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May 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

रायपुर । शौर्यपथ ।
छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 की तैयारियों को नई दिशा देते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज मुख्यमंत्री निवास से ‘ऑनलाइन स्व-गणना’ अभियान का संयुक्त शुभारंभ किया। इस पहल के साथ राज्य में डिजिटल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित जनगणना प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत हो गई है।

दोनों नेताओं ने स्वयं केंद्रीय पोर्टल पर अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर इस अभियान की शुरुआत की और कागजरहित, तकनीक-आधारित जनगणना के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को मजबूत संदेश दिया। यह पहल गृह मंत्रालय द्वारा देशभर में शुरू किए गए डिजिटल जनगणना अभियान के अनुरूप है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इसे “राष्ट्रीय महत्व का मिशन” बताते हुए कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत’ और ‘विकसित छत्तीसगढ़ 2047’ के निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने प्रदेशवासियों से 16 से 30 अप्रैल तक चलने वाले इस 15 दिवसीय अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
उन्होंने कहा कि “सटीक और अद्यतन डेटा ही वह सशक्त माध्यम है, जिससे सरकार यह सुनिश्चित कर सकती है कि आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित सभी जनकल्याणकारी योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचें।”

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी स्व-गणना फार्म भरकर नागरिकों को इस अभियान से जुड़ने का संदेश दिया और इसे पारदर्शी शासन की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

कैसे करें स्व-गणना:
स्व-गणना प्रक्रिया के तहत नागरिक अपने मोबाइल नंबर से पोर्टल पर लॉग इन कर 33 बिंदुओं वाली प्रश्नावली भर सकते हैं। प्रक्रिया पूरी होने पर एक 11 अंकों की स्व-गणना आईडी (SE ID) प्राप्त होगी, जिसे बाद में प्रगणक के सत्यापन के दौरान प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

दो चरणों में होगी जनगणना:
जनगणना 2027 दो चरणों में संपन्न होगी—

पहला चरण (अप्रैल–सितंबर 2026): मकान सूचीकरण और आवासीय सुविधाओं से जुड़े 33 मानकों पर डेटा संग्रह
दूसरा चरण (फरवरी 2027): जनसंख्या गणना

विशेष बात यह है कि इस बार 1931 के बाद पहली बार जातिगत गणना भी शामिल की जाएगी, साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति से संबंधित विस्तृत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे।

डिजिटल-प्रथम इस पहल से न केवल डेटा की सटीकता बढ़ेगी, बल्कि संसाधनों के बेहतर आवंटन और प्रभावी नीतिगत निर्णयों का मार्ग भी प्रशस्त होगा। यह अभियान ‘विकसित छत्तीसगढ़ 2047’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधार साबित होने जा रहा है।

रायपुर ।
राजधानी रायपुर में बैंकिंग सुविधाओं को नई दिशा देते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कचहरी चौक स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की कचहरी शाखा के नवीन एवं अत्याधुनिक भवन का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर बैंक के मुख्य महाप्रबंधक श्री प्रभाष कुमार सुबुद्धि, उप महाप्रबंधक श्री रमेश सिन्हा, शाखा प्रबंधक श्री अनिल यादव सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह गर्व का विषय है कि पिछले 50 वर्षों से संचालित एसबीआई की कचहरी शाखा अब नए आधुनिक परिसर में स्थानांतरित होकर ग्राहकों को और बेहतर एवं सुविधाजनक सेवाएं प्रदान करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि अत्याधुनिक तकनीक और सुव्यवस्थित व्यवस्था के साथ ग्राहकों के बैंकिंग कार्य अब अधिक सरल, तेज और प्रभावी होंगे।

मुख्यमंत्री ने बैंकिंग व्यवस्था को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि भारतीय स्टेट बैंक ने हमेशा अपनी जिम्मेदारियों का उत्कृष्ट निर्वहन किया है और भविष्य में भी आम नागरिकों के विश्वास को इसी तरह बनाए रखेगा। उन्होंने शाखा के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राहकों को इस उपलब्धि पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

