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नई दिल्ली / एजेंसी / माइक्रो फाइनेंस कंपनियां लोगों को तुरंत लोन देने के लालच में डालकर अधिक ब्याज दर वसूलती हैं. इससे लोन चुकाने में कर्जदारों को मुश्किल होती है और उन्हें अधिक भुगतान करना पड़ता है या नहीं करने पाने की स्थिति में उत्पीड़न झेलना पड़ जाता है. लोगों को झांसे में लेकर लोन के नाम पर उगाही करने वाली ऐसी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों पर असम सरकार ने शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है. राज्य सरकार ने लोगों से कहा है कि लोन देने वाली ऐसी कंपनियों या संस्थानों से बचना है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य की महिलाओं से माइक्रो फाइनेंस संस्थानों से लोन लेने से परहेज करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि इन संस्थानों द्वारा लोन पर ली जाने वाली ब्याज दरें अव्यवहारिक रूप से अधिक हैं और लोनधारक के लिए इससे अपना लोन चुकाना लगभग असंभव है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों के एनपीए घोषित किए गए खातों के एवज में राज्य सरकार लोन देने वाले माइक्रोफाइनेंस संस्थानों को मुआवजे के रूप में कुल 291 करोड़ रुपये का भुगतान कर रही है. इस कदम से राज्य के लगभग 2.2 लाख लोनधारकों को ऐसे संस्थानों के चंगुल से मुक्त होने में मदद मिलेगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2021 के असम विधानसभा चुनावों के प्रचार के दौरान कई महिलाएं लोन चुकाने में असमर्थता के कारण लोन देने वाले संस्थानों द्वारा उत्पीड़न की शिकायत करने उनके पास आई थीं. उन्होंने माइक्रोफाइनेंस संस्थानों से लोन लेने वाली महिला उधारकर्ताओं की शिकायतों पर ध्यान देने का वादा किया था और उन्होंने अब उन्हें राहत दे दी है.
हिमंत बिस्वा सरमा ने महिलाओं से राज्य सरकार द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों के प्रत्येक सदस्य को प्रदान की जाने वाली 10,000 रुपये की राशि का उचित उपयोग करके आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की भी अपील की. सरमा ने कहा कि जो लोग प्रोडक्टिविटी उद्देश्यों के लिए राशि का उपयोग करते हैं उन्हें 15,000 रुपये और प्रदान किए जाएंगे.
नई दिल्ली / एजेंसी /
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित सिल्क्यारा सुरंग में पिछले 12 दिन से फंसे 41 मजदूरों को निकालने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं.उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में 41 मजदूरों को फंसे हुए आज 12 दिन हो गए हैं. इन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए तेजी से ऑपरेशन चल रहा है. यहां मौजूद नोडल अफसर नीरज खैरवाल ने बताया कि सारे मजदूर ठीक हैं और मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट लगातार उनसे बात कर रहे हैं.
उत्तरकाशी के सिलक्यारा गांव में निर्माणाधीन सुरंग धंसने के बाद पिछले 12 दिनों से उसमें 41 मजदूर फंसे हुए हैं. अब इन श्रमिकों को बचाने का अभियान अपने अंतिम चरण में है. बुधवार को मजदूरों से केवल 10 मीटर दूरी तक मलबे में छेद करने का काम बाकी रह गया था. हालांकि गुरुवार को कुछ देर काम के बाद ड्रिलिंग का काम रोकना पड़ा. अभी जिस मशीन से ड्रिलिंग का काम हो रहा है, वह एक घंटे में तीन मीटर छेद करती है. इसलिए मजदूरों के जल्द बाहर निकलने की बड़ी खबर किसी भा वक्त आ सकती है.
मजदूरों को बाहर लाने में कितना वक्त लगेगा.
1. बचाव दल के अनुसार, मजदूरों को बाहर निकालने के लिए जिस पाइप को अंदर भेजा जा रहा था उसके आगे का हिस्सा लोहे की सरिया से टकराकर मुड़ गया था. लिहाजा अब उस आगे के हिस्से को गैस कटर से काटकर अलग किया जा रहा है. बाद में उस हिस्से को छोटे टुकड़ों में काट कर पाइप से वापस निकाला जाएगा. इसके चलते पाइप को अंदर भेजने की प्रक्रिया फिलहाल के लिए रुकी हुई है.
