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ओपिनियन / शौर्यपथ / देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या पांच लाख के करीब पहुंच गई है। सुर्खियों में दिल्ली है, जहां 70 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और 2,365 मौत की खबर है। इस तरह, अब राष्ट्रीय राजधानी संक्रमण के मामले में मुंबई से आगे निकल चुकी है, जहां 68 हजार से ज्यादा मरीज हैं और मौत का आंकड़ा 3,900 को छू रहा है। दिल्ली में हुई यह बढ़ोतरी चिंता की बात है, और इसीलिए यहां सुधारात्मक उपायों की दरकार है। इसकी जरूरत इसलिए भी है, क्योंकि केंद्र ने कहा है कि देश में प्रति लाख आबादी में एक मरीज की मौत हो रही है और राष्ट्रीय मृत्यु-दर वैश्विक औसत 6.04 के मुकाबले बहुत कम है, लेकिन मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे शहरों में मृत्यु-दर परेशानी की वजह बनी हुई है।
इस महामारी को लेकर भारत का अनुभव यह भी है कि बडे़ शहर इसकी चपेट में ज्यादा आए हैं। विशेषकर पुरानी बसाहट के शहरों और झुग्गी-झोपड़ियों की घनी आबादी में संक्रमण अपेक्षाकृत अधिक फैल रहा है। जाहिर है, इसने शहरी स्वास्थ्य तंत्र, और खासतौर से नगरपालिका सेवाओं को बेपरदा कर दिया है, जबकि बड़े शहरों में ऐसी सेवाएं अमूमन मजबूत मानी जाती हैं। इससे दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों की चुनौतियां समझी जा सकती हैं। उनको संक्रमण का विस्तार होने पर कहीं अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने काफी संजीदगी से काम किया है, जिसका प्रमाण ‘धारावी मॉडल’ की सफलता है। बीएमसी ने ‘केरल मॉडल’ के दो प्रमुख उपायों पर खासा ध्यान दिया- तकनीकी क्षमता और विश्वास। यहां तक कि जब मरीजों की संख्या में कमी आने लगी, तब भी संक्रमित इलाकों में फीवर क्लीनिक और संस्थागत क्वारंटीन जैसी सुविधाएं बढ़ाई जाती रहीं। इसके अलावा, निजी चिकित्सकों को भी जिम्मेदारी दी गई, घर-घर सर्वे किए गए, ऑक्सीमीटर व मोबाइल वैन समय पर उपलब्ध कराए गए। इन सबके साथ-साथ उसने लोगों का दिल जीतने के लिए असाधारण और अभिनव तरीकों का भी इस्तेमाल किया।
सवाल यह है कि दिल्ली में आखिर गलती कहां हुई, जबकि मुख्यमंत्री खुद इसमें नेतृत्व करते दिख रहे थे? निस्संदेह, दिल्ली सरकार ने सक्रिय शुरुआत की थी और ऐसा लग रहा था कि स्थिति संभाल ली जाएगी। देश के अन्य राज्यों की तुलना में यहां सबसे अधिक टेस्ट किए जा रहे थे, मगर पिछले चार हफ्तों से इसमें तेजी से कमी आने लगी। दिल्ली में निजी जांच केंद्रों को काफी पहले लाइसेंस दे दिया गया था और ऐसा महसूस हुआ कि अस्पताल की सेवाएं भी मजबूत हो गई हैं। कंटेनमेंट जोन की व्यवस्था भी बेहतर काम कर रही थी, पर अब लगता है कि दिन बीतने के साथ-साथ सरकार संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वालों को खोजने में शिथिल पड़ती गई।
इसी तरह, अस्पतालों में बेड की उपलब्धता को लेकर विरोधाभासी रिपोर्टें आती रहीं। निजी क्षेत्र के अस्पतालों का प्रबंधन, खासकर उनके कीमती इलाज को घटाने के प्रयास काफी आलोचना के बाद किए गए। टेस्टिंग की राज्य सरकार की अपनी नई गाइडलाइन सुर्खियों में रही, जिसमें केवल लक्षण वाले संदिग्धों की जांच के निर्देश दिए गए थे। दिल्ली सरकार पर कोविड-19 से मरने वाले लोगों की संख्या छिपाने के भी आरोप लगे, और अस्पताल में लाश के करीब ही संक्रमित मरीजों के इलाज के दहलाने वाले दृश्य भी सामने आए। सुप्रीम कोर्ट तक ने दिल्ली सरकार के बारे में प्रतिकूल टिप्पणियां कीं और राष्ट्रीय राजधानी में स्थिति को ‘भयावह और दयनीय’ बताया। हालांकि, अब दिल्ली 10,000 बेड के अस्थाई अस्पताल बनाने, घर-घर सर्वे करने और बहुतायत में स्क्रिनिंग के लिए कमर कसती हुई दिख रही है।
