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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
ख़ास बात ...
सुपेबेड़ा के डायलिसिस वाले मरीजों को अब नहीं आना पड़ेगा रायपुर
स्वास्थ्य मंत्री की पहल पर सुपेबेड़ा में पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और रायपुर एम्स का पायलट प्रोजेक्ट
रायपुर / शौर्यपथ / किडनी रोग से प्रभावित सुपेबेड़ा के लोगों को अब पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए जरूरी फ्लूइड (Fluid) लेने रायपुर नहीं आना पड़ेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राज्य इकाई ने इसके लिए फ्लूइड अब देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही उपलब्ध करा दिया है। नियमित पेरेटोनियल डायलिसिस कराने वाले सुपेबेड़ा के एक मरीज को इसके लिए फ्लूइड 17 अक्टूबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दिया गया। देवभोग में ही फ्लूइड मिलने से कोरोना संक्रमण के खतरों के बीच अब मरीजों को डायलिसिस के लिए बार-बार रायपुर नहीं आना पड़ेगा। किडनी के मरीजों में कोरोना संक्रमण घातक होता है। स्थानीय स्तर पर फ्लूइड मिलने से मरीजों और उसके परिजनों के रायपुर आने-जाने में लगने वाले समय, श्रम और धन की बचत होगी।
स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव की पहल पर सुपेबेड़ा के किडनी प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और एम्स रायपुर द्वारा पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।इसके तहत डायलिसिस के लिए एम्स द्वारा मरीज और उनके परिजनों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। देवभोग स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों एवं स्टॉफ को भी किडनी रोग के इलाज के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये डायलिसिस वाले मरीजों की नियमित निगरानी कर उनका फालो-अप लेंगे। सुपेबेड़ा में डायलिसिस के लिए जरूरी फ्लूइड की आपूर्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा की जा रही है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि सुपेबेड़ा के मरीजों के पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए दो करोड़ 40 लाख रूपए का बजट स्वीकृत किया गया है। इसके अंतर्गत वहां 100 मरीजों के डायलिसिस का प्रबंध किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम को देखते हुए जरूरत के अनुसार बजट बढ़ाया जाएगा। घर में किए जाने वाले पेरेटोनियल डायलिसिस के दौरान किसी तरह की समस्या आने पर मरीज को तुरंत उपचार के लिए देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया जा सकता है। गंभीर मरीजों को वहां से रायपुर भी रिफर किया जाएगा।
रायपुर / शौर्यपथ / जेल में बंद शराब लुटेरे को छुड़ाने सांसद विजय बघेल के धरना पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की 20 महीने के जनकल्याणकारी कार्यकाल के बाद मुद्दाविहीन हो चुके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक पूर्व मंत्री एवं विधायक ब्रिजमोहन अग्रवाल राज्य में लचर कानून व्यवस्था का आरोप लगाते है। वही दूसरी ओर भाजपा के दुर्ग सांसद विजय बघेल जेल में बंद शराब लुटेरे को छुड़ाने धरना देते है जिसे भाजपा के रायपुर सांसद सुनील सोनी और कांकेर सांसद मोहन मंडावी समर्थन देते है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि भाजपा सांसद नेता कार्यकर्ता अपराधियों के पक्ष में धरना दे रहे हैं।