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durg / shouryapath / सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के मानव संसाधन- ज्ञानार्जन एवं विकास विभाग द्वारा अधिकारियों के समग्र व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता संवर्धन तथा मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘प्रखर – व्यक्तिगत उत्कृष्टता की ओर पथ’ (प्रखर– द पाथ टू पर्सनल मास्टरी) का आयोजन बीएमडीसी में किया गया। भावनात्मक बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य एवं कल्याण, तनाव प्रबंधन, ध्यान तथा योग जैसे समकालीन एवं प्रासंगिक विषयों पर आधारित यह कार्यक्रम वर्तमान गतिशील कार्य परिवेश में अधिकारियों को व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने हेतु सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन महाप्रबंधक (मानव संसाधन-ज्ञानार्जन एवं विकास) श्री सौरभ वार्ष्णेय द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने सतत व्यावसायिक उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए भावनात्मक बुद्धिमत्ता, आत्म-देखभाल तथा समग्र स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को प्रशिक्षण सत्रों में सक्रिय सहभागिता करने तथा प्राप्त ज्ञान को अपने दैनिक जीवन एवं कार्यस्थल पर व्यवहार में लाने के लिए प्रेरित किया।
यह कार्यक्रम महाप्रबंधक प्रभारी (मानव संसाधन- ज्ञानार्जन एवं विकास) श्री संजीव कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ प्रबंधक (बीआरएम) श्री शिव कुमार, एडीएमओ (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. माला चौधरी, प्राचार्य सुश्री महेश्वरी खोबरागड़े तथा पूर्व मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (राउरकेला इस्पात संयंत्र) सुश्री अताशी प्रमाणिक ने संकाय सदस्य के रूप में अपनी विशेषज्ञता एवं व्यावहारिक अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए। प्रशिक्षण में नेतृत्व हेतु भावनात्मक बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य एवं तैयारी, रणनीतिक तनाव प्रबंधन, ध्यान, योग तथा सजग जीवनशैली जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
संवादात्मक सत्रों, केस स्टडी, समूह चर्चा, व्यावहारिक प्रदर्शनों एवं अनुभवात्मक अधिगम गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन, मानसिक दृढ़ता, प्रभावी संप्रेषण, तनाव प्रबंधन तथा स्वस्थ जीवनशैली संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों की व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक प्रभावशीलता में वृद्धि करते हुए उन्हें अधिक सक्षम, संतुलित एवं भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाना था।
कार्यक्रम में संयंत्र के विभिन्न विभागों से कुल 29 अधिकारियों ने सहभागिता की। उद्घाटन सत्र का संचालन सुश्री पारुल वर्मा द्वारा किया गया, जबकि कार्यक्रम का समन्वयन श्री विकास सरीन द्वारा किया गया।
मानव संसाधन-ज्ञानार्जन एवं विकास विभाग द्वारा समय-समय पर ऐसे नवोन्मेषी एवं आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जो कर्मचारियों की व्यावसायिक दक्षता के साथ-साथ उनके समग्र व्यक्तित्व विकास एवं मानसिक-शारीरिक कल्याण को भी प्रोत्साहित करते हैं।
पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली 1076 की कार्यप्रणाली, तकनीकी व्यवस्थाओं तथा शिकायतों के निराकरण तंत्र का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और नागरिकों को बेहतर एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए।
इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा तथा कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, सुशासन एवं अभिशरण विभाग के सचिव श्री राहुल भगत, विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। सभी मंत्रियों ने हेल्पलाइन संचालन व्यवस्था, शिकायत प्रबंधन प्रणाली तथा नागरिकों को प्रदान की जा रही सेवाओं का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन सेंटर में पहुंचकर शिकायतों के पंजीयन, उनकी निगरानी एवं समाधान की प्रक्रिया का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से चर्चा करते हुए शिकायतों के त्वरित निराकरण, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की प्राथमिकता प्रत्येक नागरिक की समस्या का समयबद्ध और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री ने सीएम हेल्पलाइन पर कॉलर श्री पूनाराम ठाकरे से की बात
