August 10, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    भिलाई / शौर्यपथ / वार्ड पांच लक्ष्मी नगर सुपेला निवासी व चन्द्रा फाईन आर्टस के संचालक चंद्रशेखर गंवई जिनके द्वारा पॉवर हाउस बाबा साहेब अंबेडकर चौक का सौन्दर्यीकरण कार्य 18 जून 2010 को स्वीकृति राशि 968707 के तहत स्वीकृत हुआ जिसमें से अब तक 1 लाख 88 हजार रूपये ही काम का मिला है और 7 लाख 80 हजार 707 रूपये बकाया है। आज दस साल बीत जाने के बाद भी उक्त कलाकार एवं कांग्रेस नेता चंन्द्र्रशेखर गंवई अपना पेमेंट को लेकर मुख्यमंत्री के दरवाजे तक दस्तक दे चुके है, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नही हुई है। इससे दुखी कलाकार चंद्रशेखर गंवई ने कहा कि जब मेरे द्वारा निगम अधिकारियों से बार बार मिल कर बिल भुगतान करने का अनुरोध किया गया तो निगम के अधिकारियो ने बताया कि आपकी फाईल गुम हो गई है, जिसकी प्राथमिकी सहायक ग्रेड 2 के सुनिल कुमार तिवारी द्वारा 14 अक्टूबर 2014 को सुपेला थाना में प्राथमिकी सूचना दर्ज करने का कष्ट करें का आवेदन दिया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि पुलिस द्वारा इस मामले में धारा 154 के तहत एफआईआर दर्ज करना चाहिए लेकिन मजेदार बात है कि पुलिस ने धारा 155 के तहत मामला बताते हुए उल्टा न्यायालय जाने का हवाला दे दिया। मजेदार बात यह है कि इतने बडे मामले में न ही उसके बाद कोई निगम अधिकारी ध्यान दिया और न ही पुलिस ने।
    वैसे भी नगर निगम भिलाई फाईल गुमने और फाइर्ल जलने और चोरी होने के मामलों में हमेशा प्रदेश में नंबर वन रहा हैें लेकिन आज तक किसी भी मामले को न ही पुलिस ने ही भांडा फोड़ किया है और न ही निगम के अधिकारियों ने ऐसे मामले में कभी दिलचस्पी ली। इससे साफ जाहिर है कि निगम से फाईल चोरी होने और गुमने का कार्य नही होता है जान बूझकर उन फाईलों को गायब किया जाता है जिनसे निगम अधिकारियों कर्मचारियों को टेबल के नीचे से उपहार नही मिलता है या जिस मामले में निगम के अधिकारी और कर्मचारी फंसने वाले होते है, वहीं फाईल गायब कर दिया जाता है। उसका नतीजा चंद्रशेखर गंवई ही नही बल्कि सैकड़ों लोग अब तक भुगत रहे है।
    आखिर निगम अधिकारियों और कर्मचरियों की गलती बेचारे गंवई जैसे लोग क्यों भुगते। निगम अधिकारियों को इस ओर ध्यान देकर जिस भी अधिकारी से या कर्मचारी से फाईल गुमने का कार्य होता है, उसपर कठोर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए या जेल भेजना चाहिए। तब कहीं जाकर निगम से फाईल चोरी होने का मामला नही होगा। इस मामले मे ंपीडि़त चन्द्रशेखर गंवई कांग्रेस के नेता है और उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है कि आखिर मेरी मूल नस्ती कहां गायब हो गई। और समय समय पर मैँ निगम अधिकारियेां से अपने भुगतान के लिए मिल मिल कर गुहार लगाता रहा हूं, लेकिन हमेेशा मुझे निराशा ही हाथ लगा। फाईन आर्टिस्ट एवं कांग्रेस नेता गंवई ने मुख्यमंत्री से अनुरोध करते हुए कहा कि मैं दस सालों से अपने भुगतान को लेकर प्रताडि़त हो रहा हंूं। मैँ अपने जीवन के 26 सालों से कांग्रेस से जुड़ा रहा। कांग्रेस पार्टी के निर्देसानुसार जो भी मुझे जिम्मेदारी दी गई मैँ उससे पूरी ईमानदारी से निर्वहन करता रहा और जब भाजपा की सरकार थाी तो भाजपा और निगम क्षेत्र की समस्याओं को लेकर भी सदा मैँ धरना प्रदर्शन करता रहा, हो सकता है कि निगम के अधिकारी कर्मचारी इससे कारण मेरा भुगतान रोक कर रखे हैँ और मुझे परेशान कर रहे हैँ।
