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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
लेख : राजनीतिक विश्लेषण
दुर्ग। दुर्ग नगर निगम की राजनीति इन दिनों विकास से अधिक गुटबाजी और शक्ति प्रदर्शन की चर्चाओं के केंद्र में दिखाई दे रही है। बरसात की शुरुआत के साथ जहां शहर के अनेक वार्ड जलभराव, सफाई व्यवस्था, गड्ढों, बदबू और मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निगम के बड़ी संख्या में पार्षदों का केरल भ्रमण राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पहले कुछ पार्षदों के साथ पुरी यात्रा की तैयारी चल रही थी, लेकिन अचानक केरल यात्रा का कार्यक्रम सामने आया और अधिकांश पार्षद उसी ओर रवाना हो गए। इसे लेकर तरह-तरह की राजनीतिक व्याख्याएं की जा रही हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर यह केवल पर्यटन है या इसके पीछे भविष्य की राजनीतिक रणनीति भी आकार ले रही है?
यात्रा बनी शक्ति प्रदर्शन का माध्यम?
इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें केवल एक दल के नहीं, बल्कि कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय पार्षद भी एक साथ दिखाई दिए। इससे यह संदेश गया कि स्थानीय राजनीति में वैचारिक सीमाओं से अधिक व्यक्तिगत समीकरण और गुटीय संतुलन प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े समूह का एक मंच पर आना भविष्य की राजनीतिक दिशा का संकेत माना जाता है। ऐसे में यह यात्रा केवल पर्यटन न होकर शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखी जा रही है।
खर्च को लेकर भी उठ रहे सवाल
यात्रा के खर्च को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ पार्षदों का दावा है कि प्रति व्यक्ति 10 से 15 हजार रुपये का योगदान लिया गया, जबकि सामान्य यात्रा व्यय का अनुमान इससे कहीं अधिक बताया जा रहा है। ऐसे में शहर में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि वास्तविक खर्च अधिक है तो शेष राशि की व्यवस्था किसने की?
हालांकि इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर लगातार अटकलों का दौर जारी है।
वार्डों की चिंता या राजनीतिक गणित?
बरसात के मौसम में शहर के अनेक हिस्सों में जल निकासी, कचरा प्रबंधन और सड़क मरम्मत जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। ऐसे समय में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों का एक साथ लंबी यात्रा पर जाना नागरिकों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।
आलोचकों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की पहली प्राथमिकता अपने वार्ड की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, जबकि समर्थकों का तर्क है कि जनप्रतिनिधियों को भी समय-समय पर सामूहिक संवाद और विश्राम का अवसर मिलना चाहिए। इन दोनों दृष्टिकोणों के बीच जनता अपने सवालों के उत्तर तलाश रही है।
गुटबाजी का नया अध्याय?
दुर्ग निगम की राजनीति पिछले कुछ समय से लगातार गुटीय समीकरणों के कारण सुर्खियों में रही है। सामान्य सभा से लेकर विकास कार्यों तक कई बार मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। अब केरल यात्रा ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यदि निगम की राजनीति में कोई बड़ा घटनाक्रम होता है, तो इस यात्रा को उसके शुरुआती संकेतों में गिना जा सकता है। हालांकि यह केवल राजनीतिक विश्लेषण है और भविष्य की दिशा आने वाला समय ही तय करेगा।
जनता पूछ रही है...
जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता शहर का विकास है या राजनीतिक गुटों का विस्तार? आखिर वार्डों की समस्याओं के बीच पर्यटन को प्राथमिकता क्यों मिली? और यदि यह केवल निजी यात्रा थी, तो इतनी बड़ी संख्या में पार्षदों का एक साथ जाना संयोग है या किसी बड़े राजनीतिक समीकरण का हिस्सा?
अंतिम बात
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को यात्रा करने, संवाद करने और राजनीतिक रणनीति बनाने का पूरा अधिकार है। लेकिन उसी लोकतंत्र में जनता को यह अपेक्षा भी रहती है कि उसके प्रतिनिधि सबसे पहले उसके वार्ड, उसकी सड़क, उसकी नाली और उसकी मूलभूत समस्याओं को प्राथमिकता दें।
केरल यात्रा समाप्त हो जाएगी, तस्वीरें भी सोशल मीडिया से धीरे-धीरे गायब हो जाएंगी, लेकिन शहर की टूटी सड़कें, जलभराव, कचरे के ढेर और जनता के सवाल वहीं रहेंगे। अब निगाहें इस बात पर हैं कि यात्रा से लौटने के बाद जनप्रतिनिधि विकास की नई पटकथा लिखेंगे या फिर दुर्ग की राजनीति में किसी नए "ऑपरेशन" की शुरुआत होगी।
28 जून तक नामांकन, ऑनलाइन मतदान से होगा नए अध्यक्ष का चुनाव; संगठन ने अपनाया निष्पक्ष रुख
दुर्ग। दुर्ग शहर युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव ने अब पूरी तरह राजनीतिक सरगर्मी पैदा कर दी है। नामांकन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और 28 जून तक नामांकन दाखिल किए जा रहे हैं। चुनाव की तिथि की आधिकारिक घोषणा भले अभी शेष हो, लेकिन यह तय है कि मतदान पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से कराया जाएगा।
वर्तमान चुनावी परिदृश्य में ऋषि साहू और मनीष सोनवानी सबसे मजबूत दावेदारों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। दोनों युवा नेता लगातार कार्यकर्ताओं और युवा मतदाताओं के बीच जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। संगठन के भीतर भी दोनों की सक्रियता और स्वीकार्यता को लेकर सकारात्मक चर्चा है।
सूत्रों के अनुसार, रौनक दुबे ने भी अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है, जिससे चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की नजर फिलहाल मुख्य रूप से ऋषि साहू और मनीष सोनवानी के बीच बनते मुकाबले पर टिकी हुई है।
