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भिलाई । शौर्यपथ
छत्तीसगढ़ यूपी बिहार रेल यात्री सेवा संघ की एक आवश्यक बैठक उत्तर भारतीयों के लिए ट्रेन के परिचालन संबंध में चर्चा हेतु शनिवार 20 दिसंबर को सुबह को 11:00 बजे से रखी गई है।संघ के अध्यक्ष हाजी एम एच सिद्दीकी ने बताया कि बैठक मोहम्मद सलीम एडवोकेट, फर्स्ट फ्लोर चौहान प्लाजा जी ई रोड के समीप होगी। इस आवश्यक बैठक में उत्तर प्रदेश व बिहार आने जाने वाले छपरा, सिवान, देवरिया और गोरखपुर के लोगों से उन्होंने आग्रह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस आवश्यक बैठक में शामिल होकर इस रूट के रेल यात्रियों की परेशानियों को सामने रखकर उसे दूर करने विचार-विमर्श में योगदान दें, जिससे समस्त मांगों व सुझावों को केंद्र सरकार तक रेल बजट से पहले पहुंचाया जा सके। इस दौरान मुख्य रूप से दुर्ग गोरखपुर नौतनवा एक्सप्रेस ट्रेन को नियमित रूप से समय परिवर्तित कर सुबह 8:00 से 10:00 बजे के बीच दुर्ग से चलाने हेतु और गोंदिया बरौनी एक्सप्रेस ट्रेन को सप्ताह में 3 दिन वाया मऊ भटनी सिवान छपरा रूट से चलाने हेतु चर्चा की जाएगी। हाजी सिद्दीकी ने अंचल के वकील, व्यापारी ,समाजसेवी, आम जनता व सभी सगठन से जुड़े हुए सम्मानित सदस्यों से उपस्थिति का आग्रह किया है।
बेलौदी में स्व. उदय राम पारकर की स्मृति में भागवत कथा जारी
दुर्ग ग्रामीण / शौर्यपथ / समीपस्थ ग्राम बेलौदी में स्व. उदय राम पारकर की स्मृति में आयोजित भागवत कथा में अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक बाल योगी विष्णु अरोरा महाराज (जेवरा रतलाम मध्यप्रदेश) का प्रवचन 10 दिसंबर से जारी है। शिवनाथ नदी की पावन तट पर स्थित ग्राम बेलौदी में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ में पहले दिन उन्होंने श्रीमद् भागवत के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला एवं वेदव्यास द्वारा श्रीमद् भागवत लेखन के महत्व को समझाया। दूसरे दिन उन्होंने नारद चरित्र के माध्यम से महाभारत में धर्म युद्ध को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा जीवन में धर्म और कर्म का सामंजस्य स्थापित करने के बारे में बताया। इस दौरान विष्णु अरोरा महाराज ने कहा कि हमारी अवस्था कुछ भी हो लेकिन स्वभाव बालवत् यानी अहंकार रहित हो तो भगवान जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। इसी तरह तीसरे दिन उन्होंने भगवान कृष्ण की माखन चोरी की लीला का व्याख्यान दिया।
कंस वध की कथा में तात्विक विवेचन करते हुए उन्होंने कंस का आध्यात्मिक स्वरूप कसाई से लिया जिसमें क्रूरता निर्दयता बुराई भरी होती है। भगवान श्री कृष्ण मथुरा गए मथुरा में धोबी दरजी आदि का उद्धार करते हुए पांच पहलवानों से होकर गुजरे फिर कंस के सामने पहुंच गए कंस वध के पश्चात भगवान श्री कृष्ण व रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाया। पिता भीष्मक माता सुद्ममती ने अपनी पुत्री रुक्मणी जो कि लक्ष्मी का अवतार है।श्री कृष्णा यानी नारायण को समर्पित करना चाहते हैं। भिस्मक यानी संकल्प कर्म तथा रानी शुद्धमती यानी अच्छे विचार। शीशपाल का अर्थ बताते हुए कहा कि समाज में लोग धन कमाते हैं पर बच्चों के पालन का उद्देश्य रखते हैं यह शीशपाल की भावना पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है। उन्होंने कहा कि रुक्मणी ने भगवान कृष्ण को सात श्लोक में पत्र लिखे यह पत्र प्रेम-पत्र न होकर साधना का पत्र है जिसे भगवान ने बिना शर्त के तुरंत स्वीकार कर लिया और रुक्मणी को गौरी पूजा कर वापस आ रही रूकमणी स्वीकार कर लिया। कथा कहती है कि केवल नारायण को पाने का संकल्प के साथ पूजा साधना मंदिर जाना व्रत आदि भी हो जैसे रुक्मिणी मंदिर गई और कृष्णा को पाई गई अब श्री कृष्ण भगवान ने द्वारका में विधि- विवाह संपन्न किया।