    तात्कालीन भाजपा सरकार में कलेक्टर जनदर्शन 8 मई 2017 को टोकन क्रमांक 100217001894 निगम जनदर्शन 12 जून 2017 जिसका टोकन क्रमांक 17 महापौर आयुक्त 8 मई 2017 को भी अपने भुगतान के लिए शिकायत पत्र सौंपा हूं, लेकिन आज तक मुझे मेरे कार्य का भुगतान नही हो सका है। मुख्यमंत्री के ओएसडी मनीष बंछोर ने मुझे वर्तमान आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी से मुलाकात करने के लिए मुझे कहा था, जब मैं आयुक्त रघुवंशी से मिला तो उन्होंने भी सीधा पल्ला झाड़ते हुए स्पष्ट कहा कि आपके मामले की फाईल नही मिल रही है, भुगतान नही कर सकता हूं। उस समय कौन अधिकारी थे और क्या हुआ, मै नही जानता? आप बिल व्हाउचर और भुगतान आर्डर को जाकर देखें। जिम्मेदार अधिकारी द्वारा इस प्रकार का जवाबद देने से कही न कहीं कांंग्रेस सरकार के मुखिया और कांग्रेस सरकार की छवि खराब हो ही रही है, और इस गंवईजैसे कलाकारों का मनोबल भी गिर रहा है, इसके कारण उनके परिवार के सामने लॉकडाउन और कोरोना के इस संकट की घड़ी में आर्थिक स्थितियों का बूरी तरह सामना करना पड़ रहा है। यदि निगम चाहे तो गंवई का भुगतान हो सकता है क्येांकि जब 1 लाख 88 हजार रूपये भुगतान कर चुका है तो बाकी का भी भुगतान हो सकता है, क्योंकि अब डिजीटल युग है और जब भी कोई कार्य इस तरह का निगम द्वारा कराया जाता है तो फोटोग्राफी कराई जाती है, तो इसका भी फोटोग्राफी कराई ही गई होगी। उस आधार पर और जिस आधार पर 1 लाख 88 हजार रूपये भुगतान किया गया है,उस आधार पर गंवई का बिल का भुगतान किया जा सकता है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश में आज से घर पहुंच निशुल्क पौधा वितरण के लिए पौधा तुंहर द्वार योजना शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वनमंत्री मंत्री मोहम्मद अकबर के निर्देशानुसार दुर्ग वन मंडल दुर्ग में योजना का शुभारंभ अरुण वोरा विधायक, द्वारा किया गया। घर पहुँच पौध वितरण के लिए वोरा ने आज हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। विधायक ने कहा पौधा तुँहर द्वार बहुत अच्छी योजना है। इसके माध्यम से नागरिकों को घर पहुंच सेवा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि वृक्ष हमारे सच्चे साथी हैं हमें इनकी देखभाल करनी चाहिए।अपने लगाए पौधे को बड़ा होता देखना भी बहुत आनंदित करता है।उन्होंने नागरिकों से अपील की इस अभियान को पौधरोपण तक ही सीमित न रखें बल्कि उन पौधों के पेड़ बनने तक उनकी देखभाल की शपथ भी लें।
    महापौर धीरज बाकलीवाल ने कहा कि बच्चों को भी इस एक्टिविटी में शामिल करें।इस तरह की पहल से ही बच्चे पर्यावरण संतुलन में पौधों का महत्व समझेंगे। कलेक्टर डॉक्टर सर्वेश्वर भूरे ने कहा कि हम पूरी तरह वृक्षों पर ही निर्भर हैं। अपनी धरती को हरा भरा रखकर ही हम प्रकृति के प्रति अपना कर्ज उतार सकते हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव सीईओ जिला पंचायत सच्चिदानंद आलोकएपर्यावरण मंडल स्थायी समिति की सभापति श्रीमती सत्यवती वर्मा पूर्व महापौर आर एन वर्मा सहित मेयर इन कौंसिल के सम्मानीय सदस्य भी शामिल हुए।
    अतिथियों को प्रतीक स्वरूप भेंट किया गया चंदन का पौधा.
    इस अवसर पर अरुण वोरा को प्रतीक के रूप में मुख्य वन संरक्षक श्रीमती शालिनी रैना ने चंदन का पौधा भेंट किया। डीएफओ के आर बढ़ाई ने कलेक्टर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सीईओ जिला पंचायत सहित सभी अतिथियों को चंदन का पौधा भेंट किया। डीएफओ के आर बढ़ाई ने बताया गया कि दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में 50 हजार तथा संपूर्ण जिले में पौधा वितरण का लक्ष्य 3 लाख 50 हजार रखा गया। उन्होंने बताया कि पौधा प्रदाय योजना के नोडल अधिकारी कलीमुल्ला खान हैं। पौधा तुँहर द्वारा योजना के तहत दुर्ग.भिलाई के नागरिक वन विभाग द्वारा जारी मोबाइल नंबरों 9406091336 और 9754617573 पर सम्पर्क करके घर पर नि:शुल्क पौधे प्राप्त कर सकते हैं।
    ये पौधे हैं उपलब्ध.
    नर्सरियों में वर्तमान में अमरूद, हल्दू, जंगल जलेबी,गंगा इमली, नीमए, अर्जुन, करंज, सीबा पेंटेंड्रा,सफेद सेमल,मुनगा सहित 39 प्रजातियां उपलब्ध हैं। नागरिक इन पौधों को अपने घर आंगन, खेतखलिहान, खाली निजी भूमि लगा सकते हैं। दिए गए मोबाइल नम्बरों पर सम्पर्क करने पर घर पहुंच सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।

