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पाठ्यक्रम में लगभग 30 से 40 प्रतिशत कटौती कर उसका माहवार विभाजन
निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार ऑनलाईन कक्षाओं का प्रसारण यू-ट्यूब चैनल पर
प्रत्येक माह के पाठ्यक्रम के लिए विषयवार असाइनमेंट
असाइनमेंट में प्राप्त अंक शैक्षणिक सत्र 2020-21 की मण्डल परीक्षा के लिए आंतरिक मूल्यांकन का आधार
रायपुर /शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन संबंधी विशेष व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था से प्रत्येक विद्यार्थी की पढ़ाई का मूल्यांकन हो सकेगा और कमजोर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह व्यवस्था सितम्बर से लागू की जाएगी। माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा इस संबंध में सभी मान्यता प्राप्त शालाओं के प्राचार्यों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
निर्देश में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में शैक्षणिक सत्र 15 जून प्रारंभ होता है, परन्तु केन्द्र सरकार के आदेशानुसार 30 सितम्बर तक सभी शैक्षणिक संस्थाएं बंद रहेगी। इन परिस्थितियों में कक्षा 10वीं एवं कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसमें स्कूल खुलने में होने वाली देरी को दृष्टिगत रखते हुए पाठ्यक्रम में लगभग 30 से 40 प्रतिशत कटौती कर पाठ्यक्रम का माहवार विभाजन किया गया है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को यह स्पष्ट रहे कि किस माह में उन्हें पाठ्यक्रम का कितना हिस्सा पूर्ण करना है। यह पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल की वेबसाइट www.cgbse.nic.in पर दिनांक 3 सितम्बर 2020 तक उपलब्ध करा दिया जाएगा।
सभी प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि कक्षा 10वीं एवं कक्षा 12वीं के प्रत्येक सेक्शन के लिए अलग-अलग क्लास टीचर नियुक्त करें और क्लास टीचर से यह अपेक्षा की गई है कि वे कक्षा के सभी विद्यार्थियों के साथ एक वाट्सअप ग्रुप का निर्माण कर कर लें और विद्यार्थियों एवं क्लास टीचर के बीच इस वाट्सअप ग्रुप के माध्यम से लगातार संपर्क रखें। क्लास टीचर अपने-अपने वाट्सअप ग्रुप के सभी विद्यार्थियों को विषय से संबंधित कठिन अवधारणाएं, वाट्सअप के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रेषित करें तथा कठिनाईयों को दूर करेंगे।
कक्षा 10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए मण्डल द्वारा घटे हुए निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार लगातार ऑनलाईन कक्षाएं आयोजित की जाएगी। जिनका प्रसारण यू-ट्यूब चैनल पर किया जाएगा। इन ऑनलाईन कक्षाओं में पूरे प्रदेश के विद्यार्थी एक साथ भाग ले सकेंगे। ऑनलाईन कक्षाओं को रिकार्ड करके मण्डल के यू-ट्यूब चैनल पर भी दिखाया जाएगा तथा स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाईट www.cgschool.in पर लिंक किया जाएगा, जिससे विद्यार्थी यदि चाहें तो किसी भी समय इन कक्षाओं के रिकार्ड किए गए वीडियो दोबारा देख सकेगा। ऑनलाईन कक्षाओं का साप्ताहिक टाइम-टेबल मण्डल की वेबसाइट पर 5 सितम्बर तक उपलब्ध करा दिया जाएगा, जिससे विद्यार्थी टाइम-टेबल के अनुसार मण्डल की यू-ट्यूब चैनल पर जाकर ऑनलाईन कक्षाओं में भाग ले सके।
प्रत्येक महीने के पाठ्यक्रम के लिए मण्डल द्वारा विषयवार असाइनमेंट तैयार किया जाएगा और उसे मण्डल की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा और असाइनमेंट पीडीएफ के रूप में सभी स्कूलों को भेजा जाएगा। स्कूलों के प्राचार्य, क्लास टीचर के माध्यम से असाइनमेंट सभी विद्यार्थियों को अपने-अपने वाट्सअप ग्रुप तथा एसएमएस के माध्यम से भेजेंगे तथा विद्यार्थियों के द्वारा घर पर ही असाइनमेंट उत्तरपुस्तिका में हल करके प्रत्येक महीने के 15 तारीख को स्कूल में जमा किया जाएगा। संबंधित विषय के शिक्षक स्कूल कार्यालय में विद्यार्थियों द्वारा जमा किए गए असाइनमेंट का मूल्यांकन करेंगे। असाइनमेंट के मूल्यांकन के पश्चात् प्राप्त अंकों को मण्डल के पोर्टल पर ऑनलाईन प्रविष्टि करेंगे। यदि किसी विद्यार्थी को असाइनमेंट में कम अंक प्राप्त होते हैं तो उस विद्यार्थी को विशेष रूप से पढ़ाने की व्यवस्था स्कूल द्वारा की जाएगी। इस प्रकार असाइनमेंट में प्राप्त अंकों को शैक्षणिक सत्र 2020-21 की मण्डल परीक्षा लिए आंतरिक मूल्यांकन का आधार बनाया जाएगा।