January 29, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर ओलंपिक 2024 के समापन सत्र में आया और आज बस्तर ओलम्पिक 2025 के समापन में भी शामिल होकर सर्वाधिक खुशी की अनुभूति हुई, आपको विश्वास दिलाता हूं कि मैं 2026 में जब लाल आतंक समाप्त होगा तो फिर बस्तर ओलंपिक समारोह में आऊंगा और कहूंगा कि बस्तर सबसे विकसित संभाग है। बस्तर ओलंपिक केवल यहां के लोगों की खेल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है बल्कि यह समूचे बस्तर के उम्मीदों की पहचान बन गया है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज बस्तर ओलंपिक 2025 के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि मार्च 2026 तक समूल नक्सल उन्मूलन के कगार तक पहुंच चुके हैं।

          केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमनसिंह तथा अन्य अतिथियों ने बस्तर ओलम्पिक समापन सत्र के दौरान नुवा बाट के व्हीलचेयर रेस, रिले रेस, रस्साकसी सहित अन्य प्रतिस्पर्धाओं का फाइनल मुकाबला देखा। साथ ही बस्तर अंचल एवं छत्तीसगढ़ की लोकरंगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देखी। वहीं एजुकेशन सिटी जावंगा के घुड़सवारी में दक्ष बच्चों ने मार्चपास्ट में हिस्सा लेकर आकर्षण का केंद्र बने। कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु साय सहित अतिथियों ने बस्तर ओलंपिक 2025 के विजेताओं यूथ आइकॉन को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया। इस दौरान बस्तर ओलंपिक 2024 के विधिवत घोषणा की गई और ध्वज मुख्य अतिथि को सौपा गया।

          इस संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक की सबसे खास बात ये रही कि इसमें 700 से अधिक नुवा बाट (आत्म समर्पित माओवादी) तथा माओवादी हिंसा में प्रभावित दिव्यांग खिलाड़ी भी शामिल हुए। वहीं करीब दो हजार 800 से ज्यादा अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक में मुख्य रूप से फुटबॉल, वॉलीबॉल, कराटे, वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन, कबड्डी, आर्चरी, एथलेटिक्स, रस्साकसी, हॉकी और रिलेरेस शामिल है। इस मौके पर केबिनट मंत्री केदार कश्यप, लोकसभा सांसद बस्तर महेश कश्यप, सांसद कांकेर भोजराज नाग, उपाध्यक्ष बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण एवं विधायक कोंडागांव सुश्री लता उसेंडी, विधायक जगदलपुर किरण देव, विधायक अंतागढ़ विक्रम उसेंडी, केशकाल नीलकंठ टेकाम, चित्रकोट विनायक गोयल, कांकेर आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ बेवरेज कारपोरेशन अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर नगर निगम जगदलपुर संजय पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधि और केन्द्र शासन एवं राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा हजारों की संख्या में खेलप्रेमी गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

जगदलपुर, शौर्यपथ। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के समापन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमनसिंह और उपमुख्यमंत्री द्वय अरुण साव एवं विजय शर्मा सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधी उपस्थित थे।

      इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हमने तय किया था कि 31 मार्च, 2026 से पहले पूरे देश से लाल आतंक को खत्म कर देंगे और आज बस्तर ओलंपिक- 2025 में हम इस कगार पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष नवंबर-दिसंबर तक बस्तर ओलंपिक-2026 के समय तक पूरे भारत और छत्तीसगढ़ से लाल आतंक समाप्त हो चुका होगा और नक्सलमुक्त बस्तर आगे बढ़ रहा होगा।

