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शौर्यपथ / खगोलीय घटनाओं के दीवाने लोगों को बीत रहा साल अद्भुत नजारे का तोहफा देने जा रहा है। नासा के अनुसार, 1623 के बाद यानी करीब 400 साल बाद 21 दिसंबर 2020, दिन सोमवार को आसामन में दो ग्रहों वृहस्पति और शनि का संयोजन दिखेगा। भारतीय ज्योतिष में इस अद्भुत घटना को गुरु और शिन का महा मिलन कहा गया है तो नासा (NASA) ने इस 'क्रिसमस स्टार' नाम दिया है।
नासा के अनुसार, गुरु और शनि का यह महामिलन अगले एक-दो सप्ताह तक आसमान में दृश्य रहेगा। लेकिन भारतीय समयानुसार लोग अपनी आंख से ही 21 दिसंबर की शाम को सूरज ढलते ही पश्चिम दिशा में देख सकेंगे। इस महामिलन दोनों ग्रह एक-दूसरे के पार करते दिखेंगे।
वृहस्पति जहां सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है वहीं शनि नीले रंग की वलय वाला ग्रह है। सोमवार की शाम को दोनों ग्रह एक दूसरे से मिलते दिखाई देंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, सूर्य की परिक्रमा करते हुए दोनों ग्रह 20 साल में एक दूसरे के करीब आते हैं लेकिन करीब 400 साल बाद ऐसा होगा जब दोनों ग्रह एक-दूसरे के बेहद समीप दिखाई देंगे।
वैज्ञानिकों के अनुसार, गुरु और शनि के ग्रेट कंजक्शन की इस घटना के समय वृहस्पति की पृथ्वी से दूरी लगभग 5.924 एस्ट्रेनॉमिकल यूनिट होगी, जबकि शनि की दूरी 10.825 एस्ट्रेनॉमिकल यूनिट होगी।
ऐसे देखें वृहस्पति और शनि का महा मिलन:
गुरु और शिन के संयोजन को आप बिना किसी टेलीस्कोप की मदद से भी देख सकेंगे। इसके लिए आपको बिल्डिंगों और पेड़ो से दूसर खुले आसमान के नीचे या पास की सबसे ऊची छत पर जाना होगा। यहां से आप पश्चिम दिशा में सूर्यास्त के साथ ही दो ग्रहों का मिलन देख सकेंगे। इन ग्रहों को और भी करीब से देखना चाहें तो आप अच्छी क्वालिटी की टेलीस्कोप के जरिए इसे देख पाएंगे।
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू मान्यता के अनुसार चार धाम की यात्रा का बहुत महत्व है, इन्हें तीर्थ भी कहा जाता है। आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा परिभाषित चार वैष्णव तीर्थ हैं। जहां हर हिंदू को अपने जीवन काल मे अवश्य जाना चाहिए, जो हिंदुओं को मोक्ष प्राप्त करने में मदद करेंगे। इसमें उत्तर दिशा मे बद्रीनाथ, पश्चिम की ओर द्वारका, पूर्व दिशा मे जगन्नाथ पुरी और दक्षिण मे रामेश्वरम धाम है। ये चारों ही धाम चार दिशाओं में स्थित है। उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण रामेश्वर, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारिका। प्राचीन समय से ही चारधाम तीर्थ के रूप मे मान्य थे, लेकिन इनकी महिमा का प्रचार आद्यशंकराचार्यजी ने किया था। माना जाता है, उन्होंने चार धाम व बारह ज्योर्तिलिंग को सुचीबद्ध किया था।
चारों धाम चार दिशा में स्थित करने के पीछे जो सांस्कृतिक लक्ष्य था, वह यह कि इनके दर्शन के बहाने भारत के लोग कम से कम पूरे भारत का दर्शन कर सकें। वे विविधता और अनेक रंगों से भरी भारतीय संस्कृति से परिचित हों, वे अपने देश की सभ्यता और परंपराओं को जानें।
किस धाम की क्या विशेषता
बद्रीनाथ धाम : बद्रीनाथ उत्तर दिशा मेंओं का मुख्य यात्राधाम माना जाता है। मन्दिर में नर-नारायण की पूजा होती है और अखण्ड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है। यह भारत के चार धामों में प्रमुख तीर्थ-स्थल है। प्रत्येक हिन्दू की यह कामना होती है कि वह बद्रीनाथ का दर्शन एक बार अवश्य ही करे। यहां पर यात्री तप्तकुण्ड में स्नान करते हैं। यहां वनतुलसी की माला, चने की कच्ची दाल, गिरी का गोला और मिश्री आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
कहां है : उत्तर दिशा में हिमालय पर अलकनंदा नदी के पास
मूर्ति: विष्णु की शालिग्राम शिला से बनी चतुर्भुज मूर्ति। इसके आसपास बाईं ओर उद्धवजी तथा दाईं ओर कुबेर की प्रतिमा।
रामेश्वर धाम: रामेश्वर में भगवान शिव की पूजा लिंग रूप में की जाती है। यह शिवलिंग बारह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। भारत के उत्तर मे काशी की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है। रामेश्वरम चेन्नई से लगभग सवा चार सौ मील दक्षिण-पूर्व में है। यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख आकार द्वीप है।
कहां है: दक्षिण दिशा में तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में समुद्र के बीच रामेश्वर द्वीप।
मूर्ति: शिवलिंग
पुरी धाम: पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यह भारत के ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है। इस मंदिर को हिन्दुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है। इस मंदिर का वार्षिक रथ यात्रा उत्सव प्रसिद्ध है। यहां मुख्य रूप से भात का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