गौरतलब है कि एसबीआई की कचहरी शाखा ने हाल ही में अपने 50 वर्ष पूर्ण किए हैं। ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शाखा को पंडरी रोड स्थित आक्सीजोन क्षेत्र में नए भवन में स्थानांतरित किया गया है, जहां आधुनिक बैंकिंग सेवाओं के साथ उन्नत ग्राहक अनुभव सुनिश्चित किया जाएगा।

कच्ची झोपड़ी से पक्के सपनों तक, शासकीय योजनाओं ने बदली तक़दीर

रायपुर /ग्राम पंचायत सिलगेर विकासखंड कोन्टा के हितग्राही श्री माड़वी कोसा के लिए वर्षों पुराना सपना अब साकार हो गया है। जो परिवार कभी कठिन परिस्थितियों में जर्जर झोपड़ी में जीवन गुजार रहा था, आज उसी परिवार के पास एक सुरक्षित, सम्मानजनक और मजबूत पक्का आवास है। नियद नेल्लानार योजना एवं प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के संयुक्त प्रयासों ने उनके जीवन में वह बदलाव ला दिया, जिसने संघर्ष को उम्मीद में बदल दिया।

इस बदलाव की असली नींव बनी रूरल मेसन ट्रेनिंग, जिसे मेरापथ एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित किया गया। प्रशिक्षण प्राप्त कर श्री कोसा ने न केवल निर्माण कार्य की तकनीक सीखी, बल्कि आत्मविश्वास के साथ अपने ही हाथों से अपने घर का निर्माण कर दिखाया। यह कहानी केवल एक मकान बनने की नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के आत्मनिर्भर बनने और अपने भविष्य को स्वयं गढ़ने की प्रेरक मिसाल बन गई है।

वित्तीय वर्ष 2024–25 में प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण अंतर्गत श्री कोसा को 1.20 लाख रुपए की आवास स्वीकृति मिली। इसके साथ ही मनरेगा अभिसरण से 95 मानव दिवस एवं 23,085 रुपए की मजदूरी सहायता प्रदान की गई, जिससे निर्माण कार्य को गति मिली। वहीं स्वच्छ भारत मिशन से 12,000 रुपए की राशि से शौचालय निर्माण, सोलर पैनल से रोशनी की सुविधा और नल–जल व्यवस्था से घर तक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से उनके परिवार का जीवन अब सुविधाजनक और सुरक्षित बन गया है।

इस प्रेरणादायक परिवर्तन पर कलेक्टर श्री अमित कुमार ने इसे जिले के लिए मॉडल बताते हुए कहा कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन और कौशल विकास मिलकर परिवारों को आत्मनिर्भर बना सकते हैं। वहीं जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुंद ठाकुर ने इसे सफल उदाहरण बताते हुए कहा कि प्रशिक्षण से गुणवत्ता बढ़ती है और हितग्राही स्वयं सशक्त बनता है। मुख्यमंत्री प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने श्री कोसा से संवाद कर उन्हें साल-श्रीफल एवं सांकेतिक चाबी भेंट कर सम्मानित किया। आज श्री माड़वी कोसा का यह पक्का घर केवल ईंट-पत्थर का निर्माण नहीं, बल्कि संघर्ष से सफलता तक की वह कहानी है जो पूरे क्षेत्र को प्रेरणा दे रही है।

नई दिल्ली ।
संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले ही दिन केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए परिसीमन (डीलिमिटेशन) से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश किए। इसके साथ ही लोकसभा की सीटों में भारी वृद्धि और महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। सत्ता और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी टकराहट देखने को मिली।


? क्या है सरकार का प्रस्ताव?