        श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमने यह संकल्प लिया है कि पूरे बस्तर और भारत को नक्सलमुक्त कराना है। उन्होंने कहा कि हमें यहीं नहीं रुकना बल्कि कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के 7 जिलों का संभाग बस्तर, दिसंबर 2030 दिसंबर तक देश के सबसे अधिक विकसित आदिवासी संभाग बनेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर के हर व्यक्ति को रहने के लिए घर, बिजली, शौचालय, नल से पीने का पानी, गैस सिलिंडर, 5 किलो अनाज और 5 लाख तक का मुफ्त इलाज, बस्तर के घर घर में पहुचाने का संकल्प हमारी सरकार का संकल्प है। श्री शाह ने कहा कि हमने अगले पांच साल में बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार और श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार कंधे से कंधा मिलाकर बस्तर को विकसित बस्तर बनाने के लिए मिलकर आगे बढ़ेंगे।

       केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर का हर गांव सड़क से जुड़ेगा, वहां बिजली होगी, 5 किलोमीटर के क्षेत्र में बैंकिंग सुविधाएं होंगी और सबसे घने पीएचसी और सीएचसी का नेटवर्क बनाने का काम भी हमारी सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन उपज की प्रोसेसिंग के लिए कोऑपरेटिव आधार पर यूनिट्स लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर के सातों जिले सभी आदिवासी जिलों में सबसे अधिक दूध उत्पादन कर डेयरी के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने वाले जिले बनेंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर में नए उद्योग, उच्च शिक्षा की व्यवस्था, भारत में सबसे अच्छा स्पोर्ट्स संकुल और अत्याधुनिक अस्पताल की व्यवस्था भी हम करेंगे। श्री शाह ने कहा कि कुपोषण के लिए भी यहां विशेष स्कीम चलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन्होंने आत्मसमर्पण किया है और जो नक्सलवाद के कारण घायल हुए हैं, उनके लिए एक बहुत आकर्षक पुनर्वसन योजना भी हम लाएंगे। गृह मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि नक्सलवाद समाप्त हो क्योंकि नक्सलवादी इस क्षेत्र के विकास पर नाग बनकर फन फैलाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के साथ ही इस क्षेत्र में विकास की एक नई शुरुआत होगी और प्रधानमंत्री मोदी जी और श्री विष्णुदेव जी के नेतृत्व में यह सबसे विकसित क्षेत्र बनेगा।

         श्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक-2025 में सात जिलों की सात टीमें और एक टीम आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की थी। उन्होंने कहा कि जब 700 से अधिक सरेंडर्ड नक्सलियों ने इन खेलों में भाग लिया तो यह देखकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के झांसे में आकर उनका पूरा जीवन तबाह हो जाता और हथियार डालकर मुख्यधारा में आने वाले ऐसे 700 से अधिक युवा आज खेल के रास्ते पर आए हैं। श्री शाह ने दोहराया कि 31 मार्च, 2026 को यह देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने हिंसा में लिप्त नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि अब भी गुमराह होकर हमारे ही जो लोग हाथ में हथियार लेकर बैठे हैं, वो हथियार डाल दें, पुनर्वसन नीति का फायदा उठाएं, अपने और अपने परिवार के कल्याण के बारे में सोचें और विकसित बस्तर के संकल्प के साथ जुड़ जाएं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से किसी का भला नहीं होता, न हथियार उठाने वाले लोगों का, न आदिवासियों और न सुरक्षाबलों का भला होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ शांति ही विकास का रास्ता प्रशस्त कर सकती है।

         केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण कर चुके 700 नक्सलियों ने इन खेलों में खिलाड़ी के रूप में सामने आकर पूरे देश के लिए बहुत बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने भय की जगह आशा चुनी, विभाजन की जगह एकता का रास्ता चुना और विनाश की जगह विकास का रास्ता चुना है और यही प्रधानमंत्री मोदी जी की नए भारत और विकसित बस्तर की संकल्पना है। उन्होंने कहा कि हमारे बस्तर की संस्कृति दुनियाभर में सबसे अधिक समृद्ध संस्कृति है। उन्होंने कहा कि सभी जनजातियों का खानपान, परिवेश, कला, वाद्य, नृत्य और पारंपरिक खेल सिर्फ छत्तीसगढ़ की नहीं बल्कि पूरे भारत की सबसे समृद्ध विरासत है।