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग में 14 हजार 580 पदों पर भर्ती के लिए व्यापम से प्राप्त परीक्षाफल सूची की वैद्यता में एक वर्ष की वृद्धि कर दी है। राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में आज मंत्रालय से आदेश जारी कर दिया है।
जारी आदेश में उल्लेख किया गया है लोक शिक्षण संचालनालय ने 9 मार्च 2019 को 14 हजार 580 पदों पर सीधी भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया गया था। इस विज्ञापन की कण्डिका में यह उल्लेख था कि व्यापम से प्राप्त परीक्षाफल सूची, परीक्षाफल जारी होने के दिनांक से एक वर्ष तक वैद्य होगी। कोरोना महामारी से उत्पन्न स्थिति के कारण वर्तमान में भर्ती की कार्रवाई पूर्ण नहीं हो सकी है, इसलिए विशेष परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा व्यापम से प्राप्त परीक्षाफल की सूची में एक वर्ष की वृद्धि की है।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन की मंशा के अनुरूप ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार की पहल पर काष्ठ शिल्प वनवासियों के रोजगार का आधार बना है। मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने कहा कि अबूझमाड़ में निवास करने वाले वनवासी परिवार के लोगों को रोजगारमूलक काष्ठ शिल्प के कार्य से जोड़ा गया है।
छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड जगदलपुर जिला बस्तर के महाप्रबंधक ने बताया कि जिले के जनजाति समुदाय अबुझमाड़िया, मोरिया, हल्बा एवं गोंड़ जनजाति समुदाय काष्ठ द्वारा विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों का निर्माण किया जाता रहा है, जिसमें देवी-देवताओं, मानव-कलाकृति एवं जनजाति संस्कृति का चित्रण करते हैं। उन्होंने बताया कि विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) नई दिल्ली से स्वीकृत इंटीग्रेटेड डिजाइन एंड टेक्निकल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा 15 जुलाई से जनवरी 2021 तक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित की जा रही है। 15 जुलाई से काष्ठ शिल्प में 40 आदिवासी शिल्पियों के लिए अति उन्नत डिजाइन वर्कशॉप प्रारंभ किया गया है।
इसी कड़ी में 15 जुलाई से 26 जुलाई तक गुणवत्ता युक्त होनहार शिल्पियों का 10 दिवसीय सर्वे किया गया है, 27 जुलाई से 12 अगस्त 2020 तक 15 दिवसीय मार्केटिंग सर्वे और प्रोटोटाइप डिजाइन डेवलपमेंट का कार्य किया गया। इसी प्रकार 15 अगस्त से 14 सितंबर तक एक माह प्रारंभिक मार्केटिंग और प्रशिक्षण देकर सामग्रियों का उत्पादन किया जाना है और 15 सितंबर से 14 अक्टूबर तक प्रशिक्षण और उत्पादन कार्य किया जाएगा। 15 अक्टूबर से 14 नवंबर तक प्रशिक्षण के साथ-साथ बल्क में उत्पादन का कार्य किया जाना है। दिसंबर 2020 से जनवरी 2021 तक 2 माह तक विक्रय-सह-प्रदर्शनी आयोजित कर शिल्पकारों द्वारा उत्पादित सामग्रियों को बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशिक्षण देने के लिए एक डिजाइनर भी नियुक्त किया गया है। सभी शिल्पकारों को इस प्रशिक्षण के दौरान 9000 रुपए प्रति शिल्पी प्रति माह छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।
’कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़’ बनाने सांसदों, विधायकों, महापौर, नगरीय निकाय और पंचायत प्रतिनिधियों का किया आह्वान