आयोजक दुर्गा प्रसाद पारकर, मुकुंद प्रसाद पारकर एवं समस्त पारकर परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार भागवत कथा के दौरान अंचल के गणमान्य विशिष्ट जनों का आगमन प्रति दिवस हो रहा है जिसमें पूर्व कैबिनेट मंत्री रमशीला साहू, पूर्व विधायक दयाराम साहू, पूर्व कैबिनेट मंत्री ताम्रध्वज साहू, पूर्व मंत्री जागेश्वर साहू, विधायक कुंवर सिंह निषाद, रिवेन्द्र यादव, प्रीतपाल बेलचंदन, जीवन लाल वर्मा, हेमंत सिन्हा, संतोषी कृष्ण देशमुख साथ ही क्षेत्र के गणमान्य लोग शामिल हैं।
भिलाई / शौर्यपथ
भिलाई इस्पात संयंत्र में कर्मचारियों के आवश्यक कार्य से गेट से निकलने के दौरान पर्सनल विभाग द्वारा कर्मचारियों का पर्सनल नंबर नोट किया जा रहा है जिससे कर्मचारी काफी भयभीत हो गए हैं कर्मचारियों के आवश्यक कार्य से बाहर जाते समय गेट पर पर्सनल नंबर नोट करने की प्रक्रिया से कर्मचारियों में कार्रवाई का भैय व्याप्त हो गया है लगातार यूनियन पदाधिकारियो के पास कर्मचारियों ने कहा कि गेट में जो पर्सनल नंबर नोट हो रहा है उससे उन पर कार्रवाई होगी जिसे भिलाई इस्पात मजदूर संघ के पदाधिकारियो ने ईडी वर्क्स से मुलाकात कर कर्मचारियों के मन में व्याप्त कार्यवाही होने की जानकारी दिये जिस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि कर्मचारियों को भयभीत होने की कोई आवश्यकता नहीं है यह संयंत्र के भीतर ट्रैफिक का सर्वे मात्र है संयंत्र के भीतर आए दिन दुर्घटना हो रही है जिसमें कर्मचारियों को शारीरिक क्षति हो रही है जिसका खामियाजा उनके परिवार को भी भोगना पड़ रहा है और संयंत्र के भीतर बढे हुए भारी ट्रैफिक को कैसे नियंत्रित किया जाए यह उसकी प्रक्रिया है उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के हित हेतु लगातार प्रयास किया जा रहा है कैंटीन रेस्टरूम मे सुधार व्यवस्था हो, टॉयलेट संधारण, रोड संधारण,कार्य स्थल पर आरामदायक कुर्सी,बेंच में सुधार इन सभी क्षेत्रो मे तेजी से कार्य किया जा रहा है और काफी कार्य पूर्ण भी हो चुके हैं प्रबंधन कर्मचारियों की सुरक्षा समझौता कर उत्पादन हेतु दबाव नहीं डाल रहा है यूनियन ने संयंत्र के भीतर ओवरलोड ट्रैकों के परिवहन एवं अतिरिक्त बड़े हाइवा एवं ट्रको से रोड में दुर्घटना की संभावना रहती है जिस पर उन्होंने कहा कि सर्वे में दुर्घटना के सभी कारक शामिल हैं और संयंत्र के भीतर जानवरों को भी पकड़वाने की व्यवस्था जल्द करवाई जाएगी प्रबंधन का प्रयास है कि संयंत्र में शून्य दुर्घटना हो और यूनियन भी इसमें अपना सहयोग प्रदान करें कर्मचारियों को किसी भी चीजों से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है यूनियन ने ठेका कर्मचारियों के कम वेतन एवं 60 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों को मशीन ऑपरेशन में लगाए जाने की जानकारी दिये जिस पर उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी क्षेत्रों में जल्द सुधार दिखेगा साथ हि कहा कि स्थल का माहौल खुशनुमा एवं सौहार्द पूर्ण रहे या हमारी प्राथमिकता है बैठक में उपाध्यक्ष आईपी मिश्रा, शारदा गुप्ता, वशिष्ठ वर्मा एवं हरिशंकर चतुर्वेदी शामिल थे।
