September 23, 2026
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    PANKAJ CHANDRAKAR

    PANKAJ CHANDRAKAR

    उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए महिला-केंद्रित घोषणाओं की संख्या बढ़ गई है. कांग्रेस, जो पिछले कई चुनावों में राज्य में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रही है, ने लिंग समानता का मुद्दा उठाते हुए चुनावों में महिलाओं को 40 फीसदी टिकट देने का ऐलान किया है.

    नई दिल्ली /शौर्यपथ/

      कांग्रेस  महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा  की महिला-केंद्रित "लड़की हूं, लड़ सकती हूं" अभियान का उत्तर प्रदेश में एक बड़ा असर देखने को मिला है. राज्य सरकार के आदेश की अवहेलना करते हुए आज हजारों महिलाओं ने झांसी और लखनऊ में आयोजित कांग्रेस की मैराथन दौड़ में भाग लिया. इस मैराथन में युवतियों की लंबी कतार सड़कों पर दौड़ती दिखी.

    कांग्रेस द्वारा इस मैराथन दौड़ का वीडियो ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है. वीडियो में दिख रहा है कि लखनऊ और झांसी में मैराथन दौड़ में बड़ी भीड़ उमड़ी है, जबकि जिला प्रशासन ने ओमिक्रॉन स्ट्रेन के बढ़ते मामलों का हवाला देते हुए मैराथन के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया था.

    प्रशासन के इनकार के बाद झांसी में पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया लेकिन लड़कियों ने भी घर लौटने से इनकार कर दिया और दौड़ में शरीक होकर मानीं.

    कांग्रेस द्वारा ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में एक महिला को यह कहते हुए सुना जा सकता है, "राज्य सरकार को तब कोई समस्या नहीं हुई, जब एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया गया और वहां लाखों छात्र जुटाकर लैपटॉप वितरित किए गए थे, तो फिर अब क्यों दिक्कत हो रही है?"

    कांग्रेस ने दोनों मैराथन में पहले तीन विजेताओं के लिए स्कूटी की घोषणा की है और चौथे से 25वें स्थान पर आने वालों को स्मार्टफोन देने का एलान किया गया है. अगले 100 को फिटनेस बैंड, जबकि अगली 1,000 महिलाओं को पदक दिया जाना है. पार्टी ने मैराथन प्रतिभागियों के लिए प्रवेश शुल्क नहीं लिया था.

    उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए महिला-केंद्रित घोषणाओं की संख्या बढ़ गई है. कांग्रेस, जो पिछले कई चुनावों में राज्य में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रही है, ने लिंग समानता का मुद्दा उठाते हुए चुनावों में महिलाओं को 40 फीसदी टिकट देने का ऐलान किया है. कांग्रेस इसी बहाने हाथरस में दलित युवती से हुई गैंगरेप मामले और उन्नाव मामले के बहाने बीजेपी सरकार पर निशाना साध रही है.

     

     

     

     

     

     

    स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने बताया कि 28 दिसंबर से रात 10 बजे से तड़के पांच बजे तक 10 दिन के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लागू करके ‘‘रात्रिकालीन कर्फ्यू'' लगाया जाएगा

    बेंगलुरु /शौर्यपथ/

     कर्नाटक सरकार  ने 28 दिसंबर से 10 दिन के लिए ‘‘रात्रिकालीन कर्फ्यू'' लगाने का फैसला किया है, जो रात 10 बजे से तड़के पांच बजे तक लागू रहेगा. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने रविवार को यह जानकारी दी. सरकार ने कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन के बढ़ते खतरे के बीच नववर्ष पर आयोजित होने वाले समारोहों पर भी कुछ प्रतिबंधों की घोषणा की है.

    सुधाकर ने बताया कि 28 दिसंबर से रात 10 बजे से तड़के पांच बजे तक 10 दिन के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लागू करके ‘‘रात्रिकालीन कर्फ्यू'' लगाया जाएगा. उन्होंने मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की अध्यक्षता वाली मंत्रियों, अधिकारियों और कोविड तकनीकी सलाहकार समिति की उच्च स्तरीय बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि नववर्ष पर समारोह आयोजित करने और लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध रहेगा.

     बोम्मई ने कहा, ‘‘बाहरी परिसरों पर खासकर डीजे का इस्तेमाल करने वाले उन समारोहों पर प्रतिबंध रहेगा, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना होगी.'' मंत्री ने कहा कि भोजनालयों, होटल, पब और रेस्तरां में परिसर की क्षमता के 50 प्रतिशत लोगों को ही बैठने की अनुमति होगी.

