
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा— आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध न्याय दिलाना नए कानूनों का मूल उद्देश्य
समन्वित प्रयासों से नए कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी राज्य - मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा
ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस और आईसीजेएस जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से न्याय प्रणाली हो रही अधिक प्रभावी और जवाबदेह
नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य में सतत प्रशिक्षण, मॉनिटरिंग और तकनीकी क्षमता विकास पर विशेष जोर
रायपुर / वर्तमान समय की आवश्यकताओं और बदलती चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए नए आपराधिक कानून भारत की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन के वाहक बने हैं। इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रणालियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्याय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाकर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में आयोजित "स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस" राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं। इन कानूनों की मूल भावना नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था की स्थापना है, जिसमें पीड़ित को शीघ्र न्याय मिले और अपराधी कानून के शिकंजे से बच न सके।
उन्होंने कहा कि पुराने कानून ऐसे समय में बने थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था। आज अपराधों की प्रकृति बदल चुकी है और तकनीक न्याय व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन गई है। नए कानूनों ने डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तथा वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को विधिक मान्यता देकर अपराध अनुसंधान और अभियोजन को नई मजबूती प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा प्रारंभ होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। ई-साक्ष्य जैसी व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से न्याय प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है। पहले समन की तामील में कई दिन लग जाते थे, जबकि अब ई-समन के माध्यम से सूचना तत्काल संबंधित व्यक्ति तक पहुंच रही है और उसकी डिजिटल ट्रैकिंग भी संभव हो गई है। न्याय श्रुति जैसी व्यवस्था न्यायालयीन कार्यवाही के सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ ऑनलाइन एवं हाइब्रिड सुनवाई को भी अधिक सक्षम बना रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से देशभर के पुलिस थाने डिजिटल रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं। इससे अपराधियों का रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध हो जाता है और पुलिस को त्वरित कार्रवाई में सुविधा मिलती है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं तथा राज्य में अब तक 1 लाख 97 हजार 547 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित कर रहा है। इससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव हुआ है और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी में उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने कहा कि नए कानूनों से न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक सरल, पारदर्शी और कम खर्चीली हुई है। कागजी औपचारिकताओं में कमी आई है तथा सीमित संसाधनों में अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने में भी ये कानून अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इसी दिशा में राज्य सरकार ने नौ नए साइबर थाने प्रारंभ किए हैं तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तकनीक निरंतर विकसित हो रही है। इसलिए न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को समय-समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक है। राज्य सरकार नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रशिक्षण, क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की आपराधिक न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, त्वरित और तकनीक आधारित बनेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम देश की न्याय व्यवस्था में व्यापक बदलाव लेकर आए हैं। इन कानूनों की सफलता केवल उनके लागू होने में नहीं, बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं द्वारा उनके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आज की चर्चा केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपराधिक अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है। ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति तथा डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी व्यवस्थाएं नए कानूनों की मूल भावना को साकार करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विशेष रूप से ई-साक्ष्य को उन्होंने साक्ष्य प्रबंधन की समग्र एवं एकीकृत प्रणाली बताते हुए कहा कि इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी।
उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया अपराध स्थल से प्रारंभ होती है। यदि प्रारंभिक जांच वैज्ञानिक, निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, तो पूरी न्यायिक प्रक्रिया अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी। तकनीक न्यायिक विवेक का स्थान नहीं ले सकती, लेकिन उसे अधिक प्रभावी अवश्य बना सकती है।
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जून माह के दौरान जिला न्यायालयों में लगभग 9,910 मामलों तथा उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। उन्होंने सभी हितधारकों से न्याय श्रुति प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल अभिलेखों को व्यापक कानूनी मान्यता प्रदान की है, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने अपराध पंजीयन, अनुसंधान, तलाशी, जब्ती, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसी प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ नए आपराधिक कानूनों एवं डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की समीक्षा के बाद इसके त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप न्याय एवं कानून व्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है।
उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों की मूल भावना यह सुनिश्चित करना है कि निचली अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध न्याय मिल सके। उन्होंने "वन डेटा, वन एंट्री" की अवधारणा पर कार्य करने, एफआईआर की मैनुअल प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस, नेफिस, सीआरपीआई एप्लिकेशन और डीएनए सैंपलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों के व्यापक उपयोग पर बल दिया।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री श्री गजेंद्र यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.के. चन्द्रवंशी, उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्तिगण, प्रमुख सचिव गृह श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य विभाग श्रीमती सुषमा सावंत, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विभिन्न जिलों के न्यायाधीश, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सीसीटीएनएस के नोडल अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, एफएसएल के अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक, विधि विशेषज्ञ तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से देशव्यापी अभियान का किया शुभारंभ, युवाओं से किया नशामुक्त भारत के निर्माण का आह्वान
100 सप्ताह तक चलेगा जन-जागरूकता अभियान, विद्यालयों, महाविद्यालयों और युवा संगठनों के माध्यम से होंगे व्यापक कार्यक्रम
रायपुर / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर आज देशभर में प्रारंभ हुए ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ के तहत राजधानी रायपुर स्थित लोक भवन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में बड़ी संख्या में युवा, छात्र-छात्राएं, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, स्वयंसेवी संगठन तथा विभिन्न युवा संगठनों के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लिया और समाज को नशे के दुष्प्रभावों से मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से देशभर के युवाओं को संबोधित करते हुए 100 सप्ताह तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी जन-जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है और यदि युवा नशे से दूर रहकर अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता का सकारात्मक उपयोग करें, तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से स्वयं नशामुक्त जीवन अपनाने के साथ-साथ अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी इस दिशा में जागरूक करने का आह्वान किया।
लोक भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं ने उत्साहपूर्वक देखा। राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्ति की शपथ ली। कार्यक्रम में युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, सकारात्मक सोच विकसित करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया गया।
उल्लेखनीय है कि ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ 2 अगस्त 2026 से प्रारंभ होकर आगामी 100 सप्ताह तक देशभर में संचालित किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), माय भारत युवा संगठन तथा अन्य युवा संगठनों के सहयोग से विविध जन-जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इनमें नशामुक्ति शपथ कार्यक्रम, जागरूकता रैलियाँ, पोस्टर एवं चित्रकला प्रतियोगिताएँ, वाद-विवाद, निबंध लेखन, नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, लघु फिल्म प्रदर्शन, सोशल मीडिया अभियान तथा सामुदायिक संवाद जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे।
अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, उन्हें सकारात्मक जीवन मूल्यों से जोड़ना तथा विकसित भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय और जिम्मेदार भागीदारी सुनिश्चित करना है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से यह अभियान समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाकर इसे जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बनाया जाएगा।
इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, विधिक सलाहकार श्रीमती सत्यभामा अजय दुबे, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में युवा एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
कोर्ट के आदेश पर उतई थाना पुलिस ने दर्ज किया मामला, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराएं लगाई गईं
दुर्ग/भिलाई। करीब 4 करोड़ 39 लाख 50 हजार रुपये की कथित भूमि धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय के आदेश पर उतई थाना पुलिस ने भिलाई नगर निगम की महिला पार्षद रीता सिंह, उनके पति रमेश चंद्र सिंह राजपूत तथा मानव चंद सिंह के विरुद्ध अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(2), 318(3), 318(4), 338, 336(3) एवं 340 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। मामला न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद पर सुनवाई के बाद दर्ज किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, परिवादी बी.बी. सिंह ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने ग्राम घोंटा, तहसील पाटन, जिला दुर्ग स्थित विभिन्न खसरा नंबरों की भूमि का विक्रय करने का अनुबंध किया। इनमें निजी भूमि के साथ-साथ दान भूमि (इकरारित भूमि) तथा एक हाइड्रोलिक एक्सकेवेटर और भारत बेंज टिपर ट्रक जैसी चल संपत्तियां भी शामिल थीं। 29 जनवरी 2024 को हुए लिखित इकरारनामे के आधार पर परिवादी से करोड़ों रुपये प्राप्त किए गए।
शिकायत के अनुसार, सौदे के दौरान कुछ भूमि ऐसी बताई गई जो आरोपियों के स्वामित्व में ही नहीं थी, जबकि कुछ भूमि अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज थी। आरोप है कि इन तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया। इतना ही नहीं, परिवादी का यह भी आरोप है कि सौदे में शासकीय लीज भूमि को भी शामिल कर उसके हस्तांतरण का आश्वासन दिया गया, जबकि इसके लिए शासन की अनुमति आवश्यक थी।
परिवाद में यह भी उल्लेख किया गया है कि जब दस्तावेजों और स्वामित्व को लेकर सवाल उठाए गए तो आरोपियों ने बैंक से एनओसी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, लेकिन वह आज तक प्रस्तुत नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि तीनों आरोपियों ने एक राय होकर तथ्यों को छिपाते हुए उसे भ्रमित किया और बड़ी राशि प्राप्त कर आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
समाचार पत्र में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, विवादित संपत्तियों का सौदा 4 करोड़ 50 लाख रुपये में तय हुआ था, जिसमें से परिवादी द्वारा 4 करोड़ 39 लाख 50 हजार रुपये का भुगतान किए जाने का दावा किया गया है। न्यायालय के आदेश के पालन में उतई पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में दस्तावेजों, भूमि स्वामित्व और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है।
निलंबन नहीं, जवाबदेही तय करने का समय
शासकीय विद्यालयों में अनैतिक आचरण के मामलों पर कठोर और पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा
— शरद पंसारी
संपादक, शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र
शिक्षक केवल एक सरकारी कर्मचारी नहीं होता, बल्कि समाज का वह स्तंभ होता है जिसके कंधों पर आने वाली पीढ़ी के चरित्र, संस्कार और भविष्य की नींव टिकी होती है। इसलिए जब किसी विद्यालय से शिक्षक के कथित अनैतिक आचरण, विद्यालय परिसर में अनुचित व्यवहार, नशे की हालत में ड्यूटी करने अथवा विद्यार्थियों के समक्ष अशोभनीय गतिविधियों के वीडियो और समाचार सामने आते हैं, तो यह केवल किसी एक कर्मचारी का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर देता है।
हाल के समय में सोशल मीडिया पर ऐसे अनेक वीडियो और घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने समाज को झकझोर दिया है। यदि किसी मामले में जांच के बाद आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल सेवा नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि उस नैतिक जिम्मेदारी का भी हनन है, जिसे निभाने की शपथ एक शिक्षक लेता है।
चिंता का विषय केवल घटनाएं नहीं हैं, बल्कि उनके बाद होने वाली कार्रवाई भी है। अधिकांश मामलों में प्रथम दृष्टया निलंबन की कार्रवाई होती है, जिसके बाद विभागीय जांच की लंबी प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है। कई बार ऐसे मामलों में वर्षों तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाता। इससे समाज में यह संदेश जाता है कि गंभीर आरोपों के बावजूद कठोर दंड की संभावना सीमित है। यदि जांच में गंभीर अनैतिक आचरण सिद्ध हो जाए, तो केवल निलंबन पर्याप्त नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में सेवा नियमों के अनुरूप कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
यह भी उतना ही महत्वपूर्ण प्रश्न है कि विद्यालय का वातावरण बिगड़ने तक स्थिति पहुंची कैसे? क्या विद्यालय प्रमुख और संबंधित अधिकारी पूरी तरह अनभिज्ञ थे? किसी भी संस्था में अनुशासन बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी केवल एक कर्मचारी की नहीं, बल्कि नेतृत्व की भी होती है। यदि किसी विद्यालय में लंबे समय से अनुशासनहीनता या गंभीर शिकायतें थीं और समय रहते उनका संज्ञान नहीं लिया गया, तो संबंधित प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। हालांकि यह जवाबदेही प्रत्येक मामले के तथ्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही निर्धारित होनी चाहिए।