मनरेगा से गांधी जी का नाम हटाना भाजपा का राजनैतिक दिवालियापन - दीपक बैज
रायपुर । शौर्यपथ
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मनरेगा कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाने का निर्णय भाजपा की गांधीजी के प्रति विद्वेष को दर्शाता है। यह भाजपा का राजनैतिक दिवालियापन है। गांधीजी श्रम की गरिमा, सामाजिक न्याय और सबसे गरीबों के प्रति राज्य की नैतिक जिम्मेदारी के प्रतीक रहे है। यह नाम परिवर्तन गांधीजी के मूल्यों के प्रति भाजपा-आरएसएस की दीर्घकालिक असहजता और अविश्वास को दर्शाता है तथा एक जन-केंद्रित कल्याणकारी कानून से राष्ट्रपिता के जुड़ाव को मिटाने का प्रयास है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने महात्मा गांधी नेशनल रोजगार गारंटी (मनरेगा) के रूप में रोजगार को कानूनी गारंटी दिया था लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा की साय सरकार का नाम बदलकर बंद करने की साजिश कर रही है। मोदी सरकार मनरेगा को बंद करना चाहती है। मोदी सरकार के 11 सालों में मनरेगा को पर्याप्त बजट नहीं दिया। हर साल मनरेगा के बजट में 30 से 35 प्रतिशत की कटौती की गयी है। पिछले 11 वर्षों में मनरेगा की मजदूरी में न्यूनतम वृद्धि है, जिसके कारण मजदूर वर्ग की आय स्थिर हो गयी है तथा महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि महात्मा गांधी नेशनल रोजगार गारंटी मनरेगा का नाम बदलने के लिऐ संसद में विधेयक लाना मोदी सरकार की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति दुर्भावना को प्रदर्शित करता है। नाथूराम के महिमामंडन के लिए महात्मा गांधी के पुण्य स्मृति को मिटाने का षड़यंत्र कर रही है। भाजपा सोचती है कि वह एक योजना से गांधीजी का नाम बदलकर गांधी जी को जनमानस से दूर कर लेगी तो यह उनकी भूल है। गांधीजी भारत के जनमन में बसे है, भाजपा का कोई भी षड़यंत्र भारत के लिए गांधीजी के योगदान को मिटा नहीं सकता।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मनरेगा जन आंदोलनों से जन्मा कानून है, जो ‘‘हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो’’ के वादे को अपने भीतर समेटे हुए है। इसने ग्रामीण भारत के लोगों को काम मांगने का कानूनी अधिकार दिया, पूरे ग्रामीण भारत में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की, विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत किया, महिलाओं और भूमिहीनों को सशक्त बनाया तथा लागू किए जा सकने वाले अधिकारों के माध्यम से श्रम की गरिमा को कायम रखा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यूपीए की मनमोहन सरकार के दौरान ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को हर साल 100 दिन का गारंटेड रोजगार प्रदान किया जाता था, इसमें सड़क निर्माण, तालाब और कुएं की खुदाई जल संरक्षण और सूखा राहत जैसे सार्वजनिक कार्य शामिल किए जाते थे, यदि आवेदक को 15 दिन के भीतर काम उपलब्ध नहीं कर पाए तो व्यक्ति मजदूरी के भुगतान का पात्र माना जाता था, लेकिन भाजपा की सरकार आने के बाद से हितग्राहियों को ना काम मिल रहा है, ना भुगतान।
रायपुर/शौर्यपथ