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक सितम्बर से शुरू हो रहे राष्ट्रीय पोषण माह में सक्रिय सहयोग प्रदान करने के लिए जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की अवधारणा को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ के सभी सांसदों, विधायकों, महापौर, नगरीय निकाय और पंचायत प्रतिनिधियों से अपना बहुमूल्य योगदान प्रदान करने का आह्वान किया है। जनप्रतिनिधियों द्वारा पूर्व में किए गए सक्रिय सहयोग की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में बच्चों में व्याप्त कुपोषण और एनीमिया को समाप्त करने के लिए विधायकगणों का हमेशा सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ है। विगत वर्षों में पोषण माह के आयोजन के दौरान भी सभी से सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ है। राष्ट्रीय पोषण माह 2020 के आयोजन में सभी के सक्रिय सहयोग, समन्वय और पूर्ण भागदारी की अपेक्षा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों में व्याप्त कुपोषण एवं एनीमिया एक गंभीर समस्या है। कुपोषण के स्तर में उल्लेखनीय कमी लाने के उद्देश्य से वर्ष 2018 से पोषण अभियान का संचालन किया जा रहा है। समुदाय तक पोषण के प्रति जागरूकता, व्यवहार परिवर्तन, सम्प्रेषण एवं पोषण संवाद के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु जन-आंदोलन के रूप में प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जा रहा है। सम्पूर्ण राज्य में इस वर्ष भी 01 सितम्बर 2020 से 30 सितम्बर 2020 तक राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाना है।
कोविड-19 के संक्रमण से उत्पन्न वैश्विक आपदा की स्थिति के कारण इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह को अन्य माध्यमों के साथ-साथ यथा आवश्यकता डिजिटल जन-आंदोलन के रूप में मनाया जाना है। इस हेतु तकनीक एवं समन्वय का उपयोग करते हुए वर्चुअल बैठक, सोशल मीडिया, मास मिडिया, प्रिंट मीडिया का वृहत स्तर पर उपयोग किया जाना है। राष्ट्रीय पोषण माह 2020 का एक प्रमुख उद्देश्य गंभीर कुपोषित बच्चों की शीघ्र पहचान एवं उन्हें संदर्भित किया जाना है। बच्चों की उत्तरजीविता में सुधार हेतु बच्चों को स्तनपान के साथ-साथ समय पर ऊपरी आहार दिया जाना एक महत्वपूर्ण रणनीति है। पोषण माह के दौरान शीघ्र स्तनपान एवं 06 माह तक संपूर्ण स्तनपान को बढ़ावा दिया जाना है। पोषण माह के दौरान पौष्टिक सब्जियां, फलदार पौधेां को घर की बाड़ियों, सामुदायिक बाड़ियों, खाली पड़ी भूमियों में रोपण करने के साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूल भवनों, शासकीय भवनों में तथा नगरीय क्षेत्रों में घर की छतों पर पोषण वाटिका निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जाना है। राज्य में पोषण माह के दौरान सही पोषण-छत्तीसगढ़ रोशन की अवधारणा को मूर्त रूप देने हेतु सभी जनप्रतिनिधियों, त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, नगरीय निकाय के प्रतिनिधियों क्षेत्रीय अमले एवं जनसमुदाय का सक्रिय सहयोग आवश्यक है।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप और उसकी रोकथाम के लिये लगाए गए ‘लॉकडाउन' से देश की पहले से नरम पड़ रही अर्थव्यवस्था पर और बुरा असर पड़ा है. सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़े के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2020-21 में अप्रैल-जून के दौरान अथर्व्यवस्था में 23.9 प्रतिशत की अब तक की सबसे बड़ी तिमाही गिरावट आयी है. इस दौरान कृषि को छोड़कर विनिर्माण, निर्माण और सेवा समेत सभी क्षेत्रों का प्रदर्शन खराब रहा है. दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में इससे पहले जनवरी-मार्च तिमाही में 3.1 प्रतिशत और पिछले साल अप्रैल-जून में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. तिमाही आंकड़े 1996 से जारी किये जा रहे हैं और उस समय से यह अबतक की सबसे बड़ी गिरावट है. इतना ही नहीं विश्लेषक जो अनुमान जता रहे थे, गिरावट उससे भी बड़ी है.