सवाल है कि आखिर हालात को पटरी पर कैसे लाया जाए? निश्चित ही कोविड-19 एक अभूतपूर्व महामारी है और इसे संभालना कोई सरल बात नहीं है। मगर हमारे देश में ही कई मॉडल सफल भी हुए हैं। हालांकि, सवाल मॉडल का नहीं, बल्कि पूरी संजीदगी के साथ नियमों के पालन का है, क्योंकि वही मॉडल सफल होते हैं, जिन्हें गंभीरता से जमीन पर उतारा जाता है।
इस काम में ‘इन्सिडेंट मैनेजमेंट’ यानी घटना प्रबंधन कारगर है, जो पिछली घटनाओं में हुई गलतियों से सबक लेकर तैयार किया जाता है। कोविड-19 के संदर्भ में, महामारी विज्ञानियों की योग्यता और उनके कौशल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। रोकथाम के उपायों को अमली जामा पहनाने के ये उपाय तब भी किए जा सकते हैं, जब विषाणुजनित महामारी के बारे में बहुत जानकारी उपलब्ध न हो और उससे लड़ने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण, बचाव व नियंत्रण के उपायों को सुधारने, संसाधनों में इजाफा करने, स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाने, बाह्य-संपर्क तेज करने जैसे अतिरिक्त कदम उठाने की दरकार हो। इस तंत्र में कमांड सरंचना काफी मायने रखती है, और इसके लिए महामारी विज्ञानियों को खासतौर से प्रशिक्षित किया जाता है। मगर मुश्किल यह है कि अपने देश में इस काम के लिए अमूमन नौकरशाहों पर भरोसा किया जाता है।
एक बात और। दिल्ली में केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों की तमाम एजेंसियां सक्रिय हैं। उनमें कई तरह के सियासी और अन्य मतभेद कायम हैं। मगर इस शहर ने हैजा, प्लेग, डेंगू, सार्स जैसी पिछली महामारियों का बखूबी सामना किया है। इसने काफी अरसे पहले एक सफल पोलियो उन्मूलन अभियान भी शुरू किया था, जबकि उस समय देश में इसका कोई ठोस मॉडल नहीं था। यह स्थिति तब थी, जब यहां की विभिन्न एजेंसियों में राजनीतिक व अन्य तरह के मतभेद होते रहते थे और केंद्र व दिल्ली के संबंध इतने ही जटिल थे।
स्वास्थ्य-देखभाल और सूचना-संचार प्रणाली में आज काफी सुधार हुआ है, इसलिए कोविड-19 के मोर्चे पर दिल्ली की विफलता त्रासद है। यहां पूर्व में सफलता इसलिए मिलती रही, क्योंकि तब केंद्र, राज्य व स्थानीय निकायों के बीच तालमेल बन जाता था और स्थानीय निकायों द्वारा पोषित मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य-तंत्र का फायदा तब की सरकारों को मिला करता था। आज स्थानीय निकायों की ढांचागत कमजोरी और ‘इन्सिडेंट मैनेजमेंट सिस्टम’ की विफलता का नतीजा साफ-साफ दिख रहा है। तो क्या हम फिसल रहे हैं? इसका जवाब तो वक्त के पास है, लेकिन यदि हम समन्वय की बुनियादी सोच पर नहीं लौटे, तो हमें शायद ही कोई बचा सकेगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) राजीव दासगुप्ता, प्रोफेसर (कम्युनिटी हेल्थ) जेएनयू
दुर्ग / शौर्यपथ / शहर विधायक अरुण वोरा एवं महापौर धीरज बाकलीवाल ने आज शहर में पेयजल व्यवस्था के तहत् अमृत मिशन योजना अंतर्गत 202 लाख रु0 की लागत से नई पानी टंकी निर्माण कार्य के लिए वार्ड पार्षद मदन जैन के साथ भूमि पूजन किया गया। इस अवसर पर निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन, के अलावा सभापति राजेश यादव सहित एमआईसी प्रभारी संजय कोहले, दीपक साहू, श्रीमती सत्यवती वर्मा व अन्य प्रभारी मौजूद थे .
