August 04, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    13 जुआरियों को किया घेराबंदी कर गिरफ्तार
    अफवाहों का बाजार रहा गर्म कि 22 लाख रूपये पुलिस ने की है जब्त


    दुर्ग / शौर्यपथ / शुक्रवार की शाम मुखबीर से मिली सूचना पर कार्यवाही करते हुए दुर्ग से लगा हुआ ग्राम मोहलाई में पुलिस ने एक जुआ के अड्डा पर छापा मारकर जुआ खेलते हुए 13 लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास से 1 लाख 10 हजार रूपये नगद एवं ताशपत्ती जब्त किया।
    पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम मोहलई में एक जगह बैठकर 13 लोगों द्वारा जुआ खेलने की जानकारी पर पुलिस ने वहां छापा मारकर वहां जुआ खेल रहे मो. कलीम 32 साल मिलपारा, आयुष सिंह 24 साल शंकरनगर दुर्ग, जितेन्द्र गोैरिया 24 साल उरला बाम्बे आवास, प्रकाश सिंह गढे 26 साल गांंधी चौक उतई, विनय उर्फ स्टार यादव 24 साल रूआबांधा बस्ती, बमन जैन 19 साल रूआबांधा बस्ती सत्यम चौक, दीपक जैन 32 साल गया नगर दुर्ग,बलराम देवांगन 24 साल शंकरनगर दुर्ग, हेमलाल उर्फ लाल सोनवानी 20 साल शिवपारा रूआबांधा, सुमित साकरे 25 साल उरला नहरपारा, ओमप्रकाश साहू 30 साल मूर्तिचौक शंकर नगर दुर्ग,निर्मल दुबे 43 साल मिलपारा दुर्ग, साकेत जैन 32 साल दादाबाड़ी दीपक नगर दुर्ग को गिरफ्तार कर इनलोगों के पास से 1 लाख 13 हजार रूपये जब्त किया गया है। पुलिस इन सभी के विरूद्ध जुआ एक्ट 13 के तहत कार्यवाही कर इन सभी को मुचलके पर रिहा कर दिया गया। सूत्रों की माने तो लंबे समय से मोहलाई में जुआ का फड़ सजने का कार्य हो रहा था, जहां दूर दूर से बड़े बड़े जुआरी यहां जुआ में अपनी किस्मत आजमाने पहुंचते है। पुलिस के पहुंचने से अब इन सभी जुआरियों में भी हड़कंप मच गया है, क्येांकि ये ग्राम और जगह जुआरी अपने लिए अब तक सुरक्षित मान रहे थे। हालांकि दुर्ग पुलिस द्वारा यहां मारे गये छापे में जब्त रूपये को लेकर ये अफवाहों का बाजार गर्म रहा कि पुलिस ने मोहलाई में छापामारकर 13 जुआरियों को पकड़कर 22 लाख रूपये जब्त की है, हालांकि पुलिस द्वारा जारी विज्ञप्ति में 1 लाख दस हजार रूपये जब्त होने की पुष्टि की है।
    अवैध कारोबारों पर लगातार हो रही कार्यवाही में पुलिस भी अब भी अब सवालों के घेरे में आने लगी है, क्योंकि एक ही तरीके के अलग अलग मामलों में अलग अलग धाराओं के तहत पुलिस कार्यवाही करती आजकल नजर आ रही है, हाल ही में ऐसे ही एक मामले में पुलिस ने जुआ एक्ट के साथ लॉकडाउन का उल्लंघन 188 तथा 151 के तहत कार्यवाही कर जुआरियों को जेल भेज दिया गया था, वहीं दूसरी तरफ इतने बड़े पैमाने पर लोगों का जमावड़ा लगने और इतना राशि जब्त होने के बाद भी पुलिस की तरफ से किसी भी तरह की गंभीर धाराए इन आरोपियों पर नही लगाना भी सवालिया निशान लगा रहा है।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / डोंगरगांव विधायक व छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण व अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष दलेश्वर साहू ने अपने निर्वाचन क्षेत्र डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र के लिए विकास कार्यों की स्वीकृति दिलाई है।
    विधायक कार्यालय से अमरनाथ साहू के अनुसार कोलिहापुरी छीपा में सीसी रोड 2.60, सीसी रोड टाटेकसा 2.60 लाख रुपए, सीसी रोड उचित मूल्य की दुकान से प्राथमिक शाला भवन तक पेंड्री 2.60 लाख रुपए, सीसी रोड नारायण सिन्हा घर से पैठू तालाब तक खुज्जी 2.60 लाख रुपए, सिंचाई हेतु 2 नग सामुदायिक नलकूप स्थापना बडगांव चारभाठा 3.41 लाख रुपए, नाली निर्माण झिंझारी 1.14 लाख रुपए, शासकीय हाईस्कूलों में खेल सामग्री कबड्डी मेट 9 लाख रुपए, मंच निर्माण वार्ड नं 17 निषाद पारा खुज्जी 1 लाख रुपए, उद्यान निर्माण पुराना पुलिस थाना डोंगरगांव 7.40 लाख रुपए, शमशान शेड आलीवारा 5 लाख, मनरेगा अंतर्गत नया तालाब गहरीकरण टाटेकसा, शमशान घाट के साथ उद्यान निर्माण टप्पा, ओडारबांध, बम्हनीभाठा, आसरा, कोपेडीह, राजीव मिशन तालाब बुद्धुभरदा, मुक्तिधाम निर्माण परना, आरबीरा, पारागांव कला, मेड़ बांधान, भूमि सुधार हेतु अंडी की प्राक्कलन अनुसार स्वीकृति दी गई है।
    नगर के पुराना थाना के पास अब बाल उद्यान के रूप में विकसित करने हेतु विधायक निधि से 7.40 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई है। जिसका भूमिपूजन स्वयं विधायक दलेश्वर साहू ने नगर पंचायत अध्यक्ष हीरा निषाद, उपाध्यक्ष ललित लोढा व पार्षदों की उपस्थिति में की। विधायक दलेश्वर साहू ने इस उद्यान के निर्माण पर और भी राशि की आवश्यकता पड़े पर दिए जाने का आश्वासन दिया।