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय प्रदेश में 14,85,142 से अधिक शहरी एवं ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास का निर्माण हो चुका था एवं 8 लाख से अधिक प्रधानमंत्री ग्रामीण एवं शहरी आवास की राज्यांश की राशि 3,200 करोड़ रुपए कांग्रेस सरकार ने केंद्र के पास जमा करवा दी थी। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 18 लाख नया प्रधानमंत्री आवास देने का जो वादा किया था वह गरीबों के साथ धोखा और छल साबित हुआ है। बीते 2 साल में 18 लाख नया प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत नहीं हुए हैं, बल्कि भाजपा सरकार में प्रधानमंत्री आवास ने बुलडोजर चलाकर तोड़ने का काम किया है। जो भी प्रधानमंत्री आवास बना है वह कांग्रेस सरकार के दौरान ही बना है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान प्रदेश के पांच संभाग के सभी जिला में तेजी से प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण निर्माण किया गया था रायपुर संभाग जिला रायपुर 29480, बलौदाबाजार 45373, धमतरी 40388, गरियाबंद 45902, महासमुंद 73266, सरगुजा संभाग जिला बलरामपुर 44188, जशपुर 61784, कोरिया 13416, मनेन्द्रगढ़ 23172, सूरजपुर 37568, सरगुजा स्वीकृत 65904, बस्तर संभाग जिला बस्तर 23063, बीजापुर 4449, नारायणपुर 3829, सुकमा 10118, दंतेवाड़ा 11179, कोंडागांव 15994, कांकेर 29207, बिलासपुर संभाग जिला बिलासपुर 59123, गौरेला 27608, जांजगीर-चांपा 45436, कोरबा 64837, मुंगेली 49225, रायगढ़ 57793, सक्ती 46585, सारंगढ़ 47796, दुर्ग संभाग जिला बालोद 32394, बेमेतरा 32724, दुर्ग 23700, कबीरधाम 48657, खैरागढ़ 19052, मोहला 15490, राजनांदगांव 27442 है जो केंद्र के स्वीकृत 1176142 ग्रामीण आवास है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि जिस प्रकार से गरियाबंद जिला में 1,000 से अधिक अधूरे मकानों की गृह प्रवेश की जानकारी लगी है, अब तो प्रधानमंत्री के हाथों हुई 3 लाख 50 मकान के गृह प्रवेश पर भी सवाल उठने लग गए हैं। इसकी जांच होनी चाहिए, उन साढ़े तीन लाख मकान में कितने मकान पूर्ण हो चुके हैं? कितने अपूर्ण है? अधूरे मकानों के गृह प्रवेश कराने के दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। भाजपा सरकार को अपने इस कृत्य के लिए आवासहीनों से माफी मांगनी चाहिए।
मोहला / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ मछलीपालन विभाग ने मोहला-मानपुर-अं.चौकी जिले के मोगरा जलाशय में स्थापित केजों को 10 वर्षीय पट्टे पर आबंटन करने हेतु द्वितीय संक्षिप्त विज्ञप्ति जारी की है। इसके तहत 16 नग 4m x 6m x 4m आकार केज और 4 नग 20m x 20m x 4.5m आकार केज मत्स्य पालन, मत्स्याखेट और मत्स्य विक्रय हेतु उपलब्ध होंगे। लीज राशि प्रति दो वर्षों में 10 प्रतिशत वृद्धि के आधार पर निर्धारित की जाएगी।
आवेदन सहायक संचालक मछलीपालन विभाग, जिला मोहला-मानपुर-अं.चौकी के कार्यालय में 19 दिसंबर 2025 अपराह्न 1.00 बजे तक आमंत्रित किए जा रहे हैं। आवेदन के लिए शुल्क रु. 2 हजार नगद, बैंक ड्राफ्ट या बैंकर्स चेक के माध्यम से जमा किया जा सकता है। आवेदन प्रपत्र विक्रय की अंतिम तिथि 19 दिसंबर 1 बजे, आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 19 दिसंबर 3 बजे, मुहरबंद आवेदन खोलने की तिथि 19 दिसंबर 5.00 बजे हैं। विस्तृत जानकारी और आवेदन प्रपत्र संबंधित कार्यालय में कार्यालयीन समय में प्राप्त किए जा सकते हैं।
- विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने 10 लाख रूपए की लागत से निर्मित होने वाले सामाजिक भवन का किया भूमिपूजन
- विधानसभा अध्यक्ष नंदई चौक में आयोजित गुरूघासीदास बाबा जयंती के कार्यक्रम में हुए शामिल