अब तक यूपी बिहार मध्य प्रदेश हरियाणा गुजरात में देखा गया है कि भाजपा के नेता अपराधियों को बचाने के लिए आंदोलन करते हैं धरना देते हैं प्रदर्शन करते हैं पीड़िता को डराते धमकाते हैं वही चरित्र अब छत्तीसगढ़ की जनता को भाजपा सांसद नेताओ में भी देखने को मिल रहा है ।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि पाटन क्षेत्र में हुई शराब दुकान में लूट के मामले में जेल में बंद लुटेरो को माननीय न्यायालय ने जमानत नहीं दिया। भाजपा सांसद विजय बघेल लुटेरों को जमानत नहीं मिलने के बाद धरना देकर न्यायालय के फैसले पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे है न्यायलय के फैसले का विरोध कर रहे है न्यायालय का अवमानना किया है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 9 भाजपा सांसद 9 हाल के हैं कद्रीय मंत्री एवं सांसद रेणुका सिंह जी ने कोरोना संकटकाल में जनता की सेवा कर रहे अधिकारियों को अंधेरी कोठरी में बंद कर पीटने की धमकी दिए थे रायपुर सांसद सुनील सोनी एम्स में इलाज करा रहे एक विशेष वर्ग के युवा के व्यवहार को लेकर झूठे मनगढ़ंत आरोप लगाए थे जिसका एम्स ने खंडन किया था कांकेर के सांसद मोहन मंडावी ने तो हाथरस में हुई रेप की घटना को फेंक करार दिया वहीं भाजपा के दुर्ग सांसद विजय बघेल लुटेरे को बचाने के लिए धरना देते हैं भाजपा सांसदों का रवैया हमेशा से छत्तीसगढ़ विरोधी रहा है भाजपा के सांसद कभी भी मोदी सरकार के किसान विरोधी मजदूर विरोधी कृत्यों का विरोध नहीं किए केंद्र सरकार के द्वारा छत्तीसगढ़ के साथ निरंतर बरत रहे भेदभाव अन्याय पर मौन रहे छत्तीसगढ़ के किसानों मजदूरों युवाओं के हित को लेकर कभी केंद्र सरकार के पास बात नहीं रखें ।अपराधी को बचाने भाजपा सांसदों के धरना से इनका वास्तविक चरित्र को जनता के बीच उजागर हुआ है भाजपा के सांसदों के इस रवैए से भाजपा के अपराधियों के प्रति नरम रवैया भी स्पष्ट हो गया है और भाजपा में इसी कारण अपराधियों का बोलबाला है।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि मोदी करोना महामारी के सामने तो विफल हुए ही, देश की अर्थव्यवस्था का भी बंटाधार कर दिया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जो बहुत सीना चौड़ा करके कोरोना से लड़ने की बात करते थे, वह इस महामारी के सामने तो पूरी तरह से विफल हुए ही हैं, उन्होंने अर्थव्यवस्था का भी बँटाधार कर दिया है।
कोरोनावायरस संक्रमण के मामलों में ना सिर्फ भारत विश्व के दूसरे स्थान पर है पर इसका प्रबंधन विचलित करने वाला है। आज देश में लगभग 74 लाख संक्रमण के मामले हैं और क़रीब 1,12,000 से ऊपर मौतें हो चुकी हैं। मोदी सरकार ने लगातार कोरोना के आंकड़ों को लेकर भ्रमित करने का काम किया है सच तो यह है कि भारत में मृत्यु की दर पडोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों से दुगनी है और श्रीलंका जैसे हमारे पड़ोसी देश के मुकाबले आठ गुना है और इसका हमारी जनसंख्या से कोई लेना देना नहीं है. किस मुँह से यह सरकार effective Corona प्रबंधन की बात करती है?
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि पिछले कुछ दिनों में बड़े ही परेशान करने वाले आर्थिक आंकड़े सामने आए हैं. IMF ने कहा है कि भारत में इस वित्तीय वर्ष में आर्थिक वृद्धि की अनुमानित दर में लगभग 10.3 प्रतिशत संकुचन होगा, जो कि IMF के पहली अनुमानित 4.5 प्रतिशत संकुचन से बहुत अधिक है. IMF के आँकड़ों के मुताबिक़ भारत विश्व की सबसे तेज़ी से गिरने वाली अर्थव्यवस्था होगी।
Change in Real GDP Growth in 2020(IMF)
India -10.3
UK -9.8
France -9.8
S.Africa -8
Germany -6
Brazil -5.8
USA -4.3
Australia -4.2
Russia -4.1
