January 27, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

बिलासपुर । शौर्यपथ
परियोजना प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों की आधारभूत आवश्यकताओं को मजबूत करते हुए एनटीपीसी सीपत द्वारा कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के अंतर्गत किए जा रहे ₹6.25 करोड़ के विकास कार्यों का उद्घाटन और भूमिपूजन ग्राम पंचायत कर्रा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ₹4.53 करोड़ की लागत से पूर्ण 12 विकास कार्यों का लोकार्पण और ₹1.72 करोड़ के चार नए प्रस्तावित कार्यों का भूमिपूजन संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय राज्य मंत्री (आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय) तथा बिलासपुर सांसद श्री तोखन साहू ने इन कार्यों का विधिवत उद्घाटन किया। कार्यक्रम में मस्तूरी विधायक श्री दिलीप लहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, पूर्व विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, एवं एनटीपीसी सीपत के परियोजना प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक श्री विजय कृष्ण पाण्डेय विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

कई गांवों में दर्जनों विकास कार्य पूरे

एनटीपीसी सीपत ने अपने CSR कार्यक्रम के तहत परियोजना प्रभावित ग्राम पंचायतों—कर्रा, सीपत, गतौरा, रलिया, जांजी, देवरी, कौड़िया, रांक और दर्राभाटा—में कुल 12 विकास कार्य पूरे किए हैं, जिनमें

आधारभूत संरचना निर्माण,तालाबों का पुनरुद्धार,शिक्षा सुविधाओं का विस्तारजैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं।साथ ही चार नए विकास कार्यों के लिए भूमिपूजन किया गया।

“सीएसआर ग्रामीण विकास की रीढ़” — केंद्रीय मंत्री तोखन साहू

मुख्य अतिथि श्री तोखन साहू ने कहा कि एनटीपीसी सीपत द्वारा किए जा रहे कार्यों से क्षेत्रीय विकास को ठोस आधार मिला है। उन्होंने कहा कि “सीएसआर केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि समावेशी विकास का मार्ग है।”
उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ स्थित एनटीपीसी सीपत देश के कई राज्यों को विद्युत आपूर्ति कर रहा है और निर्माणाधीन 800 मेगावाट की नई इकाई से इसकी राष्ट्रीय भूमिका और सशक्त होगी।

जनप्रतिनिधियों ने सराहा विकास मॉडल

मस्तूरी विधायक श्री दिलीप लहरिया ने कहा कि ग्राम स्तर पर बुनियादी सुविधाओं का विस्तार ही समग्र विकास का वास्तविक मार्ग है और एनटीपीसी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी ने कहा कि सीएसआर के ये कार्य ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।

पूर्व विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी एवं जनपद अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती देवी ने कौशल विकास और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐसे प्रयासों को अत्यंत आवश्यक बताया।

एनटीपीसी की प्रतिबद्धता

परियोजना प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक श्री विजय कृष्ण पाण्डेय ने एनटीपीसी सीपत द्वारा संचालित CSR गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए सामाजिक विकास के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता दोहराई तथा सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के प्रति आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में एनटीपीसी सीपत के वरिष्ठ अधिकारी, जिला एवं जनपद पंचायत सदस्य, अनेक ग्राम पंचायतों के सरपंच, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सक्रिय सहभागिता के साथ कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कवर्धा / शौर्यपथ /
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विकासखंड बोड़ला के ग्राम पोड़़ी में सुरेठी कुर्मी समाज के नवनिर्मित सामाजिक भवन का लोकार्पण किया। समाज के बीच आयोजित भव्य सम्मेलन में उन्होंने सहभागिता करते हुए समाज के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों का उत्साहपूर्ण स्वागत किया। मंच पर उत्कृष्ट सामाजिक कार्य करने वाले प्रतिनिधियों को उन्होंने शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने समाज के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए सुरेठी कुर्मी (वर्मा) समाज के छात्रावास एवं भवन विकास हेतु 30 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के हर रचनात्मक कार्य में सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।