सरकार के अनुसार, यह पहल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को ऐतिहासिक स्तर पर बढ़ाने के उद्देश्य से लाई गई है। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—

  • 33% महिला आरक्षण: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
  • सीटों में बड़ी वृद्धि: लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर लगभग 815-850 तक करने का प्रस्ताव।
  • नई सीटें महिलाओं के लिए: बढ़ाई गई सीटों में से लगभग 272-273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी, ताकि मौजूदा सांसदों पर सीधा असर न पड़े।
  • लागू होने की समयसीमा: प्रस्ताव के अनुसार, यह व्यवस्था 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू हो सकती है।
  • परिसीमन की शर्त: आरक्षण लागू करने को नई जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

?️ सरकार का पक्ष: “महिलाओं को 30 साल बाद मिलेगा अधिकार”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लोकतंत्र के इतिहास का “महत्वपूर्ण क्षण” बताते हुए कहा—

“देश की बहनों पर भरोसा करें, 33 प्रतिशत महिलाओं को यहां आने दें और उन्हें निर्णय करने दें।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट संकेत दिया कि इस प्रस्ताव का विरोध राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकता है।

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि परिसीमन के बाद हर राज्य में सीटों की संख्या बढ़ेगी और महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलेगा।

बीजेपी और उसके सहयोगी दलों का तर्क है कि—

  • यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक सुधार है
  • सभी राज्यों को समान और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिलेगा
  • 30 वर्षों से लंबित महिला आरक्षण को अब वास्तविक रूप दिया जा रहा है

⚡ विपक्ष का हमला: “महिला आरक्षण के बहाने राजनीतिक पुनर्संरचना”

विपक्ष ने इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर आपत्तियां उठाई हैं और इसे केवल महिला सशक्तिकरण का मुद्दा मानने से इनकार किया है।

मुख्य आरोप:

1. ? परिसीमन के जरिए राजनीतिक संतुलन बदलने की कोशिश

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे “खतरनाक योजना” बताते हुए कहा—

  • परिसीमन प्रक्रिया सरकार-नियंत्रित आयोग के हाथों में होगी
  • इससे चुनावी सीमाओं को राजनीतिक लाभ के अनुसार बदला जा सकता है
  • असम और जम्मू-कश्मीर के उदाहरण देकर उन्होंने निष्पक्षता पर सवाल उठाए

2. ? उत्तर बनाम दक्षिण का मुद्दा

विपक्ष और दक्षिणी राज्यों के नेताओं की सबसे बड़ी चिंता—

  • जनसंख्या आधारित परिसीमन से उत्तर भारत की सीटें अधिक बढ़ेंगी
  • दक्षिणी राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल) का संसदीय प्रभाव कम हो सकता है

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इसे

“तमिलों पर हमला” बताते हुए विरोध प्रदर्शन तक किया।

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे

“जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के साथ अन्याय” करार दिया।

3. ? महिला आरक्षण को टालने का आरोप

कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने सवाल उठाया—

  • 2023 में पारित कानून को 2024 में लागू क्यों नहीं किया गया?
  • अब इसे परिसीमन से जोड़कर अनिश्चित भविष्य में क्यों धकेला जा रहा है?

4. ? संघीय ढांचे पर खतरा

विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक

  • राज्यों के बीच संतुलन को बिगाड़ सकता है
  • संघीय संरचना को कमजोर कर सकता है

⚖️ असली विवाद: महिला आरक्षण बनाम परिसीमन

इस पूरे विवाद का केंद्र एक जटिल सवाल है—
? क्या महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना जरूरी है?

  • सरकार कहती है: नई सीटें बनाकर आरक्षण देना व्यावहारिक समाधान है
  • विपक्ष कहता है: यह एक रणनीति है जिससे राजनीतिक नक्शा बदला जा सकता है

? आंकड़ों की राजनीति

वर्तमान बनाम संभावित स्थिति (विपक्ष के अनुमान अनुसार):

राज्य वर्तमान सीटें संभावित सीटें
उत्तर प्रदेश 80 ~120
तमिलनाडु 39 ~59

? अंतर 41 से बढ़कर 60+ तक जा सकता है — यही असंतुलन की आशंका विपक्ष जता रहा है।


? आगे क्या?

  • यह विधेयक 16 से 18 अप्रैल के विशेष सत्र में चर्चा के बाद पारित हो सकता है
  • यदि पास हुआ, तो
    • नई जनगणना
    • परिसीमन प्रक्रिया
    • फिर 2029 चुनाव में लागू

✍️  ऐतिहासिक सुधार या राजनीतिक पुनर्रचना?