2. मजदूरों के करीब तक 80 सेंटीमीटर व्यास वाली मजबूत पाइप डाला गया है, जिसमें घुसकर मजदूर आसानी से रेंगते हुए वापस निकल सकेंगे. 12 दिनों से मजदूर अंदर फंसे हुए हैं, ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि उनका एनर्जी लेवल कम हो गया होगा. अगर वे खुद बाहर आने में सफल नहीं होंगे तो बाहर से एनडीआरएफ के जवान अंदर जाकर उन्हें लाएंगे.
3. आशंका ये भी है कि 12 दिनों से सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों के दिमाग पर मनोवैज्ञानिक असर भी हुआ होगा. उनको बाहर से जो भोजन दिया गया है, उसका क्या असर उनके शरीर पर हुआ है, इसका आंकलन पहले किया जाएगा. इसके लिए चिकित्सकों की टीम जांच करेगी.
4. एक बार जब बचाव पाइप श्रमिकों तक पहुंच जाएगा तो एनडीआरएफ का एक डॉक्टर अंदर जाएगा और उनकी स्थिति की जांच करेगा. वह मजदूरों को सिखाएंगे कि वेल्डिंग जोड़ों पर धारदार किनारों वाले पाइपों के जरिए कैसे निकलना है. बचाव दल ने कहा है कि बाहर निकलने वाले मजदूरों के लिए स्ट्रेचर की भी व्यवस्था की गई है.
5. अंदर फंसे मजदूर एनडीआरएफ की कड़ी निगरानी में पाइप के माध्यम से बाहर लाए जाएंगे. सुरंग के बाहर, श्रमिकों को चिन्यालीसौड़ में बने एक अस्थायी अस्पताल में ले जाने के लिए 41 एम्बुलेंस तैयार हैं. बचावकर्मियों ने कहा कि अस्पताल पहुंचने पर श्रमिकों की विस्तृत चिकित्सकीय जांच की जाएगी.
6. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद राहत और बचाव स्थल पर पहुंच गए हैं. उनके साथ केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग के मिनिस्टर ऑफ स्टेट जनरल वी के सिंह भी मौक पर होंगे. उत्तराखंड मुख्यमंत्री कार्यालय (ष्टरूह्र) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सिल्कयारा सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों को बचाने की तैयारी अंतिम चरण में है और सीएम पुष्कर सिंह धामी खुद बुधवार (22 नवंबर) रात से ही उत्तरकाशी में मौजूद हैं.
7. सुरंग में कुल 10 पाइप डाले जाने थे, जिसमें अब तक नौ पाइप अंदर सुरंग में डाले जा चुके हैं. इसके पहले आगर मशीन में खराबी आ गई. इसे ठीक करने के लिए दिल्ली से एक्सपट्र्स को बुलाया गया.
8. पिछले 12 दिनों में, हिमालयी क्षेत्र की जियोलॉजिकल स्थिति और मिट्टी की प्रकृति के कारण बचाव अभियान में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है. इस कारण ऑपरेशन में बार-बार रुकावटें आई हैं. इन चुनौतियों के कारण ही बचाव दल अभी भी ऑपरेशन पूरा होने की सटीक समय-सीमा बताने से सावधानी बरत रहा है. उन्होंने कहा है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले कुछ घंटों में श्रमिकों को बाहर लाया जा सकता है.
9. सुरंग, केंद्र की महत्वाकांक्षी चार धाम परियोजना का हिस्सा है, जो उत्तरकाशी और यमुनोत्री को जोडऩे के लिए प्रस्तावित सड़क पर उत्तराखंड में सिल्क्यारा और डंडालगांव के बीच स्थित है. 4.5 किमी लंबी सुरंग का काम ज्यादातर पूरा हो चुका है. 12 नवंबर को भूस्खलन के बाद मजदूर सुरंग में फंस गए थे. जिस इलाके में वे फंसे हैं वह करीब 8.5 मीटर ऊंचा और 2 किलोमीटर लंबा है. सौभाग्य से निर्माणाधीन सुरंग के उस हिस्से में बिजली और पानी की आपूर्ति है.