    ० शिशु को शुरूआती 6 महीने माँ का दूध पर्याप्त, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के साथ स्वास्थ्य एवं पोषण अच्छा रहता है
    ० जागरूकता के लिये प्रकाशित यह पोस्टर घर-घर जाकर शिशुवती माताओं को वितरित किया जायेगा


       राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर स्तनपान सप्ताह पोस्टर का विमोचन किया। कलेक्टर श्री वर्मा ने यह अपील की है कि शिशु को शुरूआती 6 महीने सिर्फ माँ का दूध पर्याप्त है। जिससे उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उनका स्वास्थ्य एवं पोषण अच्छा रहता है। उन्होंने शिशुवती माताओं से आग्रह किया है कि अपने शिशु के अच्छे स्वास्थ्य के लिये उनको स्तनपान अवश्य कराएं। उन्होंने कहा कि इसे सघन अभियान के रूप में चलायें।
    इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी, कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती रेणु प्रकाश एवं महिला बाल विकास की टीम उपस्थित थी। जागरूकता के लिये प्रकाशित यह पोस्टर घर-घर जाकर शिशुवती माताओं को वितरित किया जायेगा।
    विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर ग्राम पंचायत खुज्जी के आंगनबाड़ी क्षेत्र राजीव नगर में पर्यवेक्षक सेक्टर डोंगरगांव एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा संयुक्त गृहभेंट किया गया। जिसमें 5 माह के बालक ओजल की माता श्रीमती अंजनी देवांगन एवं पिता तिलेश्वर देवांगन से भेंट करके स्तनपान संबंधित टेकअवे एवं वीडियो प्रदर्शन के माध्यम से परामर्श दिया गया। परामर्श के दौरान ओजल के दादा-दादी भी उपस्थित थे। शिशु को 6 माह तक केवल स्तनपान कराने बताया गया एवं छह माह पूर्ण होने पर स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की शुरूआत कैसे की जाए उसकी जानकारी भी दी गई। हितग्राही के घर रेडी टू ईट के पैकेट का निरीक्षण किया गया जो डबल लेयर पॉलिथीन पैकिंग पाया गया। हितग्राही ने बताया कि वे रेडी टू ईट का उपयोग रोटी एवं चीला बनाकर करते हैं।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / डोंगरगांव क्षेत्र के कुमर्दा में एक महिला के साथ छेड़छाड़ करना कांग्रेस के एक नेता और गांव के पटेल को महंगा पड़ गया। छेडख़ानी के आरोप में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।
    बताया गया है कि कांग्रेस के ब्लॉक महामंत्री लालचंद साहू और ग्राम प्रमुख किशन साहू पर कुमर्दा गांव की एक विवाहिता ने दोनों के खिलाफ अश्लील हरकत करते छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। पीड़िता द्वारा सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयान के आधार पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। पखवाड़ेभर पूर्व हुए इस मामले को राजनीतिक दबाव के चलते दबाने की भी कोशिश हुई, लेकिन महिला के अड़े रहने से आरोपियों को जेल की हवा खानी पड़ी।
    मिली जानकारी के मुताबिक ब्लॉक कांग्रेस के महामंत्री लालचंद साहू व ग्राम प्रमुख किशन साहू पर पीड़िता द्वारा बलातपूर्वक घर में घुसकर अनैतिक संबंध बनाने की मांग तथा उसकी मर्यादा भंग करने व नहीं मानने पर पीड़िता को डराने धमकाने का आरोप लगाया था। इस संदर्भ में थाना डोंगरगांव में उक्त दोनों आरोपियों के विरूद्ध पीड़िता के द्वारा घटना दिवस 11 जुलाई की रात्रि 11 बजे डोंगरगांव थाना पहुंचकर अपनी आप बीती पुलिस को बताया गया थाए लेकिन कार्रवाई के नाम पर उसे बैरंग लौटा दिया गया। कोई कार्रवाई होता नहीं देख पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक से की। इसके बाद 3 दिनों पूर्व इस मामले में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के महामंत्री तथा पूर्व विधायक प्रतिनिधि लालचंद साहू तथा ग्राम प्रमुख किशन साहू के विरूद्ध गत दिनों आईपीसी की धारा 509, 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार को दोनों आरोपियों के विरूद्ध पूर्व में दर्ज प्रकरण में आईपीसी की धारा 452, 354 (क) व 506 को संलग्न किया गया है। जिसके आधार पर शुक्रवार को आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और उन्हें न्यायालय में पेश किया गया।

