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June 01, 2026
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सेहत /शौर्यपथ / कई बार ऐसा होता है कि बहुत ज्यादा व्यायाम और डाइटिंग करने के बाद भी आपका वजन कम नहीं हो पाता। ऐसे में आप सोचने लग जाते हैं कि आखिर आप ऐसी क्या कमी कर रहे हैं, जिससे आपका वजन कम नहीं हो पा रहा है। आइए, जानते हैं किन तरीकों से आप जल्दी वजन कम कर सकते हैं-
खाने में कम कर करें तेल और घी की मात्रा
अगर वजन कम करना चाहते हैं, तो सबसे पहले तेल खाना कम करें। ऑयल के हेल्दी विकल्प लेना बेहतर आइडिया है। एक चम्मच घी या तेल में 135 कैलोरी होती है, जो कि मैनेजेबल है। वजन कम करने के लिए आपको 1200 कैलरी प्रति दिन का बैलेंस बनाना होता है।
ब्राउन राइस खाना शुरू करें
भले ही सफेद चावल आपको कितने भी पसंद हों, अगर आप वजन कम कर रही हैं तो इनका डायट में रहना बिल्कुल सही नहीं है। बेहतर होगा कि आप ब्राउन राइस लेना शुरू करें इसके आधे कप में 133 कैलरीज होती हैं वहीं वाइट राइस में 266 कैलरीज होती हैं।
अपने खाने की मात्रा सुनिश्चित करें
दूसरी सबसे जरूरी बात ध्यान रखें कि जब आप वजन कम करने के लिए कुछ खुद को कुछ चीजें खाने से रोकते हैं, तो इसका असर आपकी ऊर्जा पर पड़ता है और किसी दिन रोकते-रोकते आप ज्यादा खा लेते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप ये जरूर ध्यान रखें कि कितनी मात्रा में इसे खा रहे हैं।
खाने को कई हिस्सों में खाएं
दिन में दो या तीन बार खाना खाने के बजाय खाने थोड़ा-थोड़ा खाना छह बार मं खाएं। स्नैक्स लेना बंद न करें बल्कि फ्राई के बजाय बेक या एयर फ्राई करें।


खाने के बाद वॉक करना न भूलें
बहुत से लोग खाना खाने के बाद वॉक नहीं करते, अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो खाने के बाद वॉक जरुर करें।

 

शौर्यपथ / एक अध्ययन के अनुसार कुछ लोग जो रुमेटाइड गठिया जैसे विभिन्न सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली वाले विकारों के इलाज के लिए मेथोट्रेक्सेट लेते हैं, उनमें कोविड-19 टीके के लिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कमजोर हो सकती है।
एनल्स ऑफ द रूमेटिक डिजीज नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में यह जानकरी दी गयी है। अध्ययन के अनुसार फाइजर-बायोएनटेक एमआरएनए कोविड-19 टीके के प्रति मरीजों की प्रतिक्रियाओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया और अनुसंधानकर्ताओं ने प्रत्येक रोगी में टीके से बने एंटीबॉडी की माप की। शरीर में टीका लगने के बाद एंटीबॉडी बनने लगती हैं।
हालांकि, अमेरिका में एनवाईयू ग्रॉसमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन और एनवाईयू लैंगोन हेल्थ के अनुसंधानकर्ताओं ने आगाह किया कि मेथोट्रेक्सेट लेने वाले रोगियों में कम एंटीबॉडी बनने का मतलब यह नहीं है कि ऐसे मरीज कोविड से सुरक्षित नहीं हैं।
अध्ययन की सह-लेखक रेबेका हैबरमैन ने कहा, यह बताना सबसे अहम है कि रोगियों को हमारे अध्ययन के निष्कर्षों को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए क्योंकि प्रतिरक्षा प्रणाली विकार वाले अधिकतर रोगी एमआरएनए टीकों पर अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह भी संभव है कि मेथोट्रेक्सेट कोविड-19 के खिलाफ पर्याप्त प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को रोकने के बदले देरी कर रहा है।

