August 24, 2026
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    प्रधानमंत्री के हाथों 13 दिसंबर को इसके लोकार्पण का कार्यक्रम तय हो चुका है. इसके मुआयने के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार आ चुके हैं. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण पर पूरे जिले में आम लोगों की मदद से उत्सव का माहौल बनाया जाएगा.

    नई दिल्ली /शौर्यपथ/

     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  आज अपने ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर  का उद्घाटन करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं फेसबुक पर काशी विश्वनाथ धाम की तस्वीरें साझा कीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई हस्तियां पहले ही वाराणसी पहुंच चुकी हैं. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण को लेकर पूरे जिले में उत्सव का माहौल है. कॉरिडोर के उद्घाटन के साथ पीएम मोदी कई अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. उनका बीजेपी के पदाधिकारियों से भी मिलने का कार्यक्रम है.

    इसमें 13 और 14 दिसंबर को गंगा घाटों के साथ शहर की प्रमुख इमारतों की विशेष रूप से सजावट होगी और रोशनियां की जाएंगी. यही नहीं लोग अपने घरों में दीपक जलाएंगे और काशी के तमाम परिवारों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा.विश्वनाथ कॉरिडोर पहुंचाने पर आपका स्वागत सबसे पहले एक बड़ा दरवाजा करेगा. यह दरवाजा उस विश्वनाथ कॉरिडोर का द्वार खोलता है जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी. इस दरवाजे के आर पार लगभग 50000 वर्ग मीटर में इस इस भव्य कॉरिडोर का निर्माण किया गया. जिसका काम अब अंतिम चरण में है और इसके लोकार्पण की तैयारी जोरों पर है.

    वाराणसी के कमिश्नर दीपक अग्रवाल बताते हैं कि "माननीय प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा के अनुसार काशी विश्वनाथ धाम का भव्य उद्घाटन 13 तारीख को प्रस्तावित है. चूंकि यह पूरा का पूरा इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ने जा रहा है और करीब ढाई सौ साल के पश्चात काशी विश्वनाथ का पूरा जीर्णोद्धार प्रधानमंत्री के विजन के अनुसार किया गया है. जन सहभागिता के साथ कार्य कराया जाएगा, साथ ही काशी में हमारे जितने सार्वजनिक स्थान है, साज सज्जा लाइटिंग जन सहभागिता से 12, 13, 14 को दीप प्रज्वलन का कार्यक्रम किया जाएगा जिससे कि पूरे काशी में एक उत्सव सा माहौल हो."

     विश्वनाथ कॉरिडोर को दो भागों में बांटा गया है. मंदिर के मुख्य परिसर को लाल बलुआ पत्थर के द्वारा निर्मित किया गया है. इसमें 4 बड़े बड़े गेट लगाए गए हैं. इसके चारों तरफ एक प्रदक्षिणा पथ बनाया गया है. उस प्रदक्षिणा पथ पर 22 संगमरमर के शिलालेख लगाए गए हैं जिनमें काशी की महिमा का वर्णन होगा. काशी विद्वत परिषद् के महामंत्री मुख्य मंदिर परिसर के इस भाग के बारे में तफ्सील से बताते हैं कि "इसमें 22 शिलालेख ऐसे लगाए जा रहे हैं जिसमें भगवान विश्वनाथ से संबंधित स्तुतियां हैं और आद्य शंकराचार्य ने जिन स्तुतियों का गान किया है वो हैं. अन्नपूर्णा स्त्रोत है और जिन स्तुतियों को भगवान शंकर ने गान किया है, उन स्त्रोतों को लगाया जा रहा है. बाकी भगवान शिव ने यहां पर 56 विनायक भेजा, द्वादश आदित्य भेजा. उनके संदर्भ में कैसे है काशी में पंचनद है, काशी में पंचतीर्थ है, काशी में भगवान शिव की बारात कैसे निकलती है, भगवान विश्वनाथ काशी में पहली बार कब आए, भगवान शिव पार्वती का विवाह का उल्लेख है, ऐसे 24 पैनल बन रहे हैं.