     

     

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में महाधिवक्ता-कार्यालय द्वारा प्रकाशित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय के वर्ष 2022 के कैलेंडर का विमोचन किया। इस अवसर पर महाधिवक्ता  सतीश चंद्र वर्मा भी उपस्थित थे महाधिवक्ता  वर्मा के प्रयासों से कैलेंडर प्रकाशन का यह द्वितीय वर्ष है। यह कैलेंडर सभी अधिवक्ताओं, कर्मचारियों व शासकीय विभागों के न्यायिक कार्यों हेतु काफ़ी सुविधाजनक रहा है।

     

    सजगता /शौर्यपथ/

    कई ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जो हमारे मुंह के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।

    इनके सेवन से शरीर भी सेहतमंद रहता है। आइए आज इनके बारे में जानते हैं

    मुंह के स्वास्थ्य को अधिकांश लोग उतना महत्व नहीं देते हैं जितना देना चाहिए। इसकी उपेक्षा करना मुंह की गंभीर बीमारियों के जोखिम में डाल सकता है। इसलिए कुछ ख़ास खाद्य पदार्थों को खानपान में शामिल करना सुनिश्चित करें, जो मुंह के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। हमारे मुंह में एक समय में 6 अरब से अधिक सूक्ष्मजीव होते हैं। कुछ अच्छे होते हैं और कुछ ख़राब। ये जीव मुंह में बचे हुए भोजन पर हमला करते हैं। यही प्लाक, टार्टर (दांतों के बाहर पीले या सफेद पैच के रूप में दिखते हैं), सांसों की बदबू, मसूड़े की सूजन आदि का कारण बनते हैं। ऐसे कई आहार हैं जो दांतों की समस्याओं से लड़ने में मदद करते हैं। मुंह के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपने दैनिक आहार में शामिल करने के लिए यहां आहार के कुछ विकल्प दिए गए हैं...

    मेवे/किशमिश/बैरी

    शोध कहते हैं कि ये मेवे बैक्टीरिया से लड़ते हैं जो कैविटी और मसूड़ों की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इनका सेवन दिनभर में 10-15 ग्राम कम से कम करना ही चाहिए।

    नारियल पानी/ग्रीन टी

    चाय और कॉफी दोनों ही मुंह के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माने जाते हैं। ये दांतों को दाग़दार बनाते हैं और इनेमल (दांतों का बाहरी आवरण जो दांतों को मज़बूत करता है) को क्षति पहुंचाते हैं। ग्रीन टी और नारियल पानी जैसे पेय पदार्थों को अपनाएं और दांतों के इनेमल की भी रक्षा करें। दिनभर में 200 से 500 मिली सेवन ज़रूर करें।

    डार्क चॉकलेट

    डार्क चॉकलेट एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होती है। इसे एक सुपरफूड के रूप में भी जाना जाता है और यह बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करती है जो कैविटी, प्लाक, दांतों की सड़न का कारण बनते हैं। यहां तक कि ये मसूड़ों के उपचार में भी सुधार करती है। इसे एक दिन में अधिकतम 10-15 ग्राम ही लेना चाहिए।

    अदरक

    अदरक के गुण हमारे मुंह के स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद होते हैं। ये कहना भी ग़लत नहीं होगा कि यह हमारे समग्र स्वास्थ्य के लिए ही लाभकारी है। इसका भी दिन में 0.5 ग्राम सेवन करना फ़ायदेमंद होता है।

    फल और सब्जि़यां

    फल और सब्जि़यां चबाने से दांतों से प्लाक हट सकता है और मुंह को साफ़ करने वाली लार के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा सकता है। आहार में कई रंगों के फल और सब्जि़यों को शामिल करने से निश्चित रूप से स्वस्थ मसूड़े प्राप्त करने में मदद मिलती है। दिनभर में इनका सेवन 300/500 ग्राम करना अच्छा होता है।

    डेयरी उत्पाद

    दूध बढ़ते शरीर के लिए ही नहीं, बड़ों के लिए भी फ़ायदेमंद होता है। दूध में मौजूद खनिज और प्रोटीन दांतों के लिए फ़ायदेमंद होते हैं, क्योंकि ये दांतों को मज़बूत बनाने में मदद करते हैं। पनीर, दही, दूध और अन्य डेयरी उत्पादों में भी भरपूर मात्रा में कैल्शियम, खनिज और प्रोटीन होते हैं। दिनभर में 300 मिली दूध या 100 ग्राम दही का सेवन करना चाहिए।

