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रायपुर / शौर्यपथ /
त्रिस्तरीय पंचायत उप चुनाव 2022 के लिए 9 जून 2022 को नाम निर्देशन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि थी। राज्य निर्वाचन आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश के 28 जिलों में जनपद सदस्य के 06 पदों के लिए 18, सरपंच के 84 पदों के लिए 252, पंच के 454 पदों के लिए 538 अभ्यर्थियों ने नाम निर्देशन पत्र दाखिल किये। सरपंच के 24 और पंच के 177 रिक्त पदों के लिए कोई नामांकन दाखिल नहीं किया गया।
प्रदेश के 06 जिलों में जनपद सदस्य के 6 पद रिक्त थे, जिसमें से बिलासपुर जिले के तखतपुर जनपद में सदस्य के 1 पद के लिए 5, मुंगेली जनपद में 1 पद के लिए 7, गरियाबंद जिले के छुरा जनपद सदस्य हेतु 1 पद के लिए 1, बस्तर जिले के तोकापाल जनपद सदस्य के 1 पद हेतु 3, कोण्डागांव जिले के फरसगांव जनपद सदस्य हेतु 1 पद के लिए 1, बीजापुर जिले के भैरमगढ़ जनपद सदस्य हेतु 1 पद के लिए 1 अभ्यर्थी ने नाम निर्देशन पत्र दाखिल किये हैं।
बीजापुर जिले मे सरपंच के 4 पद रिक्त हैं जिसमें 3 पद के लिए 5 अभ्यर्थियों ने और पंच के 13 रिक्त पदों में से 11 पदों के लिए 11 अभ्यर्थियों ने नामांकन दाखिल किया। बिलासपुर जिले में सरपंच के 10 पद रिक्त है जिनमें से 8 पदों हेतु 26 अभ्यर्थियों ने, पंच के रिक्त 27 पदों के लिए 38 अभ्यर्थियों, दुर्ग जिले में सरपंच के रिक्त 4 पद में से 1 पद के लिए 1 अभ्यर्थी और पंच के लिए रिक्त 19 पद में से 18 पदों के लिए 18 अभ्यर्थियों, दन्तेवाड़ा जिले में सरपंच के 2 रिक्त पदों हेतु 2 और पंच के 9 पदों हेतु 9 अभ्यर्थियों, गौरेला पेण्ड्रा मरवाही जिले में पंच के 5 रिक्त पदों हेतु 6 अभ्यर्थियों, मुंगेली जिले में सरपंच के रिक्त 3 पदों में से 2 पद के लिए 7 अभ्यर्थी और पंच के रिक्त 13 पदों के लिए 16 अभ्यर्थियों, जांजगीर चाम्पा़ जिले में सरपंच के 6 रिक्त पदों हेतु 23 और पंच के 15 रिक्त पदों में से 14 पद के लिए 20 अभ्यर्थियों, कोरबा जिले में पंच के रिक्त 11 पद में से 7 पद के लिए 7 अभ्यर्थियों, रायगढ़़ जिले में सरपंच के रिक्त 7 पद में से 5 पद के लिए 17 अभ्यर्थियों, पंच के रिक्त 39 पद में से 22 पद के लिए 26 अभ्यर्थियों, सरगुजा जिले में सरपंच के 1 रिक्त पद के लिए 2 अभ्यर्थी और पंच के रिक्त 18 पद में से 6 पद के लिए 6 अभ्यर्थियों ने, बलरामपुऱ जिले में सरपंच के रिक्त 2 पद हेतु 10, पंच के 17 रिक्त पदों में से 13 पद के लिए 17 अभ्यर्थियों ने नाम निर्देशन पत्र दाखिल किए हैं। सूरजपुऱ जिले में सरपंच के रिक्त 3 पदों हेतु 14, पंच के 55 रिक्त पदों में से 28 पदों के लिए 32 अभ्यर्थियों ने नाम निर्देशन पत्र दाखिल किए हैं।
जशपुर जिले में सरपंच के रिक्त 1 पद के लिए 3 और पंच के रिक्त 14 पदों में से 12 पद के लिए 12 अभ्यर्थियों, कोरिया़ जिले में सरपंच के रिक्त 4 पदों हेतु 17, पंच के 5 पदों हेतु 9 अभ्यर्थियों, रायपुर जिले में सरपंच के रिक्त 4 पदों में से 3 पदों के लिए 7, पंच के रिक्त 15 पदों में से 11 पद के लिए 13 अभ्यर्थियों, महासमुंद जिले में सरपंच के रिक्त 6 पदों में से 5 पदों के लिए 10, पंच के रिक्त 35 पद में से 27 पद के लिए 30 अभ्यर्थियों ने, धमतरी़ जिले में सरपंच के रिक्त 3 पदों में से 2 पद के लिए 4, पंच के रिक्त 21 पदों के लिए 32 अभ्यर्थियों, गरियाबंद जिले में सरपंच के रिक्त 3 पदों में से 2 पद के लिए 8 अभ्यर्थियों और पंच के रिक्त 31 पदों में 21 पद हेतु 24 अभ्यर्थियों ने नाम निर्देशन पत्र दाखिल किए हैं। बलौदाबाजार जिले में सरपंच के रिक्त 9 पदों में से 8 पदों के लिए 37, पंच के रिक्त 20 पदों हेतु 28 अभ्यर्थियों ने नाम निर्देशन पत्र दाखिल किए हैं।