10. सुरंग में फंसे मजदूरों तक पाइप के जरिए ड्राई फ्रूट्स, ओआरएस और ऑक्सीजन की आपूर्ति लगातार की गई है, जिसकी वजह से सारे मजदूरों के स्वस्थ होने के दावे किए जा रहे हैं. दुर्घटना को लेकर क्करू नरेंद्र मोदी ने भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात कर रेस्क्यू ऑपरेशन को अपडेट लिया था.
नई दिल्ली के प्रगति मैदान के एम्फीथिएटर में छत्तीसगढ़ दिवस समारोह देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे
रायपुर / शौर्यपथ /
भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2023 में प्रगति मैदान में यह शाम छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला और संस्कृति से भरी शाम थी। छत्तीसगढ़ दिवस समारोह के अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों से आए कलाकारों ने यहां एम्फीथिएटर में अपनी प्रस्तुतियों से सैकड़ों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह में छत्तीसगढ़ रेजिडेंट कमिश्नर श्रुति सिंह मुख्य अतिथि थीं और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।मुख्य अतिथि ने छत्तीसगढ़ मंडप का दौरा किया और शिल्पकारों और कारीगरों से बातचीत की।
छत्तीसगढ़ पैवेलियन नई दिल्ली के प्रगति मैदान में भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले (आईआईटीएफ) के 42वें संस्करण में हथकरघा और हस्तशिल्प सहित अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रहा है। इस वर्ष की थीम 'वसुधैव कुटुंबकमÓ को दर्शाते हुए 300 वर्ग फुट के क्षेत्र में प्रदर्शन के लिए कुल 10 स्टॉल लगाए गए हैं।
मंडप राज्य की प्रगति को प्रदर्शित कर रहा है । यहाँ प्रत्येक क्षेत्र की विशेषता के अनुसार उनके औद्योगिक, कृषि, हर्बल और हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ पवेलियन का आयोजन प्रगति मैदान के हॉल नंबर 2, प्रथम तल पर किया गया है। आज प्रगति मैदान के एम्फीथिएटर में सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद सांस्कृतिक दलों ने नृत्य प्रस्तुतियां दीं। दर्शकों ने बस्तर की कुल देवी की आराधना हेतु नृत्य आमचो बस्तर की प्रस्तुति को तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ सराहा।
ददरिया गीत भी प्रस्तुत किया गया। भोजली नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे दर्शकों पर जादू कर दिया। समूह द्वारा हरेली त्यौहार के अवसर पर विशेष रूप से किये जाने वाले 'गौर नृत्यÓ एवं 'गेड़ी नृत्यÓ का प्रदर्शन किया गया।
महिला कलाकारों के समूह ने विशेष रूप से दिवाली उत्सव के दौरान किया जाने वाला लोक नृत्य 'सुआ नाचाÓ या तोता नृत्य दिखाया। यह पूजा से संबंधित नृत्य का एक प्रतीकात्मक रूप है। नर्तक एक तोते को बांस के बर्तन में रखते हैं और उसके चारों ओर एक घेरा बनाते हैं। फिर कलाकार ताली बजाते हुए उसके चारों ओर घूमते हुए गाते और नृत्य करते हैं। यह छत्तीसगढ़ की आदिवासी महिलाओं के प्रमुख नृत्य रूपों में से एक है।
पुरुष कलाकारों के समूह ने सतनामी समाज के सबसे लोकप्रिय अनुष्ठानों में से एक लोक नृत्य 'पंथीÓ नृत्य दिखाया। समूह के नेता के नेतृत्व में एक गीत की संगत में धीमी गति के साथ नृत्य शुरू हुआ। धीरे-धीरे गति बढ़ती गई और एक मनमोहक वातावरण बन गया। जिसे वहाँ उपस्थित दर्शकों ने ख़ूब सराहा।
दुर्ग / शौर्यपथ /
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम नक्सली हमले की जांच को लेकर आज 21 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में बड़ा फैसला हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए (हृढ्ढ्र) की याचिका को खारिज कर दिया। अब राज्य की पुलिस झीरम नक्सली हमले के पीछे षड्यंत्र की जांच कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि - आज रास्ता साफ हो गया है। अब छत्तीसगढ़ पुलिस इसकी जांच करेगी। किसने किसके साथ मिलकर क्या षड्यंत्र रचा था, सब साफ हो जाएगा।