धर्म संसार /शौर्यपथ / ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अपरा, अचला एकादशी कहा जाता है। इस बार एकादशी तिथि दो दिन पड़ रही है। शनिवार और रविवार दोनों दिन एकादशी तिथि के होने के कारण लोग कंफ्यूज हैं कि एकादशी तिथि का व्रत किस दिन रखना उत्तम होगा। पंडितों की मानें तो अपरा एकादशी व्रत रविवार को करना उत्तम है। दरअसल जिस तिथि में सूर्योदय माना जाता है, उस तिथि में ही व्रत करना उत्तम है। 5 तारीख को एकादशी तिथि सूर्योदय से पहले लग जाएगी और अगले दिन रविवार को सूर्योंदय के बाद तक रहेगी, इसलिए सूर्योदय की तिथि में एकादशी व्रत करना उत्तम रहेगा।
अपरा एकादशी 2021 शुभ मुहूर्त-
एकादशी तिथि 05 जून 2021 को सुबह 04 बजकर 07 मिनट से शुरू होकर 06 जून 2021 को सुबह 06 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। अपरा एकादशी व्रत पारण शुभ मुहूर्त 07 जून 2021 को सुबह 05 बजकर 12 मिनट से सुबह 07 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।
पूजा के लिए सुबह जल्दी उठें। स्वयं की शुद्धि के बाद पूजा के लिए चौकी लगाएं। उस पर स्वच्छ आसन लगाकर भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। विष्णु जी को चंदन का टीका लगाएं। भगवान विष्णु की पूजा में उन्हें पीले फूल अर्पित करें। तुलसी जरूर चढ़ावें। सुपारी, लौंग, धूप-दीप से पूजा करें व पंचामृत, मिठाई और फलों का भोग लगाएं। अब व्रत संकल्प करें। भगवान की आरती करें। ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम:’ का जाप करें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी करें। इस दिन भोजन में केवल फलाहार लें। व्रत रखने वाले व्यक्ति को छल- कपट, झूठ और परनिंदा जैसी बातों से बचना चाहिए।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / लॉकडाउन के दौरान बेशक आप घर से बाहर नहीं जाते लेकिन इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से निकलने वाली रेज और दूसरे कारणों की वजह से बाल डैमेज हो जाते हैं. ऐसे में आपको बालों को घर पर ही स्पेशल थेरेपी दे सकते हैं. आज हम आपको घर पर कलौंजी का तेल बनाने का तरीका बता रहे हैं. कलौंजी का तेल झड़ते-टूटते बालों की समस्या को दूर करने के अलावा पतले बालों को घने भी बनाता है.
कलौंजी के तेल में क्या है गुण
कलौंजी के तेल में निगेलोन और थायमोक्विनोन मौजूद होते हैं। सिर से निकलने वाला प्राकृतिक तेल यानी सीबम आपके सिर को नमीयुक्तक रखता है। लेकिन कई लोगों में इसका उत्पालदन कम होता है, जिससे बाल रूखे बन जाते हैं। ऐसे में कलौंजी का तेल सिर की त्वलचा को नमी पहुंचाकर बालों की कंडीशनिंग करता है। कलौंजी के तेल में एंटी-इंफ्लामेटरी, एंटी फंगल और ऐंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो कि हर तरह के बैक्टीरिया और गंदगी से सिर की रक्षा करती है। यदि आपको रूसी की समस्यां है, तो यह तेल उसमें भी बेहद असरदार साबित होता है।
सामग्री :1 बड़ा चम्मच कलौंजी
1 बड़ा चम्मच मेथी दाना
200 मिली नारियल का तेल
50 मिली अरंडी का तेल
कांच का बर्तन
विधि- कलौंजी और मेथी के दानों को पाउडर में पीस लें। अब इस पाउडर को ग्लास कंटेनर में डालें। नारियल तेल और अरंडी का तेल डालकर मिक्स। करें। अब कंटेनर को बंद करें और इसे सूरज की रोशनी में रखें। इसे 2 से 3 सप्ताह तक रखें। हर दो दिन में तेल को हिलाते रहें और 2-3 सप्ताह के बाद इसे बालों में लगाएं। अच्छे3 रिजल्ट के लिए सप्ताह में एक या दो बार इस तेल को लगाएं।

शौर्यपथ / हर साल 4 जून को राष्ट्रीय पनीर दिवस मनाया जाता है। ऐसे में आज के खास दिन पनीर से बनी हुई एक हेल्दी और टेस्टी डिश चीज मैकरोनी घर पर बनाकर आप बच्चों को टेस्टी सरप्राइज दे सकते हैं। चीज मैकरोनी बच्चे-बड़े सभी को खाना बहुत अच्छा लगता है। इस रेसिपी को आप नाश्ते में भी बड़ी आसानी से बना सकते हैं। तो आइए जान लेते हैं कैसे बनाई जाती है चीज मैकरोनी।