     मंदिर के द्वार की दूसरी तरफ 24 भवनों का एक बड़ा कैम्पस बन रहा है जिसका मुख्य दरवाजा गंगा की तरफ ललिता घाट से आयेगा. इस परिसर में वाराणसी गैलरी काफी महत्वपूर्ण है. विश्वनाथ धाम के विस्तारीकरण और विकास के दौरान कुछ घरों से निकली मूर्तियां, पुराने घरों से निकले नक़्क़ाशीदार दरवाजे, खिड़कियों को भी धरोहर के रूप में वाराणसी गैलरी में प्रदर्शित करने की योजना है. काशी की आध्यात्मिक परंपरा को भी गैलरी में प्रदर्शित किया जाएगा.


    इसके अलावा यात्रियों के सुविधा के भवन होंगे काशी विश्वनाथ मंदिर के कार्यपालक सुनील वर्मा के मुताबिक़, "काशी विश्वनाथ धाम का काम लगभग पूर्णता की ओर है. पूरे धाम में लगभग 50000 वर्ग मीटर में 24 भवन बनाए जा रहे हैं जिसमें मुख्य मंदिर परिसर, मंदिर चौक, मुमुक्षु भवन, सिटी गैलरी, जलपान के मल्टीपरपज हॉल, यात्री सुविधा केंद्र, इत्यादि भवन जो यहां के बड़े खूबसूरती साथ ही साथ गंगा स्थित गंगा व्यू कैफे, गंगा व्यू गैलरी बनाई जा रही है जिससे मां गंगा की सुंदर छटा दिखाई देगी. इस प्रोजेक्ट को बनाने का पूरा उद्देश्य एकमात्र यह था कि काशी के अध्यात्म, काशी की वास्तु कला को उठाते हुए पूरे प्रोजेक्ट में एक दिव्य अनुभूति कराते हुए श्रद्धालुओं को धार्मिक भाव जगाने का काम.''

     काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जिस बुनियाद पर साकार हो रहा है उसमें तकरीबन 400 मकान और सैकड़ों मंदिर और लगभग 1400 लोगों को पुनर्वासित करना पड़ा है. इसके बारे में काशी विश्वनाथ मंदिर के कार्यपालक सुनील वर्मा खुद कहते है कि, "जब परियोजना शुरू की गई थी तो काफी चुनौतियां थी. यह जो मंदिर है वह काफी घनी आबादी में बसा हुआ था.

    हम लोगों ने लगभग 400 परिसंपत्ति क्रय की, लगभग 1400 लोगों का पुनर्वास किया जिसमें विभिन्न प्रकार के दुकानदार, मकान मालिक शामिल रहे. साथ ही साथ इस प्रोजेक्ट को बनाने में यह भी चुनौती थी कि जितने संभावित रास्ते हैं उनको यथावत रखते हुए जो परिसंपत्ति मंदिर प्राप्त हुए उनको यथावत रखते हुए इस प्रोजेक्ट को बनाया जाए.

    हम लोग तय समय में इसे बनाने में कामयाब रहे. प्राचीन मंदिरों का भी हम लोग जीर्णोद्धार करा रहे हैं. यहां यह भी है कि काशी खंड उतने ही वर्णित मंदिर से नहीं मिल रहे थे, उनको भी हम लोग स्थापित करा रहे हैं. कुछ भी घरों से प्राप्त हुए थे उनको भी हम लोग स्थापित करा रहे हैं. ऐसे 27 मंदिरों की स्थापना करा रहे हैं. इस पूरे का उद्देश्य है कि बाबा अपने पूरे देवकुल के साथ पूरे धाम में विराजमान जो भी श्रद्धालु और भक्त आ रहे हैं वह अपने पूरे धार्मिक क्रियाकलाप कर सकें.''

    कॉरिडोर निर्माण में जिन 400 मकानों को अधिग्रहित किया था उसमें प्रशासन के मुताबिक़ काशी खण्डोक्त 27 मंदिर मिले थे जबकि लगभग 127 अन्य मंदिर प्राप्त हुए थे जो प्रसिद्ध मंदिर थे. उन मंदिरों का भी संरक्षण किया जा रहा है जो काशी खंडोकता मंदिर हैं. उनको उसी तरह से जीर्णोद्धार करके संरक्षित करने का मंदिर प्रशासन पूरा प्रयास कर रहा है. इसके लिये पूर्व के सरस्वती द्वार के पास एक 27 मंदिरों की मणिमाला बनाई जाएगी जिसमें उन प्राप्त मंदिरों को स्थापित करने की योजना है. इस पर काम चल रहा है और ये दूसरे चरण में होगा.

