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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
विशेष लेख | शौर्यपथ
13 दिसंबर 2009 की सुबह पाकिस्तान के आर्थिक केंद्र कराची में हुई एक ऐसी घटना ने पूरे बैंकिंग तंत्र को झकझोर दिया, जिसे आज भी देश के इतिहास की सबसे बड़ी और सबसे संगठित बैंक डकैतियों में गिना जाता है। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं थी, बल्कि एक ऐसी वास्तविक घटना थी जिसमें बैंक की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला व्यक्ति ही करोड़ों की लूट का मास्टरमाइंड निकला।
कराची स्थित Allied Bank Limited की मुख्य शाखा में हुई इस डकैती ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि किसी भी संस्थान के लिए सबसे बड़ा खतरा कई बार बाहर से नहीं, बल्कि भीतर से होता है।
31 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा पर हाथ साफ
रविवार की सुबह बैंक बंद था। इसी अवसर का फायदा उठाते हुए सुरक्षा एजेंसी SPS में तैनात गार्ड शाहिद महमूद के नाम से कार्यरत व्यक्ति अपने 4-5 साथियों के साथ बैंक परिसर में पहुंचा। बैंक में पहले से मौजूद सुरक्षाकर्मियों और चौकीदारों को हथियारों के बल पर बंधक बना लिया गया।
इसके बाद लुटेरों ने गैस कटर की मदद से बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम में स्थित उस लॉकर को निशाना बनाया, जिसमें विदेशी मुद्रा रखी गई थी। लगभग तीन घंटे तक चले इस ऑपरेशन में गिरोह करीब 31 करोड़ पाकिस्तानी रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा और नकदी लेकर फरार हो गया।
लूटी गई रकम में ब्रिटिश पाउंड, यूरो, अमेरिकी डॉलर और पाकिस्तानी मुद्रा शामिल थी। बिना गोली चले और बिना किसी बड़े संघर्ष के इतनी बड़ी रकम का गायब हो जाना पाकिस्तान के बैंकिंग इतिहास की सबसे सनसनीखेज घटनाओं में दर्ज हो गया।
जांच में खुला सबसे बड़ा राज
पुलिस जांच में सामने आया कि कथित सुरक्षा गार्ड का असली नाम हामिद अली था। उसने नौकरी पाने के लिए एक गुमशुदा व्यक्ति के राष्ट्रीय पहचान पत्र (CNIC) का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाई थी।
यही नहीं, उसे बैंक की सुरक्षा व्यवस्था, स्ट्रॉन्ग रूम की संरचना और विदेशी मुद्रा रखने वाले लॉकर की पूरी जानकारी थी। यही जानकारी इस डकैती की सफलता का सबसे बड़ा कारण बनी।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बैंक में मौजूद एक अन्य गार्ड इमरान ने भी मौके का फायदा उठाकर लूट की रकम का एक हिस्सा अपने पास छिपा लिया था और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की थी। बाद में उसे भी सह-आरोपी बनाया गया।
सिर्फ 6 दिन में पुलिस की बड़ी सफलता
कराची पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट (SIU) ने तेजी से कार्रवाई करते हुए डकैती के महज छह दिन बाद मुख्य आरोपी हामिद अली और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने लूटी गई रकम का लगभग 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा बरामद कर लिया। हालांकि पूरी राशि कभी बरामद नहीं हो सकी और शेष रकम की तलाश में पुलिस ने विभिन्न प्रांतों में अभियान चलाया।
अदालत ने दिखाई सख्ती
मामले की सुनवाई आतंकवाद विरोधी अदालत (ATC) और बाद में उच्च न्यायिक मंचों पर हुई। मुख्य सरगना हामिद अली और उसके सहयोगियों को दोषी ठहराते हुए कठोर कारावास और भारी जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालतों ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं को भी लगातार खारिज किया।
यह फैसला इस संदेश के रूप में देखा गया कि वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के प्रति न्यायपालिका किसी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगी।
एक डकैती जिसने बदल दिए पूरे सिस्टम के नियम
इस घटना ने पाकिस्तान की बैंकिंग और निजी सुरक्षा व्यवस्था की कई गंभीर खामियों को उजागर कर दिया। परिणामस्वरूप सरकार, पुलिस प्रशासन और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को व्यापक सुधारात्मक कदम उठाने पड़े।
सुरक्षा एजेंसी पर कार्रवाई
लापरवाही और बिना पर्याप्त सत्यापन के गार्ड नियुक्त करने के आरोप में SPS सुरक्षा एजेंसी का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया और उसके कार्यालय को सील कर दिया गया।
गार्डों का अनिवार्य सत्यापन