विडंबना यह भी है कि निजी विद्यालयों में छोटी-सी अनियमितता पर भी कठोर प्रशासनिक कदम उठाने की मांग तेज हो जाती है। वहीं शासकीय विद्यालयों में गंभीर आरोपों के मामलों में अक्सर कार्रवाई की गति और कठोरता पर प्रश्न उठते हैं। शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि नियम सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू हों। सरकारी और निजी विद्यालयों के लिए अलग-अलग मानदंड लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं माने जा सकते।
आज अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय इसलिए भेजते हैं कि वहां उन्हें ज्ञान, अनुशासन और संस्कार प्राप्त हों। यदि विद्यालय का वातावरण ही विवादों और अनुचित आचरण का केंद्र बनने लगे, तो इसका सबसे गहरा दुष्प्रभाव विद्यार्थियों के मनोविज्ञान पर पड़ता है। शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण से भी मिलती है। इसलिए शिक्षक का चरित्र ही उसकी सबसे बड़ी योग्यता माना जाता है।
छत्तीसगढ़ में नए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के सामने शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ अनुशासन और नैतिकता को मजबूत करने की भी बड़ी चुनौती है। प्रदेश की जनता उनसे यह अपेक्षा कर रही है कि ऐसे मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और नियमसम्मत जांच सुनिश्चित हो तथा जहां आरोप सिद्ध हों, वहां ऐसा निर्णय लिया जाए जो भविष्य में किसी भी कर्मचारी के लिए स्पष्ट संदेश बने कि विद्यालय की गरिमा से खिलवाड़ किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह किसी व्यक्ति या पूरे शिक्षक समुदाय पर प्रश्न उठाने का विषय नहीं है। प्रदेश के अधिकांश शिक्षक पूरी निष्ठा और समर्पण से अपने दायित्व निभा रहे हैं तथा समाज के लिए प्रेरणा हैं। किंतु कुछ मामलों में सामने आने वाला कथित अनैतिक आचरण पूरे शिक्षक समाज की प्रतिष्ठा को आहत करता है। इसलिए ईमानदार शिक्षकों के सम्मान और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानून और सेवा नियमों के अनुसार कठोर तथा पारदर्शी कार्रवाई हो।
शिक्षा का मंदिर तभी पवित्र रह सकता है जब वहां ज्ञान के साथ-साथ अनुशासन, नैतिकता और जवाबदेही भी सर्वोच्च मूल्य बने रहें। समाज की नजर अब केवल कार्रवाई पर नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण और प्रभावी परिणाम पर है।
सैकड़ों CCTV फुटेज, वैज्ञानिक जांच और तकनीकी साक्ष्यों से पुलिस ने सुलझाई ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री, हत्या में प्रयुक्त कैंची व पाना बरामद।
धमतरी। नारी महानदी पुल पर 22 जुलाई को हुए चर्चित हत्याकांड का धमतरी पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने 27 वर्षीय नीरज साहू की हत्या के मामले में 21 वर्षीय बिरेंद्र कुमार साहू को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दोनों चावल व्यवसाय से जुड़े थे और कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा तथा ईर्ष्या इस सनसनीखेज हत्या की मुख्य वजह बनी।
पुलिस के अनुसार 22 जुलाई 2026 को कुरूद थाना क्षेत्र अंतर्गत नारी महानदी पुल पर नीरज साहू का शव खून से लथपथ हालत में मिला था। उसके गले और माथे पर गंभीर चोटों के निशान थे, जबकि उसकी बोलेरो पिकअप वाहन भी घटनास्थल पर खड़ी मिली थी। जांच में धारदार हथियार से हत्या की पुष्टि होने पर थाना कुरूद में हत्या का मामला दर्ज कर विशेष जांच शुरू की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय के निर्देश पर कुरूद, मगरलोड और साइबर सेल की संयुक्त टीम गठित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार पांडेय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवचरण पटेल, डीएसपी भानूप्रताप चंद्राकर तथा एसडीओपी कुरूद रागिनी मिश्रा के मार्गदर्शन में पुलिस ने लगातार कई दिनों तक जांच अभियान चलाया।
जांच के दौरान पुलिस ने सैकड़ों CCTV कैमरों की फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों, वैज्ञानिक विश्लेषण और संदिग्ध गतिविधियों का सूक्ष्म अध्ययन किया। लगातार जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस की जांच बिरेंद्र कुमार साहू तक पहुंची।
हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर आरोपी ने हत्या करना स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि मृतक नीरज साहू का चावल कारोबार तेजी से बढ़ रहा था और उसकी अच्छी कमाई से वह अंदर ही अंदर जलन और रंजिश रखता था। इसी द्वेष के चलते उसने सुनसान नारी महानदी पुल पर नीरज को रोककर कैंची और पाना से ताबड़तोड़ हमला कर उसकी हत्या कर दी।
आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त कैंची एवं पाना बरामद कर जब्त कर लिया है। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
धमतरी पुलिस ने कहा है कि गंभीर और सनसनीखेज अपराधों की जांच में वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों का प्रभावी उपयोग करते हुए अपराधियों को कानून के शिकंजे तक पहुंचाने की कार्रवाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।
दोनों दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि देगी छत्तीसगढ़ सरकार
पीड़ित परिवारों के साथ लगातार मौजूद हैं छत्तीसगढ़ के अधिकारी
