January 23, 2026
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय खाद्य मंत्री श्री गोयल से की मुलाकात
राज्य के किसानों के हित में एफसीआई में 40 लाख मैट्रिक टन चावल खरीदी की मांग रखी

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल से नई दिल्ली के रेल भवन में मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के किसानों के हित में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में केन्द्रीय पूल अंतर्गत 40 लाख मैट्रिक टन उपार्जित किये जाने की अनुमति देने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि धान की खेती छत्तीसगढ़वासियों की आजीविका का प्रमुख साधन है। प्रदेश में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन विकेन्द्रीकृत उपार्जन योजना के अंतर्गत खाद्य विभाग भारत सरकार के साथ हुए एमओयू के तहत की जाती है। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से चावल उपार्जन पर पूर्व की 60 लाख मैट्रिक टन चावल केन्द्रीय पूल में लिये जाने की सैद्धांतिक सहमति पर अमल करते हुये एफसीआई में 40 लाख मैट्रिक टन चावल खरीदी करने की मांग की।
मुख्यमंत्री बघेल ने केन्द्रीय मंत्री गोयल को बताया कि प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर 20.53 लाख किसानों से 92 लाख मैट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया है। श्री बघेल ने कहा है कि एमओयू की कंडिका 18 के तहत उपार्जित धान में से राज्य की पीडीएस की आवश्यकता के अतिरिक्त चावल का स्टॉक भारतीय खाद्य निगम को प्रदाय किये जाने के निर्देश हैं, अतः उक्त प्रावधानों के तहत भारत सरकार द्वारा राज्य की आवश्यकता के अतिरिक्त शेष समस्त सरप्लस धान का अनुपातिक चावल 40 लाख मैट्रिक टन को भारतीय खाद्य निगम में केन्द्रीय पूल अंतर्गत लिया जाए।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के लिए भारत सरकार की खाद्य सचिवों की बैठक में छत्तीसगढ़ के लिए 60 लाख मैट्रिक टन चावल केन्द्रीय पूल में लिये जाने की सैद्धांतिक सहमति दी गई है, किंतु खाद्य विभाग भारत सरकार द्वारा भारतीय खाद्य निगम में केन्द्रीय पूल अंतर्गत 24 लाख मैट्रिक टन चावल (16 लाख मैट्रिक टन उसना एवं 8 लाख मैट्रिक टन अरवा) ही लिये जाने की अनुमति प्रदान की गई है। उन्होने कहा कि केंद्र सरकार अपने पूर्व की दी गई सहमति पर अमल करते हुये एफसीआई में 40 लाख मैट्रिक टन चावल की खरीदी करे। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने पुराने जूट बारदाने में चावल उपार्जन की अनुमति, भारत सरकार द्वारा लंबित खाद्य सब्सिडी की प्रतिपूर्ति की मांग भी रखी। इस मौके पर मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी और खाद्य विभाग के सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह उपस्थित रहे।