पूरे सिंध प्रांत में कार्यरत 60 हजार से अधिक निजी सुरक्षा गार्डों का बायोमेट्रिक और पुलिस सत्यापन शुरू किया गया। बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि बिना सरकारी अनुमति और जांच के किसी गार्ड की नियुक्ति नहीं की जाएगी।
CCTV व्यवस्था का आधुनिकीकरण
जांच में पता चला कि बैंक के सीसीटीवी कैमरों की गुणवत्ता इतनी कमजोर थी कि संदिग्धों की पहचान करना मुश्किल हो रहा था। इसके बाद सभी बैंकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले HD कैमरे, सुरक्षित डेटा बैकअप और आधुनिक निगरानी प्रणाली अनिवार्य कर दी गई।
सुरक्षा ऑडिट और जवाबदेही
बैंकों को नियमित सुरक्षा ऑडिट, थर्ड पार्टी मूल्यांकन और आपातकालीन परिस्थितियों में तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन करने के निर्देश दिए गए। बैंक प्रबंधन की जवाबदेही भी पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर कर दी गई।
इतिहास का सबक
कराची की यह ऐतिहासिक बैंक डकैती केवल करोड़ों रुपये की चोरी की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा उदाहरण है जिसने यह साबित किया कि सुरक्षा व्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी अक्सर वही व्यक्ति हो सकता है जिस पर सबसे अधिक भरोसा किया जाता है।
2009 की इस घटना ने पाकिस्तान के बैंकिंग क्षेत्र को एक कठोर सबक दिया—सुरक्षा केवल हथियारों, ताले और कैमरों से नहीं आती, बल्कि सही सत्यापन, पारदर्शिता और जवाबदेही से सुनिश्चित होती है।
आज भी जब बैंकिंग सुरक्षा की चर्चा होती है, तो कराची की यह डकैती एक चेतावनी के रूप में याद की जाती है कि एक अंदरूनी साजिश किस तरह पूरे सुरक्षा तंत्र को ध्वस्त कर सकती है और करोड़ों की संपत्ति को कुछ घंटों में गायब कर सकती है।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता वाले जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों के तहत बिलासपुर जिले में “मोर गांव, मोर तरिया” अभियान को तेजी से अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से न सिर्फ गांवों में जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण की एक मजबूत नींव भी तैयार हो रही है। राज्य सराकर के जल संरक्षण अभियान को एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
मानसून से पहले काम पूरा करने का लक्ष्य, मस्तूरी में काम तेज
अभियान के तहत बिलासपुर जिले के जनपद पंचायत मस्तूरी की ग्राम पंचायत बोहारडीह में नवीन तरिया (तालाब) निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। प्रशासन ने आने वाले मानसून को ध्यान में रखते हुए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत वर्षाकाल शुरू होने से पहले निर्माण कार्य को गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि आगामी सीजन में वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित किया जा सके।
जिले में 38 नवीन तालाबों को मिली मंजूरी
जल संकट के स्थाई समाधान के लिए जिले में व्यापक स्तर पर जल संरचनाओं का विस्तार किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत बिलासपुर जिले में कुल 38 नवीन तरिया (तालाब) निर्माण कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इन सभी स्वीकृत तालाबों का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि वर्षाकाल में पानी रोकने की मजबूत व्यवस्था विकसित हो। इन तालाबों के निर्माण से क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होगा, फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, मवेशियों के लिए निस्तारी की सुविधा होगी और गर्मियों में होने वाले जल संकट से मुक्ति मिलेगी।
ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर मिल रहा रोजगार
“मोर गांव, मोर तरिया” अभियान दोहरे लाभ के साथ ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इन निर्माण कार्यों में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण श्रमिकों को नियोजित किया गया है। गांवों में तालाबों के रूप में स्थाई जल संपदा का निर्माण हो रहा है। श्रमिकों को अपने ही गांव में रोजगार मिलने से पलायन पर रोक लगी है और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है।
गुणवत्ता पर विशेष नजर
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सभी निर्माण स्थलों की सतत मॉनिटरिंग (निगरानी) की जा रही है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और सभी कार्य तय समय-सीमा के भीतर पूरे किए जा सकें।