    शौर्यपथ / कोरोनावायरस, लॉकडाउन, सामाजिक दूरी, क्वारंटाइन के चलते सभी लोग अपने घरों में ही रहना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं। ऐसे में बर्थडे पार्टी या अन्य कोई सेलिब्रेशन सब कुछ कैंसल करना पड़ रहा है। जो लोग हर मौके को सेलिब्रेट करना पसंद करते हैं, ये उनके लिए थोड़ा कठिन हो सकता है। लेकिन यह सब कहीं न कहीं पॉजिटिव भी है, क्योंकि इससे हम खुद पर कंट्रोल कर पा ही रहे हैं, साथ ही दूरी होने पर कैसे अपने रिश्तों को सहेजकर रख सकते हैं, कैसे बिना मिले साथ में सेलिब्रेट कर सकते हैं, ये सभी चीजें सीखने का मौका भी मिल रहा है।

    वहीं फ्रैंडशिप डे नजदीक है, ऐसे में वे लोग जो इस दोस्ती के दिन को बहुत खास तरीके से सेलिब्रट करना पसंद करते हैं, वे कोरोना काल में हमेशा की तरह सेलिब्रेट नहीं कर पाएंगे। लेकिन इससे निराश होने की कोई आवश्यकता नहीं है कोरोना काल में आप वे सब सीख रहे हैं जिसके बारे में आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। लेकिन इस बात का भी ख्याल रखें कि यह समय आपके लिए यादगार भी बनकर रह जाएगा। तो क्यों न 2020 के फ्रैंडशिप डे को भी आप यादगार बना लें। सारे नियमों का पालन करते हुए भी आप इस खास अवसर को इन्जॉय कर सकते हैं। कैसे? आइए जानते हैं।
    वर्चुअल पार्टी कर सकते हैं

    अगर आप फ्रैंडशिप डे को सेलिब्रेट करना चाहते हैं और इस खास दिन को यादगार बनाना चाहते हैं वह भी अपने दोस्तों के साथ, तो वर्चुअल पार्टी कर सकते हैं। इस समय वर्चुअल पार्टी ही एकमात्र उपाय है। ऐसे में आप अपने दोस्तों के साथ वीडियो कॉल के लिए एक समय तय कर लें। सुनिश्चित करें कि सभी आपके परिचित हों और कॉन्फ्रेंसिंग पार्टी का मजा लें। इस दौरान आप दोस्तों से जमकर बातें करें, केक काटें और फोटोज क्लिक करें।
    घर पर ही फ्रैंडशिप बैंड बनाएं

    यह सोचकर अपना मजा किरकिरा न करें कि कोरोना में बाहर तो जा नहीं सकते तो मार्केट से कैसे फ्रैंडशिप बैंड खरीद पाएंगे? आप सुरक्षा और नियमों का पालन करते हुए इस खास दिन को बेहतर बना सकते हैं। आप घर में ही फ्रैंडशिप बैंड बनाएं। यह आपको क्रिएटिव तो बनाएगा ही, साथ ही इस खास दिन आप कुछ नया भी सीखेंगे।

    अपने दोस्तों से डिस्कस करें कि पार्टी कैसे कर सकते हैं?
    सारी प्लानिंग आप खुद ही न करें। अपने दोस्तों से बातें करें, उनसे सुझाव मांगें और उस हिसाब से आप इस दिन को कैसे सेलिब्रेट करना है सोचें। इससे आप और आपके फ्रैंड्स सब मिलकर इस दिन को और बेहतर बना सकते हैं।