रायपुर / शौर्यपथ / कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर लोगों के मन में झिझक को काम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि वैक्सीन सुरक्षा एवं असर के तमाम आंकड़ों पर खरी उतरी है जिसके बाद ही सरकार द्वारा इसके प्रयोग की अनुमति प्रदान की गयी है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने वैक्सीन के सुरक्षित होने एवं इसकी प्रभावशीलता से सम्बंधित आंकड़ों की जांच के उत्कृष्ट नतीजों के आधार पर ही वैक्सीन को मंजूरी दी है उसके बाद ही विभाग द्वारा वैक्सीनेशन आरम्भ किया गया है। कोरोना की वैक्सीन लगवाना स्वैच्छिक है हालांकि स्वयं की सुरक्षा और बीमारी के प्रसार को सीमित करने के लिए कोरोना वैक्सीन की दो डोज आवश्यक है ।
ड्रग नियामक द्वारा कठिन जांच के बाद ही मिलता है वैक्सीन प्रयोग का लाइसेंस
आम लोगों पर किसी भी वैक्सीन के प्रयोग से पहले वैक्सीन कंपनी द्वारा किये गए समस्त परीक्षणों की जांच ड्रग नियामक द्वारा की जाती है जांच के परिणाम उत्साहवर्धक होने के पश्चात ही दवा कंपनी को वैक्सीन के प्रयोग का लाइसेंस प्रदान किया जाता है इसलिए सभी लाइसेंस प्राप्त कोरोना वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावकारी है।
देश में शुरू की गई कोरोना वैक्सीन उतनी ही प्रभावी है जितनी अन्य देशों द्वारा विकसित वैक्सीन वैक्सीन का परीक्षण के विभिन्न चरणों से इसकी सुरक्षा और प्रभाव कार्य सुनिश्चित किया है , स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है । स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बताया गया है वैक्सीन की प्रभावशीलता और कोरोना के प्रति एंटीबाडी विकसित होने के लिए वैक्सीन के दो डोज लेना अति आवश्यक है। वैक्सीन का प्रथम डोज लेने के 4 हफ्ते या 28 दिन बाद ही इसका दूसरा डोज दिया जाएगा। आमतौर पर कोरोना वैक्सीन के दोनों डोज लेने के 2 सप्ताह बाद कोरोना के प्रति एंटीबॉडी का निर्माण शुरू हो जाता है। इसलिए वैक्सीन लगवाने के बाद भी मास्क लगाना, शारीरिक दूरी रखना एवं नियमित अंतराल के बाद हाथ धोना आवश्यक है।
सरकार ने इसके लिए सबसे पहले उच्च जोखिम वाले समूह को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन के लिए चयनित किया है। इसमें हेल्थ केयर और फ्रंटलाइन वर्कर शामिल है। वहीँ दूसरे समूह में 50 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति तथा वह लोग जो पहले से ही किसी रोग से ग्रसित है को यह वैक्सीन उपलब्ध करायी जायेगी। इसके बाद अन्य सभी जरूरतमंद को भी वैक्सीन उपलब्ध करायी जाएगी।
कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति को भी वैक्सीन लगवाना है आवश्यक
अगर कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होने के बाद सही हो चुका है इसके बाद भी उसको वैक्सीन की दोनों डोज लेना आवश्यक है क्योंकि वैक्सीन उसके शरीर में एक मजबूत प्रतिक्रिया तंत्र को विकसित करने में मदद करेगा। वहीँ संक्रमित व्यक्तियों को लक्षण खत्म होने के 14 दिन बाद तक वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए क्योंकि वह वैक्सीनेशन स्थल पर दूसरों में वायरस फैला सकता है।
अगर टीकाकरण के बाद कोई असुविधा या बेचैनी महसूस होती है तो निकटतम स्वास्थ्य अधिकारी एएनएम या मितानिन को सूचित करें । करोना अनुरूप व्यवहारों का पालन याद रखें जैसे कि मस्क पहनना, हाथ की सफाई और शारीरिक दूरी को बनाए रखना जो कम से कम 6 फीट या दो गज की हो, भी जरूरी है । जैसा अन्य वैक्सीन के साथ होता है कुछ व्यक्तियों में सामान्य प्रभाव हल्का बुखार हो सकता है राज्यों को कोरोना वैक्सीनेशन से संबंधित किसी भी दुष्प्रचार से निपटने के लिए कठोर व्यवस्था करना के लिए कहा गया है ।
कोई व्यक्ति कैंसर मधुमेह उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की दवा ले रहा है या ऐसे एक या एक से अधिक स्वास्थ्य परिस्थितियों वाले व्यक्ति को उच्च जोखिम वाली श्रेणी माना जाता है।उन्हें कोरोना वैक्सीनेशन कराने की आवश्यकता है । वैक्सीन की सीमित आपूर्ति के कारण हेल्थ केयर प्रोवाइडर एवंफ्रंटलाइन श्रमिकों के परिवारों कोप्रारंभिक चरणमें कवर न करते हुए उनको अन्य चरणों में कवर किया जायेगा।