       श्री अमित शाह ने कहा कि हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने आधुनिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो बनाकर यहां के पारंपरिक गीतों को सहेजने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे कई परंपरागत उत्सव और त्योहार जो नक्सलवाद के लाल आतंक के साए में समाप्त होने की कगार पर थे, उन्हें भी आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि आज जिन खिलाड़ियों ने बस्तर ओलंपिक में भाग लिया है, उनकी प्रतिभा को पहचानने के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों की एक टीम यहां आई है। श्री शाह ने कहा कि इन खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचानकर आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक खेलों में बस्तर के खिलाड़ी खेलें, वहां तक ले जाने की व्यवस्था हमारी सरकार ने की है। श्री शाह ने कहा कि पिछले वर्ष बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जबकि इस वर्ष 3 लाख 91 हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है, जो लगभग ढाई गुना की वृद्धि है और बहनों की प्रतिभागिता में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह उत्साह देखकर आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री मोदी जी ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए छत्तीसगढ़ को चुना है।

       केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर अब बदल रहा है और बस्तर अब भय नहीं भविष्य का पर्याय बन चुका है, जहां गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, वहां आज स्कूल की घंटियां बज रही हैं। जहां सड़क बनाना एक सपना था, वहां आज रेलवे ट्रैक और राजमार्ग बिछाए जा रहे हैं, जहां लाल सलाम के नारे लगते थे, वहां आज भारत माता की जय के नारे लगते हैं। उन्होंने कहा कि हम सब विकसित बस्तर के लिए कृत संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने मुठभेड़ों में नक्सलियों को मारने का लक्ष्य नही रखा था, क्योंकि 2000 से अधिक नक्सली युवाओं ने सरेंडर भी किया है। उन्होंने कहा कि हमारे आदिवासी समाज के प्रमुखों ने इसमें बहुत बड़ा योगदान दिया है, उनके मार्गदर्शन ने नक्सली युवाओं को ढांढस भी बंधाया है और हिम्मत भी दी है। गृह मंत्री ने समाज के प्रमुखों और समाजसेवकों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग आज भी हथियार लेकर घूम रहे हैं, वे उन्हें समझाकर समाज की मुख्यधारा वापिस में लाने का काम करें।

           मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर ओलम्पिक समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य समृद्ध राज्य है, लेकिन माओवाद समस्या शुरू से ही राज्य के विकास में बाधक रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और गृहमंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ संकल्प से इसके अंत की डेट लाइन तय की है। गृह मंत्री द्वारा नियद नेलानार योजना के 05 किलोमीटर के दायरे को 10 किलोमीटर तक विस्तार किया गया है, जिसके माध्यम से गांवों में बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही है। माओवाद के कारण बंद स्कूलें अब खुल रहे हैं। सड़कों का जाल बिछाकर अंदरूनी इलाकों को आवागमन सुविधा से जोड़ा जा रहा है। साथ ही इन ईलाके के लोगों को जनहितकारी योजनाओं से सेचुरेशन किया जा रहा है। इन सभी सकारात्मक प्रयासों के फलस्वरूप अब विकास से लोगों का विश्वास बढ़ा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर ओलम्पिक में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें बधाई दी और आगामी वर्ष पुनः बेहतर प्रदर्शन करने की शुभकामनाएं दी।

       इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बस्तर देश में इतिहास रच रहा है, 100 साल के इतिहास में माओवाद समस्या की समाप्ति की तिथि वर्ष 2026 तक तय करने का साहस गृहमंत्री श्री अमित शाह ने किया है। जब 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूर्ण रूप से समाप्त होगा तो बस्तर फिर खुशहाल होगा। इस दौरान उप मुख्यमंत्री द्वय अरूण साव और विजय शर्मा ने भी बस्तर ओलम्पिक समापन समारोह को संबोधित करते हुए खिलाड़ियों को बधाई दी। वहींे विधायक जगदलपुर किरण देव ने स्वागत उदबोधन में सभी अतिथियों और खिलाड़ियों का स्वागत किया। समारोह के अन्त में सांसद बस्तर महेश कश्यप ने आभार व्यक्त किया।