    ड्रेस थीम के साथ करें सेलिब्रेट

    फ्रैंडशिप डे के दिन आप अपने दोस्तों के साथ मिलकर ड्रेस थीम भी डिसाइड कर सकते हैं। यह इस दिन को और इंट्रेस्टिंग बनाने में मदद करेगी।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / लंबे समय तक जिम बैग में आपके कपड़े रहते हैं, ऐसे में पसीने की बदबू आना लाजमी है। हम आपको इस लेख में कुछ घरेलू तरीके बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप इस परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं। आइए जानते हैं।

    अधिकतर लोग जिम के कपड़ों को रोज नहीं धोते और वे उसे जिम बैग में रखना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसे में कपड़े ज्यादा दिनों तक गंदे रहते हैं और गंध आना शुरू हो जाती है। आप इस समस्या से निजात पाने के लिए जिम के कपड़ों को रोज धोएं, अच्छी तरह सुखाएं और फिर इस्तेमाल करें। इससे आपके कपड़े साफ और ताजे भी रहेंगे।
    यदि आप अपने शुज को भी जिम बैग में रखते हैं तो आपको ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। शूज को हफ्ते में 2 बार जरूर धोएं। इसके लिए आप डिटर्जेंट के पानी में अपने जिम के शूज को भिगोकर रखें और इसे अच्छी तरह साफ करके सुखा लें, फिर इनका इस्तेमाल करें।

    आधी बाल्टी ठंडे पानी में 1 बड़ा चम्मच विनेगर मिलाएं। अब तैयार घोल में अपने जिम के कपड़ों को 20 मिनट के लिए भिगोएं, फिर साधारण तरीके से कपड़ों को धोएं। विनेगर बदबू को दूर करने में मददगार साबित होगा।
    यदि आपके पास इतना समय नहीं है कि आप रोज जिम के कपड़े धोएं तो इन्हें आप सिर्फ धूप दिखाकर भी रख सकते हैं। ऐसा ही आप अपने शूज के साथ भी कर सकते हैं। ऐसे में कपड़ों और जूतों में से आ रही बदबू दूर हो जाएगी।

    खाना खजाना /शौर्यपथ / पारंपरिक व्यंजन- घेवर

    सामग्री :
    2 कटोरी मैदा, 2 कप पानी, डेढ़ बड़ा चम्मच जमा गाढ़ा घी, डेढ़ कप बर्फ का ठंडा पानी, घी, सवा 2 कटोरी शकर, गुलाब पत्ती, चुटकी भर पीला रंग, कटे हुए पिस्ता व बादाम, 1 मटका रखने वाली रिंग।

    विधि :
    सबसे पहले जमा हुआ गाढ़ा घी लेकर एक बर्तन में बर्फ के ठंडे पानी के साथ खूब फेंटिए। करीबन 5-10 मिनट बाद घी में से पानी बाहर निकल जाता है। अब पानी निथारकर इसमें थोड़ा-थोड़ा कर मैदा मिलाकर फेंटिए।

    जब भजिए से भी पतला घोल तैयार हो जाए, तब छोटी कड़ाही में मटका रखने वाली रिंग रखें। इसमें घी डालकर गर्म करें। जब घी अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब रिंग के बीच में धीरे-धीरे धार-सी बनाते हुए मैदे का घोल छोड़ें। रिंग करीब आधा डूबा होना चाहिए।

    हल्का बादामी होने लगे, तब सलाई की सहायता से घेवर उठा लीजिए। घेवर पर 3-4 बार डेढ़ तार की गर्म चाशनी डालें और तैयार घेवर को मेवे से सजाकर पारंपरिक व्यंजन पेश करें।
    रक्षाबंधन विशेष- केसरी भात

    सामग्री :
    1 कटोरी बासमती चावल, डेढ़ कटोरी शकर, इलायची पावडर आधा चम्मच, 5-7 केसर के लच्छे, मीठा पीला रंग चुटकी भर या आधा चम्मच हल्दी, 15-20 किशमिश (गुनगुने पानी में भीगे हुए), 1 चम्मच घी, 2-3 लौंग, मेवे की कतरन (पाव कटोरी)।

    विधि :
    चावल बनाने के पूर्व 1 घंटे तक गलाकर रखें। अब एक बड़े मर्तबान में पानी उबाल लें। उसमें हल्दी डालें और चावल पकाकर थाली में ठंडा होने के लिए रख दें। दूसरी ओर एक से डेढ़ तार की चाशनी तैयार कर लें। उसमें पके चावल डालकर कुछ देर चलाएं।

    अब इलायची एवं मीठा रंग मिलाएं। एक पैन या कड़छी में अलग से घी गर्म करके उसमें लौंग डालें और ऊपर से चावल पर बुरकाएं, साथ ही मेवे की कतरन और भीगे हुए किशमिश भी डालें और मिलाकर ठंडा या गर्म जैसे चाहे लजीज शाही केसरिया भात पेश करें।

