February 14, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

नई दिल्ली / शौर्यपथ /पटना/ जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र और बिहार की राजनीति में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया का प्रमुख चेहरा बने कन्हैया कुमार का कहना है कि…
नई दिल्ली /शौर्यपथ /श्रीनगर/ जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के नूरपोरा इलाके में सोमवार को सुरक्षाबलों और आतंकियो के बीच मुठभेड़ हुई. इस एनकाउंटर में एक आतंकी मारा गया जबकि दूसरे आतंकी…
नई दिल्ली /शौर्यपथ / कोरोनावायरस महामारी के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और रक्षा मंत्री मार्क टी एस्पर का खास…

दुर्ग । शौर्यपथ । छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य विभाग 104 आरोग्य सेवा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं पिरामल स्वास्थ्य द्वारा छत्तीसगढ़ के 40 प्रमुख निजी अस्पतालों में किए गए कोविड-19 सर्वेक्षण में 92.86 फ़ीसदी अंकों के साथ बीएसआर हाईटेक सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल को सर्वश्रेष्ठ कोविड-19 अस्पताल घोषित किया गया है. यह सूची सीधे मरीजों एवं उनके परिजनों से लिए गए फीडबैक के आधार पर बनाई गई है. कोविड पेशेंट फीडबैक के इस सर्वेक्षण में स्वास्थ्य सेवा सुविधाएं , औषधि , भोजन एवं पानी , मास्क , सोशल डिस्टेंसिंग एवं स्वच्छता संबंधी प्रश्नों को शामिल किया गया था , इस सर्वेक्षण की सूचना सर्वेक्षण में शामिल किए गए अस्पतालों को भी नहीं थी, इन आंकड़ों के आधार पर 4 अस्पतालों को बेहद कार्य निष्पादन के लिए प्रमाणित किया गया है , प्रथम नंबर पर जहां बीएसआर सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल को रखा गया है वहीं दूसरे नंबर पर वर्धमान हॉस्पिटल वहाँ तीसरे नंबर पर उपाध्याय हॉस्पिटल रायपुर तथा चौथे नंबर पर वी केयर हॉस्पिटल रायपुर को रखा गया है जबकि श्री नारायणा इस सूची में पांचवें क्रम पर हैं, बीएसआर हॉस्पिटल प्रबंधन ने इसका पूरा श्रेय कोविड में लगे अपने चिकित्सकों एवं सहयोगी टीमों को दिया है | *उपलब्धियां * कोविड-19 सर्वेक्षण में मिले 92.86 फ़ीसदी अंक * फीडबैक में औषधि भोजन सहित अनेक प्रश्नों को किया गया था शामिल* *सुविधा को लेकर सर्वोच्च प्राथमिकता- मनोज* हॉस्पिटल के निदेशक मनोज अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल की पूरी टीम को भी प्रोटोकॉल को फॉलो करने के साथ-साथ कलेक्टर दुर्ग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों का पूरी तरह से पालन करते हुए इन पायदान पर पहुंचने में सफल रही उन्होंने बताया कि अस्पताल ने पेशेंट सेफ्टी, पेशेंट केयर तथा उनके हॉस्पिटल स्टे को अधिक से अधिक सुविधाजनक बनाने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है उन्होंने बताया कि पेशेंट फीडबैक सर्वे में सर्वोच्च रैंकिंग मिलने का सुखद अवसर है पर यह हमारी जिम्मेदारी को और भी बढ़ा देती है हमारी पूरी कोशिश होगी कि हम जनता के इस भरोसे को टूटने नहीं देंगे और उन पर पूरा विश्वास बनाए रखेंगे ।