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज सीएम हेल्पलाइन सेंटर के शुभारंभ के अवसर पर सीएम हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली अवलोकन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन पर कॉल करने वाले कॉलर श्री पूना राम ठाकरे से खुद बात की और उनका नाम, निवास तथा समस्या की जानकारी ली । मुख्यमंत्री को श्री ठाकरे ने बताया कि वे रायपुर के रहने वाले हैं और उन्होंने आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था जिसके संबंध में शिकायत दर्ज कराने उन्होंने हेल्पलाइन में कॉल किया है। मुख्यमंत्री ने कॉल पर श्री ठाकरे को आश्वस्त किया कि जल्द ही उनकी समस्या का निराकरण हो जाएगा।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय एवं अन्य मंत्रियों ने हेल्पलाइन के माध्यम से जुड़े हितग्राहियों से बातचीत भी की। उन्होंने नागरिकों की समस्याओं और सुझावों को सुना तथा संबंधित मामलों के त्वरित निराकरण का आश्वासन दिया। हितग्राहियों ने भी अपनी समस्याओं को सीधे शासन तक पहुंचाने के लिए इस व्यवस्था की सराहना की।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली राज्य के सभी विभागों को एकीकृत रूप से जोड़ने वाली व्यवस्था है। इसमें 1,200 से अधिक शिकायत श्रेणियां तथा लगभग 8,000 अधिकारियों को चार प्रशासनिक स्तरों पर मैप किया गया है। ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बहु-स्तरीय एस्केलेशन प्रणाली के माध्यम से शिकायतों के समाधान की सतत निगरानी की जाती है।
मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन संचालन में कार्यरत युवाओं से भी संवाद किया और उनके कार्यों की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान बताया गया कि इस व्यवस्था के संचालन में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे सेवा गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिला है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रणाली के अंतर्गत उपलब्ध एमआईएस डैशबोर्ड, शिकायत विश्लेषण प्रणाली तथा विभिन्न विभागों के प्रदर्शन मूल्यांकन संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को सुशासन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए शिकायतों के विश्लेषण के आधार पर व्यवस्थागत सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था केवल शिकायत निवारण तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन और जनता के बीच संवाद को मजबूत बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। इसके माध्यम से नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ सुनकर उनका समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा तथा प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बदली तस्वीर, ग्रामीणों को मिली आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा
रायपुर, / बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के अतिसंवेदनशील और पूर्व नक्सल प्रभावित अबुझमाड़ क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण कार्य ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। वर्षों तक विकास से दूर रहे मयूरीपारा तक अब सड़क पहुंचने से लोगों को बेहतर आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलने लगा है।
16 किलोमीटर सड़क निर्माण से जुड़ रहा दूरस्थ क्षेत्र
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बैल से मयूरीपारा तक 16 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना में अब तक 13 किलोमीटर मिट्टीकृत सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। साथ ही मुरूमीकरण और छह पुलियों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शेष कार्य जून माह में पूरा कर लिया जाएगा।
दुर्गम रास्तों से मिल रही राहत
ग्राम बैल की सरपंच श्रीमती जुग्गी अठामी ने बताया कि लंबे समय तक सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य कार्यों के लिए घने जंगलों से होकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। बरसात के मौसम में नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था, जिससे समय और परेशानी दोनों बढ़ जाते थे। उन्होंने बताया कि आजादी के 78 वर्षों बाद भी यह क्षेत्र नक्सल प्रभाव और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर था। अब सड़क निर्माण से हालात तेजी से बदल रहे हैं और लोगों को बड़ी राहत मिली है।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मिला नया आधार
सड़क बनने से स्कूली बच्चों का आवागमन आसान हुआ है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर हुई है। अब जरूरत पड़ने पर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना संभव हो रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी सुविधा मिल रही है।
विकास और समृद्धि की नई उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद है। बैल से मयूरीपारा मार्ग के पूर्ण होने के बाद क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से अबुझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।
नैनो उर्वरकों के उपयोग से उर्वरक प्रबंधन हुआ सरल, समय और श्रम की हो रही बचत