    राखी विशेष- शाही मखाना खीर

    सामग्री :
    1 लीटर दूध, 2 कप मखाने, 4 चम्मच चीनी, 1 चम्मच देसी घी, आधा चम्मच इलायची पावडर, किशमिश, काजू-बादाम की कतरन, किसा हुआ सूखा नारियल।

    विधि :
    सबसे पहले एक कड़ाही में घी गर्म करें और उसमें मखानों को डालकर भून लें, फिर भूनें हुए मखानों को प्लेट में निकालकर ठंडा करें और फिर उसे कूट लें।

    अब दूध को उबलने दें, जब दूध उबल जाए तो उसमें कूटे हुए मखाने डालें और पकाएं, साथ ही चीनी भी डाल दें। जब दूध गाढ़ा हो जाएं तो उसमें किशमिश, काजू-बादाम की कतरन, इलायची पावडर और सूखा नारियल मिलाएं और तैयार मखाने की शाही खीर पेश करें।

    राखी पर्व की स्वादिष्‍ट मिठाई- नारियल बर्फी

    सामग्री :
    250 खोपरा बूरा (नारियल का बूरा), 100 ग्राम मावा, 200 ग्राम शकर, 1 चम्मच घी, 1 चम्मच इलायची पावडर, चांदी का वर्क, 2-3 केसर के लच्छे, चुटकी भर मीठा पीला रंग (1 कटोरी में पाव चम्मच दूध में घोल लें)।

    विधि :
    बर्फी बनाना शुरू करने से पहले मावे को किसनी से कद्दूकस कर लें, फिर कड़ाही में धीमी आंच पर गुलाबी होने तक सेंक लें। मावा ठंडा होने पर खोपरा बूरा मिला दें। तत्पश्चात डेढ़ तार की चाशनी तैयार करें। इस चाशनी में खोपरा बूरा, मावा, मीठा पीला रंग व इलायची पावडर मिला दें तथा मिश्रण को अच्छी तरह मिक्स कर लें। अब इसमें घी मिलाएं तथा पुन: हिलाएं।

    अब एक थाली में थोड़ा-सा घी लगाकर उसमें तैयार मिश्रण फैला दें। ठंडा होने पर चौकोर आकार में काट लें। ऊपर से चांदी का वर्क लगाएं एवं केसर बुरक दें। लीजिए तैयार है लाजवाब नारियल बर्फी।


    रक्षाबंधन पर खास शाही बादाम पाक

    सामग्री :
    1 कटोरी बादाम (पिसी हुई), 2 कटोरी शकर, 3 कटोरी घी, 1 कटोरी पानी।

    विधि :
    शकर में पानी डालकर शकर गलने तक चाशनी बनाकर पिसी हुई बादाम डालकर एक हाथ से हिलाते हुए घी डालते जाएं और तब तक हिलाते रहें, जब तक कि घी छूटने न लगे। जब मिश्रण हल्का गुलाबी हो जाए, तब थाली में चलनी रखकर मिश्रण डालें। ऊपर से पानी के छींटें देकर बादाम मैसूर पाक के मनचाहे आकार के पीस कर लें।

    राखी विशेष : नारियल-मिश्री के लड्‍डू

    सामग्री :
    150 ग्राम सूखे खोपरे का बूरा, 200 ग्राम मिल्‍कमेड, 1 कप गाय के दूध की ताजी मलाई, आधा कप गाय का दूध, इलायची पावडर, 5 छोटे चम्मच मिल्‍क पावडर, कुछेक लच्छे केसर।

    भरावन की सामग्री : 250 ग्राम मिश्री बारीक पिसी हुई, पाव कटोरी पिस्ता कतरन, 1 चम्मच मिल्‍कमेड, दूध मसाला 1 चम्मच।

    विधि :
    सबसे पहले खोपरा बूरा, मिल्कमेड, दूध, मिल्क पावडर और पिसी इलायची को अच्छी तरह मिला लें। तत्पश्चात माइक्रोवेव में 5-7 मिनट तक इसे माइक्रो कर लें। अब भरावन सामग्री को अलग से एक कटोरे में मिक्स कर लें। एक छोटी कटोरी में 4-5 केसर के लच्छे कम पानी में गला दें।

    अब माइक्रोवेव से निकले मिश्रण को 10-15 तक सूखने दें, फिर उसमें भरावन मसाला सामग्री डालकर मिश्रण को अच्छी तरह मिलाएं और उसके छोटे-छोटे लड्डू बना लें। सभी लड्‍डू तैयार हो जाने पर उनके ऊपर केसर का टीका लगाएं। ऊपर से केसर-पिस्ता से सजाएं और लाजवाब नारियल-मिश्री के लड्‍डू के लड्‍डू पेश करें।