रायपुर / भारत सरकार और राज्य शासन के निर्देशानुसार छत्तीसगढ के कोरबा जिले में खरीफ वर्ष 2026 के लिए कृषकों को गुणवत्तायुक्त एवं पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। कृषि विभाग के उप संचालक श्री डी.पी.एस. कंवर ने स्पष्ट किया है कि जिले में खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण है और किसानों को किसी भी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।कलेक्टर कोरबा कुणाल दुदावत ने उर्वरकों के भंडारण और वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने दोषी विक्रेताओं के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।
*जैव उर्वरक के रूप में नील हरित काई का उपयोग *
नील हरित काई एवं हरी खाद वायुमंडलीय नत्रजन का स्थिरीकरण कर पौधों को नाइट्रोजन पोषक तत्व उपलब्ध कराती हैं तथा मिट्टी की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणवत्ता को बनाए रखते हुए उसकी उर्वरता शक्ति में वृद्धि करती हैं। कृषकों को हरी खाद के रूप में ढैंचा बीज 8 किलोग्राम प्रति एकड़ तथा मूंग बीज 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से वितरित किया जा रहा है। साथ ही जैव उर्वरक के रूप में नील हरित काई का उत्पादन कृषि विज्ञान केंद्र लखनपुर, कृषि महाविद्यालय कटघोरा, शासकीय उद्यान रोपणी पत्ताड़ी (कोरबा) एवं चिन्हांकित किसानों के खेतों में कराया जा रहा है।
नैनो उर्वरक लेना अनिवार्य नहीं, रहेगा पूर्णतः वैकल्पिक
वैज्ञानिकों की अनुशंसा के आधार पर इस बार एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। रासायनिक खादों के साथ-साथ जैविक और हरी खाद के संतुलित उपयोग पर जोर है। सहकारी समितियों में पिछले वर्ष की मांग के आधार पर 80 प्रतिशत यूरिया और 60 प्रतिशत डीएपी का भंडारण कराया जा रहा है। यूरिया की शेष 20 प्रतिशत मात्रा नैनो यूरिया/वैकल्पिक उर्वरकों और डीएपी की शेष 40 प्रतिशत मात्रा नैनो डीएपी/एनपीके के माध्यम से दी जाएगी। प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी किसान को नैनो उर्वरक लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, यह पूरी तरह स्वैच्छिक होगा।
आंकड़ों में खाद और बीज का भंडारण
कोरबा जिले की सहकारी समितियों में खाद की उपलब्धता की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है।
सहकारी क्षेत्र के लिए 12 हजार 700 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित है। लक्ष्य के विरुद्ध 7 हजार 132.58 मीट्रिक टन (56.16 प्रतिशत) उर्वरक भंडारित किया जा चुका है। किसान अब तक 1 हजार 129.94 मीट्रिक टन खाद का उठाव कर चुके हैं, जबकि 6,002.64 मीट्रिक टन खाद अभी भी समितियों में शेष है। नैनो तरल उर्वरक का कोरबा जिले में कुल 11 हजार 886 लीटर (6 हजार 842 लीटर नैनो यूरिया और 5 हजार 44 लीटर नैनो डीएपी) का भंडारण किया गया था, जिसमें से 483.50 लीटर का वितरण हो चुका है और 11 हजार 402.50 लीटर स्टॉक में उपलब्ध है। इसके अलावा इच्छुक किसानों को हरी खाद के लिए ढैंचा बीज (8 किग्रा/एकड़) और मूंग बीज (4 किग्रा/एकड़) का वितरण भी किया जा रहा है।
28 को नोटिस, 58 बोरी यूरिया जब्त
किसानों को सही दाम और गुणवत्तापूर्ण खाद दिलाने के लिए उर्वरक निरीक्षकों की टीमें लगातार विक्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण कर रही हैं। 1 अप्रैल 2026 से अब तक 115 केंद्रों की जांच की जा चुकी है, जिसमें गड़बड़ियां सामने आई हैं। अनियमितता मिलने पर 28 विक्रय केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 8 विक्रय केंद्रों के लाइसेंस/बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। एक केंद्र पर अवैध कार्रवाई करते हुए 58 बोरी यूरिया जब्त किया गया है। कृषि विभाग के अनुसार कलेक्टर के निर्देश पर यह निरीक्षण अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा ताकि कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके। उर्वरकों के भंडारण एवं वितरण में किसी भी प्रकार कीअनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेशए 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियमए 1955 के प्रावधानों के तहत कठोर प्रशासनिक, कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।