बिहार / शौर्यपथ / मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से कहा कि कोरोना महामारी के मद्देनज़र वो त्योहार के सीज़न में किसी तरह की लापरवाही न बरतें. उन्होंने लोगों से मास्क पहनने और सामाजिक दूरी का पालन जारी रखने के लिए कहा है.
लेकिन, ऐसा लगता है कि शायद उनका यह संदेश बिहार के लोगों तक नहीं पहुंचा है.बिहार में विधानसभा चुनावों में पहले चरण की वोटिंग 28 अक्तूबर को होने वाली है. चुनाव प्रचार के लिए बिहार में बड़ी-बड़ी राजनीतिक रैलियां हो रही हैं और इन रैलियों में लोगों की भारी भीड़ भी उमड़ रही है.
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) समेत चुनावी अखाड़े में उतर रही रही सभी पार्टियों ने प्रचार अभियान तेज़ कर दिया है.कुछ रैलियों की वीडियो फुटेज से दिखाई दे रहा है कि लोगों में नेताओं की एक झलक पाने के लिए भगदड़ जैसे हालात बन रहे हैं. इन रैलियों में शामिल हो रही भीड़ में शायद ही कोई मास्क पहनता दिख रहा है.वायरोलॉजिस्ट और डॉक्टरों ने चुनावी रैलियों में जुट रही इस भारी भीड़ को "संवेदनहीन" करार दिया है और कहा है कि इस तरह की लापरवाही के भयानक दुष्परिणाम हो सकते हैं.
उनका कहना है इससे कोरोना वायरस कहीं ज़्यादा तेज़ी से लोगों में फैल सकता है.भारत में अब तक कोरोना संक्रमण के 70 लाख से अधिक मामले दर्ज किए जो चुके हैं, लेकिन हाल के दिनों में रोज़ाना संक्रमितों की संख्या में गिरावट आ रही है.
जहां कुछ लोगों का कहना है कि महामारी का सबसे बुरा दौर ख़त्म हो चुका है, वहीं कई जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि इतनी जल्दी कोरोना के ख़त्म होने का जश्न मनाना सही नहीं होगा.चुनाव आयोग ने कोविड-19 के लिए बताए गए नियमों का उल्लंघन करने वाले नेताओं को चेतावनी दी है. लेकिन, ऐसा लग रहा है कि इसका शायद ही कोई असर हुआ हो क्योंकि रैलियों में भीड़ लगातार इकट्ठी हो रही है.
कोरोना सेफ्टी नियमों का उल्लंघन
वायरोलॉजिस्ट डॉ. शाहिद जमील का कहना है कि राजनीतिक पार्टियों को और अधिक ज़िम्मेदार होने की ज़रूरत है और उन्हें अपने कार्यकर्ताओं को भी जागरूक बनाना होगा.उन्होंने बताया, "हमें इन रैलियों में हजारों लोग जुटते दिखाई दे रहे हैं और शायद ही कोई व्यक्ति मास्क पहन रहा हो. राजनीतिक पार्टियों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो अपने फ़ॉलोअर्स को कोरोना से बचाव के लिए बनाए गए नियमों का पालन करने के लिए कहें."
बिहार में पहले चरण का मतदान 28 अक्तूबर को होना है. इसके बाद 3 नवंबर और फिर 7 नवंबर को मतदान होना है. चुनावों के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.यहां बीजेपी के अगुवाई वाला गठबंधन एक बार फिर सत्ता में आने की कोशिश कर रहा है. दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस और वामदलों का गठबंधन है. इसके अलावा कुछ क्षेत्रीय पार्टियां भी चुनाव मैदान में हैं.
इन चुनावों में सभी पार्टियों के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा है. चुनाव में शुरुआती कैंपेन वर्चुअल रहा, लेकिन अब प्रचार पूरी तरह से ऑफ़लाइन हो चुका है. शुक्रवार को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन रैलियां थीं. वहीं कांग्रेस के राहुल गांधी भी रैलियों में शामिल हो रहे हैं.