    ध्यान दें


    — हर छह महीने में अपना डेंटल चेकअप ज़रूर कराएं।

    — खाने के बाद कुल्ला करना सुनिश्चित करें चाहे नाश्ता किया हो या भोजन।

    — रोज़ दिन में दो बार दो-दो मिनट ब्रश करने के बाद दिन में एक बार फ्लॉसिंग करें।

    — डिहाइड्रेशन मुंह के स्वास्थ्य के लिए उतना ही बुरा है जितना कि यह शरीर के अन्य भागों के लिए बुरा है। पानी मुंह में बचे हुए खाद्य कणों को निकालने के लिए भी एक बेहतरीन माउथ क्लींज़र है। दिनभर में 2.5 लीटर पानी कम से कम पीना ही चाहिए।

     

     

     

    परवरिश /शौर्यपथ/ 

    जब बच्चे छोटे होते हैं, तो आपके इर्द-गिर्द मंडराते रहते हैं। दिल में आया हर ख़्याल आपसे बांटते हैं। आपका साथ उन्हें अच्छा लगता है, लेकिन वही बच्चे जब किशोरावस्था में क़दम रखते हैं तो सबकुछ बदल जाता है। अब वे आपसे ज़्यादा, अपने दोस्तों के साथ रहना पसंद करते हैं। अब वे आपको कुछ नहीं बताते। आप कुछ समझाने जाएं, तो वे और झल्लाते हैं, चिढ़ते हैं और आपसी दूरियां बढ़ती ही जाती हैं। उम्र के इस नाज़ुक मोड़ पर ना आप उन्हें समझ पाते हैं, ना ही वे आपको। यह ऐसी उम्र है, जहां आप उन्हें सज़ा नहीं दे सकते, डरा-धमका नहीं सकते, चूंकि ऐसा करने पर वे और बिगड़ेंगे।

     किशोरों में ग़ुस्सा, चिड़चिड़ापन, नाराज़गी और बदतमीज़ी से बात करने की आदत आम है। लेकिन इससे घबराएं नहीं। जिन बातों को लेकर आप उनसे नाराज़ हों, शांति से पहले उनके समूचे पक्ष को सुनें और फिर बताएं कि आप उनसे क्यों नाराज़ हैं।  साफ़गोई से अपनी बात रखें। उन्हें विस्तार से यह समझाने की कोशिश करें कि आप उन्हें अगर कुछ करने से रोक रहे हैं, तो इसकी वजह क्या है। इससे उन्हें क्या नुक़सान हो सकते हैं? अगर उन्हें ग़ुस्से में कुछ करने से मना करेंगे, तो वे आपकी बात क़तई नहीं मानेंगे।

     अगर आप यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उन पर अपनी नाराज़गी कैसे ज़ाहिर करें, तो सबसे पहले बातचीत ऐसे विषय से शुरू करें, जिसमें उनकी रुचि हो। जैसे, किसी खेल या फिल्म सरीखे हल्के-फुल्के विषय से बात शुरू करें। फिर धीरे-धीरे जब माहौल थोड़ा सहज होने लगे, तब अपनी बात रखें।  ठीक ढंग से अपनी बात रखें। यदि आपको उनका बर्ताव या कोई आदत ख़राब लगती है, तो उन्हें बताएं कि अमुक दिन उन्होंने ऐसा किया, जो बिल्कुल अनुचित था। जैसे, तुम बहुत बदतमीज़ हो कहने के बजाय आप कह सकते हैं – उस दिन जब तुमने इस तरह बात की, मुझे बहुत बुरा और अजीब लगा। तुम इस तरह के बच्चे नहीं हो

     तंज़ कसने या मज़ाक उड़ाने के रवैये में अपनी बात नहीं रखें। किशोरावस्था ऐसी उम्र होती है, जहां आप उन्हें बच्चे की तरह ही देखते हैं, लेकिन वे ख़ुद को वयस्क ही मानते हैं। ऐसे में आप मज़ाक उड़ाने के अंदाज़ में उनसे बात करेंगे, तो उनकी झल्लाहट और बढ़ेगी।