    नई दिल्ली / shouryapath / कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि संकट के समय भी भाजपा सरकार जनता की जेब काटने में लगी है. उन्होंने ट्वीट किया, ''आज पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने जोरदार प्रदर्शन किया. जनता इस लूट को बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं है.ÓÓ कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी ने आरोप लगाया, ''आज 19वें दिन लगातार भाजपा सरकार ने डीजल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ाकर ये बात साफ कर दी है कि भाजपा को इस संकट के समय भी पब्लिक की जेब काटने में ज्यादा रुचि है.ÓÓ
    प्रियंका ने दावा किया कि इस संकट के समय केंद्र सरकार ने जनता की जेब काटने का इतिहास रचा है. डीजल की कीमत, पेट्रोल की कीमत को पार कर चुकी है, जबकि दुनिया भर में कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट है. उन्होंने सवाल किया, ''महामारी से पैदा हुई आर्थिक तबाही में भी जनता को क्यों परेशान किया जा रहा है?ÓÓ पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने बृहस्पतिवार को डीजल की कीमतों में 14 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की. डीजल कीमतों में लगातार 19वें दिन बढ़ोतरी की गई है. इस तरह 19 दिन में डीजल 10.63 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है.
    दिल्ली में पेट्रोल का दाम 79.76 रुपये से बढ़कर 79.92 रुपये प्रति लीटर हो गया है. इसी तरह डीजल की कीमत 79.88 रुपये से 80.02 रुपये प्रति लीटर हो गई है. बुधवार को पहली बार दिल्ली में डीजल का दाम पेट्रोल से अधिक हुआ था.

