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‘द्वीप्ति’ योजना से 801 महिलाएं बनेंगी सोलर दीदी, धमतरी में 55 महिलाएं मत्स्य पालन से जुड़ीं; तकनीक और स्थानीय संसाधनों से आजीविका के नए अवसर
रायपुर, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी के रूप में स्थापित करने की दिशा में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा से लेकर मत्स्य पालन तक, महिलाएं अब पारंपरिक आजीविका के साथ तकनीक आधारित रोजगार और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से आय बढ़ाने के नए अवसरों से जुड़ रही हैं।
‘द्वीप्ति’ योजना से सोलर उद्यमी बनेंगी 801 महिलाएं
ग्रामीण महिलाओं को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए संचालित द्वीप्ति योजना के तहत 801 महिलाओं को ‘सोलर दीदी’ के रूप में चिन्हांकित किया गया है। अब तक 19 महिला संकुल स्तरीय संगठन अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत हो चुके हैं। इनके माध्यम से 94 सोलर सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जबकि 415 स्थापना प्रकरण प्रक्रियाधीन हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की यह पहल महिलाओं को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जोड़ रही है। महिलाएं सोलर सिस्टम की स्थापना, हितग्राहियों के पंजीयन, तकनीकी सेवाओं और रखरखाव से संबंधित कार्यों में भागीदारी निभा रही हैं। प्रत्येक स्थापना पर सोलर दीदी को 500 से 1,000 रुपये तक आय होने का अनुमान है। कबीरधाम जिले के कवर्धा स्थित वंदेमातरम् महिला संकुल संगठन का सोलर वेंडर के रूप में पंजीयन और समनापुर में रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्थापना इस पहल की शुरुआती उपलब्धियों में शामिल हैं।
धमतरी में आजीविका डबरियों से बढ़ेगी महिलाओं की आय
ग्रामीण महिलाओं को आय का अतिरिक्त साधन उपलब्ध कराने के लिए धमतरी जिले में वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत सीएसआर सहयोग से 55 आजीविका डबरियों के माध्यम से महिलाओं को मछली और झींगा पालन से जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त 90 नई आजीविका डबरियां तैयार की जा रही हैं।
भूखापारा, माडमशिल्ली, बिन्द्रापाली, डबरीनाला, चनागांव और छिन्दौरी सहित विभिन्न गांवों में संचालित इस पहल के तहत प्रत्येक डबरी में 1,600 झींगा और 320 भारतीय प्रमुख कार्प मछलियों के बीज डाले गए हैं। आगामी छह माह में प्रति डबरी औसतन 50 हजार रुपये लाभ का अनुमान है। वास्तविक लाभ उत्पादन, देखरेख और बाजार मूल्य पर निर्भर करेगा। इन डबरियों से वर्षा जल संरक्षण के साथ जरूरत के अनुसार सिंचाई में पानी का उपयोग भी किया जा सकता है।
धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जल संसाधनों के योजनाबद्ध उपयोग से महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका के अवसर विकसित करने पर जोर दिया है। इसके लिए तकनीकी मार्गदर्शन, नियमित निगरानी और बेहतर विपणन व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया गया है।
स्व-सहायता समूहों से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
इन पहलों की खासियत यह है कि इनके माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों और संकुल स्तरीय संगठनों को सामूहिक उद्यम के अवसर मिल रहे हैं। सोलर दीदियां जहां स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के साथ तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं, वहीं आजीविका डबरियों से जुड़ी महिलाएं मत्स्य एवं झींगा उत्पादन के जरिए स्थानीय स्तर पर आय अर्जित कर सकती हैं। इससे महिलाओं के कौशल विकास, स्वरोजगार और आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ने की संभावनाएं हैं। साथ ही, गांवों में रोजगार के अवसर विकसित होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
महिला शक्ति को मिल रही नई पहचान
दोनों पहलें ग्रामीण महिलाओं को केवल योजनाओं की हितग्राही बनाने के बजाय रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती हैं। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी सेवाओं और मत्स्य पालन में स्थानीय जल संसाधनों के उपयोग से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की संभावनाएं हैं। इन प्रयासों की दीर्घकालीन सफलता नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, बाजार तक पहुंच और आय के स्थायी अवसरों पर निर्भर करेगी।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