     पैरेंटिंग विज्ञान नहीं, कला है। इसके कोई निश्चित नियम नहीं है, बल्कि हालात को देखते हुए आपको कभी कड़ाई से, तो कभी प्यार से उन्हें समझाना होगा। अपनी नाराज़गी ज़रूर जताएं, साथ ही यह भी एहसास दिलाते रहें कि आप उन्हें भली-भांति समझते हैं।  कई मर्तबा ऐसा होता है कि कुछ मामलों में आप उनसे खुलकर अपना ग़ुस्सा या नाराज़गी नहीं ज़ाहिर कर सकते। आपको लगता है कि आप बच्चों को गु़स्से में कुछ कहेंगे, तो वे आपको और ग़लत समझेंगे। ऐसे में परिवार के किसी सदस्य, दोस्त, स्कूल काउंसलर, स्पोर्ट्स कोच की मदद ली जा सकती है।

     कई शोध और अध्ययनों में पाया गया है कि जिन बच्चों पर पैरेंट्स हाथ उठाते हैं, डराते-धमकाते हैं, उन पर ताउम्र इसका नकारात्मक असर रहता है। यह उनके व्यक्तित्व के विकास में बाधक बनता है। किसी भी स्थिति में मारपीट नहीं करें। यदि आप बहुत ग़ुस्से में हैं, तब कुछ देर के लिए उनसे दूर हो जाएं, गहरी सांस लें और फिर उनके पास जाएं।

     कभी हो सकता है कि वे रात देर से घर लौटें और आप ग़ुस्से में तमतमा रहे हों। यहां आपको थोड़ा सब्र रखने की ज़रूरत है। जब आप गु़स्से में हों, उस वक़्त उनसे बात न करें। अगले दिन, शांति से उन्हें बताएं कि उनकी किन आदतों से आप खफ़ा हैं।

     उनसे तो अपनी नाराज़गी कहना ज़रूरी है ही, लेकिन ख़ुद के भीतर भी झांकंे। देखें कि आपकी परवरिश और बेहतर कैसे हो सकती है। आपका बच्चा इस तरह क्यूं बर्ताव कर रहा है, इसके पीछे अपने स्तर पर भी वजहें तलाशने की कोशिश करें।

     किशोरों में साइबर क्राइम, वॉइलेंट बिहेवियर और ड्रग अब्यूज़ जैसी समस्याएं तेज़ी से बढ़ रही हैं। इसीलिए यह ज़रूरी हो जाता है कि आप उन्हें समझें। उन पर चीख़ने-चिल्लाने से बचें। यदि आप उनसे आक्रामक शैली में बात करेंगे, तो वे और हिंसक हो सकते हैं। संतुलन बरतें। जैसे, उन्हें जताते रहें कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं। दूसरी ओर, यह भी साफ़गोई से बताएं कि उनकी कुछ ग़लत आदतों या हरकतों को आप बर्दाश्त नहीं करेंगे।  याद रखें कि आप उनके लिए रोल मॉडल हैं। वे आपको देखकर बहुत कुछ सीखते हैं और वही करने लगते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि उन्हें समझाते हुए अपने शब्दों और शैली का ध्यान रखें।

     

     

    अन्य खबर /शौर्यपथ/ 

    कई बार खाने में कुछ नया आज़माने के लिए थोड़ी मेहनत तो करनी पड़ती है। भले व्यंजन बनाने की प्रक्रिया लम्बी हो, लेकिन अगर स्वाद लाजवाब हो, तो मेहनत सफ़ल समझो।
    ऐसे कई व्यंजन हैं जो स्वादिष्ट हैं, लेकिन उन्हें बनाने में थोड़ा समय लग सकता है। ऐसे ही चंद सुझाव हैं, आज़माकर देखिए..

    क्या चाहिए

    कोफ्ते के लिए— छोले- 1 कप उबले हुए, प्याज़- 2 बारीक कटा हुआ, हरी मिर्च- 2 कटी हुईं, जीरा- 1 छोटा चम्मच, लहसुन की कलियां- 5-6, ताज़ा हरा धनिया- 1 छोटा चम्मच, 1/2 नींबू का रस, नमक- स्वादानुसार, बेसन- 1 बड़ा चम्मच, खाने वाला सोडा- 1/8 छोटा चम्मच, तेल- तलने के लिए।