कहां है: पूर्व दिशा में उड़ीसा राज्य के पुरी में।
मूर्ति: विष्णु की नीलमाधव प्रतिमा जो जगन्नाथ कहलाती है। सुभद्रा और बलभद्र की मूर्ति भी हैं।
द्वारिका धाम : द्वारका भारत के पश्चिम में समुद्र के किनारे पर बसी है। आज से हजारों वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण ने इसे बसाया था। कृष्ण मथुरा में उत्पन्न हुए, गोकुल में पले, पर राज उन्होने द्वारका में ही किया। यहीं बैठकर उन्होने सारे देश की बागडोर अपने हाथ में संभाली। पांडवों को सहारा दिया। कहते हैं असली द्वारका तो पानी में समा गई, लेकिन कृष्ण की इस भूमि को आज भी पूज्य माना जाता है। इसलिए द्वारका धाम में श्रीकृष्ण स्वरूप का पूजन किया जाता है।
कहां है : पश्चिम दिशा में गुजरात के जामनगर के पास समुद्र तट पर।
मूर्ति: भगवान श्रीकृष्ण।
सेहत / शौर्यपथ / महिलाओं में प्रजनन क्षमता का कम होना और गर्भधारण न कर पाने की समस्या काफी तेजी से बढ़ रही है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनी खराब जीवन शैली के चलते हम अपने खानपान पर खास ध्यान नहीं दे पाते हैं। जिसके चलते हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। जिससे हम कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शिकार होने लगते हैं। प्रजनन क्षमता कम होने की समस्या महिला व पुरुष दोनों को हो सकती है।
हालांकि, इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। लेकिन हमारे पास कुछ ऐसा है जो इस समस्या से राहत पाने में आपकी कुछ मदद कर सकता है। वह है काली किशमिश या मुनक्?का क्या आप जानती हैं कि काली किशमिश या मुनक्का आपकी बांझपन की समस्या को दूर करने में मदद कर सकता है, और गर्भधारण में मददगार हो सकता है। चलिए बिना देर किए हम आपको बताते हैं कि कैसे काली किशमिश या इसका पानी गर्भधारण में आपकी मदद कर सकता है।
क्या है बांझपन का कारण
महिलाओं में गर्भधारण न कर पाने की समस्या का एक मुख्य कारण प्रजनन क्षमता का कम होना या बांझपन है। जिसके लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। जिसमें आपका खानपान और कुछ अन्य कारक शामिल हैं।
महिलाओं के शरीर में हार्मोनल संतुलन प्रजनन क्षमता के कम होने का एक महत्वपूर्ण कारण है। कई महिलाओं में अंडे समय पर नहीं बनते हैं। साथ ही उनका ओवुलेशन भी समय पर नहीं हो पाता है। कुछ का ओवुलेशन समय पर होता तो है, लेकिन ठीक से नहीं हो पाता। कई महिलाओं में अंडाशय में अंडे बनते तो हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता सही नहीं होती है।
इसके अलावा इन दिनों महिलाओं में पीरियड्स की समस्या बहुत आम है। उन्हें समय पर पीरियड्स नहीं होते हैं, साथ ही अगर पीरियड्स होते भी हैं तो ठीक से नहीं होते हैं। इसके अलावा कई ऐसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हैं जिनके कारण महिलाओं की प्रजनन क्षमता में कमी आती है। और वह गर्भधारण नहीं कर पाती।
गर्भधारण के लिए कैसे फायदेमंद है काली किशमिश का पानी
काली किशमिश का पानी आपकी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने और गर्भधारण की समस्या से राहत पाने में आपके लिए मददगार साबित हो सकता है। क्योंकि काली किशमिश के पानी में सोडियम, पोटेशियम, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, विटामिन-ई, सी, कैल्शियम, आयरन, विटामिन-डी, मैग्नीशियम, जिंक, एंटिऑक्सीडेंट्स समेत कई तरह के पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
काली किशमिश आपकी शारीरिक कमियों को दूर करने के लिए बेहद फायदेमंद हैं। यह य़ह आपके प्रजनन की क्षमता को बेहतर बनाने में भी मदद करता है, और इसके नियमित सेवन से आप गर्भधारण कर पाने में भी सक्षम हो सकती हैं।
कैसै कर सकते हैं इस्तेमाल
रात में सोते समय 5-7 काली किशिमिश को एक कप पानी में भिगो दें।
इसे रात भर के लिए छोड़े दें।
सुबह उठकर खाली पेट किशमिश के पानी का सेवन करें।
जो मुनक्के आपने भिगोए थे आप उन्हें दिन में किसी भी समय खा सकती हैं।
ऐसा रोजाना नियमित रूप से करने से आपकी प्रजनन की क्षमता में सुधार होगा और आप जल्दी गर्भधारण करने में मदद मिलेगी।
यह भी ध्?यान रहे
गर्भधारण के लिए किशमिश के पानी का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। क्योंकि वह आपको आपकी समस्या के अनुसार इसका सेवन करने की सलाह बेहतर दे सकते हैं। क्योंकि कई बार इसका सेवन अधिक करने से आपको स्वास्थ्य संबंधी परेशानी भी हो सकती है। इसलिए पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