       इस मौके पर केबिनट मंत्री केदार कश्यप, सांसद कांकेर भोजराज नाग, उपाध्यक्ष बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण एवं विधायक कोंडागांव सुश्री लता उसेंडी, विधायक अंतागढ़ विक्रम उसेंडी, केशकाल नीलकंठ टेकाम, चित्रकोट विनायक गोयल, कांकेर आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ बेवरेज कारपोरेशन अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर नगर निगम जगदलपुर संजय पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधि और केन्द्र शासन एवं राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा हजारों की संख्या में खेलप्रेमी गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक के समापन में भारतीय फुटबॉल के महानतम खिलाड़ी की प्रेरणा से बस्तरिया नौजवान खिलाड़ियों का बढ़ा जोश

जगदलपुर, शौर्यपथ। संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक का भव्य समापन समारोह इस बार एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। इस अवसर पर भारतीय फुटबॉल के महानतम खिलाड़ियों में से एक, बाईचुंग भूटिया ने कार्यक्रम में शिरकत की, जिनकी उपस्थिति ने पूरे माहौल में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। अपने चहेते खिलाड़ी को अपने बीच पाकर बस्तर के नौजवान खिलाड़ी अत्यधिक उत्साहित और रोमांचित हो उठे।

      बाईचुंग भूटिया, जिन्हें भारतीय फुटबॉल में सिक्किमी स्निपर के नाम से जाना जाता है, विशेष रूप से संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक के समापन अवसर पर जगदलपुर पहुँचे थे। उन्होंने केवल अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि खिलाड़ियों के बीच पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से उनका उत्साह बढ़ाया और खेल के प्रति उनके समर्पण तथा जुनून की सराहना की।

      बाईचुंग भूटिया का नाम भारतीय फुटबॉल के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। वह यूरोपियन क्लब (इंग्लैंड के बरी फुटबॉल क्लब) के लिए खेलने वाले पहले भारतीय फुटबॉलर बने थे, जिसने भारतीय प्रतिभा के लिए वैश्विक द्वार खोले। लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करने और 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का उनका रिकॉर्ड आज भी प्रेरणास्रोत है। खेल में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार और देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया है।

     एक ऐसे खिलाड़ी, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया, उनके प्रेरक शब्द और सहज उपस्थिति ने बस्तर के खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाया कि वे भी बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। स्थानीय युवा खिलाड़ियों की आँखों में एक चमक और अपने सपनों को साकार करने का एक नया जोश साफ दिखाई दिया। बस्तर ओलम्पिक का यह समापन समारोह अब बाईचुंग भूटिया की यादगार यात्रा के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा, जिसने बस्तर की खेल प्रतिभाओं को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की है।

जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर ओलम्पिक का समापन समारोह स्थानीय इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में आयोजित किया गया, जहाँ नारायणपुर के मलखम्भ खिलाड़ियों ने अपने अविश्वसनीय प्रदर्शन से पूरे स्टेडियम को स्तब्ध कर दिया। इस प्राचीन भारतीय कला और खेल के महारथियों ने अपनी अद्भुत साहस और उत्कृष्ट सन्तुलन का ऐसा नजारा पेश किया कि दर्शक अपनी सीटों से हिल नहीं पाए और दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो गए।