रायपुर, / राज्य शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब किसानों के खेतों में दिखाई देने लगा है। आधुनिक कृषि तकनीकों एवं नवाचारों को अपनाकर किसान खेती को अधिक सुविधाजनक, किफायती और लाभकारी बना रहे हैं। सक्ती जिले के विकासखंड सक्ती अंतर्गत ग्राम अचानकपुर के प्रगतिशील किसान श्री गुलाबचंद राठौर भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने नैनो यूरिया (तरल) का सफल उपयोग कर खेती में बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं तथा अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
श्री गुलाबचंद राठौर ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष अपनी कृषि भूमि में नैनो यूरिया का उपयोग किया था, जिसके परिणाम अत्यंत संतोषजनक रहे। उन्होंने कहा कि पारंपरिक यूरिया की 45 किलोग्राम की भारी बोरियों की तुलना में नैनो यूरिया का परिवहन, भंडारण एवं उपयोग कहीं अधिक सरल और सुविधाजनक है। इसकी छोटी शीशी को किसान आसानी से खेत तक ले जा सकते हैं, जिससे समय, श्रम और परिवहन व्यय में उल्लेखनीय बचत होती है। उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया के उपयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे फसलों की वृद्धि एवं विकास में सहायता मिलती है।
उर्वरकों की उपलब्धता से किसानों को मिल रही सुविधा श्री राठौर ने बताया कि वर्तमान खरीफ सीजन के लिए सेवा सहकारी समिति में शासन के मानकों के अनुरूप यूरिया एवं डीएपी उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्हें भी आवश्यकता के अनुसार यूरिया एवं डीएपी खाद सहजता से प्राप्त हुआ है, जिससे कृषि कार्यों के संचालन में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरकों की समय पर उपलब्धता किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे खेती-किसानी के कार्य सुचारु रूप से संपादित किए जा सकते हैं।
कम लागत में अधिक लाभ का माध्यम बन रहा नैनो यूरिया
किसान श्री गुलाबचंद राठौर का मानना है कि नैनो यूरिया खेती की लागत को नियंत्रित करने, उर्वरक प्रबंधन को सरल बनाने तथा बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने से संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है और किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है। नैनो उर्वरकों का उपयोग कृषि को अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
अन्य किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील
श्री राठौर ने जिले एवं प्रदेश के किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत खेती पद्धतियों तथा नैनो उर्वरकों का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने और नवाचारों को अपनाने से कम लागत में अधिक उत्पादन एवं बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।
राज्य शासन द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उन्नत बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और समृद्ध बना रहे हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, कला, संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प और आधुनिक रचनात्मकता को एक मंच पर समेटने वाला संस्कृति विभाग का प्रतिष्ठित कला प्रशिक्षण शिविर ‘आकार-2026’ रंगारंग प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक उल्लास के बीच भव्य रूप से संपन्न हो गया। 25 मई से 9 जून तक महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय परिसर में आयोजित 16 दिवसीय शिविर में प्रदेशभर से आए 1281 प्रतिभागियों ने 16 विभिन्न कला विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी प्रतिभा को नई उड़ान दी।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि एवं रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि बच्चों को मिट्टी, प्रकृति और सृजन से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने कहा, "जिस दिन बच्चे मिट्टी से जुड़कर सृजन करना सीख जाएंगे, उनका जीवन संवेदनशीलता और आनंद से भर जाएगा। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोककलाओं और परंपराओं की जानकारी देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।"
उन्होंने सुझाव दिया कि ‘आकार’ जैसे शिविर प्रदेश के सभी संभागों में आयोजित किए जाएं तथा छत्तीसगढ़ी हस्तशिल्प और पारंपरिक आभूषणों के लिए स्थायी विक्रय केंद्र विकसित किए जाएं, ताकि कलाकारों को बेहतर बाजार और आर्थिक अवसर मिल सकें।
संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि ‘आकार’ केवल एक प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने का सशक्त अभियान है।
इस वर्ष शिविर की विशेषता रही कि प्रतिभागियों को एक ओर टेराकोटा, गोदना कला, जूट शिल्प, रजवार भित्ति चित्र, मंडला-मांडना कला, कथक, भरथरी गायन और लोककलाओं का प्रशिक्षण दिया गया, वहीं दूसरी ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कला तकनीकों से भी परिचित कराया गया। इससे परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण हुआ।
