August 05, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    मेलबॉक्स / शौर्यपथ / से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से देश में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अभी हम संक्रमितों के मामले में तीसरे सबसे बड़े देश हैं। बहुत सारे लोगों ने लॉकडाउन का मजाक उड़ाया था, परंतु अनलॉक में मरीजों की बढ़ती संख्या उन्हें माकूल जवाब दे रही है। गनीमत है कि हमारे यहां इस बीमारी के कारण मृत्यु-दर कम है, लेकिन इसका एक प्रभाव यह है कि लोग असावधान हो गए हैं। यह हाल तब है, जब स्वास्थ्य संसाधन के लिहाज से हमारी हालत बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में, यदि सामुदायिक संक्रमण फैलता है, तो बीमारी पर काबू पाना काफी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए एक सच्चे नागरिक का हम फर्ज निभाएं और सुरक्षित रहने का हर तरीका अपनाएं। सजगता ही इसका निदान है।
    आनंद पाण्डेय, रोसड़ा

    हकीकत समझे नेपाल
    आज नेपाल जिस प्रकार चीन के इशारे पर भारत को आंखें दिखाने की हिमाकत कर रहा है, उसे इसका अंदाजा नहीं है कि चीन धीरे-धीरे उस पर कब्जे की कोशिश में है। आजाद भारत में पहली बार ऐसा हुआ है कि बेटी-रोटी के संबंधों के बीच दूसरी ओर से कंटीली तारों से सीमा-रेखा खींचे जाने की बात कही गई और भारत की संप्रभुता को चुनौती देने का प्रयास किया गया। ऐसी स्थिति में भारत को ठोस कदम उठाना ही होगा। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि अपनी विस्तारवादी नीतियों के तहत चीन कई देशों की अर्थव्यवस्था पर कब्जा जमा चुका है। वह रह-रहकर हमें भी आंखें दिखाता है। ऐसे में, नेपाल को यह समझ लेना चाहिए कि चीन के प्रति दोस्ताना रवैया भविष्य में उसे परतंत्र बना सकता है। उसे अपनी संप्रभुता की रक्षा करनी चाहिए, ताकि उसका अस्तित्व स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में बरकरार रहे।
    बिन्नी कुमारी, सारण

    पीछे लौटा चीन
    वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले लगभग दो महीनों से जो भारी तनाव बना हुआ था, उसमें अब काफी सुधार आया है और चीन की सेना वापस लौटने लगी है। यह एक सुखद खबर है, क्योंकि युद्ध से किसी भी देश का भला नहीं होता। भारत की जवाबी कार्रवाइयों और आर्थिक चोट के बाद चीन में यह नरमी आई है। दोनों देशों के बीच सामान्य रिश्ता बेहद जरूरी है, क्योंकि दोनों एशिया की सबसे महत्वपूर्ण ताकतें हैं। इनका आपस में टकराना इस पूरे उपमहाद्वीप में शांति के लिहाज से अच्छा नहीं होगा। इससे विश्व राजनीति पर भी असर पडे़गा। सबसे अच्छी बात यह है कि समय रहते बीजिंग को इस बात का एहसास हो गया और वह पीछे लौट गया।
    शुभम पांडेय गगन
    अयोध्या, फैजाबाद

    विवाद बनाम व्यापार
    किसी देश की अर्थव्यवस्था पर चोट करने से उसकी अकल ढीली पड़ जाती है। इसका ज्वलंत उदाहरण चीन है। वह भारत से टकराने की नीति से पीछे हट गया है। दरअसल, भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए उसके 59 एप पर पाबंदी लगा दी, साथ ही रेलवे ने चीन की कंपनियों को मिले ठेके रद्द कर दिए। हमारे इस सख्त रुख को देखकर चीन को यह बात समझ में आ गई कि भारत विवाद और व्यापार एक साथ नहीं करेगा। इसके बाद चीन पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में पीछे हटने लगा। इससे स्वाभाविक तौर पर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बहाल हो सकेगी। इससे नेपाल के तेवर भी नरम पड़ जाएंगे। मानचित्र विवाद को उसने बेवजह ही तान दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के उकसावे में आकर वह ऐसा कर रहा है। चूंकि अब चीन को एहसास हो गया है कि भारत 1962 के दौर से काफी आगे बढ़ चुका है, इसलिए वह शायद ही हमसे टकराना चाहेगा। ऐसा होने पर नेपाल भी ढीला पड़ता जाएगा, क्योंकि उसे चीन का साथ शायद ही मिले।
    राकेश चौधरी, दरभंगा, बिहार

     