खाना खजाना / शौर्यपथ / आज हम आपके लिए सर्दियों की फेवरेट डिश सरसों का साग और मक्के की रोटी लेकर आए हैं। मक्के की रोटी और सरसों का साग का कॉम्?बिनेशन जबरदस्?त होता है। सरसों का साग स्?वास्?थ्?य के नजरिए से भी बेहद फायदेमंद होता है। तो लीजिए आप भी सरसों साग बनाने की विधि आज ही ट्राई करें।
सामग्री :
सरसों का साग- 500 ग्राम,
पालक– 150 ग्राम,
बथुआ– 100 ग्राम,
टमाटर– 250 ग्राम,
प्याज– 01 (बारीक कटी हुई),
लहसुन– 05 कलियां (बारीक कटी हुई),
हरी मिर्च– 02 नग,
अदरक– 01 बड़ा टुकड़ा,
सरसों का तेल– 02 बड़े चम्मच,
बटर/घी– 02 बड़े चम्मच,
हींग– 02 चुटकी,
जीरा– 1/2 छोटा चम्मच,
हल्दी पाउडर – 1/4 छोटा चम्मच,
मक्के का आटा– 1/4 कप,
लाल मिर्च पाउडर– 1/4 छोटा चम्मच,
नमक– स्वादानुसार।
विधि :
सरसों का साग बनाने के लिए सबसे पहले सरसों, पालक और बथुआ को अच्छी तरह से साफ करके धो लें। इन्हें छलनी में रख दें, जिससे पानी निथर जाए। इसके बाद इन्हें मोटा-मोटा काट लें और कुकर में एक कप पानी के साथ डालें और मध्यम आंच पर एक सीटी आने तक उबाल लें। इसके बाद कुकर को उतार कर रख दें और उसकी सीटी निकलने तक प्रतीक्षा करें। अब टमाटर और अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें और फिर उसे हरी मिर्च के साथ मिक्सी में डाल कर बारीक पीस लें। कढ़ाई में एक चम्मच तेल डालें और गरम करें। तेल गरम होने पर उसमें मक्के का आटा डालें और हल्का ब्राउन होने तक भून लें। आटे को एक प्याली में निकालने के बाद कढ़ाई में बचा हुआ तेल डालें और उसे गरम करके उसमें हींग और जीरा डाल दें और दस सेकेंड तक भून लें। उसके बाद प्याज और लहसुन डालें और हल्का गुलाबी होने तक भून लें। उसके बाद हल्दी पाउडर, टमाटर का पेस्ट और लाल मिर्च डालें और मसाले को तब तक भूनें, जब तक कि वह तेल न छोडऩे लगे। मसाले के भुनने के दौरान कुकर से साग निकाल लें और उन्हें ठंडा करके मिक्सी में दरदरा पीस लें। अब भुने हुए मसाले में पिसा साग डाल दें। साथ ही आवश्यकतानुसार पानी, मक्के का आटा और नमक भी डालें और अच्छी तरह से चला दें। इसके बाद इसे मध्यम आंच पर पकाएं और उबाल आने के 5-6 मिनट बाद तक पकाने के बाद गैस बंद कर दें।
मक्के की रोटी के बिना अधूरा है मजा
मक्?की की रोटी और सरसों का साग वैसे तो लोकप्रिय पंजाबी जायका है। मगर अब असका स्वाद हर किसी की जुबान पर चढ़ गया है। मक्का या भुट्टा में कार्बोहाइड्रेट, फोलिक एसिड, कैरोटीन, मिनरल्स, विटामिन और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे यह कई रोगों से लडऩे में सहायक होता है और शरीर को हष्ट-पुष्ट बनाता है। इसीलिए ठंड के मौसम में मक्?के की रोटी और सरसों का साग खाया जाता है। तो चलिए बनाते हैं मक्के की रोटी
सामग्री :
मक्की का आटा– 400 ग्राम,
मक्खन– 02 बड़े चम्मच,
गरम पानी– आवश्यकतानुसार,
नमक– स्वादानुसार।
विधि :
मक्?का रोटी बनाने के लिए सबसे पहले मक्के/मक्की के आटा को एक बर्तन में निकाल कर छान लें। इसके बाद आटा में स्वादानुसार नमक मिला लें और फिर गुनगुने पानी की सहायता से आटा को गूंथ लें। इसके बाद आटे को ढक कर 15-20 मिनट के लिए रख दें। इससे आटा फूल कर सेट हो जायेगा और रोटियां बेहद स्वादिष्ट बनेंगीं।मक्के की रोटियां बनाने के पहले इसे एक बार हथेलियों की सहायता से खूब अच्छी तरह से मसल लें, जिससे यह बेहद मुलायम हो जाए। जब आटा अच्छी तरह से मुलायम हो जाए, तब उसमें से लोई बनाने भर का आटा लें और उसे हथेली से दबा कर बड़ा कर लें। इसके बाद हाथों में थोड़ा पानी लगाएं और लोई को उंगलियों की सहायता से दबा कर 5-6 इंच व्यास की रोटी बना लें।अब रोटी को गरम तवा पर डालें। जब एक तरफ की रोटी सिक जाए, तो उसे पलट दें और दूसरी तरफ से भी सेक लें। इसके बाद रोटी को गैस की आंच पर साधारण रोटी की तरह घुमा-घुमाकर सेंंक लें। आपकी मक्?का की रोटी तैयार है। इसपर मक्खन या देशी घी लगाएं और गर्मा-गरम सरसों के साग के साथ आनंद लें।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी के तहत गौठान प्रारंभ किए गए हैं। सुव्यवस्थित संचालन के लिए गौठान समितियों को जिम्मेदारी दी गयी है। अब गौठान आजीविका केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे है। स्थानीय स्व सहायता समूह को रोजगार मिलने से वे आर्थिक समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने भी गौठान से जुड़कर आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ाया है। ऐसा ही एक गौठान जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा ब्लॉक के औराईकला गौठान में गांव के ही चार स्व-सहायता समूहो को काम मिल रहा है। अब उन्हें काम के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नही है। गौठान से जुड़े समूहों को मिनी राईस मिल, मशरूम उत्पादन, सब्जी-भाजी और जैविक खाद के माध्यम से रोजगार का अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