चीज मैकरोनी बनाने के लिए सामग्री-
-मैकरोनी- 2 कप
-प्याज- 1
-शिमला मिर्च 1
-अदरक- 1 इंच का टुकड़ा बारीक कटा हुआ
-मक्खन- 2 चम्मच
-चीज़ क्यूब्स- 4
-white sauce- 2 कप
-हरी मिर्च- 2 बारीक कटी हुई या स्वादानुसार
-सफेद मिर्च पाउडर- 1/2 चम्मच
-मैदा- 2 छोटे चम्मच
-दूध- 2 कप
-नमक- स्वादानुसार
चीज मैकरोनी बनाने की विधि-
चीज मैकरोनी बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन को गर्म करने के लिए गैस पर रख दें।अब आप इस पैन में मक्खन डालकर इसे गरम करें। अब पैन में मैदा डालकर इसे 1-2 मिनट तक धीमी आंच पर भूनें। मैदा भूनने के बाद आप इसमें दूध डालें और इसे लगातार हिलाते रहें नहीं तो मैदा की गांठ बन जाएगी और दूध को धीमी आंच पर गैस पर तब तक पकाएं जब तक ये गाढ़ा ना हो जाए।

दूध के गाढ़ा होने के बाद आप इसमें 3 चीज़ क्यूब्स कद्दूकस करके डालें। चीज़ जैसे इस मिश्रण में डलने के बाद पिघलने लगे आप इसमें बाकी की सारी सामग्री मैकरोनी, बारीक लंबा कटा हुआ प्याज, शिमला मिर्च इसमें डाल दें। इसी मिश्रण में आप बारीक कटी हरी मिर्च, नमक, बारीक कटा हुआ अदरक या कद्दूकस किया हुआ अदरक, सब डालकर इसे अच्छी तरह से मिक्स कर लें।
अब आप इसे धीमी आंच पर 2-3 मिनट के लिए पकाएं। और फिर आप इसे गैस से नीचे उतार लें। अब आप एक माइक्रोवेव वाला बर्तन लें और उसमें तेल लगाकर उसे अंदर से चिकना कर लें फिर आप इसमें पैन वाला सारा मिश्रण डाल दें। अब 4 चीज़ क्यूब्स में से जो एक चीज क्यूब बचा है उसे कद्दूकस करके इस मिश्रण के ऊपर डाल दें। फिर इस बर्तन को आप माइक्रोवेव 3-5 मिनट के लिए रख दें। चीज़ मैकरोनी बनकर तैयार है।

 

ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / कई बार ऐसा होता है कि हमारे चेहरे पर ग्लो तो होता है लेकिन दाग-धब्बे और झाईयां हमारे चेहरे की नेचुरल सुंदरता को कुछ कम कर देते हैंl वहीं, दाग-धब्बे दूर करने के लिए आप कई जतन करते हैं लेकिन यह जिद्दी निशान आपके चेहरे से हटने का नाम ही नहीं लेतेl आज हम आपको इस समस्या से निजात दिलाने के लिए एक ऐसा उपाय बता रहे हैं जिससे आपके चेहरे के दाग-धब्बे जरूर साफ हो जाएंगेl शहद सेहत के लिहाज से ही नहीं बल्कि ब्यूटी सीक्रेट्स में भी इस्तेमाल किया जाता हैl आइए, जानते हैं इसके गुण-
इन गुणों से भरा होता है शहद
शहद में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन ए, बी, सी, आयरन, मैगनीशियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सोडियम आदि गुणकारी तत्व होते हैं। यह कार्बोहाइड्रेट का भी प्राकृतिक स्रोत है, इसलिए इसके सेवन से शरीर में शक्ति, स्फूर्ति और ऊर्जा आती है और यह रोगों से लड़ने के लिए शरीर को शक्ति देता है।
पुराने दाग-धब्बों पर कारगर
आप कच्चे शहद को जले हुए निशान पर लगा सकती हैं, क्योंकि शहद में एंटीसेप्टिक और हीलिंग गुण होते हैं। नियमित रूप से जले पर शहद लगाने से दाग जल्दो गायब हो जाते हैं। आप शहद को मलाई, चंदन और बेसन के साथ मिलाकर फेस पैक के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह मास्क चेहरे की अशुद्धियों को हटाता है और त्वचा को मुलायम और चिकना भी बनाता है। आपके चेहरे पर अगर कोई पुराना दाग या झाईयां हैं, तो आप इस उपाय को फॉलो करके उनसे निजात पा सकते हैंl