रायपुर / शौर्यपथ / दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी श्रमिकों की मृत्यु के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर राज्य सरकार ने पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए त्वरित कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने का निर्णय लिया है। यह राशि जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सहायता से अतिरिक्त होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ के दो वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल जम्मू-कश्मीर रवाना किया गया, जो घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों के साथ समन्वय और आवश्यक व्यवस्थाओं में जुटे हैं मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पीड़ित परिवारों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो तथा उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।
जम्मू-कश्मीर पहुंचे अधिकारियों ने वहां के प्रशासन से समन्वय स्थापित कर राहत एवं सहायता संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा दोनों पीड़ित परिवारों को दो-दो लाख रुपये की अंतरिम सहायता प्रदान की गई है तथा 14-14 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि भी शीघ्र प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जब तक दोनों परिवार सुरक्षित अपने गृह जिले नहीं पहुंच जाते, तब तक राज्य सरकार के अधिकारी उनके साथ रहकर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस दुखद घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार दोनों शोकाकुल परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है तथा हर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
अग्रिम कर हस्तांतरण से छत्तीसगढ़ के विकास कार्यों को मिलेगी नई गति : वित्त मंत्री चौधरी
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ सहित सभी राज्यों को 1,09,019 करोड़ रुपये की कर हस्तांतरण राशि जारी करने का निर्णय सहकारी संघवाद की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने वाला है।:उन्होंने कहा कि कर हस्तांतरण के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को 3,602 करोड़ रुपये की अग्रिम कर हिस्सेदारी प्राप्त हुई है। यह राशि राज्य में अधोसंरचना विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विकास कार्यों को नई गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार राज्यों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। समय पर कर हस्तांतरण से राज्यों की वित्तीय क्षमता मजबूत होती है, जिससे विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आती है और आम नागरिकों तक योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। श्री चौधरी ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ विकास के नए आयाम स्थापित करते हुए समृद्ध और विकसित राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
रायपुर / शौर्यपथ / वन मंत्री केदार कश्यप नारायणपुर जिले के पालकी गांव पहुंचकर बाढ़ प्रभावित परिवारों से मिले और उनका हालचाल जाना। उन्होंने प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और जरूरतों की जानकारी ली तथा हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
प्राकृतिक आपदा के समय प्रभावित लोगों तक त्वरित राहत पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
मंत्री कश्यप ने प्रभावित परिवारों को राहत सहायता राशि के चेक और कंबलों का वितरण किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय प्रभावित लोगों तक त्वरित राहत पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राहत सामग्री और जरूरी सहायता समय पर हर परिवार तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है। सरकार का लक्ष्य राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाकर प्रभावित लोगों के जीवन को जल्द से जल्द सामान्य बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं लगातार उपलब्ध कराई जाएं। जिन परिवारों को अतिरिक्त सहायता की जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर लाभ दिया जाए।
संकट की घड़ी में सरकार साथ
वन मंत्री कश्यप ने कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। प्रत्येक जरूरतमंद तक राहत और सहायता पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है और राज्य सरकार हर प्रभावित नागरिक को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
बलौदाबाजार के सकरी स्थित मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल में जिला स्तरीय वन महोत्सव 2026 का आयोजन
विद्यार्थियों ने चित्रकला और रंगोली से दिया हरियाली का संदेश, उत्कृष्ट वनसाथी भी हुए सम्मानित
रायपुर / शौर्यपथ / पर्यावरण संरक्षण और हरियाली के संकल्प के साथ शनिवार को बलौदाबाजार के सकरी स्थित मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल में जिला स्तरीय 'वन महोत्सव 2026' का गरिमामय आयोजन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा शामिल हुए। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, स्कूली बच्चों और नागरिकों की व्यापक सहभागिता के बीच वृहद पौधारोपण किया गया।
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कार्यक्रम का शुभारंभ "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधरोपण कर किया गया। अतिथियों ने स्वयं पौधे रोपकर समाज को पर्यावरण सहेजने का प्रेरक संदेश दिया और लगाए गए पौधों की सुरक्षा व देखभाल का संकल्प लिया।