नई दिल्ली / शौर्यपथ / केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन कड़ाके की सर्दी और बारिश के बीच भी जारी है. किसान इन कानूनों का 'काला कानून' करार देते हुए एक महीने से ज्यादा समय से दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं ताकि इन्हें रद्द करवाया जा सके. चार जनवरी (सोमवार) को किसान संगठनों और सरकार के बीच बैठक होनी है. इससे पहले, 30 दिसंबर को बातचीत हुई थी, जिसमें दो मुद्दों पर बात बनी है.
टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और चिल्ला बॉर्डर समेत अन्य जगहों पर किसान धरने पर बैठे हैं. बारिश और सर्दी के बीच गाजीपुर (दिल्ली-यूपी बॉर्डर) में चल रहा किसानों का धरना प्रदर्शन आज 37वें दिन में पहुंच गया. गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन में बैठे एक प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "हम ऐसे खराब मौसम में अपने परिवार से दूर सड़कों पर बैठे हैं. हम उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार कल हमारी मांगों को स्वीकार करेगी."
बता दें कि दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने दिल्ली में गणतंत्र दिवस (Republic Day) के दिन ट्रैक्टर रैली आयोजित करने की धमकी दी है. किसानों ने कहा है कि 23 जनवरी को, यानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर सभी राज्यपालों के आवास पर विरोध प्रदर्शन करेंगे. किसान आंदोलन का समन्वय कर रही 7 सदस्यीय समन्वय समिति ने शनिवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार को यह अल्टीमेटम दिया.
सरकार और किसान संगठनों के बीच बुधवार को हुई छठे दौर की वार्ता में बिजली संशोधन विधेयक 2020 और एनसीआर एवं इससे सटे इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के संबंध में जारी अध्यादेश संबंधी आशंकाओं को दूर करने को लेकर सहमति बनी थी.

नई दिल्ली / शौर्यपथ / GST विभाग ने दिल्ली के बुद्ध विहार में अवैध तरीके से चल रही गुटखा फैक्ट्री का भंडाफोड़ करते हुए 831 करोड़ की जीएसटी की चोरी का मामला पकड़ा है. इस मामले में फैक्ट्री मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है. दिल्ली के जीएसटी कमिश्रर शुभागता कुमार के मुताबिक, उनकी टीम को जानकारी मिली थी कि दिल्ली के बुद्ध विहार में एक अवैध गुटखा फैक्ट्री चल रही है, जिसमें बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जा रही है. सूचना के आधार पर फैक्ट्री पर छापा मारा गया.
फैक्ट्री के गोदाम से बड़े पैमाने पर गुटखा, तम्बाकू, इन्हें बनाने का सामान और मशीनें बरामद हुईं, जिनकी कीमत करीब सवा 4 करोड़ रुपये है. इस फैक्ट्री में 65 मजदूर काम करते थे. फैक्ट्री से गुटखा कई राज्यों में सप्लाई हो रहा था. जांच, बयान और दस्तावेज देखने से पता चला कि फैक्ट्री मालिक ने 831 करोड़ से ज्यादा का जीएसटी नहीं भरा है, यानि फैक्ट्री मालिक बिना टैक्स दिए लगातार गुटखा सप्लाई कर रहा था.
फैक्ट्री कहीं से भी रजिस्टर्ड नहीं थी और न ही इसमें काम करने वाले मजदूरों की जानकारी कहीं दी गई थी. फैक्ट्री मालिक को जीएसटी एक्ट के तहत गिरफ्तार कर 2 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. दिल्ली जीएसटी विभाग ने इस वित्त वर्ष में अब तक 4327 करोड़ की जीएसटी चोरी का भंडाफोड़ किया है.