“संस्कारों से बनता है सशक्त समाज” — उपमुख्यमंत्री

लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए विजय शर्मा ने कहा कि किसी भी समाज की मज़बूती का आधार केवल शिक्षा नहीं, बल्कि संस्कार होते हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी यदि संस्कार न हों तो उसका कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलता। उन्होंने हाल के आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि “हमले में शामिल लोग पढ़े-लिखे थे, परंतु उनमें संस्कारों की कमी थी, जिसने उन्हें गलत मार्ग पर धकेल दिया।”
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि भारतीय और छत्तीसगढ़ी संस्कृति में संस्कारों की परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। “यदि बच्चा प्रतिदिन माता-पिता को प्रणाम करता है, अपने बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करता है, तो वह कभी भटक नहीं सकता।” उन्होंने लोगों से इस परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि मनीराम साहू, वर्मा समाज अध्यक्ष शिवप्रसाद वर्मा, तथा समाज के प्रमुख प्रतिनिधि—भगवती प्रसाद वर्मा, रवि वर्मा, सत्रुहन वर्मा, पुराण वर्मा, श्याम वर्मा, अमित वर्मा, पीताम्बर वर्मा, भरत वर्मा, सरपंच मिथिला साहू समेत बड़ी संख्या में समाजजन और नागरिक उपस्थित थे।

केपीएल के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का सम्मान

उपमुख्यमंत्री द्वारा आयोजित कवर्धा प्रीमियर लीग (KPL) क्रिकेट प्रतियोगिता में बोड़ला मंडल के नेउरगांव टीम के खिलाड़ी लवकेश वर्मा तथा लेंजाखार के पोषण वर्मा ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सबका ध्यान आकर्षित किया। उनके शानदार खेल से प्रभावित होकर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दोनों खिलाड़ियों को सम्मानित किया तथा प्रत्येक को 5100 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

   भोपाल / एजेंसी / भोपाल में एक बार फिर साबित हो गया कि घोटालों के मामले में नगर निगम की रचनात्मकता अद्वितीय है। राजधानी के वार्ड 53 में मात्र 240 मीटर लंबी और 3 फीट चौड़ी नाली को ढंकने के लिए रिकॉर्डतोड़ 16,139 किलोग्राम (16 टन) लोहे का उपयोग दिखाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इतना लोहा तो बड़े पुलों में भी नहीं लगता, परंतु यहाँ एक ‘छोटी सी नाली’ ने ही निगम के ख़जाने को भारी-भरकम झटका दे दिया।
कागजों पर सब कुछ इतना शानदार है कि बिना साइट देखे ही इंजीनियरों ने 13 लाख रुपये का बिल पास कर दिया। नगर निगम के असिस्टेंट इंजीनियर निशांत तिवारी द्वारा मंजूर यह बिल अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है।
उधर, प्रभारी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर बृजेश कौशल पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि आरोप है कि उन्होंने निर्माण के दौरान एक बार भी साइट का दौरा नहीं किया। सबसे रोचक मोड़ तो तब आया जब 5 दिसंबर को नोटिस, और 8 दिसंबर को साइट निरीक्षण के बावजूद न तो रिपोर्ट पेश की गई और न ही काम की वास्तविकता जाँची गई—लेकिन बिल पास कराने में किसी ने देर नहीं की!
अब मामले की गर्माहट बढ़ने के बाद निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने नाली की कोर-कटिंग के आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि कागजों की दुनिया में बिछाए गए लोहे के पुल की सच्चाई जमीन पर उतर सके।भेल संगम कॉलोनी की यह नाली अब सिर्फ सीमेंट-सरिया की नहीं, बल्कि निगम की लापरवाही, इंजीनियरों की भूमिका और भ्रष्टाचार के लोहे जैसे ठोस सवालों की नाली बन चुकी है।

दुर्ग / शौर्यपथ

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार जहां सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को अपनी प्राथमिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं दुर्ग नगर पालिक निगम से सामने आया एक प्रकरण इन दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। मामला न केवल प्रशासनिक निर्णयों की असंगतता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार छोटे कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई और वरिष्ठ अधिकारियों पर महज औपचारिक माफी की नीति अपनाई जा रही है।