       खिलाड़ियों ने ऊँचे, चिकने लकड़ी के खंभे और लोहे के पतले खंभे पर जिस सहजता और नियंत्रण के साथ जोखिम भरे आसन किए, वह उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण को दर्शाता है। गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती उनकी कलाबाजियाँ और शारीरिक लचीलापन हर किसी के लिए प्रेरणादायक था। यह प्रदर्शन केवल खेल का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि देश के इस पारंपरिक खेल की गरिमा और सुंदरता का एक जीवंत प्रमाण था। नारायणपुर के इन युवा खिलाड़ियों के हैरतअंगेज प्रदर्शन ने बस्तर ओलम्पिक के समापन अवसर को न केवल यादगार बना दिया, बल्कि इस क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं की उत्कृष्टता को भी राष्ट्रीय पटल पर स्थापित कर दिया।

केंद्रीय मंत्री तोखन साहू की गरिमामयी उपस्थिति में गूंजेगी कलम के सिपाहियों की आवाज

कोंडागांव, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ प्रखर पत्रकार महासंघ' के प्रदेश अध्यक्ष विनय मिश्रा ने जानकारी दिए की आगामी 21 दिसंबर को आयोजित होने वाले विशाल 'पत्रकार महासम्मेलन' की रूपरेखा पूरी तरह से तैयार कर ली गई है। संगठन के पदाधिकारियों द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में इस महासम्मेलन के सफल क्रियान्वयन के लिए अंतिम मुहर लगा दी गई है, जिसके बाद से तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है।

 

लखीराम ऑडिटोरियम में होगा भव्य समागम

प्रदेश महासचिव पंकज खंडेलवाल ने बताया है की महासम्मेलन के लिए बिलासपुर के प्रतिष्ठित लखीराम ऑडिटोरियम का चयन किया गया है। 21 दिसंबर को यह ऑडिटोरियम प्रदेश भर से जुटने वाले पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और समाज के प्रबुद्ध जनों से खचाखच भरा रहेगा। कार्यक्रम की भव्यता को देखते हुए तैयारियों को युद्ध स्तर पर अंजाम दिया जा रहा है। मंच सज्जा से लेकर अतिथियों  के स्वागत और भोजन तक की व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है, ताकि कार्यक्रम में शामिल होने वाले किसी भी पत्रकार साथी को असुविधा का सामना न करना पड़े।

 

केंद्रीय मंत्री तोखन साहू होंगे मुख्य अतिथि

प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष उमाकांत मिश्रा के द्वारा बताया गया कि इस महासम्मेलन की गरिमा बढ़ाने के लिए भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनकी स्वीकृति प्राप्त होने के बाद संगठन में उत्साह का माहौल है। केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति न केवल इस आयोजन को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की भूमिका को सशक्त बनाने के लिए शासन और प्रशासन भी गंभीर है। उम्मीद की जा रही है कि श्री तोखन साहू पत्रकारों के हितों, उनकी सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं पर अपने महत्वपूर्ण विचार रखेंगे और संगठन का मार्गदर्शन करेंगे।

 

पत्रकारिता के सरोकार और भविष्य पर मंथन

छ.ग. प्रखर पत्रकार महासंघ' के प्रदेश कोषाध्यक्ष  अध्यक्ष राजेंद्र कश्यप ने कहा यह आयोजन केवल एक मिलन समारोह नहीं, बल्कि पत्रकारिता के गिरते स्तर को संभालने और पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक वैचारिक महाकुंभ होगा। महासम्मेलन के दौरान पत्रकार सुरक्षा कानून, फील्ड रिपोर्टिंग में आने वाली चुनौतियां और डिजिटल युग में मीडिया की भूमिका जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। संगठन का उद्देश्य प्रदेश के सुदूर वनांचलों से लेकर शहरों तक काम करने वाले पत्रकारों को एक मंच पर लाना है, ताकि वे अपनी आवाज बुलंदी से उठा सकें।

 

संपन्न हुई रूपरेखा बैठक

जिला अध्यक्ष कमल दुसेजा ने बताया की हाल ही में संपन्न हुई संगठन की उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश भर के जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में कार्यक्रम की मिनट-टू-मिनट रूपरेखा तय की गई। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि 21 दिसंबर का यह आयोजन छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