पौधा लगाना ही नहीं, उसे सहेजना असली सफलता: राजस्व मंत्री
इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया 'एक पेड़ मां के नाम' केवल एक संदेश नहीं, बल्कि जन-जन को जोड़ने वाला एक देशव्यापी महाअभियान है। आज के दौर में पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। हर नागरिक अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा जरूर लगाए। केवल पौधा लगा देना ही काफी नहीं है, उसे वृक्ष बनने तक सहेजना और नियमित देखभाल करना ही इस अभियान की वास्तविक सार्थकता है।
प्रतिभाशाली बच्चे और 'वनसाथी' हुए सम्मानित
समारोह को और अधिक जीवंत बनाने के लिए स्कूली विद्यार्थियों के बीच चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बच्चों ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से प्रकृति और वृक्षों के महत्व को बखूबी उकेरा।
प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति-पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।इसी तरह वनों को भीषण दावानल (आग) से सुरक्षित रखने में साहसिक और उल्लेखनीय योगदान देने वाले वनसाथियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
इस जिला स्तरीय वन महोत्सव में राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आकांक्षा जायसवाल, कलेक्टर, वनमंडलाधिकारी सहित क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने आमजन से इस हरित अभियान से जुड़ने की अपील की।
राज्यपाल ने जिंदल विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को दी उपाधियां
रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान को विवेक, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जनकल्याण के लिए उपयोग में लाना है। एक शिक्षित व्यक्ति की पहचान उसके प्रमाण-पत्रों से नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उसके योगदान से होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो समाज के लिए स्थायी रूप से लाभकारी सिद्ध हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने।
राज्यपाल डेका आज रायगढ़ स्थित ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। समारोह में स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट तथा स्कूल ऑफ साइंस के 688 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधियां प्रदान की गईं। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण, 28 को रजत तथा 29 विद्यार्थियों को कांस्य पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया।
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि वर्तमान समय तेजी से बदलती तकनीक, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का दौर है। ऐसे समय में उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उन्हें ऐसे युवा तैयार करने होंगे जो ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता, अनुसंधान की प्रवृत्ति और सामाजिक सरोकारों को भी अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा की सच्ची सार्थकता केवल उपाधि प्राप्त करने में नहीं, बल्कि उस ज्ञान को समझदारी, दूरदर्शिता और नैतिक साहस के साथ जीवन में उतारने में है। आपका ज्ञान तभी पूर्ण होगा, जब वह समाज और मानवता के कल्याण में उपयोगी बने। जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो समाज के लिए स्थायी रूप से लाभकारी सिद्ध हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर निकलने वाले युवा अपने ज्ञान, प्रतिभा और संस्कारों के बल पर देश के विकास तथा समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
समारोह में जिंदल स्टील के चेयरमैन एवं सांसद नवीन जिंदल, विश्वविद्यालय की चांसलर श्रीमती शालू जिंदल, छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार गोयल, जिंदल स्टील रायगढ़ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर देबोज्योति रॉय, कुलपति डॉ.आर.डी. पाटीदार विशेष रूप से उपस्थित थे।
कुलगाम आतंकी हमले के पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है छत्तीसगढ़ सरकार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों द्वारा छत्तीसगढ़ के प्रवासी श्रमिकों पर किए गए कायराना हमले में सक्ती जिले के निवासी श्री दीपक रात्रे तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के निवासी श्री भूपेंद्र भैना के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस जघन्य और अमानवीय आतंकी घटना की कठोर शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना मानवता के विरुद्ध अपराध है और ऐसे कायराना कृत्य किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस दुःख की घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार शोकाकुल परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता और मजबूती से खड़ी है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार की ओर से दोनों दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को जम्मू-कश्मीर सरकार के अधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखने के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्त की जाएगी, जो परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा।