दो साल बाद पदोन्नति निरस्त : पीडि़त कौन, दोषी कौन?
दुर्ग नगर निगम में वर्षों से पंप अटेंडेंट के रूप में कार्यरत कर्मचारी राजू लाल चंद्राकर को तत्कालीन आयुक्त लोकेश चंद्राकर के कार्यकाल में विभागीय पदोन्नति समिति (ष्ठक्कष्ट) की संस्तुति पर जल कार्य निरीक्षक के पद पर पदोन्नति प्रदान की गई थी। यह पदोन्नति किसी एक अधिकारी के व्यक्तिगत निर्णय से नहीं, बल्कि विधिवत गठित समिति की अनुशंसा पर हुई थी।
इस समिति में —
दिनेश नेताम, कार्यपालन अभियंता
जितेंद्र सोमैया, सहायक अभियंता (वर्तमान में सेवानिवृत्त)
राजकमल बोरकर, कार्यालय अधीक्षक
जावेद अली, तत्कालीन स्वास्थ्य अधिकारी
भूपेंद्र गोईर, सहायक ग्रेड-3
शामिल थे। स्थापना प्रभारी बंजारे द्वारा आवश्यक अभिलेख समिति के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे। समिति ने उपलब्ध पद, सेवा अभिलेख और नगरीय निकाय नियमों के आधार पर राजू लाल चंद्राकर को पदोन्नति देने का निर्णय लिया।

वर्तमान आयुक्त का आदेश और उठा विवाद
लगभग दो वर्ष तक जल कार्य निरीक्षक के पद पर कार्य करने के बाद, जुलाई 2025 में वर्तमान आयुक्त सुमित अग्रवाल ने एक आदेश जारी कर न केवल राजू लाल चंद्राकर की पदोन्नति निरस्त कर दी, बल्कि उन्हें पुन: पंप अटेंडेंट के पद पर डिमोशन दे दिया। साथ ही, पदोन्नति समिति के सभी सदस्यों को नोटिस जारी किया गया।
नोटिस के जवाब में समिति के सभी सदस्यों ने स्पष्ट किया कि —पदोन्नति नगरीय निकाय नियमों के अनुरूप थी,पद की उपलब्धता मौजूद थी,पूर्व में भी इसी प्रकार की पदोन्नतियां हो चुकी हैं। इसके बावजूद, समिति के उत्तरों को अस्वीकार कर दिया गया। परिणाम यह रहा कि — समिति के सदस्यों को केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया,जबकि कर्मचारी राजूलाल चंद्राकर को पदावनत कर दिया गया।यही बिंदु आज दुर्ग निगम में सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक मामला
राजू लाल चंद्राकर ने वेतन और पद से जुड़े विवाद को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। एक शपथ पत्र में स्वयं आयुक्त सुमित अग्रवाल ने यह स्वीकार किया कि राजू लाल चंद्राकर उनके अधीनस्थ कर्मचारी हैं और जल कार्य निरीक्षक के रूप में कार्यरत रहे हैं।
प्रशासनिक कानून के जानकारों का कहना है कि — यदि पदोन्नति अवैध थी, तो दो वर्षों तक कार्य क्यों कराया गया? और यदि अवैध नहीं थी, तो डिमोशन का आधार क्या है? यही प्रश्न अब माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।

नियम विरुद्ध पदोन्नति थी तो अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
इस पूरे प्रकरण का दूसरा और अधिक गंभीर पहलू यह है कि — यदि मान लिया जाए कि पदोन्नति नियमों के विरुद्ध थी, तो फिर:पदोन्नति समिति के सदस्यों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं? ,स्थापना शाखा और फाइल आगे बढ़ाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं?
सिर्फ एक कर्मचारी को दंडित कर देना और निर्णय लेने वाले अधिकारियों को "चेतावनी का गुलदस्ता" थमा देना, प्रशासनिक न्याय की अवधारणा पर सवाल खड़े करता है। निगम के भीतर इसे निजी द्वेष और भेदभावपूर्ण नीति के रूप में देखा जा रहा है।