राजनांदगांव / शौर्यपथ / विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज राजनांदगांव शहर के गुरूघासीदास धर्मशाला गुरूघासीदास चौक नंदई रोड में आयोजित सत्यमूर्ति परम पूज्य बाबा गुरूघासीदास जयंती समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 10 लाख रूपए की लागत से निर्मित होने वाले सामाजिक भवन का भूमिपूजन किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज बाबा गुरूघासीदास जी के अवतरण दिवस है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बाबा गुरूघासीदास जी की आशीर्वाद से देश एवं प्रदेश में समरसता, शांति, सद्भावना एवं प्रेम है। श्रद्धापूर्वक बाबा जी के प्रतीक के रूप में सफेद ध्वज फहराते है। सफेद ध्वज शांति, प्रेम, सद्भावना, एकात्मता, सबको एक साथ मिलाने, सादगी और बाबा जी के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गुरूघासीदास बाबा जी के जन्मस्थली गिरौदपुरी पूरे देश-दुनिया में विख्यात है। बाबा जी की प्रतीक एवं गरिमा के अनुरूप गिरौदपुरी में देश का अनूठा, सबसे ऊंचा और भव्य जैतखाम का निर्माण किया गया है।
उन्होंने कहा कि बाबा जी के आशीर्वाद से ही जैतखाम को निर्माण कराने का अवसर मिला है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ने कहा कि शासन द्वारा प्रदेश के लगभग सभी ग्रामों में समाज के लिए मंगल भवन का निर्माण किया गया है। सभी ग्रामों में कांक्रीट रोड का निर्माण किया गया है। शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई है। साथ ही नवोदय विद्यालय की स्थापना, नि:शुल्क कोचिंग और बच्चों के प्राथमिक शिक्षा के लिए बेहतर व्यवस्था की गई है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि समाज के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। शिक्षित समाज ही नेतृत्व करते है और आगे बढ़ते है। उन्होंने कहा कि बालक हो या बालिका सभी के लिए शिक्षा जरूरी है और बाबा जी का पंथी के माध्यम से यही संदेश है। बाबा जी का हिंसा छोडऩे, मांस-मदिरा छोडऩे का उपदेश किसी एक समाज के लिए नहीं है, यह मानवता एवं सभी समाज के लिए है। मनुष्य में सतगुण, सद्भाव, सादगी होने और हिंसा छोडऩे पर दुनिया आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में शानदार नया विधानसभा बनकर तैयार हो गया है। उन्होंने समाज के नागरिकों को नए विधानसभा भवन में विधानसभा की कार्यवाही और विधानसभा को देखने के लिए आमंत्रित किया।
पूर्व विधायक रामजी भारती ने सभी को गुरूघासीदास जयंती की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज बाबा के संदेश मनखे-मनखे एक समान हैं के उपदेश को लेकर समाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि गुरूघासीदास बाबा का आशीर्वाद पूरे समाज सहित सभी लोगों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज सतनामी समाज अग्रणी समाज के रूप में आगे आ रहा है। इस अवसर पर अध्यक्ष शहर सतनामी समाज सेवा समिति राजनांदगांव नरेन्द्र राय ने स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर महापौर मधुसूदन यादव, कोमल सिंह राजपूत, रमेश पटेल, पार्षद श्रीमती केवरा रॉय, पूर्व पार्षद विजय राय, अपर कलेक्टर सीएल मारकण्डेय, एसडीएम गौतम पाटिल एवं अन्य जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी तथा सतनामी समाज के नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
मतदान का प्रतिफल या मौन की सजा?