छत्तीसगढ़ पुलिस कर सकती है झीरम नक्सली हमले की जांच
दरअसल 2013 में चुनाव के पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान 25 मई को पार्टी के सभी बड़े नेता सुकमा से जगदलपुर लौट रहे थे, उसी समय नक्सली हमला हुआ। इसमें महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार जैसे बड़े कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला हुआ। महेंद्र कर्मा और नंदकुमार पटेल को नक्सलियों ने बेरहमी से मार डाला। इस हमले के बाद पूरे देश में हड़कंप मंच गया था। चुनाव के ठीक पहले छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लगभग सभी शीर्ष नेताओं की हत्या हो गई। इस मामले में एनआईए जांच कर रही है। लेकिन कांग्रेस पार्टी लगातार ये आरोप लगा रही थी कि ये राजनीतिक षड्यंत्र है।
इस मामले में जांच आगे न बढऩे पर 2018 में राज्य में कांग्रेस की सरकार ने नए बिंदुओं के साथ जांच के लिए एक स्ढ्ढञ्ज गठन किया। छत्तीसगढ़ पुलिस इस मामले की जांच के लिए एनआईए से फाइल मांगती रही, लेकिन फाइल नहीं मिली। एनआईए ने पुलिस की जांच को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने आज खारिज कर दिया।
एनआईए ने जानबूझकर नहीं की जांच - कांग्रेस
सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के पक्ष रखने वाले वकील सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि आज सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस की बेंच ने एनआईए के उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा झीरम मामले के बड़े षड्यंत्र की जांच के लिए एफआईआर दर्ज किया गया था। एनआईए का कहना था चूंकि मामले की जांच पहले हमने की है, इसलिए छत्तीसगढ़ पुलिस इस जांच को नहीं कर सकती। इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार और अपीलकर्ता जितेंद्र मुदलियार का कहना था हमले के षड्यंत्र की जांच एनआईए ने जानबूझकर नहीं की। इसलिए उन्हें फिर से जांच सौंपने का अर्थ नहीं होता। इस तर्क को सुनने के बाद कोर्ट ने एनआईए के अपील को खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ ही अब इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस जांच कर सकेगी।
भूपेश ने किया ट्वीट
कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर कहा कि झीरम कांड पर सुप्रीम कोर्ट का आज का फैसला छत्तीसगढ़ के लिए न्याय का दरवाजा खोलने जैसा है। झीरम कांड दुनिया के लोकतंत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक हत्याकांड था। इसमें हमने दिग्गज कांग्रेस नेताओं सहित 32 लोगों को खोया था। कहने को एनआईए ने इसकी जांच की, एक आयोग ने भी जांच की लेकिन इसके पीछे के वृहद राजनीतिक षड्यंत्र की जांच किसी ने नहीं की। छत्तीसगढ़ पुलिस ने जांच शुरू की, तो एनआईए ने इसे रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। आज रास्ता साफ हो गया है। अब छत्तीसगढ़ पुलिस इसकी जांच करेगी। किसने किसके साथ मिलकर क्या षड्यंत्र रचा था सब साफ हो जाएगा।
भाजपा की हार निश्चित, ईडी का सहारा लेकर भी नहीं जीत पाएगी भाजपा
छत्तीसगढ़ और राजस्थान में ईडी की राजनैतिक कार्रवाई को लेकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से की मुलाकात
नई दिल्ली / रायपुर / शौर्यपथ /
कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों के दौरान मोदी सरकार के इशारे पर हो रही ईडी की कार्रवाई को लेकर चुनाव आयोग से मुलाकात की। कांग्रेस ने मुलाकात में चुनाव आयोग से ईडी की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी के साथ कांग्रेस महासचिव तारिक अनवर, असंगठित श्रमिक एवं कर्मचारी कांग्रेस के चेयरमैन उदित राज, कांग्रेस के सचिव डॉ विनीत पुनिया और मीडिया पैनलिस्ट अमन पंवार मौजूद रहे। मुलाकात के उपरांत कांग्रेस सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भाजपा को हार से बचाने के लिए ईडी द्वारा यह कार्रवाई की जा रही है। भाजपा की हार निश्चित है। भाजपा ईडी का सहारा लेकर जीत नहीं पाएगी।
डॉ सिंघवी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण के चुनाव से पहले कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मिलने का समय मांगा था। हमें बहुत निराशा हुई कि चुनाव के पहले चरण, सात नवंबर के पहले कांग्रेस को चुनाव आयोग द्वारा आयोग से मिलने का समय नहीं मिला।
डॉ सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से शिकायत में कहा है कि 18 महीने पहले छत्तीसगढ़ पुलिस ने महादेव ऐप मामले में जांच शुरू की थी। लगभग 500 गिरफ्तारियां हुई, सैंकड़ों मोबाइल फोन, लैपटॉप और अकाउंट बरामद किए गए। छह महीने पहले मुख्यमंत्री ने आरोपियों की गिरफ्तारी और ऐप को बैन करने की भी मांग की थी। लेकिन केंद्र सरकार ने तब कुछ नहीं किया।
ईडी पर राजनैतिक दबाव में कार्य करने का आरोप लगाते हुए डॉ सिंघवी ने कहा कि जैसे ही चुनाव पास आता है, भाजपा नेता, पीएम और ईडी नई-नई चीजें सामने लाने लगते हैं। केंद्र सरकार ने पहले इस ऐप को बैन क्यों नहीं किया। उन्हें प्रदेश सरकार की पूर्व अनुमति क्यों चाहिए थी? ईडी कहती है कि ग़ैरक़ानूनी काम हो रहा है, छत्तीसगढ़ चुनाव के लिए बाहर से पैसा आ रहा है। ईडी ने चुनाव से पहले जांच शुरू नहीं की और चुनाव के समय आरोप लगाया, ताकि चुनाव में कांग्रेस का नुकसान हो। ईडी ने जिन लोगों के नाम लिए हैं, चार्जशीट में उनकी भूमिका साफ नहीं कर पाई है। मुख्यमंत्री के कई अफसरों पर आरोप लगाया है, लेकिन चार्जशीट में उनका संबंध महादेव ऐप से नहीं बताया है। उन्होंने पूछा कि इतना बड़ा घोटाला हो रहा था, तो ईडी क्या कर रही थी? ऐप को तीन दिन पहले ही क्यों बैन किया गया?
डॉ सिंघवी ने कहा कि ये पहले कभी नहीं देखा होगा कि मुख्य कोतवाल सबकुछ कर लेता है और डेढ़ साल बाद चुनाव के एक सप्ताह पहले भाजपा का इलेक्शन डिपार्टमेंट यानि ईडी आती है। यह साफ है कि भाजपा की हार को बचाने के लिए ये सब किया जा रहा है। भाजपा की हार निश्चित है। मोदी सरकार ने संवैधानिक संस्थाओं को खत्म कर दिया है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से संरक्षण मांगा है और मांग की है कि ईडी की कार्रवाई पर रोक लगाए।
रायपुर / शौर्यपथ / भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्वाचन कार्य में नियोजित अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षाबलों आदि के निर्वाचन कर्तव्य के दौरान मृत्यु/घायल होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य प्रतिकर नियमानुसार अनुग्रह राशि की स्वीकृति की गई है।
विधानसभा निर्वाचन-2023 के अंतर्गत प्रथम चरण के निर्वाचन के दौरान जिला कांकेर में केन्द्रीय सुरक्षा बल के एक कर्मी की नक्सल हिंसा में मृत्यु होने के कारण 30 लाख रुपए की अनुग्रह प्रतिकर भुगतान राशि की स्वीकृति की जा रही हैं। दन्तेवाड़ा जिला में केन्द्रीय सुरक्षाबल के एक कर्मी की निर्वाचन कर्तव्य के दौरान मृत्यु होने के कारण 15 लाख रुपए की अनुग्रह प्रतिकर भुगतान राशि की स्वीकृति की जा रही है।
