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समाचार सार :मध्य प्रदेश की खजुराहो लोकसभा सीट से सपा प्रत्याशी मीरा यादव का नामांकन चुनाव आयोग ने रद्द कर दिया है. बता दें कि इंडिया गठबंधन के तहत कांग्रेस ने खजुराहो सीट को सपा को दिया था.
भोपाल / एजेंसी / मध्य प्रदेश की खजुराहो लोकसभा सीट से विपक्षी गठबंधन इंडिया को बड़ा झटका लगा है. बताया जा रहा कि यहां से समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी मीरा यादव का नामांकन रद्द हो गया है. बता दें कि मीरा यादव ने नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि के दिन 4 अप्रैल को अपना नामांकन दाखिल किया था. वहीं आज 5 अप्रैल को उनका नामांकन रद्द कर दिया गया है.
इन कारणों से निरस्त हुआ नामांकन
जानकारी के अनुसार सपा प्रत्याशी मीरा यादव ने नामांकन फॉर्म जमा करते समय वोटर लिस्ट की पुरानी कॉपी सलग्न की थी, जो कि फॉर्म भरने की त्रुटि में आता है. इसके अलावा उन्होंने फॉर्म में एक जगह हस्ताक्षर भी नहीं किया. इसी कारण उनका फॉर्म निरस्त किया गया है.
वहीं दूसरी ओर नामांकन रद्द होने के चलते मीरा यादव के पति दीपनारायण यादव ने लापरवाही के आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि जानबूझकर उनका नामांकन रिजेक्ट किया गया है. इसके साथ ही उन्होंने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट जाने की भी बात कही.
यह लोकतंत्र की हत्या : अखिलेश यादव
वहीं सपा प्रत्याशी मीरा यादव का नामांकन रद्द होने पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया है. उन्होंने कहा, "खजुराहो सीट से इंडिया गठबंधन की सपा प्रत्याशी मीरा यादव का नामांकन निरस्त करना सरेआम लोकतंत्र की हत्या है. कहा जा रहा है कि हस्ताक्षर नहीं थे तो फिर देखने वाले अधिकारी ने फार्म लिया ही क्यों. ये सब बहाने हैं और हार चुकी भाजपा की हताशा. जो न्यायालय के कैमरे के सामने छल कर सकते हैं वो फार्म मिलने के बाद पीठ पीछे क्या-क्या साजिश रचते होंगे. भाजपा बात में ही नहीं काम में भी झूठी है और समस्त प्रशासनिक तंत्र को भ्रष्ट बनाने की दोषी भी. इस घटना की भी न्यायिक जांच हो, किसी का पर्चा निरस्त करना लोकतांत्रिक अपराध है."
कुल 19 उम्मीदवारों ने दाखिल किया नामांकन पत्र
बता दें कि खजुराहो लोकसभा सीट पर दूसरे चरण में मतदान होना है. इसके लिए उम्मीदवारों ने 4 अप्रैल तक अपना नामांकन दाखिल किया है. जानकारी के मुताबित नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि तक कुल 19 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है. मुख्य रूप से इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी वीडी शर्मा और सपा उम्मीदवार मीरा यादव के बीच मुकाबला माना जा रहा था.
शिवाजी महाराज की युद्ध विजय से भी जुड़ा है कारण महाराष्ट्र में गुडी पड़वा
मुंबई / एजेंसी / महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों के बीच राजनीतिक दल शक्ति प्रदर्शन का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. लोकसभा चुनावों के बीच राज्य के प्रमुख त्योहारों में से एक “गुडी पड़वा” पर मराठी वोटरों में जोश भरने के लिए सभी सियासी दल भव्य तैयारियों में जुटे हैं. भाजपा से लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शिवसेना के उद्धव गुट तक हर कोई इस मौके को भुनाने में लगा है. मराठी वोटों का गणित लगा रहे राजनीतिक दल हिंदुत्व की पिच पर बड़े शॉट्स खेलने की तैयारी में हैं. ऐसे में चुनावी मौसम के दौरान वोटरों के दिलों में जगह बनाने का सबसे बड़ा मौका है - गुडी पड़वा.