औराईकला की जय मां वैष्णो देवी महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती पार्वती साहू ने बताया कि जैविक पद्धति से खाद तैयार कर सोसायटी को अब तक गौठान के माध्यम से 48 क्विंटल जैविक खाद 8 रूपए प्रति किलो की दर से दे चुके हैं। इससे स्व सहायता समूह के सदस्यों को लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि प्रथम बार उन्होंने 40 क्विंटल जैविक खाद उद्यानिकी विभाग को सहकारी सोसायटी के माध्यम से बेचा था। आज कृषि विभाग के माध्यम से 8 क्विंटल जैविक खाद बेचा है। बेचे गए जैविक खाद की राशि सोसायटी के द्वारा समिति के बैंक अकाउंट में भुगतान की जाती है। श्रीमती साहू ने बताया कि उनकी समिति 8 वर्ष पुरानी है। गौठान प्रारंभ होने से अब उन्हें काम के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें जैविक खाद तैयार करने के लिए गौठान से ही गोबर मिल जाता है। शासन की योजना के तहत केंचुआ भी उपलब्ध कराया गया है एवं समूह के सदस्यों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। गौठान परिसर में ही वर्मी टांका व वर्मी बेड तैयार किया गया है। समूह के सदस्यों में लाभ मिलने से उत्साह का माहौल है।
इसी गौठान से जुड़े मिनीमाता महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों ने चरागाह परिसर पर सब्जी-भाजी लगाया है। इससे उन्हें आर्थिक लाभ मिलना शुरू हो गया है। समूह की अध्यक्ष बहोरीन बाई ने बताया कि वे अभी लाल भाजी, पालक भाजी, गोभी, मूली आदि लगाए हैं। इसके बाद बाद वे धनिया, भिंडी, लौकी, मेथी, खीरा भी लगाएंगे। वे स्थानीय बाजार एवं समीप के शहरों से को सब्जी भाजी की सप्लाई कर रहे हैं। पिछले फसल में सब्जी भाजी का मूल्य कम होने के कारण केवल लागत और समूह के सदस्यों को मजदूरी मिल गई थी। इस मौसम में सब्जी भाजी की कीमत अच्छी मिलने से और अधिक लाभ मिल रहा है।
जय मां संतोषी महिला स्व सहायता समूह के सदस्य उमा पटेल ने बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए गौठान परिसर में ही स्थान दिया गया है। निःशुल्क प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं। वह अब मशरूम उत्पादन की तैयारी में लगे हुए हैं। इसी प्रकार गौठान से जुड़े एक अन्य समूह को सरकार की योजना के तहत मिनी राइस मिल अभी कुछ दिन पहले ही उपलब्ध कराया गया है। जिससे अति शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पिछले दो सालों में 103 एमओयू हुए हैं। इनके माध्यम से प्रदेश में 42 हजार 155 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए 62 हजार से अधिक रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
छत्तीसगढ़ की नयी उद्योग नीति और कोरोना-काल में उद्योगों के हित में शासन द्वारा उठाए गए कदमों से राज्य में बेहतर औद्योगिक वातावरण का निर्माण हुआ है। कोरोना-संकट काल में पूरा देश आर्थिक मंदी से प्रभावित था, वहीं छत्तीसगढ़ में उद्योग जगत मंदी से अछूता रहा। लॉकडाउन के दौरान देश में सबसे पहले माह अप्रैल में छत्तीसगढ़ के उद्योगों में काम प्रारंभ हुआ। उद्योगों की कठिनाइयों को देखते हुए ही कई तरह की रियायतें और सुविधाएं दी गईं। कोर सेक्टर के उद्योगों को विद्युत शुल्क में छूट दी गई। कच्चे माल की आवक बनी रहे, और तैयार माल बाजार तक पहुंचता रहे, इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए। दूसरे राज्यों से कच्चा माल आसानी से छत्तीसगढ़ आ सके, इसके लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। स्टील और सीमेंट उद्योग की गतिविधियां चलती रहें, इसके लिए सड़क और भवन निर्माण का काम जारी रखा गया। बिजली की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। नियम शर्तों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया। राइस मिलों को ऊर्जा प्रभार में पांच प्रतिशत की छूट दी गई। उद्योगों को बिजली बिलों के भुगतान की अवधि में भी छूट दी गई। लॉकडाउन की अवधि में छत्तीसगढ़ में 27 लाख टन इस्पात का उत्पादन हुआ, जो दूसरे राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा था। प्रदेश में नयी औद्योगिक नीति का निर्माण किया गया है। यह नयी नीति यहां के उद्योग धंधों के लिए संभावनाओं के नये दरवाजे तो खोल रही है साथ ही एग्रीकल्चर सेक्टर को भी मजबूत प्रदान कर रही है।