समापन अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने पूरे परिसर को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत सुवा, कर्मा, पंथी नृत्य, बांसगीत, भरथरी गायन और लोकसंगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्यों की मधुर ध्वनि और कलाकारों की जीवंत ऊर्जा ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
समारोह में मुख्य अतिथि ने विभिन्न विधाओं के प्रशिक्षकों और कला गुरुओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। शिविर में प्रदेश के प्रतिष्ठित कलाकारों और विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देकर उनकी रचनात्मक क्षमता को नई दिशा प्रदान की।
‘आकार-2026’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर केवल इतिहास की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की प्रेरणा भी है। 1281 प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी, अनुभवी कला गुरुओं का मार्गदर्शन और लोक संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों ने इस आयोजन को प्रदेश के सांस्कृतिक कैलेंडर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बना दिया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) ने स्पष्ट किया है कि राज्य में दवा क्रय एवं आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया गुणवत्ता मानकों और निर्धारित नियामक प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जाती है। किसी भी दवा को आम जनता तक पहुंचाने से पहले मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य रूप से कराया जाता है।
सीजीएमएससी के अनुसार, Unicure India Ltd. ने 18 मई 2026 को निगम को सूचित किया कि मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPPHCL), भोपाल द्वारा 8 मई 2026 को कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। यह कार्रवाई Lactulose Solution IP 10 gm/15 ml (100 ml बोतल) के तीन बैच सरकारी प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता परीक्षण में अमानक पाए जाने के बाद की गई।
निगम ने बताया कि उक्त दवा के एक बैच को पहले ही मध्यप्रदेश में प्रोडक्ट ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद CGMSC ने अपनी निविदा शर्तों के अनुसार संबंधित दर अनुबंध (Rate Contract) को ब्लॉक कर दिया था तथा जारी क्रयादेशों को निरस्त करने की प्रक्रिया पूरी कर ली थी।
CGMSC ने स्पष्ट किया कि कंपनी द्वारा पूर्व में आपूर्ति की गई दवाओं का परीक्षण निगम की अनुबंधित NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कराया गया था। जांच रिपोर्ट में दवाएं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाई गईं, जिसके बाद ही उनका वितरण स्वास्थ्य संस्थानों को किया गया।
कंपनी ने यह भी जानकारी दी है कि उसने ब्लैकलिस्टिंग आदेश को चुनौती देते हुए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई 10 जून 2026 को निर्धारित है। न्यायालय के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
CGMSC ने कहा कि ब्लैकलिस्टिंग की सूचना प्राप्त होने के बाद संबंधित कंपनी के साथ कोई नया दर अनुबंध या नया क्रयादेश जारी नहीं किया गया है। यह कदम निगम की गुणवत्ता-केंद्रित और दवा विनियामक मानकों पर आधारित नीति के अनुरूप उठाया गया है।
निगम ने पुनः दोहराया कि राज्य में दवा खरीद और आपूर्ति की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं गुणवत्ता आधारित है। स्वास्थ्य केंद्रों में दवा भेजने से पहले प्रत्येक दवा का निर्धारित मानकों के तहत परीक्षण कराया जाता है, ताकि मरीजों को केवल सुरक्षित और गुणवत्तायुक्त दवाएं ही उपलब्ध हो सकें।
बड़े कनेरा और राजागांव मिनी स्टेडियम निर्माण राशि में अनियमितता का मामला, एफआईआर के बाद भेजे गए जेल
कोंडागांव/शौर्यपथ। बड़े कनेरा और राजागांव ग्राम पंचायतों में मिनी स्टेडियम निर्माण के लिए स्वीकृत लगभग 26 लाख रुपये से अधिक की राशि के कथित गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जिला पंचायत के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले में सामने आए तथ्यों और लगातार उठ रहे सवालों के बाद जांच तेज हुई, जिसके पश्चात यह कार्रवाई की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला पंचायत में पदस्थ सहायक परियोजना अधिकारी गजेंद्र कश्यप तथा शाखा लिपिक (बाबू) मनीष पटेल पर मिनी स्टेडियम निर्माण मद की राशि के भुगतान में अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। आरोप है कि दोनों ने पंचायत प्रतिनिधियों पर दबाव बनाकर राशि का भुगतान कराया।
मामले की प्रारंभिक जांच के बाद अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) द्वारा वसूली संबंधी कार्रवाई की गई। इसके उपरांत जिला पंचायत प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की।