 

आयोजन में शामिल होने की अपील

संघ के जिला उपाध्यक्ष एवं जिला महासचिव गौतम बाल बोंदरे  और कोर कमेटी ने छत्तीसगढ़ के समस्त पत्रकार साथियों, छायाकारों और मीडिया कर्मियों से अपील की है कि वे 21 दिसंबर को बिलासपुर के लखीराम ऑडिटोरियम में भारी संख्या में पहुंचकर अपनी एकता का परिचय दें। यह आयोजन संगठन की शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ आपसी भाईचारे को मजबूत करने का एक स्वर्णिम अवसर है।

कार्यक्रम में उपस्थित थे प्रदेश अध्यक्ष विनय मिश्रा प्रदेश महासचिव पंकज खंडेलवाल प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष उमाकांत मिश्रा प्रदेश कोषाध्यक्ष राजेंद्र कश्यप प्रदेश सचिव सुधीर तिवारी प्रदेश सचिव अजय द्विवेदी प्रदेश सचिव उमा साहू जिला अध्यक्ष कमल दुसेजा जिला उपाध्यक्ष भूषण प्रसाद श्रीवास जिला महासचिव गौतम बाल बोदंरे जिला सचिव उमाशंकर शुक्ला मीडिया प्रभारी यू मुरली राव बिल्हा ब्लॉक अध्यक्ष रूपचंद अग्रवाल जिला सदस्य पवन वर्मा रमेश यादव रमेश गोयल संजय ठाकुर जितेन्द्र पोर्तें रंजीत खनूजा दुर्गेश मरावी दिव्यांग सोनी मोहन मदवानी अजय साहू अनिल यादव अरविन्द परिहार रोहिणी अग्रवाल गीता सोंचे पुष्पा साहू लता गुप्ता रेशमा लहरे आदि उपस्थित थे।

शौर्यपथ विशेष नगर पालिक निगम क्षेत्र में कहां क्या गतिविधियां संचालित हो रही हैं, नागरिक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति क्या है, स्वच्छता, वैधानिक बाजार, स्ट्रीट वेंडर्स की सूची, उनके पुनर्वास…

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर में सालों तक सड़कें तब टूटती थीं जब नक्सली IED फोड़ते थे। पुल-पुलिया उड़ जाते थे, रास्ते गायब हो जाते थे, और लोग समझते थे यह यहां की मजबूरी है, हालात हैं। लेकिन आज दिल को जो चीर देने वाली तस्वीर सामने है, वह किसी विस्फोट की नहीं… यह भ्रष्टाचार के फटने की तस्वीर है। और यही डर भी है कि कहीं यह बस्तर में आने वाले समय की “नई सामान्य घटना” न बन जाए।

तोकापाल ब्लॉक की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना वाली Nh -16 KM 476.60 से पटेलपारा लम्बाई 5.20 किलोमीटर लगभग 72 लाख रुपए की सड़क, जो गांव की एकमात्र जीवन-रेखा थी, आज मौत के गड्ढे में बदल चुकी है। जहां कभी रास्ता था, वहां अब सड़क हवा में झूलती और नीचे मिट्टी पूरी तरह धंसी हुई दिखती है। गांव वाले रोज़ इसी टूटे हुए खड्डे के किनारे से गुजरने को मजबूर हैं। कई बार बड़ा हादसा टल चुका है, लेकिन जिम्मेदारों की तरफ से अब तक ना चेतावनी बोर्ड, ना मरम्मत, ना निरीक्षण, सिर्फ खामोशी।

 

यह हाल देखकर यही लगता है—

यहां डामर नहीं बहा… जिम्मेदारी बह गई।

यहां मिट्टी नहीं धंसी… ईमानदारी धंस गई।

यहां सड़क नहीं टूटी… सिस्टम की आत्मा टूट गई।

 