नई दिल्ली / एजेंसी / कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (ने किसान आंदोलन के बहाने एक बार फिर नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि देश में फिर से गुलाम भारत जैसी स्थितियां हैं और किसान चंपारण जैसी स्थिति झेलने जा रहे हैं. राहुल गांधी ने ट्वीट किया है, "देश एक बार फिर चंपारन जैसी त्रासदी झेलने जा रहा है.. तब अंग्रेज कम्पनी बहादुर था, अब मोदी-मित्र कम्पनी बहादुर हैं.. लेकिन आंदोलन का हर एक किसान-मज़दूर सत्याग्रही है जो अपना अधिकार लेकर ही रहेगा.."
राहुल ने दो दिन पहले भी नव वर्ष के मौके पर कहा था कि वो अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले किसानों के साथ हैं. 1 जनवरी को कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों का जिक्र करते हुए ट्वीट किया था,, “मैं दिल से सम्मान के साथ अन्याय से लड़ने वाले किसानों और मजदूरों के साथ हूं. सभी को नया साल मुबारक हो.” दो दिन बाद उन्होंने ब्रिटिश काल में चंपारण के किसानों से आज के किसानों की तुलना की है.
बता दें कि ब्रिटिश काल में बिहार के उत्तरी हिस्से में नेपाल से सटे चंपारण इलाके में जबरन किसानों से नील की खेती करवाई जाती थी. इसके लिए अंग्रेजों ने बागान मालिकों को जमीन के ठेकेदारी दे रखी थी और तीन कठिया प्रणाली लागू कर रखी थी, जिसके तहत किसानों को तीन कट्ठे में नील की खेती करनी मजबूरी थी. इस जुल्म के खिलाफ 1917 में महात्मा गांधी ने आंदोलन चलाया था, जिसे पहला सविनय अवज्ञा आंदोलन कहा जाता है. इसे चंपारण सत्याग्रह भी कहा जाता है.

नई दिल्ली / शौर्यपथ / ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने आज सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक की कोरोना वायरस वैक्सीन को आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल की अनुमति दे दी है. इसी के साथ भारत को कोरोना वैक्सीन को लेकर चल रहा लंबा इंतजार अब खत्म हो गया. कोविड-19 वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को बधाई देते हुए कहा कि सीरम इंस्टीटयूट और भारत बायोटेक की वैक्सीन को DCGI की मंजूरी मिलने के बाद कोरोना मुक्त राष्ट्र होने का रास्ता साफ हो गया है.
पीएम मोदी ने दूसरे ट्वीट में कहा, "इस पर हर भारतीय को गर्व होगा कि जिन दो टीकों को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी गई है वे भारत में बने हैं! यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने के लिए हमारे वैज्ञानिक समुदाय की उत्सुकता को दर्शाता है जिसके मूल में करुणा और सेवाभाव निहित है."
पीएम मोदी ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, "विपरीत परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट कार्यों के लिए हम डॉक्टरों, चिकित्सा कर्मचारियों, वैज्ञानिकों, पुलिस कर्मियों, स्वच्छता कार्यकर्ताओं और सभी कोरोना योद्धाओं को अपना आभार दोहराते हैं. हम कई लोगों की जान बचाने के लिए उनके प्रति सदा आभारी रहेंगे."
बता दें कि दो दिन पहले ही सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने सीरम इन्स्टीट्यूट ऑफ इंडिया और ऑक्सफोर्ड द्वारा विकसित वैक्सीन कोविशील्ड को अंतिम मंजूरी देने की सिफारिश ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को भेजी थी. इसके बाद कल भारत बायोटेक और ICMR द्वारा विकसित कोवैक्सीन की भी सिफारिश की थी. इन दोनों वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की इजाजत आज ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने दे दी.

