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रायपुर । शौर्यपथ । छत्तीसगढ़ के सीनियर आईपीएस जीपी सिंह को भारत सरकार ने कंप्लसरी रिटायर कर दिया है। सर्विस रिव्यू कमेटी की सिफारिश पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह फैसला किया है। जीपी 94 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस हैं। वे एडीजी रैंक के अधिकारी हैं।
सितंबर 2022 में फिर सर्विस रिव्यू कमेटी की बैठक हुई और उसने जीपी सिंह को अनिवार्य सेवानिवृति देने की सिफारिश की। करीब 10 महीने से यह मामला केंद्र में लटका हुआ था और अब लग रहा था कि शायद चुनाव के कारण अब टल जाए। मगर आज अचानक खबर आ गई कि जीपी सिंह को केंद्र सरकार ने रिटायर कर दिया है।
छापा, गिरफ्तारी, जमानत...
जीपी सिंह की आईपीएस की सर्विस अभी आठ साल बची है। एडीजी ईओडब्लू से हटने के बाद 30 जून 2021 को ईओडब्लू का छापा पड़ा था। 11 जनवरी 2022 को उन्हें गुडगांव से गिरफ्तार किया गया। 5 जुलाई 2022 को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। पूरे चार महीने रायपुर जेल में रहने के बाद वे जमानत पर रिहा हुए थे।
जीपी सिंह मामले में कब कब क्या हुआ..
– एसीबी की टीम ने एक जुलाई 2021 को सिंह के पुलिस लाइन स्थित सरकारी बंगले पर सुबह 6 बजे छापा मारने पहुंची। पुलिस लाइन के साथ ही राजनांदगांव और ओडिशा के 15 अन्य स्थानों पर जांच की कार्यवाही की गई।
– लगभग 68 घंटे से भी ज्यादा समय तक चली छापे की कार्यवाही के दौरान 10 करोड़ की अघोषित संपत्ति के साथ बंगले के पीछे गटर से कई दस्तावेज मिले थे।
– छापे से मिली संपत्ति के आधार पर एसीबी ने जीपी सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज की। इसके आधार पर सरकार ने 5 जुलाई को उन्हें सस्पेंड किया।
– 8 जुलाई 2021 की रात जीपी सिंह के घर से मिले दस्तवोज के आधार पर उनपर राजद्रोह का केस दर्ज किया गया।
– 9 जुलाई 2021 को जीपी सिंह ने हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है जिसमें सीबीआई जांच की मांग की गई।
– मामले की जांच के बाद 11 जनवरी 2022 को जीपी सिंह को नोएडा से गिरफ्तार किया गया।
– मई 2022 में उन्हें जमानत (IPS GP Singh) मिली।
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कंप्लसरी रिटायरमेंट वाले चौथे आईपीएस
अनिवार्य सेवानिवृति वाले जीपी सिंह छत्तीसगढ़ के चौथे आईपीएस अधिकारी होंगे। उनसे पहले राजकुमार देवांगन, एएम जुरी और केसी अग्रवाल को पिछली सरकार में फोर्सली रिटायर किया गया था। इनमें से केसी अग्रवाल को हालांकि बाद में कैट से राहत मिल गई थी। और वे बाद में सरगुजा पुलिस रेंज के आईजी भी रहे।
देश का एक हिस्सा जलता रहा और पीएम मोदी विदेश यात्राएं करते रहे ... क्या यही है भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा : राजेंद्र साहू
मोदी ने मणिपुर में महिलाओं के साथ हुए शर्मनाक अत्याचार पर संवेदना तक नहीं जताई
83 दिनों के बाद नींद से जागे : रोज 18 घंटे क्या करते हैं मोदी
दुर्ग / शौर्यपथ / मणिपुर हिंसा की आग में जलता रहा किन्तु देश के पीएम मौन रहे महिलाओं केसाथ हुए वीभत्स मानवता को शर्मशार करने वाली घटना के बाद आखिरकार मणिपुर के विषय में पीएम मोदी का मौन टुटा और उन्होंने इस घटनाप्र ह्रदय से पीड़ा हुई की बात कही किन्तु तब तक पूरा देश केंद्र सरकार और राज्य सरकार से सवाल करने लगा .