दुर्ग विधानसभा और सांसद विजय बघेल की राजनीतिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल
शौर्यपथ राजनैतिक / लोकतंत्र में मतदाता की सबसे बड़ी ताकत उसका मत होता है। यही मत किसी व्यक्ति को जनप्रतिनिधि बनाता है और वही मत उससे जवाबदेही की अपेक्षा भी करता है। किंतु जब यह मत विकास के बजाय उपेक्षा में बदल जाए, तब सवाल उठना स्वाभाविक है। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र के मतदाता आज ठीक ऐसे ही सवालों के बीच खड़े हैं।
दुर्ग विधानसभा की जनता ने लोकसभा चुनावों में सांसद के रूप में विजय बघेल को न सिर्फ एक बार, बल्कि दो बार अपना बहुमूल्य मत देकर संसद तक पहुंचाया। वर्ष 2019 में रिकॉर्ड मतों से जीत दिलाने में दुर्ग विधानसभा की भूमिका निर्णायक रही। तब यह उम्मीद जगी थी कि दुर्ग शहर और विधानसभा क्षेत्र को एक ऐसा सांसद मिलेगा, जो केंद्र में अपनी मजबूत उपस्थिति के माध्यम से क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगा।
परंतु 2019 से 2024 तक के पूरे कार्यकाल में दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में सांसद के रूप में विजय बघेल की कोई ठोस, दूरगामी या पहचान बनाने वाली पहल सामने नहीं आई। कुछ सीमित व्यक्तिगत या चुनिंदा लाभार्थियों तक सिमटे कार्यों को छोड़ दें, तो दुर्ग विधानसभा के लिए ऐसा कोई विकास कार्य नहीं दिखता जिसे सांसद की उपलब्धि के रूप में गिनाया जा सके।
इसके बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में दुर्ग की जनता ने एक बार फिर विजय बघेल को मौका दिया। यह निर्णय सांसद के व्यक्तिगत कार्यों से अधिक केंद्र में नरेंद्र मोदी को पुनः प्रधानमंत्री बनाने की भावना से प्रेरित माना गया। छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से केवल दो—दुर्ग और राजनांदगांव—में ही पुराने सांसद दोबारा चुने गए। राजनांदगांव में सांसद संतोष पांडे के कार्यों की चर्चा होती है, लेकिन दुर्ग में विजय बघेल के दूसरे कार्यकाल के डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी दुर्ग विधानसभा की ओर कोई उल्लेखनीय विकास पहल दिखाई नहीं देती।
आज दुर्ग शहर में यह चर्चा आम हो चली है कि जनता ने सांसद को नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के नाम पर वोट दिया। यह चर्चा केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत का प्रतिबिंब बनती जा रही है। यदि सांसद के छह-साढ़े छह वर्षों के कार्यकाल को देखा जाए, तो ऐसा कोई “मील का पत्थर” नजर नहीं आता जो दुर्ग शहर के विकास की दिशा और दशा बदलने वाला हो।
ऐसे में एक बड़ा और गंभीर प्रश्न खड़ा होता है—क्या आज सांसदों का अस्तित्व केवल प्रधानमंत्री के नाम तक सीमित रह गया है? क्या क्षेत्रीय विकास, स्थानीय समस्याएं और जनता की अपेक्षाएं केवल चुनावी घोषणाओं तक सिमट कर रह गई हैं?
दुर्ग विधानसभा की जनता अब यह महसूस करने लगी है कि उनका मत विकास का माध्यम नहीं, बल्कि सत्ता तक पहुंचने का साधन भर बन गया है। चुनाव के समय किए गए वादे, चुनाव परिणाम के बाद स्मृति से ओझल होते दिख रहे हैं। यही कारण है कि “मतदान की सजा” जैसी भावना आज दुर्ग विधानसभा के मतदाताओं के बीच जन्म ले रही है।
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन भावनाओं से नहीं, कार्यों से होता है। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र आज सांसद विजय बघेल से सवाल पूछ रहा है—क्या दो बार दिया गया जनादेश केवल चुनाव जीतने के लिए था, या क्षेत्र के समग्र विकास के लिए भी?
यदि इन सवालों के उत्तर समय रहते नहीं मिले, तो यह असंतोष आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श की दिशा ही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही की परिभाषा भी तय करेगा। दुर्ग विधानसभा की जनता अब मौन नहीं, बल्कि उत्तर चाहती है।
दीपक वैष्णव क़ी खास रिपोर्ट
सुकमा. नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है, बल्कि महिला सुरक्षा और आदिवासी कर्मचारियों के सम्मान पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। कोंटा ब्लॉक में पदस्थ एक आदिवासी महिला स्वास्थ्य कर्मचारी ने जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है।
पीड़िता के अनुसार, 21 अगस्त 2025 को उसे कोंटा ब्लॉक से अचानक सीएमएचओ कार्यालय सुकमा में कार्य हेतु अटैच करने का आदेश जारी किया गया। आरोप है कि इसके बाद न तो उससे कोई नियमित कार्यालयीन कार्य कराया गया और न ही उसे स्पष्ट जिम्मेदारी दी गई। महिला कर्मचारी का कहना है कि इस दौरान उसे मानसिक दबाव, अपमानजनक व्यवहार और अनावश्यक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। एक आदिवासी महिला के लिए यह स्थिति न केवल मानसिक रूप से पीड़ादायक रही, बल्कि उसके आत्मसम्मान को भी गहरी ठेस पहुंचाने वाली बताई जा रही है।
पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने इसे गंभीर बताते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। पूर्व विधायक ने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो यह न केवल एक महिला कर्मचारी के साथ अन्याय है, बल्कि सरकारी पद की गरिमा का भी दुरुपयोग है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारी पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी महिला कर्मचारी भय या दबाव में काम करने को मजबूर न हो। वहीं इस मामले में जब पीड़िता से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
सुशासन का पोस्टर दुर्ग में फ टा हुआ,आयुक्त की कलम चल रही, शहर ठहर गया!