नई दिल्ली / एजेंसी / केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उनका जवाब देने के लिए तीन वीडियो जारी किए हैं. इन वीडियो में एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया कोरोना वायरस टीके से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे हैं. गुलेरिया ने बताया कि देश में कभी भी कोरोना वैक्सीन को अंतिम मंजूरी मिल सकती है और जैसे ही वैक्सीन को हरी झंडी मिलेगी, भारत सरकार चरणबद्ध सघन टीकाकरण अभियान चलाएगी. एक सवाल के जवाब में डॉ. गुलेरिया ने कहा कि शुरुआत में सभी लोगों को कोविड वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने रिस्क फैक्टर के हिसाब से टीकाकरण की प्राथमिकताएं तय की हैं. उन्होंने कहा कि पहले चरण में हेल्थ वर्कर्र और फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीके लगाए जाएंगे.
एम्स निदेशक ने बताया कि टीका पाने वाले दूसरे ग्रुप में 50 साल से ऊपर उम्र के लोग होंगे. इनके साथ ही 50 साल से नीचे की उम्र के वैसे लोग भी इस ग्रुप में शामिल होंगे जिनमें इस महामारी के लक्षण रहे हों. उन्होंने कहा कि टीका लगवाना अनिवार्य नहीं होगा बल्कि यह स्वैच्छिक होगा. हालांकि, डॉ. गुलेरिया ने लोगों को सलाह दी कि खुद को और अपने परिजनों, रिश्तेदारों और चाहने वालों को सुरक्षित रखने के लिए टीका जरूर लगवाएं.
क्या टीका सुरक्षित होगा क्योंकि यह जल्दबाजी में बहुत ही कम समय में लाया गया है? इसके जवाब में गुलेरिया ने कहा कि देश में किसी भी वैक्सीन के इस्तेमाल की इजाजत तभी दी जाएगी, जब सरकार यह आश्वस्त हो लेगी कि वह लोगों के लिए सुरक्षित है. उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी जरूरी और उपयुक्त मानदंड पूरे किए बिना सरकार किसी भी वैक्सीन को इजाजत नहीं देगी.
कहां मिलेगा वैक्सीन के सवाल पर एम्स निदेशक ने कहा कि वैक्सीन के लिए रजिस्टर्ड लोगों को रजिस्टर्ड मोबाइल के जरिए सूचना दी जाएगी कि उन्हें कब और कहां टीका लगाया जाएगा. उन्होंने कहा कि इससे होने वाली असुविधा से बचा जा सकेगा और लोगों को आसानी होगी.
क्या कोई व्यक्ति बिना रजिस्ट्रेशन कराए कोविड वैक्सीन ले सकता है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नहीं बिना पूर्व रजिस्ट्रेशन के किसी को भी वैक्सीन नहीं दी जाएगी. गुलेरिया ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर लोग रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे.
उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रेशन के लिए लोगों को फोटो लगा कोई भी पहचान पत्र जमा करना अनिवार्य होगा. उन्होंने बताया कि ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, मनरेगा जॉब कार्ड, श्रम मंत्रालय द्वारा जारी कार्ड, बैंक या पोस्ट ऑफिस द्वारा जारी पासबुक, MP/MLA/MLC द्वारा जारी किया गया पहचान पत्र, पेंशन कार्ड, नियोक्ता (केंद्र सरकार, राज्य सरकार या पब्लिक लिमिटेड कंपनी) द्वारा जारी पहचान पत्र या वोटर आई कार्ड में से कोई भी एक पहचान पत्र जमा करना होगा. उन्होंने कहा कि जो पेपर रजिस्ट्रेशन के समय दिया जाएगा, टीकाकरण के समय उसी से मिलान किया जाएगा.