महाराष्ट्र का प्रमुख त्योहार गुड़ी पड़वा 9 अप्रैल को है. ऐसे में पोस्टर बैनर लग चुके हैं और तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं. गुड़ी पड़वा से मराठी नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है. इसी दिन से हिंदुओं का नया साल भी शुरु होता है. इसे लेकर सभी सियासी दल अपनी अपनी तैयारियों में जुटे हैं.
मराठी समुदाय के लोग इस दिन समृद्धि की सूचक गुड़ी को घर के बाहर बांधकर उसकी पूजा करते हैं. मान्यता है इससे पूरा साल सुख, सफलता और ऐश्वर्य लेकर आता है. भाजपा ने तय किया है कि आर्थिक राजधानी में सवा लाख हिंदुत्व की गुड़ी 'संदेश ध्वज कैंपेन' के जरिए लगाई जाएगी.
चुनावों में राज ठाकरे किस तरफ होंगे, इसे लेकर सस्पेंस बरकरार है, लेकिन गुडी पड़वा का एक टीजर लॉन्च कर चुके हैं, जिसमें उनके एक सांकेतिक बयान से सस्पेंस और बढ़ा है और इंतजार उनके भाषण का है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने उस दिन शाम 4 बजे दादर के शिवाजी पार्क में गुड़ी पड़वा का आयोजन रखा है. इस दौरान शक्ति प्रदर्शन की पूरी तैयारी है.
किस मुंह से रैली निकाल रहे हैं आदित्य ठाकरे?: शेलार
वहीं शिवसेना के उद्धव गुट की रैली जंबूरी मैदान में होगी. इसे लेकर भाजपा तंज कस रही हैं. भाजपा के मुंबई प्रमुख आशीष शेलार ने कहा, “आदित्य ठाकरे किस मुंह से रैली निकाल रहे हैं? याकूब मेमन की कब्र सजाने वाले हिंदू वर्ष मना रहे हैं? हिंदू और हिंदू वर्ष मानने वाले लोग आदित्य ठाकरे के पिछले कामों के रवैया को लेकर परेशान हैं और आदित्य ठाकरे को इस रैली में जनता पूछेगी कि उन्होंने अपनी सरकार के दौरान याकूब मेमन की कब्र क्यों सजाई."
चुनावी मौसम में राजनीति से दूर रहने वाले संगठन भी
इसके साथ ही कुछ आयोजक चाहते हैं कि उनके आयोजन में राजनीति की परछाई भी न पड़े. हिंदू नववर्ष स्वागत यात्रा के श्रीधर अगरकर ने कहा कि पिछले 22 साल से इस यात्रा को बिना किसी राजनीतिक संबंध के निकाला जा रहा है. चुनाव करीब है, लेकिन इसके बावजूद किसी भी राजनीतिक संबंध से जोड़े बिना हिंदू समाज इसे अपनी आस्था के अनुसार मनाएगा.
शिवाजी महाराज की युद्ध विजय से भी जुड़ा है कारण महाराष्ट्र में गुडी पड़वा
महाराष्ट्र में गुडी पड़वा को मनाने का एक कारण मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की युद्ध में विजय से भी जुड़ा है, इसलिए इस दिन घर के बाहर हिंदुत्व की विजय पताका के रूप में गुड़ी लगाई जाती है. इसे सफलता और समृद्धि का सूचक माना गया है. महाराष्ट्र में “शिवाजी महाराज” के इर्द-गिर्द ही सारी चुनावी कसरत घूमती है. इसलिए गुडी पड़वा की मान्यता एक पर्व से कहीं ऊपर उठकर तौली जाती है. जाहिर है कि 9 अप्रैल को सारी पार्टियां शक्ति प्रदर्शन का मौका नहीं छोड़ेगी.
