August 04, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    खेल / शौर्यपथ / टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ के बीच काफी मैदान पर कई बार कहासुनी…
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    लॉकडाउन में एक अप्रैल से अब तक कैम्पा में किया गया 42.44 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन
    आवर्ती चराई योजना में स्वीकृत किए जाए मनरेगा से कार्य: मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल
    हाथी को मानव का मित्र बनाने की हो पहल
    वनों में सितम्बर और अक्टूबर माह में प्राथमिकता से किया जाए हरे चारे की कटाई का कार्य: लोगों को मिलेगा रोजगार

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में कैम्पा शासी निकाय की प्रथम बैठक आयोजित की गई। श्री बघेल ने बैठक में कैम्पा मद से कराये गए कार्यो की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2019-20 में कैम्पा के वार्षिक कार्ययोजना के तहत 429 करोड़ 21 लाख रूपए की राशि खर्च कर विभिन्न रोजगार मूलक कार्यो के जरिए 89.73 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित किया गया। वर्ष 2020-21 में कोरोना संकट काल के दौरान एक अप्रैल से अब तक 219 करोड़ 63 लाख रूपए की राशि व्यय कर 42.44 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजन किया गया। मुख्यमंत्री ने वनांचल में लोगों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए आवर्ती चराई योजना और वन अधिकार अधिनियम के तहत मनरेगा में अधिक से अधिक कार्य स्वीकृत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 4400 गौठानों का निर्माण पूरा हो गया है, जहां बड़ी संख्या में मवेशी डे-केयर में रखे जा रहे हैं। यहां बड़ी मात्रा में चारे की आवश्यकता होगी। इसे ध्यान में रखते हुए अभी सितम्बर और अक्टूबर माह में वन प्रबंधन समितियों द्वारा हरे चारे की कटाई का कार्य कराये जाए, जिससे लोगों को रोजगार भी मिले और गौठानों में चारे की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इस अवसर पर वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर भी उपस्थित थे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे काफी मात्रा में हरा और पौष्टिक चारा इक्कठा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सभी वन मंडलों में कुछ केन्द्रों में हरा चारा के गठ्ठर बना कर भंडारित किया जाए और इन केन्द्रों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करायी जाए, जिससे गौठान समितियां और निजी क्षेत्र के पशुपालक अपनी आवश्यकता अनुसार चारा निर्धारित दर पर क्रय कर सकें। मुख्यमंत्री बघेल ने हरे चारे के विक्रय की दर भी निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कई गौठानों में बड़ी मात्रा में गोबर एकत्र हो गया है। इससे वर्मी कम्पोस्ट के साथ-साथ गोबर के कण्डे और गौकाष्ठ जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने बैठक के दौरान नरवा योजना के अंतर्गत भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्यो की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2019-20 की कार्ययोजना में नरवा विकास योजना के अंतर्गत 12 लाख 55 हजार 128 स्वीकृत संरचनाओं में से अब तक 8 लाख 49 हजार से अधिक संरचनाओं का विकास हो चुका है, इनमें चेक डैम, स्टॉप डैम, चेकडैम, एनिकट, डाइक वाल आदि शामिल है।
    मुख्यमंत्री बघेल ने कैम्पा मद के अंतर्गत वनांचलों में बड़े-बड़े तालाबों के निर्माण कार्य को भी प्राथमिकता से शामिल करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने वन्य प्राणियों के रहवास सुधार के अंतर्गत चारागाह विकास, फलदार वृक्षारोपण तथा वन क्षेत्रों में जल संरचनाओं के विकास पर विशेष जोर दिया। इस दौरान राजकीय पशु वन भैंसा, राजकीय पक्षी बस्तर मैना, बारहसिंगा, लकड़बग्गा, सोनकुत्ता, गिद्ध आदि के संरक्षण तथा संवर्धन के संबंध में चर्चा की गई। राज्य में शेरों की संख्या में वृद्धि और पक्षियों के भी रहवास सुधार के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाने के संबंध में चर्चा हुई।
    मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि हाथी-मानव द्वन्द की स्थिति को रोकने के लिए हाथी को मानव का मित्र बनाने की पहल की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में हाथी के रहवास क्षेत्रों में पर्याप्त भोजन तथा पानी आदि की व्यवस्था का प्रबंध हो, जिससे हाथी-मानव द्वन्द में आसानी से नियंत्रण पाया जा सके। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने हाथी-मानव द्वन्द में नियंत्रण पाने के लिए जन-जागरूकता लाने सहित बेहतर कार्य योजना बनाने के संबंध में वन विभाग को विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अनुमान के अनुसार केरल में लगभग 6000 हाथी हैं, वहां यदा-कदा ही हाथी-मानव द्वन्द की स्थिति निर्मित होती है। हाथियों को मानव का मित्र बनाने की दिशा में आवश्यक पहल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हाथी एक बहुत ही शांत, समझदार तथा सामाजिक प्राणी होता है, इसके स्वभाव को समझकर तथा जन-जागरूकता से हाथी-मानव द्वन्द को कम किया जा सकता है।
    बैठक में अरपा नदी पुनरूद्धार योजना पर प्रस्तुतिकरण दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अरपा नदी के उद्गम पेण्ड्रा से शिवनाथ नदी में मिलने तक के मार्ग में नरवा ट्रीटमेंट का कार्य कार्ययोजना के अनुसार सुनिश्चित किया जाए, जिससे अरपा में प्राकृतिक रूप से सालभर जल का प्रवाह बना रहे। श्री बघेल ने यह भी कहा कि वन विभाग, राजस्व विभाग परस्पर समन्वय से भू-जल संवर्धन और संरक्षण का कार्य प्राथमिकता से करें। इस अवसर पर मुख्य सचिव आर.पी.मंडल, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, कैम्पा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी व्ही. श्रीनिवास राव उपस्थित थे। अपर मुख्य सचिव अमिताभ जैन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती एम.गीता वीडियो कॉन्फ्रंेसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