उल्लेखनीय है कि नगर निगम दुर्ग की चार पानी टंकियों की जर्जर हो गई है इसके स्थान पर अमृत मिशन योजना के तहत् चार स्थानों पर नई टंकियों का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है । जिसमें 859.86 लाख रु0 की लागत से बनाया जाएगा । इसके अंतर्गत आज शनीचरी बाजार में निगम के पुराने लोक कर्म विभाग रिक्त भूमि मंें पानी टंकी का निर्माण किया जावेगा। इस संबंध में विधायक वोरा ने कहा शहर का निरंतर विस्तार हो रहा है नये-नये कालोनी और आवास बन रहे हैं नगर निगम का दायित्व कि उन सभी क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था करें । इस दृष्टि से आज पुराने जर्जर पानी टंकी के स्थान पर नवीन पानी टंकी निर्माण का भूमिपूजन किया गया है ।
इस संबंध में महापौर बाकलीवाल ने बताया कि दुर्ग शहर में स्थित पुरानी जर्जर टंकियों के स्थाना पर अमृत मिशन योजना के तहत् नवीन पानी टंकियों का निर्माण किया जाना है। उन्होनें बताया शनीचरी बाजार वार्ड 31, पदमनाभपुर वार्ड 45, शक्ति नगर वार्ड 17 और 24 एमएलडी फिल्टर प्लांट वार्ड 47 की पानी टंकियाॅ जर्जर हो गई है। उन्होनें बताया शनीचरी बाजार में 1700 लीटर क्षमता की पानी टंकी का निर्माण 202 लाख रु0 की लागत से बनाया जाएगा। शनीचरी बाजार में नई पानी टंकी निर्माण होने से आपापुरा वार्ड, चंडी मंदिर वार्ड, शिवपारा वार्ड, और गंजपारा वार्ड 36 के निवासियों के साथ महापौर श्री बाकलीवाल के ब्राम्हण पारा वार्ड के निवासियों को लाभ मिलेगा। उन्होनें बताया अमृत मिशन अंतर्गत शनीचरी बाजार में निर्माण होने वाले पानी टंकी से लगभग 15 किमी. की पाइप लाईन में पेयजल प्रदाय कियाजा सकेगा। जिसमें लगभग 07 हजार नल कनेक्शन प्रदान किया जावेगा। जिससे लगभग 24 हजार लोगों को शुद्ध पेयजल प्राप्त होगा ।
मुंगेली / शौर्यपथ / रामकृष्ण सांस्कृतिक व शिक्षण समिति द्वारा संचालित विवेकानंद विद्यापीठ हाईस्कूल,मुंगेली का हाईस्कूल परीक्षा परिणाम 2020 शत प्रतिशत रहा।विद्यालय से माध्यमिक शिक्षा मंडल छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित हाईस्कूल परीक्षा 2019-20 में कुल 41विद्यार्थियों ने परीक्षा दी जिनमें से सभी उत्तीर्ण हुए।कुल 41 विद्यार्थियों में से 36 प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए जबकि 5 द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण हुए।प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण 36 विद्यार्थियों में से 14 विद्यार्थियों ने 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर अपने परिवार के साथ विद्यालय को भी गौरवान्वित किया। छात्र आसीन दिवाकर 94.5% अंक प्राप्त कर शीर्ष पर रहे।काजल सोनकर 89%अंक प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रहीं और शुभम वर्मा 88.3% अंको के साथ तीसरे स्थान पर रहे।इनके अलावा 80%से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी वेदिका देवांगन 87.6%,आर्यन दिवाकर 86%,मानस यादव 85.8%,आराधना वर्मा 84.6%,छाया शर्मा 84.5%,फुलेश्वरी देवांगन 82%,सुमन शर्मा 81.7%,भावना वेंताल 81.5% , देव आशीष वैष्णव 81.3%,निकिता पटेल 81% और खुशबू कुम्भकार 80.5% रहे। विद्यालय के प्राचार्य श्री पारथ लाल कुलमित्र द्वारा विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए बधाइयां और शुभकामनाएं विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को फोन के माध्यम से दी गईं।इसके अलावा विद्यालय के अन्य शिक्षकों जितेश चंद्राकर,संजय पांडेय, महेश ध्रुव, अमन सोनकर और देवदत्त मिश्रा द्वारा भी विद्यार्थियों को बधाइयां और शुभकामनाएं दी गईं।साथ ही श्रीमती संतोषी कुलमित्र और स्वारथ कुलमित्र ने भी विद्यालय के 100% परिणाम पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके अच्छे भविष्य के लिए बधाइयां दीं।
किसान मूल्य आश्वासन अध्यादेश भाजपा के किसान विरोधी चरित्र की ऊपज
राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ स्टेट पाॅवर डिस्ट्रीब्यूषन कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं की सेवा सुविधा में लगातार वृद्धि की जा रही है। विद्युत विषयक कार्यों के त्वरित निपटारा हेतु प्रदेष में पहली बार अनेक विविध सुविधायें आरंभ की गई है। जिसमें ‘‘मोर बिजली ऐप’’की निःषुल्क सुविधा, चैबीस घण्टे षिकायतों को दर्ज करने केन्द्रीकृत काॅल सेंटर, विद्युत देयकों के सहज भुगतान हेतु आॅन लाईन पेमेंट, एटीपी मषीन, सहित बड़ी संख्या में काॅमन सर्विस सेंटर को जोड़ा गया है।
राजनांदगांव जिले में 1433 काॅमन सर्विस सेंटर (सी.एस.सी.) कार्यरत हैं जिनके माध्यम से दूरस्थ ग्रामीण अंचलों के निम्नदाब विद्युत उपभोक्ता देयकों का भुगतान कर सकते हैं। सार्वजानिक सुविधा केन्द्र के माध्यम से विद्युत देयकों का संग्रहण उपभोक्ताओं सहित कंपनी के लिये भी फायदेमंद है। इसे दृष्टिगत रखते हुये पाॅवर कंपनी के मुख्य अभियंता (राजस्व) श्री मधुकर जामुलकर द्वारा समस्त मैदानी अधिकारियों को पत्र प्रेषित कर काॅमन सर्विस सेंटर के अधिकाधिक उपयोग पर जोर दिया गया है। इन सेंटरों के माध्यम से विद्युत देयकों का भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को सी.एस.सी. एजेंट द्वारा ‘‘सिस्टम द्वारा बनाई गई रिसिप्ट’’ प्रदान की जाती है। मैनुअल अथवा हाथ से लिखी गई विद्युत देयक भुगतान की रिसिप्ट उपभोक्ताओं को स्वीकार नहीं करने की समझाईष दी गई है। राजनांदगांव जिले में संचालित काॅमन सर्विस सेंटर राजनांदगंाव, खैरागढ़, डोंगरगढ़ एवं डोेंगरगांव संभाग के अन्तर्गत सभी ब्लाक एवं ग्राम पंचायत पर 1610 (व्हीएलई) विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर कार्यरत हैं। इस तरह कबीरधाम जिले में संचालित काॅमन सर्विस सेंटर कवर्धा एवं पंडरिया संभाग के अन्तर्गत सभी ब्लाक एवं ग्राम पंचायत पर 650 (व्हीएलई) विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर कार्यरत हैं।
दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर दुर्ग जिले में विधानसभा स्तरीय वर्चुअल रैलीया आयोजित की गई जिसमें जिले के अंतर्गत आने वाले दुर्ग शहर विधानसभा, दुर्ग ग्रामीण विधानसभा, पाटन विधानसभा का वर्चुअल रैली का आयोजन किया गया जिसमें भारतीय जनता पार्टी की दुर्ग शहर स्तरीय विधानसभा वर्चुअल रैली का आयोजन दुर्ग जिला भाजपा कार्यालय में किया गया आयोजित रैली में दुर्ग शहर विधानसभा के प्रदेश जिला एवं मंडल स्तर के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म के माध्यम से जुड़े आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख रूप से दुर्ग जिला भाजपा अध्यक्ष उषा टावरी ,मुख्य वक्ता एवं पूर्व महापौर चंद्रिका चंद्राकर, जिला महामंत्री डोमार सिंह वर्मा, दुर्ग जिला सह प्रभारी कांतिलाल बोथरा, वरिष्ठ भाजपा नेता शिव चंद्राकर, मंडल अध्यक्ष लुकेश बघेल, चंद्रशेखर चंद्राकर , दीपक चोपड़ा, जिला भाजयुमो अध्यक्ष दिनेश देवांगन, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष रत्नेश चंद्राकर, शहर विधानसभा प्रभारी राकेश साहू, नेता प्रतिपक्ष अजय वर्मा उपस्थित रहे* *आयोजित वर्चुअल रैली में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूसरे कार्यकाल के सफलतम 1 वर्ष पूर्ण होने पर सरकार की उपलब्धियों का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया सरकार की कार्यकाल के विफलताओं का क्रमबद्ध गिनाया गया*
*वैश्विक महामारी कोरोना के दौर में भारतीय जनता पार्टी के द्वारा आम सभा एवं रैलियों को नए स्वरूप प्रदान करते हुए सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म के माध्यम से कर रही है .रैलियां राष्ट्रीय स्तर , प्रदेश स्तर लोकसभा स्तर, जिला स्तर से लेकर विधानसभा स्तर तक आयोजित की जा रही है इसी कड़ी में दुर्ग शहर विधानसभा की वर्चुअल रैली का आयोजन किया गया आयोजित रैली में दुर्ग शहर विधानसभा की मुख्य वक्ता चंद्रिका चंद्राकर ने विधानसभा के भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता एवं आम जनमानस को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने देश की जनता के तमाम कसौटी पर खरे उतरे ना सिर्फ ट्रिपल तलाक कश्मीर से अनुच्छेद 370, बरसों से बहुप्रतीक्षित देश की सबसे बड़ी मांग राम मंदिर के