     गौरतलब है कि सन 1669 में अहिल्याबाई होल्कर ने काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनरुद्धार कराया था. उसके लगभग 352 वर्ष बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके पुनरुद्धार के लिए 8 मार्च 2019 को विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का शिलान्यास किया था. लगभग 2 साल 8 महीने में इस ड्रीम प्रोजेक्ट का 95% कार्य पूरा कर लिया गया है. वर्तमान समय में इस कॉरिडोर में 2600 मजदूर और 300 इंजीनियर लगातार तीन शिफ्ट में काम कर रहे हैं.

     

     

     

     

     

    पीएम मोदी द्वारा गंगा एक्सप्रेस-वे की आधारशिला रखने का जिक्र करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, ''प्रधानमंत्री 18 दिसंबर को गंगा एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास करेंगे. उस वक्त कुछ लोग कहेंगे कि उन्होंने देखा था. नींव रखने का सपना देखा, लेकिन निर्माण नहीं कर सका."

    लखनऊ /शौर्यपथ/

    काशी विश्वनाथ कॉरिडोर  का उद्घाटन होने से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने रविवार को विपक्षी दलों पर जोरदार हमला किया और पूछा कि क्या कांग्रेस ने इस धाम का निर्माण करवाया है या बुआ और बबुआ ने? काशी विश्वनाथ धाम एक बड़ी परियोजना है जिससे वाराणसी में पर्यटन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (सोमवार, 13 दिसंबर) उसका लोकार्पण करने वाले हैं.

     एटा में बीजेपी के ब्रज क्षेत्र के "बूथ अध्यक्षों" की बैठक को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, "प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के बीच में महत्वाकांक्षी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को लोगों को समर्पित करने जा रहे हैं. क्या कांग्रेस या "बुआ" (बसपा प्रमुख मायावती का जिक्र करते हुए) ने काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण किया है? या "बबुआ" (सपा प्रमुख अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए) ने भगवान शिव के गीत गाए हैं?"

    इससे पहले अखिलेश यादव ने दावा किया था कि उनके कार्यकाल के दौरान परियोजना को मंजूरी दी गई थी और इसके दस्तावेजी सबूत भी हैं. यादव के इस बयान के बाद योगी की टिप्पणी आई है. समाजवादी पार्टी के नेता ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विफलता से लोगों का ध्यान हटाने के लिए गलियारे की शुरुआत के लिए कार्यक्रमों की एक श्रृंखला तैयार की है.

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने COVID-19 महामारी के दौरान लोगों के लिए कुछ भी ठोस नहीं करने के लिए प्रतिद्वंद्वी दलों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, "बीजेपी COVID-19 महामारी के दौरान काम कर रही थी लेकिन कांग्रेस कहाँ थी? बसपा कहाँ थी? और बबुआ के बारे में क्या कहा जा सकता है? इन लोगों का कोई अता-पता नहीं था.

    मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, "वे सभी होम क्वारंटाइन में थे और अपने घरों में आराम कर रहे थे. वे दुष्प्रचार कर रहे थे, और दुष्प्रचार के साथ लोगों के जीवन के साथ खेल रहे थे."

     पीएम मोदी द्वारा गंगा एक्सप्रेस-वे की आधारशिला रखने का जिक्र करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, ''प्रधानमंत्री 18 दिसंबर को गंगा एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास करेंगे. उस वक्त कुछ लोग कहेंगे कि उन्होंने देखा था. नींव रखने का सपना देखा, लेकिन निर्माण नहीं कर सका."

     

     

     

    गुरुग्राम में पिछले तीन महीने से चल रहा खुले में नमाज का विवाद अब थमता नजर आ रहा है. अब दोनों पक्षों ने गुरुग्राम के जिला उपायुक्त और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर आपसी सहमति बनाई है

    गुरुग्राम /शौर्यपथ/

      हरियाणा के गुरुग्राम में अब सार्वजनिक जगहों पर नमाज नहीं होगी. इसके लिए आदेश पहले ही आ चुके हैं. आज शुक्रवार को जुमे की नमाज होती है. इसे लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का सख्त रुख देखने को मिला है. सीएम खट्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि खुले में नमाज नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि खुले में नमाज बर्दाश्त नहीं कि जाएगी. मुस्लिम समाज के लोग खुले में नमाज ना करें, भले ही वो अपने घर मे नमाज करें. जिला प्रशासन नमाज को लेकर बातचीत कर रहा है.