कोंडागांव जिले में केशकाल में तीन निर्वाचन कर्मियों की दुर्घटना में मृत्यु होने के कारण नियमानुसार 15 लाख रुपए प्रति कर्मी के मान से कुल 45 लाख रुपए की अनुग्रह प्रतिकर भुगतान राशि की स्वीकृति की जा रही है। इसके अतिरिक्त निर्वाचन कर्तव्य के दौरान नक्सली हिंसा में घायल विभिन्न कर्मियों को भी नियमानुसार अनुग्रह प्रतिकर भुगतान राशि की स्वीकृति की जा रही है।
वंचित परिवारों को सुविधा देने का अनुरोध किया, निर्माण प्रोत्साहन 12000 से बढ़ाकर 30000 रुपए करने की मांग
पिछली सरकार ने 4000 करोड़ खर्च कर बनाए थे 32 लाख शौचालय, तब भी 23.2 प्रतिशत परिवार वंचित
”अतिवाद प्रभावित तथा दुर्गम क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों के माध्यम निर्माण की स्वीकृति मिले”
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर चिंताई जताई है कि पिछली सरकार द्वारा राज्य को ओडीएफ घोषित किए जाने के बावजूद 15 लाख परिवार उन्नत शौचालय सुविधा से वंचित हैं। श्री बघेल ने इन परिवारों को यह सुविधा उपलब्ध कराने की मांग प्रधानमंत्री से की है। साथ ही कहा है कि उन्नत शौचालय निर्माण की प्रोत्साहन राशि 12000 रुपए प्रति परिवार से बढ़ाकर 30000 रुपए की जानी चाहिए। उन्होंने अतिवाद प्रभावित तथा दुर्गम क्षेत्रों में ऐसे शौचालयों का निर्माण ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्वीकृत करने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्र में लिखा है कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के तत्वावधान में कराये गये राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 6 (2019-21 ) में यह पाया गया है कि छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में 88.2 प्रतिशत परिवार एवं ग्रामीण क्षेत्रों के 73.5 प्रतिशत परिवार उन्नत शौचालय सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। इस तरह राज्य के कुल परिवारों में से 76.8 प्रतिशत परिवार उन्नत शौचालय सुविधा का उपयोग कर रहे हैं तथा 23.2 प्रतिशत परिवार इस सुविधा से वंचित हैं। विगत माह राज्य सरकार द्वारा कराये गये सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण के दौरान शौचालयों के भौतिक सत्यापन से राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के जारी आंकड़ों की पुष्टि होती है।
मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में आगे कहा है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में राज्य में 32 लाख से अधिक शौचालय निर्मित किये हुये थे तथा जनवरी 2018 में संपूर्ण राज्य को ओ.डी.एफ घोषित किया गया था। शौचालयों के निर्माण में लगभग 4,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि का व्यय हुआ था। इतनी राशि व्यय करने के बाद भी राज्य के लगभग 15 लाख परिवारों को वर्तमान में उन्नत शौचालय की सुविधा न होना चिंता एवं जांच का विषय है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र के माध्यम से अनुरोध करते हुए लिखा है कि भारत सरकार के प्रशासकीय विभाग द्वारा स्वतंत्र तृतीय पक्ष के माध्यम से वस्तुस्थिति की जांच करायी जाये तथा राज्य की भौगोलिक एवं जनांकिकीय स्थिति को ध्यान में रखते हुये उन्नत शौचालय सुविधा रहित परिवारों के लिए शौचालय निर्माण हेतु प्रति परिवार प्रोत्साहन राशि को 12,000 रू के स्थान पर 30,000 रू करते हुए राशि स्वीकृत की जावे एवं अतिवाद प्रभावित तथा दुर्गम क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों के माध्यम से शौचालय निर्माण की सहमति दी जाये।