    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / कोरोना महामारी ने अमेरिकी समाज और उसके शासन से जुडे़ कई मिथकों को ध्वस्त किया है। अमेरिका की केंद्रीय आव्रजन संस्था ‘इमिग्रेशन ऐंड कस्टम्स एनफोर्समेंट’ (आईसीई) का ताजा फैसला इसका नया उदाहरण है। आईसीई ने सोमवार को फरमान सुनाया कि अमेरिका में पढ़ रहे उन तमाम विदेशी छात्रों को देश छोड़ना पड़ेगा, जिनकी यूनिवर्सिटी ने आगामी सेमेस्टरों में ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था मुकम्मल कर ली है। यदि इसके बावजूद कोई छात्र अमेरिका में टिका रहा, तो उसे जबरन बाहर किया जाएगा। जाहिर है, इस फैसले का असर लाखों विदेशी विद्यार्थियों पर पडे़गा। खासकर भारत और चीन के छात्र इससे सर्वाधिक प्रभावित होंगे, क्योंकि सबसे ज्यादा इन्हीं दोनों देशों के विद्यार्थियों की तादाद है। यही नहीं, उन हजारों विद्यार्थियों के आगे भी फिलहाल अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है, जो सितंबर से नए अकादमिक-सत्र में भाग लेने के लिए अमेरिका पहुंचने वाले थे।
    इसमें कोई दोराय नहीं कि इस महामारी से निपटने में प्रशासनिक कमियों को लेकर अमेरिकी समाज में अंदरखाने काफी उबाल है। जल्द ही वहां राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में, ट्रंप प्रशासन अमेरिकी अवाम को अब यह दिखाना चाहता है कि उसे सिर्फ उनका ख्याल है। महामारी के बाद वह वीजा नियमों में कई बदलाव कर चुका है। मगर हकीकत यह है कि दुनिया में सबसे अधिक जान-माल का नुकसान उठाने के बावजूद अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठानों में कोरोना से निपटने को लेकर अब भी समन्वय की भारी कमी है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट महामारी के सवाल पर आज भी अलग-अलग नजरिया रखते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ लगातार आगाह कर रहे हैं कि अमेरिका की स्थिति बेहद गंभीर है, और यह महामारी के बीचोबीच खड़ा है, पर राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद करीबी लोग ही संक्रमण से बचाव के मान्य उपायों का मजाक उड़ाते फिर रहे हैं। वे मास्क पहनने की अनिवार्यता की भी खिल्ली उड़ाने से बाज नहीं आ रहे, जबकि ठोस नजीर सामने हैं कि जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने कैसे मास्क और फिजिकल डिस्टेंसिंग के जरिए इस घातक वायरस के प्रसार को काबू करने में सफलता पाई है। मगर सच्ची कोशिश और प्रतीकात्मक लड़ाई अमेरिकी समाज के दोहरेपन को अक्सर दुनिया के सामने ले आती रही है। कोरोना महामारी ने एक बार फिर इसे उजागर कर दिया है।
    ठीक है, हर सरकार अपने नागरिकों के हितों का ख्याल सबसे ऊपर रखती है, पर उसका यह भी फर्ज है कि अपनी भौगोलिक सीमा में दूसरे देशों के बाशिंदों के मानव अधिकारों की भी वह रक्षा करे। वैसे भी, ये विद्यार्थी शरणार्थी नहीं हैं, जिन्हें अमूमन हर देश एक बोझ समझता है। ये वे विद्यार्थी हैं, जिनसे अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने मोटी फीस वसूली है। एक ऐसे वक्त में, जब अंतरराष्ट्रीय सरहदें बंद हैं, तमाम उड़ानें रद्द हैं, ट्रंप प्रशासन को इन विदेशी छात्रों को उनके मुल्क तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उच्च शिक्षा उद्योग का अच्छा-खासा योगदान है। उसे सालाना करीब 37 अरब डॉलर की कमाई इससे हो रही है। मुश्किल समय के ऐसे आचरण भावी विद्यार्थियों को उससे विमुख भी कर सकते हैं। बहरहाल, इस नई स्थिति में देशों और सरकारों के लिए भी एक सबक है, अपने यहां ज्यादा से ज्यादा विश्व-स्तरीय संस्थान खड़े कीजिए।

     

