
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
रविशंकर स्टेडियम परिसर के दुकानदारों को मिली बड़ी राहत, चार माह तक बलपूर्वक कार्रवाई पर रोक; पुनर्वास व वैकल्पिक व्यवस्था पर सुनवाई के बाद ही आगे बढ़ेगा प्रशासन
दुर्ग। अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम निर्माण की दिशा में चल रही जिला प्रशासन की कार्रवाई को उस समय बड़ा झटका लगा, जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने झम्मन साहू बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए स्टेडियम परिसर के दुकानदारों को बड़ी राहत प्रदान की। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगले चार माह तक किसी भी दुकानदार के खिलाफ बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह मामला दुर्ग के रविशंकर स्टेडियम परिसर में वर्षों से व्यवसाय कर रहे दुकानदारों को प्रशासन द्वारा जारी किए गए बेदखली नोटिस से जुड़ा है। जिला प्रशासन ने भवन को जर्जर बताते हुए दुकानों को खाली करने का निर्देश दिया था, जिसके विरोध में झम्मन साहू सहित अन्य दुकानदारों ने हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट ने अपनाया संतुलित दृष्टिकोण
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि जर्जर भवन के कारण सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। वहीं न्यायालय ने यह भी स्वीकार किया कि संबंधित दुकानदार वर्षों से यहां व्यवसाय कर रहे हैं तथा उनकी आजीविका पूरी तरह इन दुकानों पर निर्भर है। ऐसे में बिना उचित पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था के बेदखली न्यायसंगत नहीं होगी।
पहले सुनवाई, फिर निर्णय
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि दुकानदारों द्वारा पुनर्वास एवं वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में प्रस्तुत आवेदनों पर विधिसम्मत विचार किया जाए। सभी प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए और उसके बाद कारणयुक्त (Speaking Order) आदेश पारित किया जाए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया के पूर्ण होने तक चार माह की अवधि में कोई दमनात्मक या बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई नहीं होगी।
दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी दुकानदारों की
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस अवधि के दौरान जर्जर भवन में किसी प्रकार की दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं संबंधित दुकानदारों की होगी। अर्थात न्यायालय ने राहत के साथ सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी भी स्पष्ट कर दी है।
स्टेडियम परियोजना की रफ्तार पर असर संभव
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम निर्माण की दिशा में जिला प्रशासन की प्रस्तावित कार्रवाई फिलहाल धीमी पड़ सकती है। अब प्रशासन को सीधे बेदखली की बजाय न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप विधिसम्मत प्रक्रिया अपनानी होगी तथा पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के मुद्दे पर निर्णय लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।
शौर्यपथ विश्लेषण
हाईकोर्ट का यह आदेश प्रशासनिक कार्रवाई और नागरिकों की आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायालय ने एक ओर सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से व्यवसाय कर रहे दुकानदारों के पुनर्वास के अधिकार को भी संरक्षण दिया है। आने वाले दिनों में जिला प्रशासन की अगली रणनीति और पुनर्वास संबंधी निर्णय इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