    बिलासपुर / शौर्यपथ / स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन ने कोविड मरीजों को परेशान कर दिया है, और एक मरीज अपने ही घर पर रह कर डॉक्टर से कंस्लटेंसीय का 10 हजार रुपये 10 दिन में चुकता है। विभाग के दिशा निर्देश के मुताबिक डॉक्टर की योग्यता एमडी मेडिसिन आईसीयू होना चाहिए। इस खेल को  इस तरह समझे कि यदि व्यक्ति का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव पाया जाता है और वह होम आइसोलेशन का विकल्प चुनता है तो उसे निगेटिव रिपोर्ट आने तक जिस डॉक्टर के निर्देशन में होम आइसोलेट होना है उसकी पैकेज फीस 10 हजार रुपये है। बिलासपुर में कोरोना पॉजिटिव की संख्या रोज़ बढ़ रही है और अस्पतालों में बिस्तर खाली नही है। तब होम आइसोलेशन के अलावा कोई विकल्प नही है। प्रभावित व्यक्ति कही से 10 हजार की फीस डॉक्टर को देगा बदले में उसे इलाज क्या मिलेगा यह किसी को नही पता। ठीक होने के पूर्व एक बार टेस्ट कराएगा, टेस्ट का खर्चा 5 हजार रुपये है। जिसका सीधा अर्थ है की एक परिवार के ऊपर 15 हजार का अतिरिक्त बोझ है, सरकारी अस्पतालों में अब जगह नही है। यदि मरीज निजी अस्पताल में भर्ती होता है तो 30 से 40 हजार रुपये एडवांस जमा होने पर भी कोई गारेंटी नहीं है। ऐसे में एक सामान्य परिवार के लिए कोरोना पॉजिटिव प्रकरण उसकी आर्थिक व्यवस्था को चौपट करने वाली बीमारी है। पिछले 5 माह में बीमा कंपनियों ने कोविड-19 की मनचाही पॉलिसी बेची है किंतु कोई भी बीमा पॉलिसी होम आइसोलेशन में खर्च हुई रकम का भुगतान नही करती। ऐसे में बीमा पॉलिसी धारक स्वयं को ठगा हुआ पाते है। एक तरफ कोविड ने आर्थिक व्यवस्था को ज़ीरो पर ला दिया है तो दूसरी ओर कोविड-19 की बीमारी समाज के एक वर्ग विशेष के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया बन कर आई है। अब स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी होम आइसोलेशन का टेग भी घर पर लगा कर नही जाते।