    ओपिनियन / शौर्यपथ /पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी से आती खबरें सुखद हैं। चीन की सेना कई वजहों से पीछे लौटने को मजबूर हुई है। पहला कारण तो निर्विवाद रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल है। उन्होंने हालात से निपटने के लिए दोतरफा रणनीति अपनाई। एक तरफ, उन्होंने सेना का मनोबल बढ़ाया और उसके लिए आधुनिक साजो-सामान जुटाए, तो वहीं दूसरी तरफ, लेह-लद्दाख जाकर पड़ोसी देश को यह संदेश दिया कि शीर्ष स्तर पर बनी सहमति जमीन पर उतारी जाए, तो वह दोस्ती के लिए भी तैयार हैं। इसके बाद ही अजीत डोभाल को सक्रिय किया गया, जो चीन के मामलों में प्रधानमंत्री के निजी प्रतिनिधि रहे हैं।
    यह सही है कि कई बार युद्ध आवश्यक हो जाता है, पर किसी भी राष्ट्र के लिए यह एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए। इससे बचने के लिए अपनी आंतरिक शक्तियों को मजबूत करना आवश्यक है। भारत ने भी यही किया। हमने आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए, साथ ही वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अपना योगदान बढ़ाना शुरू किया। एक बड़ा उपभोक्ता बाजार हमारे हित में है ही। लिहाजा, चीन को आर्थिक चोट पहुंचाने की शुरुआत हुई। फिर तो, अन्य देश भी खुलकर हमारे साथ आ गए और बीजिंग की आलोचना करने लगे, जबकि शुरुआत में इन देशों ने 20 भारतीय सैनिकों के बलिदान पर महज शोक जताया था।
    हालांकि, चीनी नेतृत्व की भी तारीफ करनी चाहिए। उसने सही समय पर अपने कदम पीछे खींचे हैं। बीजिंग ने यह फैसला तब किया, जब वहां का मीडिया बार-बार 1962 के संघर्ष की याद दिला रहा था और कूटनीतिज्ञ पाकिस्तान और नेपाल के रास्ते नई दिल्ली को घेरने की रणनीति बनाने में मशगूल थे। मगर भारत सरकार ने आपसी मतभेद खत्म कराने में आखिरकार सफलता हासिल कर ली।
    अब सवाल यह है कि आगे की क्या रणनीति बनाई जाए? एक आशंका यह भी है कि कहीं 1962 तो नहीं दोहराया जा रहा, क्योंकि उस वर्ष भी पीछे लौटकर चीन ने हम पर हमला बोला था? मगर मैं इससे इत्तफाक नहीं रखता। हमने इस बार चीन की आंखों में आंखें डालकर उसे पीछे हटने को मजबूर किया है। फिर भी, हमें सजग और सावधान रहना होगा।
    हमारा फायदा इसी में है कि सेना को बैरकों में रहने दिया जाए। सीमा पर बेवजह की उसकी तैनाती भय का माहौल बनाएगी। मगर इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास-कार्य रोक दिए जाएं। वहां न सिर्फ बुनियादी ढांचे का निर्माण और आर्थिक विकास जरूरी है, बल्कि स्थानीय लोगों को भावनात्मक और आर्थिक रूप से शेष भारत से जोड़ना भी आवश्यक है। इस बाबत पहले की सरकारों ने उचित प्रयास नहीं किए, जिसके कारण हमारे कई क्षेत्रों पर पड़ोसी देशों का कब्जा है। इससे वैश्विक मंचों पर गलत संदेश जाता है। हमारी सदाशयता हमारी कमजोरी समझ ली गई है।
    ऐसे संदेश कितने खतरनाक होते हैं, इसका पता पहले और दूसरे विश्व युद्ध से चलता है। इन दोनों महासमर की शुरुआत तब हुई, जब एक पक्ष को दूसरा कमजोर महसूस होने लगा। जब ऐसी सोच हावी हो जाती है, तो फिर संघर्ष स्वाभाविक तौर पर पैदा हो जाता है। ईरान-इराक युद्ध का भी यही संदेश है। अच्छी बात है कि इस बार भारत धारणा की जंग में मजबूत होकर उभरा है। पिछले पांच-छह वर्षों में हमने न सिर्फ पड़ोसी देशों के तमाम विरोधों को दरकिनार करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास-कार्य किए हैं, बल्कि उनकी उकसाने वाली कार्रवाइयों को उसी की भाषा में जवाब भी दिया है।
    मौजूदा तनातनी का अंत एक नई उम्मीद को जन्म दे रहा है। हम बीजिंग को यह एहसास दिलाने में सफल हुए हैं कि विश्व के आर्थिक विकास में अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटना उचित नहीं। एशिया की शांति भी हमारी दोस्ती पर ही निर्भर है। इसमें हम कितना सफल हो पाते हैं, इसका जवाब तो आने वाले दिनों में मिलेगा, पर विश्व में सकारात्मक योगदान की हमारी उम्मीदें कुछ जरूरी काम करने के बाद पूरी हो सकती हैं।
    इसमें सबसे पहला काम तो सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाना है। इसके लिए वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर, यानी बुनियादी ढांचे का निर्माण जरूरी है। आंतरिक ताकतों को मजबूत किए बिना हम बाहरी शक्तियों का मुकाबला नहीं कर सकते। दूसरा, हमें आतंकवाद के खिलाफ तमाम देशों को एक करना होगा। यह इसलिए भी जरूरी है, ताकि पाकिस्तान जैसे आतंकवाद के मददगार देश किसी अन्य राष्ट्र द्वारा इस्तेमाल न हो सकें। तीसरा काम है, चीन की विस्तारवादी नीतियों का विरोध। बेल्ट ऐंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) में शामिल न होकर भारत ने इसकी शुरुआत पहले ही कर दी है। चौथा, पड़ोसी देशों के साथ चीन के व्यवहार का मूल्यांकन। दरअसल, दक्षिण चीन सागर सहित चीन का कई राष्ट्रों के साथ सीमा विवाद है। हांगकांग का मसला भी काफी गंभीर है। चीन का इन देशों के प्रति बदलता रुख हमें कई संदेश दे सकता है। अगर बदलाव सकारात्मक आते हैं, तो यह माना जा सकता है कि चीन का नेतृत्व नई सोच का हिमायती है। और अगर ऐसा नहीं होता, तो हमें सावधान रहना होगा, क्योंकि गलवान घाटी में पीछे हटना चीन का छलावा भी हो सकता है।
    चीन के भीतरी हालात पर भी हमें नजर रखनी होगी। ऐसी चर्चा गरम है कि बीजिंग के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व में मतभेद गहरा रहे हैं। चीन बेशक कम्युनिस्ट समाज है, पर वहां कन्फ्यूशियसवाद हावी है। इस तरह के समाज में अच्छे काम करने वालों की तारीफ होती है, तो विफल होने पर उसकी जमकर लानत-मलामत भी की जाती है। लिहाजा, अपनी छवि चमकाने के लिए सियासी और सैन्य नेतृत्व अलग-अलग राह पकड़ सकते हैं। जरूरी यह भी है कि हम भी अपने आंतरिक मतभेदों से ऊपर उठें। पहले पाकिस्तान जैसे देश हमारे मनमुटावों का फायदा उठाते थे, अब बीजिंग इससे लाभ कमाना चाहता है। उसे यह मौका नहीं मिलना चाहिए।
    इसमें आत्मनिर्भरता की नीति हमारे लिए काफी कारगर साबित हो सकती है, मगर इसे लेकर हमें संकीर्ण नजरिया नहीं रखना चाहिए। हमारी आत्मनिर्भरता संरक्षणवाद का पोषक नहीं बननी चाहिए। ऐसी नीति हमारी कई कमजोरियों को बेपरदा कर सकती है। इससे हम पर कई तरह के दबाव बनने लगेंगे, जिनसे हमारे हितों को चोट पहुंच सकती है।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं)शशांक, पूर्व विदेश सचिव