    राखी स्पेशल- मैसूर पाक

    सामग्री :
    150 ग्राम बेसन, घी आवश्यकतानुसार, शकर 200 ग्राम, 1 चम्मच इलायची पावडर, पिस्ता कतरन पाव कटोरी।

    विधि :
    एक कड़ाही में शकर और 1/2 कटोरी पानी डालकर गाढ़ी चाशनी बनाएं, दूसरी ओर घी में बेसन डालकर भूनें। अब चाशनी को धीरे-धीरे सिंके हुए बेसन में डालें व बराबर हिलाती रहें। दूसरे हाथ से गर्म घी 1-1 चम्मच करके बेसन पर डालती रहें।

    बेसन जब भूरा होने लगे तो उसमें इलायची बुरकाकर घी लगी थाली में फैला दें। यह जल्दी ही जमता है अत: जमने की प्रक्रिया शुरू होते ही चाकू की सहायता से मनचाहे आकार में काट लें। लीजिए तैयार है लजीज रसभरा मैसूर पाक। यह बहुत सारे घी, बेसन, मेवा व शकर से निर्मित कर्नाटक का मीठा व्यंजन है।

     

    टिप्स / शौर्यपथ / त्योहार का मौसम हो और पकवानों की बात न हो, ऐसा भला कैसे संभव है? आपके लिए हैं अलग-अलग तरह की मिठाई बनाने के कुछ विशेष टिप्स।
    1. मालपुआ बनाते समय उसमें थोड़ी सूजी मिला दीजिए, इससे मालपुआ खस्ता बनेगा।

    2. खीर बनाते समय कड़ाही में शक्कर पिघलाकर उसमें दूध मिलाकर औटा लेने से तो कम समय में दूध गाढ़ा हो जाता है और स्वादिष्ट खीर बनती है।

    3. सेवइयां को गाढ़ी व स्वादिष्ट बनाने के लिए बनाते समय उसमें जरा-सा कस्टर्ड पावडर मिला दें। सेवइयों का स्वाद बढ़ जाएगा।

    4. बेसन के लड्डू बनाते समय भुने बेसन में दूध के छींटे दें और गरम घी मिलाएं। जहां तक हो सके शक्कर का बूरा प्रयोग करें। ये लड्‍डू दिखने में दानेदार दिखेंगे और खाने में अधिक स्वादिष्ट लगेंगे।

    5. बर्फी को और अधिक लुभावनी बनाने के लिए किसी भी बर्फी पर, किसी नए टूथब्रश पर कोई भी खाने वाला हल्का रंग लगाकर ब्रश को हल्के हाथ से दबाएं जिससे रंग बर्फी पर छिड़काव की तरह फैल जाएगा और बर्फी सुंदर दिखाई देगी। खासकर सफेद रंग की बर्फी पर तो अधिक लुभावनी दिखाई देगी।

    6. बेसन के लड्डू बनाना हो तो बेसन रवेदार होना चाहिए।

    7. कस्टर्ड में यदि गुठलियां पड़ गई है तो घबराएं नहीं उसे छलनी से छान लें और फिर गुठलियों में थोड़ा दूध डालकर मिक्सी में चला दें।

    8. चावल या गाजर की खीर बनाते समय शकर अंत में डालें, वरना चावल या गाजर कच्चे रह जाएंगे। शकर डालने के बाद दूध को थोड़ी देर और उबालें।

    9. मूंग दाल का हलवा बनाते समय पिसी दाल को भूनने पर वह कड़ाही में चिपकता है इसीलिए भूनते समय उसमें थोड़ा-सा बेसन मिला दिया जाए, तो दाल कड़ाही से चिपकेगी भी नहीं और भूनना भी आसान होगा।

    10. किसी भी मिठाई को बनाते समय जो भी खुशबू डालना है, वह मिठाई ठंडी होने पर डालें, जैसे इलायची, जायफल आदि।

    11. जब भी बर्फी बनाना हो तो मिश्रण को आंच से उतारने के बाद थोड़ी देर तक कड़ाही में अच्छी तरह चलाएं, इससे बर्फी अच्छी बनती है।

    12. खीर बनाते समय यदि दूध पतला हो तो उसमें थोड़ी-सी खसखस या चावल पीसकर डाल देना चाहिए, इससे खीर गाढ़ी भी बनेगी और स्वाद भी बढ़ेगा।

    13. घर पर बाजार में मिलने वाली दानेदार एवं खस्ता बेसन की बर्फी बनाने के लिए बेसन में थोड़ी-सी भुनी हुई सूजी मिला दें। इससे बर्फी खस्ता होकर उसका स्वाद भी बढ़ जाएगा।

        धर्म संसार / शौर्यपथ / शिव के प्रिय मास श्रावण में चारों ओर धर्म का पवित्र वातावरण बन जाता है। इस माह का लाभ सभी को उठाना चाहिए। इस माह में जपे गए मंत्र सिद्ध और असरकारी होते हैं। शिव को प्रसन्न करते हैं।