नई दिल्ली / लोकसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू किन्तु इस उलटी राजनैतिक चर्चा से ज्यादा दो समाचार ही सुर्खिया बटोर रही है पहला राजनैतिक पार्टियों को दिया जाने वाला गोपनीय चंदा जो अब सार्वजानिक हो चुका है वही दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी . दोनों ही मामलो में सत्ताधारी सरकार और भाजपा की छवि काफी धूमिल हुई . सुप्रीम कोर्ट के इलेक्टोरल बॉन्ड के फैसले के बाद अब कई और तथ्य सामने आ रहे है जिसके कारण मोदी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग पर भी सवालिया निशान लग रहे है . पूर्व में भी कई हजारो करोड़ के घोटालो के व्यक्तियों का भाजपा में प्रवेश और जांच बंद होने के मामले में भले ही भाजपा के नेता लाख सफाई दे लाख न्यायालय की बात करे किन्तु भ्रष्टाचारियो के साथ सत्ता चलाने के कारण आम जनता के उस विश्वास को भी कही ना कही चोट पहुंची जिन्होंने २०१४ में कालाधन , महंगाई , बेरोजगारी , भ्रष्टाचार मुक्त , स्मार्ट सिटी की लम्बी श्रृखला जैसे वादों पर भरोसा कर एक नई सरकार को सत्ता सौपी . इलेक्टोरल बॉन्ड के मामले पर अब एक नया खुलासा हुआ जो कही ना कही यह भी दर्शा रहा कि किस तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसला सुरक्षित रखने के बाद भी इस गोपनीय चंदे पर कार्य हुआ .
बता दे कि 31 अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने इलेक्टोरल बॉन्ड मामले पर सुनवाई शुरू की और दो नवम्बर को जारी रही जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया.लेकिन उसके बाद सामने आई जानकारियों से ये साफ़ हो गया है कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला सुरक्षित होने के बाद भी सरकार ने नए इलेक्टोरल बॉन्ड छापने का काम जारी रखा.सूचना के अधिकार के ज़रिए मिली जानकारी से पता चलता है कि 8,350 इलेक्टोरल बॉन्ड की आख़िरी खेप साल 2024 में छाप कर उपलब्ध करवाई गई. जो 21 फ़रवरी २०२४ को सप्लाई की गई जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 15 फ़रवरी २०२४ को इस योजना को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था.
साथ ही ये बात भी उजागर हुई है कि इलेक्टोरल बॉन्ड की योजना को चलाने वाले स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने कमीशन के तौर पर सरकार से क़रीब 12 करोड़ रुपये (जीएसटी मिलाकर) की मांग की है जिसमें से सरकार 8.57 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है.साथ ही बॉन्ड्स को नासिक की इंडिया सिक्योरिटी प्रेस में छपवाने के लिए सरकार को 1.93 करोड़ रुपये (जीएसटी मिलाकर) का बिल मिला है जिसमें से 1.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है.आसान शब्दों में कहें तो एक ऐसी योजना जिसमें गोपनीय तरीक़े से करोड़ों का दान देने वाले किसी भी व्यक्ति या कंपनी से कोई सर्विस चार्ज नहीं लिया गया.
बड़ा सवाल यह है कि जिस योजना को आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक क़रार दिया, उस योजना को चलाने के लिए क़रीब 13.98 करोड़ रुपये का ख़र्चा सरकारी ख़ज़ाने से यानी टैक्सपेयर या टैक्स देने वालों या आसान शब्दों में कहें तो जनता के पैसे से किया गया.
बता दे कि आरटीआई कार्यकर्ता कमोडोर लोकेश बत्रा पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर काम करते रहे हैं.इलेक्टोरल बॉन्ड मुद्दे पर उन्होंने पिछले कुछ सालों में कई आरटीआई आवेदन किए जिनके जवाबों से मिली जानकारियों को जोड़ कर देखें तो एक साफ़ तस्वीर उभर कर आती है.14 मार्च 2024 को स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने आरटीआई के जवाब में बताया कि किस साल में कितने इलेक्टोरल बॉन्ड छापे गए.
इस जानकारी के मुताबिक़, साल 2018 में सबसे ज़्यादा 6 लाख 4 हज़ार 250 इलेक्टोरल बॉन्ड छापे गए. इनमें से सबसे ज़्यादा बॉन्ड एक हज़ार और 10 हज़ार रुपये मूल्य के थे और सबसे कम बॉन्ड एक करोड़ रुपये मूल्य के थे. वही साल 2019 में 60,000 बॉन्ड छापे गए. इस साल एक हज़ार और 10 हज़ार रुपये का एक भी बॉन्ड नहीं छापा गया. सबसे ज़्यादा बॉन्ड एक लाख रुपये मूल्य के छापे गए.