संगठन ने नहीं खोले अपने पत्ते
इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संगठन ने किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है। संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि "सभी प्रत्याशी हमारे अपने हैं। जो कार्यकर्ताओं का अधिक विश्वास प्राप्त करेगा, वही विजयी होगा। संगठन पूरी तरह निष्पक्ष है।"
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन का यह निर्णय भविष्य में किसी प्रकार की गुटबाजी से बचने और लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
35 वर्ष तक के युवाओं को मिलेगा मतदान का अधिकार
युवा कांग्रेस के संगठनात्मक नियमों के अनुसार अध्यक्ष पद के चुनाव में 35 वर्ष तक की आयु वाले सदस्य ही मतदान कर सकेंगे। मतदान ऑनलाइन होने से युवा मतदाताओं में भी उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है।
जीत किसी की भी हो, संगठन रहेगा मजबूत
चुनावी प्रतिस्पर्धा के बावजूद सबसे सकारात्मक संदेश दोनों प्रमुख दावेदारों की ओर से सामने आया है। ऋषि साहू और मनीष सोनवानी दोनों ने स्पष्ट कहा है कि चुनाव परिणाम चाहे जो भी हो, वे मिलकर संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने का कार्य करेंगे। दोनों नेताओं ने आपसी सामंजस्य और कांग्रेस संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
वरिष्ठ नेताओं का मिल रहा निष्पक्ष सहयोग
इस पूरे चुनाव में वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं द्वारा भी निष्पक्ष भूमिका निभाई जा रही है। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी सभी दावेदारों को समान अवसर देने और चुनाव प्रक्रिया को लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी बनाने पर जोर दे रहे हैं।
बूथ स्तर तक संगठन विस्तार पर रहेगा फोकस
दुर्ग युवा कांग्रेस का यह चुनाव केवल नए अध्यक्ष के चयन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी राजनीतिक चुनौतियों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस संगठन लगातार बूथ स्तर तक अपनी सक्रियता बढ़ाने की रणनीति पर कार्य कर रहा है और माना जा रहा है कि नया युवा अध्यक्ष संगठन की इस रणनीति को और गति देगा।
अब सभी की निगाहें ऑनलाइन मतदान की तिथि की आधिकारिक घोषणा और नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद बनने वाले अंतिम चुनावी समीकरणों पर टिकी हुई हैं।
140 आवेदनों के साथ जनता पहुंची कलेक्टर दरबार, भूमि, आवास और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे रहे प्रमुख
दुर्ग। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम एक बार फिर आम नागरिकों की उम्मीदों का केंद्र बना, जहां विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर बड़ी संख्या में लोग कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित जनदर्शन में कलेक्टर अभिजीत सिंह ने स्वयं लोगों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
जनदर्शन में कुल 140 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें अवैध कब्जा, भूमि सीमांकन, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास योजना, सीसी रोड निर्माण, ऋण पुस्तिका सुधार, आर्थिक सहायता एवं अन्य जनहित से जुड़े मामले शामिल रहे। कलेक्टर ने कई मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
28 साल बाद भी नहीं मिला पट्टे की जमीन का पता
जनदर्शन में सबसे मार्मिक मामला भिलाई की एक विधवा महिला का सामने आया। महिला ने बताया कि वर्ष 1998 में राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत उनके और उनके दिवंगत पति के नाम पर भू-स्वामित्व पट्टा जारी किया गया था, लेकिन लगभग तीन दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें अपनी जमीन का वास्तविक स्थान नहीं बताया गया।
महिला ने प्रशासन को बताया कि वर्तमान में वह बीएसपी क्वार्टर में निवास कर रही हैं और जर्जर आवासों को तोड़े जाने की प्रक्रिया के चलते उनका परिवार आवासीय संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने पट्टे की भूमि का चिन्हांकन कर कब्जा दिलाने तथा मकान निर्माण की अनुमति प्रदान करने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तहसील नजूल को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
फोरलेन सड़क के मापदंड पर उठे सवाल
बोरसी क्षेत्र के नागरिकों ने प्रस्तावित फोरलेन सड़क निर्माण में एक समान मानक अपनाने की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया। नागरिकों का कहना था कि महाराजा चौक से बोरसी चौक तक अधिकांश हिस्सों में सड़क चौड़ीकरण 20 मीटर के मानक पर किया जा रहा है, जबकि एक विशेष हिस्से में 22 मीटर चौड़ाई प्रस्तावित है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इससे उनकी निजी संपत्तियां प्रभावित होंगी। उन्होंने पूरे मार्ग में समान रूप से 20 मीटर चौड़ाई के आधार पर नापजोख कराने की मांग की। इस पर कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को परीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
50 कुत्तों से दहशत, रहवासियों ने मांगी राहत
पदमनाभपुर क्षेत्र के शकुंतला नगरवासियों ने एक आवास में बड़ी संख्या में पालतू कुत्ते रखे जाने की शिकायत दर्ज कराई। आवेदकों के अनुसार संबंधित मकान में लगभग 50 कुत्ते रखे गए हैं, जिन्हें कई बार बिना निगरानी के बाहर छोड़ दिया जाता है।
