August 05, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    दीपक वैष्णव की ख़ास रिपोर्ट
    कोंडागांव।
    केशकाल वनमंडल में भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के बाद विभाग हरकत में आया है और केशकाल डीएफओ दिव्या गौतम द्वारा मामले में खंडन जारी किया गया है।
    मामला भारी वाहन चालक पद की भर्ती से जुड़ा है, जिसमें डीएफओ दिव्या गौतम और एसडीओ सुषमा नेताम पर मिलीभगत कर चयन प्रक्रिया में फेरबदल करने का आरोप लगाया गया है। खबर के अनुसार, पहले मंजीत (पिता गुरविंदर सिंह) को पात्र घोषित किया गया था, लेकिन बाद में उसे अपात्र कर फरसगांव निवासी विक्की बंजारे को भर्ती कर लिया गया।
    शौर्यपथ द्वारा इस मामले को उजागर किए जाने के बाद वनमंडल कार्यालय द्वारा जल्दबाजी में एक पत्र जारी कर समाचार में प्रकाशित तथ्यों का खंडन किया गया है। हालांकि, समाचार पत्र का दावा है कि बिना दस्तावेजों के कोई खबर प्रकाशित नहीं की जाती और उनके पास ठोस प्रमाण मौजूद हैं।
    मामले को और गंभीर बनाते हुए यह भी सामने आया है कि कथित रूप से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर भर्ती की गई। इस संबंध में हीरा एग्रो कंपनी ने मुख्य वन संरक्षक कांकेर को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा किसी भी प्रकार का अनुभव प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है।
    अब पूरे प्रकरण पर जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। क्या प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा या मामला यूं ही दबा दिया जाएगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

    महाराजा चौक से पुलगांव चौक तक निर्माणाधीन सड़क पर सुरक्षा इंतजाम नदारद, ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल; अब शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की जवाबदेही पर भी उठे प्रश्न

    दुर्ग।

    शहर में विकास कार्यों के बड़े-बड़े दावे, सोशल मीडिया पर निरीक्षण की तस्वीरें और उपलब्धियों के पोस्टर एक तरफ हैं, जबकि दूसरी ओर उन्हीं विकास कार्यों के बीच सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। महाराजा चौक से पुलगांव चौक तक बन रही फोरलेन सड़क पर कथित सुरक्षा लापरवाही ने मंगलवार देर शाम एक युवा की जान ले ली।

    मनीष ट्रेवल्स में कार्यरत शुभम साहू (25 वर्ष) अपनी मोटरसाइकिल से अपने साथी के साथ ड्यूटी पर जा रहे थे। पुलगांव क्षेत्र में निर्माणाधीन सड़क के पास वाहन फिसलने से वे सड़क पर गिर पड़े और उसी दौरान गुजर रही एक बस की चपेट में आ गए। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलगांव पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस सड़क निर्माण कार्य को जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी उपलब्धि बताकर प्रचारित किया जा रहा है, उसकी सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर कई जगह गहरे गड्ढे, अधूरी सड़क, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था का अभाव तथा चेतावनी संकेत और बैरिकेडिंग जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाएं नहीं हैं।

    यदि विकास कार्यों का श्रेय जनप्रतिनिधि लेते हैं, तो क्या ऐसी दुर्घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी से भी वे स्वयं को अलग रख सकते हैं? या फिर हर बार की तरह पूरा दोष केवल ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों पर डाल दिया जाएगा?

    प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव लगातार सड़क निर्माण कार्यों के निरीक्षण और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की बात करते रहे हैं। ऐसे में यह घटना केवल ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर ही नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

    एक वर्ष पहले ही विवाह करने वाले शुभम साहू के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में केवल औपचारिक नोटिस जारी कर कार्रवाई पूरी मान ली जाएगी या फिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक और दंडात्मक कार्रवाई होगी।

    सिर्फ नोटिस किसी परिवार के उजड़ने की भरपाई नहीं कर सकता। यदि सरकार वास्तव में विकास कार्यों में गुणवत्ता और जवाबदेही चाहती है, तो इस घटना को उदाहरण बनाते हुए लापरवाह ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी। यही दिवंगत युवक के परिवार के प्रति न्याय और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम की दिशा में सबसे प्रभावी संदेश होगा।

    (संपादकीय टिप्पणी: किसी दुर्घटना में कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण सक्षम जांच एजेंसियों द्वारा किया जाता है। उपरोक्त लेख में उठाए गए प्रश्न सार्वजनिक जवाबदेही और सुरक्षा मानकों के पालन से जुड़े हैं।)

