January 29, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

  रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज पाटिल को श्रद्धांजलि दी गई। विगत 12 दिसम्बर को लातूर में उनका निधन हो गया था। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, मंत्रीगणों और सदस्यों ने सदन में मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने दिवंगत श्री शिवराज पाटिल के लंबे राजनीतिक जीवन को याद करते हुए कहा कि स्वर्गीय श्री पाटिल लगातार सात बार लोकसभा सदस्य रहे। उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण मंत्रालयों में मंत्री का दायित्व संभाला। संसदीय कार्यवाही के टेलीविजन प्रसारण में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केन्द्रीय मंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि स्वर्गीय श्री पाटिल ने डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्रीय गृहमंत्री का अहम दायित्व संभाला था। एक ऐसे वक्त में जब दुश्मन लगातार देश के विरुद्ध षड़यंत्र कर रहे थे, उन्होंने गृहमंत्री का दायित्व बड़ी ही संवेदनशीलता से निभाया। लातूर का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वर्गीय श्री पाटिल का लंबा सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन रहा है। उन्होंने लातूर को भूकंप की त्रासदी से निपटने में बहुत मदद की।

नेता प्रतिपक्ष डा. चरणदास महंत ने श्री शिवराज पाटिल के सेवाभावी राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि उनका जाना हम सबके लिए बहुत दुखद है। वे विधि और संविधान के अच्छे जानकार थे।

  रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का आवास एवं पर्यावरण विभाग बीते दो वर्षों में वित्तीय अनुशासन, किफायती आवास, निवेश प्रोत्साहन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर चुका है। यह बात आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेसवार्ता में कही।
मंत्री चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को 735 करोड़ रुपये का ऋण चुकाकर पूरी तरह ऋणमुक्त किया गया। अविक्रित संपत्तियों के निपटान हेतु लागू की गई ओटीएस-2 योजना के अंतर्गत 9 माह में 1251 संपत्तियों का विक्रय कर 190 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। भविष्य में अविक्रित स्टॉक से बचने के लिए मांग आधारित निर्माण नीति लागू की गई है, जिसमें न्यूनतम पंजीयन के बाद ही निर्माण प्रारंभ होगा।
नवा रायपुर अटल नगर देश का पहला ऋणमुक्त ग्रीनफील्ड शहर बन गया है, जहां 1,345 करोड़ रुपये का ऋण चुकाकर 5,030 करोड़ मूल्य की भूमि एवं संपत्तियां गिरवी मुक्त की गईं। यहां 132 एकड़ में टेक्सटाइल पार्क, सेमीकंडक्टर व आईटी सेक्टर में 3,800 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावित हैं, जिससे 30,000 से अधिक रोजगार सृजन की संभावना है।
नवा रायपुर को टेक-हब, कॉन्फ्रेंस कैपिटल, वेडिंग डेस्टिनेशन और मेडिकल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। 400 करोड़ की इनलैंड मरीना, 230 करोड़ की साइंस सिटी, 120 करोड़ का आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर और मेडी सिटी जैसी परियोजनाएं शहर को नई पहचान देंगी।
नगर एवं ग्राम निवेश विभाग द्वारा किफायती जन आवास नियम-2025 लागू कर कृषि भूमि पर भी किफायती आवास की अनुमति दी गई है। औद्योगिक नियमों में संशोधन कर निर्माण को सरल और व्यावहारिक बनाया गया है। वहीं, पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा रियल टाइम उत्सर्जन निगरानी प्रणाली लागू कर पर्यावरणीय अनुशासन को सशक्त किया गया है।
मंत्री चौधरी ने कहा कि आवास एवं पर्यावरण विभाग की ये उपलब्धियां छत्तीसगढ़ को वित्तीय रूप से सशक्त, निवेश-अनुकूल, पर्यावरण-संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित राज्य के रूप में स्थापित करती हैं। नवा रायपुर अटल नगर विकसित छत्तीसगढ़ की सोच का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है।

   रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के प्रतिनिधियों ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया ट्रेडर्स एवं स्वदेशी जागरण मंच के संयुक्त तत्वावधान में देशभर में संचालित स्वदेशी संकल्प यात्रा के अंतर्गत 20 दिसंबर को दुर्ग में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने CAIT के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए आमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया और स्वदेशी विचारधारा को मजबूती देने वाले ऐसे आयोजनों की सराहना की।

उल्लेखनीय है कि स्वदेशी संकल्प यात्रा दुर्ग शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नगर भ्रमण करेगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सशक्त स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल, स्थानीय व्यापार को सशक्त बनाना तथा स्वदेशी उद्यमिता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है।

इस अवसर पर कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया ट्रेडर्स के अध्यक्ष श्री प्रकाश सांखला, यात्रा संयोजक श्री संजय चौबे सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