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्वीट में कहा कि तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को मंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई एवं शुभकामनाएं

भोपाल /शौर्यपथ / मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया. मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल का यह तीसरा विस्तार है. इस विस्तार में बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के दो भरोसेमंद लोगों को कैबिनेट में शामिल किया गया. सिंधिया के करीबी तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत ने आज मंत्री पद की शपथ ली. इस मौके पर सिंधिया ने दोनों को बधाई दी.
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्वीट में लिखा, "लोकप्रिय जननेता तुलसी सिलावट व गोविंद सिंह राजपूत को मंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई एवं शुभकामनाएं. आप मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दिए गए अपने नए दायित्वों को सफलता से निभाएं, यही कामना करता हूं."
चौहान ने 23 मार्च 2020 को अकेले मुख्यमंत्री की शपथ ली थी और उसके बाद से उनके मंत्रिमंडल का यह तीसरा विस्तार होगा. मंत्रिमंडल का विस्तार आज दोपहर करीब 12.30 बजे होने की उम्मीद है. यह जानकारी एक अधिकारी ने दी है. मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नए मंत्रियों को पद की शपथ दिलाई. वह उत्तरप्रदेश की भी राज्यपाल हैं. एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मोहम्मद रफीक भी रविवार दोपहर करीब तीन बजे शपथ लेंगे. रफीक वर्तमान में उड़ीसा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे और उन्हें वहां से स्थानांतरित कर 31 दिसंबर को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का नया मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है.
मध्यप्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर तीन नवंबर को हुए उपचुनाव के परिणाम आने के बाद से ही इस मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चा राजनीतिक गलियारों में चल रही थी. इस उपचुनाव में भाजपा ने 28 में से 19 सीटें जीती थी, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को मात्र नौ सीटें मिली. इससे 230 सदस्यों के सदन में भाजपा की सीटें बढ़कर 126 हो गई, जबकि कांग्रेस विधायकों की संख्या 96 पहुंच गई.

पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर और जयराम रमेश ने चिंता जताई है और कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों को किनारे रखकर इस वैक्सीन को हरी झंडी दी गई है. यह खतरनाक हो सकता है.

नई दिल्ली / शौर्यपथ / ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने आज सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक की कोरोना वायरस वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) कोवैक्सीन (Covaxine) को आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल की अनुमति दे दी है. इस पर पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर और जयराम रमेश ने चिंता जताई है और कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों को किनारे रखकर इस वैक्सीन (Covaxine) को हरी झंडी दी गई है. यह खतरनाक हो सकता है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने ट्वीट किया है, "कोवैक्सिन ने अभी तक फेज-3 का ट्रायल पूरा नहीं किया है. इस्तेमाल की स्वीकृति समय से पहले दी गई है जो खतरनाक हो सकती है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जी कृपया स्थिति स्पष्ट करें. जब तक इसका ट्रायल पूरा नहीं हो जाता, इसके उपयोग से बचा जाना चाहिए. इस बीच भारत टीकाकरण अभियान की शुरुआत एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के साथ शुरू कर सकता है."
दूसरे पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी भारत बायोटेक की वैक्सीन कोवैक्सिन को परमिशन देने पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने ट्वीट कर कहा है, "भारत बायोटेक पहले दर्जे की कंपनी है, लेकिन यह हैरान करने वाला है कि इसकी वैक्सीन Covaxine के लिए फेज-3 के ट्रायल से जुड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत प्रोटोकॉल संशोधित किए जा रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्री जी को स्थिति स्पष्ट करना चाहिए."
हालांकि, कांग्रेस की तरफ से पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया में मीडिया इंचार्ज ने वैक्सीन की मंज़ूरी पर कोई सवाल नहीं उठाया है. बता दें कि दो दिन पहले ही सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने सीरम इन्स्टीट्यूट ऑफ इंडिया और ऑक्सफोर्ड द्वारा विकसित वैक्सीन कोविशील्ड को अंतिम मंजूरी देने की सिफारिश ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को भेजी थी. इसके बाद कल भारत बायोटेक और ICMR द्वारा विकसित कोवैक्सीन की भी सिफारिश की थी. इन दोनों वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की इजाजत आज ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने दे दी.

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