चयनात्मक कार्रवाई का लंबा इतिहास
दुर्ग निगम में यह पहला मामला नहीं है। वर्तमान आयुक्त के कार्यकाल में उच्च अधिकारियों की प्रताडऩा से त्रस्त कर्मचारियों द्वारा आत्महत्या के मामले सामने आए,बाद में नियमों को शिथिल कर आनन-फानन में परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति दी गई,जबकि अन्य समान मामलों में कर्मचारी महीनों से निलंबन झेल रहे हैं।
इसी तरह, सहायक राजस्व निरीक्षक थान सिंह यादव पर पार्किंग घोटाले में पेनल्टी लगने और लॉलीपॉप विज्ञापन घोटाले में भौतिक सत्यापन के दौरान अनियमितता बरतने के आरोप हैं। इन मामलों में निगम को राजस्व हानि हुई, परंतु कार्रवाई का दायरा ठेकेदार तक सीमित रहा — कर्मचारी फिर बच निकले।

सुशासन पर आईना
दुर्ग नगर निगम की यह कार्यप्रणाली अब केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं रही। यह मामला सीधे तौर पर राज्य सरकार के सुशासन के दावों पर असर डाल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बार-बार सुशासन की बात करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ अधिकारी यदि अपनी संवैधानिक शक्तियों का चयनात्मक और मनमाना प्रयोग करते हैं, तो उसकी आंच सरकार तक पहुंचना स्वाभाविक है।
अब सबकी निगाहें माननीय उच्च न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं। यह फैसला न केवल राजू लाल चंद्राकर के भविष्य का निर्धारण करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि प्रशासनिक निर्णयों की जवाबदेही किसकी होगी?और क्या वास्तव में दुर्ग निगम में 'कानून सबके लिए समानÓ है?फिलहाल, दुर्ग में चर्चा का बाजार गर्म है और सवाल एक ही है — क्या यह सुशासन है, या सत्ता की छाया में पनपता भेदभाव?

रायपुर। शौर्यपथ
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता का परचम लहराया है। एम्स रायपुर के एमबीबीएस 2023 बैच के छात्र अनिकेत त्रिपाठी एवं स्रहास दिन्नेपल्ली ने एम्स भोपाल में आयोजित प्रतिष्ठित अंतर-महाविद्यालय फार्माकोलॉजी क्विज़ प्रतियोगिता ‘फार्मक्वेस्ट 2025’ में देशभर की 37 टीमों को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया।
एम्स भोपाल के फार्माकोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य चिकित्सा छात्रों में फार्माकोलॉजी की गहन अवधारणात्मक समझ एवं नैदानिक अनुप्रयोग को सुदृढ़ करना है। प्रतियोगिता के विभिन्न चुनौतीपूर्ण चरणों में एम्स रायपुर की टीम ने विषय ज्ञान, तार्किक विश्लेषण और उत्कृष्ट समस्या-समाधान क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन कर निर्णायकों को प्रभावित किया।
इस गौरवपूर्ण सफलता पर एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) डॉ. अशोक जिंदल ने विजेता छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था, समर्पित संकाय और छात्रों की निरंतर मेहनत का परिणाम है।
विजेता छात्रों का मार्गदर्शन फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. नितिन गायकवाड़ के नेतृत्व में प्रो. डॉ. योगेंद्र केचे, डॉ. आलोक सिंह, डॉ. पुगझेन्थेन थंगराजू, डॉ. प्रफुल्ल ठवरे एवं डॉ. समीर खासबागे ने किया। संरचित क्विज़ प्रशिक्षण और सतत अकादमिक सहयोग से छात्रों की तैयारी को मजबूती मिली।
यह उपलब्धि एम्स रायपुर की सुदृढ़ अकादमिक संस्कृति, नवाचार-आधारित शिक्षण और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट चिकित्सा शिक्षा के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