दुर्ग से केन्द्रीय ग्रामीण बैक के अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस में महामंत्री एवं मुख्य वक्ता राजेन्द्र साहू ने पीएम मोदी से तीखे सवाल किये .प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू ने कहा है कि हिंसा से जल रहे मणिपुर के मामले में पीएम नरेंद्र मोदी 83 दिनों बाद नींद से जागे हैं। उनके समर्थक दावा करते हैं कि पीएम मोदी 18 घंटे काम करते हैं। अगर ऐसा होता तो इतने दिनों तक मौन धारण नहीं करते। दुर्भाग्य ये है कि उन्होंने मणिपुर में महिलाओं के साथ हुए शर्मनाक अत्याचार पर संवेदना भी नहीं जताई।
इससे पहले हाथरस मामले और महिला पहलवानों के साथ हुई बदसलूकी के मामले में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के सम्मान में कभी कुछ नहीं कहा। उन्होंने महिला पहलवानों के मामले में आरोपी बृजभूषण को संरक्षण ही दिया। यह दर्शाता है कि देश की महिलाओं के लिए पीएम नरेंद्र मोदी असंवेदनशील हैं ? देश के लिए 18 घंटे काम करते तो पीएम इतने असंवेदनशील नहीं होते।
राजेंद्र ने कहा कि भाजपा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने में आगे हैं लेकिन सच ये है कि पिछले 9 साल के मोदी शासनकाल में महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित और असहज हैं। पीएम मोदी महिलाओं के साथ हुए दुर्व्यहार और अत्याचार को रोकने में कमजोर साबित हुए हैं। देश की महिलाएं पीएम की कमजोरी को देख रही है।
राजेंद्र ने कहा कि छत्तीसगढ़ में लूट, ठगी, मारपीट जैसे मामलों में आरोपियों के नग्न प्रदर्शन को मणिपुर हिंसा से जोड़कर पीएम मोदी ने देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है। पीएम का बयान देश को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को संरक्षण देता है। राजेंद्र ने कहा कि इससे पहले भी देश को आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले अडानी, विजय माल्या, ललित मोदी, मेहुल चौकसे जैसे लोगों को मोदी ने ही संरक्षण देकर साबित कर दिया कि पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार देश को लूटने वाले और खंडित करने वालों को संरक्षण देती है।
राजेंद्र ने कहा कि मणिपुर हिंसा को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने गंभीरता नहीं दिखाई। मणिपुर के मुख्यमंत्री को तत्काल बर्खास्त करना चाहिए। इस मामले में पूरी तरह विफल रहे गृहमंत्री अमित शाह से भी इस्तीफा लिया जाना चाहिए। हिंसा से जलते एक राज्य को लेकर 83 दिनों तक चुप्पी साधे रहना पीएम नरेंद्र मोदी की देश के प्रति बेपरवाही साबित करती है। दुर्भाग्य ये है कि जब देश का एक हिस्सा जलता रहा तब पीएम मोदी विदेश यात्राएं करते रहे। क्या यही है भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा ...
मुख्यमंत्री बघेल ने दी बधाई और शुभकामनाएं
नई दिल्ली /रायपुर / शौर्यपथ / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के हाथों आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ को भूमि सम्मान से नवाजा गया। इसके साथ ही प्रदेश के दो जिलों सरगुजा और बेमेतरा को भी भूमि प्रबंधन और प्रशासन के लिए भूमि सम्मान प्लेटिनम सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया है। डिजिटल इंडिया लैण्ड रिकार्ड मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) के मौजूदा चार घटकों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए प्रदेश और दो जिलों को यह सम्मान मिला है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश को भूमि प्रबंधन के लिए सम्मान मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। उन्होंने प्रदेश के राजस्व विभाग और सरगुजा तथा बेमेतरा जिला प्रशासन को इस उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डीआईएलआरएमपी अंतर्गत प्रदेश में बेहतर काम हुए हैं। भूमि संबंधी जानकारियां आम लोगों को आसानी से उपलब्ध हो रही है। जमीन से जुड़ी जानकारियां ऑनलाईन मौजूद है और बरसों पुराने महत्वपूर्ण दस्तावेजों का व्यवस्थित संधारण करने का काम किया गया है।