हुगली (पश्चिम बंगाल),। पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर हिंसा और आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में आ गई है। हुगली जिले के चंडीतला थाना परिसर के बाहर शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के घायल होने की घटना ने राज्य की राजनीतिक फिजा को और गर्म कर दिया है। घटना को लेकर टीएमसी और भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है, जबकि पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी अपने समर्थकों के साथ हाल ही में गिरफ्तार किए गए पार्टी कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर चंडीतला पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। यहां उन्हें पुलिस प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपना था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसी दौरान पुलिस थाने के बाहर बड़ी संख्या में लोग और विरोधी राजनीतिक कार्यकर्ता भी मौजूद थे। माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब कुछ लोगों ने सांसद को काले झंडे दिखाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी, धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई।
घटना के बाद टीएमसी ने आरोप लगाया कि भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने सांसद कल्याण बनर्जी पर हमला किया। पार्टी के अनुसार, उनके सिर के पिछले हिस्से पर पत्थर, क्रिकेट गेंद या किसी भारी वस्तु से वार किया गया, जिससे उन्हें चोट लगी और रक्तस्राव होने लगा।
घटना के बाद सामने आए वीडियो और तस्वीरों में कल्याण बनर्जी सड़क पर बैठे और बाद में सिर पर कपड़ा लगाए दिखाई दिए। टीएमसी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए भाजपा समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया।
पार्टी का कहना है कि यह कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि सुनियोजित हमला था।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने टीएमसी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि सांसद को कोई गंभीर चोट नहीं लगी और घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि यह पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग देकर सहानुभूति हासिल करने का प्रयास है।
भाजपा समर्थकों ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो क्लिप साझा करते हुए दावा किया कि जिस समय कल्याण बनर्जी सड़क पर गिरे हुए दिखाई दे रहे थे, उस समय वे मोबाइल फोन पर बातचीत भी कर रहे थे। भाजपा का कहना है कि इससे टीएमसी के गंभीर हमले के दावों पर सवाल खड़े होते हैं।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब एक दिन पहले दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर क्षेत्र में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यक्रम के दौरान भी विरोध प्रदर्शन और कथित हमले की खबरें सामने आई थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं पश्चिम बंगाल में बढ़ती राजनीतिक ध्रुवीकरण और तनावपूर्ण माहौल का संकेत हैं।
घटना के बाद चंडीतला और आसपास के क्षेत्रों में तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है। थाना परिसर और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सांसद कल्याण बनर्जी को चोट किस परिस्थिति में लगी और क्या यह वास्तव में हमला था या झड़प के दौरान हुई कोई अन्य घटना। मामले की सच्चाई पुलिस जांच, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध वीडियो फुटेज के विश्लेषण के बाद ही सामने आ सकेगी।
(नोट: घटना को लेकर दोनों राजनीतिक दलों के दावे अलग-अलग हैं। स्वतंत्र जांच और आधिकारिक रिपोर्ट आने तक किसी भी पक्ष के आरोपों की पुष्टि नहीं की जा सकती।)
राज्य के 19,978 ग्रामों और 195 नगरीय निकायों को किया गया पूर्णतः कवर, नागरिकों के अभूतपूर्व सहयोग के लिए आभार व्यक्त
रायपुर / शौर्यपथ / जनगणना 2027 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण — मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना — का फील्ड कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। यह कार्य 01 मई 2026 से प्रारंभ होकर 30 मई 2026 को संपन्न हुआ। यह राष्ट्रीय महत्व का अभियान केवल आंकड़ों के संकलन तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के भारत और छत्तीसगढ़ के विकास की ठोस आधारशिला तैयार करने वाला महत्वपूर्ण उपक्रम है।