और सबसे ज्यादा चुभने वाली बात यह कि

जनप्रतिनिधि-विशेषकर विधायक साहब—इस खाई के सामने भी खामोश बैठे हैं। मंचों से विकास की गूंज, पोस्टरों में चमकते वादे, फोटोशूट में मुस्कान… पर इस सड़क पर विकास का चेहरा घावों से भरा दिखाई देता है।

 

विधायक क्षेत्र के इस हालत पर लोगों ने यह भी कहा कि

“अगर यह सड़क विधायक के घर तक जाती, तो क्या इतने दिन चुप्पी रहती?” यह सवाल किसी की भावना नहीं, बल्कि असल दर्द है।

विभागीय अधिकारी और कर्मचारी भी जनता के निशाने पर हैं।

जिन्हें निर्माण की गुणवत्ता देखनी थी, निरीक्षण करना था, उसी सड़क की हालत आज उनके हस्ताक्षरों और स्वीकृति पर सबसे भीषण सवाल खड़ा कर रही है।

गांव में चर्चा साफ-साफ है—

“सड़क नहीं टूटी… अधिकारियों की नीयत टूटी है।” 72 लाख की सड़क पहली बरसात भी नहीं झेल पाई।अगर यह भ्रष्टाचार नहीं, तो फिर क्या है? अगर यह लापरवाही नहीं, तो फिर किसे कहेंगे? और कार्रवाई के इंतजार में जनता पूछ रही है—क्या किसी की मौत का इंतज़ार किया जा रहा है, साहब?

ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच, घटिया निर्माण की जिम्मेदारी, और ठेकेदार से लेकर फाइल पास करने वाले अधिकारी तक हर स्तर पर कार्रवाई की जाए। क्योंकि जनता का सब्र अब अंतिम सीमा पर है, और गांव की आवाज़ पहले से कहीं ज्यादा तीखी— “सड़क कट गई तो क्या हुआ… अब जिम्मेदारों की कुर्सी कटनी चाहिए, साहब!”

 

छत्तीसगढ़ ग्राम सड़क विकास अभिकरण विभाग के SDO धनंजय देवांगन ने इस मामले पर कुछ भी कहने से साफ मना कर दिया।

गरीबों पर बुलडोजर, अमीरों पर खामोशी… क्या रिमोट कंट्रोल से चल रहा? दुर्ग। शौर्यपथ। दुर्ग नगर पालिक निगम की शहरी सरकार इन दिनों अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर जनता…

नवा रायपुर में 23 से 25 जनवरी तक होगा साहित्य उत्सव
रायपुर (शौर्यपथ) अगले वर्ष 23 जनवरी से नवा रायपुर में होने वाले रायपुर साहित्य उत्सव के लिए राज्य शासन ने सलाहकार समिति का गठन कर दिया है। इस समिति में नौ सदस्य बनाए गए हैं। समिति में सदस्य के रूप में श्री अनंत विजय, डॉ. सुशील त्रिवेदी, श्री सतीश कुमार पंडा, श्रीमती जयमति कश्यप, श्री संजीव कुमार सिन्हा, श्री शंशाक शर्मा, श्री पंकज कुमार झा और श्री विवेक आचार्य को भी शामिल किया गया है। समिति रायपुर साहित्य उत्सव के सफल और प्रभावी आयोजन के लिए विशेष सलाह देगी। इसके साथ ही साहित्यकारों के चयन और आयोजन के विषयों पर भी आयोजकों को सहयोग करेगी। जनसंपर्क संचालनालय के आयुक्त डॉ. रवि मित्तल समिति के सदस्य सचिव होंगे।

