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April 08, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

दुर्ग। दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में “ट्रिपल इंजन सरकार” के नाम पर जिस तेज़ विकास की उम्मीद आम जनता ने लगाई थी, वह अब राजनीतिक खींचतान की भेंट चढ़ती नजर…
दुर्ग। शहर के व्यस्ततम बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित “राम रसोई” को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें नगर निगम के बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की कार्यप्रणाली पर…

व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए बाजार, अतिक्रमण और राजस्व शाखा में व्यापक बदलाव—तत्काल प्रभाव से आदेश लागू

दुर्ग | शौर्यपथ

नगर पालिका निगम दुर्ग में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयुक्त सुमित अग्रवाल (IAS) ने बड़ा निर्णय लेते हुए कई अधिकारियों और कर्मचारियों के दायित्वों में व्यापक फेरबदल किया है। जारी आदेश (दिनांक 07 अप्रैल 2026) के अनुसार यह परिवर्तन तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

अतिक्रमण और बाजार शाखा में अहम बदलाव

आदेश के तहत सबसे महत्वपूर्ण बदलाव अतिक्रमण शाखा और बाजार विभाग में देखने को मिला है—

श्री ईश्वर वर्मा (राजस्व उपनिरीक्षक) को बाजार विभाग से मुक्त करते हुए अब प्रभारी अतिक्रमण शाखा का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है।

श्री परमेश्वर कुमार (सहायक राजस्व निरीक्षक) को अतिक्रमण शाखा में पदस्थ करते हुए बाजार शाखा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

यह स्पष्ट संकेत है कि निगम अब अतिक्रमण नियंत्रण को लेकर सक्रिय मोड में आने की तैयारी में है।

राजस्व और बाजार प्रबंधन में पुनर्संतुलन

श्री अभ्युदय मिश्रा (सहायक ग्रेड-03) को केवल प्रभारी अधिकारी बाजार शाखा का दायित्व सौंपा गया है, साथ ही राजस्व विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

वहीं श्री थानसिंह यादव (राजस्व उपनिरीक्षक) को सहायक राजस्व अधिकारी के प्रभार से मुक्त किया गया है।

स्टोर और भवन शाखा में भी बदलाव

श्रीमती साक्षी चौहान (सहायक राजस्व निरीक्षक) को उनके मूल कार्यों के साथ-साथ नोडल अधिकारी, स्टोर शाखा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

एक अधिकारी का स्थानांतरण

श्री चंदन मनहरे (राजस्व उपनिरीक्षक) को राजस्व विभाग से स्थानांतरित कर सचिवालय में पदस्थ किया गया है।

“तत्काल प्रभाव” का संदेश

आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि

? यह सभी परिवर्तन तत्काल प्रभाव से लागू होंगे,

जिससे यह संकेत मिलता है कि निगम प्रशासन अब कार्यप्रणाली में तेजी और जवाबदेही लाने के मूड में है।

क्या अब दिखेगा असर?

इस फेरबदल को ऐसे समय में किया गया है, जब

? शहर में अतिक्रमण और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

क्या यह प्रशासनिक बदलाव जमीनी स्तर पर असर दिखाएगा, या फिर यह भी सिर्फ कागजी कवायद बनकर रह जाएगा?

निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल के इस फैसले से स्पष्ट है कि प्रशासन अब “एक्शन मोड” में आने का संकेत दे रहा है—अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बदलाव का असर शहर की सड़कों और व्यवस्था में कितना दिखता है।

बस्तर के लिए 360° प्लान-टूरिज्म, स्टार्टअप, इंफ्रा और इनोवेशन पर फोकस

पीएम का बस्तर दौरा बनेगा टर्निंग पॉइंट, बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात

नई दिल्ली / रायपुर / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के भविष्य की एक नई तस्वीर पेश की। इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने न केवल नक्सलवाद के अंत के बाद प्रदेश में आई शांति के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया, बल्कि बस्तर के समग्र विकास का एक विस्तृत और दूरदर्शी ब्लूप्रिंट भी सौंपा। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का आमंत्रण दिया, जहां उनकी मौजूदगी में कई बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रस्तावित है।