खाना खजाना /शौर्यपथ / चाय समोसे का साथ बहुत पुराना है। दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे से लगते हैं। यूं तो आपने समोसे के कई अलग-अलग स्वाद चखे होंगे लेकिन कॉकटेल समोसे का स्वाद सबसे अलग है। तो आइए देर किस बात की जानते हैं कैसे बनाए जानते हैं बच्चों और बड़ों के फेवरेट कॉकटेल समोसे।
कॉकटेल समोसे बनाने की विधि-
कॉकटेल समोसे बनाने के लिए सबसे पहले एक बाउल में मैदा और गेहूं का आटा बराबर मात्रा में मिलाकर उसमें चीनी पाउडर, नमक, तेल और पानी डाल कर नरम आटे की तरह गूंथकर 30 मिनट के लिए एक तरफ रख दें। अब एक पैन में तेल गर्म करके उसमें धनिए के बीज डालकर हिलाएं। अब 1 टेबलस्पून अदरक-लहसुन का पेस्ट डाल कर 2 से 3 मिनट तक भूनें। फिर इसमें 1 टीस्पून हरी मिर्च अच्छी तरह मिलाएं और फिर प्याज डालकर अच्छी तरह पकाएं। अब इसमें हरे मटर मिला कर 3 से 5 मिनट तक पकने दें। इसके बाद लाल मिर्च, आमचूर और नमक मिक्स करें। फिर 500 ग्राम उबले और मैश किए आलू मिल कर 3 से 5 मिनट के लिए पकाएं।
जब यह पक जाएं तो इसमें गर्म मसाला और धनिया मिलाएं और एक तरफ रख दें। अब गूंथे हुए आटे में से कुछ हिस्सा लेकर लोई बनाएं और उस पर गेंहू का आटा छिड़कें। इसे बेलन के साथ रोटी की तरह बेल लें। फिर इसे आयताकार देने के लिए सभी साइड से काटें। तवा गर्म करके इस शीट को 10 सेकंड के लिए सेंके। अब इसे पलट कर दोबारा 10 सेंकड सेंके और फिर सेंक से हटा कर बोर्ड पर रखें। कटोरी में 2 टेबलस्पून मैदा और 2 टेबलस्पून पानी डाल कर गाढ़ा घोल तैयार करें।
अब तैयार किए हुए आलू मिश्रण को शीट पर रखें और त्रिकोण की शेप में रोल कर लें। अब इसके किनारों को पूरी तरह से बंद करने के लिए इस पर तैयार किया हुआ पेस्ट लगाएं और बंद करें। कढ़ाई में पर्याप्त तेल गर्म करके इसे सुनहरा भूरा और क्रिस्पी होने तक फ्राई करें। फिर इसे टिशू पेपर पर निकालें। आपके कॉकटेल समोसे बन कर तैयार हैं। अब इसे सॉस या चटनी के साथ परोसें।

मुख्यमंत्री ने किया स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश स्कूल मुंगेली का लोकार्पण
राज्य में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल की संख्या बढ़कर हुई 171

