September 29, 2026
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    कोरोना काल में महात्मा गांधी नरेगा बना आजीविका का सहारा,गांव वालों को मिला 51 लाख मानव दिवस का रोजगार

    • doing of business

    1 लाख 65 हजार 683 परिवारों को 94 करोड़ रूपए मजदूरी भुगतान


    जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / कोरोना काल में जब रेल, बस, टैक्सी से लेकर उद्योग धंधे, व्यापार, दुकानें सभी को लॉकडाउन कर दिया गया और ऐसे में उन परिवारों के सामने रोजी-रोटी की समस्या आन खड़ी हुई जो प्रतिदिन की मजदूरी पर निर्भर रहते थे। ऐसे में महात्मा गांधी नरेगा मजदूरी का सहारा बना। एक ओर कोरोना का भय लोगों में इस कदर व्याप्त था कि एक-दूसरे से भी नहीं मिल रहे थे। तब महात्मा गांधी नरेगा से जुड़े सभी अधिकारी, कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए अपने कदमों को आगे बढ़ाया और ग्रामीणों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने के लिए गांव में ही काम प्रारंभ कराया गया। कई बार ऐसे भी मौके आए कि कोरोना अपने चरम पहुंच गया और कई कर्मचारी पॉजिटिव हो गए, तब भी किसी के कदम नहीं डगमगाए और गांव में डेढ़ लाख श्रमिकों को प्रतिदिन कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए रोजगार उपलब्ध कराया।
    जिला पंचायत जांजगीर-चांपा से प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019-20 की तुलना में जहां 1 लाख 19 हजार परिवारों को 48 लाख 73 हजार 652 मानव दिवस का रोजगार देते हुए 83 करोड़ का मजदूरी भुगतान किया गया तो वहीं कोरोना काल में 1 अप्रैल 2020 से दिसम्बर 2020 तक 1 लाख 65 हजार 683 परिवारों को 51 लाख 12 हजार मानव दिवस का कार्य देते हुए 94 करोड़ रूपए की मजदूरी का भुगतान किया गया।
    लॉकडाउन के दौरान मनरेगा के कार्य-
    विगत अप्रैल एवं मई माह में 40 दिन के लॉकडाउन के दौरान ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए मनरेगा के कार्यों को शुरू किया गया। इस दौरान लगभग डेढ़ लाख मजदूरों ने प्रतिदिन रोजगार प्राप्त किया। बारिश शुरू होने के बाद ग्रामीण खरीफ फसल की तैयारी में लग गए, फसल तैयार होने के बाद उसे धान खरीदी केन्द्रों में बेचने के उपरांत फिर से धीरे-धीरे मनरेगा के कार्यों में श्रमिकों की संख्या बढ़ना शुरू हो गई है। दिसम्बर में 60 हजार के करीब श्रमिक काम कर रहे हैं। इस दौरान कोविड-19 से बचाव के दिशा निर्देश जैसे मास्क लगाकर काम करने, नियमित अंतराल यानी दो गज की दूरी बनाये रखने के साथ ही लगातार हेंडवॉश से हाथ धोने आदि की समुचित व्यवस्था कार्यस्थल पर की गई।
    5 हजार 662 कार्यों की स्वीकृति-
    महात्मा गांधी नरेगा के तहत 1 अप्रैल 2020 से अब तक 154 करोड़ 71 लाख रूपए के 5 हजार 662 विभिन्न कार्यों की स्वीकृति दी गईं। तालाब गहरीकरण 613, नया तालाब के 80 कार्य, पक्की नाली निर्माण 158 कार्य, पौध संधारण के 50 कार्य, वृक्षारोपण चारागाह के 129 कार्य, वृक्षारोपण गोठान में 234 कार्य, निजी भूमि सुधार के 212 कार्य, निजी डबरी निर्माण 40 कार्य, सामुदायिक डबरी निर्माण 18 कार्य, पशु शेड 115 कार्य, वर्मी कम्पोस्ट टैंक 2 हजार 869 कार्य, चारागाह निर्माण 63 कार्य, धान चबूतरा निर्माण 184 कार्य, के अलावा मिट्टी सड़क, पंचायत भवन, भू-नाडेप, गली प्लग, गेबियन सहित विभिन्न प्रकार के कार्यों में मनरेगा के श्रमिकों को रोजगार दिया जा रहा है।
    प्रवासी मजदूरों को मिला रोजगार-
    मई माह में जब राज्य सरकार द्वारा कोरोना स्पेशल ट्रेन चलाई गई तो विभिन्न राज्यों से प्रवासी मजदूरों का जिले में आना शुरू हुआ। हजारों की संख्या में पहुंचे इन मजदूरों के सामने रोजीरोटी की समस्या सामने आई। ऐसे में क्वारंटीइन की अवधि पूर्ण करने के बाद महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से इन्हें रोजगार मुहैया कराया गया। जिले में अप्रैल 2020 से अब तक 36 हजार 588 नए जॉब कार्ड भी बनाए गए।

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