   रायपुर / शौर्यपथ /  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में विधायक श्री सम्पत अग्रवाल के नेतृत्व में सतनाम पंथ के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को 28 दिसम्बर को परम् पूज्य गुरुघासी दास बाबा की जयंती महोत्सव के अवसर पर महासमुन्द जिले के ग्राम साजापाली में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सतनाम पंथ के पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए आमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया तथा पूज्य बाबा गुरुघासी दास के सामाजिक और आध्यात्मिक संदेशों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

इस अवसर पर श्री लखनमुनि महाराज, श्री अभय घृतलहरे सहित सतनाम पंथ के अन्य प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

  रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विजय दिवस (16 दिसंबर) के अवसर पर राष्ट्र के वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विजय दिवस भारतीय सेना के शौर्य, साहस और अदम्य पराक्रम का गौरवपूर्ण प्रतीक है, जो देशवासियों के हृदय में गर्व और कृतज्ञता का भाव जाग्रत करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने 1971 के ऐतिहासिक युद्ध का स्मरण करते हुए कहा कि हमारे वीर जवानों ने असाधारण साहस, त्याग और बलिदान का परिचय देकर देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा की। उनके पराक्रम से न केवल भारत की सैन्य शक्ति विश्व मंच पर स्थापित हुई, बल्कि मानवीय मूल्यों और राष्ट्रधर्म की मिसाल भी प्रस्तुत हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की अमर प्रेरणा है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे देशभक्ति, अनुशासन और एकता के मूल्यों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाएं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शहीदों के आदर्शों पर चलना, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना और देश सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना ही विजय दिवस पर उन्हें सच्ची और स्थायी श्रद्धांजलि है।

 

180 देशों के प्रतिनिधियों ने किया छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का अभिवादन

 

रायपुर/ शौर्यपथ / 
छत्तीसगढ राज्य के बिलासपुर जिले की सांस्कृतिक संस्था ‘लोक श्रृंगार भारती’ के गेड़ी लोक नृत्य दल द्वारा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) व संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के आमंत्रण पर नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला प्रांगण में गेड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। 7 से 13 दिसम्बर तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समारोह में 180 देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रहीं। समारोह में बिलासपुर के गेड़ी नर्तक दल ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति को काफी सराहा गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस गेडी नर्तक दल को बधाई और शुभकामनाएं दीं है l

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत प्रभावित हुए। उन्होंने “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” का नारा दिया

समारोह का ऐतिहासिक क्षण तब आया जब भारत के महापर्व दीपावली को यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान की गई। इस उपलब्धि में छत्तीसगढ़ के गेड़ी लोक नृत्य दल की प्रस्तुति को विशेष सराहना मिली गेड़ी नृत्य की भावपूर्ण और साहसिक प्रस्तुति से केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत प्रभावित हुए। उन्होंने “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” कहकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

गेड़ी नृत्य दल ने अपने रोमांचक प्रदर्शन से अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को रोमांचित कर दिया

मुख्य गायक एवं नृत्य निर्देशक अनिल गढ़ेवाल के कुशल नेतृत्व में गेड़ी नृत्य दल ने अपने सशक्त, ऊर्जावान एवं रोमांचक प्रदर्शन से अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, विभिन्न राज्यों के कलाकारों सहित 180 देशों के डेलिगेट्स उपस्थित रहे।

यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद एन. एनानी सहित 180 देशों के प्रतिनिधियों ने गेड़ी नृत्य दल के साथ स्मृति चित्र लिए

मुख्य गायक अनिल गढ़ेवाल द्वारा प्रस्तुत “काट ले हरियर बांसे” गीत ने विदेशी प्रतिनिधियों के मन में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रति गहरी जिज्ञासा उत्पन्न की। वहीं मुख्य मांदल वादक मोहन डोंगरे द्वारा एक ही स्थान पर घूमते हुए मांदल वादन किया। हारमोनियम वादक सौखी लाल कोसले एवं बांसुरी वादक महेश नवरंग की स्वर लहरियों पर विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधि झूम उठे। गेड़ी नर्तकों प्रभात बंजारे, सूरज खांडे, शुभम भार्गव, लक्ष्मी नारायण माण्डले, फूलचंद ओगरे एवं मनोज माण्डले ने साहसिक करतबों से दर्शकों को रोमांचित किया। विशेष रूप से तब, जब एक गेड़ी पर संतुलन बनाते हुए कलाकारों ने मानवीय संरचनाएं बनाईं, पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा।

गेड़ी नृत्य दल ने छत्तीसगढ़ राज्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान दिलाई