    // हरेली पर्व से होगी इस अभिनव योजना की शुरूआत: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
    // गौ-पालन और गोबर प्रबंधन से पशुपालकों को होगा लाभ , गांवों में रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ेंगे
    // निर्धारित दर पर होगी गोबर की खरीदी, सहकारी समितियों से बिकेगी वर्मी कम्पोस्ट
    // गोबर की खरीदी की दर तय करने पांच सदस्यीय मंत्री मण्डल की उप समिति गठित
    // गोबर प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया का निर्धारण करेगी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की कमेटी

         रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य में गौ-पालन को आर्थिक रूप से लाभदायी बनाने तथा खुले में चराई की रोकथाम तथा सड़कों एवं शहरों में जहां-तहां आवारा घुमते पशुओं के प्रबंधन एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए छत्तीसगढ़ राज्य में गोधन न्याय योजना शुरू करने का एलान किया है। इस योजना की शुरूआत राज्य में हरेली पर्व के शुभ दिन से होगी। मुख्यमंत्री बघेल ने आज अपने निवास कार्यालय के सभा कक्ष में ऑनलाईन प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार की इस अभिनव योजना की जानकारी दी।
    मुख्यमंत्री ने गोधन न्याय योजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में गौपालन को बढ़ावा देने के साथ ही उनकी सुरक्षा और उसके माध्यम से पशुपालकों को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते डेढ़ सालों में छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी के माध्यम से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने चारों चिन्हारियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। गांवों में पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए गौठानों का निर्माण किया गया है। राज्य के 2200 गांवों में गौठानों का निर्माण हो चुका है और 2800 गांवों में गौठानों का निर्माण किया जा रहा है। आने वाले दो-तीन महीने में लगभग 5 हजार गांवों में गौठान बन जाएंगे। इन गौठानों को हम आजीविका केन्द्र के रूप में विकसित कर रहे हैं। यहां बड़ी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण भी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से शुरू किया गया है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना राज्य के पशुपालकों के आर्थिक हितों के संरक्षण की एक अभिनव योजना साबित होगी। उन्होंने कहा कि पशुपालकों से गोबर क्रय करने के लिए दर निर्धारित की जाएगी। दर के निर्धारण के लिए कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय मंत्री मण्डलीय उप समिति गठित की गई है। इस समिति में वन मंत्री मोहम्मद अकबर, सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल शामिल किए गए हैं। यह मंत्री मण्डलीय समिति राज्य में किसानों, पशुपालकों, गौ-शाला संचालकों एवं बुद्धिजीवियों के सुझावों के अनुसार आठ दिवस में गोबर क्रय का दर निर्धारित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर खरीदी से लेकर उसके वित्तीय प्रबंधन एवं वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन से लेकर उसके विक्रय तक की प्रक्रिया के निर्धारण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रमुख सचिवों एवं सचिवों की एक कमेटी गठित की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में हरेली पर्व से पशुपालकों एवं किसानों से गोबर निर्धारित दर पर क्रय किए जाने की शुरूआत होगी। यह योजना राज्य में अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी और इसके दूरगामी परिणाम होंगे। इसके माध्यम से गांवों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री ने किसानों, पशुपालकों एवं बुद्धिजीवियों से राज्य में गोबर खरीदी के दर निर्धारण के संबंध में सुझाव देने का भी आग्रह किया।
    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में खुले में चराई की परंपरा रही है। इससे पशुओं के साथ-साथ किसानों की फसलों का भी नुकसान होता है। शहरों में आवारा घूमने वाले मवेशियों से सड़क दुर्घटनाएं होती है, जिससे जान-माल दोनों का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि गाय पालक दूध निकालने के बाद उन्हें खुले में छोड़ देते हैं। यह स्थिति इस योजना के लागू होने के बाद से पूरी तरह बदल जाएगी। पशु पालक अपने पशुओं के चारे-पानी का प्रबंध करने के साथ-साथ उन्हें बांधकर रखेंगे, ताकि उन्हें गोबर मिल सके, जिसे वह बेचकर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों में आवारा घूमते पशुओं की रोकथाम, गोबर क्रय से लेकर इसके जरिए वर्मी खाद के उत्पादन तक की पूरी व्यवस्था नगरीय प्रशासन करेगा।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि इस योजना को पूरी तरह से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के आधार पर तैयार किया गया है। इससे अतिरिक्त आमदनी सृजित होगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए पूरा एक सिस्टम काम करेगा। एक सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्मी कम्पोस्ट के जरिए हम जैविक खेती की ओर बढेंगे। इसका बहुत बड़ा मार्केट उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से तैयार होने वाली वर्मी कम्पोस्ट खाद की बिक्री सहकारी समितियों के माध्यम से होगी। राज्य में किसानों के साथ-साथ वन विभाग, कृषि, उद्यानिकी, नगरीय प्रशासन विभाग को पौधरोपण एवं उद्यानिकी की खेती के समय बड़ी मात्रा में खाद की आवश्यकता होती है। इसकी आपूर्ति इस योजना के माध्यम से उत्पादित खाद से हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने एक सवाल के जवाब में आगे यह भी कहा कि अतिरिक्त जैविक खाद की मार्केटिंग की व्यवस्था भी सरकार करेगी।
    इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरू रूद्र कुमार, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, मुख्यमंत्री के पंचायत एवं ग्रामीण विकास सलाहकारप्रदीप शर्मा, मीडिया सलाहकार रूचिर गर्ग, मुख्य सचिव आर. पी. मण्डल, अपर मुख्य सचिव वित्त अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    शौर्यपथ / आयुर्वेद में केवल जड़ी-बूटियों के गुण ही नहीं बल्कि खान-पान और रहन-सहन के बारे में भी बहुत कुछ लिखा गया है। आज हम आपको आयुर्वेद के अनुसार बालों में तेल लगाने के फायदे और इसका सही समय बताएंगे।

     

    बालों में तेल लगाने के फायदे
    'चम्पी’ या सिर की मालिश की प्रथा पीढ़ियों से चलती आ रही है और हम में से बहुत सारे लोग बालों को धोने से पहले सिर की मालिश करते हैं। माना जाता है कि बालों में तेल लगाने से, बालों को समय से पहले सफ़ेद होने से रोका जा सकता है, इससे बालों की जड़ मजबूत होती है और प्रेशर पॉइंट्स पर मालिश करने से तनाव कम होता है।