राज्य के एक वरिष्ठ पत्रकार ने बीबीसी को बताया कि प्रचार के मुद्दे के तौर पर कोई भी यहां कोरोना के बारे में बात नहीं कर रहा है.उन्होंने कहा, "ऐसा लग रहा है कि जैसे राज्य से कोरोना एकदम ग़ायब चुका है. लोग लापरवाह हो गए हैं और नेता लोगों को सतर्क करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं."
राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चिंता
राज्य सरकार का कहना है कि वह हर दिन औसतन डेढ़ लाख कोरोना टेस्ट कर रही है और गुज़रे कुछ हफ्तों में संक्रमितों का अस्पतालों में आना कम हुआ है.लेकिन, जानकार इसे लेकर संशय जता रहे हैं. उनका कहना है कि जिस टेस्ट की बात राज्य सरकार कर रही है वो रैपिड एंटीजन टेस्ट है जिसका नतीजा 30 मिनट में आ जाता है. लेकिन इनमें कुछ मामलों में एक्युरेसी रेट केवल 30 फीसदी तक होता है.बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 22 सितंबर को कहा था कि राज्य ने पहले रोज़ाना दो लाख टेस्ट किए जा रहे थे. लेकिन, इनमें से केवल 11,732 ही आरटी-पीसीआर टेस्ट थे.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्थिति जोख़िम भरी है क्योंकि रैपिड एंटीजन टेस्ट से टेस्ट नतीजे ग़लत आने के आसार बढ़ते हैं. ऐसे में संक्रमित होने के बावजूद लोग इससे अनजान रह सकते हैं और वे इधर-उधर जाकर वायरस फैला सकते हैं.जानेमाने पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. ए फतहउद्दीन कहते हैं कि बिहार सेफ्टी नियमों को तोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकता, इससे समस्याओं में और इजाफ़ा होगा.
राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले ही लचर हालत में है और यहां डॉक्टरों, प्रशिक्षित पैरामेडिक्स और नर्सों की भारी कमी है. जुलाई और अगस्त महीने की शुरुआत में कोरोना संक्रमण के मामलों में इजाफ़ा होने से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भयंकर दबाव बन गया था. कुछ मरीज़ों के परिवारों को ख़ुद ही ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था करनी पड़ी थी, जबकि इलाज के अभाव में कुछ मरीज़ों की मौत हो गई थी.
डॉ. फतहउद्दीन कहते हैं, "राज्य में जनसंख्या का घनत्व काफी अधिक है और लोग संयुक्त परिवारों में रहते हैं. इन रैलियों में शिरकत करने वाले लोग लौट कर अपने परिवारों में जाएंगे, लोगों से मिलेंगे. ये लोग अपने साथ संक्रमण फैला सकते हैं."त्योहारों के सीज़न और मौसम का भी राज्य में वायरस के फैलने में अहम रोल होगा. नवंबर के बाद से तापमान में गिरावट आने के चलते उत्तर भारत में हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है.
कई अध्ययनों से पता चला है कि प्रदूषण से कोविड-19 से होने वाली मौतों और संक्रमण की दर बढ़ जाती है.डॉ. शाहिद जमील कहते हैं, "रैलियों की ऐसी तस्वीरें, सर्दियों के दिन और आने वाले त्योहार के सीज़न को देखते हुए मैं डर जाता हूं. मुझे डर लगता है कि अगर अगले कुछ हफ्तों में देश में सावधानी नहीं बरती गई तो किस तरह के हालात पैदा हो सकते हैं."जानकारों का कहना है कि बिहार में जो हो रहा है उसका असर दूसरे राज्यों पर भी पड़ सकता है.
डॉ. फतहउद्दीन कहते हैं कि इस तरह की धारणा फैल रही है कि युवा लोगों में वायरस का ज़्यादा असर नहीं होता. वे कहते हैं, "इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि युवा लोग इस वायरस से गंभीर रूप से बीमार नहीं पड़ सकते हैं." डॉ. फतहउद्दीन कहते हैं कि देश के दूसरे हिस्सों में लोगों को इस तरह की बड़ी भीड़ दिखाई देगी तो उन्हें लग सकता है कि वायरस अब नहीं फैल रहा है. ये अपने आप में काफ़ी ख़तरनाक साबित हो सकता है.