    ग्रेवी के लिए— दालचीनी के टुकड़े- 2 इंच, चक्र फूल- 1, इलायची- 2, तेज पत्ता- 1, जीरा- 1 छोटा चम्मच, पालक- 1 कप उबली और पीसी हुई, प्याज़ का पेस्ट- 1/2 कप, अदरक- लहसुन का पेस्ट- 1 बड़ा चम्मच, टमाटर प्यूरी- 1/2 कप, लाल मिर्च पाउडर- 1 छोटा चम्मच, हल्दी पाउडर- 1/2 छोटा चम्मच, धनिया पाउडर- 1 छोटा चम्मच, गरम मसाला- 1 छोटा चम्मच, 1/2 नींबू का रस, नमक- स्वादानुसार, तेल- 2 बड़े चम्मच।

    ऐसे बनाएं

    बोल में छोले, प्याज़, हरी मिर्च, जीरा, लहसुन, हरा धनिया, नींबू का रस और नमक डालकर अच्छी तरह मसलते हुए मिलाएं। इसमें बेसन, हरा धनिया और सोडा मिलाकर नींबू के आकार की गोलियां बना लें। कड़ाही में तेल गर्म करके मध्यम आंच पर कोफ्तों को भूरा होने तक तल लें और एक तरफ़ रख दें। अब कड़ाही में दो बड़े चम्मच तेल गर्म करें। सारे खड़े मसाले और जीरा डालकर भूनें। प्याज़ और अदरक-लहसुन का पेस्ट मिलाकर पांच मिनट या प्याज़ हल्का भूरा होने तक भूनें। गरम मसाला छोड़कर बाकी पाउडर मसाले मिलाएं। टमाटर का पेस्ट अच्छी तरह से मिलाएं। क़रीब पांच मिनट तक या तेल छोड़ने तक मसाला भूनें। पालक की प्यूरी भी मिला लें। क़रीब दो मिनट तक चलाते हुए पकाएं और फिर एक कप गर्म पानी मिलाएं। इसे सात-आठ मिनट तक ढककर पकाएं। तले हुए कोफ्ते और गरम मसाला मिलाएं।

    ऐसे परोसें— ऊपर से नींबू का रस निचोड़कर गर्मा-गर्म कोफ्ते नान या रोटी के साथ परोसें।

     

     सुनो भई कहानी /शौर्यपथ/ 

    कल्पना का रोचक संसार बनाना कोई बच्चों से सीखे। चलिए डोलू से सीखते हैं, जो दरअसल एक परी को जानती है।
    आपको उसका भरोसा करना होगा, तभी तो कहानी में मज़ा आएगा। ना विश्वास हो, तो सुनो कहानी।