    आयुर्वेद के अनुसार तेल लगाने से जुड़ी खास बातें
    -आयुर्वेद के अनुसार सिरदर्द वात से जुड़ा होता है। इसलिए शाम 6 बजे बालों में तेल लगाना चाहिए। दिन का यह समय वात दूर करने के लिए बेहतर होता है।
    -आप बालों में शैंपू करने से पहले भी हफ्ते में एक या दो बार तेल लगा सकते हैं। हालांकि बालों को धोने के बाद तेल लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे बालों में धूल और मिट्टी की समस्या हो सकती है।
    -बालों में नियमित तेल लगाने से स्कैल्प में रुसी और खुजली की समस्या दूर हो जाती है। तेल में नीम की पत्तियां डालकर गर्म कर लें और नहाने से पहले इसे स्कैल्प में अच्छी तरह लगाएं। इसके बाद गुनगुने पानी से बालों को धो लें। रुसी की समस्या से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा।
    -रात में सोने से पहले अपने बालों और स्कैल्प में अच्छी तरह तेल लगाना चाहिए। अगली सुबह गुनगुने पानी से बालों को धो लेना चाहिए।
    -रात में सोने से आधे घंटे पहले बालों में तेल लगाकर हल्के हाथों से मसाज करने से अच्छी नींद आती है।

     

    धर्म संसार /शौर्यपथ / वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में छह जुलाई से शुरू होने वाले सुप्रसिद्ध सावन झूला मेला का आयोजन स्थगित कर दिया गया है। जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने मंगलवार को बताया कि मणिपर्वत से छह जुलाई से शुरू हो रहे प्रसिद्ध सावन झूला मेला और कांवड़ यात्रा को स्थगित कर दिया गया है।

    श्रावण में सभी सोमवार को शिवालयों में श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। अयोध्या में पारम्परिक सावन झूला मेला होता है जो मणिपर्वत पर प्रमुख मंदिरों के भगवान के विग्रहों को अपने-अपने मंदिर से लेकर श्रद्धालु आते हैं और झूलनोत्सव में लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं, लेकिन इस वर्ष वैश्विक महामारी कोविड-19 से संक्रमण से बचाव के लिये श्रवण सावन झूला मेला व कांवड़ यात्रा स्थगित रहेगा।

    संत-धमार्चार्यों ने कहा कि सावन झूला मेला और कांवड़ यात्रा को जिला प्रशासन द्वारा स्थगित करने पर वैश्विक महामारी कोविड-19 के संक्रमण से बचाव होगा।संत- धमार्चार्यों ने भी श्रद्धालुओं से अपने-अपने स्थलों पर ही पूजा अर्चना करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि सामूहिक रूप से मंदिरों में प्रवेश न करें। पांच-पांच की संख्या में ही मंदिर में जाए जिससे सरकार के दिशा-निदेर्शों का अनुपालन हो सके एवं सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा जाए। कांवड़ संघ के अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने कहा कि जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों की कांवड़ यात्रा विभिन्न क्षेत्रों से निकलती है जो बस्ती व बैद्यनाथ धाम को जाती है लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुये कांवडिय़ां संघ के पदाधिकारियों ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष कोई कांवड़ यात्रा नहीं निकाली जाएगी। सभी लोग मंदिरों में सोशल डिस्टेंसिंग के अनुसार ही जलाभिषेक करेंगे।

    गौरतलब है कि छह जुलाई से सावन झूला मेला शुरू हो रहा है। यह मेला तकरीबन एक पखवाड़े तक चलता है। सावन मेले में आने वाले श्रद्धालु रिमझिम फुहारों में भी भव्य रस का रसास्वादन करते हैं और रात-रात भर विभिन्न मंदिरों में घूम-घूमकर भगवान के विग्रहों को झुलाते हैं। इस समय छटा देखते ही बनती है। सावन में गाये जाने वाले लोकगीत कजरी का भी चारों ओर गूंज सुनाई देता है। मणि पर्वत के मेले के दिन सीताराम झांकी को लेकर रामधुन गाते हुए श्रद्धालु मणिपर्वत पहुंचते हैं जहां वृक्षों में झूले डालकर भगवान के विग्रहों को झुलाया जाता है।

    पूरे सावन में मंदिरों में दोनों समय भगवान के विग्रहों को झुलाये जाने की परम्परा है। मणि पर्वत पर पडऩे वाले झूलों में विग्रहों के अलावा छोटे-छोटे बच्चों को रामसीता के रूप में सजाकर झुलाया जाता है। सखी सम्प्रदाय के लोग मनमोहनक पोशाक पहनकर सोलह श्रृंगार करते हैं।

     