राज्य सरकार की नयी उद्योग नीति में कृषि और वनोपज आधारित उद्योगों को प्राथमिकता दी गई है। खनिज आधारित उद्योगों को हर तरह का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। नई औद्योगिक नीति के तहत अब इस्पात (स्पंज आयरन एण्ड स्टील) क्षेत्र के मेगा अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट में निवेश हेतु विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज की व्यवस्था की गई है। मेगा निवेशकों के लिए इस पैकेज में अधिकतम 500 करोड़ रुपए तक निवेश प्रोत्साहन दिया जा रहा है। बस्तर संभाग के लिए 1000 करोड़ का निवेश प्रोत्साहन दिया जा रहा है। निवेशकों को सिर्फ छूट और सुविधा ही नहीं दी जा रही, बल्कि इस बात का भी खयाल रखा गया है कि वे प्रदेश में आसानी के साथ उद्योग स्थापित कर सकें। इसके लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन के लिए भू-प्रब्याजी में 30 प्रतिशत की कमी की गई है। भू-भाटक में एक प्रतिशत की कमी की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों में 10 एकड़ तक आवंटित भूमि को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने के लिए नियम बनाए गए हैं। औद्योगिक भूमि और भवन प्रबंधन नियमों का सरलीकरण किया गया है।
असामान्य परिस्थितियों के बावजूद छत्तीसगढ़ में 464 स्टार्टअप शुरु करने में सफलता पाई है। 01 जनवरी 2019 से लेकर अब तक 103 एमओयू किए जा चुके हैं, जिनमें 42 हजार 154 करोड़ रुपए से अधिक का पूंजी निवेश होगा। स्टील सेक्टर में 80 एमओयू हुए हैं, जिसमें 37022.22 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। सीमेंट सेक्टर में एक एमओयू हुआ, जिसमें 2000 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। एथेनॉल सेक्टर में 7 एमओयू हुए, जिनमें 1082.82 करोड़ का पूंजी निवेश होगा। फूड सेक्टर में 5 एमओयू के माध्यम से 283.61 करोड़, फार्मास्युटिकल सेक्टर में 3 एमओयू के माध्यम से 56.41 करोड़ रुपए, डिफेंस सेक्टर में 3 एमओयू के माध्यम से 529.50 करोड़ रुपए तथा अन्य सेक्टरों में 4 एमओयू के माध्यम से 1179.99 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। इससे स्टील सेक्टर में 52,206, सीमेंट सेक्टर में 450, एथेनॉल सेक्टर में 986, फूड सेक्टर में 2,434, फार्मास्युटिकल सेक्टर में 393, डिफेंस सेक्टर में 4494 तथा अन्य सेक्टरों में 1,105 रोजगार के अवसर निर्मित होंगे।
क्रेडा विभाग के प्रयासों से ग्रामवासियों को मिली बिजली की रोशनी, सोलर ड्यूल पंप से शुद्ध पेयजल
पंखा एवं मोबाईल चार्जर की सुविधा पहुंची
राजनांदगांव / शौर्यपथ / राजनांदगांव जिले का नक्सल प्रभावित मानपुर विकासखंड के पहाड़ में स्थित सुदूर वनांचल ग्राम जलवाही सोलर लाईट के प्रकाश से जगमगा रहा है। एक वक्त था जब बिजली नहीं होने से ग्रामवासियों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था। पहाड़ में ग्राम स्थित होने के कारण रात में जंगली जीवों का खतरा बना रहता था। रात में बच्चों को पढ़ाई के लिए बिजली की सुविधा प्राप्त नहीं थी। आधुनिक दैनिक संसाधनों का उपयोग भी ग्रामवासी बिजली की सुविधा नहीं होने कारण नहीं कर पा रहे थे। अब शासन की पहल पर क्रेडा विभाग द्वारा ग्राम में निवासरत 53 परिवारों के यहां सोलर होम लाईट के माध्यम विद्युतीकृत किया गया।
गांव में पेयजल सुविधा हेतु क्रेडा विभाग द्वारा सोलर ड्यूल पंप की स्थापना किया गया है। जिससे ग्रामवासी निर्बाध शुद्ध पेयजल प्राप्त करते हैं। जिसमें प्रत्येक परिवार को 200 वॉट क्षमता का सोलर पैनल बैटरी के साथ 5 नग एलईडी लाईट व 15 वॉट का डीसी पंखा, मोबाईल यूएसबी चार्जर व टीवी शॉकेट नि:शुल्क प्रदाय किया गया है। आज ग्राम में सभी घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं।
गांव में 53 आदिवासी परिवार निवासरत हैं। जिनकी आजीविका का प्रमुख साधन धान एवं मक्का की खेती है। साथ ही जंगल से प्राप्त होने वाले वनोपज पर आधारित है। कोविड-19 संक्रमण काल में ग्रामवासियों के यहां सोलर होम लाईट स्थापना कार्य किया गया है। होम लाईट का संचालन एवं संधारण का कार्य क्रेडा विभाग द्वारा किया जाएगा। गांव के ईतवारी बाई ने बताया कि हमारे गांव में बिजली नहीं होने की वजह से समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। रात में हम कोई भी कार्य नहीं कर पाते थे और बच्चे भी रात में नहीं पढ़ पा रहे थे। अब हमारे घर में सौर ऊर्जा से चलने वाले सोलर होम लाईट की स्थापना के बाद दिन एवं रात में बिजली की सुविधा उपलब्ध हो गई है। डीसी पंखे मिलने से अब हमें सुविधा हो रही है और जीवन आसान बना है। लाईट लग जाने से हमारे जीवन में नई रोशनी आ गई है। ग्रामवासियों ने शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