     

     दुर्ग / शौर्यपथ / बार-बार अपील करने के बाद भी आम जनता द्वारा घरों से कचरा नाली और सड़क पर डाला जा रहा है । एैसे ही आज निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन द्वारा शंकर नगर वार्ड भ्रमण के दौरान पाया कि शंकर नगर निवासी श्रीमती प्रभा सोनी द्वारा अपने घर से कचरा निकालकर सड़क और नाली के बीच डाल दिया गया। आयुक्त द्वारा उनकी मोबाइल से फोटो खिच ली गई । उन्होनें स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित कर कहा उक्त महिला से जुर्माना लेकर उनसे कचरा वापस उठवाईये। स्वास्थ्य विभाग की टीम स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता, एवं स्वच्छता निरीक्षक मेनसिंग मंडावी, दरोगा राजू सिंह आदि ने श्रीमती प्रभा सोनी के घर पहुॅचे और उन्होनें कचरा बाहर नहीं फेकने की हिदायत देते हुये, उनके द्वारा फेके गये कचरे के लिए 200 रुपये जुर्माना लेकर फेके गये कचरे को प्रभा सोनी से वापस उठवाया गया । 

    दुर्ग / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम दुर्ग का जांच दल ने रोका-छेका अभियान के अंतर्गत अस्पताल वार्ड, पोलसायपारा, केलाबाड़ी, राजीव नगर, सुराना कालेज वार्ड, और पचरीपारा वार्ड में घर-घर जाकर मवेशियों की जांच किये। मवेशी बाहर छोडऩे और वार्ड में गंदगी करने पर 6 मवेशी मालिकों के खिलाफ कार्यवाही करते हुये सभी को 10-10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। अभियान के तहत् प्रभारी बाजार अधिकारी थान सिंह यादव, अतिक्रमण प्रभारी शिव शर्मा, सहा0 राजस्व अधिकारी प्रकाधर दीवान की टीम द्वारा कार्यवाही की गई। 

        उल्लेखनीय है कि शासन की रोका-छेका अभियान के तहत् आज नगर पालिक निगम दुर्ग के दल ने अस्पताल वार्ड कुॅआ चैके पास संतोष यादव, पोलसायपारा के सुरेन्द्र यादव, नयापारा चैक राजीव नगर के कृपाराम साहू, केलाबाड़ी के सुरेश यादव, पचरीपारा मेनका होटल के पीछे योगेश यादव द्वारा अपने जानवरों को सड़क पर छोड़ दिया गया था एवं वार्ड में गंदगी फैलाने के कारण सभी पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। मवेशी मालिकों द्वारा जुर्माने की राशि जमा नहीं किये जाने की स्थिति में डेयरी संचालक व मवेशी मालिक के खिलाफ भा0दं0स0 की धारा 133 एवं नगर निगम अधिनियम के तहत् कार्यवाही हेतु सक्षम न्यायालय में वाद दायर की जाएगी। 
           रोका-छेका अभियान के तहत् मीलपारा में विशाखा यादव, लक्ष्मण यादव, विष्णु चंद्राकर, अस्पताल वार्ड के शंकर लाल यादव, नीलम यादव, चंद्रपाल यादव, पचरीपारा के पूरन यादव, बघेरा के मनहर यादव, रमेश यादव, रामस्वरुप यादव, सुरेश यादव, पंचराम यादव, मोहन सिंह देशमुख, पोटियाकला वार्ड के रंजीत यादव, बंशी यादव, कृपाल यादव, कुशाल यादव द्वारा मवेशियों को खुला छोड़ दिया गया तथा गंदगी फैलाने के कारण 500 से 2000 रु0 जुर्माना लिया गया। आयुक्त ने समस्त मवेशी मालिकों से अपील कर कहा है कि शासन की मंशा के अनुरुप रोका-छेका अभियान शहर में जारी है इसके तहत् किसी भी डेयरी या मवेशी मालिक द्वारा मवेशी बाहर छोड़ा जाएगा और अपने आस-पास गंदगी करेगें उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी। अत: अनुरोध है कि अपने मवेशियों को बांध कर रखें और गंदगी न करें।  