मुख्यमंत्री साय ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवारों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार त्वरित कार्रवाई, स्वास्थ्य परीक्षण के बाद होगी आगे की प्रक्रिया
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के केराबाहरा गांव में आतंक मचाने वाला एक तेंदुआ 1 अगस्त 2026 की सुबह वन विभाग द्वारा सुरक्षित पकड़ लिया गया। यह तेंदुआ पिछले एक महीने से अधिक समय से लगातार रिहायशी इलाके में आ रहा था और ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। छत्तीसगढ़ वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पिंजरा लगाया और जानवर को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित पिंजरे में कैद कर लिया।
वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार गरियाबंद वनमंडल के वन परिक्षेत्र गरियाबंद अंतर्गत ग्राम केरावाहारा (ग्राम पंचायत जोवा) में वन विभाग ने बड़ी सफलता हासिल की है। पिछले कुछ समय से क्षेत्र में तेंदुए की लगातार गतिविधियों को देखते हुए लगाए गए केज ट्रैप (पिंजरे) में शुक्रवार को तेंदुआ सुरक्षित रूप से पकड़ा गया। वन विभाग की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष को टाल दिया गया।
तेंदुए की गतिविधियों पर रखी जा रही थी विशेष निगरानी
वनमंडलाधिकारी ससिगानंदन के. ने बताया कि तेंदुए ने पहले क्षेत्र में पालतू मवेशियों पर हमला किया था। इसके अलावा विद्यालय परिसर और आबादी के आसपास भी उसकी मौजूदगी की सूचना मिल रही थी। इसे देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में विशेष निगरानी शुरू की और आवश्यक सुरक्षा उपाय किए।
केज ट्रैप और रेस्क्यू टीम की रणनीति रही सफल
वनमंडलाधिकारी ससिगानंदन के., उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक श्री वरुण जैन और वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश वर्मा के निर्देशन में ग्राम जोवा और केरावाहारा में केज ट्रैप लगाए गए थे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित लेपर्ड रेस्क्यू टीम को आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात किया गया था। इस कार्रवाई के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सह मुख्य वन्यजीव वार्डन, छत्तीसगढ़ से आवश्यक अनुमति और दिशा-निर्देश भी प्राप्त किए गए थे।
सुरक्षित रेस्क्यू के बाद स्वास्थ्य पर रखी जा रही निगरानी
वन विभाग की लगातार निगरानी और सुनियोजित रणनीति के चलते तेंदुआ सुरक्षित रूप से पिंजरे में आ गया। सूचना मिलते ही विभागीय टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उसके स्वास्थ्य और व्यवहार पर निगरानी शुरू कर दी। मौके पर भीड़ न जुटे, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था भी की गई।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
पकड़े गए तेंदुए का तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण में उसकी शारीरिक स्थिति, किसी संभावित चोट या बीमारी तथा प्राकृतिक आवास में छोड़ने की उपयुक्तता का आकलन किया जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
अफवाहों से बचें, वन विभाग को दें तुरंत सूचना
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें। तेंदुए से संबंधित कोई भी जानकारी मिलने पर तुरंत नजदीकी वन अमले को सूचित करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानव जीवन और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी आवश्यक कदम नियमानुसार उठाए जा रहे हैं।
केरसई में निर्मित महतारी सदन बना महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक सहभागिता का केंद्र
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के केरसई में निर्मित महतारी सदन महिला स्व-सहायता समूहों के लिए सशक्तिकरण का प्रभावी केंद्र बनकर उभरा है। इस भवन के निर्माण से महिलाओं को समूह की नियमित बैठकों, आजीविका गतिविधियों तथा सामाजिक कार्यक्रमों के संचालन के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और स्थायी स्थान उपलब्ध हुआ है।
महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती बबीता गुप्ता ने बताया कि पहले समूह की बैठक आयोजित करने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं होने से काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कभी किसी सदस्य के घर तो कभी खुले स्थान या पेड़ के नीचे बैठक करनी पड़ती थी। विशेष रूप से बारिश और गर्मी के मौसम में बैठकों का संचालन प्रभावित होता था, जिससे समूह की गतिविधियों पर भी असर पड़ता था।
उन्होंने बताया कि महतारी सदन बनने के बाद अब सभी सदस्य नियमित रूप से एक ही स्थान पर बैठक कर रही हैं। यहां समूह की बचत, ऋण, आजीविका गतिविधियों, प्रशिक्षण तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर व्यवस्थित ढंग से चर्चा होती है। इससे समूह का संचालन अधिक प्रभावी होने के साथ महिलाओं की सहभागिता भी बढ़ी है।
श्रीमती बबीता गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निर्मित महतारी सदन ने महिलाओं की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान किया है। अब उन्हें बैठकों के लिए स्थान की चिंता नहीं रहती और समूह की सभी गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी सदन महिलाओं के लिए केवल एक भवन नहीं, बल्कि संगठन, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन गया है। यह केंद्र महिलाओं को संगठित होकर विकास की नई दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