    नई दिल्ली/भोपाल। मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार पूर्व गृह मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बूथ पर कांग्रेस प्रत्याशी श्री घनश्याम सिंह को बढ़त/जीत मिली है। इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्वाचन क्षेत्र में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। इन दोनों परिणामों के बाद राजनीतिक हलकों में पार्टी के भीतर जवाबदेही और अनुशासन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि चुनावी प्रदर्शन के आधार पर किसी नेता की जवाबदेही तय की जाती है, तो समान परिस्थितियों में सभी नेताओं के लिए एक समान मानदंड अपनाया जाना चाहिए। सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर भी यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी एक नेता पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात होती है, तो समान परिस्थितियों वाले अन्य नेताओं पर भी वही कसौटी लागू होनी चाहिए। हालांकि, भाजपा की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान या अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनावी परिणामों के बाद पार्टी संगठन आमतौर पर विस्तृत समीक्षा करता है और स्थानीय परिस्थितियों, संगठनात्मक मजबूती तथा अन्य कारकों का भी आकलन किया जाता है। ऐसे में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व के स्तर पर ही लिया जाएगा। फिलहाल, दतिया और राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी परिणाम भाजपा के भीतर राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।

      दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग पुलिस की एसीसीयू और पुलगांव थाना पुलिस ने कार का शीशा तोड़कर 4.90 लाख रुपये चोरी करने वाले एक सुनियोजित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए शोरूम कर्मचारी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की रकम में से 1.57 लाख रुपये नकद, वारदात में प्रयुक्त दो पल्सर मोटरसाइकिल और एक एक्टिवा स्कूटी जब्त की है। शेष राशि की बरामदगी के लिए कार्रवाई जारी है।

    पुलिस के मुताबिक, 28 जुलाई को मुक्त नगर निवासी प्रमोद महेश्वरी अपनी कार में 4.90 लाख रुपये से भरा बैग लेकर पोटिया रोड स्थित उत्सव होंडा शोरूम पहुंचे थे। कुछ देर बाद लौटने पर उन्होंने कार का शीशा टूटा हुआ देखा और नगदी से भरा बैग गायब मिला। शिकायत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीसीयू और पुलगांव थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने घटनास्थल और आसपास लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।

    जांच में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी भुवनेश्वर डहरिया उत्सव होंडा शोरूम में कर्मचारी है। उसने अपने साथियों तथा शोरूम की सहकर्मी सपना राजपूत के साथ मिलकर पहले से प्रार्थी की गतिविधियों की रेकी की थी। आरोपियों को जानकारी थी कि प्रमोद महेश्वरी अक्सर बड़ी रकम लेकर शोरूम आते हैं। इसी जानकारी का फायदा उठाते हुए सुनियोजित तरीके से कार का शीशा तोड़कर नगदी से भरा बैग चोरी कर लिया गया।

    पुलिस ने इस मामले में भुवनेश्वर डहरिया, संजय साहू, जितेंद्र कुमार साहू, सपना राजपूत और संतोष जोशी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरोह ने जिले या आसपास के क्षेत्रों में इस तरह की अन्य वारदातों को भी अंजाम दिया है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।

      दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग यातायात पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर शराब के नशे में ट्रक चलाकर लोगों की जान खतरे में डालने वाले चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। ब्रीथ एनालाइजर जांच में चालक के शरीर में 424 एमएल अल्कोहल पाए जाने के बाद उसके खिलाफ मोटरयान अधिनियम की धारा 185 के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया।
    जानकारी के अनुसार, हाईवे पेट्रोलिंग टीम सिरसा गेट चौक के पास नियमित जांच कर रही थी। इसी दौरान एक ट्रक को रोकने का संकेत दिया गया, लेकिन चालक वाहन लेकर तेज गति से भाग निकला। पुलिस ने तत्काल वायरलेस के माध्यम से सूचना प्रसारित की, जिसके बाद नेहरू नगर चौक पर नाकाबंदी कर ट्रक को रोक लिया गया और चालक को हिरासत में लिया गया।

    चालक की ब्रीथ एनालाइजर से जांच करने पर उसके शरीर में 424 एमएल अल्कोहल की पुष्टि हुई। पुलिस ने इसे सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हुए तत्काल कानूनी कार्रवाई की और आरोपी के खिलाफ मोटरयान अधिनियम की धारा 185 के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया।
    यातायात पुलिस ने कहा कि नशे की हालत में भारी वाहन चलाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम लोगों के जीवन के लिए भी बड़ा खतरा है। सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जिले में शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा और नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

      दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग जिले में पहली बार शराब के नशे में यात्री बस चलाने वाले चालक के खिलाफ न्यायालय ने सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी चालक को तीन दिन के साधारण कारावास के साथ 15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस कार्रवाई को सड़क सुरक्षा के प्रति प्रशासन के कड़े रुख के रूप में देखा जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, यातायात पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष जांच अभियान के दौरान राजनांदगांव–दुर्ग–भिलाई मार्ग पर संचालित गुरुनानक ट्रेवल्स की यात्री बस को जांच के लिए रोका गया। बस चालक जितेंद्र देवांगन की ब्रीथ एनालाइजर से जांच करने पर उसके शराब के नशे में होने की पुष्टि हुई। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने तत्काल चालक के खिलाफ मोटरयान अधिनियम की धारा 185 (नशे में वाहन चलाना) एवं धारा 184 (खतरनाक तरीके से वाहन चलाना) के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया।

    प्रकरण की सुनवाई के बाद न्यायालय ने चालक को दोषी करार देते हुए तीन दिन के साधारण कारावास और 15 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। बताया जा रहा है कि दुर्ग जिले में शराब के नशे में यात्री बस चलाने के मामले में इस तरह की सजा का यह पहला मामला है।

    यातायात पुलिस ने आम नागरिकों और वाहन चालकों से अपील की है कि शराब या अन्य किसी नशीले पदार्थ के सेवन के बाद वाहन चलाने से बचें। नशे में वाहन चलाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यात्रियों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के जीवन को भी गंभीर खतरे में डालता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा के लिए भविष्य में भी ऐसे विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे।

      रायपुर । शौर्यपथ / वर्षा ऋतु में मलेरिया एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के संवेदनशील वनांचल क्षेत्रों में विशेष अभियान शुरू कर दिया है। राज्य स्तरीय अधिकारियों ने बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड तथा मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के दूरस्थ वन क्षेत्रों का मैदानी निरीक्षण कर मलेरिया नियंत्रण गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों ने शत-प्रतिशत सर्विलांस, समय पर जांच और तत्काल उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    निरीक्षण दल ने अचानकमार, कोटा तथा आसपास की वन बस्तियों का दौरा कर मलेरिया नियंत्रण की जमीनी स्थिति का आकलन किया। अधिकारियों ने कहा कि जंगलों में रहने वाले परिवारों तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि कोई भी व्यक्ति मलेरिया जांच और उपचार से वंचित न रहे।

    मैदानी निरीक्षण के दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को सभी वन बस्तियों और वैकल्पिक आवासीय स्थलों में सक्रिय मलेरिया सर्विलांस चलाने, प्रत्येक परिवार की लाइन लिस्टिंग तैयार करने, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) किट एवं मलेरिया रोधी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने तथा संदिग्ध मरीजों की तत्काल जांच और उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही संभावित संक्रमण वाले क्षेत्रों में नियमित फील्ड मॉनिटरिंग और विशेष निगरानी रखने पर भी जोर दिया गया।

    निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण के दौरान संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. गायत्री बांधी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मुंगेली डॉ. शीला शाह, उप संचालक वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम डॉ. वी.आर. भगत तथा संबंधित जिलों के जिला मलेरिया अधिकारियों ने क्षेत्र में संचालित सर्विलांस, जांच एवं उपचार व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। अधिकारियों ने जिला एवं विकासखंड स्तर पर गठित रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मलेरिया क्लस्टर या संभावित प्रकोप की सूचना मिलने पर 24 घंटे के भीतर टीम मौके पर पहुंचकर नियंत्रण एवं रोकथाम की कार्रवाई शुरू करे।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्षा ऋतु में मलेरिया के हर संभावित मामले पर गंभीरता से नजर रखी जा रही है। राज्य स्तर पर लगातार मैदानी निगरानी, नियमित समीक्षा और त्वरित हस्तक्षेप के माध्यम से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग ने विशेष रूप से बुखार से पीड़ित बच्चों और गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि संवेदनशील वर्गों को संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके।

    रायपुर / शौर्यपथ /
    छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही प्रशिक्षण, शासकीय सहयोग और बाजार की सुविधा मिले, तो महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर नई पहचान हासिल कर सकती हैं। जशपुर जिले के वन धन विकास केंद्र सहकारी समिति, पनचक्की की अध्यक्ष श्रीमती कांता बाई इस बदलाव की प्रेरक मिसाल हैं।

