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लापरवाही के चलते 2 माह की मासूम रुही की मौत के बाद भी परिजनों की भावनाओ के साथ खेल रहा स्वास्थ्य विभाग
दुर्ग / शौर्यपथ / कोरोना पॉजिटिव नेगेटिव के खेल में स्वास्थ्य विभाग की भारी लापरवाही के चलते 2 माह की दुधमुंही बच्ची रुही के मौत के आज 4 दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग परिजनों के भावनाओ के साथ खेलने से बाज़ नही आ रहा है। जानकारी के अनुसार 2 माह की बच्ची को 20 वर्ष का बताने वाला व कोरोना नेगेटिव को कोरोना पॉजिटिव बताने वाला दुर्ग जिला अस्पताल प्रबंधन ने लीपापोती शुरू कर आज फिर बच्ची रुही की रिपोर्ट 11:38 मिनट में परिजनों के मोबाइल पर बच्ची को 2 माह बताते हुए पॉजिटिव रिपोर्ट भेजी है जिससे यह साफ इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि दबाव बनते ही जिला अस्पताल प्रबंधन मामले में लीपापोती कर रहा है वही कॉउंसलिंग हेतु परिजनों के मोबाइल पर दुर्ग कलेक्टर के ऑफिस एवं होम आइसोलेशन डिपार्टमेंट के द्वारा मृत बच्ची का हाल चाल जानने हेतु व आवश्यक निर्देश देने के लिए परिजनों को कॉल आया था जिसके माध्यम से स्वास्थ्य विभाग शोक में डूबे परिजनों के जख्मो को कुरेदते हुए उनके भावनाओ के साथ खेलने से बाज़ नही आ रहा।
2 माह की रुही का यह पहला मामला नही 15 दिनों के भीतर यह तीसरा मामला,
आपको बता दे कि दुर्ग जिला अस्पताल की लापरवाही का यह पहला मामला नही है 15 दिनों के अंदर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के 2 अन्य मामले भी प्रकाश में आये है। पहला मामला वार्ड नं 3 मठपारा दुर्ग निवासी मदन चौहान ने बताया कि मेरा 45 वर्षीय भतीजा 13 अप्रैल को दुर्ग जिला अस्पताल में सांस लेने में हो रही तकलीफ के वजह से एडमिट करवाया था पर मृतक ने 9 अप्रैल को रैपिड एंटीजन टेस्ट एव आरटीपीसीआर टेस्ट करवा लिया था जिसमे रैपिड एंटीजन टेस्ट उसकी नेगेटिव आई थी पर मृतक को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी जिससे उसको सामान्य वार्ड में उपचार हेतु भर्ती कर लिया गया था मृतक का ऑक्सीजन लेवल 35 था पर ऑक्सीजन लगने के बाद ऑक्सीजन लेवल 81 पहुच गया था।जब परिजनों का मृतक से फोन पर बातचीत होनी बंद हो गयी तब मृतक का हालचाल लेने दुर्ग जिला अस्पताल में कॉल किया गया तब स्टाफ द्वारा साफ तौर कहा गया कि इस नाम का कोई भी मरीज यहाँ भर्ती नही है।
जब परिजन अस्पताल पहुचे तब उन्होंने नीचे और ऊपर के माले पर पता किया परन्तु यहाँ भी उन्हें जानकारी नही मिली न किसी भी रजिस्टर में जानकारी तक नही लिखी जाती। पर परिजनों द्वारा यह सवाल अस्पताल के स्टाफ से पूछा जाता रहा कि आखिर मरीज गया कहाँ। किसी परिचित द्वारा परिजनों को जानकारी दी गयी कि जिस नाम के मरीज को खोज रहे है उसका शव 2 दिनों से दुर्ग मरचुरी में रखा हुआ है।तब भागते हुए परिजन मृतक के पास मरचुरी पहुचे।
मरचुरी में था शव खून से लथपथ,सोने की अंगूठी और मोबाइल भी था गायब
जब परिजन मरचुरी पहुचे तब उन्होंने देखा कि मृतक का शव से सर से लेकर पीठ तक खून से लथपथ पाया।वहाँ मौजूद मरचुरी के स्टाफ ने स्थिति को भांपते हुए परिजनों को यह कहकर भगा दिया कि यह कोरोना संक्रमित शव है इसे छूना नही दूर रहो। जिसे सुनकर परिजनों ने वहाँ से निकलकर दुर्ग कलेक्टर व छः ग शासन के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को मामले की लिखित शिकायत की।इतना ही नही मृतक के पास से उसकी सोने की अनूठी और मोबाइल तक गायब मिले।
दूसरा मामला 4 दिन पहले हो गयी थी मृतक गेंद लाल की मौत,अस्पताल प्रबंधन द्वारा लगातार कॉउंसलिंग होती रही।
दूसरा मामला खुर्सीपार दुर्गा मंदिर चौक निवासी गेंदलाल के साथ भी कुछ इसी तरह का कारनामा जिला अस्पताल द्वारा किया गया।मरीज के परिजनों के अनुसार मृतक गेंदलाल को 19 अप्रैल को जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती करवाया गया था।परिजनों द्वारा लगातार खाने पीने का सामान पहुचाया जा रहा था व फ़ोन के माध्यम से मृतक गेंदलाल की कॉउंसलिंग कर रहे थे।24 अप्रैल के संध्या में जब घर पर पुलिस आई और उनके द्वारा 20 अप्रैल को ही गेंदलाल के निधन की खबर व गेंदलाल के शव के मरचुरी में 4 दिन से पड़े होने की सूचना दी गयी तब परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।वे मरचुरी की ओर दौड़े जिसमे दुर्ग जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही उभरकर सामने आई।
सिविल सर्जन नही जाते कोविड वार्ड जबकि उनके कार्यालय के नीचे ही है कोविड वार्ड
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दुर्ग जिला अस्पताल के सिविल सर्जन बालकिशोर कोविड वार्ड तक नही जाते जबकि उनका कार्यालय ठीक कोविड वार्ड के नीचे है।ऐसे में अस्पताल में क्या चल रहा है अस्पताल में मरीजो की क्या स्थिति है या कितने वेंटिलेटर है पूछे जाने से बस सिविल सर्जन बालकिशोर द्वारा बस यह कहा जाता है कि उन्हें अभी जानकारी नही है जबकि सिविल सर्जन बाल किशोर 1 वर्ष से भी ज्यादा दुर्ग जिला अस्पताल के सिविल सर्जन के रूप में कार्यरत है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