नई दिल्ली। शौर्य पथ। लोकसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद राहुल गांधी के भाषण के बाद अपना भाषण देने भारतीय जनता पार्टी की नेता एवं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी पर "फ्लाइंग किस" करने का आरोप लगाया हालांकि सचिवालय से इसके कोई वीडियो एविडेंस नहीं होने की जानकारी भी सामने आ रही है इस तथाकथित फ्लाइंग किस मामले पर पूरे देश में एक बहस का मुद्दा छोड़ गया है । राहुल गांधी पर आरोप लगाने वाली केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के आरोप के बाद सोशल मीडिया पर स्मृति ईरानी के संबंध में कई तरह की बातें लिखी जा रही है। कई सोशल मीडिया एक्टिविटीज ने भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह मामले पर स्मृति ईरानी के मौन रहने के मुद्दे को महिला सम्मान के साथ जोड़कर तीखे प्रहार किए हैं तो वहीं कई लोगों ने मणिपुर में महिलाओं के साथ हुए दुर्व्यवहार पर स्मृति ईरानी के मौन रहने पर उंगली उठाई। वहीं कई ट्रेलर्स ने स्मृति ईरानी के पुराने फोटो जिसमें वह सिटी मारते हुए नजर आ रही हैं को पोस्ट करते हुए मर्यादा की बात लिखी किसी किसी पोस्ट में पीएम मोदी के कुछ इशारों को आपत्तिजनक बताते हुए भी स्मृति ईरानी पर कड़े प्रहार किए हैं वही कुछ ट्रोलर्स द्वारा स्मृति ईरानी के द्वारा किए गए विवाह संबंध (बता दें की स्मृति ईरानी ने जिस व्यक्ति से शादी की पहले वह व्यक्ति उसकी सहेली का पति हुआ करता था) पर अपनी राय व्यक्त करते हुए टिप्पणी की.
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद स्मृति ईरानी के पुराने कार्यों पुराने फोटो एवं भाजपा के कई पुराने फोटो के साथ अब स्वयं स्मृति ईरानी ही घिरती नजर आ रही हैं । तभी तो भारत में एक कहावत मशहूर है कि अगर आप किसी पर एक उंगली उठाओ तो 4 उंगली स्वयं पर भी उठ जाती है आज यही हाल केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का हो रहा है हर तरफ से उन पर राजनीतिक प्रहार है जारी है एक बार फिर देश के ज्वलंत मुद्दे मणिपुर के मामले पर सरकार की मंशा साफ नहीं हुई वही ज्वलंत मुद्दे को छोड़कर नेताओं में फ्लाइंग किस को लेकर बस छिड़ी हुई है। एक बार फिर देश की जनता को बरगलाने में और मुद्दों से ध्यान भटकाने में राजनीतिक दल सफल हो गए।
दिल्ली की राउज एवेन्यु कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितता से जुड़े एक मामले में राज्यसभा के पूर्व सदस्य विजय दर्डा, उनके बेटे देवेंद्र दर्डा और कारोबारी मनोज कुमार जयसवाल को बुधवार को चार साल की सजा सुनाई।
नई दिल्ली / एजेंसी / दिल्ली की राउज एवेन्यु कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितता से जुड़े एक मामले में राज्यसभा के पूर्व सदस्य विजय दर्डा, उनके बेटे देवेंद्र दर्डा और कारोबारी मनोज कुमार जयसवाल को बुधवार को चार साल की सजा सुनाई। अदालत के आदेश के बाद तीनों दोषियों को हिरासत में ले लिया गया। विशेष न्यायाधीश संजय बंसल ने पूर्व कोयला सचिव एच. सी. गुप्ता और दो पूर्व वरिष्ठ लोक सेवकों- के. एस. क्रोफा और के. सी. समरिया को भी तीन साल की सजा सुनाई।
कोयला घोटाले में 13वीं दोषसिद्धि में अदालत ने 13 जुलाई को सात आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश रचना) एवं 420 (जालसाजी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया था। कोयला घोटाला केंद्र की पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में सामने आया एक बड़ा घोटाला था।
हालांकि, इन तीनों दोषियों को अदालत ने निजी मुचलके पर जमानत दे दी, ताकि वे अपनी दोषसिद्धि और सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दे सकें। अदालत ने मामले में दोषी ठहराई गई कंपनी जेएलडी यवतमाल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड पर 50 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