    दुर्ग / शौर्यपथ / कचांदुर स्थित चंदूलाल चंद्राकर अस्पताल जहां वर्तमान में कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती कर ईलाज किया जा रहा है यहां की व्यवस्था अत्यंत खराब है यहां मरीजों को न तो समय पर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध हो पा रहा है और न ही मरीजों के लिए बिछाई गई बेड की चादर 5 से 7 दिनों में भी बदला जा रहा है पूरे हॉल व गैलरी में जगह जगह गंदगी बिखरी पड़ी है वहीं बाथरूम व टायलेट की हालत देखकर स्वस्थ्य व्यक्ति भी बीमार पड़ जाने की स्थिति है फिसलन के कारण मरीज गिर रहे है बदबू से दम घुट रहा है और यहां की व्यवस्था अत्यंत बदतर होने के बाद सफाई कर्मी या डॉक्टर झांकने आ रहे है वहीं वर्तमान में उक्त अस्पताल में जिला भाजयुमो के दो पदाधिकारी जिला मंत्री नितेश बाफना व जिला स्वच्छता प्रकल्प संयोजक अनुपम मिश्रा भी पॉजिटिव आने के बाद हॉस्पिटल के तृतीय मंजिल में स्थित वार्ड नंबर 26 बेड नंबर 741,742 में 5 सितम्बर से उपचार हेतु भर्ती है किंतु विगत 5 दिनों में हॉस्पिटल के अव्यवस्था को देखकर उन लोगो के मन द्रवित हो गया है और कोविड पेशेंट होने के बाद भी अपने मानवीय कर्तव्यो व राजनीतिक दायित्वों को ध्यान में रखते हुए अस्पताल की दुर्दशा ठीक करने की मांग को लेकर उक्त कोविड हॉस्पिटल में आज सुबह भाजयुमो जिला अध्यक्ष दिनेश देवांगन की अनुमति से धरने पर बैठ गए है और लगातार जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे है जिसमें अन्य मरीज भी अपनी सहभागिता दे रहे है।
    इधर कोविड हॉस्पिटल कचांदुर में अव्यवस्थाओं को लेकर धरने में बैठे युवा मोर्चा पदाधिकारियों की जानकारी व गंदगी की तस्वीर व ज्ञापन वाट्सएप के माध्यम से जिलाधीश सर्वेश्वर भूरे को देते हुए जिला भाजयुमो अध्यक्ष दिनेश देवांगन ने कहा कि यह महामारी हमारे प्रदेश के साथ-साथ जिले में भी अपने पूरे चरम पर हैं इस दौर में कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति हॉस्पिटल में जब भर्ती होता है तो वैसे ही मानसिक रूप से परेशान होता है और वर्तमान में हॉस्पिटल की व्यवस्थाएं उनको जीवन ना देकर मौत की ओर अग्रसर कर देता है उक्त कोवि ड अस्पताल में भर्ती हमारे पदाधिकारियों ने जब स्वमेव इस व्यवस्था से रूबरू हुए तो उनका मन क्षुब्ध हो उठा है और मरीज होते हुए भी मानवीय एवं राजनीतिक कर्तव्य को ध्यान में रखकर मरीजों के साथ धरना में बैठ गए है जिला भाजयुमो ने इसका पुरजोर समर्थन करते हुए जिलाधीश महोदय से मांग की है कि वे धरनारत पदाधिकारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर दो दिनों के अंदर चंदूलाल चंद्राकर कोविड हॉस्पिटल की साफ सफाई से लेकर तमाम व्यवस्था ठीक किया जाए अन्यथा आंदोलन का विस्तार करते हुए जिला भाजयुमो उग्र प्रदर्शन करेंगी।