रायपुर / शौर्यपथ /
डिजिटल सार्वजनिक खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (Government e-Marketplace – GeM) द्वारा छत्तीसगढ़ के खरीदारों एवं विक्रेताओं के लिए “जेम एक्सीलेंस समिट 2025” का आयोजन कल शुक्रवार 19 दिसंबर 2025 को लोक निर्माण विभाग (Public Works Department – PWD) न्यू सर्किट हाउस, सिवील लाईन्स, रायपुर में किया जाएगा। यह समिट राज्य में डिजिटल गवर्नेंस को सुदृढ़ करने और सार्वजनिक खरीद प्रणाली की दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर सिद्ध होगा।
इस समिट का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय विभागों में डिजिटल सार्वजनिक खरीद की क्षमताओं को सशक्त करना तथा खरीदार संगठनों को जेम के ईकोसिस्टम, प्रमुख सुविधाओं और कार्यप्रणाली (वर्कफ़्लो) के प्रभावी उपयोग के लिए सक्षम बनाना है। कार्यक्रम के दौरान जेम प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध नवीन सुविधाओं, प्रक्रियागत सुधारों और पारदर्शी खरीद तंत्र की विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
समिट में राज्य के विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं के लिए उपलब्ध व्यापक अवसरों पर विशेष प्रकाश डाला जाएगा। इसके माध्यम से स्थानीय इकाइयाँ, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम, स्टार्टअप्स, कारीगर, महिला उद्यमी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) उद्यमी एक ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के जरिए राज्य और राष्ट्रीय स्तर के खरीदार संगठनों तक सरल, पारदर्शी और निर्बाध पहुँच बना सकेंगे।
हाल ही में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस द्वारा काशन मनी (Caution Money) की समाप्ति और वेंडर असेसमेंट शुल्क में कमी जैसे सुधारों से छोटे उद्यमियों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इन पहलों ने सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सुलभ, पारदर्शी और अवसर सृजन करने वाला बनाया है, जो विकसित भारत 2047 और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।
समिट के संबंध में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मिहिर कुमार ने कहा कि यह आयोजन राज्य के खरीदारों और विक्रेताओं को नई सुविधाओं को समझने, संचालन प्रक्रियाओं पर स्पष्टता प्राप्त करने और रचनात्मक सुझाव साझा करने का सशक्त मंच प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समिट छत्तीसगढ़ को पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और दक्ष सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ ने अब तक गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के माध्यम से ₹6,408 करोड़ से अधिक मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं की खरीद की है। इनमें से लगभग ₹2,600 करोड़ की खरीद राज्य के सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से की गई है, जो समावेशी खरीद के प्रति राज्य की दृढ़ प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस ने राज्य में खरीद प्रक्रिया को तेज़ करने, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, देशव्यापी बाज़ार तक पहुँच उपलब्ध कराने और प्रत्येक खरीद निर्णय को पूरी तरह पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जेम छत्तीसगढ़ सरकार के साथ निरंतर सहयोग करते हुए डिजिटल गवर्नेंस और समावेशी सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

  दुर्ग। शौर्यपथ । नेशनल हेराल्ड प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज एफआईआर को न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने के बाद कांग्रेस ने इसे सत्य की जीत बताते हुए पूरे छत्तीसगढ़ में विरोध प्रदर्शन किया। इसी कड़ी में प्रदेश कांग्रेस कमेटी छत्तीसगढ़ के आह्वान पर आज दुर्ग में कांग्रेस द्वारा बड़ा प्रदर्शन किया गया।
जिला कांग्रेस दुर्ग ग्रामीण, जिला कांग्रेस दुर्ग शहर एवं जिला कांग्रेस भिलाई शहर के संयुक्त तत्वावधान में भाजपा कार्यालय का घेराव किया गया। कांग्रेस कार्यकर्ता दुर्ग स्थित कांग्रेस कार्यालय से रैली के रूप में भाजपा कार्यालय की ओर रवाना हुए।प्रदर्शन के दौरान शनिचरी बाजार के पास पुलिस द्वारा लगाई गई पहली और दूसरी लेयर की बैरिकेडिंग को तोड़ते हुए कांग्रेसी आगे बढ़े और भाजपा कार्यालय के पास तक पहुंच गए। इस दौरान पुलिसकर्मियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्कामुक्की की स्थिति भी बनी।
इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, पूर्व विधायक अरुण वोरा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल रहे।कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अदालत का यह फैसला मोदी-शाह और भाजपा द्वारा रचे गए कथित राजनीतिक षड्यंत्र का पर्दाफाश करता है। न्यायालय ने अपने आदेश में ईडी की शिकायत को स्वीकार्य (एडमिसिबल) नहीं माना है, जिससे स्पष्ट हो गया है कि यह मामला पूरी तरह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित था।
पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने कहा ,
"नेशनल हेराल्ड प्रकरण में अदालत का फैसला सत्य, संविधान और गांधी के विचारों की जीत है.भाजपा ने राजनीतिक द्वेष के तहत जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया,कांग्रेस नेतृत्व को बदनाम करने का प्रयास किया, लेकिन न्यायालय के फैसले ने सच्चाई उजागर कर दी है। कांग्रेस हमेशा महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी।"
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह आंदोलन लोकतंत्र की रक्षा और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए है।