    इस माह में सर्वव्याधि नाश, बुद्धि, व ज्ञानवृद्धि, ऐश्वर्य प्राप्ति, सुख-सौभाग्य आदि के लिए भगवान शिव की पूजा करके दुग्ध की धारा से अभिषेक करते हुए निम्न मंत्रों का जाप करना चाहिए। आइए जानिए श्रावण मास के कुछ खास विशेष मंत्र-

    श्रावण मास विशेष : 10 शिव मंत्र


    1. ॐ जुं स:।

    2. ॐ हौं जूं स:।

    3. ॐ त्र्यंम्बकम् यजामहे, सुगन्धिपुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।'

    4. 'ॐ ऐं नम: शिवाय।

    5. 'ॐ ह्रीं नम: शिवाय।'

    6. 'ऐं ह्रीं श्रीं 'ॐ नम: शिवाय' : श्रीं ह्रीं ऐं

    7. चंद्र बीज मंत्र- 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम:', चंद्र मूल मंत्र 'ॐ चं चंद्रमसे नम:'।

    8. शिव गायत्री मंत्र- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रूद्र प्रचोदयात्।।

    9. ॐ नमः शिवाय

    10. ॐ ऐं ह्रीं शिव गौरीमय ह्रीं ऐं ऊं।

    श्रावण मास में सिर्फ 'दारिद्रयदहन शिवस्तोत्रम्‌' पढ़ने से बेशुमार धन संपदा मिलने के योग बनते हैं।

    दारिद्रयदहन शिवस्तोत्रम्‌ :

    विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय
    कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय।
    कर्पूरकांतिधवलाय जटाधराय
    दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥1॥

    गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय
    कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय।
    गङ्गाधराय गजराजविमर्दनाय ॥दारिद्रय. ॥2॥

    भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय
    उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय।
    ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय ॥ दारिद्रय. ॥3॥

    चर्माम्बराय शवभस्मविलेपनाय
    भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय।
    मञ्जीरपादयुगलाय जटाधराय ॥ दारिद्रय. ॥4॥

    पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय
    हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय।
    आनंतभूमिवरदाय तमोमयाय ॥दारिद्रय. ॥5॥

    भानुप्रियाय भवसागरतारणाय
    कालान्तकाय कमलासनपूजिताय।
    नेत्रत्रयाय शुभलक्षणलक्षिताय ॥दारिद्रय. ॥6॥

    रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय
    नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय।
    पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय ॥ दारिद्रय. ॥7॥

    मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
    गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय।
    मातङग्‌चर्मवसनाय महेश्वराय ॥ दारिद्रय. ॥8॥

    वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणम्‌।
    सर्वसम्पत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम्‌।
    त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात्‌ ॥9॥

    उपरोक्त मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार अवश्य करें। साथ इन मंत्रों के जाप और इस स्तोत्र का पाठ करने से आप सुख, सौभाग्य और ऐश्वर्य सभी कुछ पा सकते हैं।

     