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय से वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश स्कूल मुंगेली का लोकार्पण किया। इसका निर्माण लगभग 5 करोड़ रूपए की राशि से किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जिला प्रशासन मुंगेली द्वारा प्रकाशित कैरियर मार्गदर्शिका का विमोचन किया और स्कूली बच्चों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश स्कूल मुंगेली के छात्र-छात्राओं से बात-चीत कर उन्हें प्रोत्साहित भी किया। वर्चुअल कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक भी जुड़े। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू तथा प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री बघेल ने वर्चुअल लोकार्पण समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए कृत-संकल्पित है। सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास भी कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के गरीब से गरीब बच्चे को निजी स्कूलों की तरह सुविधाएं मिले, वे भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर भावी प्रतियोगिताओं के लिए स्वयं को तैयार कर सकें, इसके लिए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की स्थापना की गई है। राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में अवसरों की असमानता को दूर करने के लिए हमारी सरकार ने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की श्रृंखला स्थापित करने का जो काम शुरू किया था, आज हमने उसी दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि पिछले साल हमने राज्य में 52 स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश स्कूल स्थापित किए थे। अब इस साल 119 और स्कूल शुरू किए जा रहे हैं। इस प्रकार राज्य में ऐसे विशेष स्कूलों की संख्या बढ़कर अब 171 हो चुकी है।
मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर आगे कहा कि हमारा उद्देश्य बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा देने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व का निर्माण भी करना है। इसमें स्कूल के परिवेश को इस तरह विकसित किया जा रहा है, जिससे हर बच्चा अपने व्यक्तित्व का चहुंमुखी विकास कर सकें। उन्होंने बताया कि इसके तहत राज्य में सत्र 2020-21 में संचालित 52 स्कूलों में कक्षा पहली से 12वीं तक 20 हजार से अधिक बच्चों ने प्रवेश लिया था। नये खोले जा रहे 119 स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कोरोना-काल में सभी क्षेत्रों के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हुई। राज्य सरकार ने पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे व्यवस्था की कि बच्चों को सतत रूप से शिक्षा मिलती रहे। कोविड-काल में बहुत से बच्चों ने अपने अभिभावकों को खो दिया है। कोरोना ने उनकी शिक्षा और भविष्य को लेकर भी संकट खड़ा कर दिया है। राज्य सरकार ने ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उनके शिक्षा और भविष्य निर्माण की जिम्मेदारी उठाई है। इसके लिए ‘छत्तीसगढ़ महतारी दुलार योजना’ शुरु की गई है। इसके अंतर्गत बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने के साथ-साथ छात्रवृत्ति भी दी जाएगी। कोरोना से अपने अभिभावकों को खो देने वाले बच्चे यदि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें प्रवेश में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि वर्तमान की आवश्यकता के अनुरूप बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने में स्वामी आत्मानंद स्कूल का अहम योगदान होगा। इसी तरह स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि हमारी सरकार बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सतत् प्रयासरत है। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने मुंगेली में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल के खुलने पर बधाई और शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को विधायक धरमजीत सिंह, विधायक पुन्नूलाल मोहले तथा सांसद अरूण साव ने भी सम्बोधित किया।

आस्था / शौर्यपथ /हिंदू धर्म में प्रकृति के सभी तत्वों की पूजा, प्रार्थना का प्रचलन और महत्व है, क्योंकि हिंदू धर्म मानता हैं कि प्रकृति से ही हमारा जीवन संचालित होता है। इसीलिए प्रकृति को देवता, भगवान और पितृदेव माना गया है। हिन्दू संस्कृति के अधिकतर तीज त्योहार और पर्व परंपराएं प्रकृति से ही जुड़ी हुई हैं। आओ जानते हैं इस संबंध में 15 तथ्‍य।
1. मौसम परिवर्तन की सूचना देते त्योहार : वर्ष में 6 ऋतुएं होती हैं- 1. शीत-शरद, 2. बसंत, 3. हेमंत, 4. ग्रीष्म, 5. वर्षा और 6. शिशिर। ऋतुओं ने हमारी परंपराओं को अनेक रूपों में प्रभावित किया है। बसंत, ग्रीष्म और वर्षा देवी ऋतु हैं तो शरद, हेमंत और शिशिर पितरों की ऋतु है। वसंत में नववर्ष, धुलैंडी और नवरात्रि, ग्रीष्म में देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा, वर्षा में श्रावण सोमवार, शरद में शारदीय नवरात्रि और देवोत्थान एकादशी, हेमंत में दीपावली और गोवर्धन पूजा, शिशिर में मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि मौसम परिवर्तन की सूचना देते हैं।
2. नवसंवत्सर : नवसंवत्सर की शुरुआत चैत्र प्रतिपदा से सूर्य के गति बदलने से होती है। महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा, आंध्रप्रदेश में युगदि या उगादि तिथि, सिंधु प्रांत में 'चेटी चंडो' और कश्मीर में यह पर्व 'नौरोज' के नाम से मनाया जाता है। यह प्रकृति में नवजीवन का पर्व है।