जनगणना प्रक्रिया के माध्यम से शासन को यह समझने में सहायता मिलती है कि समाज के विभिन्न वर्गों तक विकास के लाभ किस प्रकार और कितनी प्रभावशीलता से पहुँच रहे हैं तथा भविष्य की योजनाओं और नीतियों का निर्माण अधिक सटीक एवं समावेशी ढंग से किया जा सके।
भारत की जनगणना 2027 का कार्य राज्य में दो चरणों में संपादित किया जा रहा है। प्रथम चरण के अंतर्गत मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना की गई, जबकि द्वितीय चरण — जनसंख्या गणना — फरवरी 2027 में संपादित की जाएगी। प्रथम चरण से प्राप्त जानकारी द्वितीय चरण के लिए आधार तैयार करती है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी मकान अथवा उसमें निवासरत परिवार गणना से वंचित न रह जाए।
प्रथम चरण के दौरान राज्य के सभी ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर भारत सरकार द्वारा अधिसूचित 33 प्रश्नों के आधार पर जानकारी संकलित की गई। इन प्रश्नों का संबंध मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं तथा परिसंपत्तियों से था। यह संपूर्ण जानकारी मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से संकलित कर भारत सरकार के सर्वर में सुरक्षित रूप से संरक्षित की गई है।
राज्य में यह कार्य सभी जिलों, तहसीलों, ग्रामों तथा नगरीय क्षेत्रों में शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपादित किया गया। इस दौरान राज्य का कोई भी क्षेत्र गणना कार्य से वंचित नहीं रहा। घर-घर जाकर जानकारी एकत्रित करने की प्रक्रिया में नागरिकों का अभूतपूर्व सहयोग प्राप्त हुआ।
निदेशक, जनगणना कार्य, छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों द्वारा साझा की गई समस्त व्यक्तिगत जानकारी जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियमावली, 1990 के प्रावधानों के अनुसार पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। संकलित आंकड़ों का उपयोग केवल नीति निर्माण तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के उद्देश्य से किया जाएगा तथा संपूर्ण जनगणना प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात भारत सरकार द्वारा नियमानुसार इन्हें जारी किया जाएगा।
राज्य में प्रथम चरण का कार्य 33 जिलों, 252 तहसीलों, 195 नगरीय निकायों तथा 19,978 ग्रामों में संपादित किया गया। इसके लिए 251 ग्रामीण चार्ज एवं 221 नगरीय चार्ज गठित किए गए तथा इनके अंतर्गत 48,754 मकानसूचीकरण गणना ब्लॉक बनाए गए।
इस व्यापक अभियान के संचालन हेतु राज्य में कुल 62,500 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती की गई, जिनमें 47 प्रमुख जनगणना अधिकारी (33 जिला कलेक्टर एवं 14 नगर निगम आयुक्त), 250 जिला स्तरीय अधिकारी, 472 चार्ज अधिकारी, 60 मास्टर ट्रेनर्स, 1,100 फील्ड ट्रेनर्स, 52,705 प्रगणक तथा 9,319 पर्यवेक्षक शामिल रहे।
निदेशक, जनगणना कार्य, छत्तीसगढ़ ने प्रथम चरण के सफल संचालन पर राज्य के सभी नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि फरवरी 2027 में आयोजित होने वाले द्वितीय चरण — जनसंख्या गणना — में भी प्रदेशवासियों का इसी प्रकार सक्रिय एवं सकारात्मक सहयोग प्राप्त होगा।
स्वच्छता जनआंदोलन की मिसाल: एनटीपीसी सीपत की जागरूकता रैली में 800 लोगों ने किया श्रमदान
बिलासपुर / शौर्यपथ / स्वच्छता पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) सीपत द्वारा शनिवार को वृहत स्वच्छता जागरूकता रैली एवं सामूहिक श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। परियोजना प्रमुख श्री स्वपन कुमार मंडल के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में लगभग 800 लोगों ने सहभागिता कर स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने का संदेश दिया।
एनटीपीसी सीपत के मुख्य द्वार से प्रारंभ हुई रैली लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सीपत हाट पहुंची। रैली के दौरान प्रतिभागियों ने स्वच्छता संबंधी संदेशों के माध्यम से लोगों को अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने तथा स्वच्छ भारत अभियान से सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
अभियान के तहत एनटीपीसी मुख्य द्वार से सीपत हाट तक चिन्हित आठ स्थानों पर विशेष श्रमदान कर लंबे समय से जमा कूड़ा-कचरा हटाया गया और क्षेत्र की व्यापक सफाई की गई। इसके साथ ही मुख्य मार्ग से लगे बलदेव तालाब क्षेत्र में भी विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों के आवागमन वाले इस क्षेत्र को स्वच्छ बनाने के लिए व्यापक जनसहभागिता देखने को मिली। विभिन्न स्थलों पर स्वच्छता संबंधी संदेश प्रदर्शित कर नागरिकों से सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ बनाए रखने तथा स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की गई।