    दुर्ग / शौर्यपथ /  भाजपा चंडी शीतला मंडल के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 7 के लुचकी तलाब शिक्षक नगर पानी टंकी  एवं 9 खाम तलाब  की मौजूदा जीर्ण-शीर्ण अवस्था एवं गंदगी को देखते हुए मंडल अध्यक्ष चंद्रशेखर चंद्राकर के नेतृत्व में जिलाधीश के नाम  उपस्थित अधिकारी को ज्ञापन सौंपा । इस दौरान प्रमुख रुप से पूर्व मंडल अध्यक्ष नरेंद्र बंजारे सह मीडिया प्रभारी राजा महोबिया उपस्थित रहे जिलाधीश को ज्ञापन सौंपने के दौरान उचित कदम नहीं उठाने जाने पर मंडल के जनप्रतिनिधियों सहित पार्टी के कार्यकर्ता आम जनमानस के साथ उग्र आंदोलन किया जाएगा

            वार्ड क्रमांक 7 शिक्षक नगर वार्ड में स्थित पानी टंकी जो आसपास के कम से कम 5 से 6 वार्ड में पानी की सप्लाई करता है आज अपनी मौजूदा हालात को देखते हुए आंसू बहा रहा है वर्तमान में पानी टंकी काफी जर्जर हो चुकी है पूर्व में भी इस के नाम से कई बार ज्ञापन सौंपा जा चुका है । रहवासियों के द्वारा अभी वर्तमान में सोशल मीडिया में एक तस्वीर वायरल है जिसमें पानी की टंकी की इच्छा पूरी तरह से धराशाई होकर पानी में ही गिर चुकी हैं और टंकी पूरी तरह से खुली हुई लगातार इसके मलबे आसपास क्षेत्र में गिरते रहते हैं वहीं लुचकी तलाब एवं हरना बांधा मुक्तिधाम के पास स्थित खाम तालाब जो काफी गंदा एवं दूषित हो चुका है इन दोनों तालाबों से आसपास के कम से कम 15 वार्ड के लोग के द्वारा उपयोग किया जाता है वर्तमान में दोनों तालाब की स्थिति काफी दयनीय है चारों ओर कचरा का जमवाड़ा है
         ज्ञापन सौंपने के दौरान विजय ताम्रकार ,निलेश अग्रवाल, रितेश सोनी ,विनोद ताम्रकार यासीन दीवान ,कुंदन यादव, दिनेश शर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
    भिलाई / शौर्यपथ /  छत्तीसगढ़ प्रदेश को हरियालीयुक्त एवं प्रदूषणमुक्त करने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आव्हान पर बीएसपी एंसीलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने सोमवार 6 जुलाई को औद्योगिक क्षेत्र स्थित भिलाई इंजीनियरिंग वक्र्स के सामने वृक्षारोपण किया. इस अवसर पर जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों सहित एसोसिएशन के संरक्षक,पदाधिकारी एवं उद्योगपति काफी संख्या में उपस्थित थे. वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक राजीव शुक्ला एवं वरिष्ठ उद्योगपति सुरेंद्र सिंह कैम्बो ने पेड़ लगाकर की. इसके पश्चात एसोसिएशन के संरक्षक के. के. झा एवं अध्यक्ष अरविंदर सिंह खुराना ने पेड़ लगाया. तत्पश्चात एसोसिएशन के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने एक एक पेड़ लगाया.
    वृक्षारोपण पश्चात मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक राजीव शुक्ला ने एसोसिएशन के इस अभियान की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने एक घर एक पेड़ का जो आह्वान किया है इसकी शुरुआत आप लोगों ने की है यह काफी सराहनीय है. वृक्षारोपण के साथ-साथ उन्होंने उद्योगपतियों से वाटर हार्वेस्टिंग को भी गंभीरता से लेने कहा।  एसोसिएशन के अध्यक्ष  खुराना ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जो आह्वान किया है उसकी सफलता के लिए हमने वृक्षारोपण का अभियान आज से शुरू कर दिया है. यह अभियान आने वाले एक-दो महीने तक चलता रहेगा. हमारे एसोसिएशन के हर एक पदाधिकारी एवं सदस्य अपने घरों एवं अपने उद्योगों में पेड़ लगाएंगे.
     एसोसिएशन के संरक्षक  झा ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ को पूरे देश में प्रदूषणमुक्त, प्रथम राज्य बनाने का संकल्प लिया है. उस अभियान की शुरुआत आज से हमने कर दी है. हम संकल्पित हैं कि औद्योगिक क्षेत्र के हर एक उद्योग में कम से कम 5 पौधे लगाए जाएंगे. अन्य संस्थानों को भी पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. यह मुहिम अब रुकेगी नहीं, चलती ही रहेगी. वाटर हार्वेस्टिंग का जिक्र करते हुए श्री झा ने कहा कि यह जानकर सभी को खुशी होगी कि छत्तीसगढ़ प्रदेश का वाटर लेवल पिछले वर्ष की तुलना में 3 मीटर ऊपर आ गया है. हमारे थोड़े प्रयास की और जरूरत है।
     इस अवसर पर जिला उद्योग केंद्र से  चौरसिया, संजय सिंह उपस्थित थे. वहीं एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ सदस्य सुरेंद्र सिंह कैम्बो, महासचिव व्यास शुक्ला, कोषाध्यक्ष विजय अग्रवाल,चमन लाल बंसल, जे.के. जैन, मयूर कुकरेजा, भगवान अग्रवाल, रामचंद्र स्वामी, देशराज यादव, रविशंकर मिश्रा, जितेंद्र पाल सिंह, राजा संधू, अनिल शुक्ला, गुरु लाल सिंह विरदी, कमलजीत सिंह विरदी, गगनप्रीत सिंह मथारू, राजीव कुमार, राजेश खंडेलवाल, शशि भूषण सहित सैकड़ों की संख्या में उद्योगपति उपस्थित थे.