दुर्ग । शौर्यपथ ।
साल 2024 की दीपावली के बाद दुर्ग नगर पालिक निगम प्रशासन की कमान आयुक्त सुमित अग्रवाल के हाथों में आई। प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा "सुशासन" का दावा किया जा रहा है, लेकिन दुर्ग निगम क्षेत्र की जमीनी हकीकत इस दावे को आईना दिखाती नजर आ रही है। बड़े-बड़े वादों के सहारे भारतीय जनता पार्टी ने शहरी सरकार पर कब्जा तो कर लिया, पर शहर का विकास मानो फ ाइलों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सिमट कर रह गया है।
यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि दुर्ग निगम क्षेत्र में पसरी बदहाली की तस्वीर है। बीते लगभग एक वर्ष में विकास कार्य लगभग ठप्प हैं, ठेकेदार नजर नहीं आ रहे और निगम आर्थिक किल्लत से जूझ रहा है। इसके उलट, शहर भर में अव्यवस्थाओं का साम्राज्य तेजी से फैलता दिख रहा है, जिसने आयुक्त सुमित अग्रवाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चर्च रोड के पास अवैध बाजार, समृद्धि बाजार क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर चल रही गतिविधियां, सुराना कॉलेज के सामने बदबूदार माहौल और संभावित बीमारियों का खतरा—ये सब निगम प्रशासन की कार्यशैली पर सीधा प्रश्नचिन्ह हैं। बड़े दुकानदारों के अवैध कब्जे आयुक्त की नजरों से ओझल हैं, जबकि गरीबों के ठेले-गुमठियों पर अतिक्रमण के नाम पर सख्ती दिखाई देती है। यही नहीं, अवैध रूप से हुए राम रसोई अनुबंध के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई न होना, चयनात्मक प्रशासन की ओर इशारा करता है।
शहर के मध्य स्थित चौपाटी की बदहाल हालत "हमने बनाया, हम ही संवारेंगे" जैसे नारों की पोल खोल रही है। सड़कों पर आवारा मवेशियों की फौज, जगह-जगह गड्ढे, बदहाल चौक-चौराहे और नागरिकों को पीने के लिए दूषित जल—ये सब नगर निगम की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हैं। सुशासन तिहार में आवेदकों को गलत या भ्रामक जवाब देना और कार्रवाई के नाम पर चपरासियों व प्लेसमेंट कर्मचारियों को नोटिस थमाना, जबकि उच्च अधिकारियों को बचाने की रणनीति अपनाना, प्रशासनिक निष्पक्षता पर गहरी चोट है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दुर्ग निगम क्षेत्र में भाजपा की शहरी सरकार होने के बावजूद, और यहीं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सरोज पाण्डेय, दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री ललित चंद्राकर तथा छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव का निवास स्थान होने के बावजूद, शहर की यह बदहाली आज चर्चा का विषय बनी हुई है।
ऐसे में आमजन के बीच यह सवाल गूंज रहा है—दुर्ग में ज्यादा ताकतवर कौन है? आयुक्त या फि र जनप्रतिनिधि?
शहर की अव्यवस्था, विकास की रफ्तार पर ब्रेक और निगम अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ कथित भेदभावपूर्ण कार्रवाई ने आयुक्त सुमित अग्रवाल की नैतिक जिम्मेदारी पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अब निगाहें प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर टिकी हैं—क्या वे दुर्ग निगम क्षेत्र की सुध लेंगे, या फिर "सुशासन" केवल सोशल मीडिया और विज्ञापनों तक ही सीमित रह जाएगा?
दुर्ग की जनता आज जवाब चाहती है—क्योंकि सवाल सिर्फ विकास का नहीं, भरोसे का भी है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
