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० जिन्दगी से जरूरी कुछ भी नहीं, जीवन की सुरक्षा के लिए मास्क लगाएं, आदत एवं व्यवहार बदलें
० मास्क को सुरक्षा कवच के रूप में उपयोग करें
० बुजुर्गो, बच्चों एवं महिलाओं को संक्रमण से सुरक्षा के लिए युवा लगाएं मास्क
राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी टोपेश्वर वर्मा ने जिले के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना जैसी घातक महामारी हमारे सामने खड़ी है। हमारे देश में रोजाना लाखों लोग लापरवाही और असावधानी के कारण कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि कोरोना के उपचार हेतु अभी तक कोई वैक्सीन नहीं आई है। यह भी तय नहीं है कि कब तक यह कठिन दौर खत्म होगा। अभी जितने भी लोग कोरोना से बचे हुए हैं उसकी मुख्य वजह यह है कि उन्होंने आपस में शारीरिक दूरी बनाये रखने और समय-समय पर हाथों को सेनिटाईज करते रहने व ठीक तरीके से मास्क पहनने को अपनी आदत में शामिल कर लिया है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वैक्सीन आने तक हमारे पास जो संसाधन हैं, उन्हें ही सुरक्षा कवच के रूप में हमें उपयोग करना होगा।
याद रखें कि अभी कोरोना से बचाव के लिए मास्क ही वैक्सीन है। जब तक कोरोना की दवाई उपलब्ध नहीं हो जाती है, तब तक हम लोगों को वैक्सीन मानकर मास्क को ही पहनना होगा। शोध बताते हैं कि ठीक तरीके से मास्क पहनना कोरोना महामारी को 98 प्रतिशत तक रोके रखता है। मास्क पहनने से हम खुद सुरक्षित रहेंगे और दूसरों को भी सुरक्षित रखेंगे। दरअसल कोरोना से बचने के तीन ही उपाय हैं। एक मास्क, दूसरा शारीरिक दूरी और तीसरा हाथों को साबुन से धोकर या सेनिटाईज कर साफ रखना। अगर हम सभी ने ये तीनों उपाय का अच्छे से पालन किया तो निश्चित रूप से हम सभी कोरोना संक्रमण से बचे रहेंगे।
सामान्यतः यह देखने में आ रहा है कि नगर सहित जिले के अन्य स्थानों में मास्क को लेकर घोर लापरवाही हो रही है। बाजार में लोग बेधड़क अपनी सुरक्षा को ताक में रखकर बगैर मास्क पहने और शारीरिक दूरी बनाये बेधड़क घूम रहे हैं। यह बेहद दुखद है कि आज इस कठिन दौर में हमारे युवा साथी घर से निकलते समय मास्क नहीं पहनते हैं और शारीरिक दूरी बनाये रखने और हाथों को सेनिटाईज करने के नियमों का पालन नहीं करते हैं। जिससे वे कोरोना से संक्रमित हो जाते है। युवाओें में बीमारियों से लड़ने की शारीरिक-मानसिक क्षमता मजबूत होती है, इसलिए वे खुद तो बचे रहते हैं किन्तु वे घर वापस आकर अपने परिवार के बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को संक्रमित कर रहें है। घर में ही रहने वाले बड़े बुजुर्गों के संक्रमित होने का यह सबसे बड़ा कारण है। जो हमें असमय ही अपने बड़े बुजुर्गों को जोखिम में डाल रहा है। अतः हम सभी को घर से बाहर निकलते समय यह ध्यान रखना चाहिए की कोराना संक्रमण अभी मिटा नहीं है। मास्क पहनेंगे तो संक्रमण से बचे रहेंगे। इसलिए स्वयं की और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए मास्क जरूर पहनें और जो नहीं पहन रहे हैं, उन्हें मास्क पहनने प्रेरित करें।
प्रायः यह भी देखने को मिल रहा है कि फैक्ट्री, कारखानों और दुकानों के व्यवसायी बंधु और वहां काम करने वाले लोग बगैर मास्क पहने अपना व्यापार चलाते हैं जिससे भी बड़ी संख्या में लोगों के कोरोना संक्रमित होने की आशंका बढ़ती है। व्यापारी वर्ग को भी नो मास्क, नो एन्ट्री की बात को कड़ाई से पालन कराना चाहिए।
किसी भी व्यक्ति को जीवन को खतरे में डालने से पहले एक बार हम सभी को अपने परिवार के बारे में जरूर सोचना चाहिए। लापरवाही करने पर हम खुद तो संक्रमित होते ही हैं, बल्कि हमारे द्वारा अन्य रिश्तेदारों व मित्रों को भी जाने-अनजाने में यह बीमारी दे दी जाती है। अतः अब हर व्यक्ति को अब अपनी सामाजिक जवाबदारी समझते हुए काम करना पड़ेगा। मेरा मास्क आपको बचाएगा और आपका मास्क मुझे बचाएगा अब इसी भावना को आत्मसात कर हमें अपना व्यवहार बदलना होगा। बगैर मास्क पहने घर से निकलने से पहले एक बार जरूर सोचें कि ऐसी क्या मजबूरी है, जो जिंदगी से ज्यादा जरूरी है।
आईये अब हम कोरोना से डरकर नहीं, डट कर मुकाबला करें। हम सभी अपने वर्तमान जीवन में दो गज की दूरी, मास्क जरूरी के संदेश को अपने जीवन का उद्देश्य बनाये। जिले में कोरोना के संक्रमण एवं बचाव तथा रोकथाम के लिए 16 अक्टूबर से 22 अक्टूबर 2020 तक कोरोना सुरक्षा सप्ताह मनाया जाना है। जिसके लिए जिले में प्रत्येक दिवस सामाजिक भागीदारी से विशेष गतिविधियां की जाएंगी।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