साल 2022 में 10,000 बॉन्ड छापे गए. ये सभी बॉन्ड एक-एक करोड़ रुपये के थे. अन्य किसी मूल्य का कोई बॉन्ड नहीं छापा गया.वही 8,350 बॉन्ड्स की सबसे हालिया खेप साल 2024 में छापी गई. ये सभी बॉन्ड भी एक-एक करोड़ रुपये मूल्य के थे. अन्य किसी मूल्य का कोई बॉन्ड नहीं छापा गया.
ग़ौरतलब है कि साल 2020, 2021 और 2023 में कोई इलेक्टोरल बॉन्ड नहीं छापे गए.8,350 बॉन्ड की आख़िरी खेप 27 दिसंबर 2023 के बाद छापी गई इसका पता वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ़ इकोनॉमिक अफ़ेयर्स (डीईए) के दो आरटीआई के जवाबों से भी चलता है.डीईए ने 27 दिसंबर 2023 को बताया था कि उस तारीख़ तक कुल 6, लाख 74 हज़ार 250 इलेक्टोरल बॉन्ड छापे गए थे.ठीक दो महीने बाद 27 फरवरी 2024 को एक और आरटीआई के जवाब में इस विभाग ने बताया कि उस तारीख़ तक कुल 6 लाख 82 हज़ार 600 इलेक्टोरल बॉन्ड छापे गए.यानि 27 दिसंबर 2023 और 27 फ़रवरी 2024 के बीच 8,350 इलेक्टोरल बॉन्ड छापे गए जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले पर अपना फ़ैसला 2 नवम्बर को ही सुरक्षित कर लिया था.
क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले से थी आश्वस्त ..
आरटीआई कार्यकर्ता कमोडोर लोकेश बत्रा कहते हैं, "इन जानकारियों से ये साफ़ दिखता है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लेकर इतनी ज़्यादा आश्वस्त थी कि उन्होंने और ज़्यादा बॉन्ड छपवाने का काम जारी रखा."स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया से आरटीआई के ज़रिये मिली जानकारी के मुताबिक़, आख़िरी खेप में 8,350 बॉन्ड्स छपवाने से पहले ही स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के पास क़रीब 12,013 करोड़ रुपये के ऐसे बॉन्ड उपलब्ध थे, जो बिके नहीं थे. इन बॉन्ड्स में से 9,019 करोड़ के बॉन्ड एक करोड़ रुपये मूल्य के थे.
कमोडोर बत्रा कहते हैं, "इतने ज़्यादा बॉन्ड पहले से ही थे. उसके बावजूद सरकार ने 8,350 करोड़ रुपये के नए बॉन्ड छपवाए. ऐसा लगता है कि 2024 के चुनाव से पहले उन्हें बॉन्ड्स की बम्पर बिक्री की उम्मीद थी."अंजलि भारद्वाज एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो सूचना का अधिकार, पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दों पर काम करती हैं.वो कहती हैं, "जब तक अदालत ने अपना फ़ैसला नहीं सुनाया था तब तक सरकार साफ़तौर पर अपना काम हमेशा की तरह कर रही थी. सरकार ने शायद इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि सर्वोच्च न्यायालय इस योजना को असंवैधानिक घोषित कर सकता है और इसे रद्द कर सकता है."
अंजलि भारद्वाज के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई समाप्त होने के बाद भी सरकार ने और ज़्यादा बॉन्ड छपवाए तो इससे पता चलता है कि शायद सरकार नहीं सोच रही थी कि योजना को असंवैधानिक घोषित कर दिया जाएगा.
आरटीआई में मिली जानकारियों से कुछ और दिलचस्प बातें भी सामने आई हैं:
कुल बिके बॉन्ड्स की कीमत 16,518 करोड़ रुपये थी.जिसमे करीब 95 फ़ीसदी बॉन्ड एक करोड़ रुपये के मूल्य वाले थे.वही 25 करोड़ रुपये की कीमत वाले 219 बॉन्ड ऐसे थे जिन्हें राजनीतिक दलों ने नहीं भुनाया.स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ इस 25 करोड़ रुपये की राशि को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में जमा कर दिया गया.एक और चौंकाने वाली बात ये सामने आई है कि जहां 2018 से 2024 के बीच कुल 6,82,600 इलेक्टोरल बॉन्ड छपवाए गए वहीं जो इलेक्टोरल बॉन्ड बिके उनकी संख्या सिर्फ़ 28,030 थी जो कि कुल छापे गए बॉन्ड्स का महज़ 4.1 फ़ीसदी था.