Indonesia -1.5
China +1.9
प्र देश कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि जिस बांग्लादेश को अमित शाह दीमक कहते नहीं थकते थे, उस देश ने आज हमें ही आर्थिक मामलों में पछाड़ दिया है। यह सच है कि बांग्लादेश का Per Capita GDP मतलब प्रति व्यक्ति आय आज भारत से आगे है. इसका मोटा-मोटा मतलब यह है कि एक आम बांग्लादेशी आज एक आम भारतवासी से ज्यादा संपन्न है. बांग्लादेश का Per Capita GDP $1888 है जबकि भारत का $1876 है। मुद्दे की बात तो यह है कि मात्र पाँच साल पहले भारत का यही आँकड़ा बांग्लादेश से लगभग 25 प्रतिशत अधिक होता था।
हैरानी वाली बात तो यह है कि बजाए सारा ध्यान केंद्रित करके अर्थव्यवस्था को संभाला जाए, मोदी सरकार झूठ और भ्रांतियां फैलाने पर तुल गई है और मुद्दे पर पर्दा डालने की विफल कोशिश में उलझी हुई है। सरकारके तमाम प्रवक्ता, पार्टी के शीर्ष नेता, पूरी की पूरी सोशल मीडिया आर्मी और तथाकथित पीएमओ के सूत्र अब यह कह रहे हैं कि Per Capita GDP भले बांग्लादेश का हम से अधिक हो लेकिन Purchasing Power Parity में भारत बांग्लादेश से आगे है। इससे बड़ी विडंबना इससे बड़ी विडंबना दूसरी क्या होगी किस तरह का दुष्प्रचार करके ध्यान बांटा जा रहा है क्योंकि Purchasing Power Parity किसी भी देश की मुद्रा की असली कीमत होती है और वह भी विकसितदेश की मुद्रा जैसे कि यूरो या डॉलर के मुकाबले।
जबकि Per Capita GDP ही वाकई में किसी भी देश के लोगों की समृद्धि उनकी संपन्नता का वास्तविक मानक होता है। Per Capita GDP का मतलब होता है कि कोई भी व्यक्ति अपने ही देश में अपनी मुद्रा से क्या और कितना खरीद सकता है और इससे उस देश में उसकी संपन्नता का अंदाजा लगाया जा सकता है।अब भारत अपने पड़ोसी देशों के मुकाबले चौथे स्थान पर आ गया है आम लोगों की संपन्नता के मामले में शीर्ष स्थान पर श्रीलंका फिर मालदीव, बांग्लादेश और अब चौथे स्थान पर भारत है। पर मोदी सरकार सिर्फ जबानी जमा खर्च दुष्प्रचार व्हाट्सएप के माध्यम से गलत सूचना और इसी तरह के काम करने में मशगूल है जबकि उनका सारा का सारा ध्यान इस समय अर्थव्यवस्था को बचाने और नौकरियां उत्पन्न करने पर होना चाहिए। सच तो यह है कि तथाकथित दीमक ने हर तरफ से ध्यान हटाकर अपना ध्यान अपनी अर्थव्यवस्था पर केंद्रित किया और मोदी सरकार ने सुर्खियां बटोरने, अपने बारे में धारणा बनाने में ही बीता जा रहा है।
एक जमाना था जब बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था हम पर निर्भर थी पर आज जरूरत है कि हम इस छोटे से देश से कुछ महत्वपूर्ण सबक सीखें। कुछ आंकड़े आपके सामने जरूर रखना चाहते हैं बांग्लादेश का बेरोजगारी का दर मात्र 4.5 प्रतिशत है, वह सबसे तेजी से आर्थिक विकास करने वाले 7 देशों में लगातार बना हुआ है, और गौरतलब बात यह है कि बांग्लादेश का जो गारमेंट एक्सपोर्ट है मतलब कपड़े का निर्यात है वह करीब 32 बिलियन डॉलर है जो कि हमारे कपड़े के निर्यात से लगभग चार गुना है। विडंबना यह भी है कि जब अमेरिका और चीन की ट्रेड वॉर चल रही थी तब बांग्लादेश वियतनाम और मेक्सिको जैसे देशों ने उसका बड़ा लाभ उठाया और हमारी सरकार ने अपनी विफलताओं, गलत नीतियों के चलते निर्यात क्षेत्र को कुंठित करके रख दिया, हम उस व्यापार युद्ध का एक तिनका लाभ भी नहीं उठा पाए।
इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सरकार की विफल नीतियां और आर्थिक मंदी से जूझने के लिए कोई व्यापक रणनीति नहीं है। आज भी मोदी सरकार यह नहीं समझ रही है कि हमारी अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से पटरी पर लाने के लिए सबसे पहले उपभोग बढ़ाना पड़ेगा और वह एलटीसी वाउचर से नहीं बढ़ेगा वह बढ़ेगा जब आप गरीबों के हाथ में पैसा रखेंगे। डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के अलावा आज कोई और उपाय सरकार के पास नहीं है लेकिन सरकार यह नहीं कर रही है। आज जरूरत है की मांग बढ़ाई जाए, पर उसको छोड़ कर बाकी सब कुछ करने के लिए तैयार है सरकार। और सबसे जरूरी बात तो यह है की मांग के ना होने के बावजूद आज महंगाई निरंतर बढ़ती जा रही है।
अभी ध्वस्त अर्थव्यवस्था से लोग जूझ ही रहे थे कि अब महंगाई भी लोगों की कमर तोड़ रही है। सितंबर महीने का रिटेल इन्फ्लेशन 7.43 प्रतिशत पर RBI के टारगेट से तो बहुत ऊंचा है ही पर दिक्कत की बात यह है कि यह बढ़त खाने की सामग्री के दामों में जबरदस्त उछाल के कारण आई है। सब्जियों के दाम में लगभग 21 प्रतिशत उछाल हुई है और दाल के दाम लगभग 15 प्रतिशत महंगे हुए हैं। इसके बारे में सरकार की कौन सी नीति है और जो सरकार बिचौलियों को खत्म करने की बात करती है, वह हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी है क्योंकि लोगों ने ना सिर्फ नौकरी खोई ही हैं, ना सिर्फ उनका वेतन काम हुआ है पर अब दैनिक जीवन की चीजें भी महंगी होती जा रही हैं, पर मोदी सरकार की सेहत पर इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा के निर्देशानुसार एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी व नोडल अधिकारी श्रीमती तनुजा सलाम के मार्गदर्शन में कार्ययोजना बनाकर 5 से 14 अक्टूबर 2020 तक कोरोना सघन सामुदायिक सर्वे अभियान चलाया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि अभियान के अंतर्गत 3 लाख 35 हजार 630 घरों में सर्वे किया गया। जिसमें 11 हजार 389 कोरोना के लक्षणात्मक व्यक्तियों की पहचान कर सैम्पल लिया गया। कोरोना संक्रमण के लक्षणात्मक व्यक्तियों के पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर उन्हें आवश्यकतानुसार होम आइसोलेशन, हॉस्पिटल एडमिशन या कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान मैदानी स्तर के कार्यकर्ता, एएनएम, मितानीन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आरएचओ, पंचायत विभाग के कर्मचारी, सुपरवाईजर, नगर निगम के कर्मचारी की टीम द्वारा घर-घर सर्वे किया गया। सर्वे में कोरोना लक्षण वाले 11 हजार 389 व्यक्तियों को चिन्हांकित किया गया। जिसमें 1406 व्यक्ति उच्च जोखिम की श्रेणी में थे। जिन्हें कोई अन्य बीमारी थी एवं 60 वर्ष से अधिक उम्र के थे। लक्षण सहित एवं उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों का प्राथमिकता क्रम में सैम्पल लिया गया। जिसमें 839 व्यक्ति एंटीजन टेस्ट में पॉजिटिव पाए गये। ऐसे लक्षण वाले व्यक्ति जिनका एंटीजन टेस्ट नेगेटिव था, उनमें से 3861 लोगों का आरटीपीसीआर ट्रूनाट सैम्पल लिया गया।
डॉ. चौधरी ने बताया कि मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. प्रियंका शुक्ला ने भी अभियान के दौरान सर्वें कार्यों का निरीक्षण कर आवश्यक सुझाव दिए। साथ ही प्रति सप्ताह बुधवार एवं गुरूवार को सर्वे अभियान लगातार जारी रहेगा। जिससे कोरोना श्रृंखला को तोड़ी जा सकेगी। उन्होंने जिले के नागरिकों से सर्दी, खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ, स्वाद व सूंघने की क्षमता में कमी आदि लक्षण आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में 24 घंटे के भीतर जांच कराने की अपील की है। जिससे कोरोना से स्वयं का बचाव एवं परिवार तथा साथियों का बचाव संभव है।