    ‘ना नी मैं पहाड़ ला सकती हूं’- कहकर डोलू हंसी। नानी चौंकी। बोलीं- ‘हे भगवान! लड़की है कि तूफान। लेकिन कैसे? क्या तुम्हारी कोई परी दोस्त है, जो मदद करेगी?’ ‘हां नानी! है न मेरी परी दोस्त।’ ‘अच्छा!’ नानी ने आश्चर्य से आंखें फैलाई - ‘पर तुझ पर विश्वास कौन करेगा। कम्प्यूटर के जमाने में कैसी बातें कर रही है?’ ‘नानी जब देखो तब अपनी ही बातें करती हो। मुझे परी अच्छी लगती है। वही मेरी दोस्त है। ‘अच्छा क्या तुम्हारी परी पहाड़ उठा सकती है?’ नानी ने बात टालने को पूछा। ‘हां, हां...!’ ‘पर परी तो कोमल होती है?’ ‘पर उसमें ताक़त बहुत है। वह बहुत कुछ कर सकती है। एक बार मैंने परी दोस्त से कहा कि धरती पर खड़ी-खड़ी तारा छुओ। परी ने मुझे गोद में उठाया और लम्बी होती चली गई और पहुंच गए हम तारे के पास। मैंने तो ख़ूब छुआ तारे को।’ ‘और क्या-क्या था तारे पर?’ नानी ने पूछा। डोलू को नानी की जिज्ञासा अच्छी लगी। उसने उत्साह से जवाब दिया- ‘तारे पर लम्बे-लम्बे बच्चे थे। बांस जैसे! नीचे खड़े-खड़े ही पहली मंज़िल की छत से सामान उतार सकते थे। मुझे तो ऐसा लगा जैसे कुतुब मीनार के पास खड़ी हूं। सच्ची! और इससे मज़ेदार बात यह है कि उनके मां-पापा क़द में बौने थे।’ ‘ऐं!’ नानी सचमुच चौंक गई थीं। ‘हां मुझे भी अचरज हुआ था नानी। पर परी दोस्त ने बताया कि तारे पर आयु बढ़ने के साथ क़द छोटा होता है धरती पर बड़ा।’ ‘और क्या वे बोलते भी थे। तूने बात की?’ नानी ने पूछा। ‘हां…हां नानी, ख़ूब बातें की। पर मैं आपको बताऊंगी नहीं। अरे, मैंने तो परी को नदी उठाकर आसमान में उड़ते भी देखा है।’ डोलू ने बताया। ‘नदी को उठाकर! और पानी?’ ‘अरे नानी, पानी समेत। बिल्कुल लहराते लम्बे-से कपड़े-सी लग रही थी। दूर-दूर तक। कितना मज़ा आया था।’ नानी को डोलू की बात पर बहुत मज़ा आ रहा था। पर डोलू नाराज होकर कहीं बात रोक न दे, इसका भी तो डर था न! सो बोलीं- ‘अच्छा डोलू तू तो रोज़ परी से मिलती है, परी कभी थकती है कि नहीं?’ ‘थकती है न नानी। जब कोई उस पर विश्वास नहीं करता। जब कोई उसे बोर करता है, तो बहुत थक जाती है। ऐसे लोगों को वह पसंद नहीं करती। मैं तो ना उस पर शक करती हूं और ना ही उसे बोर करती हूं।’ ‘चलो आज से मैं भी तुझ जैसी ही हो गई।’ नानी ने कहा। ‘तो सुनो नानी। एक बार मुस्कराते हुए परी ने कहा - चलो आज तुम्हें पूरा जंगल निगल कर दिखाती हूं। सुनकर मुझे कुछ कुछ अविश्वास हुआ। देखते ही देखते परी का मुंह उतरने लगा। उदासी छाने लगी। मैंने झट से अपनी ग़लती समझी। परी पर विश्वास किया। परी के मुंह पर ख़ुशी लौट आई। वह मुझे जंगल के पास ले गई। परी ने देखते ही देखते पूरा जंगल निगल लिया। मैं तो अचरज से भरी थी। पर ख़ुश बहुत थी। मैंने पूछा- ‘परी, यह जंगल अब क्या तुम्हारे पेट में ही रहेगा?’ परी बोली- ‘नहीं… नहीं! मैंने तो इसे बस तुम्हें मज़ा देने के लिए निगला था। जंगल तो हमारा दोस्त है। क्या-क्या नहीं देता आदमी को! जंगल ख़त्म हो जाए तो आदमी का जीना ही दूभर हो जाए। पता नहीं कैसे राक्षस हैं वे जो जंगलों को काट कर तबाह कर रहे हैं। लो, यह रहा तुम्हारा जंगल कहते-कहते परी ने जंगल उगल दिया। जंगल फिर अपनी जगह था। धुला-धुला शायद परी के पेट में धुल गया था।’ नानी डोलू का मन रखने और उसकी बातों का मज़ा लेने के लिए उत्सुकता दिखा रही थी। उधर डोलू को पूरा मज़ा आ रहा था। ख़ुश होकर बोली- ‘नानी, आप विश्वास करें, तो एक और कारनामा बताऊं।’ ‘हां...हां, ज़रूर सुनाओ!’ डोलू हंसी। उसका चेहरा गर्व से भर उठा था। थोड़ा पानी पीया और दादी-नानी की तरह खंखारा। बोली- ‘नानी, परी तो अपनी आंखों में पूरा समुद्र भी भर सकती है। मछलियों और जीव-जंतुओं समेत। बिल्कुल ‘एक्वेरियम’ लगती हैं तब परी की आंखें। एक बार तो सारे बादल ही पकड़ कर अपने बालों में भर लिए थे। बाल तब कितने सुंदर लगे थे। काले-सफेद। फूले-फूले से। मैंने हाथ लगा कर देखा, तो गीले भी थे। पर थोड़ी ही देर में परी ने उन्हें छोड़ भी दिया। अगर उन्हें पकड़े रखती तो बारिश कैसे होती? और बारिश न होती, तो पूरी धरती को कितना दुःख पहुंचता। परी कहती है कि हमें हमेशा पूरी धरती का हित करना चाहिए। कोई भी नुकसान पहुंचाने वाली बात नहीं करनी चाहिए। नानी, मैं भी किसी को कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी, प्रॉमिस...’ ‘नानी कहीं आप झूठ तो नहीं समझ रही न?' नानी ज़रा संभलीं। आंखें मसलीं। सिर को भी सहलाया। बोलीं - ‘नहीं-नहीं डोलू! सच जब ऐसे-ऐसे कारनामे अपनी आंखों से देखूंगी, तो कितना मज़ा आएगा। सच, मैं तो अविश्वास की बात मन में लाऊंगी तक नहीं।’ ‘हां-हां, मैं उससे आपको मिला दूंगी!’ डोलू की आवाज़ में गज़ब का विश्वास था। ‘पर पहले यह तो बताओ कि मैं पहाड़ लाकर दिखाऊं?’ ‘अच्छा, दिखा। पर चोट नहीं खा जाना।’- नानी ने बच्चों की तरह कहा। ‘तो फिर आंखें बंद करो। मैं अभी आई पहाड़ लेकर।’ नानी ने आंखें बंद कर लीं। बच्ची जो बन गईं थीं। डोलू थोड़ी ही देर में पहाड़ लेकर आ गई। बोली - ‘नानी आंखें खोलो और देखो यह पहाड़!’ नानी ने आंखें खोल दीं। पूछा - ‘कहां?’ ‘यहां। यह क्या है?’ ‘पहाड़!’ अब क्या था, दोनों ख़ूब हंसीं, ख़ूब हंसी। नानी ने डोलू को खींचकर उसका माथा चूम लिया। प्यार-से बोलीं- ‘तुम सचमुच बहुत नटखट हो डोलू!’ असल में डोलू ने एक काग़ज़ पर पहाड़ का चित्र बना रखा था। उसी को दिखाकर जब उसने नानी से पूछा- ‘यह क्या है’ तो नानी के मुंह से सहज ही निकला- ‘पहाड़!’ नानी ने मुस्कराते हुए पूछा- ‘भई डोलू अपनी परी दोस्त से कब मिलवाओगी?’ ‘कहो तो अभी।’ ‘ठीक है। मिलाओ!’ ‘तो करो आंखें बंद।’ नानी ने आंखें बंद कर लीं। थोड़ी ही देर में डोलू ने कहा- ‘नानी आंखें खोलो।’ नानी ने आंखें खोल दीं। पूछा-‘कहां है परी?’ ‘तो यह क्या है?’ ‘परी।’- नानी ने कहा। दोनों फिर ख़ूब हंसी, ख़ूब हंसी। असल में इस बार डोलू ने अपनी ही फ्रॉक पर कागज लगा रखा था। जिस पर लिखा था- ‘परी।’ नानी ने हंसते-हंसते पूछा- ‘और वे सब कारनामे?’ ‘आप अविश्वास तो नहीं करेंगी न नानी?’ - डोलू ने थोड़ा गम्भीर होते हुए पूछा। ‘अरे, नहीं।’ ‘जब परी मैं हूं तो कारनामे भी तो मेरे ही हुए न!’ नानी की आंखें ख़ुशी से भर आईं। सोचा - ‘कितनी कल्पनाशील है मेरी बच्ची। ईश्वर इसे इसी तरह सृजनात्मक बनाए रखे।’ 