मुद्दे पर फैसला करवाया तथा मंदिर बनवाने का मार्ग प्रशस्त कराया,उनकी कुशल नेतृत्व की क्षमता के बदौलत आज में विश्व के शीर्ष नेताओं में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं उनके कुशल नेतृत्व में हमारा देश आज कोरोनावायरस से बेहतर ढंग से लड़ रहा है पूर्व महापौर चंद्रिका चंद्राकर ने प्रदेश सरकार की विफलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर मोर्चे पर प्रदेश सरकार विफल होती नजर आ रही है चाहे मैं बात करूं किसानों से धान खरीदी की, या शराबबंदी की, महिला स्व सहायता समूह का कर्ज माफी की या तो कहूं बेरोजगारी भत्ते की और इस वैश्विक महामारी कोरोना के दौर में प्रदेश सरकार की अकुशल प्रबंधन के चलते हमारे पूरे देश में क्वार्टाइन सेंटर में मौतों का आंकड़ा सबसे ज्यादा है उन्होंने शहर विधानसभा के समस्त कार्यकर्ताओं से अपील की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की पत्रक घर-घर जाकर बांटे*
राजनांदगांव / शौर्यपथ / सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने जिले के प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए जिला एवं विकासखंड स्तर पर हेल्पडेस्क का गठन किया है। जिला स्तर पर जिला पंचायत कार्यालय राजनांदगांव में स्थापित हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07744-224060 एवं श्रम पदाधिकारी कार्यालय राजनांदगांव में स्थापित हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07744-225049 है।
इसी तरह विकासखंड स्तर पर तहसीलदार कार्यालयों में प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए हेल्पडेस्क स्थापित किया गया हैं। राजनांदगांव विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07744-225403, खैरागढ़ विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07820-234230, छुईखदान विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07743-263503, डोंगरगांव विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07745-271756, अंबागढ़ चौकी विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07747-249280, छुरिया विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07745-264400, मोहला विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07747-249280, डोंगरगढ़¸ विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07823-232244 है।
० हर नागरिक की समाज के प्रति जिम्मेदारी
० शासन-प्रशासन का सहयोग करने से कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में मिलेगी मदद
० कलेक्टर ने राजनांदगांव शहर के नागरिकों से विशेष रूप से अपील की
राजनांदगांव / शौर्यपथ / जिले के कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने कोरोना संक्रमण के इस कठिन दौर में जिले की जनता से बेहद सावधानी और संयम बरतने की अपील की है। कलेक्टर वर्मा ने आज अपने अपील में कहा है कि कोरोना से डरने की बजाय लड़ने की जरूरत है। लड़ने का आशय हमें संक्रमण से बचने के लिए पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। संयम और सावधानी से कोरोना संक्रमण को रोका जा सकता है और स्वयं को,परिवार को, समाज को सुरक्षित रखा जा सकता है।
कलेक्टर वर्मा ने राजनांदगांव शहर में कोरोना संक्रमण के तेजी से फैलाव को देखते हुए शहर की जनता से अपील करते हुए कहा कि वे अत्यावश्यक कार्य के बिना घरों से न निकलें। कोरोना संक्रमण को रोकना हम सब की सामूहिक और नैतिक जिम्मेदारी है। समाज के हर आदमी को अपनी जिम्मेदारी का निवर्हन करना होगा। प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम सहित अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी जनता को इस महामारी से बचाने के लिए पूरी लगन और मेहनत से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कई बार देखने को मिलता है कि लोग बिना वजह घूमते रहते हैं। कोरोना संक्रमण का फैलाव गांवों, शहरों सभी तरफ हो रहा है। कोरोना संक्रमण समाज में फैलते जा रहा है। ऐसे में समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी बनती है। जनता की समझदारी और जिम्मेदारी से कोरोना संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी।