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा, कौड़ियों व चीनी मिट्टी की मालाएं, पटसन वस्त्र, सिकबंध एवं मयूर पंख धारण कर प्रस्तुत भाव नृत्य ने प्रस्तुति को और भी आकर्षक बना दिया। यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद एन. एनानी सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने गेड़ी नृत्य दल के साथ स्मृति चित्र लिया व छत्तीसगढ़ राज्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान दिलाने के लिए शुभकामनाएं दी।

ई-स्कूटी बनी समृद्धि की पहचान

रायपुर / शौर्यपथ / 
छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियाँ आज गांवों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की पारदर्शी व्यवस्था ने किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी धमतरी जिले के ग्राम बोड़रा के किसान श्री हंसराज साहू की है। जिन्होंने सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आधुनिक सुविधाओं को भी अपनाया।

श्री हंसराज साहू बताते हैं कि उन्होंने पिछले खरीफ सत्र में संबलपुर सहकारी समिति में समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय किया। धान बिक्री से प्राप्त राशि से उन्होंने एक ई-स्कूटी खरीदी, जो आज उनके लिए सुविधा, समय की बचत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई है। साँय-साँय दौड़ती ई-स्कूटी से अब उन्हें धमतरी शहर, खेतों, रिश्तेदारों के घर और दैनिक कार्यों के लिए सुगम आवागमन की सुविधा मिल रही है। इससे न केवल ईंधन खर्च में कमी आई है, बल्कि समय की भी उल्लेखनीय बचत हो रही है।

श्री साहू के पास कुल 2 एकड़ 25 डिस्मिल कृषि भूमि है, जिसमें वे पारंपरिक अनुभव और आधुनिक कृषि समझ के साथ धान की खेती करते हैं। इस वर्ष उन्होंने समर्थन मूल्य पर कुल 46 क्विंटल 40 किलोग्राम धान का विक्रय किया है। समय पर भुगतान और स्पष्ट प्रक्रिया से वे बेहद संतुष्ट हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष धान विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग वे अपने पुत्र के विवाह जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक कार्य में करेंगे, जिससे पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।

श्री हंसराज साहू ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “तुहर टोकन” मोबाइल ऐप ने धान बेचने की प्रक्रिया को अत्यंत सरल, पारदर्शी और किसान-अनुकूल बना दिया है। पंजीयन से लेकर विक्रय तक अब किसानों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी नहीं होती।

किसान हंसराज साहू की यह सफलता कथा इस बात का सशक्त प्रमाण है कि सरकार की दूरदर्शी नीतियाँ और डिजिटल नवाचार जब जमीन पर प्रभावी रूप से लागू होते हैं, तो किसान सशक्त बनते हैं और उनका जीवन स्तर निरंतर ऊँचाइयों की ओर बढ़ता है। यह कहानी प्रदेश के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा है कि वे सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ लेकर समृद्धि की राह पर आगे बढ़ें।

जिला स्तरीय युवा उत्सव 2025 का हुआ आयोजन
14 सांस्कृतिक विधा एवं 10 खेलों में प्रतिभागी हुए शामिल
बालोद / शौर्यपथ / जिला प्रशासन बालोद तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आज जिला स्तरीय युवा उत्सव का आयोजन नगर पालिका बालोद के परिसर में किया गया। युवा उत्सव में जिले भर से पहुँचे युवाओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं विभिन्न खेल विधाओं में अपना हुनर प्रदर्शित किया। कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर नगर पालिका बालोद की अध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा चैधरी ने छत्तीसगढ़ महतारी, मां सरस्वती और स्वामी विवेकानंद जी की छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए जिला स्तरीय युवा उत्सव के आयोजन की शुभकामनाएं दी तथा प्रतिभागी युवाओं को अपनी बधाई प्रेषित की। कार्यक्रम में लोक नृत्य विधा, पंथी नृत्य, राउत नाचा, सुआ नृत्य, करमा नृत्य, लोक गीत, वाद-विवाद, कहानी लेखन, चित्रकला, कविता लेखन, नवाचार, एकांकी, पांरपरिक वेशभूषा, राॅकबैंड विधा का आयोजन हुआ। जिसमें कुल 91 युवाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसी प्रकार स्व. सरयु प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम में महिला खेलकूद प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। जिसमें एथेलेटिक्स खो-खो, हाॅकी, बैडमिण्टन, वाॅलीबाल, कुश्ती, बास्केटबाल, फुटबाॅल, वेटलिफ्ंिटग, रस्साकस्सी शामिल है। इसमें कुल 88 युवाओं ने शामिल होकर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। जिला स्तरीय युवा उत्सव के समापन अवसर पर विजेता प्रतिभागियों को जिला पंचायत के उपाध्यक्ष श्री तोमन साहू ने प्रशस्ति एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर पुरस्कृत किया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक, डिप्टी कलेक्टर श्रीमती प्राची ठाकुर सहित निर्णायकगण और बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

तोकापाल ब्लॉक की शालाओं में “पोषण” नहीं, सिर्फ पेट भरने का औपचारिकता?

