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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
राजशेखर नायर
ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे पर हाथों की धुलाई और रंगोली बनाकर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से ज़िले में दिया गया स्वच्छ जीवनशैली का संदेश । कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी और अन्य संक्रमण से बचने के लिये नियमित रुप से व्यक्ति को स्वास्थ्य की छोटी-छोटी बातों को ध्यान रखने के उद्देश्य से हाथों की धुलाई के वीडियो किल्प बनाकर हितग्राहियों और नौनिहालो को स्वच्छ जीवनशैली और संक्रमक बीमारियों से बचाने के बारे में बताया गया है।
पर्यवेक्षक रीता चौधरी ने बताया हितग्राहियों और नौनिहालो को स्वच्छ जीवनशैली के प्रति हाथों की साफ-सफाई और पोषण पर जागरूक करना आवश्यक है। हाथों को धोने से कई तरह के संक्रामक बीमारियों से बच सकते हैं। बच्चों को हैंड वॉशिंग की आदत कम उम्र से शुरू कर देना चाहिए, ताकि वह संक्रमण से बचे रहें। हाथों की साफ-सफाई की शुरुआत घर से ही करनी चाहिए। जब घर के बड़े लोग स्वच्छता की आदतों की शुरुआत करते हैं, तो बच्चे भी इसका अनुसरण करते हैं।
भारतीय संस्कृति में विशेष रूप से हाथ से ही खाना खाने की संस्कृति है इसलियें खाना खाने से पहले ओर शौच के बाद उचित ढंग से हाथ की सफाई अति आवश्यक है । कोविड-19 के सक्रमंण काल में डिजिटल माध्यमों का उपयोग ज़्यादा किया जा रहा है ।
सेक्टर गुढ़ियारी के अंतर्गत समस्त केंद्रों में विश्व हाथ धुलाई दिवस मनाया गया जिसमें 20 सेकेंड तक हाथ धोकर समस्त हितग्राही तक जानकारी वीडियो किल्प से पहुंचाया गया । किशोरी बालिका मितानिन कार्यकर्ता एवं सहायिका कार्यक्रम में सम्मिलित हुई । विश्व हाथ धुलाई दिवस के संदेश को डिजिटल माध्यम से व्हाट्सएप द्वारा कार्यकर्ताओं ने हितग्राहियों तक मैसेज कर के दिया । वैश्विक कोरोना संक्रमण काल में शारीरिक दूरी रखते हुए कार्यक्रम को संपादित किया है साथ ही हाथ धुलाई में भी इसका विशेष ध्यान दिया गया ।आंगनबाड़ी केंद्र ज्योतिबा नगरगुढ़ियारी सेक्टर की समस्त कार्यकर्ताओं ने बहुत ही उत्साह से हैंडवाशिंग डे मनाया ज्योतिबा नगर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लक्ष्मी तिवारी जी ने किशोरी बालिकाओं से बहुत सुंदर रंगोली बनाकर स्वच्छ जीवनशैली का संदेश भी दिया गया है ।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक कुमार पांडेय ने बतायावैश्विक महामारीकोविड-19 से बचाव में साफ सफाईमहत्वपूर्णहिस्सा है, इसलिए जिले की समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ग्लोबल हैंडवाशिंग दिवस मनाया गया ।आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ग्लोबल हैंड वाशिंग डे पर शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए विडियो क्लिप के माध्यम से हाथ धुलाई के साथ साथ स्वच्छता कासंदेश भी दिया ।
हाथ न धोने से होने वाली बीमारियाँ
दस्त, श्वसन संक्रमण, टाइफाइड, निमोनिया, पेट संबंधी रोग, पीलिया, आँख की बीमारी,हैजा,त्वचा संबंधी रोग हो सकते है ।
हाथ धोना कब-कब जरूरी
शौच के बाद,खाना बनाने और खाने से पहले, साफ-सफाई करने के बाद, पालतू जानवरों और खेलने के बाद, किसी बीमार व्यक्ति से मिलकर आने के बाद।छींक,खांसी, बागवानी के बाद हाथ जरुर धोना चाहिये।
Rajshekhar Nair
प्रदेश में 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक रक्तदान पखवाड़ा मनाया गया। इसके अंतर्गत रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