बालोद जिले में सरपंच के रिक्त 4 पदों हेतु 6, पंच के रिक्त 43 पदों में से 41 पदों के लिए 45 अभ्यर्थियों, बेमेतरा जिले में सरपंच के रिक्त 6 पदों में से 2 पद के लिए 3 और पंच के 17 रिक्त पदों में से 12 पदों के लिए 16 अभ्यर्थियों, राजनांदगांव जिले में सरपंच के 10 रिक्त पदों हेतु 33, पंच के रिक्त 58 पदों में से 56 पदों के लिए 59 अभ्यर्थियों, कबीरधाम जिले में सरपंच के रिक्त 9 पदों में से 5 पदों के लिए 12, पंच के रिक्त 11 पदों में 10 पदों के लिए 16 अभ्यर्थियों, बस्तर जिले में पंच के रिक्त 12 पदों में से 10 पद हेतु 12 अभ्यर्थियों ने, कांकेर जिले में सरपंच के रिक्त 3 पदों में से 1 पद हेतु 1 अभ्यर्थी और पंच के रिक्त 81 पदों में से 13 पदों के लिए 14 अभ्यर्थियों ने, कोण्डागांव जिले में सरपंच के रिक्त 1 पद के लिए 1 अभ्यर्थी और पंच के रिक्त 16 पदों में से 11 पदों के लिए 11 अभ्यर्थियों, सुकमा में पंच के रिक्त 3 पदों के लिए 3 अभ्यर्थी और नारायणपुर जिले में सरपंच के 3 पदों हेतु 3, पंच के रिक्त 8 पदों हेतु 8 अभ्यर्थियों ने नाम निर्देशन पत्र दाखिल किए हैं।
नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा संबंधित जनपद पंचायतों में आज सामान्य प्रेक्षकों की उपस्थिति में की गई। इसके पश्चात 13 जून सोमवार को अपरान्ह 3 बजे तक अभ्यर्थिता से नाम वापस ली जा सकेगी। इसके तुरंत बाद निर्वाचन लडऩे वाले अभ्यर्थियों की सूची तैयार की जाएगी और निर्वाचन प्रतीकों का आबंटन किया जाएगा। प्रतीक आबंटन के बाद इसी दिन निर्वाचन लडऩे वाले अभ्यर्थियों की सूची प्रकाशित की जाएगी।
दुर्ग / शौर्यपथ /
न्यू बस स्टेंड सहित मुख्य मार्ग नलघर के सामने जी.ई. रोड पर सड़क तक सामान फैलाकर कारोबार करने वालों के खिलाफ शुक्रवार को आयुक्त हरेश मंडावी के निर्देश पर निगम बाजार विभाग व अतिक्रमण विभाग के अमला ने कार्रवाई की। कार्रवाई के लिए पहुंचे निगम अमला ने अतिक्रमण कारियों की फ़ोटो व वीडियोग्राफी करवाई गई और उसके बाद दुकान के बाहर सड़क पर फैलाकर रखे गए सामानों को हटवाया गया। न्यू बस स्टैंड क्षेत्र में दुकान के सामने कर कारोबार सड़क में फैलाकर कारोबार कर रहे हैं। इसके वजह से बस स्टेंड के भीतर व मुख्य मार्ग पर आवागमन को लेकर आम जनता को दिक्कत हो रही है।इसको ध्यान में रखते हुए निगम आयुक्त हरेश मंडावी ने आज न्यू बस स्टैंड का निरीक्षण किया।आयुक्त की मौजूदगी में निगम का बाजार विभाग व अतिक्रमण विभाग तोडू दस्ता ने बस स्टैंड में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाही की। निगम कर्मचारियों ने बस स्टैंड जी.ई. रोड क्षेत्र में सड़क किनारे कब्जा कर सड़क तक सामान फैलाकर कारोबार करने वाले बाहर समान रखे सभी व्यापारियों की फ़ोटो व वीडियोग्राफी पूर्व में करवाई गई। इसके बाद उक्त व्यापारियों द्वारा फैलाकर रखे गए सामान को हटवाया गया। निगम की सख्ती को देखते हुए कुछ कारोबारी अपना सामान स्वयं हटाने लगे।
इस दौरान निगम के अतिक्रमण अधिकारी दुर्गेश गुप्ता ने दुकानदारों को समझाइश देते हुए कहा कि सामान दुकान से बाहर निकलकर फैलाकर न रखे और यातायात व्यवस्था बनाए रखने में निगम प्रशासन को सहयोग करें उन्होंने कहा कि यह कारवाही निरन्तर जारी रहेगी अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के समय बाजार विभाग के प्रभारी अधिकारी थानसिंग यादव, ईश्वर वर्मा, शशिकांत यादव,भुवान दास साहू और अतिक्रमण अमला मौजूद थे
रायपुर /शौर्यपथ/
महिला एवं बाल विकास मंत्री ने किया ’परवरिश के चैम्पियन’ और ’नवांकुर’ कार्यक्रम का शुभारंभ
छत्तीसगढ़ में बाल्यावस्था में देखभाल और शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल की गई है। नई शिक्षा नीति में भी बाल्यावस्था पर विशेष ध्यान देने की सिफ़ारिश की गई है। इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया ने आज रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में ’परवरिश के चैम्पियन’ और ’नवांकुर’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। बच्चों के समावेशी विकास के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से ’परवरिश के चैम्पियन’ और ’नवांकुर’ कार्यक्रम को तैयार किया है। इसके माध्यम से बचपन के प्रारंभिक वर्षांे को विशेष रूप से भाषा और संज्ञानात्मक विकास को मजबूत बनाने की दिशा में लक्षित किया जाएगा।