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। विकासखंड तोकापाल अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला बुरूंगपाल, पटेलपारा में बच्चों को मिलने वाले मध्यान भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। शासन द्वारा निर्धारित मेनू चार्ट के अनुरूप भोजन नहीं दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे योजना के उद्देश्य पर ही प्रश्नचिह्न लग रहा है।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, बच्चों की थाली में परोसा जा रहा भोजन न तो स्वाद में संतोषजनक है और न ही पोषण की कसौटी पर खरा उतरता दिखाई देता है। भोजन की स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि यह समझना मुश्किल हो जाता है कि परोसी गई सब्ज़ी है या पानी में उबली सब्ज़ी की परछाईं।

स्वाद की बात छोड़ भी दी जाए, तो पोषण का अभाव साफ नजर आता है। बच्चों और स्थानीय लोगों के अनुसार सब्ज़ियाँ अक्सर अधपकी होती हैं, मेनू चार्ट के अनुसार अचार-पापड़ जैसे निर्धारित घटक नहीं दिए जाते और भोजन लगभग प्रतिदिन एक जैसा, फीका व बेस्वाद रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार का भोजन बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है।

 

निगरानी व्यवस्था पर उठते सवाल

इस पूरे मामले में निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मध्यान भोजन योजना की नियमित जांच और निरीक्षण की जिम्मेदारी प्रशासनिक स्तर पर तय है, लेकिन बुरूंगपाल की स्थिति यह संकेत देती है कि जमीनी निरीक्षण प्रभावी रूप से नहीं हो पा रहे हैं।

इसी क्रम में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), तोकापाल की भूमिका पर भी प्रश्न उठ रहे हैं। यदि निरीक्षण नियमित रूप से हो रहे होते, तो भोजन की गुणवत्ता को लेकर उठ रही ये शिकायतें सामने नहीं आतीं—या समय रहते सुधारी जा सकती थीं।

 

योजना का उद्देश्य और ज़मीनी हकीकत

मध्यान भोजन योजना का उद्देश्य केवल बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि उन्हें पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना है। लेकिन बुरूंगपाल की स्थिति यह सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं यह योजना सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित तो नहीं रह गई है। सरकार इस योजना पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, इसके बावजूद यदि बच्चों की थाली में पोषण नहीं पहुँच पा रहा है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।

इस संबंध में ब्लॉक तोकापाल खण्ड शिक्षा अधिकारी पुनम सलाम से फ़ोन मे संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

अब यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पूरे विकासखंड में मध्यान भोजन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि बुरूंगपाल की यह स्थिति है, तो अन्य शालाओं में भोजन की गुणवत्ता कैसी है—यह भी जांच का विषय बनता जा रहा है।

दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग जिला पंचायत के सामने स्थित चौहान चाय केंद्र नामक एक अवैध गुमटी अब भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गढ़ कलेवा योजना के अंतर्गत विधिवत स्थान आबंटन और भारी अनुदान दिए जाने के बावजूद, ठीक उसके सामने यह अवैध गुमटी बेखौफ खड़ी है और उसी से जिला पंचायत में हजारों रुपये के फर्जी बिल पास कराए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार इस मामले की शिकायत जन दर्शन में होने के बाद दस्तावेजों की जांच जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रूपेश पांडे को सौंपी गई। यद्यपि उनका पद जिला पंचायत अधिकारियों से कनिष्ठ होने के कारण वे प्रत्यक्ष कार्रवाई के अधिकार में नहीं हैं, फिर भी उन्होंने संपूर्ण जांच प्रतिवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत कर दिया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनपद पंचायत कार्यालय के ठीक सामने खड़ी अवैध गुमटी पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और भी हैरानी की बात यह है कि इस अवैध ढांचे पर बिजली कनेक्शन तक उपलब्ध है, जो व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है।

विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि नगर निगम के अतिक्रमण विभाग द्वारा गुमटी हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन किसी उच्च अधिकारी के कथित हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई रोक दी गई। इस दावे की सच्चाई जांच का विषय है, किंतु यह निर्विवाद तथ्य है कि एक अवैध गुमटी से फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी धन का दुरुपयोग उजागर हो चुका है।

अब प्रश्न यह है कि पूर्व में ऐसे कितने फर्जी बिल जिला पंचायत में पास किए गए होंगे? अवैध गुमटी संचालक और इससे जुड़े अधिकारियों पर जिला प्रशासन अब तक मौन क्यों है? क्या प्रभावशाली संरक्षण के चलते कार्रवाई से बचा जा रहा है?

यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि व्यवस्था में गहरी सेंध का संकेत देता है, जिसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच अब जनहित की अनिवार्य मांग बन चुकी है।

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