January 21, 2026
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भारत सरकार और ग्रामीण बैंक अध्यक्षों की मनमानी के शिकार ग्रामीण कर्मचारी बेमौत मरने के मुहाने पर

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राजनांदगांव / शौर्यपथ / ग्रामीण बैंकों के अध्यक्षों ने अपने निहित स्वार्थो की प्रतिपुर्ति और विवेकहीनता के चलते इन अध्यक्षों ने ग्रामीण बैंक के 90 प्रतिशत स्टाफ को ऐसे आरोपों के लिए जिनसे बैंक को न तो वित्तीय हानि हुयी और न ही उनकी बैंक को कोई नुकसान पहुंचाने की नीयत रही है, उसके बावजूद भी स्टाफ गैर अनुपातिक दंड पारित करके बैंक सेवा से बर्खास्त कर दिया, क्योंकि इनके अध्यक्षों ने ग्रामीण बैंक के ऐसे स्टाफ को जिसके कदाचार के कारण बैंक को लाखों की धनीय हानि हुई, यानि जिन्होंने फर्जी ऋण वितरण किया था, ऐसे स्टाफ को इन अध्यक्षों ने अपने विवेकाधीन अधिकारों दुरुपयोग अपने निहित स्वार्थो प्रतिपुर्ति के कारण बैंक सेवा में बनाये रखा है, और इन अध्यक्षों का ग्रामीण बैंक स्टाफ पर अत्याचार का सिलसिला यही पर ही नहीं रूका .
इनके द्वारा सेवा से बर्खास्त स्टाफ को मिलने वाले रिटायर्ड बेनिफिट के भुगतान में भी अपनी विवेकहीनता या दूषित मानसिकता का परिचय दिया क्योंकि इनके द्वारा कुछ स्टाफ को ग्रेज्युटी और अवकाश नकदीकरण राशि का भुगतान कर दिया गया और वही अधिकांश स्टाफ को रिटायर्ड बेनिफिट्स का भुगतान नहीं किया।
ऐसी स्थिति में ग्रामीण बैंक स्टाफ जिसे बैंक अध्यक्षों ने अपने अहम के चलते बैंक सेवा से बर्खास्त कर दिया है वह और उसका परिवार आज ईपीएफओ से मिलने वाली पेंसन 1500 से 2000 रूपये पर ही निर्भर होकर अपना जीवन यापन करते हुए स्वाभाविक मौत से पुर्व अकाल मौत का इंतजार कर रहा है। अब रही सही दुश्मनी या कसर इन ग्रामीण बैंक स्टाफ से भारत सरकार द्वारा मान सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर ग्रामीण बैंक स्टाफ के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों के लिए लागु पेंशन के अनुरूप पेंशन अधिनियम 2018 को लागू करना था, लेकिन तोड़ मरोड़ कर त्रुटि पूर्ण ग्रामीण बैंक पेंशन अधिनियम 2018 लागु कर निकाल गई है। ग्रामीण बैंको पेंशन 1 अप्रैल 2018 से लागू हुई है, मतलब 1 अप्रैल 2018 से सेवानिवृत्ति स्टाफ को पेंशन भुगतान किए जाने लगा है।
हम आपके संज्ञान यह तथ्य लाना चाहते हैं कि ग्रामीण बैंक स्टाफ जो बैंक सेवा में 1 सितंबर 1987 से 31 मार्च 2010 के दौरान सेवारत रहा हो और कम से कम 10 वर्ष की सेवा की हो, ऐसा सेवायुक्त पेंशन की पात्रता रखता है। इसी के चलते ग्रामीण बैंक सेवायुक्त जो अपनी अधिवर्षिता पर चाहे वह 1 अप्रैल 2018 से पूर्व या बाद सेवानिवृत्ति हुआ है, पेंशन प्राप्त कर रहा है वही जो ग्रामीण बैंक स्टाफ बैंक अध्यक्ष के अत्याचार का शिकार होकर दंडस्वरुप सेवानिवृत्ति पेंशन लागू दिनांक 1 अप्रैल 2018 से पुर्व सेवानिवृत्ति हुआ है, उसे पेंशन से वंचित किया है और दिनांक 1 अप्रैल 2018 के बाद दंडस्वरुप बैंक सेवा से बर्खास्त स्टाफ को पेंशन दी जा रही है। ऐसा करके भारत सरकार ने हजारों ग्रामीण बैंक परिवार को जीते-जी मृत्यु के लिए विवश कर दिया है।
हम ग्रामीण बैंक स्टाफ ने भारत सरकार और ग्रामीण बैंक अध्यक्षों के अत्याचारों से अत्यंत आहत होकर महामहिम राष्ट्रपति और मान. सर्वोच्च न्यायालय भारत को अपने शिकायत पत्र भेजकर मृत्यु दंड की मांग की है। अभी तक हमारे 225 से अधिक पीड़ित साथी अपने शिकायत पत्र भेज न्याय की मांग कर चुके और सिलसिला जारी है।

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