October 23, 2026
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    बिना RERA पंजीयन प्लॉट बेचना पड़ा महंगा, महागणपति डेव्हलपर्स पर 8 लाख का जुर्माना

    • doing of business

    CGRERA ने स्वप्रेरणा से लिया संज्ञान; परियोजना का RERA पंजीयन कराने के निर्देश, बिना पंजीयन विज्ञापन-बुकिंग और बिक्री पर होगी वैधानिक कार्रवाई

    रायपुर / शौर्यपथ। बिना RERA पंजीयन के प्लॉटेड ले-आउट में भूखंडों का विक्रय करने के मामले में छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) ने महागणपति डेव्हलपर्स, रायपुर के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने विकासकर्ता पर 8 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। साथ ही संबंधित परियोजना को RERA के तहत पंजीकृत कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    स्वप्रेरणा से दर्ज हुआ प्रकरण

    प्रकरण के अनुसार महागणपति डेव्हलपर्स द्वारा प्लॉटेड ले-आउट परियोजना विकसित कर भूखंडों की बिक्री की जा रही थी, जबकि परियोजना का RERA में पंजीयन नहीं कराया गया था। मामला सामने आने के बाद CGRERA ने स्वप्रेरणा (Suo Motu) से संज्ञान लेते हुए प्रकरण दर्ज किया।
    सुनवाई के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों एवं अभिलेखों के परीक्षण के बाद प्राधिकरण ने परियोजना को RERA अधिनियम, 2016 की धारा 3 के प्रावधानों के विपरीत पाया। इसके बाद विकासकर्ता पर 8 लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित करते हुए परियोजना का नियमानुसार RERA पंजीयन कराने के निर्देश जारी किए गए।

    बिना पंजीयन विज्ञापन और बिक्री भी उल्लंघन

    CGRERA ने स्पष्ट किया है कि RERA के अंतर्गत पंजीयन योग्य परियोजना का प्राधिकरण में पंजीयन कराए बिना उसके भूखंड या इकाइयों का विज्ञापन, विपणन, बुकिंग अथवा विक्रय के लिए प्रस्ताव करना अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है।

    प्राधिकरण की कार्रवाई का उद्देश्य रियल एस्टेट परियोजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ आबंटितियों के हितों की रक्षा करना है। CGRERA ने संकेत दिया है कि बिना पंजीयन परियोजनाओं में बिक्री अथवा प्रचार करने वाले प्रमोटरों के विरुद्ध शिकायत अथवा संज्ञान के आधार पर अर्थदंड सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

    खरीदारों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश

    CGRERA की यह कार्रवाई ऐसे लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो प्लॉट या आवासीय परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं। किसी भी RERA-पंजीयन योग्य परियोजना में राशि लगाने से पहले परियोजना का RERA पंजीयन और संबंधित विवरण जांचना खरीदारों के हित में है। प्राधिकरण की कार्रवाई से यह संदेश भी स्पष्ट है कि पंजीयन से संबंधित नियमों की अनदेखी करने वाले विकासकर्ताओं पर नियामकीय शिकंजा कसा जा सकता है।

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