3. संक्रांति दिवस : सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहते हैं। एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति की अवधि ही सौर मास है। वैसे तो सूर्य संक्रांति 12 हैं, लेकिन इनमें से 4 संक्रांति ही महत्वपूर्ण हैं जिनमें मेष, तुला, कर्क और मकर संक्रांति हैं। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होता है और कर्क संक्रांति से दक्षिणायन।
4. छठ पूजा : छठ पूजा अथवा छठ पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। षष्ठी तिथि (छठ) एक विशेष खगोलीय अवसर है। उस समय सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती हैं। उसके संभावित कुप्रभावों से मानव की यथासंभव रक्षा करने का सामर्थ्‍य इस परंपरा में है। छठ पर्व के पालन से सूर्य (तारा) प्रकाश (पराबैंगनी किरण) के हानिकारक प्रभाव से जीवों की रक्षा संभव है।
5. बसंत पंचमी : जब फूलों पर बहार आ जाती है, खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता है, जौ और गेहूं की बालियां खिलने लगती हैं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाते हैं और हर तरफ तितलियां मंडराने लगती हैं, तब वसंत पंचमी का त्योहार आता है। वसंत ऋतु में मानव तो क्या, पशु-पक्षी तक उल्लास भरने लगते हैं। यह प्रेम इजहार का दिवस भी है।

6. गंगा दशहरा : भारतीय धार्मिक पुराणों के अनुसार गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन स्वर्ग से गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था इसलिए यह महापुण्यकारी पर्व माना जाता है।
7. धुलेंडी और होली : होली-धुलेंडी का त्योहार भी मौसम परिवर्तन की सूचना देता है। शरद ऋतु की समाप्ति और बसंत ऋतु के आगमन का यह काल पर्यावरण और शरीर में बैक्टीरिया की वृद्धि को बढ़ा देता है। इसीलिए आग और साफ सफाई का महत्व बढ़ जाता है।

8. आंवला नवमी पूजा : महिलाओं द्वारा यह नवमी पुत्ररत्न की प्राप्ति के लिए मनाई जाती है। आंवला नवमी को अक्षय नवमी के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था। आंवले का हमारे जीवन में बहुत महत्व है यह निरोगी बनाकर लंबी आयु प्रदान करता है।
9. वट सावित्री : वट सावित्री व्रत पति की लंबी आयु, सौभाग्य, संतान की प्राप्ति की कामना पूर्ति के लिए किया जाता है। वट को 'बरगद' भी कहते हैं। इस वृक्ष में सकारात्मक शक्ति और ऊर्जा का भरपूर संचार रहता है। इसके सान्निध्य में रहकर जो भी मनोकामना की जाती है वह पूर्ण हो जाती है। स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण के अनुसार यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है।
10. तुलसी विवाह और पूजा : भारत में तुलसी का महत्वपूर्ण स्थान है। देवता जब जागते हैं तो सबसे पहली प्रार्थना हरिवल्लभा तुलसी की ही सुनते हैं इसीलिए तुलसी विवाह को देव जागरण के पवित्र मुहूर्त के स्वागत का सुंदर उपक्रम माना जाता है। कार्तिक मास में विष्णु भगवान का तुलसीदल से पूजन करने का माहात्म्य अवर्णनीय है।

11. शीतलाष्टमी : माता शीतला का पर्व किसी न किसी रूप में देश के हर कोने में होता है। कोई माघ शुक्ल की षष्ठी को, कोई वैशाख कृष्ण पक्ष की अष्टमी को तो कोई चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाते हैं। हिन्दू व्रतों में केवल शीतलाष्टमी का व्रत ही ऐसा है जिसमें बासी भोजन किया जाता है। शीतला माता का मंदिर वटवृक्ष के समीप ही होता है। शीतला माता के पूजन के बाद वट का पूजन भी किया जाता है।
12. अश्वत्थोपनयन व्रत : इसे अश्वत्थ उपनयन व्रत भी कहते हैं। अश्‍वत्थ अर्थात पीपल का वृक्ष। सर्वाधिक ऑक्सीजन निस्सृत करने के कारण इसे प्राणवायु का भंडार कहा जाता है। सबसे अधिक ऑक्सीजन का सृजन और विषैली गैसों को आत्मसात करने की इसमें अकूत क्षमता है। इसीलिए बुरे शकुनों (अपशकुनों), आक्रमणों, महामारियों, कुष्ठ जैसे रोगों में अश्वत्व-पूजा की जाती है। उपनयन संस्कार से जुड़े अश्वत्थ वृक्ष की पूजा वैशाख माह में करते हैं।
13. गोवर्धन और गाय पूजा : कार्तिक शुक्ल दूज को गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की परंपरा है। यह त्योहार भी प्रकृति पूजा से जुड़ा हुआ है। श्रीकृष्‍ण ने इंद्र पूजा को बंद करवा कर इसी की पूजा करने को कहा था। श्रीकृष्‍ण के समय भी गाय और गोवर्धन पूजा का प्रचलन बढ़ा। कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसके समीप विराजमान कृष्ण के सम्मुख गाय तथा ग्वाल-बालों की रोली, चावल, फूल, जल, मौली, दही तथा तेल का दीपक जलाकर पूजा और परिक्रमा की जाती है। ग्रामीण क्षेत्र में अन्नकूट महोत्सव इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन नए अनाज की शुरुआत भगवान को भोग लगाकर की जाती है।
14. अन्य पूजा : इसी प्रकार से आम, केले, शमी, कैथ, बिल्व, अशोक, नारियल, अनार, नीम आदि वृक्षों से जुड़े भी तीज त्योहार है।