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राज्य स्तर पर भू-अभिलेखों के डिजिटाईजेशन और प्रबंधन के लिए सचिव राजस्व विभाग नीलम नामदेव एक्का, महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक श्रीमती किरण कौशल, संचालक भू-अभिलेख रमेश शर्मा ने राष्ट्रपति के हाथों भूमि सम्मान प्राप्त किया। इसी प्रकार जिला स्तर पर भू-अभिलेखों के डिजिटाईजेशन और प्रबंधन के लिए बेमेतरा कलेक्टर पीएस एल्मा और सरगुजा कलेक्टर कुंदन कुमार को भी भूमि सम्मान प्लेटिनम सर्टिफिकेट प्रदान किया गया।
गौरतलब है कि डिजिटल इंडिया लैण्ड रिकार्ड मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) अंतर्गत प्रदेश में भूमि प्रबंधन से जुड़े 95 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुके हैं। इसी तरह भूमि प्रबंधन से जुड़े चार घटकों लैण्ड रिकार्ड का डिजिटाइजेशन, पंजीयन कार्यालय का तहसील कार्यालय से समन्वय, मॉर्डन रिकार्ड रूम तथा सर्वे-रिसर्वे का कार्य प्रदेश के सरगुजा और बेमेतरा जिले में शतप्रतिशत पूर्ण हो चुका हैं। ये जिले भूमि प्रबंधन में देश के शीर्ष जिलों में शामिल हैं। प्रदेश के अन्य जिलों में भी तेजी से कार्य पूर्ण हो रहे हैं।
भू-अभिलेखों के डिजिटाईजेशन का मिल रहा लोगों को सीधा फायदा
भूमि संबंधी सभी रिकार्ड्स के डिजिटाईजेशन से लोगों को अपनी जमीन से जुड़ी जानकारियां रियल-टाइम पर उपलब्ध हो रही है। इस जानकारी को मोबाइल से कही से भी और किसी भी वक्त इंटरनेट के माध्यम से देखा जा सकता है। भूमि संबंधी रिकार्ड के डिजिटाईजेशन और इसके प्रबंधन से भूमि संबंधी जानकारी अब लोगों की आसान पहुंच में है। लोगों को भूमि संबंधी अभिलेख प्राप्त करने के लिए शासकीय कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे है।
लोगों को आसानी से सभी अभिलेख मिलने से जमीन से जुड़े धोखा-धड़ी के मामले में भी कमी आयी है। भूमि संबंधी न्यायालयों में मुकदमें भी कम हुए है। भू-अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण से ऐसे प्रमाण पत्र जिनमें भू-अभिलेखों की जानकारी की आवश्यकता होती है उन प्रमाण पत्रों के लिए आसानी से दस्तावेज उपलब्ध हुए है। इससे लोगों को आसानी से आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र मिल रहा है। इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य नागरिक को राईट ऑफ रिकार्ड (रिकॉर्ड का अधिकार) भी सुनिश्चित करना है।
भोपाल / शौर्यपथ / मध्यप्रदेश में भाजपा नेताओ की गुंडागर्दी ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही मूत्र काण्ड के उजागर होने के बाद एक और भाजपा नेता का वीडियो वाइरल हो रहा है जिसमे वह पंचायत सचिव की पिटाई कर रहे है . ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि भाजपा नेता को हिस्स्सा नहीं मिला इस बात पर नेता जी खफा हो गए और पंचायत सचिव को बुलाकर उनकी खूब पिटाई की एक तरफ सत्ता के लिए सीएम शिवराज खजाना (रेवडिया) बांटने के काम में व्यस्त है वही दूसरी तरफ सत्ता के आगोश में समाये नेता शासकीय कर्मचारियों की खुलेआम पिटाई कर रही है .
बता दे कि सोशल मिडिया युसर ने ट्वीट कर यह वीडियो वाइरल किया है जिसमे मध्य प्रदेश की रीवा में पंचायत के सचिव ने “हिस्सा” नहीं पहुंचाया तो भाजपा के जोशीले नेता जी ने पंचायत सचिव को बेरहमी से पीटा, उठक बैठक लगवाई और मुर्गा बनाकर रखा. यानि “सबका साथ, सबका विकास” बड़ी तेजी से हो रहा है! अब मध्यप्रदेश को लोगों को तय करना ही होगा कि कानून के राज और गुंडा राज में क्या फ़र्क़ है और इस गुंडई का ख़ात्मा ज़रूरी है.
अब देखना यह है कि क्या एमपी के सीएम शिवराज के मन में एक बार फिर आत्मग्लानि होती है और वे मानवता को शर्मशार करने वाली इस घटना के बाद पंचायत सचिव से अपनी पीड़ा को कम करने माफ़ी मांगते है या फिर मामला को और ज्यादा राजनितिक रंग मिलेगा ...