रहवासियों ने बताया कि कुत्तों के झुंड के कारण क्षेत्र में भय का वातावरण बना हुआ है तथा राहगीरों और मवेशियों पर हमले की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इस संबंध में पूर्व में थाना पदमनाभपुर में शिकायत देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने की बात कही गई। कलेक्टर ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई हेतु एसडीएम दुर्ग को निर्देशित किया।
जनदर्शन बना उम्मीदों का मंच
जनदर्शन में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट किया कि नागरिक आज भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन को सबसे भरोसेमंद मंच मानते हैं। भूमि, आवास, सड़क और सुरक्षा जैसे मुद्दे सीधे आम जनजीवन से जुड़े हैं और इनके समाधान की अपेक्षा प्रशासन से की जाती है।
कलेक्टर द्वारा कई मामलों में तत्काल संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह बनाना यह संकेत देता है कि प्रशासन समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर है। अब नागरिकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जनदर्शन में दिए गए निर्देश धरातल पर कितनी तेजी से अमल में आते हैं।
काला दिवस मनाने वाली भाजपा को कांग्रेस का पलटवार, कहा- संवैधानिक आपातकाल और वर्तमान हालात की तुलना नहीं छिपा सकती सच्चाई
रायपुर। आपातकाल की बरसी पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा मनाए जा रहे "काला दिवस" को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा आज भाजपा का अलोकतांत्रिक चरित्र बन चुका है।
दीपक बैज ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल संविधान के प्रावधानों के तहत लागू किया गया था। उस समय देश में उत्पन्न परिस्थितियों और आंतरिक संकट को देखते हुए राष्ट्रपति द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आपातकाल की घोषणा की गई थी, जिसे निर्धारित समय के बाद समाप्त भी कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आज उस ऐतिहासिक घटना को राजनीतिक हथियार बनाकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वास्तविक चिंता का विषय वर्तमान परिस्थितियां हैं, जहां लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर लगातार प्रश्न उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा है, विपक्षी दलों को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं तथा केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक उपयोग हो रहा है।
बैज ने दावा किया कि चुनाव आयोग, जांच एजेंसियों और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं पर कार्रवाई, दल-बदल की राजनीति और निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चुनौती हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, करों का बोझ, पेपर लीक की घटनाएं और आम नागरिकों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं होता, बल्कि जनता की आवाज को सुनना और संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखना भी उसकी मूल आत्मा है।
दीपक बैज ने कहा कि जो संगठन और राजनीतिक दल कभी आपातकाल के विरोध को अपना प्रमुख मुद्दा बनाते थे, वे आज अपनी ही सरकार के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों पर उठ रहे सवालों पर मौन दिखाई देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों, युवाओं और विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए प्रशासनिक और कानूनी तंत्र का उपयोग किया जा रहा है।
कांग्रेस ने भाजपा द्वारा मनाए जा रहे काला दिवस को राजनीतिक दिखावा बताते हुए कहा कि यदि लोकतंत्र और संविधान की वास्तविक चिंता है तो पहले वर्तमान व्यवस्था में उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। वहीं भाजपा लगातार कांग्रेस पर आपातकाल के ऐतिहासिक अध्याय को लेकर निशाना साध रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आपातकाल की बरसी को लेकर छिड़ा यह विवाद आने वाले समय में केंद्र और विपक्ष के बीच वैचारिक संघर्ष को और तीखा कर सकता है। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा दोनों लोकतंत्र, संविधान और संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रही हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म होने के संकेत मिल रहे हैं।
शौर्यपथ ब्यूरो, नई दिल्ली।
'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' के संकल्प को नई ऊंचाई देते हुए इस्पात मंत्रालय के अधीन महारत्न कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (SAIL) ने देश की समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाने में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। भारतीय नौसेना के बेड़े में हाल ही में शामिल किए गए तीन अत्याधुनिक और उन्नत जहाजों के निर्माण के लिए सेल ने अकेले ही 5,700 टन विशेष रक्षा-ग्रेड (Defense-Grade) स्टील की आपूर्ति की है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में किया कमीशन
इन तीनों उन्नत और स्वदेशी जहाजों को 21 जून, 2026 को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर आयोजित एक ऐतिहासिक और भव्य समारोह के दौरान माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल (कमिशन) किया गया। इन जहाजों में शामिल हैं:
आईएनएस दूनागिरी (INS Dunagiri): उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट
आईएनएस अग्रय (INS Agray): एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट
आईएनएस संशोधक (INS Sanshodhak): विशाल सर्वेक्षण पोत (लार्ज)
भिलाई, बोकारो और राउरकेला प्लांट का साझा पराक्रम
सेल ने इन तीनों अत्याधुनिक जहाजों की सुरक्षा और मजबूती के लिए विशेष गुणवत्ता वाले DMR 249A ग्रेड हॉट-रोल्ड शीट और प्लेट की सप्लाई की है। इस विशिष्ट डिफेंस ग्रेड स्टील का उत्पादन सेल ने अपने तीन प्रमुख संयंत्रों के जरिए किया है:
भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP)
बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL)
राउरकेला इस्पात संयंत्र (RSP)
इस उच्च स्तरीय स्टील का बेहद सावधानीपूर्वक किया गया उत्पादन यह प्रमाणित करता है कि 'सेल' के पास देश की समुद्री सुरक्षा की जटिल और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए विश्वस्तरीय तकनीकी क्षमता मौजूद है।
आयात पर निर्भरता खत्म, राउरकेला में उत्पादन क्षमता बढ़ी
रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती जरूरतों और विदेशी आयात को प्रतिस्थापित (Import Substitution) करने के लिए सेल ने अपनी कमर कस ली है। कंपनी ने डीएमआर (DMR) ग्रेड प्लेटों का उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष रूप से राउरकेला स्टील प्लांट के 'स्पेशल प्लेट प्लांट' में अतिरिक्त एवं आधुनिक पहल लागू किए हैं, ताकि भारतीय सेनाओं को कभी भी स्टील की कमी न हो।
शानदार है सेल का ट्रैक रिकॉर्ड (देश के समुद्री रक्षक)
यह पहली बार नहीं है जब सेल के फौलाद ने देश की सीमाओं को सुरक्षित किया है। इससे पहले सेल ने:
भारत के पहले स्वदेशी विमान वाहक आईएनएस विक्रांत के लिए स्टील दिया।
विशिष्ट प्रोजेक्ट 17A स्टील्थ फ्रिगेट्स - आईएनएस नीलगिरि, आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि का निर्माण किया।
इसके अलावा आईएनएस अजय, आईएनएस निस्तार और आईएनएस अंजदीप जैसे शक्तिशाली जहाजों की रीढ़ भी सेल का विशेष स्टील ही है।
"रणनीतिक स्वतंत्रता को मिलेगी मजबूती" — डॉ. अशोक कुमार पंडा (सीएमडी, SAIL)
सेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. अशोक कुमार पंडा ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा, "भारत के रक्षा क्षेत्र के एक प्रमुख भागीदार के रूप में, SAIL देश की आत्मनिर्भरता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमने रक्षा क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए राउरकेला के स्पेशल प्लेट प्लांट की उत्पादन क्षमता को पहले ही अपग्रेड कर दिया है। इन उच्च-क्षमता वाली DMR 249A स्टील प्लेटों की आपूर्ति न केवल भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता को मजबूती देती है, बल्कि यह सेल की अत्याधुनिक तकनीकी विशेषज्ञता का भी जीता-जागता प्रमाण है।"
शौर्यपथ संवाददाता, भिलाई।
सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के सिन्टरिंग प्लांट-3 (SP-3) के एरिया रिपेयर शॉप से आत्मनिर्भरता और बेहतरीन टीमवर्क की एक अनूठी मिसाल सामने आई है। यहाँ पिछले 9 वर्षों (वर्ष 2017) से विभिन्न तकनीकी खराबियों के कारण कबाड़ और निष्क्रिय पड़ी एचएमटी निर्मित ड्रिलिंग मशीन (मॉडल आरएम-62) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार (Restoration) कर उसे फिर से चालू कर दिया गया है।
24 जून 2026 को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इस पुनरुद्धारित मशीन का भव्य लोकार्पण किया गया।
दिग्गज अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ लोकार्पण
मशीन के पुनः संचालन के अवसर पर बीएसपी के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:
श्री सजीव वर्गीज - मुख्य महाप्रबंधक (SP-3 एवं OHP)
श्री डी. जगदीश - महाप्रबंधक (MARS-1)
श्री राहुल बिजुरकर - महाप्रबंधक प्रभारी (SP-3)
श्री आई. वी. रमणा - महाप्रबंधक (मैकेनिकल, SP-3)
अधिकारियों का संदेश: "आंतरिक संसाधनों, तकनीकी दक्षता और समन्वित टीमवर्क के माध्यम से इस मशीन का पुनरुद्धार बीएसपी की आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट उदाहरण है। भविष्य में भी ऐसी परिसंपत्ति पुनर्स्थापन (Asset Restoration) पहलों को बढ़ावा दिया जाएगा।"
चुनौतीपूर्ण था सफर: गायब थे स्पेयर्स और तकनीकी दस्तावेज
यह मशीन 2017 से यांत्रिक (Mechanical), विद्युत (Electrical) और हाइड्रोलिक खराबियों के कारण बंद थी। मूल इलेक्ट्रिकल सर्किट डायग्राम (विद्युत परिपथ आरेख) और जरूरी स्पेयर्स न होने के कारण इसका सुधरना नामुमकिन लग रहा था। लेकिन SP-3 की बहु-विभागीय टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया।
इन विभागों और 'मास्टर्स' के तालमेल से हुआ कमाल
मशीन को दोबारा जिंदा करने में संयंत्र के विभिन्न विभागों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया:
यांत्रिक पुर्जों का निर्माण (MARS-1): क्षतिग्रस्त पार्ट्स का निर्माण महाप्रबंधक श्री डी. जगदीश एवं इंजीनियरिंग एसोसिएट श्री हेमंत वानखेड़े के मार्गदर्शन में मार्स-1 मशीन शॉप में किया गया।
गुमशुदा दस्तावेजों की खोज (HRDC): मूल विद्युत आरेख न होने पर मानव संसाधन विकास केंद्र के प्रशिक्षण अनुभाग से श्री ए. के. तिवारी ने आवश्यक तकनीकी दस्तावेज खोजकर उपलब्ध कराए।
विद्युत प्रणाली का पुनरुद्धार: महाप्रबंधक श्री एस. एस. मौरी, उप महाप्रबंधक श्री दीपक कुमार गुप्ता तथा सहायक महाप्रबंधक श्री एस. सी. साहू के नेतृत्व में इलेक्ट्रिकल सिस्टम को पूरी तरह ठीक किया गया।
हाइड्रोलिक सिस्टम की ओवरहॉलिंग: स्नेहन दल द्वारा सहायक प्रबंधक श्री अशोक राव ठाकरे के नेतृत्व में हाइड्रोलिक प्रणाली को दुरुस्त किया गया।
इनका भी रहा विशेष योगदान: इस पूरे प्रोजेक्ट के सफल निष्पादन में उप महाप्रबंधक श्री एम. यू. राव, वरिष्ठ प्रबंधक श्री जितेश एच. शाहनी, वरिष्ठ प्रबंधक श्री विपिन मौर्य तथा सहायक महाप्रबंधक श्री राजेश साहू के नेतृत्व में मैकेनिकल मेंटेनेंस प्लानिंग एवं एरिया रिपेयर शॉप की टीमों की मुख्य भूमिका रही।
मशीन शुरू होने से बीएसपी को क्या होगा फायदा?