     

     

     

    हेल्थ टिप्स /शौर्यपथ/ 

    जर्नल ऑफ हजार्डस मटेरियल्स में प्रकाशित एक हालिया रिसर्च के मुताबिक, पर्यावरण में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक इंसानों के सेल्स (कोशिकाओं) को काफी नुकसान पहुंचा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अधिक मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक कंज्यूम करने से हमें एलर्जी, थाइराइड, कैंसर से लेकर मौत तक का खतरा होता है। प्लास्टिक के ये कण पानी, नमक और सी फूड में ज्यादा पाए जाते हैं।

     माइक्रोप्लास्टिक क्या है?

    नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, प्लास्टिक के 5 मिलीमीटर से छोटे कणों को माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है। इनका आकार एक तिल के बीज के बराबर या उससे भी छोटा होता है। इस कारण ही ये समुद्र में आसानी से बहते हैं। वैज्ञानिकों की मानें, तो प्लास्टिक के बड़े कण भी सूरज, हवा या दूसरे कारणों से माइक्रोप्लास्टिक में तब्दील हो जाते हैं। ये हमारे दैनिक जीवन के उत्पादों के जरिये ही पर्यावरण में आते हैं।

    अमेरिका के प्लास्टिक ओशन एनजीओ की मानें, तो औसतन एक व्यक्ति हर हफ्ते माइक्रोप्लास्टिक के 1769 कण केवल पीने के पानी से ही कंज्यूम कर लेता है। एनवायरनमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी जर्नल का एक शोध कहता है कि लोग हर साल 39,000 से 52,000 माइक्रोप्लास्टिक के कणों को निगल जाते हैं।

    माइक्रोप्लास्टिक के सोर्स

    रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली चीजें, जैसे मेकअप और टूथपेस्ट, माइक्रोप्लास्टिक का सोर्स हैं। इनके अलावा, प्लास्टिक के ये कण सिंथेटिक कपड़ों में भी होते हैं। इनमें नायलॉन, स्पैन्डेक्स, एसीटेट, पॉलिएस्टर, ऐक्रेलिक, रेयान आदि शामिल हैं।

    क्या कहती है रिसर्च

    जर्नल ऑफ हजार्डस मटेरियल्स में प्रकाशित यूनिवर्सिटी ऑफ हल की रिसर्च के अनुसार, अधिक मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक का सेवन करने से हमारे सेल्स को नुकसान पहुंचता है, जिससे भविष्य में कई घातक बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। रिसर्च में माइक्रोप्लास्टिक से सेल्स पर होने वाले इन 5 प्रभावों को जांचा गया..

    1. माइक्रोप्लास्टिक के कारण सेल का मर जाना।

    2. सेल का कम होता इम्यून रिस्पॉन्स।

    3. माइक्रोप्लास्टिक की सेल की दीवार तोड़ने की क्षमता।

    4. सेल को होने वाले दूसरे नुकसान।

    5. सेल के जेनेटिक स्ट्रक्चर में परिवर्तन होना।

    जांच के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि माइक्रोप्लास्टिक के कारण सेल्स पर शुरू के 4 प्रभाव होते हैं। साथ ही, प्रभाव कितना शक्तिशाली होगा, ये माइक्रोप्लास्टिक के आकार पर निर्भर करता है। सेल को सबसे ज्यादा नुकसान अनियमित आकार वाले प्लास्टिक के कण से होता है।

     खाने-पीने की कौन सी चीजों में पाया जाता है माइक्रोप्लास्टिक?

    1. सी फूड

    रॉयल मेलबर्न इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और हैनान यूनिवर्सिटी के एक शोध के मुताबिक, प्लास्टिक के 12.5% छोटे कणों को मछलियां खाना समझ कर निगल जाती हैं। इससे कछुए और अन्य समुद्री जीव भी अछूते नहीं हैं। जब मनुष्य ऐसे दूषित सी फूड को खाते हैं, तब वे अप्रत्यक्ष रूप से माइक्रोप्लास्टिक खा रहे होते हैं।

    2. नमक

    सी साल्ट, रॉक साल्ट, लेक साल्ट और वेल साल्ट जैसे नमक में भी माइक्रोप्लास्टिक होता है। हालांकि, इनमें प्लास्टिक के कणों की मात्रा कितनी होती है, ये उसके सोर्स पर निर्भर करता है।

    3. पानी

    कई रिसर्चों में ये पाया गया है कि नल और बोतल दोनों के ही पानी में माइक्रोप्लास्टिक होता है। हम जितना प्रदूषित पानी पीते हैं, हमारे शरीर में उतना ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक जाता है।

     

     

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री रिसाली नगर निगम

    नवनिर्वाचित पार्षदगण को नगरीय निकाय चुनाव में उनकी जीत के लिए बधाई एवँ शुभकामनाएं दी

    मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल से आज यहां उनके निवास कार्यालय में रिसाली नगर निगम के नवनिर्वाचित पार्षदों ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  बघेल ने सभी नवनिर्वाचित पार्षदगण को नगरीय निकाय चुनाव में उनकी जीत के लिए बधाई एवँ शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर गृह मंत्री  ताम्रध्वज साहू, संसदीय सचिव  विकास उपाध्याय, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष  गिरीश देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने रायपुर उत्तर के विधायक और गृह निर्माण मण्डल के अध्यक्ष  कुलदीप जुनेजा के छोटे भाई  गुरमीत जुनेजा के निधन पर शोक व्यक्त किया है।  बघेल ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने ईश्वर से प्रार्थना की है।

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