नई दिल्ली/बिलासपुर / शौर्यपथ /
अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लाल जी देसाई ने अशोक शुक्ला ( पूर्व अति. मुख्य संगठक, प्रदेश कांग्रेस सेवादल छ. ग. ) को पूर्वी जोन के पांच राज्यों (छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और उड़ीसा) का राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त कर बड़ी जिम्मेदारी दी है। कांग्रेस सेवादल में चल रहे सदस्यता अभियान को गति देने के लिए श्री शुक्ला द्वारा पूर्व में जिले एवं प्रदेश में किए गए उनके कार्यों को देखते हुए यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस पार्टी में कांग्रेस सेवादल का अपना बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी एवं कांग्रेस नेता राहुल गांधी जी ने सेवादल को मजबूत करने की मंशा जाहिर की है, इसी तारतम्य में सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लाल जी देसाई ने पूरे देश में यह सदस्यता अभियान की शुरुआत की है। स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी जी के जन्मदिवस 19 नवंबर से यह सदस्यता अभियान प्रारंभ की गई है, श्री शुक्ला ने कहा कि – ‘वर्तमान में देश के जो हालात है, केंद्र सरकार द्वारा सभी सरकारी मिशनरी का दुरुपयोग कर, वोट चोरी कर सत्ता में काबिज होकर संविधान बदलने एवं लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश की जा रही है, ऐसे समय में कांग्रेस सेवादल को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।’
श्री शुक्ला ने सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लाल जी देसाई द्वारा पूरे देश में चलाए जा रहे सदस्यता अभियान की सराहना करते हुए उनके द्वारा दी गई यह बड़ी जिम्मेदारी को चुनौती पूर्वक स्वीकार करते हुए उनके प्रति अपना आभार व्यक्त किया है तथा उन्होंने कहा है कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लाल जी देसाई के भरोसे को पूर्ण करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे|
श्री शुक्ला को मिले इस जिम्मेदारी से प्रदेश के सभी सेवादल कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ है तथा सभी ने यह जिम्मेदारी मिलने पर श्री शुक्ला को अपनी बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए हर्ष व्यक्त की है|