    खेल /शौर्यपथ / भारत के पूर्व बल्लेबाज कृष्णामाचारी श्रीकांत ने 1983 विश्वकप विजेता टीम के अपने कप्तान कपिल देव की सराहना करते हुए कहा है कि उन्होंने खिलाडिय़ों को खुद पर भरोसा रखना सिखाया। श्रीकांत ने स्टार स्पोट्र्स के कार्यक्रम 'विनिंग द वल्र्ड कप-1983Ó में विश्वकप फाइनल के लम्हों को याद करते हुए कहा, "वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर फील्डिंग करने का फैसला किया। ओस पडऩे के कारण विकेट पर काफी नमी थी। हमें पहले बल्लेबाजी करनी थी और हमारे पास लॉड्र्स में खेलने के कोई खास अनुभव नहीं था। यह हमारे लिए बहुत नया था।"
    पूर्व सलामी बल्लेबाज ने कहा, "वहीं अगर आप वेस्टइंडीज की गेंदबाजी आक्रमण को देखें तो उनमें एक से एक दिग्गज गेंदबाज थे और जोएल गार्नर ने अपनी लंबाई का पूरा इस्तेमाल करते हुए बल्लेबाजों को गेंद ठीक से देखना और खेलना मुश्किल बना दिया था।"
    श्रीकांत ने कहा, "ऐसे वक्त में कपिल ने हमारे सामने उदाहरण पेश किया। उनका आत्मविश्वास और खेल के प्रति उनका नजरिया उनके बारे में सबसे अच्छी चीजें हैं। कपिल की खासियत थी कि उन्होंने भारतीयों को खुद पर भरोसा रखना सिखाया और यही उनकी महानता है। "
    बता दें कि श्रीकांत ने कम स्कोर वाले फाइनल में सर्वाधिक रन बनाए थे। इस दौरान गेंद ओस के बीच 10 फीट की ऊंचाई से आ रही थी। श्रीकांत जूझ रहे थे, लेकिन मैंने उन्होंने अमरनाथ से बात की और उन्होंने श्रीकांत को अपना स्वाभाविक खेल खेलने को कहा। अगले ओवर में श्रीकांत ने चौका जड़ा और अंत में 38 रन बनाए, जो विश्व कप फाइनल का सर्वोच्च स्कोर रहा था।
    फाइनल मैच में 183 रनों पर आउट होने के बावजूद भारत ने दिग्गजों से सजी वेस्टइंडीज की टीम को लॉर्डस में 43 रनों से हराकर पूरी दुनिया को चकित कर दिया। पहला विश्व कप 1975 में खेला गया था। वेस्टइंडीज दो बार विश्व कप जीत चुका था, लेकिन कपिल देव ने तीसरी बात खिताब जीतने का उनका सपना चूर-चूर कर दिया।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कई बार जीवन में ऐसे मोड़ आ जाते हैं जब व्यक्ति का अपने गुस्से पर कंट्रोल नहीं रहता और वो जाने-अनजाने कुछ ऐसा कर बैठता है जिसकी वजह से भविष्य में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ता है। तो क्या इसका मतलब ये हुआ कि व्यक्ति को अपने क्रोध को मन के भीतर ही दबाए रखना चाहिए, बिल्कुल नहीं। आप कल्पना करके देखिए यदि किसी चिमनी के भीतर कोयला जलाकर रख दें लेकिन चिमनी से भाप बाहर निकलने का रास्ता न हो तो क्या होगा। स्वाभाविक है चिमनी फट जाएगी।

    ठीक वैसे ही भावनात्मक रूप से चोटिल व्यक्ति यदि अपने मन से नकारात्मक भावनाओं को बाहर निकालने की जगह अपने मन के भीतर इकट्ठा करता रहेगा तो भविष्य में यह आदत उसके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसे में आइए जानते हैं कैसे इन 5 उपायों को करके व्यक्ति मानसिक शांति बनाए रखने के साथ अपने गुस्से को भी बाहर निकाल सकता है।

    व्यायाम करें -
    मन से सभी नकारात्मक विचारों को निकालने के लिए वर्कआउट करें। वर्कआउट के दौरान एंडोर्फि‍न हॉर्मोन , जिसे हम हैप्पी हॉर्मोन भी कहते हैं शरीर से रिलीज होते हैं। जिससे व्यक्ति की मानसिक सेहत पर अच्छा असर पड़ता है।

    गहरी सांस लें-
    जब कभी आपको लगे कि आप अत्याधिक गुस्से में हैं तो भड़ास निकालने का बेहतर तरीका है कि एक कदम पीछे आएं और गहरी सांस लें।किसी भी परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया न दें।

    दोस्तों से करें खुलकर बात-
    दोस्तों से बात करने से भावनाओं को बाहर आने का मौका मिलता है। लेकिन ध्यान रखें सिर्फ भरोसेमंद दोस्त के साथ ही अपनी भावनाओं को साझा करें, जो आपका सही मार्गदर्शन भी करें।