समाचार संकलन बीबीसी समाचार
नई दिल्ली / एजेंसी / अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के मुक्तो विधानसभा सीट से निर्विरोध जीतने की संभावना है. इसके साथ ही वह राज्य में निर्विरोध जीत हासिल करने वाले भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट शामिल हो जाएंगे. सीएम के अलावा बीजेपी के 4 और उम्मीदवारों की निर्विरोध जीतने की उम्मीद है.
अरुणाचल प्रदेश में 19 अप्रैल को दो लोकसभा सीट के साथ-साथ विधानसभा की 60 सीट के लिए भी वोटिंग होनी है. जानकारी के मुताबिक पापुम पारे सहित कई प्रमुख जिलों में विपक्षी दलों के उम्मीदवारों ने नामांकन नहीं किया है, जिसके चलते सत्तारूढ़ दल की जीत तय मानी जा रही है. वहीं, सगाली से रातू तेची निर्विरोध जीत हासिल करने के लिए एक और प्रमुख दावेदार के रूप में उभरे हैं.
विपक्षी उम्मीदवारों ने नहीं किया नामांकन
समय सीमा से पहले किसी भी विपक्षी उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया है, जिसके चलते बीजेपी मुक्तो और सागली सहित पांच निर्वाचन क्षेत्रों में क्लीन स्वीप के लिए तैयार हैं. इसके अलावा सुबनसिरी जिले के जिरो से हेज अप्पा को किसी विरोध का सामना नहीं करना पड़ा, जिससे बीजेपी की स्थिति और मजबूत हो गई है.
बीजेपी के कुल 5 उम्मीदवार निर्विरोध जीतेंगे
लेटेस्ट जानकारी मिलने तक राज्य में बीजेपी के कुल 5 उम्मीदवार निर्विरोध जीत रहे हैं, जिनमें ताली से जिक्के ताको, तलिहा से न्यातो डुकोम, सागाली से रातू तेची और रोइंग विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों से मुच्चू मीठी शामिल हैं.
पेमा खांडू की निर्विरोध जीत की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी
सागली से विधायक के रूप में 30 साल तक सेवा करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने इस बार संसदीय चुनाव लड़ने का विकल्प चुना और आलो से अपना नामांकन दाखिल किया. हालांकि, अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू की निर्विरोध जीत की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है. खांडू ने 2014 और 2019 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट से जीत हासिल की थी.
नई दिल्ली / एजेंसी / दिल्ली की कथित शराब नीति घोटाले के मामले में अदालत ने गुरुवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की हिरासत की अवधि पहली अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी है.यानी अरविंद केजरीवाल इस केस में अब सोमवार तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में बने रहेंगे. अब इस मामले की सुनवाई सोमवार को होगी.ईडी ने मुख्यमंत्री केजरीवाल की सात दिनों की रिमांड की मांग की थी लेकिन अदालत ने कहा कि उन्हें कोर्ट के समक्ष सोमवार को साढ़े ग्यारह बजे पेश किया जाए.केजरीवाल की मौजूदा हिरासत की अवधि गुरुवार को ख़त्म हो रही थी. उन्हें आज राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज कावेरी बावेजा की अदालत में पेश किया गया.
ईडी ने अपनी ताज़ा रिमांड याचिका में कहा था कि कस्टडी में पूछताछ के दौरान पांच दिनों तक उनके बयान रिकॉर्ड किए गए. ईडी ने ये आरोप लगाया है कि वे सवालों के जवाब देने में टालमटोल कर रहे थे. ईडी की ओर से कहा गया है कि रिमांड अवधि के दौरान तीन अन्य लोगों के बयान भी दर्ज किए गए हैं.
अदालत में इस मौक़े पर केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल, दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी, सौरभ भारद्वाज और अन्य कई लोग मौजूद थे.ईडी ने अदालत से केजरीवाल की हिरासत और सात दिन बढ़ाने की मांग की.इस दौरान केजरीवाल ने अदालत से कहा कि वे रिमांड का विरोध नहीं करते हैं, बल्कि वे ईडी की ओर से लगाए गए आरोपों की सारी जांच के लिए तैयार हैं.उन्होंने कहा, "असली घोटाला तो ईडी की जांच के बाद हुआ है. एक मकसद था आप को क्रश करना. एक माहौल बनाना कि आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचारी है."