बिहार / शौर्यपथ / मेड़ से थोड़ी ही चौड़ी सड़क है, सड़क के दोनों ओर धान की बालियां लहरा रही हैं. ये सीधी सड़क मुज़फ़्फ़रपुर के रतनौली गांव को जाती है. सड़क के किनारे छोटी सी किराना दुकान पर बैठे शख़्स से संजय सहनी के घर का पता पूछा तो जवाब मिला नरेगा वाले भईया के यहां जाएंगी ना... इसके बाद हमने कुछ क़दम नापे ही थे कि सामने एक तिरपाल में 40 से 50 लोग ज़मीन पर बैठे नज़र आए.
इनमें महिलाएं ज़्यादा और पुरुष कम हैं. लोगों से घिरे संजय सहनी लोगों को बता रहे हैं कि, "जो नेता कभी यहां आए ही नहीं दिल्ली में बैठे हैं उनके नाम पर हमेशा वोट माँग लिया जाता है. जिस नेता को सामने से देखे तक नहीं उनके लिए वोट करने को कहा जाता है."

नीली सफ़ेद धारियों वाली शर्ट, गहरे भूरे रंग की पतलून और काले रंग की स्लीपर पहने संजय सहनी असाधारण रूप से सफ़ेद कुर्ते और गेंदे के फूलों की माला से लदे नेताओं से बिलकुल अलग दिखते हैं. ना ही उनकी बातों में आम नेताओं सी लफ़्फ़ाज़ी है और ना ही नेताओं से तेवर.
उन्हें घेर कर बैठीं तमाम बूढ़ी-अधेड़ उम्र की महिलाओं के लिए वह किसी उम्मीदवार से ज़्यादा उनके संजय भईया हैं.संजय सहनी मुज़फ़्फ़रपुर के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. संजय को अलमारी चुनाव चिन्ह मिला है.

दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग निगम जो भ्रष्टाचार की नयी नई उंचाइयो पर लगातार प्रगति पथ पर चल रहा है और इस भर्ष्टाचार पर सब कुछ जानते हुए भी अधिकारी…

-कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे , महापौर बाकलीवाल ने एम्बुलेंस यूनिट का किया मुआयना
-41 तरह के खून जांच की होगी सुविधा
दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन की अति महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना का शुभारंभ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 01 नवंबर को किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल योजना का विधिवत् शुभारंभ कर राज्य की जनता को समर्पित करेंगे। योजनांतर्गत राज्य के सभी शहरी क्षेत्रों में मोबाइल यूनिट पहुँचकर स्लम बस्तियों के लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार की व्यवस्था करेगी। योजनांतर्गत दुर्ग जिले के सभी नगरी निकायों के लिए 11 यूनिट मोबाइल एम्बुलेंस उपलब्ध होगी। इसके अंतर्गत आज पहली यूनिट दुर्ग पहुंची। कलेक्टर ने यूनिट का मुआयना कर इसमें उपलब्ध सुविधा सहित उपचार के लिए की गई व्यवस्था को देखा कलेक्टर भूरे के साथ दुर्ग निगम के महापौर बाकलीवाल ने भी एम्बुलास का मुयायना किया । योजना के संचालन के लिए निजी एजेंसियों की सेवाएं ली जाएगी। इसके संचालन के लिए जिला स्तर पर निगरानी टीम इसकी माॅनिटरिंग करेगी। मोबाइल यूनिट में चिकित्सक, ए.एन.एम., लैब टेक्निशियन, फार्मासिस्ट मौजूद रहेंगे।
कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजनांतर्गत अधिकृत एजेंसी एवं चयनित मोबइल यूनिट टीम के स्टाॅफ की संक्षिप्त बैठक लेकर योजना के उददेश्य की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह योजना छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी योजना है। योजना का शुभारंभ आगामी 01 नवंबर को किया जाएगा। इसके लिए निजी एजेंसी की सेवाएं ली जाएगी। उन्होंने कहा कि योजना की सफलता के लिए आप सब की महती भूमिका की आवश्यकता है। जो दायित्व दिया जाएगा उसे पूर्ण जवाबदेही के साथ कर्मठता पूर्वक किया जाना अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि योजना को लेकर शहरी मलीन बस्ती में निवास करने वाले लोगों की काफी अपेक्षा है। उल्लेखनीय है कि मलीन बस्ती में ज्यादातर गरीब तबके के लोग निवासरत होते हैं। जिन्हें सामान्य तौर पर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता है। किसी प्रकार की कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर वे आसपास के बड़े अस्पतालों पर निर्भर होते हैं। इससे उन्हें डाॅक्टर की फीस एवं दवाइयों के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं । साथ ही अपनी दैनिक कार्यों को छोड़कर दिनभर अस्पताल का चक्कर लगाना होता है। इन सबसे मुक्ति दिलाने और अपने मोहल्ले में ही स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना प्रारंभ की जा रही है।
कलेक्टर ने कहा कि सामान्य तौर पर किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या का समय पूर्व उपचार हो जाने से बीमारी ठीक हो जाती है। समय पर उपचार नहीं मिलने से बीमारी के प्रकोप बढ़ने का खतरा बना रहता है। ऐसे स्थिति में यह योजना लोगों के लिए वरदान साबित होगी। योजना की सार्थकता और सफलता के लिए योजना से जुडे़ चिकित्सकों की टीम पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि योजनांतर्गत 41 प्रकार के खून जांच और बीमारियों के उपचार की सुविधा रहेगी।
इस टीम को सामान्य मौसमी बीमारियों, डेंगू, मलेरिया, पीलिया, टायफाईड जैसे बीमारियों के लिए भी सतर्क रहना होगा। कलेक्टर ने योजनांतर्गत चिन्हित टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी मुख्यमंत्री की मंशानुरूप कार्य करेंगे। सभी अपनी पूर्ण दक्षता और निष्ठा के साथ कार्य का संपादन करेंगे ।