    भावनाओं को कागज पर उतारें-
    यदि आपके पास कोई भरोसेमंद दोस्त नहीं है तो खुद को अकेला न समझें, अपनी डायरी में पूरी ईमानदारी से अपनी भावनाओं को दर्ज करें। जब आप शांत हो जाएं, इस डायरी को दोबारा पढ़ें। आपको महसूस होगा कि आपके गुस्से ने कैसे आपकी तर्क शक्ति को ढक लिया था। जिसके बाद आप अपनी कमजोरियों पर काम कर सकेंगे।

    दृष्टिकोण में करें बदलाव-
    अमेरिका के ड्रेक्सल विश्वविद्यालय में किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि आप चाहें तनाव की किसी भी स्थिति में हों आर्ट आपके तनाव को कम कर आपको बेहतर महसूस करवाने में मदद करती है। तो देर किस बात की, एक खाली कैनवास लें और उस पर अपने गुस्से और हताशा को व्यक्त करने वाले अपनी मर्जी के रंग उड़ेल दें।

     

    मनोरन्जन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें वह खुद की फिल्म ‘एमएस धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी’ देखते नजर आ रहे हैं। हाथ में किताब है और नजरों के सामने टीवी। टीवी पर फिल्म चल रही है। फिल्म में सीन चल रहा है जब सुशांत धोनी के रूप में क्रिकेट पिच पर खड़े होते हैं। सुशांत बैठे धोनी-धोनी रे नारे लगाते नजर आते हैं। सुशांत के करियर की यह फिल्म एक ऐसी फिल्म रही, जिसने उनके फैन बेस को बढ़ाकर दोगुना कर दिया था। बॉक्स ऑफिस पर यह ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। दुनिया में सुशांत के फैन बन गए थे।

    आपको बता दें कि सुशांत खुद एक बहुत बड़े धोनी फैन थे। धोनी के साथ क्रिकेट पिच पर खेलने का सपना उनका हमेशा से था और फिल्म के जरिए यह पूरा भी हुआ। धोनी फिल्म के लिए सुशांत ने काफी मेहनत की थी। उनके हू-ब-हू रूप में आने के लिए उन्होंने वीडियो में धोनी को क्रिकेट फील्ड पर खेलते हुए करीब 100 बार देखा था। फिल्म में कोई कह ही नहीं सकता था कि धोनी और सुशांत में कोई फर्क है। सुशांत इस तरह से धोनी के किरदार में ढले थे कि वह तारीफ के पात्र बने थे।

    फिल्में करने से पहले सुशांत सिंह राजपूत ने टीवी की दुनिया में अपना सिक्का जमाया। उन्होंने सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’ से शुरुआत की और घर-घर में मानव देशमुख के नाम से जाने गए। शो इतना हिट हुआ कि अंकिता लोखंडे संग सुशांत की जोड़ी बेस्ट साबित हुई। बाद में हालांकि, दोनों रियल लाइफ में भी साथ आ गए। करीब 6 साल तक रिलेशनशिप में रहे। लेकिन फिल्मी दुनिया में कदम रखने के बाद दोनों का ब्रेकअप हो गया था। बताते चलें कि पिछले हफ्ते सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मुंबई पुलिस केस की छानबीन में जुटी है।

     

