेशानियां सामने आ जाती है। ऐसे में सर्दियों में आपको अपनी डाइट में कुछ खास फलों को शामिल करना चाहिए-
दही
दही से बना रायता या लस्सी आपके हाजमे को ठीक रखती है। आप दही को चावल के आटे या बेसन के साथ मिलाकर चेहरे पर भी लगा सकते हैं। इससे आपके दाग-धब्बे दूर हो जाएंगे।
नीबू
नीबू का रस आपके पेट के लिए ही नहीं बल्कि त्वचा के लिए भी बहुत गुणकारी है। रोजाना नीबू पानी पीने से आपको पेट से जुड़ी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही आप नीबू के रस को सादा पानी या ग्लिसरीन के साथ मिलाकर चेहरे पर भी लगा सकते हैं।
तरबूज
ज्यादातर लोगों को तरबूज खाना पसंद होता है। ऐसे में आप तरबूज को खाने के अलावा इसके जूस को चेहरे पर भी लगा सकते हैं।
दूध
आप जानते ही हैं, कि दूध को संपूर्ण आहार कहा जाता है। आपको कम से कम रोजाना दो गिलास दूध पीना चाहिए। आप सुबह और रात में एक-एक गिलास दूध पी सकते हैं। आप चेहरे पर कच्चा दूध यानी बिना उबाला हुआ दूध भी लगा सकते हैं।
सेब
आपको अपने खाने में रोजाना एक सेब जरूर शामिल करना चाहिए। साथ ही आप सेब को पीसकर उसमें से रस निकालकर अपने चेहरे पर लगा सकते हैं। सेब से सिरका भी बनता है, जो चेहरे के लिए बहुत अच्छा होता है।
खाना खजाना / शौर्यपथ /गर्मियों में बेल का शरबत बेहद फायदेमंद होता है। इसमें प्रोटीन, फॉस्फोरस, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैल्शियम, फैट, फाइबर, विटामिन-सी होता है। इस शरबत को आप सुबह खाली पेट या फिर दोपहर में खाने के 2-3 घंटे बाद पी सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे बनता है बेल का शरबत...
सामग्री :
1 पका बेल
150 ग्राम शक्कर/गुड़
1 लीटर पानी
सेंधा नमक (स्वादानुसार)
½ टीस्पून भूना जीर पाउडर
¼ टीस्पून काली मिर्च पाउडर
2 टीस्पून नींबू का रस
4 नींबू स्लाइसेस
10-12 पूदीने की पत्तियां
विधि बेल को अच्छे से धो लें और उसे तोड़ कर गूदा निकाल लें। गूदे को आधे लीटर पानी में करीब 1 घंटे के लिए भिगोकर रख दें। 1 घंटे बाद मैशर से या फिर अपने हाथों से अच्छी तरह मैश करें। बीज और रेशा, जब गूदे से अलग हो जाएं तो उसे छानने वाली छलनी से छान लें। बचे हुए पानी में शक्कर या गुड़ घोलें और छाने हुए बेल के रस में मिलाकर सर्विंग जार में भर दें। इसके बाद शरबत में जीरा पाउडर, काली मिर्च पाउडर, सेंधा नमक और नींबू का रस डालकर अच्छी तरह से मिलाएं। फिर पुदीने की पत्तियों को हाथों से मसलकर शरबत में डाल दें। बेल का शरबत तैयार है, अब इसे सर्विंग ग्लास में डालें और नींबू स्लाइसेस और अपनी इच्छा के अनुसार आइस क्यूबस डालकर ठंडा सर्व करें।
टिप्स
शरबत को आप मिक्सर या जूसर में भी बना सकते हैं, लेकिन मैशर अच्छा ऑप्शन है। शक्कर और गुड़ का इस्तेमाल कम से कम करें और छलनी के बजाय बीज और रेशे को निकालने के लिए हाथों का प्रयोग करें, ताकि शरबत गूदे वाला बने।
खाना खजाना / शौर्यपथ /आज हम आपको घर में आसानी से बनाई जा सकने वाली मिठाई छेना केसरी के बारे में बता रहे हैं। इस मिठाई की सबसे अच्छी बात यह है कि आप इसे गुड़ में बनाकर भी इसकी गुडनेस बढ़ा सकते हैं-
सामग्री :
आधा लीटर दूध
1 छोटा चम्मच नींबू का रस
चीनी स्वादानुसार
केसर एक चुटकी
आधा कटोरी किशमिश और कटे हुए काजू
खानेवाला नारंगी रंग (इच्छानुसार)
कुछ बादाम सजावट के लिए
विधि :भारी तले के बर्तन में दूध को मीडियम आंच पर उबलने के लिए रखें। एक उबाल आने पर इसमें नींबू का रस और चीनी डाल दें। दूध फटने तक अच्छी तरह चलाते रहें। अब इसमें केसर डालें और दूध को तब तक चलाएं जब तक इसका पानी सूख नहीं जाता। बचे गाढ़े दूध को अच्छी तरह फेंटें। फिर किशमिश और कटे हुए काजू मिलाकर आंच बंद कर दें। ठंडा होने के बाद इसे 20 मिनट तक फ्रिज में रखें। केसर और किशमिश से सजाकर छेना केसरी सर्व करें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