भोपाल / शौर्यपथ / मध्यप्रदेश में भाजपा नेता के द्वारा किये गए खिनौने मूत्र काण्ड कृत्य में एक नया सवाल सामने आ गया . सोशल मिडिया में मुत्र्कांड के विडिओ वाइरल होने के बाद शिवराज सरकार ने ताबड़तोड़ कार्यवाही तो की किन्तु कार्यवाही पर भी सवाल उठाने शुरू हो गए वही जिस व्यक्ति से सीएम शिवराज ने सीएम हाउस बुलाकर चरण वंदन किये और माफ़ी मांगी उस व्यक्ति और पीड़ित व्यक्ति के अलग अलग होने की बात भी सामने आने लगी . ऐसी चर्चा है कि पीड़ित 16-17 वर्ष का मानसिक विक्षिप्त बताया जा रहा है वही जिस व्यक्ति से सीएम ने माफ़ी मांगी वह एक 50-55 साल का अधेड़ है चित्र को अगर गौर से देखे तो पीड़ित और माफ़ी वाले दोनों शख्स अलग अलग उम्र के नजर आ रहे है , सर के बालो को ध्यान से देखने पर भी फर्क साफ़ नजर आ रहा है . एक की हेयर स्टाइल अलग तो दुसरे की अलग वही उम्र का साफ़ फर्क बालो के काले और सफ़ेद (रंग का फर्क ) . तथाकथित पीड़ित व्यक्ति सम्मान के बाद मुवावजा मिलने के बाद अब आरोपी को माफ़ करने की बात कह रहा है क्या कानून इस मामले में स्वयं संज्ञान नहीं ले सकता और सज़ा नहीं डे सकता ये देखने वाली बात होगी किन्तु अब जब इस पर सवाल उठ रहे है कि पीड़ित और माफ़ी वाले शख्स जुदा जुदा है तो क्या शिवराज सरकार मामले की निष्पक्ष जाँच कराएगी या फिर जो माफ़ी वाला दृश्य हो चुका है उसे ही सबके सामने परोस कार मामले का पटाक्षेप कर देगी . सवाल तो उठ गए अब जवाब का इंतज़ार है ...
पीड़ित शख्स
जिससे सीएम शिवराज ने मांगी माफ़ी
भोपाल / शौर्यपथ / भोपाल / शौर्यपथ / मध्यप्रदेश में अभी मूत्र काण्ड की के बाद भाजपा नेताओं के द्वारा पीड़ित के सम्मान का विडिओ सोशल मिडिया पार पोस्ट होना अभी बंद ही नहीं हुआ कि एक नया विडिओ सामने आ गया जिसमे आदिवासी युवक की बेरहमी से पिटाई की जा रही है . मूत्र काण्ड में पीड़ित के सीएम ने पैर धोये पूजा की मान सम्मान दिया वो भी पीड़ित के आवास जा कर नहीं पीड़ित को सीएम हाउस बुलाकर .चुनावी वर्ष है यह सब करना शायद राजनेताओ की मज़बूरी हो किन्तु अब इस पिटाई वाले विडिओ में भी क्या इन्साफ होगा . ऐसे कई मामले होंगे जो शायद कही दब गए होंगे या किसी को जानकारी भी नहीं होगी आजादी के इतने सालो बाद भी आज भी धर्म और जाति के बीच की दुरिया खत्म नहीं हुई अब देखना यह है कि कांग्रेस के युवा नेता श्रीनिवास के द्वारा पोस्ट किये गए इस विडिओ के बाद एमपी की शिवराज सरकार किस तरह से अपनी प्रतिक्रिया देती है .
नई दिल्ली / शौर्यपथ / इन दिनों देश के पीएम मोदी भार्श्ताचारियो पर कार्यवाही की गारंटी दे रहे है सुनकर अच्छा लगता है किन्तु तब इस बात का दुःख होता है कि जिन नेताओं पार भ्रष्टाचार के आरोप लगे है और केन्द्रीय जाँच एजेंसिया के जाँच के दायरे में है ऐसे भ्रष्टाचारी जब भाजपा से हाँथ मिलाते है तो इन पर हो रही जाँच रुक जाती है और ये भ्रष्टाचारी नेता राष्ट्रभक्त की श्रेणी में आ जाते है . पिच्लेदिनो महाराष्ट्र मे जो हुआ उससे यही प्रतीत होता है कि अगर कोई भ्रष्टाचारी भाजपा के साथ आ जाता है तो फिर उसे राष्ट्रभक्त माना जाने लगा है . क्या केन्द्रीय जाँच एजेंसिया जो पूर्ण बहुमत वाली भाजपा सरकार के अधीन है उनका यही कार्य शेष रह गया है कि किस नेता को भाजपा में मिलाना है और उसके लिए किस घोटाले में आरोपी बना है और अगर भाजपा मेशामिल हो गए तो जाँच की फाइल को किसी कोने में रख कर भूल जाना है .