वर्तमान समय में मास्क ही वैक्सीन है। जब भी घर से निकले तो मास्क पहनकर ही निकलें। कोरोना सघन सामुदायिक सर्वे अभियान के लिए नगर निगम आयुक्त चंद्रकांत कौशिक, डिप्टी कलेक्टर लवकेश धु्रव, सहायक नोडल अधिकारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक गिरीश कुर्रे, शहरी कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री अनामिका विश्वास, जिला डाटा प्रबंधक अखिलेश चोपड़ा, मितानीन, समन्वय आदि को विशेष जिम्मेदारी दी गई थी।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के महानिरीक्षक पंजीयन अधीक्षक एवं अधीक्षक मुद्रांक ने बताया है कि हाल ही में विभिन्न पंजीयन कार्यालयों में पंजीयन होने वाले दस्तावेजों की संख्या अधिक होने के कारण अपॉइंटमेंट प्राप्त होने में कठिनाई होने बाबत सूचना प्राप्त हुई है। विगत माह रायपुर पंजीयन कार्यालय में कुछ स्टाफ के कोविड-19 से संक्रमित होने के कारण पंजीयन कार्य बाधित हुआ था तथा नवरात्री के त्यौहार होने के कारण पंजीयन योग्य दस्तावेजों की संख्या अधिक होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। यह भी पाया जाता है कि कुछ लोगों द्वारा एक ही दस्तावेज के लिए एक से अधिक बार अपॉइंटमेंट प्राप्त कर लिया जाता है। इस कारण से भी आम लोगों को अपॉइंटमेंट प्राप्त करने में असुविधा हुई है। इस समस्या के निराकरण हेतु ई-पंजीयन सिस्टम में सुधार कर ई-पंजीयन अपॉइंटमेंट की नई व्यवस्था की गई है।
ई-पंजीयन की नई व्यवस्था के अनुसार अब विक्रय पत्र मामले में अपॉइंटमेंट केवल प्रतिफल मूल्य के 5 प्रतिशत से अधिक मूल्य के ई-स्टेम्प के आधार पर ही दिया जाएगा। यदि पूर्व से ही किसी पक्षकार द्वारा प्रतिफल राशि के 5 प्रतिशत से कम मूल्य के ई-स्टेम्प के आधार पर अपॉइंटमेंट प्राप्त किया है, उन्हें 24 घंटा का समय देते हुए सूची भेजी जाएगी कि वे सही मूल्य के आधार पर अपॉइंटमेंट प्राप्त करें। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उनका अपॉइंटमेंट निरस्त करते हुए अन्य लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। यह भी व्यवस्था की गई है कि एक ही दस्तावेजों के लिए एक से अधिक अपॉइंटमेंट नहीं लिया जा सके इसके लिए यह व्यवस्था की गई है कि सिस्टम इस बात के लिए भी जांच करेगा कि लिए जा रहे अपॉइंटमेंट में उपयोग किए गए ई-स्टेम्प के द्वारा पूर्व में भी तो अपॉइंटमेंट तो प्राप्त नहीं किया गया है। यदि उसी ई-स्टेम्प में पहले भी अपॉइंटमेंट लिया जा चुका है, तो उन्हें अपॉइंटमेंट प्रदान नहीं किया जा सकेगा।
यदि अपॉइंटमेंट प्राप्त होने के कारण कोई पक्षकार अपना दस्तावेज पंजीयन हेतु निर्धारित तिथि और समय में प्रस्तुत करने में असफल रहता है, तो उसी दस्तावेज को पंजीयन हेतु अपॉइंटमेंट 15 दिवस पश्चात प्राप्त हो सकेगा। पक्षकार आसानी से अपॉइंटमेंट प्राप्त कर सके इसलिए आगामी 15 दिवस के लिए ऐसी व्यवस्था अपॉइंटमेंट पोर्टल में किया गया है। अपॉइंटमेंट प्राप्त करने के लिए पोर्टल प्रतिदिन सुबह 8 बजे से खुलेगा और यह तब तक जारी रहेगा जब तक आगामी 15 दिवस का अपॉइंटमेंट पूरा बुक न हो जाए।
राजधानी रायपुर में पंजीयन कार्यालय में दस्तावेजों की अधिकता होने के कारण यहां पांचवा उपपंजीयक कार्यालय खोलने की स्वीकृति दी गई है। इस अतिरिक्त पंजीयन कार्यालय में रायपुर एसआर5 के नाम से पंजीयन किया जा सकेगा। पक्षकार इसके लिए आगामी सोमवार 19 अक्टूबर 2020 अपॉइंटमेंट प्राप्त कर सकेंगे। अपॉइंटमेंट प्राप्त होने में किसी प्रकार की कठिनाई होने पर विभागीय हेल्पलाइन नंबर 07714912523,18002332488 में सम्पर्क किया जा सकता है। पंजीयन हेतु पंजीयन कार्यालय में उपस्थित होने वाले सभी पक्षकारों से अनुरोध किया गया है कि कोविड-19 की रोकथाम के लिए शासन द्वारा जारी गाइन-लाइन का पालन करें। पंजीयन कार्यालय में भौतिक दूरी बनाए रखने, मास्क लगाने, सेनेटाईजर इस्तेमाल करने बाबत दिए गए निर्देशों का पालन आवश्य किया जाए।