    इससे पहले गुरुग्राम उपायुक्त ने बीते सोमवार को कहा था कि मुस्लिम और हिन्दू समाज के लोगों की बैठक बुलाई गई, जिसमें कई फैसले लिए गए. अब नमाज़ का विरोध नहीं होगा. इसमें तय हुआ कि अब सार्वजनिक जगहों पर नमाज़ नहीं होगी. जुमे की नमाज़ 12 मस्जिदों में होगी. छह सार्वजनिक जगहों पर नमाज़ पढ़ने के लिए किराया देना होगा. वक़्फ़ बोर्ड की ज़मीन उपलब्ध होते ही 6 जगहों पर नमाज़ बंद कर दी जाएगी.

    गुरुग्राम में पिछले तीन महीने से चल रहा खुले में नमाज का विवाद अब थमता नजर आ रहा है. अब दोनों पक्षों ने गुरुग्राम के जिला उपायुक्त और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर आपसी सहमति बनाई है कि विवाद वाले स्थान जैसे कि सेक्टर-37, सेक्टर-47 और सरहौल गांव में नमाज अता नहीं की जाएगी.

    बीते सोमवार को लिए गए इस फैसले का मुस्लिम समुदाय ने भी स्वागत किया था. जिला प्रशासन व संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ बनी इस सहमति पर मुस्लिम समाज ने संतोष जताया था. साथ ही यह भी कहा था कि कुछ लोग इस तरह की अफवाहें फैला रहे थे कि गुरुग्राम में नमाज का विरोध होता है वो बिलकुल गलत है. मुस्लिम समुदाय को कभी भी नमाज अता करने के लिए नहीं रोका गया.

     

     

     

     

     

    सीएम खट्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 'खुले में नमाज' नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि 'खुले में नमाज' बर्दाश्त नहीं कि जाएगी. मुस्लिम समाज के लोग 'खुले में नमाज' न करें, भले ही वो अपने घर मे नमाज करें.

    पटना /शौर्यपथ/

      गुरुग्राम से शुरू हुआ 'खुले में नमाज पर विवाद' अब बिहार तक पहुंच गया है. शनिवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 'खुले में नमाज' पर रोक लगाने के लिए प्रशासन को सख्त निर्देश दिए थे. इस मुद्दे पर जब बिहार में कुछ पत्रकारों ने भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल से प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि वो सीएम खट्टर के फैसले का समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा कि वो नीतीश सरकार से मांग करेंगे कि बिहार में भी 'खुले में नमाज' पढ़ने पर रोक लगाई जाए.

    उन्होंने कहा कि, "वो निश्चित रूप से बिहार में खुले में शुक्रवार को नमाज पढ़ने पर रोक लगाएंगे. ये लोग जो 'खुले में नमाज' पढ़ने के चक्कर में सड़कों पर जाम लगा देते हैं, अगर लोगों की आस्था है तो घर में नमाज पढ़ें. मस्जिद क्यों बनाया गया है? उन्हें मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ना चाहिए, इसलिए मनोहर खट्टर ने जो भी किया है वो धन्यवाद के पात्र हैं." उन्होंने एक और सवाल का जवाब देते हुए कहा, "अगर समय रहते इन सब चीजों को नहीं रोका गया तो जरूर महौल तनावपूर्ण हो जाएगा. 75 वर्ष पहले भारत-पाक का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था, और आज वो मुद्दा वहीं के वहीं है. अगर हम लोग नहीं संभलें तो आने वाली पीढ़ियां माफ नहीं करेगी."

    बता दें कि गुरुग्राम के सेक्टर 37 में 'खुले में नमाज पर विवाद' बीते तीन महीने से चल रहा है. कई बार दोनों पक्षों की तरफ से लगा कि इसका कोई समाधान निकल जाएगा. लेकिन हर शुक्रवार को गुरुग्राम के सेक्टर 37 के विवादित स्थल को लेकर नया मामला सामने आता रहा. अब आखिरकार सीएम मनोहर लाल खट्टर के सख्त निर्देश पर पूरे हरियाणा में सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाई गई है.