महाराष्ट्र में अजीत पवार के सरकार में शामिल होने के बाद उन्हें उप मुख्यमंत्री के पद से नवाजा गया साथ ही उनके साथ आये कई विधायको को भी मंत्री पद मिल गया . अब जो जाँच एजेंसिया उनके घोटाले को बेनकाब करने वाली थी जिस पुलिस के द्वारा उन्हें सलाखों के पीछे पहुँचाने वाली थी वही अब सेल्यूट करते दिखेंगे . क्या भारत के लोकतंत्र में उन्ही भ्रष्टाचारियो को सजा मिलेगी जिन्होंने भाजपा से दुरी बनाई या फिर पीएम मोदी जिस बात की गारंटी ले रहे है उस पर केन्द्रीय जाँच एजेंसिया अमल करेंगी . देश के प्रधानमंत्री ने कई सभाओ में यह बात कही तो क्या अब माना जाए कि भले ही अजीत पवार महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री हो गए एवं उनके साथीयों ने मंत्री पद की शपथ ले ली इसके बावजूद भी केन्द्रीय जाँच एजेंसिया उसी तत्परता से कार्य कर भ्रष्टाचार की जद में आये लोगो पर कड़ी कार्यवाही करेगी जिस तरह से दिल्ली के उप मुख्यमंत्री सिसोदिया के साथ किया .
अगर पीएम देश की जनता को भ्रष्टाचारियो पर कार्यवाही की गारंटी की बात सिर्फ दिखावे के लिए कार रहे है तो यह देश की जनता के साथ धोखा होगा अगर राष्ट्रहित में कर रहे है तो बहुत जल्दी अजित्त पवार और उनके साथ आये साथियो की जगह सलाखों के पीछे होगी अब देखना यह है कि पीएम मोदी की गारंटी दिखावा है या सच .....
एनसीपी के किन-किन लोगों ने ली महाराष्ट सरकार में शपथ
//अजित पवार - अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. वह बारामती सीट से विधायक हैं.
//छगन भुजबल - छगन भुजबल ने मंत्री पद की शपथ ली है. वह नासिक के येवला सीट से विधायक हैं.
//दिलिप राव वलसेपाटिल - मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने दिलिप राव वलसेपाटिल पुणे की अंबेगांव से विधायक हैं.
//हसन मियांलाल मुशरिफ - कैबिनेट मंत्री बने हसन मियांलाल मुशरिफ कोल्हापुर की कागल सीट से विधायक हैं.
//धनंजय पंडितराव मुंडे - कैबिनेट मंत्री बने धनंजय पंडितराव मुंडे बीड की परळी सीट से विधायक हैं.
//धर्माराव बाबा भगवंतरंव आत्राम - गड़चिरौली की अहेरी सीट से विधायक हैं.
//अदिति वरदा सुनीत तटकरे - श्रीवर्धन सीट से विधायक हैं.
//संजय शंकुलता बाबूराव बनसोड़े- लातूर की उदगीर सीट से विधायक हैं.
//अनिल भाईदास पाटिल - जलगांव की अमलनेर सीट से विधायक हैं.
आइये जानते हैं किस नेता के खिलाफ कौन से मामले हैं...
1. अजीत पवार -अजित पवार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के जांच की लंबी सूची है. इसमें सहकारी बैंक घोटाला और सिंचाई घोटाला मामला प्रमुख हैं. यहां तक की उनकी अपनी कंपनी पर भी भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है. प्रवर्तन निदेशालय ने साल 2021 में स्पार्कलिंग सॉइल प्रा.लि. के खिलाफ एक आरोप पत्र दायर कर किया था. हालांकि दायर चार्जशीट पर अजित पवार और उनकी पत्नी का नाम शामिल नहीं है लेकिन जिस कंपनी के खिलाफ शिकंजा कसा गया है वह अजित पवार और उनकी पत्नी की है.