बड़े कनेरा और राजागांव के सरपंच एवं सचिवों ने कोंडागांव कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध कर त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।
मामले की विवेचना अभी जारी है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि राशि के उपयोग और भुगतान प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग शामिल थे। इस कार्रवाई को ग्रामीण विकास कार्यों में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शौर्यपथ द्वारा इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद जांच और कार्रवाई में तेजी आने की चर्चा भी क्षेत्र में है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया भर के नेताओं ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। वैश्विक नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व, भारत के आर्थिक-सामाजिक परिवर्तन, ‘ग्लोबल साउथ’ की मजबूत आवाज़ बनने और समावेशी विकास की उनकी सोच की सराहना की है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने प्रधानमंत्री मोदी को भेजे अपने संदेश में कहा कि यह उपलब्धि केवल लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारत की जनता द्वारा उनके नेतृत्व में व्यक्त किए गए विश्वास और भरोसे का प्रतीक है। उन्होंने भारत के आर्थिक और सामाजिक बदलावों की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण श्रीलंका सहित कई देशों के लिए प्रेरणास्रोत बना है।
राष्ट्रपति ने भारत और श्रीलंका के मजबूत संबंधों का उल्लेख करते हुए 2022 के आर्थिक संकट के दौरान भारत द्वारा दिए गए सहयोग को भी याद किया। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2025 में श्रीलंका यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को वहां के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘मित्र विभूषण’ से सम्मानित किया गया था।
पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री मोदी को “रोल मॉडल और नेतृत्व की मिसाल” बताया। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालकर बेहतर जीवन उपलब्ध कराना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
उन्होंने भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई। मई 2023 में प्रधानमंत्री मोदी की पापुआ न्यू गिनी यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक पड़ाव माना जाता है।
त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर एक प्रभावशाली और निर्णायक आवाज़ बनकर उभरा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साधारण पृष्ठभूमि से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करने तक के सफर की सराहना करते हुए विदेश नीति, आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया।
उन्होंने जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की त्रिनिदाद और टोबैगो यात्रा को भी ऐतिहासिक बताया, जो 26 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी।
विश्व नेताओं के संदेशों में एक समान स्वर दिखाई दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। आर्थिक विकास, कूटनीतिक सक्रियता, ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने में भारत की भूमिका को व्यापक सराहना मिली है।
चंडीगढ़/नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि संसद और विधानसभाओं में लगातार होने वाले व्यवधान लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए जनप्रतिनिधियों को अपने आचरण, संवाद और सार्थक बहस के माध्यम से जनता का विश्वास मजबूत करना होगा।
कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) इंडिया रीजन ज़ोन-II (नॉर्थ ज़ोन) के दो दिवसीय सम्मेलन के समापन अवसर पर श्री बिरला ने कहा कि जनता ने अपने प्रतिनिधियों को लोकतांत्रिक संस्थाओं में भेजा है, इसलिए उनके व्यवहार और कार्यशैली का सीधा प्रभाव समाज पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि "जैसा नेतृत्व होगा, वैसा ही समाज का स्वरूप भी विकसित होगा।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य केवल मजबूत संसदीय और विधायी संस्थाओं के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने, विधायकों की क्षमता विकसित करने और संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत के संघीय ढांचे में राज्यों और केंद्र सरकार का समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्यों का समग्र विकास ही राष्ट्रीय विकास का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि नई चुनौतियों का समाधान नए विचारों और नवाचारों से ही संभव है तथा सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझाव इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