    सीएम खट्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 'खुले में नमाज' नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि 'खुले में नमाज' बर्दाश्त नहीं कि जाएगी. मुस्लिम समाज के लोग 'खुले में नमाज' न करें, भले ही वो अपने घर मे नमाज करें. जिला प्रशासन नमाज को लेकर बातचीत कर रहा है. इससे पहले गुरुग्राम उपायुक्त ने बीते सोमवार को कहा था कि मुस्लिम और हिन्दू समाज के लोगों की बैठक बुलाई गई, जिसमें कई फैसले लिए गए. अब नमाज़ का विरोध नहीं होगा. इसमें तय हुआ कि अब सार्वजनिक जगहों पर नमाज़ नहीं होगी. जुमे की नमाज़ 12 मस्जिदों में होगी. छह सार्वजनिक जगहों पर नमाज़ पढ़ने के लिए किराया देना होगा.

     वहीं, 'खुले में नमाज विवाद' पर ही नोएडा के थाना सेक्टर 24 क्षेत्र के सेक्टर 54 स्थित खरगोश पार्क में शुक्रवार को जुमे की नमाज अदा करने पहुंचे सैकड़ों लोगों को पुलिस ने लौटा दिया. पुलिस ने पार्क के पास बने मजार में नमाज पढ़ने की अनुमति दी. पुलिस के प्रवक्ता पंकज कुमार ने बताया कि सार्वजनिक स्थान पर धार्मिक गतिविधियां करने की अनुमति नहीं है. जनपद में धारा 144 लागू है.

    उन्होंने बताया कि सेक्टर 54 स्थित खरगोश पार्क में सेक्टर 57, 58 59, और 60 की फैक्टरियों में काम करने वाले लोग नमाज पढ़ने आते हैं. धीरे-धीरे इनकी संख्या हजारों में हो गई. प्रवक्ता ने बताया कि जनपद में धारा 144 लागू है तथा सार्वजनिक स्थान पर धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं है. इसलिए पुलिस ने नमाज पढ़ने आए लोगों को वहां से लौटा दिया. उन्होंने बताया कि नमाज पढ़ने के लिए धार्मिक स्थल चिन्हित है. लोगों से अपील की गई कि वे वहीं पर जाकर नमाज पढ़ें.

     

     

     

     


    पिछले काफी समय से एक नाम लगातार चर्चा में चल रहा है और वो हैं बलबीर सिंह राजेवाल. ये नाम किसान आंदोलन के चलते सामने आया है. राजेवाल निर्विवाद रूप से पंजाब के किसानों के बड़े नेता हैं.

    नई दिल्ली /शौर्यपथ/

     पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव  होने हैं और ऐसे में राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी आम आदमी पार्टी पूरी ताकत से चुनाव प्रचार में लगी हुई है, लेकिन आम आदमी पार्टी से यह सवाल लगातार पूछा जा रहा है कि इन चुनावों के लिए उसका मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन होगा? पिछले काफी समय से एक नाम लगातार चर्चा में चल रहा है और वो हैं बलबीर सिंह राजेवाल . ये नाम किसान आंदोलन के चलते सामने आया है. राजेवाल निर्विवाद रूप से पंजाब के किसानों के बड़े नेता हैं. पिछले 1 साल से दिल्ली की सरहदों पर बैठकर केंद्र सरकार के साथ हर बातचीत में बलबीर सिंह राजेवाल शामिल रहे हैं.

    अब सरकार ने किसानों की मांगें मान ली हैं तो किसानों ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर दी है, जिसके बाद शुक्रवार को किसानों ने गुरुद्वारा  बंगला साहिब जाकर मत्था टेका.  दिया.

    सवाल: चर्चा है कि कहीं आम आदमी पार्टी के पंजाब में सीएम कैंडिडेट आप तो नहीं होंगे?

    जवाब: मुझे तो किसी ने अप्रोच ही नहीं किया. यह बाहर ही चर्चा हो रही है.

    सवाल: अच्छा! एप्रोच नहीं किया!

    जवाब: नहीं मुझे नहीं किया

    सवाल: अच्छा अगर अप्रोच करते हैं तो?

    राजेवालः नहीं सोचा ही नहीं अभी तक, घर तो जाने दो 1 साल से यहां पर बैठे हुए हैं हम तो अभी घर ही नहीं गए.

    सवाल: लेकिन आप यह कह रहे हैं कि अभी इस बारे में नकार नहीं रहे हैं किसी भी संभावना को?