    वन धन योजना से मिला नया अवसर

    प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना के तहत संचालित इस केंद्र ने उरांव जनजाति की महिलाओं को रोजगार और सम्मान दोनों दिए हैं। पहले ये महिलाएं केवल वनोपज संग्रह पर निर्भर थीं, लेकिन अब वे वनोपज से मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।

    प्रशिक्षण और तकनीक ने बढ़ाया आत्मविश्वास

    छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ और ट्राइफेड (TRIFED) के सहयोग से महिलाओं को आधुनिक तकनीक, उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और विपणन का प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही आवश्यक मशीनें और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं।

    च्यवनप्राश सहित कई उत्पाद तैयार

    प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने औषधीय वनोपज से च्यवनप्राश सहित कई हर्बल उत्पाद तैयार करना शुरू किया। इन उत्पादों को ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत बाजार में उतारा गया, जिससे उन्हें अच्छी पहचान और मांग मिली।

    1.91 करोड़ रुपये का कारोबार

    मार्च 2026 तक वन धन विकास केंद्र, पनचक्की ने लगभग 1.91 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। इससे समिति की महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    मिली नई पहचान

    आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ-साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वे अपने गांव और समाज में सम्मान के साथ पहचानी जाती हैं। श्रीमती कांता बाई के नेतृत्व में यह केंद्र अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

    वन धन विकास योजना ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं को रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाली एक प्रभावी पहल साबित हो रही है। यह योजना महिलाओं को स्थानीय संसाधनों के आधार पर स्वरोजगार उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

    बीजापुर के मेधावी विद्यार्थियों का प्रतिष्ठित विद्यालयों में चयन, बेहतर शिक्षा से साकार हो रहे सपने

    रायपुर / शौर्यपथ / आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना वरदान साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

    जिला बीजापुर के विभिन्न विकासखंडों के कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का इस योजना के तहत चयन हुआ है। विकासखंड उसूर के ग्राम बसागुड़ा की छात्रा सान्वी संगम का चयन दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है। वहीं विकासखंड भोपालपटनम के ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा परिधि कावटी, विकासखंड बीजापुर के ग्राम सागमेटा के छात्र देवांश जनगम तथा ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा निहारिका नीकुरी का चयन हम एकेडमी, जगदलपुर में हुआ है। विकासखंड भैरमगढ़ के ग्राम छोटे गोगला के छात्र आदित्य कोरसा का चयन भी दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है।

    चयनित विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बताया कि वे श्रमिक परिवार से हैं और सीमित आय के कारण बच्चों को अच्छे निजी विद्यालयों में पढ़ाना उनके लिए संभव नहीं था। श्रम विभाग में पंजीयन कराने के बाद उन्हें अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने आवेदन किया और बच्चों की प्रतिभा के आधार पर उनका चयन हो गया।

    अब इन बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएँ, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    कलेक्टर श्री विश्वदीप ने चयनित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से मुलाकात कर बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने माता-पिता, समाज और देश का नाम रोशन करने तथा उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अभिभावकों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी और बच्चों के चयन पर शुभकामनाएँ दीं।

    अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह श्रमिक परिवारों के बच्चों को समान अवसर देकर उनके सपनों को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बन रही है। यह योजना सामाजिक समावेशन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

     रायपुर / शौर्यपथ / महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बीजापुर जिले के ग्राम निम्मलगुड़ा में जल संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने का एक सफल उदाहरण सामने आया है। गांव में 500 जल अवशोषण ट्रेंच का निर्माण किया गया, जिससे वर्षा जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और स्थानीय रोजगार सृजन में उल्लेखनीय सफलता मिली है।

    इस कार्य के लिए 4 लाख 95 हजार 73 रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिसमें से 4 लाख 70 हजार 61 रुपये खर्च कर निर्माण कार्य पूरा किया गया। इस दौरान 1,801 मानव-दिवस का रोजगार सृजित हुआ, जिससे गांव के कई परिवारों को स्थानीय स्तर पर काम मिला और उनकी आय में बढ़ोतरी हुई।

    जल अवशोषण ट्रेंच बनने से वर्षा का पानी जमीन में अधिक मात्रा में समाने लगा है। इससे भू-जल स्तर में सुधार, मिट्टी के कटाव में कमी और खेतों में लंबे समय तक नमी बनाए रखने में मदद मिली है। किसानों को सिंचाई में सुविधा मिल रही है और खेती की उत्पादकता बढ़ने की संभावना भी बढ़ी है।

    मनरेगा के तहत किया गया यह कार्य केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

    ग्राम निम्मलगुड़ा का यह प्रयास मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी का प्रेरणादायक उदाहरण है, जो ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।

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