यहाँ ओम साईं रक्तदाता सेवार्थ समिति की ओर से रवि साहू की स्मृति में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।शिविर में महिलाओं द्वारा भी बढ चढकर रक्तदान किया गया। समिति के अध्यक्ष किरण साहू ने कहा रक्तदान का उद्देश्य जरुरतमंद मरीजों की सहायता करना एवं रक्तदान करने के प्रति लोगों को जागरूक करना है। रक्तदान करना महान कार्य है, इसे नियमित अंतराल पर करना चाहिए क्योंकि ब्लड का किसी भी प्रकार से उत्पादन नहीं किया जा सकता और नही इसका कोई विकल्प है।
सिविल सर्जन डॉ.आर.के.तिवारी, ने बताया की ज़िले में चल रहे रक्तदान पखवाडे में दानदाताओं को रक्तदान उपरांत रक्तदाता को सर्टिफिकेट, उपहार स्वरुप मास्क एवं ग्लब्स प्रदान किये गए । रक्तदान पखवाड़ा में दो गज दूरी, मास्क एवं सैनीटाइज़ेशन पर विशेष व्यवस्था बनाए रखते हुए रक्तदान का कार्य किया गया । इस दौरान शिविर में 17 लोगों ने रक्तदान किया ।
रक्तदान करने पंहुची दीक्षा चौबे ने बताया वह पहले भी रक्तदान कर चुकी है । रक्तदान कर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। ``रक्तदान में आप सभी भाग लेकर रक्तदान कर सकते है। रक्तदान के प्रति फैली भ्रांतियों को भी युवा साथियों के बीच दूर करना और रक्तदान के प्रति अधिक से अधिक लोगों को जागरुक करने आगे आना चाहिए । एक स्वस्थ व्यक्ति 18 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक रक्तदान कर सकता है तो फिर हम युवा क्यों पीछे रहें । एक व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान कई जरूरतमंद लोगों को मदद करता है,’’ दीक्षा ने बताया ।
रक्तदान के है कई फायदे
रक्तदान से हार्ट अटैक की संभावनाएं कम होती हैं। आयरन की मात्रा को बैलेंस करने से लिवर हेल्दी बनता है और कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है। रक्तदान का एक फायदा यह भी है कि रक्तदान करते समय 7 तरह के टेस्ट किए जाते हैं।अगर किसी व्यक्ति को कोई बीमारी है तो उसका भी पता चल जाता है।
कौन कर सकता है रक्तदान
रक्तदान करने के लिए रक्तदाता की उम्र 18 से 66 साल के बीच होनी चाहिए जिसका वजन 45 किलोग्राम से अधिक हो। शारीरिक रूप से सेहतमंद होना भी जरूरी है। खून में हीमोग्लोबिन का स्तर 12.5 जी/डीएल या इससे ऊपर होनी चाहिए। रक्तदान करने के 24 घंटे पहले शराब, धूम्रपान और तम्बाकू का सेवन नही किया गया हो। रक्तदान करने वाले व्यक्ति को ब्लड प्रेशर, कैंसर, एड्स जैसी बीमारी नही होनी चाहिए। एक सेहतमंद व्यक्ति हर 3 महीने में रक्तदान कर सकता है।
रक्तदान शिविर में जिला अस्पताल रायपुर के डॉ आर.के सक्सेना,डॉ पी. के गुप्ता(आर.एम.ओ),डॉ एस. के भंडारी, डॉ अनुरीता सिंह, डॉ पी.महिश्वर पैथोलॉजिस्ट ,डॉ.एम.वानखेड़े, डॉ.एस.साहू, डॉ.एन.के.ओझा कंसलटेंट, स्टाफ नर्स श्रीमति पार्वती साहू, प्रार्थना छत्रे, दीप्ती ठाकुर, लैब टेक्नोलॉजिस्ट रिंकू सिंह,श्रीकांत सोनी उपस्थित रहे शिविर का आयोजन एम.वासुदेव राव, सुनील भारद्वाज,एम आशीष कुमार, के सौजन्य से हुआ जिसमें कार्यकारिणी सदस्य छाया सिंह का रक्तदान शिविर को सफल बनाने में विशेष योगदान रहा ।
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मनोरंजन / शौर्यपथ /बॉलीवुड एक्टर अली फजल ने टैलेंट के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी खास बनाई है। अपनी एक्टिंग से उन्होंने लोगों के दिलों को जीत लिया है। अली ने बॉलीवुड के अलावा कई हॉलीवुड फिल्मों में काम किया है, लेकिन वेब सीरीज मिर्जापुर में गुड्डू पंडित के किरदार से अली को जबरदस्त पॉप्युलैरिटी मिली। आज यानी 15 अक्टूबर को अली फजल अपना 34वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं। इस खास मौके पर उनके करियर के कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में जानते हैं।