’परवरिश के चैम्पियन’ कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चे के पालन-पोषण में माता-पिता की उत्तरदायी भूमिका (रिस्पॉन्सिव पेरेंटिंग) शुरू करना है। इसके माध्यम से परिवार को बच्चों के भावनात्मक और शारीरिक जरूरतों के बारे में जानकारी देतेे हुए, उनके लिए उचित प्रतिक्रिया को बताया जाएगा। इसमें स्वास्थ्य, पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, सुरक्षा और उत्तरदायी देखभाल शामिल है। कार्यक्रम के तहत ’परवरिश के चैम्पियन किट’ प्रदान की जाएगी। इसमें वर्णमाला चार्ट, गतिविधि कैलेंडर, रिस्पॉन्सिव पेरेंटिंग के वीडियो, पोस्टर होंगे, जो पालकों को 6 वर्ष तक के बच्चों से व्यवहार और सरल तरीके से बच्चे के विकास के विभिन्न बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।
’नवांकुर’ कार्यक्रम प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) पर एक ई-लर्निंग पाठ्यक्रम है। इसका उद्देश्य बच्चों की देखभाल और शिक्षा के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों का क्षमता संवर्धन करना है। इस 8 घण्टे के ट्रेनिंग पाठ्यक्रम में 14 माडयूल हैं। हर माडयूल स्वमूल्यांकन पर आधारित है। इसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा, देखभाल और आंगनबाड़ियों में उनके समावेशन पर भी फोकस किया गया है। ट्रेनिंग के बाद भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जाएगा।
श्रीमती भेंड़िया ने कहा कि छोटे बच्चे अपने परिवार के सदस्यों के साथ ज्यादा समय बिताते हैं, इसलिए परिवार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। बच्चों का सही ढंग से देख-रेख और पोषण हो तो बच्चा सशक्त बनेगा। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) के लिए परिवार आधारित कार्यक्रम ’परवरिश के चैम्पियन’ तथा नवीन तकनीक से मैदानी अमले के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण ’नवांकुर’ के माध्यम से परिवार को बच्चों की आवश्यकताओं और विकास के संबंध में बेहतर तरीके से समझाया जा सकेगा।
यूनिसेफ के स्टेट हेड श्री जॉब जकारिया ने बताया कि बच्चों का सर्वाधिक विकास 2 साल तक की उम्र तक होता है। इस समय बच्चे अधिकांश समय अपने परिवार के बीच बिताते हैं। माता-पिता के साथ-साथ परिवार को सही गाइडेंस देकर बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को सही दिशा दी जा सकती है। इसके लिए ’परवरिश के चैम्पियन’ कार्यक्रम तैयार किया गया है। इसमें खेल खेल में बच्चों का विकास कैसे करें यह बताया जाएगा। इसमे 6 वर्ष से कम उम्र के 25 लाख बच्चे शामिल होंगे। इन बच्चों के माध्यम से उनके पालकों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा। ’नवांकुर’ आठ घण्टे का ई-लर्निंग प्रोग्राम है, जिसकेे तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सीडीपीओ को ट्रेनिंग दी जाएगी। अब तक 51 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में से 35 हजार कार्यकर्ता का पाठ्यक्रम के लिए पंजीयन हो चुका है। प्रयास है कि आगामी 6 माह में सभी कार्यकर्ता और बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रशिक्षित हो जाएं। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक श्रीमती दिव्या मिश्रा, विभागीय और यूनिसेफ के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
में सरकार का महत्वपूर्ण कदम
रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर स्थित डीडीयू आडिटोरियम में विकासपरक राज्यस्तरीय छायाचित्र प्रदर्शनी का आज सरगुजा जिले के पंचायत प्रतिनिधियों ने अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी परंपराओं और संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ रही है। राज्य में राजीव युवा मितान क्लब गठित किया जा रहा है। इससे गांव के युवा रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित हो रहे हैं। सामाजिक जीवन स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा प्रयास विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सरगुजा जिले के जनप्रतिनिधियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर राज्य सरकार की योजनाओं को सराहा