उन्होंने बताया कि बस्तर समेत पूरे राज्य में नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और अब शांति स्थापित है। शिक्षा व स्वास्थ्य सुधार के तहत नए एजुकेशन सिटी, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं, जबकि इंद्रावती नदी पर बैराज, रेल लाइन और एयरपोर्ट विस्तार से कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ब्लूप्रिंट के जरिए बस्तर में अब विकास, रोजगार और बेहतर सुविधाओं का नया दौर शुरू होगा।

मुख्यमंत्री ने अपने विकास दस्तावेज़ में उल्लेख किया कि एक दशक पहले प्रधानमंत्री द्वारा बस्तर के लिए देखा गया शांति और विकास का सपना अब जमीन पर साकार हो रहा है। नक्सलवाद खत्म होने के बाद अब लोगों में डर नहीं, बल्कि उम्मीद और विकास की नई चमक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से बस्तर को नई दिशा और गति मिलेगी, जिससे क्षेत्र में विश्वास और उत्साह बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत विकास ब्लूप्रिंट ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ रणनीति पर आधारित है। इसके तहत बस्तर में बुनियादी सुविधाओं को तेजी से विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। सड़कों के व्यापक जाल के माध्यम से दूर-दराज के गांवों को जोड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्यों को 2027 तक पूरा करने के साथ-साथ नई 228 सड़कों और 267 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा 61 नई परियोजनाओं के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की मांग भी की गई है।

ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की योजना है। हर घर तक बिजली पहुंचाने के कार्य तेज होंगे। शिक्षा के क्षेत्र में 45 पोटा केबिन स्कूलों को स्थायी भवनों में बदला जाएगा। युवाओं के लिए 15 स्टेडियम और 2 मल्टीपर्पज हॉल बनाए जाएंगे, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल बनाए जा रहे हैं।

कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर दो बड़े प्रोजेक्ट देउरगांव और मटनार में स्वीकृत किए गए हैं, जिनसे 31,840 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। यह परियोजनाएं बस्तर की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

आजीविका और आय बढ़ाने के लिए सरकार ने तीन वर्षीय योजना तैयार की है, जिसका लक्ष्य 2029 तक 85% परिवारों की मासिक आय 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करना है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ योजना के तहत अब अधिक जिलों को जोड़ा जा रहा है, जिससे विकास का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंचेगा। 10 जिलों में शुरू की गई यह योजना अब 7 जिलों और 3 नए जिलों (गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) तक विस्तारित हो रही है।

‘अंजोर विजन 2047’ और ‘विकसित भारत@2047’ के तहत स्टार्टअप नीति भी लागू की गई है, जिसमें 2030 तक 5,000 स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य है।

पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर की पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी नेशनल पार्क, एडवेंचर टूरिज्म, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन क्षेत्र को नई पहचान दे रहे हैं। वहीं, एक लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 40 हजार को रोजगार भी मिल चुका है।

नक्सलवाद से मुक्त बस्तर के विकास के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री के सामने जो कार्ययोजना प्रस्तुत की, उसमें ‘बस्तर मुन्ने’ (अग्रणी बस्तर) कार्यक्रम एक अहम पहल है। इस कार्यक्रम के तहत हर ग्राम पंचायत में शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ अधिकारियों की मौजूदगी में लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे दिया जाएगा, जरूरी दस्तावेज वहीं बनाए जाएंगे और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि हर व्यक्ति तक सरकार की योजनाएँ आसानी से पहुँचें और बस्तर तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़े।

प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान जिन प्रमुख परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण की योजना है, उनमें रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन, जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज, जगरगुंडा और ओरछा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण पहल शामिल हैं। ये परियोजनाएं बस्तर को शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

महापौर अलका बाघमार के सख्त निर्देश कागजों तक सीमित? रसूखदारों पर खामोशी, गरीबों पर कार्रवाई तेज—निगम की कार्यशैली पर उठे सवाल


दुर्ग | शौर्यपथ

दुर्ग नगर निगम की कार्यप्रणाली अब सिर्फ सवालों के घेरे में नहीं, बल्कि कटाक्ष का विषय बनती जा रही है। एक ओर जहां महापौर श्रीमती अलका बाघमार खुद इंच-टेप लेकर पेवर ब्लॉक के काम की नाप-जोख कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर शहर में रसूखदारों द्वारा किए गए अवैध कब्जे बिना नापे-तौले ही फल-फूल रहे हैं।


इंच-टेप का ‘चयनात्मक इस्तेमाल’?