खाना खजाना / शौर्यपथ / सर्दी का मौसम हो या बरसात का, भुट्टा दोनों ही मौसम में सबका पसंदीदा होता है। सर्दियों के मौसम में आग तापते हुए, भुट्टे का आनंद लेना भला कौन नहीं चाहता। लेकिन इस साल सर्दियों में कुछ अलग ट्राई करें, हाथों में भुना हुआ भुट्टा नहीं बल्कि भुट्टे के कबाब को जगह दीजिए। आइए जानते हैं आपकी सर्द शाम को खूबसूरत बनाने के लिए कैसे बनाए जाते हैं भुट्टे के कबाब।
भुट्टे के कबाब बनाने के लिए सामग्री-
-भुट्टे- 2
-उबले हुए आलू- 2
-ब्रेड- 4
-बारीक कटा हुआ प्याज- 1
-बारीक कटे हुए पुदीना पत्ते
-मक्खन- 1 चम्मच
-गरम मसाला- 1 चम्मच
-काली मिर्च पाउडर- 1/2 चम्मच
-हरी मिर्ची- 2 बारीक कटी हुई
-नमक- स्वादानुसार
-तेल- 2 चम्मच
भुट्टे के कबाब बनाने का तरीका-
भुट्टे के कबाब बनाने के लिए सबसे पहले दरदरे पीसे हुए भुट्टे और उबले हुए आलू को छीलकर एक बाउल में डालकर उसे अच्छे से मिला दें। अब ब्रेड को भी बारीक तोड़कर बाउल के मिश्रण में मिला दें। अब इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्ची, पुदीना पत्ते, नमक और बताई गई सभी सामग्री डालकर अच्छे से मिला लें। अब ओवन को 180 डिग्री पर preheat कर लें। कबाब के मिश्रण को आप सीख पर अच्छी तरह से लगाने के बाद ब्रश से इस पर मक्खन भी लगाएं।
अब पहले से preheat ओवन में 15-20 मिनट के लिए इन कबाब को रख दें। जब ये गोल्डन रंग में bake होने लगे तो आप इसे पलट दें। कबाब को हर 5-6 मिनट बाद पलटती रहें इससे हर तरफ से कबाब अच्छी तरह से bake होने के साथ क्रिस्पी भी बनेंगें। भुट्टे के कबाब बनकर तैयार हैं, गर्मागर्म सर्व करें।
शिक्षा /शौर्यपथ /आचार्य चाणक्य एक कुशल अर्थशास्त्री और राजनीतिक के साथ एक महान शिक्षाविद भी थे। चाणक्य ने नीति शास्त्र में जीवन से जुड़ी कई समस्याओं का हल बताया है। चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को दोस्ती के समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। बिना सोचे-समझे व्यक्ति से दोस्ती करने वाले व्यक्ति को जीवन में धोखा मिलता है। चाणक्य ने नीति शास्त्र में सच्चे मित्र की पहचान के गुण बताए हैं। जानिए कैसे करते हैं सच्चे मित्र की पहचान-
1.सही मार्ग दिखाएं- चाणक्य कहते हैं कि आज के समय में कई मित्र मिलते हैं। लेकिन सच्चा मित्र बहुत मुश्किल से मिलता है। चाणक्य के अनुसार, सच्चा मित्र वही होता है जो सही मार्ग दिखाता है। हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। चाणक्य का मानना है कि गलत कामों पर नहीं टोकने वाला मित्र दुश्मन के समान होता है।
2. दूसरों की पीड़ा में दुखी होने वाला- चाणक्य कहते हैं कि दूसरों का दुख समझने वाले व्यक्ति को समाज में हमेशा सम्मान मिलता है। नीति शास्त्र के अनुसार, दूसरों के दुख में साथ देने वाला व्यक्ति अपने मुश्किल समय में कभी अकेला नहीं होता है। व्यक्ति को हमेशा विनम्र स्वभाव के साथ दूसरों से मिलना चाहिए।
3. घमंड नहीं करने वाला- चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने पद और धन पर घमंड करता है, वह कभी सुखी नहीं हो पाता है। ऐसे व्यक्ति को समाज में कभी सम्मान नहीं मिलता है। पद और पैसा अस्थाई होते हैं। ऐसे में जब व्यक्ति से पद और पैसा छिन जाता है तो, वह अकेला रह जाता है। चाणक्य कहते हैं कि सच्चा मित्र भी कभी किसी बात पर घमंड नहीं करता है।
4. सीखने के लिए तत्पर- चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को हमेशा कुछ न कुछ नया सीखते रहना चाहिए। नीति शास्त्र के अनुसार, जो व्यक्ति हर किसी से कुछ न कुछ सीखने के लिए तैयार रहते हैं, ऐसे व्यक्ति कुशल होते हैं। इसी तरह सच्चा मित्र भी अपने मित्र से कोई भी नई चीज सीखने में कतराता नहीं है।
धर्म संसार / शौर्यपथ /सूर्य भगवान की उपासना हर दिन की जाती है। लेकिन रविवार के दिन सूर्य उपासना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि रविवार के दिन सूर्य को जल चढ़ाने, मंत्र का जाप और सूर्य नमस्कार करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए कई मंत्र हैं। इन मंत्रों में से 'राष्ट्रवर्द्धन' सूक्त से लिया गया सूर्यदेव का एक दुर्लभ मंत्र है। मान्यता है कि रविवार के दिन इस दुर्लभ मंत्र के जाप से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
सूर्यदेव का दुलर्भ मंत्र-
'उदसौ सूर्यो अगादुदिदं मामकं वच:।
यथाहं शत्रुहोऽसान्यसपत्न: सपत्नहा।।
सपत्नक्षयणो वृषाभिराष्ट्रो विष सहि:।
यथाहभेषां वीराणां विराजानि जनस्य च।।'
श्लोक का अर्थ है कि सूर्य ऊपर चला गया है, मेरा यह मंत्र भी ऊपर गया है। ताकि मैं शत्रुओं का विनाश करने वाला बन सकूं। प्रजाओं की इच्छाओं को पूरा करने वाला, देश को सामर्थ्य प्राप्त कराने वाला और जीतने वाला बन जाऊं। मैं शत्र पक्ष के वीरों और अपने-पराएं लोगों का शासक बन सकूं।
रविवार को इन उपायों से मिलता है शुभ फल-
