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धमतरी / शौर्यपथ। जिला कार्यालय धमतरी में पदस्थ एक महिला स्टेनोटायपिस्ट द्वारा कलेक्टर के निजी सहायक के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने प्रशासनिक महकमे में चर्चा तेज कर दी है। महिला कर्मचारी ने कथित दुर्व्यवहार, मानसिक प्रताड़ना, अनुचित व्यवहार तथा पदोन्नति की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने संबंधी शिकायत की है। सूत्रों के अनुसार, शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन द्वारा मामले की आंतरिक जांच की तैयारी किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट अथवा विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अवकाश के दिन कार्यालय बुलाने का आरोप
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला कर्मचारी ने अपने आवेदन में कलेक्टर के निजी सहायक धनेश कुमार साहू पर अनुचित व्यवहार एवं कथित छेड़खानी के आरोप लगाए हैं। महिला का आरोप है कि संबंधित कर्मचारी द्वारा उसे कथित तौर पर मानसिक रूप से परेशान किया जाता था। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि अवकाश के दिनों में अर्जेंट शासकीय कार्य का हवाला देकर उसे कार्यालय बुलाया जाता था और उस दौरान कथित रूप से अनर्गल एवं अनुचित बातचीत की जाती थी।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पदोन्नति में बाधा डालने का भी आरोप
महिला कर्मचारी ने शिकायत में अपनी पदोन्नति को लेकर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। बताया गया है कि स्टेनोग्राफर-3 के पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया में कथित रूप से अड़चन पैदा करने तथा वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उसके संबंध में आपत्तिजनक बातें रखे जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कार्यस्थल पर सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने तथा दोष सिद्ध होने की स्थिति में संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई किए जाने की मांग की है। साथ ही शिकायत में पुलिस कार्रवाई और FIR दर्ज कराने की अनुशंसा किए जाने का भी उल्लेख बताया जा रहा है।
पूर्व आरोपों की भी चर्चा, कार्रवाई पर सवाल
मामले के बीच कलेक्टर के निजी सहायक को लेकर पूर्व में लगाए गए कुछ अन्य आरोपों की भी चर्चा प्रशासनिक गलियारों में होने लगी है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व में भी उन पर कलेक्टर के निजी सहायक पद का प्रभाव इस्तेमाल करते हुए अधीनस्थ अधिकारियों को कथित रूप से डराने-धमकाने तथा जबरन धन वसूली जैसे आरोप लगाए जाने की बातें सामने आई थीं। हालांकि, इन पूर्व आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही उनके संबंध में किसी कार्रवाई का आधिकारिक रिकॉर्ड इस समय सार्वजनिक रूप से सामने है।
शिकायतकर्ता महिला के पति के धमतरी जिले में ही राजस्व निरीक्षक के पद पर कार्यरत होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच किए जाने की मांग और महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रशासन की चुप्पी पर टिकी निगाहें
फिलहाल जिला कलेक्ट्रेट के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से मामले को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायत पर प्रशासन किस स्तर की जांच कराता है और जांच की प्रक्रिया में शिकायतकर्ता तथा आरोपित पक्ष के बयानों एवं उपलब्ध साक्ष्यों का किस प्रकार परीक्षण किया जाता है।
मामला यदि औपचारिक जांच के दायरे में आता है तो शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता, पदोन्नति संबंधी प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं तथा कार्यस्थल पर आचरण से जुड़े नियमों का पालन हुआ या नहीं—इन सभी पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