क्षमता में वृद्धि: एरिया रिपेयर शॉप की मशीनिंग और फैब्रिकेशन क्षमताओं को भारी मजबूती मिलेगी।
काम में तेजी: ड्रिलिंग कार्यों के निष्पादन में अब काफी तेजी आएगी।
पैसों की बचत: अनुरक्षण (Maintenance) कार्यों के लिए जरूरी स्पेयर्स का आंतरिक निर्माण अब प्लांट के भीतर ही प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
घटेगी निर्भरता: विशेष ड्रिलिंग कार्यों के लिए अब केंद्रीय इंजीनियरिंग शॉप्स (Central Engineering Shops) पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
शौर्यपथ संवाददाता, भिलाईनगर।
शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के उद्देश्य से नगर पालिक निगम भिलाई ने अतिक्रमण और गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के कड़े निर्देशों के बाद, जोन-3 (मदर टेरेसा नगर) की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
क्या था पूरा मामला?
पावर हाउस रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने, 'जगदम्बा स्वीट्स' के पास का इलाका लंबे समय से अव्यवस्था का केंद्र बना हुआ था। यहाँ कुछ कबाड़ियों द्वारा बड़े पैमाने पर कबाड़ और कचरा फैलाकर रखा गया था, जिससे न केवल शहर की खूबसूरती पर दाग लग रहा था, बल्कि राहगीरों और यात्रियों का वहां से गुजरना भी दुश्वार हो गया था।
मौके पर निगम का दस्ता पहुँचा और की जप्ती
निगम को मिली शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई की। स्थल पर भारी मात्रा में फैला कबाड़ और अनुपयोगी कचरा जब्त कर लिया गया। इस दौरान जोन स्वास्थ्य अधिकारी, स्वच्छता निरीक्षक और राजस्व विभाग के सुपरवाइजर सहित निगम का पूरा अमला मौजूद रहा।
निगम की दो टूक: नहीं बख्शे जाएंगे सार्वजनिक स्थल गंदा करने वाले
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सार्वजनिक स्थलों को अपना 'स्टोर रूम' समझने वाले व्यवसायियों के खिलाफ भविष्य में और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। निगम ने आम नागरिकों और व्यवसायियों से अपील की है कि वे भिलाई को 'क्लीन और ग्रीन' बनाने में प्रशासन का सहयोग करें और किसी भी प्रकार का कचरा या कबाड़ सार्वजनिक स्थानों पर न फैलाएं।
शौर्यपथ संवाददाता, भिलाईनगर।
शासन के मंशानुरूप नागरिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और निगम के कामकाज को अधिक पारदर्शी व हाईटेक बनाने के लिए नगर पालिक निगम भिलाई में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। निगम आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सीएम हेल्पलाइन नंबर 1076 और ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से रणनीति बनाई गई।
निगम सभागार में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य कार्यालय सहित सभी जोन कार्यालयों के अधिकारी, लिपिक (क्लरिक्स) और कंप्यूटर ऑपरेटर मुख्य रूप से शामिल हुए।
शिकायतों का होगा समयबद्ध निवारण: सीएम हेल्पलाइन 1076
बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर आने वाली नागरिकों की हर शिकायत और मांग को गंभीरता से लिया जाए।
पारदर्शिता और गति: इसके माध्यम से आम जनता की समस्याओं का एक तय समय-सीमा (टाइम-बाउंड) के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
समस्याओं का समाधान: पोर्टल संचालन के दौरान मैदानी स्तर पर आ रही तकनीकी और प्रक्रियागत दिक्कतों पर भी चर्चा कर मौके पर ही उनका समाधान निकाला गया।
कागजी फाइलों से मुक्ति, ई-ऑफिस से बढ़ेगी कार्यक्षमता
निगम के प्रशासनिक कार्यों में गति लाने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली पर विशेष जोर दिया गया। इस प्रणाली के लागू होने से:
फाइलों का संचालन अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित होगा।
कार्यों में पारदर्शिता आएगी और लेटलतीफी पर लगाम लगेगी।
कर्मचारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए बताया गया कि कैसे नस्तियों (फाइलों) को लिपिक स्तर से उच्च अधिकारियों तक ऑनलाइन अनुमोदन (Approval) के लिए भेजा जाए।
आयुक्त के कड़े निर्देश: कार्यों को बनाएं पेपरलेस
निगम आयुक्त ने बैठक में मौजूद सभी अधिकारी-कर्मचारियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया कि सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों को 'टॉप प्रायोरिटी' (प्राथमिकता) पर रखते हुए तुरंत निपटाएं। साथ ही, उन्होंने ई-ऑफिस प्रणाली का अधिकतम उपयोग करने को कहा ताकि निगम के कामकाज को पूरी तरह पेपरलेस और पारदर्शी बनाया जा सके, जिससे आम नागरिकों को घर बैठे बेहतर और सुलभ सेवाएं मिल सकें।
शौर्यपथ संवाददाता, डौंडीलोहारा (लोकेश कुमार साहू)।
बालोद ।
छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत संचालनालय द्वारा ग्रामीण विकास को गति देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। शासन ने बालोद जिले की सभी 436 ग्राम पंचायतों को मूलभूत और आवश्यक कार्यों को पूरा करने के लिए कुल 338.19 लाख रुपये (3.38 करोड़ रुपये) की राशि जारी कर दी है। इस राशि से गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास तेजी से हो सकेगा।
जनसंख्या के आधार पर होगा राशि का वितरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासन द्वारा जारी की गई इस राशि का आवंटन ग्राम पंचायतों को उनकी जनसंख्या के मापदंड के आधार पर किया जा रहा है। जिस पंचायत की आबादी जितनी अधिक होगी, उसे विकास कार्यों के लिए उसी अनुपात में राशि का हस्तांतरण किया जाएगा।
डौण्डीलोहारा विकासखण्ड को मिली बड़ी सौगात
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) सुनील चन्द्रवंशी ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि आवंटित की गई कुल राशि में से डौण्डीलोहारा विकासखण्ड को एक बड़ा हिस्सा मिला है।
डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाली 120 ग्राम पंचायतों के खातों में कुल 78.51 लाख रुपये की राशि सफलतापूर्वक हस्तांतरित कर दी गई है।
ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार
पंचायतों को यह राशि सीधे मिलने से अब गांवों में पानी, बिजली, साफ-सफाई, और छोटी-मोटी मरम्मतों जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मूलभूत कार्यों के लिए फंड की कमी नहीं होगी। जिला प्रशासन द्वारा सभी ग्राम पंचायतों को प्राप्त राशि का नियमानुसार और पारदर्शिता के साथ जनहित के कार्यों में उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इस आवंटन से जिले के सरपंचों और ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है।