इस अभियान में एनटीपीसी सीपत के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ उनके परिजन, यूनियन एवं एसोसिएशन के प्रतिनिधि, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवान, बाल भारती पब्लिक स्कूल के शिक्षक एवं विद्यार्थी, स्थानीय पुलिस प्रशासन, संविदा एजेंसियों के कर्मचारी, ठेका श्रमिक, ग्रामीणजन तथा पत्रकार बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी प्रतिभागियों ने स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए अभियान को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया।
सीपत हाट पहुंचने पर परियोजना प्रमुख सहित अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्थानीय नागरिकों एवं व्यापारियों से संवाद किया तथा स्वच्छ परिवेश के सामाजिक, स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर श्री मंडल ने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से स्वच्छता को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने और अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ, सुंदर एवं स्वस्थ बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उल्लेखनीय है कि इस अभियान के सफल आयोजन के लिए पूर्व में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, बाल भारती पब्लिक स्कूल, स्वामी आत्मानंद महाविद्यालय, स्थानीय पुलिस प्रशासन, संविदा एजेंसियों तथा प्रेस प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बैठकें आयोजित की गई थीं, ताकि अधिकाधिक जनभागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
कार्यक्रम में महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण) सुरोजीत सिन्हा, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं ईंधन प्रबंधन) अशोक सरकार, महाप्रबंधक (इंजीनियरिंग) विकास खरे, अपर महाप्रबंधक (मेंटेनेंस) अनुराग गौतम, मानव संसाधन प्रमुख जयप्रकाश सत्यकाम सहित सभी विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी, बाल भारती पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य सलभ निगम, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस प्रशासन के प्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि 16 से 31 मई तक आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत एनटीपीसी सीपत द्वारा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, चित्रकला, निबंध लेखन, स्वच्छता शपथ तथा विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। यह पहल सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से स्वच्छ एवं स्वस्थ समाज के निर्माण के प्रति एनटीपीसी सीपत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल ने कहा कि आज के दौर में संस्कार शिविरों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान केवल अधिकारों की मांग में नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों के निष्ठापूर्वक पालन और समाधानमूलक जीवन दृष्टि अपनाने में है।
25 से 30 मई तक मां शारदा पब्लिक स्कूल, सेक्टर-9 में आयोजित इस निःशुल्क शिविर में बच्चों को योग, आत्मरक्षा, लाठी-काठी चालन, स्मरण शक्ति विकास, नेतृत्व, अनुशासन, संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों का प्रशिक्षण दिया गया। पुणे से आए प्रशिक्षक कुमारी गौरी और श्री श्रीधर ने बच्चों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया।
शिविर के दौरान आयोजित मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम ने सभी को भावुक कर दिया। बच्चों ने माता-पिता का तिलक कर, आरती उतारकर और चरण पूजन कर भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी आस्था और सम्मान का परिचय दिया। इस अवसर पर कई अभिभावकों की आंखें नम हो गईं।
गीता परिवार पिछले 39 वर्षों से बाल संस्कार, गीता ज्ञान और वेदोत्थान के कार्यों में सक्रिय है तथा वर्तमान में अपने 40वें स्थापना वर्ष में प्रवेश कर चुका है। संस्था ने देशभर में 40 हजार कार्यकर्ता तैयार करने और 40 लाख लोगों तक गीता का संदेश पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