जिले के मैनपाट ब्लॉक के खडगांव, चौनपुर, सलाईनगर, चिड़ापारा और डागबूड़ा और सीतापुर विकासखंड के ग्राम बेलजोरा, भौरादाढ़,आरा, ढोढागांव, पेटला,बिठवा और हरदीसांड के पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रदर्शनी के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितैषी योजनाओं एवं कार्यक्रमों से लोगों के जीवन में आए बदलाव और विकास कार्यों की उपलब्धियों का अवलोकन किया। प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार की मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना प्रकृति की रक्षा की अनूठी योजना है जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी। वृक्षारोपण में निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रदेश में हरियाली के साथ शुद्ध पर्यावरण मिलेगा। यह ग्रामीणों की आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनेगा।
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रायपुर /शौर्यपथ/
छत्तीसगढ़ में गौठनों को रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित करने की परिकल्पना अब धीरे-धीरे आकार लेने लगी है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज्य की परिकल्पना के अनुरुप मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में गांवों में छोटे-छोटे कुटीर उद्योग स्थापित कर लोगों को रोजगार और आमदनी के साधन से जोड़ा जा रहा है।
अधोसंरचना भी विकसित
छत्तीसगढ़ के ऐसे पहले रूरल इंडस्ट्रियल पार्क ने कांकेर जिले के कुलगांव में आकार ले लिया है, जिसे गांधी ग्राम का नाम दिया गया है, वहां गौठान को रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित करने का काम जिला प्रशासन कांकेर ने महिला स्वसहायता समूह के साथ बखूबी कर दिखाया है। यहां छोटे-छोटे कुटीर उद्योगों के लिए जरुरी अधोसंरचना विकसित की गई है और ग्रामीणों को जोड़कर उत्पादन का काम भी प्रारंभ हो चुका है। इस पार्क में 13 से अधिक आजीविका सम्बन्धी गतिविधियाँ संचालित की जा रही है। जिसमें महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जा रहे हैं। कुलगांव में वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए लघु वनोपजों के वेल्यू एडिशन पर आधारित आवासीय प्रशिक्षण केंद्र भी शुरू किया है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने हाल में ही भेंट-मुलाकात अभियान के दौरान कुलगांव गांधीग्राम में छत्तीसगढ़ के प्रथम रूरल इंडस्ट्रियल पार्क का लोकार्पण किया।
की गई है। इनमें
वन विभाग ने इंदिरा वन मितान समूह कुलगांव को गांधीग्राम ग्रामीण औद्योगिक पार्क की स्थापना के लिए चक्रीय निधी से 50 लाख रूपए का लोन दिया था। मुख्यमंत्री ने लोकार्पण के अवसर पर इस रूरल इंडस्ट्रियल पार्क की संकल्पना और स्वरूप तथा यहां आर्थिक गतिविधियों के सफल संचालन को देखते हुए समूह के लोन को माफ करने की घोषणा की।
इंटरलॉकिंग, सीसी रोड
छत्तीसगढ़ के पहले रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क में गांधी जी के ग्राम स्वराज की झलक देखने को मिल रही है। राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल अब रंग ला रही है। राज्य के अन्य गौठानों को भी इसी तरह विकसित करने की योजना है। मुख्यमंत्री का मानना है कि गांवों की अर्थव्यस्था को मजबूत करके ही हम राज्य की अर्थ व्यवस्था को आगे बढ़ा सकते हैं। सरकार का पूरा ध्यान खेती-किसानी और गांव के लोगों को आर्थिक उत्पादन से जोड़ने पर है। गांव के उत्पाद का वेल्यूएडिशन कर लोगों के जीवन स्तर में बदलाव लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि और उद्यानिकी उपजों के साथ ही लघुवनोपजों के वेल्यू एडिशन से रोजगार ने नए अवसरों का सृजन हो रहा है।
, डारमेंट्री, रेसीडेंसियल रूम, किचन
गांधी ग्राम कुलगांव परिसर में कृषि विज्ञान केन्द्र के सहयोग से मछली आहार बनाने की इकाई, मशरूम उत्पादन, स्पान उत्पादन की इकाईयां स्थापित की गई है। इसके अलावा यहां मछलीपालन, बकरी पालन, मुर्गीपालन और वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया जा रहा है। ये सभी कार्य स्थानीय स्व सहायता समूह के लोगों के द्वारा किए जा रहे हैं।
गांधी ग्राम के इस गौठान में बनाए गए रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क के लिए अधोसंरचना भी विकसित की गई है। इनमें इंटरलॉकिंग, सीसी रोड, डारमेंट्री, रेसीडेंसियल रूम, किचन हॉल, महिला स्व-सहायता समूह के कार्यशाला के लिए शेड का निर्माण, चबूतरा निर्माण, प्रशिक्षण कक्ष का निर्माण किया गया है। भूमिगत सिंचाई पाईपलाइन भी बिछाई गई है, अलंकृत उद्यान तैयार किया जा रहा है। यहां वन विभाग द्वारा लघु वनोपजों के प्रसंस्करण और वेल्यू एडिशन के लिए आवासीय प्रशिक्षण केन्द्र भी प्रारंभ किया गया है। इंदिरा वन मितान समूह को भी 50 लाख रूप्ए का ऋण दिया गया है। मुख्यमंत्री ने समूह के काम काज को देखते हुए इस ऋण को माफ करने की घोषणा भी कर दी है।