दुर्ग / शौर्यपथ / गृह एवं लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू 18 अक्टूबर रविवार को दुर्ग जिले के दुर्ग विकासखण्ड के विभिन्न गांवों का दौरा कर स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मंत्री साहू सबेरे 10.30 बजे रायपुर से कार से प्रस्थान करेंगे और दोपहर 12 बजे ग्राम उमरपोटी, 12.45 बजे ग्राम पुरई, 1.30 बजे ग्राम खम्हरिया, 2.15 बजे ग्राम धनोरा, 3 बजे ग्राम हनोदा, 4 बजे ग्राम कोडि़या, 4.45 बजे ग्राम भानपुरी और 5.30 बजे ग्राम कोकड़ी में आयोजित स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। वे शाम 6 बजे कोकड़ी से प्रस्थान कर वापस रायपुर आएंगे।
भिलाई / शौर्यपथ / कोविड-19 महामारी के मद्देनजर उत्पादन में प्रतिबंधों और रूकावटों के बावजूद, सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र ने वर्तमान वित्तवर्ष-2020-21 के अपै्रल से सितम्बर की अवधि के दौरान उत्पादन के विभिन्न क्षेत्रों में रिकाॅर्ड निष्पादन दर्ज किया है। साथ ही बीएसपी ने प्रथम तिमाही अपै्रल से जून की अवधि के मुकाबले दूसरे तिमाही जुलाई से सितम्बर की अवधि में उत्पादन में बेहतर वृद्धि दर्ज करने में सफलता प्राप्त किया है। विदित हो कि मार्च से जून-2020 के दौरान स्टील की माँग गिरने के पश्चात् फिर बढ़ोतरी की ओर है। सेल-बीएसपी बढ़ी हुई माँग का फायदा उठाने और प्रथम तिमाही मंें निष्पादन में कमी की भरपाई करने हेतु वर्तमान वित्तवर्ष की शेष अवधि में उत्पादन को अधिकतम करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसा करते हुए संयत्र प्रबंधन सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है तथा कार्य स्थलों में सैनिटाइजेशन, लोगों को फेस मास्क पहनने के लिए संवेदनशील बनाना और सोशल डिस्टेंसिंग आदि को बनाए रखने पर जोर दे रही है ताकि कोविड-19 के खतरे से बचाव हो सके।
सेल-बीएसपी द्वारा निष्पादन गति में निरंतर श्रेष्ठ वृद्धि की कड़ी में जहाँ ब्लास्ट फर्नेस-8 ने प्रथम तिमाही अवधि के दौरान 11,84,660 टन हाॅट मेटल का सर्वश्रेष्ठ संचयी उत्पादन किया, वहीं सभी ब्लास्ट फर्नेसों ने संयुक्त रूप से प्रथम तिमाही के मुकाबले में द्वितीय तिमाही में कुल हाॅट मेटल के उत्पादन में 48.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
जहाँ संयंत्र के एसएमएस-3 ने प्रथम तिमाही की अवधि में 8,87,128 टन सर्वाधिक कास्ट स्टील उत्पादन का कीर्तिमान रचा, वहीं दोनों स्टील मेल्टिंग शाॅप्स, एसएमएस-2 एवं एसएमएस-3 ने प्रथम तिमाही की तुलना में द्वितीय तिमाही में कुल क्रूड स्टील उत्पादन में 47.3 प्रतिशत की बढ़त हासिल की। जिसमें प्रथम तिमाही की तुलना में द्वितीय तिमाही में एसएमएस-2 से 64 प्रतिशत और एसएमएस-3 से 33.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल है।
संयंत्र ने यूनिवर्सल रेल मिल और रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल दोनों से वित्तवर्ष 2019-20 के प्रथम छमाही (अपै्रल से सितम्बर) के 5,89,391 टन पिछले सर्वश्रेष्ठ के मुकाबले वर्तमान वित्तवर्ष 2020-21 के प्रथम छमाही में 5,94,983 टन प्राइम रेल्स का सर्वाधिक उत्पादन किया है। जबकि यूआरएम ने 2019-20 के प्रथम छमाही अवधि में 2,38,842 टन के पिछले सर्वश्रेष्ठ के मुकाबले वर्तमान वित्तवर्ष 2020-21 की इसी अवधि में 2,95,228 टन प्राइम रेल्स का सबसे अधिक उत्पादन दर्ज किया। यूआरएम और आरएसएम दोनांे ने संयुक्त रूप से प्रथम तिमाही की तुलना में द्वितीय तिमाही में यूटीएस 90 प्राइम रेल्स के कुल उत्पादन में 25.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। जिसमें प्रथम तिमाही की तुलना मंें द्वितीय तिमाही में आरएसएम से 11.4 प्रतिशत और यूआरएम से 37 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है।
