July 23, 2026
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    जिले में खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता, किसानों को नहीं होगी किसी प्रकार की परेशानी , अब तक 17,205 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण, सहकारी समितियों में 7,236 क्विंटल बीज उपलब्ध

    • rounak group

     

    राजनांदगांव, । मानसून आगमन की संभावना के साथ जिले के किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए हैं। आगामी खरीफ सीजन में जिले में लगभग 1.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बोनी संभावित है। किसानों को समय पर खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग द्वारा एक अप्रैल से ही सहकारी समितियों में भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं।

    कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2026 के लिए सहकारी क्षेत्र में 45,650 मीट्रिक टन उर्वरक भंडारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत 18,500 मीट्रिक टन यूरिया, 4,000 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी), 3,600 मीट्रिक टन म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) तथा 9,800 मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के एनपीके उर्वरकों का लक्ष्य शामिल है।

    निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध अब तक जिले में 12,000 मीट्रिक टन से अधिक यूरिया, 365 मीट्रिक टन से अधिक एसएसपी, 2,755 मीट्रिक टन से अधिक एमओपी तथा लगभग 3,000 मीट्रिक टन डीएपी उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है। खरीफ सीजन की तैयारी के साथ किसान लगातार उर्वरकों का उठाव कर रहे हैं और अब तक 17,205 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। वितरण के बावजूद जिले में वर्तमान में 12,584 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो किसानों की जरूरतों की पूर्ति के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।

    बीज उपलब्धता के संबंध में विभाग ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए धान सहित विभिन्न दलहनी एवं तिलहनी फसलों हेतु 14,331 क्विंटल बीज की आवश्यकता का आकलन किया गया है। इसके मुकाबले अब तक 7,236 क्विंटल बीजों का भंडारण सहकारी समितियों में किया जा चुका है। किसानों द्वारा लगातार बीजों का उठाव किया जा रहा है तथा अब तक 1,533 क्विंटल बीजों का वितरण भी किया जा चुका है।

    कृषि विभाग किसानों को मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने तथा प्राकृतिक रूप से नत्रजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हरी खाद के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है। इसके तहत जिले में 350 क्विंटल मूंग बीज एवं 100 क्विंटल धैचा बीज का भंडारण किया गया है। किसान इनका उपयोग हरी खाद के रूप में कर भूमि की उत्पादकता एवं जैविक गुणवत्ता में वृद्धि कर सकते हैं।

    कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खरीफ फसलों की बुआई के लिए आवश्यक खाद एवं बीज का समय पर उठाव करें तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त करें।

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