मुर्गीपालन और अंडा उत्पादन का काम आधुनिक तरीके से किया जा रहा है। यहां महिला समूह द्वारा लेयर फार्मिंग व अण्डा उत्पादन हो रहा है। अभी यहां उत्पादन प्रारंभिक स्थिति में है इसकी खपत भी आंगनबाडियों में हो जा रही है। इससे शीतला समूह को 50 हजार रूपए की आमदनी हुई है। यहां मछली आहार तैयार करने की इकाई में प्रतिदिन लगभग 8 क्विंटल आहार का निर्माण किया जा रहा है। पूजा समूह की महिलाएं इस इकाई का संचालन कर रही हैं। अब तक 18 क्विंटल आहार के विक्रय से 60 हजार की आमदनी समूह को हुई है। पूजा स्वसहायता समूह द्वारा यहां रागी आंटा तैयार किया जा रहा है। इसे पूरक पांेषण आहार के जरिए बच्चों को खिलाया जा रहा है।
मशरूम एवं स्पॉन उत्पादनः-एकीकृत राष्ट्रीय बागवानी विकास मिशन अंतर्गत मशरूम उत्पादन एवं स्पॉन उत्पादन इकाई का निर्माण किया गया है, जिसका क्रियान्वयन लक्ष्मी स्व सहायता समूह कुलगांव द्वारा किया जा रहा है समूह द्वारा अब तक 40 कि.ग्रा. मशरूम उत्पादन कर स्थानीय ब्रिकी कर 8000 रुपए की आमदनी प्राप्त की गई है।
दाल मिल एवं मसाला उद्योगः-कृषि विभाग द्वारा दाल मिल एवं मसाला उद्योग स्थापित किया गया है। जिसका संचालन जय सरस्वती महिला समूह के सदस्यों द्वारा की जा रही है। अब तक मूंग दाल 80 किलो, उड़द 70 किलो तैयार कर 15 हजार में विक्रय किया गया है। मसाला उद्योग में हल्दी, धनिया, मिर्च पाउडर तैयार कर 7500 किलोग्राम मसलों का विक्रय किया गया है। इसी प्रकार मिनी राईस मिल में 2600 रूपये का धान कुटाई किया गया है।
गोबर खरीदी- कुलगांव में गोधन न्याय योजना के तहत 273 क्विंटल 85 किलो ग्राम गोबर का खरीदी किया गया है। इस गौठान में अब तक 70 बोरीे वर्मी कंपोस्ट तैयार किया गया है।
दोना-पत्तल निर्माण इकाई- इस इकाई को डीएमएफ मद से अप्रैल 2022 में प्रारंभ किया गया था। जिसका संचालन कुलगाँव की जय बूढ़ादेव स्वसहायता समूह की 10 महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। इस यूनिट की स्थापित क्षमता 9600 पत्तल प्रतिदिन की है।
यहां महिला स्वसहायता समूह द्वारा 30 हजार रुपये का कोदो-कुटकी की खरीदी भी की गई थी। कोदो चावल भी तैयार किया जा रहा है। समूह द्वारा वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के साथ बाजार में होटल संचालन भी किया जाता है। कुलगांव में स्वसहायता समूह की महिलाओं द्वारा ढेंकी से चावल निकालने का काम भी किया जा रहा है। ढेंकी के चावल में चावल की गुणवत्ता सुरक्षित रहती है।
हथकरघा वस्त्र प्रशिक्षण केंद्र-यहां बनाए गए हथकरघा वस्त्र प्रशिक्षण केंद्र में महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। साथ ही यहां बकरीपालन आदि की गतिविधि भी की जा रही है। कुलगांव में चिरौंजी प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा है कि गांव को समृद्ध, आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के लिए जरूरी है, कि गांव के लोगों को छोटे-छोटे कुटीर उद्योगों के माध्यम से गांव में ही रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। छत्तीसगढ़ के गांव उत्पादन का केंद्र बने और व्यापार जैसी गतिविधियों का संचालन शहरों से हो। कृषि और उद्यानिकी फसलों के साथ-साथ लधु वनोपजों के संग्रहण के साथ-साथ की वैल्यू एडिशन का काम भी गांव में हो। इससे रोजगार के अवसर ग्रामीणों को मिलेंगे। गौठानों को रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रुप में विकसित करने का संकल्प और ग्रामीणों के उत्साह को देख कर लग रहा है कि आने वाले समय में ये पार्क गांवों में उत्पादन के प्रमुख केन्द्र के रुप में उभरेंगेे।क्रमांक-1764/आलेख
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दंतेवाड़ा /शौर्यपथ/