    रायपुर / शौर्यपथ / एक तरफ पूरी दुनिया में विभिन्न तरह की बीमारियों से लाखों लोगों की जानें जाती है तो दूसरी तरफ लाखों लोग ऐसे भी हैं जो खुद ही अपनी जान के दुश्मन बन आत्महत्या तक कर लेते हैं। आत्महत्या, बहुत ही डरावना शब्द है। एक ऐसा शब्द जो आंखों के सामने मौत का भयावह मंजर खड़ा कर देता है। ऐसा करने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक हर 40 सेकेंड में एक जिंदगी खत्म हो रही है। स्पर्श क्लीनिक रायपुर के मनोरोग चिकित्सक डॉ. अविनाश शुक्ला कहते हैं, मेंटल इलनेस का इलाज पूरी तरह संभव है। इससे आत्महत्याओं को रोका जा सकता है। बहुत से लोग काउंसलिंग और इलाज कराने के बाद सफल हैं यानी अच्छी जिंदगी जी रहे हैं। अलग-अलग तरह के कारणों से लोगों के मन में आत्महत्या का ख्याल आता है। लोग आत्महत्या से बचें इसलिए परिजनों को ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। प्राइवेसी बनाए रखने के लिए उनके नाम बदल दिए गए हैं।

    डॉ. शुक्ला ने बताया राजधानी के पुरानी बस्ती निवासी राजेश कुमार (परिवर्तित नाम) 4 माह पहले स्पर्श क्लिनिक रायपुर में परामर्श के लिए आये थे। परामर्श का कारण कुछ दिन पूर्व आत्महत्या का प्रयास था। काउंसिलिंग से पता चला राजेश पिछले कुछ सालों से शराब का सेवन आदी बन गया था। और एक साल से यह मात्रा काफी बढ़ गयी थी। उनकी कमाई का लगभग आधे से ज्यादा पैसा शराब पर खर्चा हो जाता था।

    ``डॉक्टर ने मेरी काउंसलिंग की। उसके बाद से मैंने खुद को खत्म करने का ख्याल मन से निकाल दिया है,’’ राजेश कहते हैं। राजेश ने बताया कोरोना महामारी के दौरान लॉडकाडन के दिनों में उनका ऑटो मेकेनिक का व्यवसाय बंद हो गया और शराब भी मिलना बंद हो गया। शादी के बाद दो बच्चें परिवार चलाने की चिंता की वजह से वह परेशान रहने लगा। शुरुवात में उन्हें नींद नहीं आना, भूख न लगना और शारीर में छटपटाहट, बेचैनी जैसी समस्या रही और कुछ दिन बाद घर वालों ने देखा कि वह उदास रहने लगा। परिवार के सदस्यों से पत्नी व बच्चों से भी बात कम करने लगा और किसी भी कार्य में रूचि नहीं थी। पड़ोस के लोगों से सलाह ले कर परिवार वालों ने झाड़ फूक करवाने ले गए पर कोई भी फायदा नहीं मिला। समस्या धीरे-धीरे बढ़ते रही और परेशान हो कर राजेश ने आत्महत्या का प्रयास किया।

    ``मुझे इस हाल देखकर मम्मी-पापा दुखी हुए। मम्मी-पापा और दोस्त ही मुझे स्पर्श क्लिनिक मनोचिकित्सक के पास ले गए। डॉक्टर ने कई सेशन में मेरी काउंसलिंग की और दवाई खाने को भी कहा। इस सबसे मेरा कॉन्फिडेंस वापस आने लगा। राजेश को शराब की आदत के साथ-साथ डिप्रेशन भी था,’’ ।