    दुर्ग / शौर्यपथ / शहर की बदहाल व्यवस्था को दुरुस्त करने की पहल सीएसपी विवेक शुक्ला द्वारा प्रारंभ की गई है। मंगलवार को सीएसपी नगर निगम कमिश्नर के साथ शहर के बाजार क्षेत्र के मार्ग पर निकले। इस दौरान उनके निर्देश पर आवागमन को बाधित करने वाले दुकानदारों को समझाइश दी। साथ ही सड़क पर कब्जा कर व्यवसाय करने वालों के खिलाफ  कार्रवाई की गई।
    ज्ञातव्य हां कि शहर के प्रमुख मार्गों पर अवैध कब्जों की भरमार हो गई। जिससे प्राय: जाम की स्थिति निर्मित होती रहती है। जिसका खामियाजा जनता भोगना पड रहा है। वहीं निगम प्रशासन इस ओर से बेपरवाह बना हुआ है। शहर के बेतरतीब होती व्यवस्था को दुरुस्त करने सीएसपी ने निगम अमले के साथ इंदिरा मार्केट क्षेत्र का भ्रमण किया गया। इस दौरान सडक पर कब्जा करने वाले कारोबारियों के सामा की जब्ती की गई। वहीं जुर्माना वसूल किया गया। सीएसपी ने दुकानदारों को सड़क को बाधित कर व्यवसाय न करने की समझाइश भी दी। सीएसपी शुक्ला ने बताया कि व्यवस्था सुधारने के लिए आगे भी व्यवस्था सुधारने हेतु ऐसी कार्यवाही संयुक्त रूप से लगातार कई जाएगी।
    मास्क न पहनने वालों पर कार्रवाई
    पुलिस एवं नगर निगम की टीम द्वारा संयुक्त रूप से बिना मास्क पहने हुए व्यक्तियों पर भी कार्यवाही की गई। उन्हें मास्क पहनने की हिदायत देते हुए जुर्माना वसूला गया।
    भिलाई  / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र में दो कर्मचारी कोरोना से ग्रसित पाए गए हैं। इस्पात नगर में रहने वाले वरिष्ठ प्रबंधक सामग्री प्रबंधन को शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है वहीं सेक्टर 6 निवासी आरईडी में कार्यरत एक कर्मचारी को एम्स में भर्ती किया गया है। दोनों कर्मचारियों के कार्यस्थल को पूर्ण रूप से सैनिटाइज किया गया है एवं दोनों मरीजों के प्राथमिक संपर्क में आने वाले व्यक्तियों को आज घर पर रहने की सलाह दी गई है और कल उनका परीक्षण किया जाएगा। 27 जून को तबीयत खराब होने पर आरईडी कार्मिक सेक्टर 9 के फ्लू.क्लिनिक में आए थे जहां से प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें जिला अस्पताल दुर्ग में कोविड.19 के जांच हेतु भेजा गया था। लेकिन कार्मिक दुर्ग जिला चिकित्सालय न जाकर 2 जुलाई  को अपने ड्यूटी पर आ गए। ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगडऩे से वह सेक्टर 9 अस्पताल आ गए, जहां उन्हें संभावित कोविड.19 मरीजों के लिए बनाए गए बी.2 वार्ड में भर्ती किया गया। 3 जुलाई  को कोविड.19 परीक्षण किया गया जिसका  6 जुलाई को टेस्ट कोरोना पॉजिटिव आ गया इसके कारण तत्काल उन्हें एम्स में भर्ती किया गया है।
      अन्य कार्मिकों के सुरक्षा के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए गए हैं। दोनों प्रभावित कर्मचारियों के कार्यस्थल तथा कार्यालय को सेनेटाइज कर दिया गया है। सेक्टर 9 के उन कार्मिकों को जो आरईडी के कार्मिक के चिकित्सा में लगे थे, आज उन सभी चिकित्सकीय कार्मिकों का कोविड.19 परीक्षण किया गया है और उन्हें घर में रहने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त बी.2 वार्ड को भी सैनिटाइज कर दिया गया है। इन मरीजों के प्राथमिक संपर्क में आने वाले व्यक्तियों के कोविड.19 जांच की व्यवस्था की गई है। इनका परीक्षण कल किया जाएगा।
    भिलाई इस्पात संयंत्र ने कोरोना वायरस से बचाव हेतु एहतियातन कई कदम उठाए हैं। जिसमें चिकित्सकीय व्यवस्था से लेकर प्रशासकीय व्यवस्था शामिल है। भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन सभी कार्मिकों व भिलाई वासियों से अपील करती है कि कृपया कार्यस्थल व अन्य स्थानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। नाक व मुँह को ढकते हुए मास्क अवश्य लगाएं। पार्टियों व सामाजिक कार्यक्रमों में न जायें। भीड़.भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। कृपया यात्रा करने से बचें। साबुन से बार-बार हाथ धोयें, जहाँ आवश्यक हो हाथों को सैनिटाइज करें। जब तक बहुत आवश्यक न हो तब तक अस्पताल न जाएं। यहाँ.वहाँ न थूँकें। कोरोना से बचाव हेतु पूरी सावधानी बरतें। चिकित्सकीय निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। संक्रमण को रोकने में सहयोग करें।
    लोगों के विरोध और यहां स्टेडियम निर्माण की मांग पर महापौर ने फोड़ा नारियल
    देवेन्द्र की बढती लोकप्रियता को नही पचा पा रहे हैं भाजपाई
     