केजरीवाल ने आरोप लगाया, "शरद रेड्डी के केस में शरद रेड्डी को जमानत दो कारण से मिली. सबसे पहले शरद रेड्डी ने मेरे ख़िलाफ़ बयान दिया और शरद रेड्डी ने गिरफ्तार होने के बाद 55 करोड़ रुपये का चंदा भाजपा को दिया. गिरफ्तार होने के बाद 55 करोड़ रुपये के बॉन्ड शरद रेड्डी ने खरीदे और उसके बाद उसे जमानत मिल गई. इससे मनी ट्रेल साबित हो जाता है. यही पूरी जांच का मक़सद था कि एक तरफ आम आदमी पार्टी को क्रश करना. एक स्मोक स्क्रीन क्रिएट करना और पीछे से एक्सट्रैक्शन करना."
उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी का मक़सद आम आदमी पार्टी को दबाना है.समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अदालत में पेश करने से पहले केजरीवाल से दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के उस बयान पर राय मांगी गई कि जेल से दिल्ली की सरकार नहीं चलेगी.इस पर केजरीवाल ने कहा कि यह एक राजनीतिक साज़िश है, लोग इसका जवाब देंगे.उन्होंने अदालत से कहा, "आरोप लगाया गया है कि 100 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा है कि मनी ट्रेल का सबूत नहीं है."केजरीवाल ने कहा, "यह केस दो साल से चल रहा है. 17 अगस्त, 2022 को सीबीआई का पहला केस दर्ज हुआ था और 22 अगस्त को ईडी ने मामला दर्ज किया."
छत्तीसगढ़ / शौर्यपथ / कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम ने आज अपने जन्म दिवस के अवसर पर अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला का दर्शन किया। उन्होंने प्रभु श्रीराम से प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि एवं निरंतर विकास के लिए आशीर्वाद मांगा। मंत्री श्री नेताम अपने धर्मपत्नी के साथ सरयू नदी में पुण्य स्नान कर आराध्य देव को स्मरण किया।
गौरतलब है कि मंत्री श्री रामविचार नेताम अपने जन्मदिन को अविस्मरणीय बनाने के लिए सपरिवार अयोध्या धाम गए हुए हैं। उन्होंने प्रभु श्री रामलला के दर्शन पश्चात् कहा कि हमारे आराध्य प्रभु श्रीराम अयोध्या में 500 सालों बाद जन्म स्थान पर पुनः विराजमान हुए हैं। छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल होने के कारण लोगों के लिए दोहरी खुशी और उत्साह का मौका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के हाथों प्रभु श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई है, यह दिन भारत के इतिहास में अविस्मरणीय रहेगा।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आईआईटी भिलाई के स्थायी परिसर का वर्चुअल माध्यम से मंगलवार सुबह 10 बजे शुभारंभ करेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं केंद्रीय मंत्री शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय धर्मेंद्र प्रधान भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे। साथ ही प्रधानमंत्री इस मौके पर कवर्धा तथा कुरुद में केंद्रीय विद्यालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण भी करेंगे। इस मौके पर आईआईटी के अभिशासी मंडल के अध्यक्ष के. वेंकटरमण तथा निदेशक आईआईटी प्रो.राजीव प्रकाश भी मौजूद रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि आईआईटी के निर्माण की आधारशिला प्रधानमंत्री मोदी ने 14 जून 2018 को रखी। इसके निर्माण का कार्य 8 जुलाई 2020 को आरंभ किया गया। आईआईटी का परिसर 400 एकड़ में फैला है। आरंभिक रूप से इसके निर्माण के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा 1090 करोड़ 18 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई। बिल्डिंग में लेक्चर हाल, सेमिनार रूम, क्लास रूम आदि बनाये गये हैं। भिलाई आईआईटी में निर्माण कार्य में बहुत सी इमारतों के नाम छत्तीसगढ़ के प्रमुख नदियों और पर्वतों के नाम पर रखे गये हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / इंडियन चैंम्बर ऑफ बिजनेस एंड कॉमर्स द्वारा वार्षिक ग्लोबल समिट का आयोजन कल शनिवार को नई दिल्ली के जनपद रोड स्थित डॉ अंबेडकर ऑडिटोरियम में किया गया। वार्षिक ग्लोबल समिट ग्रामीण इकोनामिक फोरम और भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया था। छत्तीसगढ़ राज्य के वाणिज्य उद्योग और श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन प्रतिनिधि मंडल के साथ उक्त कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मंत्री देवांगन ने कहा कि देश के किसानों को यदि हम आत्मनिर्भर बनाएंगे तो निश्चित रूप से हमको कृषि पर आधारित उद्योगों पर फोकस करना होगा। छत्तीसगढ़ राज्य एक कृषि आधारित प्रदेश है इसीलिए इसे धान का कटोरा कहते है। छत्तीसगढ़ राज्य 44ः वनों से पूर्ण है और निश्चित रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिए कृषि एवं वन की प्रमुखता से भागीदारी रहेगी।
मंत्री देवांगन ने कहा की छत्तीसगढ़ राज्य के नई औद्योगिक नीति में निश्चित रूप से कृषि उद्यानिकी एवं वनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नीति रखी जाएगी, जिससे प्रदेश के किसानों को और आदिवासी अंचल में रहने वाले लोगों कोे इसका सीधा लाभ मिल सके। इससे प्रदेश के कृषि उत्पादन का मूल्य संवर्धन मे वृद्धि हो सकेगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नारायण राणे मंत्री सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम भारत सरकार भी शामिल हुए। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि आने वाला समय डेवलपमेंट का समय है और इसे ध्यान में रखकर नीति बनानी होगी। इंडियन चैंम्बर ऑफ बिजनेस एंड कॉमर्स की यह पहल निश्चित रूप से अहम रोल अदा करेगी।
इस अवसर पर मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के साथ अन्य प्रतिनिधि कोरबा नगर निगम के पार्षद श्री नरेंद्र देवांगन, के अलावा प्रफुल्ल तिवारी, नरेंद्र पाटनवार, महाप्रबंधक सीएसआईडीसी ओ पी बंजारे भी उपस्थित रहे।
मुंबई । मनोरंजन जगत से बुरी खबर सामने आ रही है. आमिर खान की सुपरहिट फिल्म दंगल मं छोटी बबीता फोगाट का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस का 19 साल की उम्र में निधन हो गया है. जूनियर बबीता फोगाट बनने वली एक्ट्रेस का असली नाम सुहानी भटनागर था. जो पिछले कुछ समय से बीमार थीं. इस चलते एम्स में भी उनका इलाज चल रहा था. मगर तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा न सके और 17 फरवरी 2024 को सुहानी भटनागर का निधन हो गया.
सुहानी भटनागर के निधन से उनका परिवार सदमे में हैं.एक्ट्रेस के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है.शुरुआती जानकारी के मुताबिक, सुहानी परिवार के साथ फरीदाबाद में ही रहती थीं. शनिवार की सुबह उन्होंने अंतिम सांसें ली. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार अजरोंदा स्वर्ग आश्रम में किया जाएगा.
सुहानी भटनागर ने साल 2016 में आमिर खान की फिल्म दंगल से बॉलीवुड डेब्यू किया था. उन्हें सिंगिंग और डांसिंग का काफी शौक था. उनकी मां का नाम पूजा भटनागर है. डेब्यू से पहले उन्होंनेकई ऐड्स में भी काम किया था. फिल्म दंगल में भी उनके काम को काफी पसंद किया गया था जिनके डायलॉग पर लोगों ने खूब ठहाके मारे थे. अब छोटी सी उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है.
दंगल की बात करें तो ये फिल्म नितेश तिवारी ने बनाई थी जो कि साल 2016 में रिलीज हुई थी. आमिर खान ने फिल्म में पहलवान महावीर सिंह फोगाट का रोल निभाया था तो साक्षी तंवर ने उनकी पत्नी का. वहीं फातिमा सना शेख बड़ी बेटी गीता फोगाट बनती हैं तो सुहानी फोगाट बड़ी होकर सान्या मल्होत्रा में बदल जाती हैं जिन्होंने यंग बबीता का रोल प्ले किया था.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