अजी फजल ने आमिर खान की फिल्म पीके से बॉलीवुड डेब्यू किया था। फिल्म में उन्होंने जॉय लोबो का रोल निभाया। हालांकि यह काफी छोटा रोल था। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, लेकिन कुछ खास पहचान नहीं मिली। साल 2013 में वह फिल्म फुकरे में नजर आए, जो बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुई। वेब सीरीज मिर्जापुर में उनके काम को इतना पसंद किया गया कि फैन्स अब उन्हें गुड्डू पंडित के नाम से ही बुलाते हैं।
हॉलीवुड में दिखाया अपना हुनर
अली का हॉलीवुड करियर साल 2015 में फिल्म फास्ट एंड फ्यूरियस 7 से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कैमियो किया था। इसके बाद 2017 में आई फिल्म विक्टोरिया एंड अब्दुल के जरिए अली को जूडी डेंच जैसी दिगग्ज एक्ट्रेस के साथ पैरेलल लीड रोल निभाने का मौका मिला था। इसमें उनके काम को बहुत पसंद किया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में अली फजल के हाथ एक और हॉलीवुड प्रोजेक्ट लगा है। अली वॉर फिल्म में लीड रोल निभाने वाले हैं, जिसका नाम फिलहाल कोडनेम- जॉनी वॉकर रखा गया है। वह जल्द ही इस फिल्म की शूटिंग लॉस एंजेलिस में शुरू करेंगे। वहीं, दूसरी तरफ वह अपनी हॉलीवुड फिल्म डेथ ऑफ नाइल की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं।
मनोरंजन / शौर्यपथ /अक्षय कुमार का इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें अक्षय कुमार अपने पति के रूप में सबसे खराब आदत के बारे में बात कर रहे हैं। अक्षय कॉफी विद करण शो में कहते हैं कि शूट से घर लौटने के बाद उनकी सबसे खराब आदत मैच देखना है। उन्होंने कहा, "जब मैं 6.30 बजे अपने काम के बाद घर लौटता हूं। मैं पायजामा पहनने के बाद कोई स्पोर्ट्स देखता हूं।"
यहां तक कि अक्षय को स्पोर्ट्स देखना इतना पसंद है कि वह ट्विंकल की बुक लॉन्च के दौरान भी इससे दूर नहीं रह सके। उन्होंने आगे कहा, "मुझे अब भी याद है कि जब आप लोग बुक लॉन्च के लिए आए थे। मुझे क्रिकेट और स्पोर्ट्स देखना बहुत पसंद है। जब वह बात कर रही थी, तो मैंने स्कोर पर एक नजर डाली और उसे पता था कि मैं स्कोर देख रहा हूं। यह मेरी सबसे बुरी आदत है।"
वर्कफ्रंट की बात करें तो अक्षय कुमार की कॉमेडी हॉरर फिल्म 'लक्ष्मी बॉम्ब' जल्द ही रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में अक्षय ट्रांसजेंडर का रोल अदा कर रहे हैं। अक्षय कुमार के अलावा कियारा आडवाणी भी लीड भूमिका में हैं। फिल्म डिजनी प्लस हॉटस्टार पर 9 नवंबर को रिलीज होने वाली है। इसके अलावा यह इंटरनेशनल मार्केट ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूएई के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
अक्षय ने इसके अलावा अपनी अपकमिंग जासूसी थ्रिलर 'बेलबॉटम' की शूटिंग पूरी की है। कहा जाता है कि फिल्म कोविड -19 महामारी के दौरान स्टार्ट-टू-फिनिश शेड्यूल को पूरा करने वाली दुनिया की पहली फिल्म है।
दुर्ग / शौर्यपथ / होम आइसोलेशन का दुर्ग माडल बेहद कारगर साबित हुआ है। मरीजों की अंडरटेकिंग लेने के बाद और डॉक्टरों की अनुमति के पश्चात कम लक्षणों वाले जिन मरीजों को होम आइसोलेशन की अनुमति दी गई थी, उनमें से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं और उन्हें रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया जा चुका है। अभी तक 7329 मरीजों को होम आइसोलेशन की स्वीकृति दी गई। इसमें अब तक 6216 पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। अभी 829 एक्टिव पेशेंट होम आइसोलेशन में हैं। मरीजों के स्वस्थ होते जाने से रिकवरी रेट तेजी से बढ़ रहा है और अभी 84 प्रतिशत तक पहुंच गया है। एक्टिव मरीजों की समयावधि पूरी होने पर