*हॉर्नबिल संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार का नया अवसर*
*पीवीटीजी गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में बढ़ी मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या*
रायपुर / 'हॉर्नबिल सफारी' से तात्पर्य हॉर्नबिल पक्षियों को देखने के लिए की जाने वाली वन्यजीव सफारी या हॉर्नबिल से जुड़े प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से है। हॉर्नबिल मुख्य रूप से जंगलों, विशेषकर पश्चिमी घाट और मध्य भारत के नम पर्णपाती और सदाबहार वनों में रहना पसंद करता है।
*‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का लिया गया निर्णय*
छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक विकास को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल पर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में ‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। यह पहल दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित करेगी।
*संरक्षण और आजीविका को साथ लेकर आगे बढ़ रहा वन विभाग*
वन मंत्री श्री केदार कश्यप की सोच के अनुरूप वन विभाग वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण कार्यों को स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आजीविका से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री ओ.पी. यादव के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कई नवाचार किए जा रहे हैं, जिनसे वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास को एक साथ बढ़ावा मिल रहा है।
*चार वर्षों में बढ़ी हॉर्नबिल की आबादी*
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों के दौरान मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह सफलता एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, फलदार वृक्षों के संरक्षण एवं रोपण तथा ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी अभिनव पहल का परिणाम है। स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
*हॉर्नबिल ट्रैकिंग टीम निभा रही महत्वपूर्ण भूमिका*
हॉर्नबिल संरक्षण के लिए गठित विशेष ट्रैकिंग टीम लगातार पक्षियों की गतिविधियों, घोंसलों और आवास क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ स्थानीय ट्रैकर्स भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं। उनके सतत प्रयासों से ओढ़, अमलोर और आमामोरा के आसपास का वन क्षेत्र आज हॉर्नबिल के सुरक्षित आवास और आकर्षक बर्डिंग स्थल के रूप में विकसित हो चुका है।
*प्रकृति प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए बनेगा नया आकर्षण*
प्रस्तावित हॉर्नबिल सफारी के माध्यम से पर्यटक, पक्षी प्रेमी, वन्यजीव फोटोग्राफर और शोधकर्ता प्राकृतिक वातावरण में हॉर्नबिल का अवलोकन कर सकेंगे। सफारी के संचालन के लिए प्रारंभिक चरण में दो जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है।
*स्थानीय युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार*
हॉर्नबिल सफारी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता स्थानीय समुदायों की भागीदारी है। पीवीटीजी गांवों के युवाओं और ग्रामीणों को बर्ड वॉचिंग तथा नेचर गाइड का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वे पर्यटकों के लिए नेचर गाइड और हॉर्नबिल गाइड के रूप में कार्य करेंगे। इससे उन्हें स्थायी आय और रोजगार का अवसर मिलेगा तथा सामुदायिक आधारित इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
*मध्य भारत का उभरता बर्डिंग डेस्टिनेशन*
रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग और नेचर टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, विभिन्न प्रजातियों के कठफोड़वा, बार्बेट, मिनिवेट सहित अनेक स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की विविधता देखने को मिलती है।
*वन्यजीवों की समृद्ध जैव विविधता का केंद्र*
यह क्षेत्र पक्षियों के साथ-साथ भारतीय विशाल गिलहरी (इंडियन जायंट स्क्विरल) और भारतीय विशाल उड़न गिलहरी (इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल) जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यह क्षेत्र प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
*संरक्षण, विकास और पर्यटन का सफल संगम*
विशेषज्ञों के अनुसार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में की जा रही यह पहल इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि वैज्ञानिक वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सहभागिता के माध्यम से संरक्षण आधारित आजीविका और सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। हॉर्नबिल सफारी के शुरू होने से छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और ग्रामीण विकास को भी गति प्राप्त होगी। मोबाइल नंबर - 7976688165, 7566510937
वेबसाइट - : www.udantisitanaditigerreserve.in पर पर्यटक, संपर्क कर विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।
*ग्राम सभाओं के माध्यम से दी जा रही योजना की जानकारी, मानव श्रृंखला बनाकर ग्रामीणों ने दिया जनजागरूकता का संदेश*
*केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी की मानव श्रृंखला द्वारा जागरूकता की सराहना*
रायपुर / प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को आजीविका और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 से लागू की जा रही वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना को लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला स्तर पर लगातार प्रशिक्षण, बैठकें और ग्राम सभाएं आयोजित कर ग्रामीणों को योजना के विभिन्न प्रावधानों एवं लाभों की जानकारी दी जा रही है।
*सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने बनाई मानव श्रृंखला*
योजना के प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न गांवों में आयोजित ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर योजना की जानकारी प्राप्त की तथा इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग का संकल्प लिया। इसी क्रम में बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत बेरला की ग्राम पंचायत सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अनूठी पहल करते हुए मानव श्रृंखला का निर्माण किया। ग्रामीणों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां लेकर “वीबी जी राम जी - गांव की प्रगति, हम सबकी जिम्मेदारी”, “रोजगार और आजीविका का नया संबल” तथा “समृद्ध गांव, सशक्त परिवार” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
*केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की सराहना*
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने एक्स अकॉउंट से पोस्ट कर लिखा कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आई इस तस्वीर को देखकर मन आनंद और उत्साह से भर गया। यह तस्वीर गाँव की जनता के जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी बेमेतरा जिले के इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर लिखा कि यह मानव श्रृंखला बन रही है, जो योजना के प्रति जन-जागरूकता का प्रतीक बनी हुई है।
*पात्र परिवारों को लाभ दिलाने और जानकारी पहुंचाने लिया संकल्प*
मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि योजना केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में जनभागीदारी का एक महत्वपूर्ण अभियान है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने तथा अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का संकल्प भी लिया।
*ग्राम सभा मे अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी*
ग्राम सभाओं में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वीबी - जीरामजी योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
*अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और हितग्राहियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण*
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार 30 जून 2026 तक पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर के सभी अधिकारी-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों तथा हितग्राहियों का प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कठिनाई न आए और पात्र परिवारों को समय पर लाभ मिल सके।
*1 जुलाई से प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ*
योजना के प्रचार-प्रसार के लिए ग्राम सभाओं, चौपालों, पोस्टर-बैनर, मुनादी, रथ प्रचार एवं डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से लोगों को योजना की जानकारी देने में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह योजना गांवों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 1 जुलाई से योजना के लागू होने के साथ ही प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की भी उम्मीद है।
*उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने भी लाइव आकर दी जानकारी*
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी मंगलवार को अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर लाइव आकर आगामी ग्राम सभा और वीबी जीरामजी के संबंध में लोगों को जानकारी दी और लोगों को योजना का लाभ लेने को प्रेरित किया साथ ही उन्होंने लोगों के सवालों का भी समाधान किया।
*दलहन-तिलहन की खेती अपनाने पर मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन*
*कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें बनेंगी किसानों की आय का आधार*
रायपुर / प्रदेश में इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को मौसम के अनुरूप फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने विशेष रूप से अपलैंड एवं कम जलधारण क्षमता वाली भूमि में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।
कृषि विभाग के अनुसार कम वर्षा की संभावित परिस्थितियों में अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी एवं रागी जैसी फसलें बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं तथा प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में किसानों के लिए जोखिम को कम करती हैं।
*दलहन-तिलहन की खेती पर मिलेगा प्रोत्साहन*
राज्य शासन द्वारा किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत अपलैंड क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर की जाती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।
*आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी हैं वैकल्पिक फसलें*
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन एवं तिलहन फसलें कम लागत में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दलहनी फसलें भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होती हैं, जिससे आगामी फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। साथ ही इन फसलों का बाजार मूल्य अपेक्षाकृत अच्छा होने से किसानों की आय में वृद्धि की संभावना रहती है।
*अल्प अवधि की धान किस्मों के चयन की सलाह*
कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले क्षेत्रों के किसानों को भी संभावित कम वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अल्प अवधि में तैयार होने वाली धान किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। इससे जल उपलब्धता की अनिश्चितता के बावजूद उत्पादन जोखिम को कम किया जा सकेगा।
कृषि विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल चयन करने, फसल विविधीकरण अपनाने तथा शासन की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया है। विभाग का मानना है कि मौसम आधारित कृषि रणनीति अपनाकर किसान न केवल संभावित सूखे के प्रभाव को कम कर सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। बोधघाट थाना क्षेत्र से हाटकचोरा एवं करकापाल जाने वाले मार्ग के दोनों ओर संबंधित विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर "कचरा फेंकना मना है" संबंधी सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की प्रवृत्ति को रोकना और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया जाता है।
हालांकि, मार्ग से गुजरने वाले कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं, उनमें से कई स्थानों के आसपास कचरा दिखाई देता है। इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि केवल सूचना बोर्ड लगाने से अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो रहे हैं या नहीं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूकता के साथ-साथ नियमित निगरानी, कचरा संग्रहण की पर्याप्त व्यवस्था तथा नियमों के प्रभावी पालन की भी आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि प्रतिबंध संबंधी सूचनाओं के साथ व्यवहारिक प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत हो, तो सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की समस्या में कमी लाई जा सकती है।