    जवाब: कुछ भी हो सकता है. लोगों की बात के मुताबिक होता है, लेकिन हमने इस बारे में सोचा नहीं है. हमने पहले से ही तय कर लिया था कि कोई भी पॉलिटिकल बात नहीं करेगा और जब आंदोलन समाप्त होगा उसके बाद बैठेंगे फिर देखेंगे क्या करना है क्या नहीं.

    इस बातचीत में किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल आप के मुख्यमंत्री उम्मीदवार की बात को स्वीकार भी नहीं कर रहे हैं और नकार भी नहीं रहे हैं, लेकिन राजेवाल से हुई पूरी बातचीत से ऐसा लगता है कि अभी आगे के विकल्प खुले हुए हैं.

    राजेवाल ने खास बातचीत में बताया कि ‘ सैद्धांतिक तौर पर मैं यह समझता हूं कि राजनीतिक लोगों में जिस तरह की धारणा बन गई है यह देश के लिए अच्छी नहीं है. आज राजनीति कोई सेवा का माध्यम नहीं रह गई है बल्कि व्यापार हो गई है जिसमें लोग निवेश करते हैं और उसके बाद कमाते हैं. किसी राजनेता का मन यह नहीं होता कि जो लोग मुझको चुन कर भेज रहे हैं उनकी समस्याएं क्या हैं उनके लिए हमको क्या करना है उनके लिए कानून बनवाना है, नीतियां बनानी है, उसमें मैं क्या सहयोग कर सकता हूं. यह राजनेताओं के एजेंडे पर नहीं होता. वह केवल 15 दिन हाथ जोड़ते हैं, पैसे खर्च करते हैं और उसके बाद 5 साल लोगों के हाथ बंधवाते हैं और लोगों को लूटते हैं और जितने सरकारी अधिकारी हैं वह लोगों को लूटने में लगे रहते हैं लोगों को इंसाफ नहीं मिलता। तो यहां तक तो मैं सहमत हूं कि इसमें बदलाव आना चाहिए.'

    आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी के पंजाब के मुख्यमंत्री उम्मीदवार पद के लिए भगवंत मान का नाम भी संभावितों में है. भगवंत आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के मुखिया हैं. दो बार संगरूर से लोकसभा के सांसद हैं. सबसे अहम बात यह कि 2019 में जब आम आदमी पार्टी कहीं पर भी चुनाव जीतने में नाकाम रही तब भगवंत मान ने संगरूर लोकसभा सीट दोबारा जीतकर लोकसभा में आम आदमी पार्टी का खाता खुलवाया था. आजकल पंजाब में आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के कार्यक्रमों के दौरान भगवंत मान को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर समर्थन देते हुए नारे लगते रहते हैं.

     

     

     

     

    प्रधानमंत्री ने बलरामपुर में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "जब मैं आज दिल्ली से चला तो सुबह से इंतजार कर रहा था कि कब कोई आएगा, कहेगा कि मोदी जी इस योजना का फीता तो हमने काटा था, ये योजना तो हमने शुरू की थी.

    नई दिल्ली /शौर्यपथ/

     यूपी के सरकारी समारोह से पीएम मोदी के हमले के बाद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पलटवार किया है. सरकारी कार्यक्रम में पीएम मोदी द्वारा राजनीतिक हमला किए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  ने पलटवार करने में देर नहीं लगाई. सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी गैर राजनीतिक मंच का इस्तेमाल सियासी मकसद पूरा करने के लिए कर रही है. अखिलेश ने कहा कि परियोजनाओं के उद्घाटन के लिए सरकारी बसों में भर-भर कर भीड़ को जुटाया जा रहा है. लेकिन पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनात इन्हीं मंचों से राजनीतिक हमले कर रहे हैं.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने शनिवार को 9,800 करोड़ रुपये की सरयू नहर परियोजना  को राष्ट्र को समर्पित किया. इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश में बीजेपी के प्रतिद्वंद्वी दलों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह इंतजार कर रहे थे कि कब कोई इस परियोजना का क्रेडिट लेने के लिए दावा करेगा. प्रधानमंत्री मोदी का यह कमेंट समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव  के उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने दावा किया था यह योजना सपा सरकार के समय में ही तीन चौथाई बन चुकी थी.

    प्रधानमंत्री ने बलरामपुर में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "जब मैं आज दिल्ली से चला तो सुबह से इंतजार कर रहा था कि कब कोई आएगा, कहेगा कि मोदी जी इस योजना का फीता तो हमने काटा था, ये योजना तो हमने शुरू की थी. कुछ लोग हैं जिनकी आदत है ऐसा कहने की, हो सकता है कि बचपन में इस योजना का फीता उन्होंने ही काटा हो.