    भिलाई / शौर्यपथ /  नगर निगम भिलाइ हो चाहे रिसाली निगम की बात हो, चूंकि आने वाला वर्ष चुनावी वर्ष है, और लगातार इन निगम क्षेत्रों में कांग्रेस और भाजपा के जनप्रतिनिधियों द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए लगातार करोड़ो रूपये के भूमिपूजन का दौर इन दिनों भिलाई निगम सीमा क्षेत्र में आये दिन हो रहा है। इसी तारतम्य में आज भिलाई विधायक एवं महापौर पौनी पसारी योजनांगर्तत हुडको लाल मैदान में बाजार के लिए शेड निर्माण के लिए भूमिपूजन करने पहुंचे। जहां भाजपाई और कांग्रेसी आमने सामने हो गये थे।  कांग्रेसियों का आरोप था कि 15 साल में पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने क्या किया। वहीं दूसरी ओर भाजपाईयों का आरोप था कि महापौर और दो वर्ष की कांग्रेस राज्य में राज्य सरकार ने हमें क्या दिया? भाजपा कार्यकर्ता विजय शुक्ला चिल्ला चिल्ला कर वहीं कहने लगे कि 23 करोड़ की राशि वापस क्यों गई जिसमें हुडको ंके लिए तारामंडल, बॉलीवॉल कोर्ट का निर्माण सहित कई विकास कायों की राशि वापस क्यों गई? महापौर जवाब दें।
        यहां इस प्रकार की उत्पन्न की जानकारी मिलते ही वहां पुलिस भी पहुंच गई थी। कांग्रसियों का कहना है कि महापौर देवेन्द्र यादव लगातार काम कर रहे है, और भिलाई के विकास के लिए ही नही बल्कि दो विधानसभा क्षेत्र पूरा एवं तीसरे विधानसभा क्षेत्र का कुछ भाग भिलाई निगम के अंतर्गत आता है, इसलिए भेदभाव नही करते हुए पूरे भिलाई निगम क्षेत्र के सभी 70 वाडोँ मे ंविकास के लिए राज्य शासन से करोड़ों करोड़ो रूपये की राशि लाकर विकास कार्य करा रहे है। जिसके कारण देवेन्द्र यादव लगातार लोकप्रिय होते जा रहे है। इसलिए भाजपाई देवेन्द्र यादव की लोकप्रियता को पचा नही पा रहे हैं। चूंकि वे कम उम्र के महापौर के साथ विधायक भी है, आज इसी भूमिपूजन के क्रम में हुडकों लाल मैदान मे ंसुबह कांग्रेस भाजपा के कार्यकर्ता स्थानीय रहवासियों के सामने आमने सामने हो गये थे। 
              आज लालमैदान हुडकों वार्ड 70 में पौनी पसारी योजना के अंतर्गत बाजार शेड निर्माण के भूमिपूजन का कार्यक्रम निगम के जाने 1 के अधिकारियों द्वारा आयोजित किया गया था जिसमे ंनिगम महापौर देवेन्द्र यादव मुख्य अतिथि थे, उनके साथ सीजू एंथोनी, सुभद्रा सिंह एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष तुलसी साहू, नर्सिंग नाथ, जावेद सहित कई कांग्रेसी मोैजूद थे, हुडको की कई महिलाएं पार्षद दिनेश यादव, सुलेखा खटिक, संजय दानी, नितेश मिश्रा, राहुल भोसले, सोमेश त्रिवेदी, शशिकला यादव, दुर्गा गुप्ता, भारती उईके, रश्मि भण्डाकर सहित अन्य लोगों ने  स्पष्ट कहा कि यहां पर दशहरा पर्व, दुर्गाउत्सव, गणेश उत्सव, डांडिया सहित कई मल्टीपरपज प्रोग्राम इस गं्राउण्ड में कई वर्षो से हो रहे है, शेड निर्माण हो जाने से ग्राउण्ड घिर जायेगा और इस तरह के आयोजन करना यहां मुश्किल हो जायेगा।
          इस दौरान यहां की नाराज महिलाएं विधायक यादव क ेसामने आकर कहने लगी कि यहां शाम 7 बजते ही इस मैदान में बड़ी संख्या में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा हो जाता है और देर रात तक यहां शराबखोरी के साथ अन्य प्रकार के नशा करने के अलावा अन्य कई प्रकार के गलत कृत्य करते है, और शोर भी मचाते है, उनको टोका टिप्पणी करने में गंदी गंदी गालियां हमें देते है और कहते है जिसके पास और जहां जाना है शिकायत कर लो हमारा कोई कुछ नही बिगाड़ सकता। इन आसामाजिक तत्वों के कारण हमारा घर से निकलना मुश्किल हो गया है, यही कुछ साल पहले तक हम लोग इस मैदान में बेखौफ होकर टहलते थे, लेकिन आज हम घर से निकलने में इन आसामाजिक तत्वों के कारण डरने लगे है क्येांकि घर से हम लोगों के निकलने पर ये असामाजिकतत्व हमारे साथ छेडख़ाने जैसी हरकत करने से भी बाज नही आते। इन लोगों को पुलिस का खौफ बिल्कुल नही है। वहीं देवेन्द यादव ने 32 बंगला के पीछे स्थित रहने वाले रहवासियों से भी मिले। यहां के लोगों ने उन्हें बताया कि यहां हम लोग 50 साल से रहते है लेकिन आज तक कोई हमे पूछने नही आया लेकिन आज आप पहले नेता हो जो हमारा हाल चाल जानने हमारे पास आये हो। इस अवसर पर देवेन्द्र ने कहा कि मैँ नेता नही बल्कि आपका बेटा हूं। यहां की महिलाओं ने उनकी आरती भी उतारी। वहां पर श्री यादव ने निगम अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस क्षेत्र से संबंधित विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव बनाओं कि यहां क्या क्या किया जा सकता है।
     