सहकारी बैंक घोटाला: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में डिप्टी सीएम बने अजित पवार के खिलाफ महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक से दिए गए लोन में अनियमितताओं के आरोप हैं. इसी आरोप पर दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) के आधार पर वह आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच का सामना कर रहे थे. ईडी ने भी इसी संबंध में उनपर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए मामला दर्ज किया था.
इसके बाद साल नवंबर 2019 में, महा विकास अघाड़ी - कांग्रेस, राकांपा और अविभाजित शिवसेना का तीन-पक्षीय गठबंधन सत्ता में आया. उस दौरान अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया. डिप्टी सीएम बनने के एक साल के भीतर, सितंबर 2020 में, ईओडब्ल्यू ने कहा कि अजित पवार के खिलाफ किसी भी आपराधिक गलत काम का कोई सबूत नहीं मिला है और विशेष अदालत के समक्ष एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की.
ईडी ने साल 2020 में ईओडब्ल्यू के रुख का विरोध किया था लेकिन उसके हस्तक्षेप को विशेष अदालत ने खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, अगर ईओडब्ल्यू केस बंद हो जाता तो ईडी भी जांच जारी नहीं रख सकती थी. इससे पहले कि विशेष अदालत ईओडब्ल्यू की क्लोजर रिपोर्ट पर फैसला कर पाती, पिछले साल जून महीने में राज्य सरकार बदल गई.
इस बीच, ईडी ने अप्रैल में अपनी जांच में आरोप पत्र दायर किया. इस आरोप पत्र में बैंक और बैंक से लोन लेने वाली चीनी सहकारी समितियों को खरीदने वाली कुछ कंपनियों में अजित की भूमिका का जिक्र किया गया है. लेकिन उन्हें इन मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है.
2. छगन भुजबल-महाराष्ट्र के गवर्नर रमेश बैस ने बीते रविवार जिन 9 एनसीपी विधायकों को शपथ दिलाई है उनमें विधायकों में कईयों के खिलाफ ईडी की कार्रवाई चल रही है. छगन भुजबल भी उन्हीं विधायकों में शामिल हैं. छगन दो बार मुंबई के मेयर रह चुके हैं और उन्हें पवार के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है.
फिलहाल छगन पर साल 2006 में पीडब्ल्यूडी मंत्री रहते हुए 100 करोड़ की परियोजनाओं का कॉन्ट्रैक्ट देने में अनियमितता का मामला दर्ज है. छगन पर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की रिपोर्ट के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने अलग से भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था जिसमें साल 2016 में उनकी गिरफ्तारी हुई थी और साल 2018 में उन्हें हाईकोर्ट के आदेश पर जमानत भी मिल गई थी.इसके अलावा छगन भुजबल पर मुंबई विश्वविद्यालय भ्रष्टाचार मामले में एसीबी ने एक केस दर्ज किया था. जो अब तक विशेष अदालत में लंबित है.
3. हसन मुश्रीफ -मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने एनसीपी नेता हसन मुश्रीफ भी ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं. दरअसल उनपर सर सेनापति संताजी घोरपडे शुगर फैक्ट्री में अनियमितताओं का मामला दर्ज है. जिसकी जांच ईडी कर रही है.
4. धनंजय पंडितराव मुंडे -साल 2021 में एकनाथ शिंदे की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने धनंजय पंडितराव मुंडे के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज की गई थी. हालांकि मुंडे ने बलात्कार के आरोपों का खंडन किया था. कुछ दिन बाद महिला ने भी शिकायत वापस ले ली थी.
शपथ समारोह के बाद अजित पवार ने क्या कहा
अजित पवार और छगन भुजबल ने एनडीए में शामिल होने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमें प्रफुल्ल पटेल भी साथ बैठे नजर आए. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजीत पवार ने अपने फैसले पर बात करते हुए कहा, "हमने एनसीपी पार्टी के नाते शिंदे-फडनवीस सरकार में शामिल होने का फैसला लिया है."
उन्होंने आगे कहा, "हम देश का विकास चाहते हैं इसलिए एनडीए में शामिल हो रहे हैं. एनसीपी के सभी विधायक हमारे साथ हैं. हम अगले चुनाव में एनसीपी पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे. "
वहीं दूसरी तरफ प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छगन भुजबल ने कहा "हमें कुछ दिन पहले शरद पवार साहब ने कहा था कि मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर वापस आने वाले हैं. अगर ऐसा है तो एक सकारात्मक कदम लेते हुए हमने विकास के उद्देश्य से उनकी सरकार में शामिल होने का फ़ैसला लिया है."