15. यज्ञ और प्रकृति : हिंदू धर्मानुसार पांच तरह के यज्ञ होते हैं जिनमें से दो यज्ञ- देवयज्ञ और वैश्वदेवयज्ञ प्रकृति को समर्पित है। देवयज्ञ से जलवायु और पर्यावरण में सुधार होता है तो वैश्वदेवयज्ञ प्रकृति और प्राणियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का तरीका है। हवन करने को 'देवयज्ञ' कहा जाता है। हवन में सात पेड़ों की समिधाएँ (लकड़ियाँ) सबसे उपयुक्त होतीं हैं- आम, बड़, पीपल, ढाक, जाँटी, जामुन और शमी। हवन से शुद्धता और सकारात्मकता बढ़ती है। रोग और शोक मिटते हैं। वैश्वदेवयज्ञ को भूत यज्ञ भी कहते हैं। पंच महाभूत से ही मानव शरीर है। सभी प्राणियों तथा वृक्षों के प्रति करुणा और कर्त्तव्य समझना उन्हें अन्न-जल देना ही भूत यज्ञ या वैश्वदेव यज्ञ कहलाता है। अर्थात जो कुछ भी भोजन कक्ष में भोजनार्थ सिद्ध हो उसका कुछ अंश उसी अग्नि में होम करें जिससे भोजन पकाया गया है। फिर कुछ अंश गाय, कुत्ते और कौवे आदि प्राणियों को दें।

शौर्यपथ / प्याज को ग्रामीण क्षेत्रों में कांदा भी कहते हैं। अंग्रेजी में इसे ओन्यन या अन्यन कहते हैं। यह कंद श्रेणी में आता है जिसकी सब्जी भी बनती है और इसे सब्जी बनने में मसालों के साथ उपयोग भी किया जाता है। इसे संस्कृत में कृष्णावल कहते थे। हालांकि आजकल यह शब्द प्रचलन में नहीं है। कृष्‍णावल कहने के पीछे एक रहस्य छुपा हुआ है। आओ जानते हैं कि प्याज को क्यों कहते हैं कृष्णावल।
1. दक्षिण भारत में खासकर कर्नाटक और तमिलनाडु के ग्रामीण क्षेत्रों में प्याज को आज भी कृष्णावल नाम से ही जाना जाता है।
2. इसे कृष्णवल कहने का तात्पर्य यह है कि जब इसे खड़ा काटा जाता है तो वह शंखाकृती यानी शंख के आकार में कटता है। वहीं जब इसे आड़ा काटा जाता है तो यह चक्राकृती यानी चक्र के आकार में कटता है।
3. आप जानते ही हैं कि शंख और चक्र दोनों श्रीहरि विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के आयुधों से संबंधित हैं।
4. शंख और चक्र के कारण ही प्याज को कृष्णावल कहते हैं। कृष्ण और वलय शब्दों को मिलाकर बना है कृष्णावल शब्द है।
5. कृष्णावल कहने के पीछे सिर्फ यही एक कारण नहीं है बल्कि यदि आप प्याज को उसकी पत्तियों के साथ उलटा पकड़ेंगे तो वह गदा का भी रूप ले लेता है। यह भी रोचक है कि बगैर पत्तों के वह पद्म यानी कमल का आकार लेता है। गदा और पद्म भी भगवान विष्णु चक्र और शंख के साथ धारण करते हैं।...तो है ना रोचक जानकारी।
उल्लेखनीय है कि हाल ही है इस संबंध में यह जानकारी सोनी टीवी पर प्रसारित 'देवी अहिल्या' धारावाहिक में बताई गई है। अहिल्या से उनकी सास गौतमा रानी ने पूछा था कि घर में कृष्णावल नाम की कौन सी चीज होती है।

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