    उन्होंने कहा कि सरयू नहर परियोजना में जितना काम 5 दशक में हो पाया था, उससे ज्यादा काम हमने 5 साल से पहले करके दिखाया है. यही डबल इंजन की सरकार है. यही डबल इंजन की सरकार के काम की रफ्तार है.

    इससे पहले, आज सुबह समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, "सपा के समय तीन चौथाई बन चुकी ‘सरयू राष्ट्रीय परियोजना' के शेष बचे काम को पूर्ण करने में उप्र भाजपा सरकार ने पांच साल लगा दिए. 22 में फिर सपा का नया युग आएगा… विकास की नहरों से प्रदेश लहलहाएगा!"

    पीएम मोदी ने कहा कि देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत  का जाना हर भारत प्रेमी के लिए बहुत बड़ी क्षति है. जनरल बिपिन रावत जितने जांबाज थे, देश की सेनाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जितनी मेहनत करते थे, पूरा देश उसका साक्षी है. उन्होंने कहा कि भारत दुख में है, लेकिन दर्द सहते हुए भी हम ना अपनी गति रोकते हैं और ना प्रगति. भारत रुकेगा नहीं, भारत थमेगा नहीं.

    विपक्ष पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "पहले जो सरकार में थे, वो माफिया को संरक्षण देते थे. आज योगी जी की सरकार माफिया की सफाई में जुटी है. तभी तो यूपी के लोग कहते हैं कि फर्क साफ है. पहले यूपी की बेटियां घर से बाहर निकलने से पहले 100 बार सोचने के लिए मजबूर थीं. आज अपराधी गलत काम करने से पहले 100 बार सोचता है. तभी तो यूपी के लोग कहते हैं- फर्क साफ है.

     

     

    अन्नाद्रमुक (AIADMK) सरकार ने जयललिता के परिवार से परामर्श किए बिना घर पर कब्जा ले लिया था और इमारत को स्मारक में बदल दिया था.

    चेन्नई /शौर्यपथ/

     तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता  की भांजी दीपा जयकुमार को कानूनी लड़ाई के बाद अपनी आंटी और दिवंगत नेता के पॉश गार्डन स्थित घर का शुक्रवार को कब्जा मिल गया. चेन्नई जिला प्रशासन ने उन्हें घर की चाबियां सौंपी. दीपा  ने कहा, "यह पहली बार है जब मैं अपनी आंटी की अनुपस्थिति में इस घर में कदम रख रही हूं. यह घर अब खाली और बेजान नजर आता है. जयललिता के घर में रहने की इच्छा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि मेरी आंटी द्वारा इस्तेमाल किए गए फर्नीचर को हटा दिया गया है.

    मद्रास उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 24 नवंबर के अपने फैसले में जयललिता के आवास ‘वेद निलयम' को अधिग्रहण करने के आदेश को रद्द कर दिया था और इसे कानूनी वारिसों को सौंपने का आदेश दिया था. अदालत के इस आदेश के बाद दीपा को मकान की चाबियां दी गईं.

    पूर्ववर्ती अन्नाद्रमुक (AIADMK) सरकार ने जयललिता के परिवार से परामर्श किए बिना घर पर कब्जा ले लिया था और इमारत को स्मारक में बदल दिया था.

    दीपा और उनके भाई दीपक ने पूर्ववर्ती एआईएडीएमके सरकार द्वारा बंगले के अधिग्रहण को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की थी. याचिका पर कोर्ट का यह फैसला आया. मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह प्रॉपर्टी उनके (दीपा और उसके भाई) पास जानी चाहिए.

     अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सरकार द्वारा अधिग्रहण अवैध था. कोर्ट ने कहा, "इस अधिग्रहण में कोई सार्वजनिक हित नहीं है ... कुछ किलोमीटर दूर मरीना बीच पर पहले से ही जयललिता का स्मारक है. ऐसी कौन सी प्रेरक कहानी है जो वेद निलयम दे सकती है, लेकिन मरीना बीच स्मारक नहीं?