उन्होने आगे कहा, "कई लोगों का कहना है कि हमारे नेताओं मे से कई लोगों के खिलाफ ईडी के केस चल रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है. शपथ लेने वाले नेताओं के नाम आप देख सकते हैं. हम सभी लोग मोदी के साथ जाना चाहते हैं."
शरद पवार ने क्या कहा
महाराष्ट्र की राजनीति में आए सियासी भूचाल पर एनसीपी चीफ शरद पवार ने भी बयान दिया. उन्होंने अजित पवार पर निशाना साधते हुए कहा, "एनसीपी किसकी है, ये लोग तय करेंगे." इसके अलावा शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर भी तंज कसते हुए कहा कि पार्टी ने जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, उन्हें ही अब अपने साथ ले लिया है. शरद आगे कहते हैं, 'मुझे खुशी है कि मेरे कुछ साथियों ने आज शपथ ली है. उनका सरकार (महाराष्ट्र) में शामिल होने से यह स्पष्ट है कि वे सभी आरोप मुक्त हो गए हैं.'
एकनाथ शिंदे ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद कहा, “अब एक मुख्यंमत्री और दो उपमुख्यमंत्री वाली सरकार तेज़ गति से काम करेगी. ये डबल इंजन वाली सरकार मोदी जी के नेतृत्व में चल रहा था. अब इसे ट्रिपल इंजन मिल गया है. अजीत पवार और उनके सभी सहयोगी का स्वागत करता हूं.” उन्होंने महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा, "लोकसभा चुनाव में चार-पांच सीटें उन्हें मिली थीं. इस बार उतनी भी रख पाएं तो बड़ी बात है."
नई दिल्ली / शौर्यपथ / पिछले 2 जुलाई को महाराष्ट्र में हुए राजनीतिक घटनाक्रम में शरद पवार गुट के कद्दावर नेता अजित पवार ने पाला बदलते हुए महाराष्ट्र सरकार के साथ हाथ मिला लिया और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ भी ले ली ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि अजित पवार ने अपना पाला बदला हो पिछले विधानसभा चुनाव के बाद भी अजीत पवार ने पाला बदलते हुए महाराष्ट्र में भाजपा के साथ हाथ मिला लिया था किंतु फिर अलग हो गए थे तब यह चर्चा जोरों पर थी कि अजित पवार के ऊपर केन्द्रीय जाँच एजेंसियों की जाँच का दबाव था और वह इन आरोपों से बचने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए थे किंतु उसके बाद बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में शिवसेना ,राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई महाराष्ट्र में सरकार बनते ही लगातार सरकार को अस्थिर करने की कोशिश जारी रही आखिरकार शिवसेना से अलग होकर एकनाथ शिंदे ने शिवसेना शिंदे गुट बनाकर भाजपा में शामिल हुए और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उप मुख्यमंत्री की भूमिका में आ गए अब एक बार फिर अजीत पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से अलग होकर शिवसेना एवं भाजपा के द्वारा सरकार में शामिल होकर उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली जोरों पर है कि एक समय भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के द्वारा अजित पवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जा रहे थे अब वही प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बन गया .
अजित पवार पर कई मामले जांच के घेरे में है अजीत पवार पर पूर्व में उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राजनीतिक वार करते हुए अजित दादा चक्की पीसिंग वाला ब्यान भी दे चुके हैं वहीं पिछले साल मार्च के महीने में आयकर विभाग ने रिश्तेदारों के घर पर छापा मारा था . मामला चीनी मिल से संबंधित था इस मामले पर बीजेपी नेता ने आरोप लगाए थे कि उनके खाते में 100 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्ति है राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सिंचाई मामले में अजीत परिवार को क्लीन चिट दे दी थी लेकिन मई 2020 में प्रवर्तन निदेशालय ने विदर्भ सिंचाई घोटाले मामले की नए सिरे से जांच शुरू की थी ऐसा नहीं है कि अजित पवार ही जांच के घेरे में है उनके साथ उनके बेटे पार्थ पवार की कंपनी पर भी आयकर विभाग ने छापा मारा था तब आयकर विभाग ने यह दावा किया था कि अजित पवार के रिश्तेदारों पर हुई इस छापेमारी में ₹184 करोड़ का बेनामी लेनदेन का पता चला .