गीता परिवार छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष गीत गोविंद साहू, मध्यांचल प्रमुख प्रमिला ताई माहेश्वरी, दुर्ग-भिलाई इकाई की अध्यक्षा भूमिजा बेंडाले तथा उनकी टीम के प्रयासों से आयोजित यह शिविर भिलाई में संस्कार, संस्कृति और नैतिक चेतना के एक नए अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
संस्कार, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश देने वाला यह शिविर बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल साबित हुआ।
दुर्ग।शौर्यपथ / दुर्ग जिले के लिए आज का दिन विकास के नए अध्याय के रूप में दर्ज हुआ, जब सीएम साय ने जिले को ₹737 करोड़ के विकास कार्यों की ऐतिहासिक सौगात दी। मुख्यमंत्री के दुर्ग आगमन पर भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र कौशिक ने उनका आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
इस अवसर पर आयोजित “सुशासन तिहार” कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों की सहभागिता रही। कार्यक्रम ने मुख्यमंत्री की सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और पारदर्शी प्रशासन की कार्यशैली को प्रभावी रूप से सामने रखा।
मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों के माध्यम से दुर्ग जिले के बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और क्षेत्रीय प्रगति को नई गति देने का संदेश दिया। जनकल्याण, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन को केंद्र में रखकर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का उनका संकल्प कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।
भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र कौशिक ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास, सुशासन और जनविश्वास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा दुर्ग को प्रदान की गई ₹737 करोड़ की विकास सौगात को जिले के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
सुशासन, विकास और जनकल्याण के संदेश के साथ आयोजित यह कार्यक्रम दुर्ग के विकास इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
दुर्ग में सियासी गलियारों में चर्चा, जन्मदिन पर पोस्टरों की बाढ़ और मुख्यमंत्री आगमन पर सन्नाटा क्यों?
दुर्ग। राजनीति में पोस्टर, बैनर और होर्डिंग केवल स्वागत या शुभकामना के माध्यम नहीं होते, बल्कि वे स्थानीय सत्ता संतुलन, प्रभाव और राजनीतिक प्राथमिकताओं का भी संकेत देते हैं। दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में इन दिनों ऐसा ही एक दिलचस्प राजनीतिक संदेश चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज दुर्ग जिला मुख्यालय में सैकड़ों करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात देने पहुंच रहे हैं। नगर निगम और भाजपा संगठन की ओर से लगातार यह बताया गया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शहर को लगभग 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति मिली है। महापौर अलका बाघमार ने भी विभिन्न प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया और इसे दुर्ग के विकास के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर एक अलग तस्वीर पर भी गई है।
जन्मदिन पर पोस्टरों का महासागर, मुख्यमंत्री आगमन पर सीमित स्वागत
कुछ महीने पहले महापौर अलका बाघमार के जन्मदिन के अवसर पर शहर के प्रमुख चौक-चौराहों से लेकर मुख्य मार्गों तक पोस्टर और बैनरों की भरमार देखने को मिली थी। नगर निगम के ठेकेदारों और उनसे जुड़े समूहों द्वारा लगाए गए शुभकामना संदेशों ने ऐसा माहौल बना दिया था कि मानो शहर में हो रहे विकास का पूरा श्रेय महापौर को ही दिया जा रहा हो।
दुर्ग नगर निगम के इतिहास में शायद पहली बार किसी महापौर के जन्मदिन पर इतनी व्यापक स्तर की पोस्टरबाजी देखने को मिली थी। कई राजनीतिक जानकारों ने तब इसे स्थानीय शक्ति प्रदर्शन और प्रभाव स्थापित करने की कवायद माना था।
इसके विपरीत, आज जब प्रदेश के मुख्यमंत्री दूसरी बार जिला मुख्यालय पहुंच रहे हैं और विकास कार्यों की बड़ी सौगात देने वाले हैं, तब शहर में उनके स्वागत को लेकर वैसा उत्साह पोस्टर और बैनरों में दिखाई नहीं देता। प्रोटोकॉल मार्ग और कुछ चुनिंदा स्थानों को छोड़ दें तो शहर का अधिकांश हिस्सा सामान्य नजर आता है।
क्या ठेकेदारों की प्राथमिकता बदल गई है?
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ऐसा क्यों?