उल्लेखनीय है कि नए वर्ष की शुरुआत के साथ आगामी महीने रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन नवा रायपुर में 23 से 25 जनवरी तक होगा, जिसमें देश भर से 100 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल होंगे। राज्य स्थापना के रजत वर्ष पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा इस आयोजन की परिकल्पना की गई थी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संकल्पना पर आधारित इस आयोजन की व्यापक कार्ययोजना मात्र दो माह में तैयार की गई है। यह तीन दिवसीय महोत्सव 23, 24 एवं 25 जनवरी 2026 को जनजातीय संग्रहालय के समीप आयोजित होगा। इस उत्सव में कुल 11 सत्र शामिल होंगे। इनमें 5 समानांतर सत्र, 4 सामूहिक सत्र, और 3 संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों के बीच सीधा संवाद और विचार-विमर्श होगा।

   दुर्ग / शौर्यपथ / भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) दुर्ग विधानसभा में संगठनात्मक शिथिलता और लगातार मिल रही अनुशासनहीनता की शिकायतों के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए संपूर्ण पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष वरुण केवळतानी द्वारा जारी आदेश ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस संगठन अब ढिलाई, निष्क्रियता और निर्देशों की अनदेखी को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

गंभीर कार्यक्रमों में अनुपस्थिति बनी कार्रवाई का मुख्य आधार

आदेश में उल्लेखित है कि जिला कांग्रेस के महत्वपूर्ण एवं गरिमामय कार्यक्रमों में वरिष्ठ नेतृत्व स्वयं उपस्थित था, किंतु NSUI दुर्ग विधानसभा के पदाधिकारियों की अनुपस्थिति लगातार देखी गई। कई बार सूचित किए जाने के बावजूद समिति के एक भी पदाधिकारी की उपस्थिति दर्ज नहीं हुई।
संगठन ने इसे “कर्तव्य के प्रति उदासीनता और अनुशासनहीनता” बताते हुए कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया।

नोटिस का जवाब न देना बना निर्णायक कारण

दिनांक 06 दिसंबर 2025 को स्पष्टीकरण हेतु नोटिस जारी किया गया था, परंतु किसी भी पदाधिकारी द्वारा निर्धारित समय सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। NSUI जैसे अनुशासन-आधारित संगठन में इसे गंभीर त्रुटि माना गया। यही कारण रहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने सामूहिक रूप से सभी पदाधिकारियों के पद समाप्त करने का फैसला सुना दिया।

राजनीतिक रूप से बड़ा संकेत—युवा संगठन में साफ-सफाई की शुरुआत?

यह फैसला न केवल संगठनात्मक अनुशासन का संदेश देता है, बल्कि आने वाले समय में कांग्रेस द्वारा अपने युवा मोर्चे को नए सिरे से सक्रिय, जिम्मेदार और जमीनी रूप से मजबूत करने की स्पष्ट राजनीतिक रणनीति भी दिखाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र कांग्रेस संगठन युवा नेतृत्व में ऊर्जा और जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहता है, ताकि जमीनी स्तर पर संगठन मजबूती से खड़ा हो सके।

किसे भेजा गया संदेश?

सामूहिक पदमुक्ति का यह फैसला साफ संकेत देता है कि संगठन में केवल पद धारण करने से नहीं, सक्रियता और समर्पण से पहचान बनेगी। कार्यकर्ताओं को वरिष्ठ नेतृत्व के निर्देशों और कार्यक्रमों को प्राथमिकता देनी होगी। कांग्रेस अब निष्क्रिय इकाइयों और गैर-जिम्मेदार पदाधिकारियों पर निगरानी और कार्रवाई दोनों करेगी।
आगे क्या?
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि NSUI दुर्ग विधानसभा की नई संरचना जल्द घोषित की जाएगी।नई टीम में सक्रिय, जमीनी, प्रतिबद्ध और संगठनात्मक गतिविधियों में निरंतर भागीदारी करने वाले युवाओं को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
NSUI दुर्ग विधानसभा में की गई यह कड़ी कार्रवाई केवल आंतरिक अनुशासन का मामला नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की नई नीति का संकेत भी है—“अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस, और सक्रियता ही संगठन में सम्मान का आधार।”

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