दंतेवाड़ा का नाम सुनकर लोगों के ज़हन में नक्सलवाद, आर्थिक सामाजिक, पिछड़ापन, घने जंगल दुर्गम पहाड़ी एवं नदी-नालों में बसे गांव आ जाते हैं। परंतु प्रकृति ने इन्ही घनी जंगलों की गोद में महुआ का पेड़ वरदान स्वरूप दिया है। महुआ विशेष रूप से जिले के ग्रामीण जीवन का सांस्कृतिक एवं आर्थिक आधार है। यह न केवल दैनिक जीवन में भोजन और पेय के लिए उपयोग किया जाता है, बल्कि इसे बेचकर आर्थिक आय भी प्राप्त किया जाता है। जंगलों से बीनकर घरों में रखा हुआ महुआ एक संपत्ति के समान होता है, जिसे कभी भी नगदी में बदला जा सकता है। वर्षों से ग्रामीण महुआ संग्रहित कर कम दामों में व्यापारियों को बेच देते है
व्यापार कर कमाएं 1 लाख 35 हजार रुपए
प्रशासन की पहल से आदिवासी महिलाओं के जीवन मे आ रहा बदलाव
व्यापार कर कमाएं 1 लाख 35 हजार रुपए
अब शासन की योजनाओं एवं जिला प्रशासन की पहल से जिले महिलाओं का जन-जीवन बदल रहा है। जिला प्रशासन के सहयोग एवं मार्गदर्शन में क्षेत्र की किशोरी एवं महिलाएं नए-नए सफल प्रयोग कर रोजगार सृजन करने का काम कर रहें है। ऐसा ही नया और बेहतर कार्य दंतेवाड़ा वन परिक्षेत्र केन्द्रीय काष्ठागार दंतेवाड़ा के प्रसंस्करण केन्द्र व प्रशिक्षण केन्द्र में महुआ के स्वादिष्ट- हलवा, चंक्स, जैम, जेली, कुकीज, बनाकर व्यापार कर रही है। वर्तमान में 30 महिलाएं कार्य कर रही हैं जिनके द्वारा व्यापार कर 1,35,000 रुपए का लाभ कमा चुकी है।
महिलाओं को मिल रहा महुआ उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण
महिलाओं को मिल रहा महुआ उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण
बाजार में ’महुआ’ के हलवा, चंक्स, जैम, जेली, कुकीज के ज्यादा मांग एवं स्वास्थ्य वर्धक ( कैलोरी, प्रोटीन, फैट, शुगर, आयरन एव विटामिन सी ) होने के कारण जिला प्रशासन द्वारा डी०एम०एफ० फण्ड से ’महुआ’ से खाद्य पदार्थों के हेतु प्रसंस्करण केन्द्र व प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की गई है। इन इकाइयों के अधिक उत्पादन के लिए मशीनों की सुविधा दी गई है। वन विभाग के द्वारा इन महिलाओं को प्रशिक्षित कर महुआ को प्रसंस्करण कर इनके पाँच उत्पादों (हलवा, चंक्स, जेम, जेली एवं लड्डू, कुकीज) बना रहे है।
कुपोषण को हराने में मददगार सिद्ध हो रहा महुवा से बना उत्पाद
वर्तमान में प्रतिदिन प्रति उत्पाद 20 कि०ग्रा० हैं. इस तरह प्रतिदिन 100 किग्रा तक उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है। इन उत्पादों के पैकेजिंग मटेरियल प्रारंभिक स्तर देश के विभिन्न शहरों ( मुंबई, हैदराबाद, रायपुर ) से मंगाए जा रहे है। इकाई को ISO 22000 तथा FSSAI सर्टिफिकेशन की प्राप्ति हो चुकी है, एवं इन सारे उत्पादों का लैब जाँच NABl Accreditateda प्रयोगशालाओं से कराई जा चुकी है, जांच में अच्छे परिणाम प्राप्त हुए है। इन योजना का लाभ लेकर महिलाएं ग्रामीण अंचल से साफ महुवा खरीद कर, उनके उत्पाद को बाजार में बेचकर अपना व्यवसाय कर रही है। जिला प्रशासन के सहयोग से इन उत्पाद को एनएमडीसी, सीआरपीएफ कैंटीन, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं मुख्यमंत्री सुपोषण योजना में विक्रय किया जा रहा है। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। एवं जिले के कुपोषण दर में कमी में महुवा से बने उत्पाद मील का पत्थर साबित हो रही है।
राजनांदगांव/शौर्यपथ /
जिले के खैरागढ़ में पुलिस अधिकारियों ने सेवाभाव की अनुकरणीय पहल की है। नारकोटिक ड्रग्स एवं अवैध नशे के खिलाफ अभियान के अंतर्गत शहर के थाना परिसर में आयोजित विशाल रक्तदान शिविर में शामिल होकर पुलिस अधिकारियों के साथ ही सेवाभावी लोगों ने रक्तदान किया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रतीक्षित खैरागढ़ जिले की ओएसडी आईपीएस अंकिता शर्मा ने की।