हाल ही में सामने आए दृश्य में महापौर
? ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए सख्त निर्देश देती नजर आईं,
? इंच-टेप से काम की बारीकी जांच करती दिखीं।

लेकिन बड़ा सवाल यही है—
क्या यही इंच-टेप अवैध कब्जों की नाप-जोख के लिए कभी इस्तेमाल होगी?


अवैध कब्जों पर क्यों नहीं चलती ‘माप-तौल’?

शहर में कई ऐसे मामले हैं जहां

  • बिना अनुमति दो मंजिला इमारतें खड़ी हो गईं
  • सरकारी जमीन पर खुलेआम व्यवसाय शुरू होने की तैयारी
  • नोटिस के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं

आदिनाथ केयर सेंटर का मामला इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है।


गरीबों पर बुलडोजर, अमीरों पर ‘मौन व्रत’?

आरोप यह है कि
? ठेला-गुमटी वालों पर तत्काल कार्रवाई,
? लेकिन बड़े अतिक्रमणकारियों पर सिर्फ नोटिस और खामोशी

यह “चयनात्मक सख्ती” अब आम जनता की नजरों से छिपी नहीं है।


प्रेस विज्ञप्ति बनाम जमीनी सच्चाई

निगम द्वारा समय-समय पर जारी
? “सख्त प्रशासन” की प्रेस विज्ञप्तियां,
जमीनी हकीकत से मेल नहीं खातीं।

हकीकत यह है कि
? छोटे कार्यों को उपलब्धि बताकर प्रचार किया जा रहा है,
? जबकि बड़े अवैध कब्जे जस के तस खड़े हैं।


सुशासन पर सवाल खड़े करती तस्वीर

प्रदेश स्तर पर जहां
मुख्यमंत्री सुशासन और पारदर्शिता की बात कर रहे हैं,
वहीं दुर्ग में
? नीतियों पर अमल में भेदभाव के आरोप
उन दावों को कमजोर करते नजर आ रहे हैं।


जनता पूछ रही—“नाप कब होगी?”

अब शहर में एक ही सवाल गूंज रहा है—

  • क्या इंच-टेप सिर्फ पेवर ब्लॉक के लिए है?
  • क्या रसूखदारों के अवैध कब्जे “माप” से बाहर हैं?
  • क्या बुलडोजर सिर्फ गरीबों के लिए आरक्षित है?

दुर्ग में अब मुद्दा सिर्फ अतिक्रमण का नहीं, बल्कि न्याय और निष्पक्षता का बन चुका है।
यदि शहरी सरकार सच में “सख्त प्रशासन” दिखाना चाहती है, तो
? इंच-टेप और बुलडोजर दोनों का इस्तेमाल समान रूप से करना होगा।


अब देखना यह होगा कि महापौर अलका बाघमार ‘माप-तौल’ की इस राजनीति से बाहर निकलकर निष्पक्ष कार्रवाई करती हैं या फिर यह मामला भी केवल सवाल बनकर रह जाएगा।

By - नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। ग्राम पंचायत बनियागांव क्षेत्र में भसखंली नदी से कथित अवैध रेत उत्खनन और बड़े पैमाने पर डंपिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ प्रभावशाली तत्वों द्वारा नदी से रेत निकालकर बनियागांव में भारी मात्रा में डंप किया गया है। आरोप है कि यह पूरा खेल जिम्मेदारों के नाक के नीचे संचालित हो रहा है, लेकिन कार्रवाई लगभग शून्य नजर आ रही है।

अवैध रेत डंपिंग पर रोक लगाने एवं कार्रवाई की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पूर्व में जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत भी सौंपी थी, जिसमें कथित अवैध उत्खनन और भंडारण का उल्लेख है। बावजूद इसके, अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आने से प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे जरूर, लेकिन कार्रवाई सीमित और औपचारिक रही। जिससे कथित रूप से जुड़े लोगों के हौसले और बढ़े हैं और अवैध डंपिंग का सिलसिला जारी है।

यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो इस तरह की गतिविधियों से शासन को रेत रॉयल्टी के रूप में भारी राजस्व नुकसान होने की आशंका है। साथ ही, अनियंत्रित उत्खनन से पर्यावरणीय असंतुलन की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि उक्त रेत का उपयोग औद्योगिक कार्यों एवं खुले बाजार में किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर “भारती” नामक व्यक्ति का नाम भी चर्चाओं में है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जांच के घेरे में व्यवस्था

शिकायत के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है। यह प्रशासनिक शिथिलता है या अन्य कारण—यह निष्पक्ष जांच का विषय है। परिस्थितियों को देखते हुए यह संदेह भी जताया जा रहा है कि कहीं न कहीं उदासीनता इस पूरे प्रकरण को बढ़ावा तो नहीं दे रही।

 

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कर तथ्य सामने लाने तथा दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि अवैध रेत डंपिंग के इस खेल पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

नकद वसूली के साथ आयुष्मान कार्ड भी किया एक्टिवेट, रसीद तक नहीं—परिजनों ने लगाया गंभीर भ्रष्टाचार का आरोप, स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर सवाल दुर्ग | शौर्यपथ शहर में निजी…

रायपुर / बस्तर संभाग के नक्सल मुक्त घोषित होने के बाद अब हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगा है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल बीजापुर की शर्मिला पोयामी बनकर उभरी हैं, जिन्होंने कभी हाथों में बंदूक थामी थी, लेकिन आज वे लाइवलीहुड कॉलेज में सुई-धागे से अपने और अपने परिवार के भविष्य के सपने बुन रही हैं।

*हिंसा के रास्ते से मुख्यधारा का सफर*

          बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक की रहने वाली 19 वर्षीय शर्मिला कभी भैरमगढ़ एरिया कमेटी की सक्रिय सदस्य थीं। गुरिल्ला युद्ध और हथियारों का प्रशिक्षण लेने वाली शर्मिला को जल्द ही अहसास हो गया कि प्रगति का मार्ग बंदूक से नहीं, बल्कि शांति और शिक्षा से निकलता है। इसी संकल्प के साथ उन्होंने 07 फरवरी 2026 को आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया।

*कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की ओर*

        राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत शर्मिला को दंतेवाड़ा के लाइवलीहुड कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया। बीते 45 दिनों से वे यहाँ सिलाई का गहन प्रशिक्षण ले रही हैं। अब वे आधुनिक परिधान जैसे सूट और ब्लाउज सिलने की बारीकियां सीख रही हैं। प्रशिक्षण के बाद उनका लक्ष्य अपने गाँव लौटकर सिलाई केंद्र खोलना और अपनी 4 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर आधुनिक खेती (टमाटर, मूली व भाजियाँ) कर परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करना है।

*सुविधाओं ने बदला नजरिया*

         शर्मिला ने बताया कि मुख्यधारा में लौटने के बाद उन्हें पहली बार शासन की ओर से इतनी बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, पौष्टिक आहाररू कॉलेज में नियमित रूप से अंडा, मछली, चिकन और हरी सब्जियां दी जा रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य में बड़ा सुधार हुआ है। सक्रिय सहभागितारू बढ़ते आत्मविश्वास का ही परिणाम है कि उन्होंने हाल ही में जगदलपुर में आयोजित मैराथन दौड़ में भी हिस्सा लिया। पारिवारिक प्रेरणा- शर्मिला की दीदी मुड़ो पोयामी (पूर्व नक्सल सदस्य) भी मुख्यधारा में लौटकर आत्मनिर्भरता की राह पर हैं।

*गाँव के विकास की उम्मीद*

         शिक्षा और कौशल की ताकत को समझने के बाद शर्मिला अब अपने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं के प्रति भी सजग हैं। वे चाहती हैं कि उनके गाँव की कच्ची सड़कों और पेयजल की समस्याओं का जल्द निराकरण हो ताकि विकास की यह लहर सुदूर अंचलों तक पहुँचे। शर्मिला पोयामी का यह संघर्षपूर्ण सफर हिंसा से विकास की ओर बढ़ते नए छत्तीसगढ़ की एक सशक्त पहचान बन गया है।

रायपुर।

छत्तीसगढ़ में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और यातायात को तेज, सुगम व सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेशभर में 9 नई बायपास सड़कों के निर्माण के लिए 448 करोड़ 13 लाख रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की है।

उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के निर्देश पर इन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है, ताकि शहरों के भीतर ट्रैफिक जाम से राहत मिल सके और लंबी दूरी का आवागमन बाधारहित हो।

? जिलेवार बायपास परियोजनाएं

? रायगढ़ जिला (3 बायपास):

तमनार बायपास (6 किमी) – ₹152.17 करोड़

रायगढ़ रिंग रोड (बायपास) – ₹70.47 करोड़

खरसिया बायपास-3 (2 किमी) – ₹7.22 करोड़ (चौड़ीकरण व मजबूतीकरण)

? धमतरी जिला (2 बायपास):

भखारा बायपास (4 किमी) – ₹14.94 करोड़

नारी बायपास (1.5 किमी) – ₹7.97 करोड़

? बलौदाबाजार जिला (2 बायपास):

बलौदाबाजार बायपास (15 किमी) – ₹88.68 करोड़

रिसदा बायपास (7 किमी) – ₹20.99 करोड़

? अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाएं:

कोनी-मोपका फोरलेन बायपास, बिलासपुर (13.40 किमी) – ₹82.80 करोड़

छिरहा बायपास, बेमेतरा (1.20 किमी, कांक्रीटीकरण) – ₹2.89 करोड़

? क्या होगा फायदा?

इन बायपास सड़कों के बनने से:

शहरों के अंदर भारी वाहनों का दबाव कम होगा

ट्रैफिक जाम में कमी आएगी

आवागमन होगा तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित

व्यापार और परिवहन को मिलेगा नया गति

?️ मंत्री का बयान

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा—

“राज्य शासन शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में निर्बाध, तेज और सुरक्षित यातायात उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। बायपास, पुल और ओवरब्रिज जैसे प्रोजेक्ट प्राथमिकता में हैं, जिससे प्रदेश में आधुनिक और मजबूत सड़क अधोसंरचना विकसित हो रही है।”

? निष्कर्ष

यह निर्णय केवल सड़कों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के आर्थिक, सामाजिक और शहरी विकास को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन बायपास मार्गों से न सिर्फ ट्रैफिक सुधरेगा, बल्कि प्रदेश की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।

    रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य की महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए संचालित महतारी वंदन योजना की 26वीं किश्त की राशि आज जारी की गई। इसके जारी होते ही हितग्राही महिलाओं के मोबाईल में खुशियों के नोटिफिकेशन की घंटी बज उठी। इस योजना के तहत राज्य की 68 लाख 48 हजार 899 महिलाओं को 641 करोड़ 62 लाख 92 हजार रूपए उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। लाभान्वित हितग्राहियों में 7773 महिलाएं नियद नेल्ला नार के योजना के गांवों की रहने वाली है। 

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी जी की गारंटी को पूरा करने के लिए और महिलाओं की बेहतरी के लिए यह योजना मार्च 2024 में शुरू की गई थी। तब से लेकर अब तक हर महीने हितग्राही महिलाओं को एक-एक हजार रूपए की सहायता राशि नियमित रूप से दी जा रही है। इस योजना के तहत अब तक हितग्राही महिलाओं को 16,881 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 

गौरतलब है कि इस योजना के अंतर्गत हितग्राही महिलाओं के केवाईसी पूरा किए जाने का काम भी तेजी से कराया जा रहा है। केवाईसी के अद्यतन की यह प्रक्रिया ई-गवर्नेस सर्विसेस इंडिया लिमिटेड के माध्यम से 3 अप्रैल से शुरू की गई है, जो 30 जून तक चलेगी। व्हीएलई द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत भवन में तथा शहरी क्षेत्र में वार्ड कार्यालय में केवाईसी अद्यतन का कार्य हो रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने महतारी वंदन योजना की ऐसी हितग्राही महिलाओं से जिनका ई-केवाईसी नहीं हुआ है, उनसे तत्काल ई-केवाईसी कराने की अपील की है ताकि योजना की सहायता राशि बिना किसी व्यवधान के उनके खाते में पहुंच सके। 

महिला एवं बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों की संख्या 68,94,633 है, जिसमें से केवाईसी हेतु लंबित हितग्राहियों को छोड़कर 68,48,899 हितग्राहियों को 26वीं किश्त का भुगतान किया गया है।

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