    पिछले 4 माह से राजेश नियमित रूप से स्पर्श क्लिनिक इलाज के लिए आ रहे है। राजेश बताते है कि आत्महत्या का प्रयास उनके जीवन का सब से गलत निर्णय था। उन्होंने अपनी समस्या का समाधान खोजने के बजाय उनको अनदेखा किया । शराब पर खर्चा इतना ज्यादा हो जाता था कि बचत कुछ नहीं था। लॉडाउन के समय आर्थिक परेशानी बढ़ गयी और मूलभूत ज़रूरतों को पूरा करना भी मुश्किल पड़ रहा था।

    इससे परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया लेकिन अब समझ आ गया कि हार व नाराशा नहीं उम्मीदों की रोशनी से सही रास्ता मिलने से मंजील मिलती है। तनाव में आकर उन्होंने गलत रास्ता चुन लिया था । पिछले 4 माह से वह शराब से दूर है और उपचार के बाद उदासी भी गायब हो गई। पहले से अब काम भी बेहतर कर पाते है और अब बचत पर भी ध्यान देने लगा। शराब का सेवन बंद करने के बाद पारिवारिक झगडे़ भी नहीं होते और बच्चों से भी रिश्ता बेहतर हुआ है ।

    राजेश सभी लोगों को संदेश देना चाहते है ताकि ऐसे लोगों को आत्महत्या जैसा कदम उठाने से बचाया जा सके। किसी को भी जीवन में होने वाले समस्याओं से भागना नहीं चाहिए बल्कि उनको शांत मन से समाधान खोजने कि ज़रूरत है। यह सभी के लिए ज़रूरी है कि शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्प्रभाव से अवगत रहे और इनका उपयोग ना करें। ऐसे ही मानसिक रोगों से भी डरने कि ज़रूरत नहीं। अगर उन्हें स्पर्श क्लिनिक के मुफ्त परामर्श और उपचार के बारे में पता होता तो शायद समस्या इतनी ना बढती। राजेश कहते है कि बिना किसी डर और संकोच के लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के लिए सरकार द्वारा संचालित स्पर्श क्लिनिक में संपर्क करना चाहिए ।

    रायपुर / शौर्यपथ /भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय के बयान पर कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि सही समय है कि भाषण वीर और बयान वीर बनने वाले भाजपा के नेता प्रधानमंत्री मोदी से कहें कि पीएम केयर्स फंड में करोना के नाम से जमा किए गए हजारों करोड़ रुपए अब करोना ग्रस्त लोगों के इलाज के लिए और मदद के लिए खर्च किए जाएं । यह पैसा प्रधानमंत्री मोदी ने करोना पीड़ितों की सहायता के नाम पर ही तो इकट्ठा किया है । छत्तीसगढ़ सहित राज्य सरकारों को भाजपा की केंद्र सरकार ने संक्रमण से लड़ने के लिये लॉक डाउन के पूरे समय में न कुछ दिया और करोना से लड़ने के लिए न कुछ किया। इसे पूरा देश जान भी रहा है और समझ भी रहा है । भाजपा के छत्तीसगढ़ के सांसदों ने छत्तीसगढ़ के करोना संक्रमितों की मदद के लिए सांसद निधि से कुछ देना तो दूर एक चिट्ठी तक लिखना मुनासिब नहीं समझा। अब करोना महामारी के इलाज के बारे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय द्वारा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लिखा गया पत्र भाजपा के दोहरे चरित्र का जीता जागता सबूत है।


    कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने विष्णु देव साय से पूछा है कि क्या आयुष्मान योजना या स्मार्ट कार्ड योजना में करोना महामारी के इलाज का विकल्प था ? विष्णु देव साय इतना ही बता दें कि क्या इन दोनों योजनाओं में आज भी करोना महामारी के इलाज के खर्च की कोई व्यवस्था या प्रावधान है ? भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साए जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए इस तरह के पत्र मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लिख रहे हैं। सच्चाई तो यह है कि इन योजनाओं में करोना के इलाज का कोई प्रावधान नहीं है। करोना महामारी के इलाज का आयुष्मान योजना या स्मार्ट कार्ड योजना में प्रावधान होने को लेकर विष्णु देव साय द्वारा किए जा रहे सारे दावे पूरी तरीके से गलत और अर्थहीन हैं। जब पत्र लिखना शुरू कर ही दिया है तो विष्णुदेव साय को अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखना चाहिए और करोना के इलाज का प्रावधान आयुष्मान योजना या स्मार्ट कार्ड योजना में कराना चाहिये ताकि देश को इसका लाभ मिल सके।