क्षेत्र के कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सूचना बोर्ड लगाने पर सार्वजनिक धन खर्च किया गया है, इसलिए समय-समय पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि अभियान अपने उद्देश्य की पूर्ति कर रहा है या नहीं।
स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर कार्य करने वाले जानकारों का मानना है कि किसी भी जागरूकता अभियान की सफलता केवल संदेश प्रसारित करने से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से तय होती है। ऐसे में संबंधित क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था की नियमित समीक्षा किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
दो-तिहाई पार्षदों का एक साथ केरल रवाना होना बना चर्चा का विषय, शहर की समस्याओं के बीच सियासी समीकरणों और संभावित राजनीतिक खेल पर उठ रहे सवाल।
दुर्ग राजनीतिक।
दुर्ग की राजनीति में इन दिनों विकास, गुटबाजी और सियासी रणनीतियों का ऐसा संगम दिखाई दे रहा है, जिसने नगर निगम की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। नगर निगम के बड़ी संख्या में पार्षदों का सामूहिक रूप से केरल भ्रमण पर जाना केवल एक पर्यटन यात्रा है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है, यही प्रश्न आज शहर के राजनीतिक गलियारों से लेकर आम नागरिकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है।
राजनीति में संख्या शक्ति का अपना महत्व होता है। सत्ता पक्ष अपने संगठन और जनप्रतिनिधियों को मजबूत रखने का प्रयास करता है तो विपक्ष सत्ता की कमजोर कड़ियों को तलाशने में जुटा रहता है। दुर्ग नगर निगम की वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो निगम की सामान्य सभाओं से लेकर विभिन्न विकास कार्यों तक लगातार मतभेद और टकराव की स्थिति दिखाई देती रही है। कई अवसरों पर भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को एक सुर में निगम प्रशासन तथा शहरी सरकार के नेतृत्व पर सवाल उठाते देखा गया है।
ऐसे समय में जब बरसात का मौसम शुरू हो चुका है और शहर के अनेक वार्ड जलभराव, गंदगी, अधूरी सफाई व्यवस्था, बदहाल सड़कों और मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब बड़ी संख्या में पार्षदों का एक साथ दस दिन की यात्रा पर निकलना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है। यह किसी व्यक्ति विशेष की यात्रा का विरोध नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं पर उठता एक लोकतांत्रिक प्रश्न है।
जनप्रतिनिधि केवल व्यक्तिगत नागरिक नहीं होते। वे अपने वार्ड और हजारों नागरिकों की अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में जब शहर समस्याओं से घिरा हो और निगम के भीतर राजनीतिक असंतोष भी लगातार सामने आ रहा हो, तब सामूहिक यात्रा का राजनीतिक महत्व स्वतः बढ़ जाता है।
इसी कारण निगम क्षेत्र में "ऑपरेशन पैंथर" की चर्चा जोर पकड़ रही है। हालांकि महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना कानूनी रूप से आसान नहीं है, लेकिन राजनीतिक इतिहास गवाह है कि कई बार बड़ी राजनीतिक घटनाओं की शुरुआत सीधे टकराव से नहीं बल्कि रणनीतिक बैठकों और समूहबद्ध गतिविधियों से होती है। यही कारण है कि पार्षदों का यह सामूहिक भ्रमण केवल पर्यटन न मानकर राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है।
चर्चा का दूसरा पहलू आर्थिक है। यात्रा में शामिल पार्षदों द्वारा अलग-अलग राशि बताए जाने से भी जिज्ञासाएं बढ़ी हैं। कोई दस हजार रुपये प्रति व्यक्ति बता रहा है तो कोई पंद्रह हजार रुपये। वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में दस दिनों का केरल भ्रमण इतनी कम लागत में संभव कैसे हो रहा है, यह भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि यदि यात्रा की वास्तविक लागत अधिक है तो शेष खर्च का वहन कौन कर रहा है।
हालांकि इस प्रश्न का कोई आधिकारिक उत्तर सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजनीति में कोई भी सामूहिक गतिविधि बिना किसी उद्देश्य के नहीं होती। अक्सर दिखाई देने वाले चेहरे अलग होते हैं और रणनीति तैयार करने वाले चेहरे अलग। यही कारण है कि इस यात्रा को लेकर कई तरह के राजनीतिक अनुमान लगाए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, निगम की राजनीति में लंबे समय से विकास कार्यों को लेकर भी मतभेद सामने आते रहे हैं। कई पार्षदों ने सामान्य सभा में आरोप लगाया है कि विकास कार्यों के आवंटन और स्वीकृति में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जाता है तथा जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया जाता। स्थानीय विधायक एवं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अनुशंसाओं और विकास योजनाओं को लेकर भी समय-समय पर राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं।
इन परिस्थितियों में केरल यात्रा केवल एक भ्रमण कार्यक्रम न रहकर राजनीतिक संकेतों का माध्यम बन गई है। यात्रा समाप्त होने के बाद क्या कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आएगा, क्या निगम के भीतर शक्ति संतुलन में बदलाव होगा, या यह केवल सामूहिक पर्यटन साबित होगा—इन सभी प्रश्नों के उत्तर आने वाला समय ही देगा।
फिलहाल इतना तय है कि दुर्ग नगर निगम का यह घटनाक्रम केवल केरल यात्रा तक सीमित नहीं है। इसके पीछे छिपे राजनीतिक संदेश, संभावित रणनीतियां और बदलते समीकरण आने वाले दिनों में दुर्ग की शहरी राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। इसलिए निगम क्षेत्र से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हर नजर अब केरल से लौटने वाले पार्षदों और उनके अगले कदम पर टिकी हुई है।
"केरल की यह यात्रा पर्यटन से अधिक राजनीति का विषय बन चुकी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि लौटने के बाद पार्षद केवल यात्रा की यादें साझा करेंगे या दुर्ग की राजनीति में किसी नए अध्याय का सूत्रपात करेंगे।"
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