आइए, हम आपको आसान शब्दों में समझाते हैं कि क्या होती है GDP और कैसे दर्ज की जाती है गिरावट और बढ़ोतरी
किसी भी मुल्क की माली हालत, यानी आर्थिक स्थिति का आकलन करने का सबसे अहम मानक है सकल घरेलू उत्पाद, यानी GDP या Gross Domestic Product. इसका अर्थ यह हुआ कि एक वित्तवर्ष के दौरान किसी मुल्क ने कितनी रकम का उत्पाद और सेवाएं तैयार कीं, यानी एक निश्चित वक्फे में देशभर में तैयार की गई सेवाओं और उत्पादों का बाज़ार मूल्य क्या रहा.
देश की उन्नति और बढ़ोतरी का परिचायक माने जाने वाले GDP का आकलन भारत में हर तीन महीने, यानी हर तिमाही में किया जाता है, यानी अप्रैल से मार्च तक चलने वाले किसी भी वित्तवर्ष के दौरान कुल चार तिमाहियों (अप्रैल-जून, जुलाई-सितंबर, अक्टूबर-दिसंबर, जनवरी-मार्च) में इसका आकलन किया जाता है. किसी भी अन्य देश की तरह हमारे देश में भी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में तीन हिस्से शामिल हैं - कृषि से होने वाला उत्पाद, उद्योग गजत द्वारा तैयार किया गया अंतिम उत्पाद तथा देश में सेवाक्षेत्र द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं का कुल मूल्य. इन तीन क्षेत्रों में पैदा हुए उत्पाद के बढ़ने या घटने के आधार पर देश की GDP बढ़ती या घटती है.
सो, जब भी GDP का आंकड़ा बढ़ता नज़र आता है, देश की तरक्की का सबूत बनता है, और जब यह आंकड़ा गिरावट दर्ज करता है, देश की तरक्की पर भी ब्रेक लग जाता है, यानी मुल्क की माली हालत गिरती नज़र आती है.
सकल घरेलू उत्पाद को प्रस्तुत करने के दो पैमाने होते हैं - स्थिर कीमतें, यानी Constant Prices और मौजूदा कीमतें या वर्तमान मूल्य, यानी Current Prices. स्थिर कीमतें का अर्थ यह हुआ कि किसी एक साल को आधार वर्ष, यानी Base Year मान लिया जाता है, और फिर हर वर्ष उत्पादन की कीमत में तुलनात्मक वृद्धि या कमी इसी वर्ष के आधार पर तय की जाती है, ताकि बदलाव को महंगाई के उतार-चढ़ाव से इतर मापा जा सके. मौजूदा कीमतों के आधार पर GDP तय किए जाते समय उसमें मौजूदा महेगाई दर, यानी मुद्रास्फीति की दर को भी आधार बनाया जाता है.