रिकवरी रेट भी बढ़ती जाएगी। होम आइसोलेशन कंट्रोल सेंटर के माध्यम से मरीजों को दवा की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाती हैं और इनके स्वास्थ्य पर नजर भी रखी जाती है। होम आइसोलेशन कंट्रोल सेंटर में प्रशासकीय व्यवस्था डिप्टी कलेक्टर सुश्री दिव्या वैष्णव देखती हैं। मरीजों के स्वास्थ्य की मानिटरिंग सीएमएचओ डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर नियमित रूप से करते हैं। मरीजों की स्थिति पर डाक्टरों की टीम लगातार नजर रखती है। स्वास्थ्य में किसी तरह की दिक्कत होने पर मेडिकल कंसलटेंट डॉ. रश्मि भुरे की मानिटरिंग में मेडिकल टीम रिफर किये जाने अथवा ट्रीटमेंट में बदलाव किये जाने का निर्णय लेती हैं। रिफर किये जाने का निर्णय लिये जाने पर अतिशीघ्र मरीज को कोविड हॉस्पिटल पहुंचाया जाता है।
जामुल की बिटावन बाई जो सलाह से अस्पताल जाने तैयार हुईं- जामुल की बिटावन बाई पाजिटिव आईं और शुरू में उनके लक्षण एकदम सामान्य होने पर उनके होम आइसोलेशन को स्वीकृति दी गई। अचानक आक्सीजन लेवल के डाउन होने पर परिजनों को चिंता हुई। बिटावन बाई अस्पताल जाने को तैयार नहीं थीं लेकिन कंट्रोल रूम के स्टाफ के नियमित काल किये जाने की वजह से उनके अच्छे संबंध बन गए थे। उन्होंने बिटावन बाई को समझाया कि देखो आप जल्दी आ जाओगे, हमारे सहयोगी सब अस्पताल में भी हैं आपका पूरा ध्यान रखेंगे। यह सारी बातें छत्तीसगढ़ी में की गईं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में तो पइसा लगहि। कंट्रोल रूम ने बताया कि सरकार फोकट म इलाज कराहि अउ बढिय़ा स्वस्थ करके घर भेजहि। वे अस्पताल जाने तैयार हो गईं। अब वे वहां से डिस्चार्ज हो गई हैं।
बिलासपुर / शौर्यपथ / मरवाही विधानसभा क्षेत्र में कुल 237 मतदान केन्द्र है, और मतदाताओं की संख्या एक लाख 90 हजार 254 के लगभग है। जिसमें से महिलाओं मतदाताओं की संख्या 96 हजार और पुरूष मतदाता 93 हजार के लगभग है। इन मतदाताओं को संभालने के लिए कांग्रेस ने अपने 48 विधायकों को सैक्टरवाईज़ जिम्मेदारी दी है। चार मंत्रियों को ही उतार दिया है। छत्तीसगढ़ एक ऐास प्रदेश है जिसने दो बरा उपचुनाव में मुख्यमंत्री को चुनाव लड़ते देखा। पहली बार विभाजित मध्यप्रदेश के वक्त अर्जुन सिंह ने खरसियां जिला रायगढ़ से चुनाव लड़ा और दुसरी बार छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 2001 में अजीत जोगी ने मरवाही विधानसभा से उपचुनाव लड़ा।
दोनो चुनाव के बीच लंबा अंतराल था, और दो बड़े अंतर थे अर्जुन सिंह के चुनाव में कांग्रेस के विधायक लक्ष्मी पटेल ने इस्तिफा देकर सीट खाली की थी जबकि मरवाही में भाजपा के रामदयाल उईके ने अपनी सीट छोड़ दी थी। खरसियां का उपचुनाव राजनैतिक इतिहास में हमेशा याद किया जाता है। क्योंकि यहां पर अर्जन सिंह जैसे दिग्गज राजनेता को जीत के लिए एड़ीचोटी का जोड़ लगाना पड़ा। वे मात्र 8 हजार वोट से जीत पाए थे और हारने के बावजूद पराजीत प्रत्याशी दिलीप सिंह जुदैव का जुलूस आज भी खरसियां की जनता को याद है। इससे उल्ट कहानी मरवाही की थी। 2001 में मरवाही ने अजीत जोगी ने जीत की जो इमारत खड़ी की वह 2018 तक बढ़ती ही चली गई। फिर चाहे चुनाव अजीत जोगी लड़ रहे हो या अमित जोगी। कभी भी कैसी भी परिस्थिति में जीत का आकड़ा 40 हजार से नीचे नहीं गया। वर्ष 2018 के चुनाव में अजीत जोगी को मात्र एक मतदान के लिए कटरा में हार मिली और वहां भी वे प्रत्याशी से नही नोटा से हारे।