रक्तदान महादान की तर्ज पर यह आयोजन थाना प्रभारी नीलेश पांडेय के नेतृत्व में किया गया जिसमें एसडीओपी दिनेश सिन्हा, मयूरी सिंह प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य-आईटी सेल एवं सोशल मीडिया, पीसीसी-जिला महासचिव महिला कांग्रेस भी प्रमुख रूप से उपस्थित हुए। इस अवसर परअखिल भारतीय भ्रष्टाचार निरोधक एवं मानव अधिकार संस्था खैरागढ़ की ओर से रक्तदाताओं के लिए फल, ठंडा, बिस्किट, चॉकलेट व कॉफी की व्यवस्था की गई। बताते चलें कि राजनांदगांव पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह के निर्देशन में जिले में नारकोटिक ड्रग्स एवं अवैध नशे के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में खैरागढ़ के पुलिस थाना परिसर में विशाल रक्तदान शिविर लगाया गया। कार्यक्रम में शामिल होकर खैरागढ़ जिले की ओएसडी अंकिता शर्मा ने रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र, दुर्घटना से सुरक्षा हेतु हेलमेट एवं पेन वितरित किया। इस अवसर पर वाहनचालकों से नशे की हालत में वाहन न चलाने की अपील करते हुए उन्होंने नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने हेतु पुलिस सक्रिय है तथा किसी को भी इसकी सूचना मिले तो वह पुलिस को इसकी जानकारी जरूर दें। नशा के आदी लोगों जो नशे से छुटकारा पाना चाहते हैं, नशा मुक्ति के लिए पुलिस भी उनकी हरसंभव सहायता करेगी। नशा छोडऩे के लिए तैयार लोग पुलिस से संपर्क कर सकते हैं। ऐसे मामले में उनका नाम गोपनीय रखा जाएगा तथा उनकी काउंसलिंग कराकर उपचार भी कराया जाएगा।
कवर्धा/शौर्यपथ /
जिला कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा द्वारा आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला, लोहारा व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इंदौरी का जायजा लिया गया। मातृत्व स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत दी जा रही सेवाओं के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के सम्बंध में भी कलेक्टर द्वारा जानकारी ली गई। उन्होंने गर्भवतियों से बातचीत करके सेवाओं के सम्बंध में जायजा लिया। कलेक्टर श्री शर्मा ने कहा कि शासकीय और निजी स्त्री रोग चिकित्सकों के सेवाओं को सुचारू रखने के साथ ही हितग्राहियों को चार जांच के सम्बंध में भी जागरूक करें। उन्होंने सरलता से उपलब्ध सेहतमंद स्थानीय खान-पान व स्वच्छता के सम्बंध में प्रॉपर परामर्श देते रहने के लिए भी कहा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सुजॉय मुखर्जी ने कलेक्टर ने को जानकारी देते हुए बताया कि जिले में जिला अस्पताल समेत कुल 22 स्वास्थ्य केंद्रों में पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान संचालित हो रहा है। यहां गर्भवतियों का प्रॉपर फॉलो अप विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा लिया जा रहा है। इस दौरान हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का चिन्हांकन करके उनके प्रसव डेट के आस -पास अस्पताल में भर्ती करवाकर सुरक्षित संथागत प्रसव करवाया जा रहा है। इसके अलावा चिकित्सकों द्वारा चिन्हांकित गर्भवतियों का नि:शुल्क सोनोग्राफी भी किया जा रहा है।
पसूता को किया पौधा भेंट
कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा ने सीएचसी लोहारा में प्रसूता को महतारी किट व पौधा भेंट किया। उन्होंने बच्चे के परिजनों व माता से कहा कि अपने बच्चे को स्वस्थ भविष्य देने के लिए पौधा अवश्य लगाएं और इसको वृक्ष बनने के लिए बच्चे की परवरिश के साथ साथ पौधों की भी उचित देखभाल करें। इस दौरान बीएमओ डॉ संजय खरसन से श्री शर्मा ने परिवार नियोजन परामर्श की जानकारी भी ली।
राजनांदगांव /शौर्यपथ/
शिक्षा विभाग में जिस प्रकार से विगत दो वर्षो में कई घोटालों का खुलासा हो चुका है और विधानसभा में भी लगातार विधायकगण सवाल उठा रहे है, इससे ना सिर्फ विभाग की बल्कि सरकार की भी छवि धुमिल हो रही है।
लगातार अखबारों में विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, कमीश्नखोरी की समाचार प्रकाशित हो रही है, जिससे जिला प्रशासन भी परेशान नजर आ रहा है। सिर्फ जिला शिक्षा अधिकारियों को जिले से ट्रांसफर कर देने से विभाग से भ्रष्टाचार समाप्त नहीं किया जा सकता है, इसके लिए विभाग में पदस्थ दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही करने की जरूरत है जो हो नहीं रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में जिस प्रकार थोक के भाव में दूसरे संस्थाओं से प्राचार्यो, व्याख्याताओं, और बाबूओं को नियम विपरीत संलग्न कर रखा गया है, जबकि राज्य सरकार ने संलग्नीकरण समाप्त करने का आदेश दे चुकी है।