रविवार को कुछ उपायों को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान सूर्य प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं। सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है। सूर्य ऊर्जा और आत्मा का कारक है। कहते हैं कि जिस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में होते हैं, वह व्यक्ति राजा के समान जिंदगी बिताता है। ऐसे व्यक्ति को जीवन में उच्च पद और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
1. केसरिया रंग के वस्त्र पहनें।
2. सूर्यदेव की उपासना के साथ संभव हो तो रविवार व्रत करें।
3. सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार को गुड़, गेहूं, तांबा आदि का दान करें।
4. एक मुखी रूद्राक्ष धारण करें।
5. गाय को रोटी खिलाएं।
वास्तु शास्त्र / शौयापथ / नए साल को आने में अब कुछ ही दिन बाकी है। सभी को 2021 का बेसब्री से इंतजार है। नए साल को खास बनाने के लिए लोगों ने अभी से तैयारी शुरु कर दी है। लोगों ने नए साल का स्वागत करने के लिए अपने घरों का सजाना भी शुरू कर दिया है। अगर आप भी नए साल के स्वागत के लिए घर को डेकोरेट करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो वास्तु शास्त्र का खास ख्याल रखें। कहते हैं कि ऐसा करने से नए साल की शुरुआत न केवल अच्छी होती है बल्किआर्थिक रूप से भी लाभकारी होती है। जानिए नए साल के स्वागत में घर को किस तरह से सजाना चाहिए-
1. इन रंगों का करें चुनाव- नए साल के स्वागत के लिए सबसे पहले अपने घर की सफाई करें। घर की सफाई के दौरान कोनों और किनारों को अच्छे से साफ करें। अगर आपने बहुत समय से कलर नहीं करवाया है तो दीवारों को पेंट भी करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में ब्राइट कलर का पेंट कराने से सकारात्मक ऊर्जा आती है।
2. मेनगेट को ऐसे सजाएं- नए साल के स्वागत के लिए मेनगेट को अच्छे से सजाना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मेनगेट के सामने गड्ढा या गंदगी होना अशुभ माना जाता है। ऐसे में घर के दरवाजे पर कभी भी डस्टबिन भी नहीं करनी चाहिए।
3. रुकी हुई घड़ी- अगर आपके घर में बंद या खराब घड़ी है तो फौरन ठीक करा लेना चाहिए। कहते हैं कि घर में बंद घड़ी रखना अशुभ होता है। इसके साथ ही टूटे हुए इलेक्ट्रॉनिक सामान को भी नए साल के आने से पहले घर से बाहर कर देना चाहिए।
4. पौधों को लगाएं- घर की साज-सज्जा के लिए पौधों को भी शामिल करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। ध्यान रहे कि घर के आंगन में गुल्लर का पौधा नहीं लगाना चाहिए।
5. टूटे बर्तनों को निकाल दें- नए साल का स्वागत करने से पहले रसोई से टूटे बर्तनों को निकाल देना चाहिए। कहते हैं कि रसोईघर में टूटे बर्तन रखने से घर में बरकत नहीं आती है।
शौर्यपथ / सर्दियों का मौसम सेहत बनाने के लिहाज से सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि तापमान में गिरावट आने से भोजन में संचित उष्मा हमारे शरीर को गर्म रखती है। इसका अर्थ यह है कि ठंड के मौसम में खाना आसानी से पच जाता है। खाने के अलावा अगर कुछ बातों पर ध्यान दिया जाए, तो हम ठंड के मौसम में न सिर्फ सेहतमंद रह सकते हैं बल्कि इस मौसम में हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
संतुलित भोजन करें
कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देते हैं, पर सेहत के लिए यही काफी नहीं होते। शरीर को वसा, प्रोटीन, फाइबर और तरल पदार्थों की भी उतनी ही जरूरत होती है। आमतौर पर सर्दियों में तला-भुना, डिब्बाबंद व जंक फूडखाने की इच्छा बढ़ती है, इस कारण कार्बोहाइड्रेट का सेवन बढ़ जाता है। दूसरा, शारीरिक सक्रियता घटने से अतिरिक्त कैलोरी की खपत नहीं हो पाती। इससे शरीर में तेजी से वसा जमने लगती है। इस मौसम में मौसमी फल व सब्जियों पर जोर दें। भोजन के साथ हरी सब्जियां, सलाद व सूप लें। इससे शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व व फाइबर मिलेगा। शरीर में पानी की कमी न होने दें।
धूप सेंकना न भूलें
क्या पर्याप्त आराम के बावजूद आपको थकान होती है? या हड्डियों व मांसपेशियों में दर्द रहता है? अगर आपका जवाब हां है, तो संभव है कि आपको विटामिन डी की खुराक की जरुरत है। विशेषज्ञों के अनुसार, 100 में से 70 लोग विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं। सर्दियों का मौसम इस कमी को पूरा करने का अच्छा अवसर है। दोपहर के आसपास त्वचा पर धूप लगना विटामिनडी के लिहाज से सबसे बेहतर माना जाता है। ।दोपहर में सोना एक ओर जहां विटामिन डी से दूर करता है, वहीं रात में नींद का पैटर्न भी डिस्टर्ब हो जाता है। दोपहर में कुछ देर धूप में जरूर बैठना चाहिए।
व्यायाम करें