- 91 प्रतिशत स्कोर हासिल किया दुर्ग ने, सभी मानदंडों में अग्रणी
- शानदार मेडिकल मैनेजमेंट के बूते मिली सफलता
- नियमित रूप से मेडिकल सुपरविजन के मामले में अग्रणी रहने से मिली शानदार सफलता

दुर्ग / शौर्यपथ / होम आइसोलेशन के दुर्ग माडल ने इस सप्ताह हेल्थ डिपार्टमेंट के फीडबैक सर्वे में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। फीडबैक सर्वे में 91 प्रतिशत स्कोर दुर्ग जिले को प्राप्त हुआ है। 85 प्रतिशत से अधिक स्कोर फीडबैक के लिए शानदार माना जाता है, यहां स्कोर छह प्रतिशत अधिक होने के कारण दुर्ग का होम आइसोलेशन माडल काफी बेहतर तरीके से काम करता प्रतीत हो रहा है। फीडबैक की रैंकिंग में मेडिकल सुपरविजन के संबंध में 452 लोगों से थर्ड पार्टी ने फालोअप लिया। सभी पैरामीटर में दुर्ग जिले की रैंकिंग बहुत अच्छी रही। उल्लेखनीय है कि यहां होम आइसोलेशन मैनेजमेंट के अंतर्गत लगभग 8000 मरीज थे। इन सभी के मेडिकल पैरामीटर देखना और उसके मुताबिक इनकी दवाइयां एवं ट्रीटमेंट का फालोअप करना, काउंसिलिंग करना और जरूरी पड़ने पर इन्हें बिल्कुल समय गंवाये रिफर करना बड़ा काम था। होम आइसोलेशन कंट्रोल रूप में मेडिकल टीम की प्रभारी डाॅ. रश्मि भुरे एवं उनके छह सहयोगी मेडिकल अधिकारियों ने लगातार स्थितियों पर नजर रखी।
इसका बहुत अच्छा नतीजा सामने आया और रिकवरी रेट शानदार रही। कोविड कंट्रोल बिल्कुल अलग किस्म का कार्य था। इसके लिए जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों, आयुर्वेद अधिकारियों, स्टाफ नर्स की ट्रेनिंग बेहद जरूरी थी। डाॅ. रश्मि भुरे ने यह ट्रेनिंग कराई, साथ ही जटिल केस के संबंध में रिफर करने तुरंत निर्णय लिया। अलग-अलग तरह की मेडिकल हिस्ट्री के संबंध में भी मरीजों से काउंसिलिंग की और इसके मुताबिक होम बेस्ड केयर किया गया। इससे रिकवरी की दर तेजी से बढ़ गई।
यह हैं छह एएमओ जिन्होंने कड़ी मेहनत कर बढ़ाई रिकवरी दर- होम बेस्ड केयर में लगभग आठ हजार पेशेंट रहे। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का केयर करना आसान नहीं था। इसके लिए छह एएमओ अर्थात सहायक स्वास्थ्य अधिकारी लगाए गए और इनके साथ 20 जूनियर डॉक्टर और 30 नर्सिंग स्टाफ अटैच किया गया। सभी एएमओ ने 24 घंटे दिन और रात होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की देखभाल की।
रिसाली में डाॅ. जागृति चंद्राकर ने संभाला मोर्चा- रिसाली में मोर्चा डाॅ. जागृति चंद्राकर ने संभाला। यूँ तो उनका आफिशियल टाइम आठ घंटे का होता है लेकिन यह इमरजेंसी का वक्त था। रात-रात को पेशेंट फोन करते थें, डाॅ. जागृति ने बताया कि हमेशा एलर्ट रहना पड़ता है इस वजह से काफी सारे मरीजों से अटैचमेंट हो गया, बाद में उनकी दुआ मिली तो बहुत अच्छा लगा।
दुर्ग में डाॅ. रिजवान की जिम्मेदारी- डाॅ. रिजवान ने दुर्ग की कमाल संभाली। दुर्ग में काफी ज्यादा पेशेंट थे। अपनी टीम के माध्यम से डाॅ. रिजवान लगे रहे। डाॅ. रिजवान ने बताया कि कोविड के समय कभी-कभी मरीज मनोवैज्ञानिक रूप से पैनिक मोड में आ जाते हैं। हमने इलाज के साथ काउंसिलिंग की, इससे मरीजों को काफी लाभ मिला।
डाॅ. सोनिया किशीकर ने कहा दवाओं की नियमितता पर सबसे ज्यादा फोकस- भिलाई को तीन हिस्सों में बांटा गया था। भिलाई लेफ्ट का काम डाॅ. सोनिया के जिम्मे आया। डाॅ. सोनिया ने बताया कि मैं हमेशा पूछती कि आपने दवा खा ली। किस समय खाई, लिखकर नोट करें, रैपर दिखायें। फिर कहतीं कि आक्सीजन लेवल बताएं। यह कारगर रहा। अगर फीडबैक सर्वे में देखें तो 99 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे समय पर दवा खाते थे।
डाॅ. राजपूत ने कहा, फोकस सिक्स मिनट वाक पर- डाॅ. सतीश राजपूत ने भिलाई 3, खुर्सीपार, चरौदा और कुम्हारी की जिम्मेदारी देखी। उन्होंने बताया कि हम लोगों ने आक्सीजन लेवल पर फोकस किया। हमने सबसे कहा था कि सिक्स मिनट वाक का टेस्ट करें। यदि आक्सीजन लेवल तीन प्रतिशत से ज्यादा डाउन होता है तो यह सही नहीं है। इस तरह आरंभ से ही कोविड की गंभीरता के संबंध में मरीज जागरूक हो गए जिसका अच्छा लाभ मिला।
ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी चुनौती संभाली डाॅ. रामस्वरूप मरकाम ने- ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की जिम्मेदारी काफी बड़ी थी क्योंकि इसमें रिस्पांस टाइम का काफी महत्व था। कोविड हास्पिटल तक लाने में समय लगता है। ऐसे में बहुत जरूरी होता है कि काफी पहले मरीज की गंभीरता पर नजर रखें। डॉ. मरकाम ने ऐसे मरीजों की सूची तैयार कर ली और लगातार इनके आक्सीजन स्टेटस की मानिटरिंग करते रहे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के भी मरीजों की रिकवरी काफी रही।
डाॅ. सुशीला बंजारे ने काउंसिलिंग पर दिया जोर- डाॅ. सुशीला बंजारे ने भिलाई राइट की जिम्मेदारी संभाली। यहां काफी संख्या में मरीज थे। उन्होंने दिन रात मरीजों की काउंसलिंग की। रिफरल केस में समन्वय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और काफी अच्छा काम किया। उन्होंने बताया कि काउंसिलिंग का पार्ट अच्छा होने से काफी समस्याएं हल हो जाती हैं। वो संभाला और स्थिति बेहतर होती गई।