    नजरिया / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री ने कोरोना-19 महामारी से लड़ते हुए कई सूत्र दिए हैं। उन्होंने भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते हुए एक नारा दिया है, ‘लोकल के लिए बनो वोकल’। कहने का अभिप्राय कि भारतवर्ष में खूब संसाधन हैं, जिनसे विभिन्न प्रकार के उपयोगी सामान हम विश्व स्तर पर बना सकते हैं। भारत में असंख्य कुशल हाथ हैं, जिनका उपयोग करके प्राकृतिक संपदाओं से बहुत कुछ बनाया जा सकता है। वैसे भी भारत में बहुत कुछ सदियों से बनाया जाता रहा है। ऐसी-ऐसी चीजें बनाई जाती रही हैं, जिनके लिए बड़ी मशीनों की जरूरत नहीं होती। भारत का बना हुआ ढाका का मलमल, राजस्थान और गुजरात की कशीदाकारी, कश्मीर के कालीन और भी सामान देश ही नहीं, विदेश में भी बहुत प्रसिद्ध रहे हैं।
    महात्मा गांधी ने आजादी की लड़ाई लड़ते हुए स्वदेशी अपनाने की बात मौखिक रूप से ही नहीं कही, बल्कि उन्होंने चरखे को स्वावलंबन का प्रतीक बना लिया था। देखते-देखते हर घर में चरखा चलने लगा था। सूत के कपडे़ बनने लगे थे, बाद में धागों को रंगकर डिजाइनदार कपड़े बनने लगे थे। स्वतंत्रता मिलने से पहले ही गांव-गांव में चरखा समितियां बनाई गई थीं और खादी की साड़ी पहन सिर पर पल्लू रख विशेष आत्मविश्वास से भरी महिलाएं घर-घर से निकलती थीं। सूत व कपड़े की रंगाई-धुलाई के काम में लगकर आमदनी बढ़ाती थीं। स्वदेशी अपनाने के क्रम में मिल में बना तेल लोग नहीं अपनाते थे। गांव के कोल्हू पर अपने खेत से निकले हुए राई, सरसों के तेल का उपयोग करते थे। स्वतंत्रता मिलने के बाद सरकार ने भी केंद्रीय और राज्य स्तर पर खादी भंडार का निर्माण कराया। चरखे चलते रहे, पर धीरे-धीरे मिल के कपडे़ घर-घर आने लगे और हम गांधी के आंदोलन को भूल गए। अब पुन: ‘लोकल के लिए वोकल’ की बात उठी है, तो स्वदेशी का नारा फिर जोर पकड़ने लगा है।
    1998 से 2004 तक मैं केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष थी। उन दिनों भी महिलाओं के हाथ में हुनर सिखाने एवं उनके हुनर से बने सामान बेचने की बात बहुत प्रसिद्ध थी। मैंने इस कार्य के लिए कई नारे दिए थे, जैसे- हुनर हो हर हाथ में, दिल में प्रेम का भाव। भेद मिटे हर द्वार से, जग में आए समभाव। और, जब आया हाथों में हुनर, हुलसा हिया, रंग गई चुनर। उन दिनों पूरे देश में बहुत-सी संस्थाओं द्वारा जूट, बांस, लाख ऐसे अन्यान्य प्रकार के उत्पादों का बाजार लगाया जाता था। कहीं-कहीं इसे ‘मेला’ भी कहा जाता था। आज ऐसे मेलों के तेज विकास की जरूरत है। ऐसे मेलों में खाने-पीने, पहनने-ओढ़ने से लेकर सजावट के तमाम सामान लोगों को उपलब्ध होने चाहिए। ऐसे सामान की मांग होगी, तो ऐसे सामान बनाने वालों की संख्या और आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी। महिलाओं और गरीब घरों की स्थिति सुधरेगी।
    इस क्षेत्र के कार्यों में गति देने के लिए मैंने एक अभिनव कार्यक्रम बनाया था, जिसके तहत संस्थाओं को विभिन्न औषधीय वृक्ष लगाने का कार्य सौंपा गया था। अध्ययन करके हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि पांच ऐसे पौधों को अपने घर के पास कम-से-कम जमीन में भी लगाया जाए, पांच वर्षों में उससे मिली आमदनी इतनी हो जाएगी, जिससे एक पांच सदस्यीय परिवार के भोजन, कपड़े का इंतजाम आसानी से हो जाएगा।
    देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर शहर में हाथ के बने सामान बेचने के लिए विशेष बाजार या बिक्री केंद्र की व्यवस्था हो। बाजार या बिक्री केंद्र के कर्मचारी ही सामान गांव से लेकर आएं और उत्पादकों व संस्थाओं को कीमत भी दें। इन महिलाओं या पुरुषों को पैकेजिंग के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि उनके सामान विदेशी बाजारों को भी आकर्षित कर सकें। इसी विशेष बिक्री केंद्र द्वारा ये जानकारियां दी जाएं कि कौन-कौन-से सामान की देश के बड़े शहरों व विदेश में मांग है? यदि इतनी सुविधा उत्पादकों, स्वयं सहायता समूहों, संस्थाओं को मिल जाए, तो इनकी आमदनी बढ़ जाएगी।
    आज भारत ही नहीं, विश्व के विभिन्न देशों ने ‘पुन: भारतीयता की ओर’ यात्रा शुरू की है। भारत को आत्मनिर्भर बनाने की घोषणा पुन: भारतीयता की ओर आने का प्रयास ही है। कोविड-19 भारत के लिए भी संकट काल में वरदान साबित हो सकता है। आत्मनिर्भर व्यक्ति, परिवार व गांवों में आत्मविश्वास होता है, लेकिन दूसरों पर निर्भरता से स्वाभिमान की भी रक्षा नहीं होती।
    (ये लेखिका के अपने विचार हैं)मृदुला सिन्हा, पूर्व राज्यपाल, गोवा

     

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