    रायपुर / शौर्यपथ / कांग्रेस ने कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर थोड़ा भी ध्यान दिया होता , स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ व्यवस्थाएं की होती कोरोना काल मे राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने में इतनी मशक्कत नही करनी पड़ती ।प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि दुनिया देश के साथ प्रदेश में आई महामारी के समय पूर्ववर्ती रमन सरकार के कुशासन अदूरर्दशिता और स्वास्थ्य सुविधाओं के दिशा में पन्द्रह साल तक ध्यान नही देने के कारण महामारी से निपटने में ज्यादा परेशानियां खड़ी हो रही हैं।
    जो काम पिछले पंद्रह सालो में नही किये गए उनको पांच महीनों में किया गया ।
    प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि रमन सिंह ने अपने पन्द्रह साल के शासन काल मे राज्य की स्वास्थ्य व्यस्था को बर्बाद करके रख दिया था ।प्रदेश जिला अस्पतालों से ले कर उपस्वास्थ्य केंद्रों तक चिकित्सको और पैरा मेडिकल स्टाफ की भर्तियां नही की गई थी ।रमन राज में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के पचहत्तर फीसदी पद खाली थे ।राज्य के मेडिकल कालेजों तक मे रमन सिंह विशेषज्ञ चिकित्सको की नियुक्तियां नही कर पाये थे । मेडिकल कालेजों में मान्यता रिनिवल के लिए जब भी एम सीआई की टीम के दौरा होता था रायपुर मेडिकल कालेज से डॉक्टरों को दूसरे मेडिकल कालेजों में भेज कर मान्यता की औपचारिकताएं पूरी करवाई जाती थी ।यह प्रक्रिया एक बार नही हर साल करवाई जाती थी ।लेकिन मेडिकल कालेजो स्थाई डॉक्टरों की नियुक्तियों के कभी ठोस प्रयास नही किये गए।
    प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि रमन सरकार की उसी लापरवाही का नतीजा आज प्रदेश की जनता और नई सरकार को भुगतना पड़ रहा है ।अचानक आये वैश्विक महामारी कोरोना के समय सरकार चिकित्सको और मेडिकल स्टाफ की भर्ती में लगी हुई है ।प्रदेश में 4500 मेडिकल स्टाफ और डॉक्टरों की प्रक्रिया तीव्र गति से चल रही है ।
    राज्य के स्वास्थ्य व्यवस्था को दोयम दर्जे का बनाने वाले रमन सिंह जब स्वास्थ्य व्यस्था पर बयान देते है तब वे कोरोना के संकट में जूझ रही प्रदेश की जनता के जले पर नमक छिड़कने का काम करते है ।बस्तर सरगुजा सहित राज्य के सभी दूरस्थ क्षेत्रो में रमन सरकार ने स्वास्थ्य केंद्रों में कमीशन खोरी की नीयत से भवन तो बना दिया था लेकिन कभी डॉक्टरों ,कंपाउंडरों नर्सो की नियक्ति और इलाज की व्यस्था के लिए कोई ठोस कदम नही उठाया।
    कांग्रेस प्रवक्ता ने राज्य की जनता से कहा कि घबराने की आवस्यकता नही कांग्रेस सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने पर्याप्त इंतजाम कर लिए है ।सभी का इलाज हो सभी को दवाइया मिल सके अस्पतालों में सुविधाएं मिल सके इसके लिये सरकार प्रतिबद्ध है ।सरकारी से ले कर निजी क्षेत्रों में कोरोना से इलाज के व्यापक इंतजाम किए गए है कोविड सेंटर बनाये गए है ।और सुविधाएं जुटाने के प्रयास जारी है।

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