संयंत्र के बार एवं रॉड मिल ने वर्तमान वित्तवर्ष के दौरान सेल सिक्योर टीएमटी उत्पादों के नए ग्रेड को विभिन्न मापदंडों में रोलिंग किया है। वर्ष 2019-20 के प्रथम छमाही में 40,503 टन की तुलना में वर्तमान वित्तवर्ष के प्रथम छमाही में 1,25,176 टन उच्चतम उत्पादन दर्ज किया है।
संयंत्र की अन्य फिनिशिंग मिल्स में, मर्चेंट मिल को प्रथम तिमाही के अपै्रल महीने में प्रचालित नहीं किया गया और वायर रॉड मिल को मई और जून-2020 में प्रचालित नहीं किया गया। मर्चेन्ट मिल ने प्रथम तिमाही की तुलना में द्वितीय तिमाही में 246.7 प्रतिशत का उत्पादन वृद्धि दर्ज किया। जबकि वायर राॅड मिल ने 140.3 प्रतिशत उत्पादन वृद्धि दर्ज की। दूसरी ओर प्लेट मिल जो प्रथम तिमाही के तीनों महीनों के दौरान प्रचालन से बाहर रही, प्रथम छमाही अवधि में 2,17,000 टन का उत्पादन किया।
संयंत्र ने वर्तमान वित्तवर्ष के प्रथम तिमाही के मुकाबले कुल फिनिश्ड इस्पात और विक्रेय योग्य इस्पात उत्पादन में क्रमशः 102.7 प्रतिशत और 58.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
राज्य के 97.80 प्रतिशत प्रवासी श्रमिकों को मिला राशन
शत-प्रतिशत श्रमिकों को मिली क्वारंटाइन सुविधा
श्रमिक परिवारों को एलपीजी कनेक्शन, नगद सहायता, कृषि ऋण,
मनरेगा में रोजगार सहित मिली कई सुविधाएं
रायपुर / शौर्यपथ / लॉकडाउन के दौरान लौटे प्रवासी श्रमिकों को सुविधाएं देने के मामले में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल राज्य रहा है। यह निष्कर्ष इंटरफेरेंशियल सर्वे स्टेटिक्स एण्ड रिसर्च फाउंडेशन (आईएसएसआरएफ) द्वारा किए गए सर्वे में सामने आया है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर राज्य में प्रवासी श्रमिकों को विभिन्न प्रकार की सुविधा देने के लिए तेजी से कदम उठाए और अनेक श्रमिक हितैषी निर्णय लिए गए।
इंटरफेरेंशियल सर्वे स्टेटिक्स एण्ड रिसर्च फाउंडेशन ने देश के छह प्रमुख प्रवासी श्रमिकों की वापसी वाले राज्यों छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सर्वे किया। जो लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों को उपलब्ध कराई गई आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न बुनियादी सुविधाओं पर केन्द्रित रहा।
छत्तीसगढ़ में लौटे शत-प्रतिशत प्रवासी श्रमिकों को क्वारेंटाईन की सुविधा उपलब्ध कराई गई, 97.80 प्रतिशत प्रवासी श्रमिकों को पात्रतानुसार निःशुल्क और रियायती दरों पर राशन दिया गया, इसी तरह श्रमिक परिवारों को एलपीजी कनेक्शन, नगद सहायता, कृषि और मनरेगा में रोजगार और कृषि ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। छत्तीसगढ़ श्रमिकों को निःशुल्क एलपीजी कनेक्शन देने के मामले में सर्वेक्षित राज्यों में पहले स्थान पर है।
यह सर्वे बिलासपुर, दंतेवाड़ा, जशपुर, महासमुंद और राजनांदगांव की 99 ग्राम पंचायतों में किया गया। जिसमें पांच सौ से अधिक प्रवासी श्रमिकों को शामिल किया गया है। छत्तीसगढ़ में किए गए सर्वे में बिलासपुर जिले की 28, दंतेवाड़ा की 15, जशपुर की 20, महासमुंद की 19 और राजनांदगांव की 17 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन ग्राम पंचायतों में 30 जून से 28 जुलाई के बीच सर्वेक्षण किया गया।