प्रायवेट स्कूलों में दी जाने वाली आरटीई प्रतिपूर्ति राशि और प्रायवेट स्कूलों में अध्ययनरत् गरीब बच्चों की जानकारी जिस प्रकार छिपाया जा रहा है, और प्रतिपूर्ति राशि वितरण में हो रही गड़बड़ी की लगातार शिकायतें हो रही है इससे तो अब विभाग को यह जानकारी सार्वजनिक कर देना चाहिए कि किस प्रायवेट स्कूल में कौन गरीब बच्चा अध्ययनरत् है और किस प्रायवेट स्कूल को कितनी प्रतिपूर्ति राशि मिल रही है।
विभाग द्वारा जिस प्रकार सदन में लगातार मिथ्या व भ्रामक जानकारी भेज रहा है और आरटीई के अंतर्गत प्रवेश पाने के लिए निकाले जाने वाले ऑनलाईन लॉटरी में भी प्रतिवर्ष गड़बड़ी की जा रही है, जिससे पात्र गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है और अब पीडि़त पालकगण प्रमुख सचिव को दस्तावेजी साक्ष्य भेजकर आरटीई नोडल ऑफिसर आदित्य खरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रहे है।
कोण्डागांव / शौर्यपथ /
कहते हैं कि मनुष्य की आंखें भगवान के द्वारा मनुष्यों को दिये गये सबसे अनमोल उपहारों में से एक है। आंखों से ही हम इस दुनिया का अनुभव कर पाते हैं परंतु कुछ लोग को जन्म से या किसी दुर्घटनावश अपनी आंखों से इस दुनिया को देखने में असक्षम हो जाते हैं। ऐसे में उनकी जिंदगीयों में दोबारा रौशनी लाने नेत्रदान अभियान चलाया जाता है। इन अभियानों से प्रेरित होकर बड़ेराजपुर विकासखण्ड के ग्राम सलना निवासी शोभाराम पटेल ने भी कुछ वर्षों पहले नेत्रदान का संकल्प लेते हुए अपने परिवारजनों को अपने निर्णय के संबंध में बताया था।
शोभाराम की 29 मई को निधन होने पर परिवार की सूचना पर नेत्रदान संग्रहण केन्द्र कोण्डागांव द्वारा दल गठित कर त्वरित कार्यवाही करते हुए रात्रि 11.00 बजे सलना के दानीपारा स्थित उनके निवास पहुंचे। जहां नेत्र सहायक अधिकारी अनिल बैध, सीएचसी विश्रामपुरी के डॉ. दुर्गा दास, डीपीएम कमल गिलहर, पीएचसी चिपावण्ड के अशोक कश्यप, पीएचसी सलना के महावीर मरकाम सहित स्टॉफ नर्स नंदा शील एवं आरती महानंद द्वारा नेत्रदान हेतु आवश्यक कार्यवाही की गई। जिसके पश्चात् संग्रहित नेत्र को रात्रि 11.30 बजे ही पं0 जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज रायपुर स्थित नेत्र बैंक में भेज दिया गया। जहां से नेत्रहीनों को नया जीवन देने हेतु आंखों को लगाया जायेगा।
इसके संबंध में नेत्र सहायक अधिकारी के पद पर जिला बस्तर में कार्यरत् पुत्र दयानंद पटेल ने बताया कि नेत्रदान अभियान के संबंध में मेरे पिता द्वारा मुझसे जानकारी पाकर जीवित रहते हुए नेत्रदान की घोषणा की थी। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए पिता का वृद्धावस्था के कारण निधन होने पर नेत्रदान संग्रहण केन्द्र कोण्डागांव को सूचना दी गई थी। जिसपर नेत्रदान दल द्वारा रात को ही घर पहुंच नेत्रदान हेतु कॉर्निया को संग्रहित कर लिया गया था। इसके आगे दयानंद ने कहा कि उनके पिता ने अपने जाने के बाद भी अंधेरी जिंदगीयों में रौशनी भर कर उन्हें नया जीवन देने का कार्य किया है। जिसपर उन्हें गर्व है। उन्होंने अन्य लोगों को भी नेत्रदान करने की अपील की।
इसके संबंध में नेत्र सहायक अधिकारी एवं सहायक नोडल अधिकारी अनिल बैध ने बताया कि कोण्डागांव में नेत्रदान संग्रहण केन्द्र स्थापित किया गया है। जिसके पश्चात् यह पहला अवसर था जब सीएचएचओ डॉ0 टीआर कुंवर, सिविल सर्जन डॉ0 संजय बसाख एवं नेत्र विशेषज्ञ डॉ कल्पना मीणा, अंधत्व निवारण नोडल डॉ0 हरेन्द्र बघेल के मार्गदर्शन में जिला अस्पताल द्वारा नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए राज्य के एकमात्र शासकीय नेत्र बैंक रायपुर भेजा जा सका है। नेत्रदान को महादान की उपाधि दी जाती है क्योंकि इससे दूसरों को जीने की उम्मीद प्राप्त होती है। उन्होंने लोगों को नेत्रदान के प्रति प्रेरित करते हुए बताया कि व्यक्ति की मृत्यु उपरांत 06 घण्टे तक आंखों को दान किया जा सकता है। नेत्रदान में केवल 10 से 15 मिनट का वक्त लगता है एवं इससे शरीर को किसी प्रकार की हानि नही होती न ही किसी सामाजिक मान्यता को प्रभाव पड़ता है। बल्कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों की जिंदगी को रौशनी एवं उनके परिवारों को खुशियां प्राप्त होती है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