इसे आम बोलचाल की भाषा में समझने के लिए मान लीजिए कि 2010 को आधार वर्ष मान लेने के बाद 2011 में हमारे देश में 1000 रुपये मूल्य की 300 वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन हुआ, और हमारी कुल GDP तीन लाख रुपये रही. वहीं, चार साल बाद 2015 में कुल 200 वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन हुआ, लेकिन तब तक उनका मूल्य 1500 रुपये हो चुका था, तो सामान्य GDP तीन लाख रुपये की ही रही, लेकिन आधार वर्ष के हिसाब से देखे जाने पर इसकी कीमत 1000 रुपये के हिसाब से सिर्फ दो लाख रुपये रह गई, इसलिए GDP में गिरावट दर्ज की जाएगी.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / देश में फेसबुक को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के मध्य जुबानी जंग जारी है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को एक बार फिर आरोप लगाते हुए कहा कि फेसबुक और व्हॉट्सएप देश के लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव पर हमला कर रहे हैं. इससे पहले, कांग्रेस ने फेसबुक द्वारा बीजेपी नेताओं के हेट स्पीच को कथित तौर पर नजरअंदाज करने के मामले में मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखा था. 15 दिन कांग्रेस की तरफ से दूसरी बार चिट्ठी लिखी है.
राहुल गांधी ने अमेरिकी अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट को ट्वीट करते हुए लिखा, "अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भारत के लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव पर फेसबुक और व्हॉट्सएप के हमले को पूरी तरह से उजागर किया है. हमारे देश के मामलों में किसी को भी, चाहे वो कोई विदेशी कंपनी ही क्यों न हो, हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी सकती है. उनकी तुरंत जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर सजा मिलनी चाहिए.
बता दें कि हाल ही में अमेरिकी अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने फेसबुक इंडिया की पब्लिक पॉलिसी हेड अंखी दास को लेकर दावे किए हैं. खबर के मुताबिक, फेसबुक इंडिया की पब्लिक पॉलिसी हेड अंखी दास ने पिछले कई सालों में पोस्ट के माध्यम से सत्ताधारी दल बीजेपी का समर्थन किया है.
दास ने 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस की हार और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए एक पोस्ट में कहा था, "आखिरकार, 30 साल की जमीनी मेहनत से भारत को स्टेट सोशलिज्म से मुक्ति मिल गई." अखबार ने कहा कि ये सभी पोस्ट 2012 से 2014 के दौरान के हैं और ये पोस्ट फेसबुक कर्मचारियों के लिए बनाए गए ग्रुप में किए गए थे. इसमें कंपनी के सैकड़ों कर्मचारी शामिल थे.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / कोरोनावायरस से संक्रमित पत्रकार नीलांशु शुक्ला का मंगलवार की सुबह निधन हो गया. नीलांशु पिछले कई दिनों से कोरोना से लड़ रहे थे, लेकिन कोविड कॉम्पलिकेशंस के चलते मंगलवार को उनका निधन हो गया. नीलांशु अतीत में और फिलहाल India Today Group के साथ जुड़े हुए थे और लखनऊ ब्यूरो में काम कर रहे थे. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने उनके निधन की खबर पर दुख जताया है और कोरोना के दौर में पत्रकारों के लिए सरकार से इंश्योरेंस कवर की मांग की है.
प्रियंका गांधी ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, 'बहुत ही दुखद खबर. लखनऊ के नौजवान पत्रकार नीलांशू शुक्ला जी हमारे बीच नहीं रहे. वो कई दिनों से कोरोना से लड़ाई लड़ रहे थे. नीलांशू शुक्ला जी एक होनहार पत्रकार थे. कई बार मैंने स्वयं उन्हें कार्य करते देखा है. भावभीनी श्रद्धांजलि. ईश्वर इस दुख की घड़ी में उनके परिजनों को कष्ट सहने का साहस दें. मैंने पहले भी इस मुद्दे को उठाया था कि पत्रकार साथी इस संकट के समय में सूचनाएं देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं. यूपी सरकार को नीलांशू शुक्ला जी के परिवार को आर्थिक मदद व सभी पत्रकारों को बीमा कवर देना चाहिए.'