मुख्यमंत्री की पहल पर प्रदेश में खेल अधोसंरचनाओं को विकसित करने के प्रयासों को मिली एक और बड़ी सफलता
अम्बिकापुर में मल्टीपरपज इंडोर हॉल तथा महासमुन्द में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रेक निर्माण के लिए भारत सरकार से मिली मंजूरी
अम्बिकापुर में मल्टीपरपज इंडोर हॉल के लिए 4.50 करोड़ रूपए और महासमुन्द में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रेक निर्माण के लिए 6.60 करोड़ रुपए की स्वीकृति

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में खेल अधोसंरचनाओं को विकसित करने के राज्य सरकार के प्रयासों को एक और बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ राज्य में खेल अधोसंरचनाओं के विकास में एक और नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर भारत सरकार के युवा कल्याण और खेल मंत्रालय द्वारा खेलो इंडिया योजना के तहत अम्बिकापुर में मल्टीपरपज इंडोर हॉल के निर्माण तथा महासमुन्द में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रेक निर्माण के राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ये दोनों प्रस्ताव छत्तीसगढ़ सरकार के खेल एवं युवा कल्याण संचालनालय द्वारा भारत सरकार को भेजे गए थे।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और खेल मंत्री श्री उमेश पटेल के विशेष प्रयासों से भारत सरकार ने अम्बिकापुर में मल्टीपरपज इंडोर हॉल के निर्माण के लिए 4 करोड़ 50 लाख रूपए तथा महासमुन्द में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रेक के निर्माण के लिए 6 करोड़ 60 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है। इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं खेल मंत्री उमेश पटेल ने हर्ष व्यक्त करते हुए प्रदेश के खिलाड़ियों तथा खेल विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य के खिलाड़ियों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार बडे़ कदम उठा रही है। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय मापदण्डों के अनुरूप खेल अधोसंरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।

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