सर्दियों में हर रोज व्यायाम करने की आदत को न छोड़ें। नियमित व्यायाम करना शरीर में खुशी का एहसास कराने वाले हार्मोन का स्राव करता है। अवसाद में कमी लाता है। यूं भी सर्दियों में शारीरिक सक्रियता घटने से शरीर का वजन बढऩे की आशंका बढ़ जाती है। व्यायाम करना शरीर के लचीलेपल को भी बनाए रखता है।
घर के भीतर न सुखाएं कपड़े
विशेषज्ञों के अनुसार, घर के भीतर गीले कपड़े सुखाने से घर में एसलडीहाइडेट और बेंजीन कण हवा में फैलते हैं, जो त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं। अस्थमा से परेशान लोगों की समस्या भी इससे बढ़ती है। यदि अस्थमा की परेशानी नहीं है, तो भी गीले कपड़ों को भीतर सुखाना सिरदर्द, गले में खराश और आंखों में जलन पैदा कर सकता है। अगर घर के भीतर गीले कपड़े सुखाते हैं, तो खिड़कियां खुली रखें।
अधिक क्रीम न लगाएं
सर्दियों की ठंडी हवा, त्वचा को शुष्क बना देती है। त्वचा को नमी की ज्यादा जरूरत होती है, पर इसका मतलब यह नहीं कि आप अनावश्यक क्रीम व लोशन लगाएं। अधिक क्रीम लगाने से त्वचा पर धूल-मिट्टी के देर तक जमे रहने की आशंका बढ़ती है। मृत त्वचा चेहरे पर ही रहती है, जिससे मुहांसे व त्वचा की एलर्जीकी आशंका बढ़ जाती है।
सेहत / शौर्यपथ / आयुर्वेद के अनुसार आपके खानपान के साथ इसका समय भी महत्वपूर्ण है।खाने-पीने का सही समय आपकी सही सेहत में एक अहम भूमिका निभाता है। गलत समय पर खाना खाने से आपके शरीर को पौष्टिक तत्व का फायदा होने की जगह नुकसान ही झेलना पड़ सकता है इसलिए सही वक्त पर सही डाइट आपके अच्छे सेहत के लिए बहुत जरूरी है। हमारा शरीर सुबह के समय आसानी से खाना पचा पाता है, सूरज के डूबने के साथ ही हमारी पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है, इसलिए हमें अपना डाइट चार्ट उसी अनुरूप बनाना चाहिए।
नाश्ते का समय
सुबह 7 बजे से 8 बजे तक नाश्ते का सबसे अच्छा समय होता है। सुबह इस बात का भी ध्यान दें कि उठने के आधे घंटे के अंदर कुछ जरूर खा लें। ज्यादा देर तक भूखे रहने से गैस की समस्या हो सकती है। सुबह उठते के साथ पहले एक ग्लास गुनगुना पानी भी जरूर पीये। इससे आपका पेट भी साफ रहता है और चेहरे पर चमक भी बनी रहती है।
दोपहर का खाना
दोपहर का खाना 12 बजे से 2 बजे के बीच खाएं। नाश्ते और दोपहर के खाने के बीच कम-से-कम 4 घंटे का अंतराल होना चाहिए।
रात के खाने का समय
रात में 7 से 9 बजे के बीच खाना जरूर खा लें। इस बात का भी ध्यान रहे कि रात में थोड़ा लाइट ही खाना खाए। रात को हमारा शरीर तेजी से खाना पचा नहीं पाता है। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि रात का खाना सोने से 3 घंटे पहले ही खा लें।
सेहत / शौर्यपथ / आप वजन घटाने के लिए कितनी ही कोशिश करते हैं लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि हर तरह की सावधानी और नियम फॉलो करने के बाद भी वजन कम होने की बजाय बढ़ता जाता है। ऐसे में बार-बार या हर दिन वजन मापना सम्भव भी नहीं है इसलिए आपको कुछ ऐसी बातों पर नजर जरूर रखनी चाहिए, जिससे कि आपको पता चले कि आपका वजन वाकई कम हो रहा है क्योंकि कई बार जिम या होम वर्कआउट के बाद हम ज्यादा डाइट ले लेते हैं, जिससे वजन बढऩे लगता है। समय पर पता चलने पर हम यह समझ सकते हैं कि वजन कम करने के प्रयास सही दिशा में जा रहे हैं। आइए, जानते हैं ऐसे संकेत जिनसे पता चलता है कि आपका वजन कम हो रहा है-
बार-बार टॉयलेट आना
आपको अगर बार-बार टॉयलेट आता है और आपको कोई बीमारी नहीं है, तो आपको समझ लेना चाहिए कि आपका वजन पहले की तुलना में धीरे-धीरे कम हो रहा है। हालांकि, इस बात की सावधानी भी रखें कि बिना किसी खास प्रयास के कहीं आपका वजन तेजी से तो कम नहीं हो रहा है।
पसीना आना
आपको अगर वर्कआउट करते समय ज्यादा पसीना आ रहा है, तो समझ लें कि वजन घटाने का आपका प्रयास सही दिशा में जा रहा है। पसीना आने से भी वजन कम होने के संकेत मिलते हैं।
चलने में स्पीड बढऩा
आमतौर पर मोटे लोगों की तुलना में सामान्य वजन वाले लोग ज्यादा तेजी से चलते हैं। ऐसे में इस बात को याद रखें कि चलते हुए अगर आपकी स्पीड पहले के मुकाबले बढ़ गई है, तो आपका वजन कम हो रहा है क्योंकि आपके घुटनों पर कम वजन पड़ रहा है।
प्यास ज्यादा और भूख कम
वजन कम होने पर गला बार-बार सूखने लगता है। ऐसे में आपको बार-बार प्यास लगती है। इसके अलावा हल्कापन होने की वजह से पहले की अपेक्षा आपकी भूख में भी कमी आती है। आपकी डाइट में कुछ कमी आती है।
कपड़ों की फिटिंग में बदलाव
सबसे आसान तरीका जिससे ज्यादातर लोगों को पता लगता है कि उनका वजन बढ़ा है या कम हो रहा है। जाहिर है कि अगर आपका वजन कम हो रहा है, तो आपके कपड़े आपको पहले के मुकाबले कुछ ढीले होंगे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