बता दें कि कुछ दिन पहले उन्हें कोरोना के लक्षण दिखे थे, जिसके बाद उन्हें कानपुर एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन इलाज के दौरान उनकी दिन-ब-दिन हालत बिगड़ती गई, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया. उन्हें दो बार प्लाज़्मा थेरेपी भी दी गई थी. सोमवार की रात उन्हें दूसरी बार प्लाज़्मा थेरेपी दी गई थी. लेकिन मंगलवार की सुबह उनका निधन हो गया. नीलांशु की उम्र 35 साल से भी कम थी. हाल ही में उनकी इंगेजमेंट हुई थी और जहां तक जानकारी है उनको किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या नहीं थी.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों के मामले में आरोपी और महिला संगठन पिंजरा तोड़ ग्रुप की सदस्य देवांगना कलिता को दंगे से जुड़े एक मामले में जमानत मिल गई है. उन्हें दिल्ली दंगे में 26 फरवरी से जुड़े मामले में जमानत मिली है. दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि उनके भाषण में कोई उकसावे जैसी बात नहीं है. पुलिस ने देवांगना कलिता को मुख्य साज़िशकर्ता बताया था.
मंगलवार को कलिता को 25 हज़ार के निजी मुचलके पर ज़मानत दे दी गई है. हालांकि, कोर्ट ने कहा है कि वो देश छोड़कर नहीं जा सकती हैं और न ही वो गवाहों को प्रभावित करेंगी. जस्टिस सुरेश कुमार कैत ने जेएनयू की छात्रा देवांगना कलिता को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. अदालत ने उन्हें गवाहों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित करने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ ना करने का निर्देश दिया है.
हालांकि जमानत मिलने के बाद भी देवांगना कलिता जेल से बाहर नहीं आ पाएंगी. दरअसल, स्पेशल सेल ने भी उनके खिलाफ केस दर्ज किया हुआ है. इसलिए अभी वो जेल में ही रहेंगी. उन पर दंगों से जुड़े कई और मामले चल रहे हैं, स्पेशल सेल ने दंगों की साज़िश को लेकर उन्हें यूएपीए के तहत आरोपी बनाया है.
कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
देवांगना कलिता की जिस मामले में ज़मानत हुई वो मामला 26 फरवरी को जाफराबाद में हुई हिंसा से जुड़ा है. कोर्ट ने देवांगना को ज़मानत देते हुए कहा कि 'विरोध प्रदर्शन के दौरान देवांगना के द्वारा दिया गए भाषण से कहीं से ऐसा नहीं लगता कि एक समुदाय की महिलायें भड़की हो, वो एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन था जो कि हर किसी का संवैधानिक अधिकार है, कोर्ट ने कहा कि देवांगना को ज़मानत देने से जांच पर असर नहीं पड़ेगा. उन्हें ज़मानत देकर उत्पीड़न और गैर जरूरी हिरासत से बचाया जा सकता है.' कोर्ट ने कहा कि 'विरोध प्रदर्शन के दौरान मीडिया और पुलिस के कैमरे थे, ऐसा कहीं से नहीं लगता कि उनकी वजह से हिंसा हुई.'
बता दें कि फरवरी में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान उत्तर पूर्व दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक मामले में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने मई में नताशा नरवाल के समूह की कलिता और अन्य सदस्यों को मई में गिरफ्तार किया था. उन पर दंगा करने, गैरकानूनी तरीके से जमा होने और हत्या की कोशिश करने सहित आईपीसी की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.
कलिता पर दिसंबर में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान पुरानी दिल्ली के दरियागंज इलाके में हुई हिंसा और उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे सहित कुल चार मामले दर्ज हैं. उत्तरपूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इन दंगों में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 200 लोग घायल हो गए थे.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भड़काऊ भाषण देने के आरोप में रासुका का सामना कर रहे डॉक्टर कफील खान को रिहा करने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने मंगलवार को मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि 'NSA के तहत डॉक्टर कफील को हिरासत में लेना और हिरासत की अवधि को बढ़ाना गैरकानूनी है. कफील खान को तुरंत रिहा किया जाए.' इसपर उनकी पत्नी की प्रतिक्रिया आई है. एक वीडियो जारी कर उनकी पत्नी शबिस्ता खान ने कहा कि उनकी जिंदगी से सात महीने छीन लिए गए, जिसे अब कोई वापस नहीं लौटा सकता है.