     

     

     

     

     देश विदेश /शौर्यपथ/ 

    योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को याद करते हुए कू पर लिखा, भारत के पूर्व राष्ट्रपति, सरल व सहज राजनेता, शुचिता एवं कर्मठता के प्रतीक, ’भारत रत्न’ प्रणब मुखर्जी जी को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि.

    भारत के पूर्व राष्ट्रपति (Former President) प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) की आज 86वीं जयंती है. वे भारत के 13वें राष्ट्रपति थे. उनका जन्म 11 दिसंबर, 1935 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक छोटे से गांव मिराती के एक साधारण से परिवार में हुआ था. उनके पिता कामदा किंकर मुखर्जी स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी मां का नाम राजलक्ष्मी था. प्रणब मुखर्जी के पिता भी कांग्रेसी नेता थे और आजादी की लड़ाई में कई बार जेल गए. उनका राजनीतिक जीवन 40 सालों से भी ज्यादा लंबा रहा है. कांग्रेस पार्टी में रहते हुए उन्होंने विदेश से लेकर रक्षा, वित्त और वाणिज्य मंत्री तक की भूमिका निभाई. उन्होंने भारतीय राजनीति को बहुत लंबे समय तक, बहुत करीब से देखा.

    आज उनकी जयंती के खास मौके पर पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है और उन्हें याद कर रहा है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नितिन गडकरी और केशव प्रसाद मौर्या ने भी कू पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है.

     योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को याद करते हुए कू पर लिखा, भारत के पूर्व राष्ट्रपति, सरल व सहज राजनेता, शुचिता एवं कर्मठता के प्रतीक, 'भारत रत्न' प्रणब मुखर्जी जी को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि.

    नितिन गडकरी ने भी कू पर देश के पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि.

     केशव प्रसाद मौर्या ने भी उन्हें याद करते हुए लिखा, भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति एवं भारतरत्न से सम्मानित प्रणब मुखर्जी जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन.

    उन्होंने कूटनीतिक स्तर पर भी अहम भूमिकाएं निभाईं. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा से लेकर गुटनिरपेक्ष विदेश मंत्रियों के सम्मेलन सहित कई सम्मेलनों में भारत का नेतृत्व किया. प्रणब मुखर्जी को 2019 में भारत सरकार ने भारत रत्न से नवाजा था. इसके पहले 2008 में उन्हें भारत के दूसरे सर्वोच्च पुरस्कार पद्म विभूषण से नवाजा गया था. इसके अलावा वो सर्वोत्तम सांसद और प्रशासक भी रह चुके थे. उन्हें दुनियाभर के विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट की उपाधियां मिली हुई थीं.

     

     

     

     

    वरिष्ठता के क्रम में थलसेना अध्यक्ष जनरल एमएम नरवाणे सबसे ऊपर हैं और इसीलिए उन्हें इस पद का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है, लेकिन इस पद पर वरिष्ठता इकलौती कसौटी नहीं हो सकती है.

    नई दिल्ली /शौर्यपथ/

     देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत  का बुधवार को हेलीकॉप्टर दुर्घटना  में निधन हो गया था. उनके निधन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि देश का अगला सीडीएस  कौन होगा. देश में सेना के सबसे बड़े पद को ज्यादा वक्त तक खाली भी नहीं रखा जा सकता है. वरिष्ठता के क्रम में थलसेना अध्यक्ष जनरल एमएम नरवाणे  सबसे ऊपर हैं और इसीलिए उन्हें इस पद का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है, लेकिन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी और नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरिकुमार भी इस पद के दावेदार हैं, क्योंकि इस पद पर वरिष्ठता इकलौती कसौटी नहीं हो सकती है.

    यदि जनरल नरवाणे को सीडीएस बनाया जाता है तो थलसेना प्रमुख का ओहदा खाली हो जाएगा. इस पद के दो प्रमुख दावेदार हैं. इनमें से एक हैं सह सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती और दूसरे हैं उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वायके जोशी. बहरहाल जो भी हो इसकी एक पूरी प्रक्रिया है.


      क्या है सीडीएस नियुक्ति की प्रक्रियाः-

    - पहले रक्षा मंत्रालय तीन वरिष्ठ अफसरों के नाम नियुक्ति कमेटी ऑफ कैबिनेट को भेजेगी.

    - इस कमेटी में पीएम और गृह मंत्री होते हैं.

    - सरकार फिलहाल कोई कार्यकारी सीडीएस भी चुन सकती है

     

     

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