कलेक्टर ने कहा कि प्रशासनिक तौर पर कोरोना को हराने के लिए हर तरह की तैयारी की गई है। जनता को शासन-प्रशासन का सहयोग कराना चाहिए। कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है। अगर किसी भी व्यक्ति को थोड़ा बहुत भी कोरोना का लक्षण समझ आता हैं तो वे तुरंत स्वास्थ्य विभाग के कन्ट्रोल रूम के दूरभाष नंबर 07744-224084 पर संपर्क कर सकते हैं। श्री वर्मा ने कहा कि लॉकडाउन के लिए प्रोटोकाल बनाए गए है। व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को खोलने-बंद करने के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। व्यापारियों को भी प्रोटोकाल का पालन करना चाहिए।
कलेक्टर वर्मा ने कहा कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेसिंग का पालन करना सबसे जरूरी है। बहुत जरूरी काम से लोग घर से निकले तो मास्क जरूर लगाएं। शासन-प्रशासन द्वारा कोरोना संक्रमण से बचने के लिए आम लोगों को जागरूक करने तरह-तरह के उपाए किए जा रहे हैं। आम जनता के सहयोग से ही कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हम निश्चित रूप से सफल होंगे।कलेक्टर ने जिले की जनता से कोरोना संक्रमण का फैलाव को रोकने के लिए पुनः सहयोग की अपील की है।
कोरोना वारियर्स और पीड़ितों के प्रति नजरिए में बदलाव लाने चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / जिला पंचायत सभाकक्ष में गुरूवार को जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती यनिता यशवंत चंद्रा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं जिपं सदस्य सहित जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी तीर्थराज अग्रवाल की मौजूदगी में ‘बदलकर अपना व्यवहार, करें कोरोना पर वार’ के चार वीडियो प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाए गए। इन वीडियो के माध्यम से वैश्विक महामारी कोविड-19 से लड़ने वाले कोरोना वारियर्स एवं इस बीमारी से पीड़ितों व उनके परिजनों के प्रति नजरिए में अपनत्व की भावना लाने के बारे में बताया गया है।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती यनिता चंद्रा का कहना था कि वीडियो से बहुत सी जानकारी मिली है। इस तरह के वीडियो से लोगों को जागरूक करना आसान होता है। लोगों में कोरोना से बचने और पीड़ितों के प्रति नजरिया बदलता है। जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी तीर्थराज अग्रवाल ने बताया कि राज्य शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि मैदानी अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को ‘बदलकर अपना व्यवहार, करें कोरोना पर वार’ अभियान के तहत भारत सरकार द्वारा तैयार किए गए वीडियो का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसी तारतम्य में वैश्विक महामारी कोविड-19 के प्रसार की रोकथाम के लिए जनप्रतिनिधियों, अधिकारी, कर्मचारियों में जागरूकता बढ़ाने, कोरोना वारियर्स एवं इस बीमारी से पीड़ितों व उनके परिजनों के प्रति नजरिए में अपनत्व की भावना लाने तथा इससे बचाव के लिए सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आजीविका की ओर अग्रसर होने की अपील की गई है। जिपं सीईओ ने बताया कि ‘बदलकर अपना व्यवहार, करें कोरोना पर वार’ के वीडियो का प्रचार-प्रसार जनपद पंचायत स्तर पर करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जनपद पंचायत स्तर पर बनाए गए सोशल मीडिया ग्रुप में भी भेजने कहा गया है। इन वीडियो को केन्द्रीय ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ‘बदलकर अपना व्यवहार, करें कोरोना पर वार’ को यू-ट्यूब चैनल पर भी देखा जा सकता है। इस दौरान जिला पंचायत उपाध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप सिंह, सदस्य रामकुमार साहू, गणेशराम साहू, श्रीमती कुसुम साव, श्रीमती जयकांता राठौर, निर्मल सिन्हा, श्रीमती शिवकुमारी रात्रे, श्रीमती विद्या सिदार, धरमलाल भारद्वाज सहित विभागीय अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