    महापौर ने कहा जनता के मांग के अनुरूप होगा कार्य
    इस पूरे मामले में देवेन्द्र यादव ने स्पष्ट कहा कि पौनी पसारी योजना के अंतर्गत होने वाला शेड निर्माण नही होगा। इस लाल मैदान में अंडा चौक की तर्ज पर स्टेडियम निर्माण सहित चारो ओर फेंसिंग कार्य करायेंगे और हाईटेक लाईट भी लगवाया जायेगा, अंत में उन्होंने भाजपा के दोनो पार्षद व अन्य नेताओं की मौजूदगी में नारियल फोड़कर यहां स्टेडियम बनाये जाने की अपने सहमति दे डाली और कहा कि क्षेत्र की जनता जो कहेगी मैं वही कहूंगा। चूकि चुनाव से पहले मैं जब वार्डो ंमें घूूूमता था तब जनता की ही मांग हुआ करती थी कि यहो पर इस तरह के और उस तरह के कार्य हो, मैं जो भी करूंगा जनता की मांग के अनुरूप करूंगा। वहीं उन्होंने थानेदार को भ निर्देशित किया कि हुडको सहित मैदान और गार्डन में लगातार पेट्रोलिंग कराये और असामाजिक तत्वों पर शिकंजा कसे।
     
     
    विधायक एवं महापौर ने खोला हुडकों के लिए खजाना
    तीन करोड़ से अधिक का होगा दोनो वार्ड में विकास कार्य
    विधायक एवं महापौर देवेन्द्र यादव ने हुडकों के विकास के लिए खजाना खोल दिया है। उन्होने हुडको वार्ड  के दोनो वार्डो के लिए 3 करोड़ से अधिक की राशि मुख्यंत्री के मांग कर लाये हैं। हुडकों के वार्ड70 में गुरूद्वारा हाल में संधारण कार्य के लिए 10 लाख, सियान सदन में संधारण कार्य हेतु 3 लाख,  32 बंगला के पीछे तीन बोर खनन के लिए 3 लाख, एलआईजी क्षेत्र में गार्डन निर्माण के लिए 4.98  लाख, एचआईजी मे ंगार्डन निर्माण के लिए 19 लाख, हुडको बी मार्केट में पेवर ब्लॉक हेतु 3 लाख, ए मार्केट में पेवर ब्लॉक हेतु 3 लाख, पीछे वाले रोड के लिए 52 लाख, हुडकों मुख्य रोड में रोड किनारे के लिए पेवर ब्लॉक 29.8 लाख, शहीद चौक के बाजू मे ंशिव मंदिर के चारो ओर चयनलिंग और फेंसिंग हेतु 2. 65 लाख, महाराष्ट्र सांस्कृति भवन के पास शेड निर्माण के लिए 6 लाख, चौरसिया समाज तक रोड निर्माण कार्य हेतु 20 लाख, एचआईजी मे ंडामरीकरण हेतु 17 लाख से होने वाले इन कायोंं के लिए टेंडर हो गये है वहीं कई कार्यों का कार्य भी प्रारंभ हो गया है। इसके अलावा अन्य कई कार्येँ हेतु लाखों रूपये की स्वीकृति दिलवाये है, जो बचे शेष कार्य है वह भी शीघ्र ही प्रारंभ हो गये है।  इसके अलावा आगे भी जनता की मांग के अनुरूप कार्य किया जायेगा।
     

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