उन्होंने युवाओं और महिलाओं की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अधिक भागीदारी पर बल देते हुए कहा कि छात्र जीवन से ही संविधान, लोकतंत्र और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता विकसित की जानी चाहिए।
8-9 जून को चंडीगढ़ में आयोजित इस सम्मेलन में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली सहित 12 राज्यों की विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण तथा अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।
आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों और विधायकों के बीच संवाद बढ़ाने तथा तकनीक के जिम्मेदार उपयोग के जरिए जागरूक और सशक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया गया।
निरंतर प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, अनुसंधान सहयोग और श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं के आदान-प्रदान के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को अधिक सक्षम बनाने पर सहमति बनी।
नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में नागरिकों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास मजबूत करने पर जोर दिया गया।
सार्वजनिक सेवाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और सुलभ बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया।
चंडीगढ़ सम्मेलन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि विकसित भारत-2047 का मार्ग मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं, जनभागीदारी, तकनीकी नवाचार और जवाबदेह शासन से होकर गुजरता है। सम्मेलन में पारित चारों संकल्प आने वाले वर्षों में देश की संसदीय और विधायी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, आधुनिक और जनोन्मुख बनाने की दिशा तय करेंगे।
रेरा का कड़ा संदेश – फ्लैट बेचकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकेंगे प्रमोटर, 15 दिन में देना होगा जवाब
रायपुर,।
छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) ने राज्यभर के रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 989 पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं से जुड़े 595 प्रमोटरों (बिल्डरों) को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई उन मामलों में की गई है जहां परियोजनाएं पूरी होने और पूर्णता प्रमाण-पत्र (Completion Certificate) प्राप्त होने के बावजूद कॉमन एरिया, सुविधाओं एवं संबंधित दस्तावेजों का हस्तांतरण आवंटित हितग्राहियों की सोसायटी या एसोसिएशन को नहीं किया गया।
रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम
CGRERA द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रेरा अधिनियम-2016 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आवंटितों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह व्यापक समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि बड़ी संख्या में ऐसी परियोजनाएं हैं जिनमें प्रमोटरों ने कानूनी दायित्वों का पालन नहीं किया है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि परियोजना पूर्ण होने के बाद आवंटितों की सोसायटी/एसोसिएशन का गठन सुनिश्चित करना तथा परियोजना के सामान्य क्षेत्रों, सुविधाओं एवं अभिलेखों का विधिवत हस्तांतरण करना प्रमोटर की वैधानिक जिम्मेदारी है।
15 दिन में देना होगा स्पष्टीकरण
CGRERA ने नोटिस प्राप्त करने वाले सभी प्रमोटरों को निर्देशित किया है कि वे 15 दिनों के भीतर यह स्पष्ट करें कि उन्होंने रेरा अधिनियम के प्रावधानों का पालन क्यों नहीं किया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
केवल बिल्डर ही नहीं, खरीदारों की भी जिम्मेदारी
प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि रेरा कानून केवल प्रमोटरों पर ही दायित्व नहीं डालता, बल्कि आवंटितों के लिए भी कुछ कानूनी जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। अधिनियम की धारा 19(9) के अनुसार प्रत्येक आवंटी का कर्तव्य है कि वह एसोसिएशन, सोसायटी या सहकारी समिति के गठन में सक्रिय सहभागिता निभाए।
हितग्राहियों से जागरूक रहने की अपील
CGRERA ने सभी आवंटितों से अपील की है कि वे अपने वैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहें तथा सोसायटी गठन एवं परियोजना प्रबंधन हस्तांतरण की प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। इससे आवासीय परियोजनाओं के बेहतर संचालन और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।
रियल एस्टेट जगत में मचेगी हलचल
विशेषज्ञों का मानना है कि 595 प्रमोटरों को एक साथ नोटिस जारी किया जाना छत्तीसगढ़ के रियल एस्टेट इतिहास की महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक है। इससे न केवल बिल्डरों की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि फ्लैट एवं प्लॉट खरीदारों के अधिकारों को भी मजबूती मिलेगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