शबिस्ता खान ने कहा, 'एक निर्दोष व्यक्ति, जिसने कुछ नहीं किया है, उसपर NSA लगाकर उसे जेल में बंद कर दिया गया और सात महीनों तक उसे प्रताड़ित किया गया. वो सात महीने कोई वापस नहीं ला सकता है. हम तो जब सोचते हैं कि ये सात महीने कैसे गुजरे हैं तो हमारी रूह कांप जाती है. अगर आपके पास NSA का पावर है तो उसे मिसयूज़ मत करिए. अगर कोई दंगा कर रहा है. कुछ गलत कर रहा है तो जरूर उसे जेल में डाल दीजिए, उसपर NSA लगा दीजिए. लेकिन जिसने कुछ किया ही नहीं है, उसपर NSA लगा दिया गया और जेल में डाल दिया गया. प्लीज़ यही अपील है कि अगर आपके पास NSA की शक्ति है तो उसका गलत इस्तेमाल मत करिए.'
बता दें कि इलाहाबाद कोर्ट मामले मंगलवार को अपना आखिरी फैसला सुना रहा था. कोर्ट ने डॉक्टर कफील को रासुका के लगाकर जेल में रखने और फिर उनकी हिरासत की अवधि को बढ़ाए जाने के कदम को गैरकानूनी बताया. गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता और बालरोग विशेषज्ञ डॉक्टर कफील खान को CAA, NRC और NPA के विरोध के दौरान अलीगढ़ विश्वविद्यालय में 13 दिसंबर 2019 को कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के आरोप में यूपी पुलिस ने गिरफ्तार किया था.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / उज्जैन के महाकालेश्वर मन्दिर के प्रबंधन के बाबत सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किए हैं. अपना फैसला सुनाने के बाद मंगलवार को जस्टिस अरुण मिश्रा साथी जजों से बोले, "शिवजी की कृपा से ये आखिरी फैसला भी हो गया." कोर्ट ने महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की सुरक्षा को लेकर दिशा निर्देश जारी किए हैं. हाल ही में जस्टिस मिश्रा ने अपने विदाई समारोह में शामिल करने से इनकार कर दिया था. इस फैसले की वजह से कोरोना महामारी को माना जा रहा है.
पहले भी शीर्ष न्यायालय ने महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग पर भस्म और अन्य लेपन से हो रहे प्रभाव पर कुछ दिशा निर्देश दिए थे. बाद में चर्चा होने पर कोर्ट ने अपना आदेश ये कहते हुए संशोधित किया था कि पूजा अर्चना और सेवा भोग कैसे हो ये तय करना हमारा काम नहीं है. ये तो मन्दिर प्रबन्धन और पुरोहितों पुजारियों को ही तय करने दिया जाये.
मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने मन्दिर प्रबन्धन को दिशा निर्देश जारी किए हैं. इसमें भक्तों के प्रवेश और अन्य उपचार को लेकर विस्तार से निर्देश हैं. कोर्ट के निर्देश जल्दी ही वेबसाइट पर आएंगे.
दरअसल, जस्टिस अरुण मिश्रा बुधवार को रिटायर होने वाले हैं. सोमवार को उन्होंने प्रशांत भूषण अवमानना केस समेत चार मामलों में फैसला सुनाया था. मंगलवार को महाकालेश्वर मंदिर के प्रबंधन को लेकर आदेश सुनाने से पहले AGR मामले पर भी फैसला सुनाया.
बता दें कि जस्टिस अरूण मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित होने वाले उनके विदाई समारोह में शामिल होने से मना तो किया साथ ही यह भी कहा कि कोरोना संकट काल के मद्देनज़र वह समारोह का आयोजन नहीं चाहते क्योंकि उनकी अंतरात्मा इसकी अनुमति नहीं देती है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