बालोद / शौर्यपथ /
राज्य शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी योजना के अंतर्गत बुजुर्ग, बीमार आदि जरूरतमंद लोगों के लिए 30 प्रतिशत तक आॅफलाईन टोकन जारी करने की व्यवस्था के तहत आसानी से अपने धान की बिक्री होने से ग्राम अरौद के किसान श्री रूमलाल यादव बहुत ही प्रसन्नचित होकर शासन की इस नई व्यवस्था की सराहना की है। किसान श्री रूमलाल यादव ने बताया कि पढ़े-लिखे नही होने के कारण उन्हें अपने धान की बिक्री करने हेतु तंुहर टोकन एप्प के माध्यम से आॅनलाईन टोकन कटाने में परेशानी हो रही थी। उन्होंने अपने इस परेशानियों की जानकारी धान खरीदी केन्द्र लाटाबोड़ के कर्मचारियों को दी। इसके उपरांत धान खरीदी केन्द्र लाटाबोड़ के प्रबंधक एवं कर्मचारियों ने किसान रूमलाल यादव की जरूरतों को समझते हुए उन्हें आॅफलाईन टोकन की सुविधा प्रदान की। किसान रूमलाल ने बताया कि धान खरीदी केन्द्र के माध्यम से उन्हें आॅफलाईन टोकन जारी होने के पश्चात उन्होंने आज धान खरीदी केन्द्र लाटाबोड़ में पहुँचकर कुल 152 क्विंटल मोटा धान की बिक्री की है। किसान रूमलाल ने बताया कि उनके पास कुल 07 एकड़ कृषि भूमि है। जिस पर उनका परिवार खेती किसान कर जीविकोपार्जन करते है।
किसान रूमलाल ने बताया कि पिछले वर्ष भी उन्होंने कुल 152 क्विंटल धान की बिक्री की थी। धान की बिक्री से उन्हें कुल 04 लाख 71 हजार 200 रूपये की राशि प्राप्त हुई थी। इस राशि का उपयोग उन्होंने खेती किसानी के लिए गए किसान ऋण को चुकाने एवं शेष राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई-लिखाई तथा इलाज आदि तथा अन्य जरूरी कार्यों में किया है। किसान रूमलाल ने राज्य सरकार द्वारा 3100 रूपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की योजना को किसान हित में लिए गए अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना बताया। इस दौरान किसान रूमलाल ने धान खरीदी केन्द्र में किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शौचालय, शुद्ध पेयजल, छांव इत्यादि सभी व्यवस्थाओं की भूरी-भूरी सराहना की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस व्यवस्था से हम सभी कृषक प्रसन्नचित होकर आसानी से अपनी धान की बिक्री कर रहे हैं।

   बस्तर / शौर्यपथ / देश प्रतिष्ठित पत्रकार एवं समाजसेवी स्व. रामेश्वर दयाल त्रिपाठी की पुण्य स्मृति में हिन्दी पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय, विशिष्ट, महत्वपूर्ण योगदान/लेखन के लिए रामेश्वरम हिन्दी पत्रकारिता राष्ट्रीय पुरस्कार इस वर्ष बस्तर के जमीनी पत्रकार विकास तिवारी 'रानू' को दिया जाएगा। सम्मान स्वरूप उन्हें 11 हजार रुपए का नगद पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।
रामेश्वरम् संस्थान, झाँसी (उत्तर प्रदेश) के अध्यक्ष डॉ. सुधांशु त्रिपाठी ने बुधवार 17 दिसंबर की शाम इस आशय की घोषणा करते हुए बताया कि वर्ष 2025 के लिए निर्णायक समिति ने मीडिया के कई ग्रुपों के साथ काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार विकास तिवारी रानू बस्तर. छत्तीसगढ़ को चयनित किया है। श्री तिवारी ने बस्तर की जनता और नक्सलियों की समस्याओं पर बेहतरीन रिपोर्टिंग की है। वे यूट्यूब पर बस्तर टॉकीज नाम से अपना पेज चलाते हैं और एनडीटीवी के लिए भी रिपोर्टिंग करते हैं। इनकी बेहतरीन रिपोर्टस को ध्यान में रखकर उन्हे इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। वे क्षेत्र के सभी ज्वलंत मसलों पर लगातार बेबाक रिपोर्टिंग करते रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि रामेश्वरम संस्थान झांसी की ओर से रामेश्वरम हिन्दी पत्रकारिता राष्ट्रीय पुरस्कार विगत 22 वर्ष से दिया जा रहा है। वर्ष 2004 में प्रथम सम्मान से इस्पात नगरी भिलाई के लेखक व पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन को सम्मानित किया गया था। उनके अलावा अब तक यह सम्मान अनुराग द्वारी, रवीश रंजन शुक्ला, संदीप सोनवलकर, विकास सनाढ्य,निर्मल यादव और शरद द्विवेदी सहित कई प्रमुख पत्रकारों को दिया जा चुका है।

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