यह प्रस्ताव एक साथ दो बड़े बदलावों का संकेत देता है—

  1. महिलाओं की राजनीति में अभूतपूर्व भागीदारी
  2. भारत के चुनावी भूगोल का संभावित पुनर्गठन

सरकार इसे “न्याय और सशक्तिकरण” की दिशा में कदम बता रही है,
जबकि विपक्ष इसे “संवैधानिक संतुलन और प्रतिनिधित्व के साथ जोखिम” के रूप में देख रहा है।

स्पष्ट है कि यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि 2029 और उसके बाद की भारतीय राजनीति की दिशा तय करने वाला निर्णायक मोड़ बन सकता है।

 

01 मई से 10 जून तक लगेंगे ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में लगेंगे शिविर

जनसमस्याओं के समयबद्ध समाधान और जनभागीदारी पर जोर

  रायपुर / छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आमजन की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के उद्देश्य से इस वर्ष भी “सुशासन तिहार 2026” के आयोजन व्यापक पैमाने पर किया जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर इस अभियान सफल आयोजन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि जन शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुशासन की आधारशिला है तथा आम नागरिकों को पारदर्शी, सरल एवं त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना राज्य शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। गत वर्ष आयोजित सुशासन तिहार के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए इस वर्ष इसे और अधिक व्यापक रूप में संचालित किया जाएगा।

30 अप्रैल तक लंबित प्रकरणों के निराकरण के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 30 अप्रैल 2026 तक जिले में लंबित प्रकरणों के निराकरण हेतु विशेष अभियान चलाया जाए। इसके अंतर्गत भूमि संबंधी प्रकरण जैसे नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, मनरेगा अंतर्गत लंबित मजदूरी भुगतान, हितग्राहीमूलक योजनाओं के लंबित भुगतान, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, बिजली एवं ट्रांसफार्मर संबंधी समस्याएं तथा हैंडपंप सुधार जैसे मुद्दों का प्राथमिकता से समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पात्र हितग्राहियों को उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ दिलाने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

01 मई से 10 जून तक लगेंगे जन समस्या निवारण शिविर

सुशासन तिहार के अंतर्गत 01 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में जन समस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर शिविर आयोजित होंगे। इन शिविरों में शासन की विभिन्न योजनाओं के संबंध में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा तथा पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही लाभ वितरण किया जाएगा। शिविरों में प्राप्त आवेदनों का अधिकतम एक माह के भीतर निराकरण सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की स्थिति की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि अभियान के दौरान मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण, मुख्य सचिव एवं प्रभारी सचिव समय-समय पर शिविरों में शामिल होकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे और आमजन से संवाद स्थापित करेंगे।

मुख्यमंत्री करेंगे विकास कार्यों का औचक निरीक्षण एवं समीक्षा बैठकें

अभियान के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय स्वयं विभिन्न जिलों में पहुंचकर विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का औचक निरीक्षण करेंगे तथा हितग्राहियों से फीडबैक लेंगे। इसके साथ ही जिला मुख्यालयों पर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित कर समाधान शिविरों में प्राप्त आवेदनों के निराकरण की स्थिति एवं योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा निरीक्षण एवं समीक्षा बैठक के उपरांत प्रेसवार्ता को संबोधित किया जाएगा तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों से भेंट कर सुझाव प्राप्त किए जाएंगे।

जनभागीदारी के लिए व्यापक प्रचार

जनसम्पर्क विभाग एवं जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि सुशासन तिहार के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु प्रभावी कार्ययोजना बनाकर विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जाए, ताकि अधिक से अधिक नागरिक इस अभियान से जुड़ सकें। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों से अपेक्षा की है कि वे आवश्यक अग्रिम तैयारियां सुनिश्चित करते हुए इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दें और अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करें, जिससे प्रदेश के आम नागरिकों को शासन की योजनाओं का समुचित लाभ मिल सके।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम

मुख्यमंत्री नारी शक्ति वंदन महासम्मेलन में हुए शामिल

रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित नारी शक्ति वंदन महासम्मेलन में शामिल हुए और कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 का पारित होना देश की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति का अभिनंदन करते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में नारी का स्थान सर्वोच्च है। हम भगवान से पहले भगवती की पूजा करते हैं और ऐश्वर्य के लिए माता लक्ष्मी, बुद्धि के लिए सरस्वती और बल के लिए दुर्गा की आराधना की जाती हैं। श्री साय ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने के प्रयास पहले भी हुए, लेकिन इसे प्रभावी रूप से लागू करने का साहसिक निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही संभव हो पाया। उन्होंने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलों ने महिलाओं के सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हम इस वर्ष को प्रदेश में ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मना रहे हैं और महतारी वंदन योजना के माध्यम से 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे वे शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद समाप्त हुआ है और प्रदेश विकास के नए मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को नया संबल मिलेगा। कार्यक्रम में “पंचायत से पार्लियामेंट तक निर्णय में नारी—नए भारत की तैयारी” के संकल्प को दोहराया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं में पहले से ही 14 लाख से अधिक महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जो उनके बढ़ते आत्मविश्वास का प्रमाण है। उन्होंने इस दौरान पुष्प के साथ महिलाओं का अभिनंदन कर बधाई और शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महिलाओं की इच्छाशक्ति और संकल्प उन्हें बड़े निर्णय लेने में सक्षम बना रहे हैं। महिलाओं को जिम्मेदारी मिले तो वे देश की तस्वीर बदल सकती हैं। वहीं पूर्व राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय ने बताया कि यह अधिनियम वर्ष 2029 तक लागू होगा, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
कार्यक्रम में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, पद्मश्री ऊषा बारले, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, पद्मश्री ऊषा बारले, प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी नीता डोंगरे सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

 

   रायपुर, / छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आज दिनांक 15 अप्रैल 2026 को पूर्व निर्धारित समय-सारणी के अनुसार आर.टी.ई. अंतर्गत निजी विद्यालयों में प्रवेश हेतु प्राप्त आवेदनों की चयन सूची ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से मंत्रालय महानदी भवन के मुख्यमंत्री कक्ष से जारी की गई। यह प्रक्रिया मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षा मंत्री की उपस्थिति में सम्पन्न कराई गई। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी , उपसंचालक लोक शिक्षण श्री अशोक नारायण बंजारा ,आर टी ई प्रभारी श्री महेश नायक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

आवेदन एवं चयन की स्थिति

इस वर्ष कुल 21 हज़ार 975 सीटों के विरुद्ध 38 हजार 439 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 27 हजार 203 आवेदन पात्र एवं 11 हज़ार 236 आवेदन अपात्र पाए गए। पात्र आवेदनों में से 14 हजार 403 विद्यार्थियों का चयन ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया गया है। यह चयन संख्या मुख्यमंत्री डी.ए.व्ही. विद्यालयों की आर.टी.ई. सीटों को छोड़कर है। इन विद्यालयों में जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी आयोजित कर पृथक जानकारी आर.टी.ई. पोर्टल में अपडेट की जाएगी।

जिलेवार चयनित विद्यार्थियों का विवरण

जिलेवार चयनित विद्यार्थियों की स्थिति इस प्रकार है- रायपुर में 2606, बिलासपुर में 1509, दुर्ग में 1059, कोरबा में 534, राजनांदगांव में 480, बलौदाबाजार-भाटापारा में 457, जांजगीर-चांपा में 500, मुंगेली में 702, कवर्धा में 367, धमतरी में 354, बलरामपुर में 798, रायगढ़ में 544, बेमेतरा में 315, जशपुर में 543, सक्ती में 347, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 258, महासमुंद में 244, कांकेर में 471, बालोद में 353, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 195, सूरजपुर में 427, सरगुजा में 273, गरियाबंद में 193, कोरिया में 179, बस्तर में 135, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 206, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 112, कोंडागांव में 101, नारायणपुर में 35, मोहला- मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 48, दंतेवाड़ा में 35, सुकमा में 9 तथा बीजापुर में 14 विद्यार्थियों का चयन किया गया है।