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि नगर निगम से जुड़े ठेकेदारों और हितधारकों के लिए वर्तमान समय में नगर निगम की सत्ता और उससे जुड़े निर्णय अधिक महत्वपूर्ण हैं। निगम स्तर पर होने वाले विकास कार्यों, टेंडरों और परियोजनाओं का सीधा संबंध स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से होता है। ऐसे में उनके लिए स्थानीय नेतृत्व को खुश रखना राजनीतिक और व्यावहारिक दृष्टि से अधिक लाभकारी माना जा सकता है।
यही कारण है कि जब अवसर महापौर के जन्मदिन का था तो पोस्टरों की बाढ़ आ गई, लेकिन जब मुख्यमंत्री के स्वागत की बारी आई तो वही उत्साह दिखाई नहीं दिया।
पोस्टर वार का राजनीतिक अर्थ
राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि पोस्टर वहां लगते हैं जहां संदेश देना होता है। इसलिए यह मामला केवल स्वागत और शुभकामना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी माना जा सकता है।
एक ओर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राज्य की सर्वोच्च राजनीतिक कार्यपालिका का प्रतिनिधित्व करते हैं और शहर को करोड़ों रुपये के विकास कार्य उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर महापौर के प्रति दिखाई गई असाधारण पोस्टरबाजी यह संकेत देती है कि कुछ वर्गों की नजर में तत्काल प्रभाव और पहुंच का केंद्र स्थानीय सत्ता अधिक महत्वपूर्ण है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
क्या मुख्यमंत्री के स्वागत में अपेक्षित स्तर की तैयारी नहीं हुई?
क्या पोस्टर लगाने वाले समूहों की प्राथमिकताएं स्थानीय सत्ता तक सीमित हैं?
क्या यह केवल संयोग है या फिर स्थानीय राजनीतिक संदेश देने की सुनियोजित रणनीति?
क्या विकास कार्यों का श्रेय लेने की होड़ में पोस्टर राजनीति नया अध्याय लिख रही है?
निष्कर्ष
दुर्ग की यह पोस्टर राजनीति कई सवाल छोड़ रही है। मुख्यमंत्री के प्रति सार्वजनिक आभार और जमीन पर दिखाई देने वाले राजनीतिक उत्साह के बीच का अंतर चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पोस्टर और बैनर भले ही कागज और फ्लेक्स के बने हों, लेकिन वे अक्सर सत्ता के वास्तविक केंद्रों और प्राथमिकताओं का संकेत दे जाते हैं।
आज दुर्ग की राजनीति में उठ रहा सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ठेकेदारों और स्थानीय हितधारकों की नजर में महापौर को प्रसन्न करना मुख्यमंत्री के स्वागत से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, या फिर यह केवल राजनीतिक संयोग है?
(यह लेख स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाले पोस्टर-बैनर के आधार पर विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।)
रायपुर, / आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं छत्तीसगढ़ श्री महादेव कावरे (आईएएस) के सेवानिवृत्त होने पर आज नवा रायपुर में भावभीनी विदाई एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सहकारिता विभाग राजपत्रित अधिकारी संघ एवं अपेक्स बैंक एम्प्लाइज यूनियन द्वारा आयोजित इस समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके दीर्घ प्रशासनिक अनुभव, कुशल नेतृत्व तथा जनहितकारी कार्यों को स्मरण करते हुए सम्मानपूर्वक विदाई दी।
बीजापुर जिले के मूल निवासी श्री महादेव कावरे की प्रारंभिक शिक्षा बीजापुर में हुई। उन्होंने अपने प्रशासनिक जीवन की शुरुआत विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों से की और रक्षा, रेलवे तथा राज्य प्रशासनिक सेवा में उल्लेखनीय सेवाएं दीं। वे एसडीएम, एनआरडीए महाप्रबंधक, बेमेतरा एवं जशपुर के कलेक्टर तथा रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
इसके अलावा उन्होंने सचिव आवास एवं पर्यावरण, सचिव आबकारी, गृह विभाग तथा संचालक कोष एवं लेखा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अपनी सेवाएं देकर प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सहकारिता विभाग में उनके कार्यकाल को पारदर्शिता, नवाचार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष रूप से याद किया जाएगा।
सम्मान समारोह में सहकारिता विभाग के अपर आयुक्त एवं अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री के.एन. कांडे सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने श्री कावरे के प्रशासनिक योगदान की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखद एवं सफल भविष्य की कामना की।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