    मेरी कहानी / शौर्यपथ / वह स्याह दौर ऐसा था, जब घोड़े भी गुलामों से ज्यादा खुश नजर आते थे। घोडे़ कभी-कभी ही काम में लगते थे, खूब खाते थे, गुलामों के हाथों नहाने-सहलाने की सेवा पाते थे, पर गुलामों के लिए क्या दिन-क्या रात? लगे रहो मशीन की तरह। ऊपर से मालिक की नजर टेढ़ी हो जाए, तो खैर नहीं। उस दिन अस्तबल में 16 साल का गुलाम डगलस अपने मालिक के घोड़ों की सेवा में लगा था। पीछे से उसका श्वेत मालिक दबे पांव दाखिल हुआ। हाथों में रस्सी लिए आते ही डगलस का एक पैर पकड़ लिया। डगलस चौंका, अगले ही पल समझ गया कि मालिक उसे बांधने वाला है, फिर पीटेगा और हो सकता है, जान ही ले ले।
    लड़के का अपराध था कि उसने अपने मूल मालिक से जाकर अत्याचार की शिकायत की थी। हालांकि वहां भी सुनवाई नहीं हुई थी। सब जानते थे कि कोवे नाम का यह खेत मालिक अश्वेतों का मनोबल तोड़ने के लिए कुख्यात है। गुलामों के शौकीन घटिया लोग कहते थे, जब किसी गुलाम के पर निकलने लगें, तो उसे कोवे के हवाले कर दो। कोवे की बड़ी दहशत थी। पिछली बार मालिक ने बीमार होने के बावजूद पैरों से ठोकर मार-मारकर अधमरा कर दिया था। जब पांच घंटे तक घिसटते हुए डगलस अपने मूल मालिक के पास पहुंचा, तो सिर से पैर तक सूखे, ताजा खून से सना हुआ था। फिर भी मूल मालिक ने कोवे को बढ़िया इंसान बताकर बचाव किया। वह हैवानियत का ऐसा दौर था, जब ज्यादातर श्वेत आपस में मिले होते थे। अश्वेतों के विलाप पर कान न देना उनकी आदत में शुमार था।
    जाहिर है, डगलस को लौटना पड़ा और आते ही पैरों में रस्सी बांधकर जानवरों से भी बुरे बर्ताव की तैयारी नुमाया हो गई। उसने तत्काल कूदकर पैर को छुड़ाया। न जाने कहां से ताकत उमड़ आई कि नहीं, अब अपने को बचाना है, अब मार खाए, तो मर ही जाएंगे। डगलस अपनी चुस्त कद-काठी के साथ तनकर खड़ा हो गया, कोवे घूरकर झपटा, लेकिन उसके गिरेबां पर दो मजबूत हाथ आ लगे। कोवे चिल्लाया, ‘तो तुमने तय कर लिया है, तुम लड़ना चाहते हो?’ उसे उम्मीद थी कि डगलस इतना सुनते ही गिरेबां छोड़ देगा, पैरों में गिरकर गिड़गिड़ाएगा। लेकिन इस बार वक्त एक नई कहानी लिख रहा था।
    दर्द से भरे डगलस ने कोवे के गिरेबां को और कसते हुए अपनी मंशा का इजहार कर दिया। कोवे के बुलाने पर एक आदमी दौड़ा-दौड़ा आया, उसने डगलस को जैसे ही पीछे से पकड़ा, छाती के ठीक नीचे पसलियों पर कोहनी का जोरदार वार पड़ा। चोट खाने वाला अपना दर्द थामे जमीन पर गोल हो गया। अब तो कोवे की हालत और बिगड़ी। एक और गुलाम दौड़कर आया, लेकिन यह कहते हुए मदद करने से मुकर गया कि वह यहां काम करने के लिए भेजा गया है, लड़ाई में भाग लेने के लिए नहीं। अब अस्तबल में रह गए कोवे और डगलस। गुत्थमगुत्था। कोवे सोच रहा था कि यह 16 साल का लड़का ही तो है, शुरुआती ताकत दिखा रहा है, पकड़ ढीली पड़ते ही इसे रगड़ दूंगा। यह बात डगलस भी जानता था कि कोवे को मौका नहीं देना है। एक भी मौका दिया, तो शामत टूट पड़ेगी। अब जब पकड़ ही लिया है, तो जोर आजमाइश हो ही जाए। कब तक इस गोरे का अत्याचार सहते रहेंगे? पिछले छह महीनों में इसने मार-मारकर शरीर को घाव बना दिया है। हमें भी दर्द होता है भाई, जैसे तुम्हें अभी मेरी जकड़न में हो रहा है।
    जकड़ने-रगड़ने में दोनों जमीन पर गिर गए। कोवे ने जब नाखून गड़ाने की कोशिश की, तो उसे और ज्यादा प्यासे नाखूनों को भुगतना पड़ा। छोटी थप्पड़ का जवाब बड़ी थप्पड़ से और हल्के मुक्के का जवाब भारी मुक्के से मिला। कोवे को यह भी चिंता हो रही थी कि इलाके के लोग कहीं यह लड़ाई न देख लें। वह सिर घुमाकर इधर-उधर देख लेता था और कोशिश करता था कि किसी आड़ में ही लड़ाई हो। पूरे दो घंटे लड़ाई के बाद कोवे की हिम्मत टूट गई, पर वह पुलिस के पास नहीं गया। वह नहीं चाहता था, लोग जानें कि उसकी पिटाई हुई है, वह भी एक लड़के के हाथों। फायदा यह हुआ कि डगलस अत्याचार से बच गए।
    मनोबल एकदम से बढ़ गया और बस चार साल लगे, गुलामी दूर हो गई। फ्रेडरिक डगलस (1818-1895) ने गुलामों को आजाद कराने, समाज सुधारने, नस्लभेद, रंगभेद से लड़ने, खूब लिखने और भाषण देने में अपना जीवन लगा दिया। फ्रेडरिक डगलस अमेरिका में उप-राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल होने वाले पहले अश्वेत थे। आज उन्हें पूरा अमेरिका सम्मान देता है। वह आज भी प्रेरणास्रोत हैं, तन, मन, धन से बलवान बनो, क्योंकि बल न काला होता है, न गोरा। बल से कोई तुम्हें गुलाम बना सकता है और बल से ही तुम गुलाम बनने से बच सकते हो।
    प्रस्तुति : ज्ञानेश उपाध्याय फ्रेडरिक डगलस समाज सुधारक नेता

     

     

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