सीटें रिक्त रहने के प्रमुख कारण

कुछ निजी विद्यालयों में आर.टी.ई. सीटें पूर्ण रूप से नहीं भर पाईं। इसका मुख्य कारण यह है कि कई विद्यालयों को आवेदकों द्वारा प्राथमिकता नहीं दी जाती, जिससे उनके लिए आवेदन प्राप्त नहीं होते। साथ ही जिन विद्यालयों को द्वितीय या तृतीय प्राथमिकता में रखा जाता है, वहां भी सीटें रिक्त रह जाती हैं, क्योंकि आवेदकों को उनकी प्रथम प्राथमिकता वाले विद्यालय में प्रवेश मिल जाता है। परिणामस्वरूप ऐसे विद्यालय, जो किसी भी आवेदक की प्राथमिकता में नहीं आते, उनकी सीटें खाली रह जाती हैं।

राज्य शासन द्वारा आर.टी.ई. प्रवेश प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी एवं व्यवस्थित तरीके से सम्पन्न किया गया है। आगामी चरणों में शेष सीटों की पूर्ति एवं ऑफलाइन लॉटरी से संबंधित जानकारी आर.टी.ई. पोर्टल के माध्यम से जारी की जाएगी।

रायपुर, 

ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। कलेक्टोरेट परिसर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) रायपुर, जिला प्रशासन धमतरी और बीआरपी शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के बीच ‘STREE’ (Skill Development through Technological Resources for Empowering Economic Growth of Women) परियोजना के सफल क्रियान्वयन हेतु त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर NIT रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमणा राव, कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा तथा पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य ने संयुक्त रूप से MoU पर हस्ताक्षर कर परियोजना का विधिवत शुभारंभ किया।कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित अनेक शिक्षाविद् एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
यह परियोजना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) के TDUPW-A2K+ कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 90 लाख रुपये की सहायता से संचालित होगी। 36 माह की अवधि में 300 ग्रामीण महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।परियोजना के तहत महिलाओं को कोसा रेशम प्रसंस्करण, फाइबर निष्कर्षण, आधुनिक बुनाई, उत्पाद डिजाइन, उद्यमिता विकास एवं मार्केट लिंकेज जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशेष रूप से आदिवासी एवं वंचित वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और मूल्य संवर्धन संभव हो सके।
ज्ञात हो कि धमतरी में हैंडलूम और कृषि आधारित आजीविका की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें इस परियोजना के माध्यम से तकनीकी सहयोग से सशक्त किया जाएगा। वहीं, NIT रायपुर के निदेशक डॉ. रमणा राव ने इसे समावेशी नवाचार और जमीनी विकास की दिशा में एक मजबूत कदम बताते हुए महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने की बात कही। यह पहल न केवल महिलाओं को कौशल विकास का अवसर देगी, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और लघु उद्योगों की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। STREE परियोजना धमतरी में महिला सशक्तिकरण का एक प्रभावी मॉडल स्थापित करते हुए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगी।

आरटीई के तहत 14,403 बच्चों को निजी स्कूलों में मिला प्रवेश, ऑनलाइन लॉटरी बनी सुशासन का उदाहरण

   रायपुर /छत्तीसगढ़ में समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सशक्त आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों में प्रवेश हेतु ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से 14,403 बच्चों का चयन सुनिश्चित किया। मंत्रालय महानदी भवन से वर्चुअल माध्यम से प्रारंभ हुई यह प्रक्रिया पारदर्शिता, समान अवसर और डिजिटल सुशासन की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

राज्यभर से प्राप्त कुल 38,439 आवेदनों में से 27,203 आवेदन निर्धारित मानकों के अनुरूप पात्र पाए गए, जिनमें से ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से 14,403 बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रदान किया गया। यह पूरी प्रक्रिया पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार राज्य स्तर पर सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि किसी भी बच्चे की प्रगति आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो। हमारी प्राथमिकता है कि हर बच्चे को समान अवसर के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो।