2018 के चुनाव में मरवाही में नोटा को 4 हजार 501 वोट मिला। कटरा में नोटा 89, जोगी 78, कांग्रेस गुलाब सिंह राज 64 और भाजपा अर्चना पोर्ते 58 मत पाएं थे। मरवाही जैसे आदिवासी बहुल्य क्षेत्र में नोटा को प्राप्त होने वाला वोट राजनैतिक पंडितों को आश्र्चय में डालता है। 4 सेक्टरों में कांग्रेस ने जिन लोगों को जिम्मेदारी दी है। उसमें सासंद, संसदीय सचिव और विधायक शामिल है। उत्तर क्षेत्र में के प्रभारी उत्तम वासुदेव और मंत्री गुरू रूद्र कुमार है। दक्षिण क्षेत्र में विधायक शैलेष पांडेय और मंत्री डाॅक्टर प्रेम साय सिंह।
गौरेला क्षेत्र अर्जुन तिवारी और मोहम्मद अकबर, पेंड्रा क्षेत्र में मोहित केरकेटा और मंत्री कवासी लखमा को जिम्मेदारी मिलीं 4 मंत्री 48 विधायक आकड़ा थोड़ा छोटा है। असल में प्रदेश के मुखिया ने मरवाही में अपने मंत्री मंडल को उतार दिया है। प्रत्याशी भले ही केके धु्रव किन्तु चुनाव में सीधे मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा जुड़ी है। इस कथा का पुरा सार नामाकंन जांच के बाद पढ़ने मिलेगा।
रायपुर / शौर्यपथ / केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री संजीव बालियान की रायपुर में हुई प्रेस वार्ता में कही गयी बातों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि आखिरकार कांग्रेस के आरोप और किसानों की आशंकायें सच साबित हुईं। मोदी सरकार के तीनों कृषि कानूनों में एमएसपी में उपज खरीदने की अनिवार्यता का उल्लेख नहीं है और यह बिल किसान मजदूर विरोधी है।
उन्होंने कहा है कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री संजीव बालियान ने स्वीकार किया है कि इन क़ानूनों से उद्योगपति और व्यापारियों को छूट मिलेगी। ये उद्योगपति कौन हैं, यह सारा देश बखूबी समझ रहा है। एमएसपी के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हर कानून में हर बात नहीं लिखी जा सकती। इससे स्पष्ट है कि नए कृषि बिल चंद बड़े पूंजीपतियों को किसानों को अपनी फसल औने-पौने दाम में बेचने के लिये मजबूर करने का लाइसेंस है। किसानों के साथ कांट्रेक्ट फार्मिंग कर पूँजीपति किसानों को पांच साल के लिए गुलाम बनायेंगें।चंद बड़े व्यापारियों की अपनी मर्जी की कीमत में किसान की फसल लेंगे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री संजीव बालियान ने किसानों की फसल के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर अन्नदाताओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि कोलकाता का जूता चप्पल देश भर में बिक सकता है तो किसानों की फसल क्यों नहीं? उन्होंने कहा है कि केंद्रीय मंत्री को इस प्रकार के उदाहरण देने से बचना चाहिए। जूता चप्पल के साथ किसानों की फसल की तुलना नहीं की जा सकती। भाजपा शासनकाल में बीएसएनएल की जो हालात खराब हुई है उसके लिए भाजपा सरकार के निजीकरण की नीतियां जिम्मेदार है ठीक उसी तरह अब मोदी सरकार कृषि क्षेत्र का निजीकरण कर किसानों की भी हालात को बीएसएनएल की तरह करना चाहती हैं। यह केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान के द्वारा दिये गये उदाहरण से स्पष्ट हो गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री संजीव बालियान किसान विरोधी तीन काले कानून को सही ठहराने के लिए कांग्रेस के 2019 के घोषणा पत्र को आधार बना रहे तो केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री संजीव बालियान को कांग्रेस के घोषणा पत्र के आधार पर कृषि बिल को तैयार करना था कांग्रेस के घोषणा पत्र में किसानों को सब्सिडी में खाद बीज डीजल दवाइयां के साथ किसानों के लिए प्रत्येक ब्लाक में आधुनिक गोदाम, कोल्ड स्टोरेज,खाद्य प्रसंस्करण की स्थापना,किसानों के घर के नजदीक सर्वसुविधायुक्त बाजार जिसमे किसानों को फसल बेचने में सहजता हो समर्थन मूल्य मिले, सहित अनेक किसान हितैषी योजना शामिल है उसे लागू कर दे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