अप्रैल 2023 में टाइम्स ऑफ इंडिया के राज्य सहकारी बैंक कंपनी के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया लेकिन उसकी चर्चा शुरू हो गई थी अब देखना यह है कि अजित पवार और उनके रिश्तेदारों के ऊपर केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जो जांच की जा रही थी उस पर विराम लग जाएगा या फिर केंद्रीय अब इस मामले पर अपनी जांच जारी रखेंगे. अजीत पवार के बगावत के बाद अब यह राजनितिक चर्चा भी जोरो पर है कि केंद्र की सरकार सत्ता पाने के लिए खुले आम केन्द्रीय जाँच एजेंसियों के जरियों नेताओं पर दबाव बनाने का कार्य कर रही है और सत्ता मिलने के बाद ऐसी जाँच ठन्डे बसते में जा रही है . क्या भारत में अब सत्ता के लिए केन्द्रीय जाँच एजेंसियों का सहारा लेकर भाजपा राज करना चाहती है ....
ये शायद भारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुर्भाग्य ही होगा जो भ्रष्टाचारी के आरोपों से घिरे है वह प्रदेश के मुखिया बने बैठे है . नैतिकता और सुशासन की बात कर सत्ता में काबिज होने वाली भाजपा महंगाई , विकास के मुद्दों को छोड़ कर क्या सिर्फ सत्ता के लिए केन्द्रीय एजेंसियों का उपयोग कर लोकतंत्र की निष्पक्षता पर वार नहीं कर रही है . आखिर अब भाजपा के नेता किस बिना पर कह सकेंगे की सुशासन आ रहा है विकास हो रहा है क्या जनता इन बातो का कभी आंकलन करेगी . आज देश का एक हिस्सा मणिपुर पिश्ले दो महीनो से जल रहा है जिस पर देश के पीएम दो शब्द भी नहीं कह सके . क्या यही लोकतंत्र है जिसे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का दर्ज़ा मिला है क्या इसी स्वतंत्र भारत के लिए शहीदों ने अपनी कुर्बानी दी थी .
रायपुर । शौर्यपथ । राजनीतिक पार्टियां नैतिकता की बात करती है तो सुनकर थोड़ा अजीब लगता है एक तरफ केंद्रीय नेतृत्व और पीएम मोदी अन्य दलों के सरकारों पर रेवरिया बांटने का आरोप लगा रही है वही देखा जाए तो मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा मुफ्त की योजनाओं का अंबार लग गया है अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ में उपमुख्यमंत्री के पद के लिए स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव का नाम फाइनल होने के बाद प्रदेश में विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी द्वारा डबल इंजन की सरकार का आरोप लगाकर कटाक्ष किया जाने लगा किंतु वही अगर देखा जाए तो महाराष्ट्र में राजनीतिक उलटफेर के चलते अब प्रदेश में एक मुख्यमंत्री और दो मुख्यमंत्री के साथ ट्रिपल इंजन की सरकार बन गई है । 2018 के विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन से सरकार बनी थी किंतु लगातार राजनीतिक उलटफेर के चलते पहले शिवसेना दो फाड़ हुई और महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने एवं भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उप मुख्यमंत्री के पद पर आसीन होकर महाराष्ट्र की सरकार चलाने लगे अब एक बार फिर राजनीतिक उलटफेर के चलते एनसीपी में दो फाड़ हुआ और महाराष्ट्र सरकार में एनसीपी से अलग हुए अजित पवार उप मुख्यमंत्री के पद पर आसीन होकर शिवसेना शिंदे गुट,भाजपा के साथ शामिल हो गए ।
महाराष्ट्र की राजनीति में हो रहे उलटफेर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जबरदस्त कटाक्ष करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में ट्रिपल इंजन की सरकार हो गई उन्होंने कहा कि यह सरकार नहीं आ जैसे ऑटो रिक्शा हो 3 चक्के वाला शपथ ग्रहण के दौरान मुख्यमंत्री शिंदे का चेहरा उतरा हुआ था सीएम बघेल ने कहा कि आज की जो घटना है आने वाले घटनाक्रम के संकेत दे रहा है मतलब अभी और बहुत कुछ बदलाव होगा ।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