उल्लेखनीय है कि आरटीई प्रावधानों के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की गई हैं। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने का सतत प्रयास कर रही है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 3 लाख 63 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।
राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के अंतर्गत शुल्क प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सके और निजी विद्यालयों में उनके प्रवेश की प्रक्रिया और सुदृढ़ हो।
पूरी प्रवेश प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जिसमें आवेदन से लेकर दस्तावेज सत्यापन और चयन तक के सभी चरण पूर्णतः पारदर्शी और तकनीक आधारित हैं। अभिभावक स्वयं या चॉइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान ही सिस्टम द्वारा निवास क्षेत्र से 1.5 किलोमीटर के दायरे में स्थित निजी विद्यालयों की जानकारी एवं उपलब्ध सीटों का विवरण प्रदर्शित किया जाता है, जिससे अभिभावकों को सूचित एवं सहज चयन का अवसर प्राप्त होता है। पात्रता के अनुसार 5.5 से 6.5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को कक्षा पहली में प्रवेश दिया जाएगा, जबकि अनुसूचित जाति, जनजाति, दिव्यांग एवं अन्य कमजोर वर्गों को प्राथमिकता प्रदान की जाती है। जिन विद्यालयों में सीटें रिक्त रह जाती हैं, वहाँ जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी, जिसकी जानकारी आरटीई पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी।

यह पहल न केवल हजारों बच्चों के शिक्षा के सपनों को साकार कर रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ में एक समावेशी, पारदर्शी और उत्तरदायी शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत आधार प्रदान कर रही है। राज्य सरकार का यह प्रयास शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त और दूरदर्शी परिवर्तन का संकेत है।

 

  रायपुर / अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में क्रेडा विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों ने आमजन के जीवन में उल्लेखनीय और सकारात्मक परिवर्तन लाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में सौर ऊर्जा आधारित प्रणालियों के बेहतर उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे विकास की गति को नई दिशा मिली है। विभाग की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप अब लोगों को बुनियादी सुविधाएं अधिक सरलता और सहजता से उपलब्ध हो रही हैं। सौर ऊर्जा के उपयोग से जहां एक ओर स्वच्छ पेयजल और सिंचाई व्यवस्थाएं सुदृढ़ हुई हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिना बिजली बिल के निरंतर रोशनी सुनिश्चित हो रही है। इससे न केवल लोगों का दैनिक जीवन अधिक सुविधाजनक हुआ है, बल्कि उनके जीवन स्तर में स्थायी और सकारात्मक सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

114 सोलर ड्यूल पंप से पेयजल और सिंचाई सुविधा सुदृढ़

ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की पहल पर प्रत्येक परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। क्रेडा विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में जल जीवन मिशन अंतर्गत जशपुर जिले में 114 सोलर ड्यूल पंप स्थापित किए गए हैं। इनसे पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ सिंचाई के लिए सस्ती एवं सुलभ ऊर्जा उपलब्ध हो रही है। सोलर पंपों के उपयोग से किसानों की डीजल एवं बिजली पर निर्भरता कम हुई है, जिससे उनकी लागत में कमी आई है और आय में वृद्धि हुई है। पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसान वर्षभर खेती कर पा रहे हैं, जिससे उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। वहीं घर के समीप जल उपलब्ध होने से महिलाओं को दूर से पानी लाने की परेशानी से राहत मिली है।

80 सोलर हाई मास्ट से रोशन हुए गांव और शहर

जशपुर जिले में सार्वजनिक स्थलों पर बेहतर प्रकाश व्यवस्था के लिए सोलर हाई मास्ट योजना के तहत ग्रामों, कस्बों और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौक-चौराहों पर संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों में 80 सोलर हाई मास्ट लगाए जा चुके हैं। इन सौर ऊर्जा आधारित लाइटों से रात्रिकालीन आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम हुआ है। साथ ही, दुर्घटनाओं और अपराधों में भी कमी आई है। जहां बिजली आपूर्ति सीमित या बाधित रहती है वहां भी ये हाई मास्ट निर्बाध रूप से रोशनी प्रदान कर रहे हैं।

800 सोलर पंप से किसानों को मिली बड़ी राहत

कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में सौर सुजला योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत जशपुर जिले में पिछले दो वर्षों में 800 सोलर पंप स्थापित किए गए हैं, जिनसे सिंचाई सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। सोलर पंपों के उपयोग से किसानों को बिजली बिल से मुक्ति मिली है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। साथ ही कृषि उत्पादन में वृद्धि, भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन, तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

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