सर्वे के अनुसार छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। पहली श्रेणी में गैर कृषि कार्य में संलग्न श्रमिक, जो 52.98 प्रतिशत स्किल्ड हैं और दूसरी श्रेणी में आयरन और वेल्डिंग, फेब्रीकेशन कार्यों में 40.43 प्रतिशत स्किल्ड हैं। कुशल श्रमिकों में छत्तीसगढ़ का योगदान एक तिहाई है। छत्तीसगढ़ से 63.94 प्रतिशत श्रमिक कंस्ट्रक्शन, पाइंप कटिंग वर्क में स्किल्ड हैं।
आईएसएसआरएफ द्वारा ‘ऑन माइग्रेन वर्कस‘ विषय पर किए गए सर्वे में शहरों से गांव में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों पर लॉकडाउन के दौरान उनकी आजीविका और उनकी स्थित पर पड़ने वाले प्रभावों का छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के 34 जिलों में अध्ययन किया गया।
दुर्ग / शौर्यपथ / सड़क दुर्घटना में क्षतिग्रस्त वाहन का बीमा दावा भुगतान करने से बीमा कंपनी ने इंकार कर दिया, इसे सेवा में निम्नता पाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर 2 लाख 31 हजार रुपये हर्जाना लगाया।
ग्राहक की शिकायत
टाटीबंध रायपुर निवासी रमाकांत यादव का ट्रक सड़क दुर्घटना में दिनांक 11 जनवरी 2018 क्षतिग्रस्त हो गया। जिसकी पुलिस में सूचना देने के बाद वाहन को रिपेयर करवाया गया एवं वाहन में आए खर्च संबंधी बिल व रसीदों को बीमा कंपनी में जमा कर क्लेम फॉर्म जमा कराया गया लेकिन बीमा कंपनी ने दावा राशि का भुगतान नहीं किया।
बीमा कंपनी जवाब
बीमा कंपनी ने फोरम के समक्ष उपस्थित होकर कहा कि परिवादी ने अपने वाहन को दुर्घटना दिनांक से काफी पहले रामेश्वर यादव नामक व्यक्ति को विक्रय कर कागजात सौंप दिए थे। परिवादी घटना दिनांक को क्षतिग्रस्त वाहन का ना तो स्वामी था, ना ही कब्जाधारी था। परिवादी ने वाहन का बीमा कराते समय इस तथ्य को छुपाया और वाहन के विक्रय की लिखित सूचना आरटीओ कार्यालय और बीमा कंपनी नहीं दी। घटना दिनांक को परिवादी का वाहन में बीमा हित नहीं होने के कारण उसे बीमा दावा राशि का भुगतान नहीं किया गया है। परिवादी के प्रति किसी प्रकार से सेवा में कोई कमी नहीं की गई है।
फोरम का फैसला
प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं प्रमाणों के आधार पर जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने उपभोक्ता के प्रति बीमा कंपनी द्वारा सेवा में निम्नता का कृत्य किया जाना प्रमाणित पाया। आयोग ने विचारण के दौरान यह अभिनिर्धारित किया कि जिस व्यक्ति के नाम पर वाहन पंजीकृत है उसे ही मोटर व्हीकल एक्ट के प्रयोजनों के लिए वाहन का मालिक माना जाता है और पंजीकृत स्वामी के नाम पर ही बीमा करके बीमा पॉलिसी जारी की गई है इस कारण बीमा अवधि में हुई दुर्घटना से क्षति के परिणाम स्वरुप उत्पन्न दावे के लिए बीमा कंपनी उत्तरदायी है। बीमा कंपनी अपने दायित्व से बच नहीं सकती। परिवादी पंजीकृत वाहन स्वामी होने के साथ-साथ बीमा पालिसीधारक है, इसलिए वाहन में उसका बीमा हित विद्यमान है और वह बीमा दावा प्राप्त करने का अधिकारी है।
हर्जाना राशि
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने संयुक्त रूप से फैसला सुनाते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर 2 लाख 31 हजार रुपये हर्जाना लगाया, जिसके तहत बीमा दावा राशि 210000 रुपये, मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति स्वरूप 20000 रुपये तथा वाद व्यय के रुप में 1000 रुपये देना होगा एवं दावा राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
