Google Analytics —— Meta Pixel
June 01, 2026
Hindi Hindi
शौर्यपथ

शौर्यपथ

   शौर्यपथ लेख ( डॉ. सिद्धार्थ शर्मा ) /बाबा रामदेव द्वारा कोरोना के उपचार के दावे के साथ एक आयुर्वेदिक दवा बाजार में उछाल दी गयी. उस दवा के बाजार में आते ही रामदेव के समर्थकों और विरोधियों ने उस दवा के विरोध और समर्थन में गजब हंगामा और हुड़दंग शुरू कर दिया है. दवा के पक्ष और विपक्ष में हो रहा यह हंगामा किसी अंधेर नगरी का आभास करा रहा है.
विरोधियों की बात बाद में पहले बात समर्थकों के हंगामे और हुड़दंग की... इस बार यही वर्ग ज्यादा दोषी दिख रहा है.
ध्यान रहे कि एक अमेरिकी कम्पनी ने 6 जून तक कोरोना के उपचार की वैक्सीन की 20 लाख खुराक बना कर रख ली है और वैक्सीन का उत्पादन युद्ध स्तर पर रात दिन लगातार किया जा रहा है. लेकिन अमेरिका में अब तक हो चुकी एक लाख से अधिक मौतों के बावजूद वह वैक्सीन बाजार में नहीं उतारी गयी है. ऐसा इसलिए है क्योंकि कम्पनी की उस वैक्सीन का त्रिस्तरीय परीक्षण पूर्णतया सफल रहा है किन्तु वैक्सीन का अन्तिम परीक्षण अभी चल रहा है. यह प्रक्रिया सम्भवतः अगस्त/सितम्बर के अन्त में पूर्ण होगी. क्योंकि कम्पनी अपनी वैक्सीन की सफ़लता के प्रति पूर्णतया आश्वस्त है इसलिए उसने भारी आर्थिक जोखिम उठा कर उस वैक्सीन का उत्पादन कर के स्टॉक जमा करना प्रारम्भ कर दिया है. क्योंकि वैक्सीन उत्पादन की प्रक्रिया बहुत जटिल और धीमी होती है इसलिए कम्पनी ने यह आर्थिक जोखिम उठाया है. अगर अपने अन्तिम परीक्षण में वह वैक्सीन सफल हुई तो उसी दिन से वह वैक्सीन बाजार में उपलब्ध हो जाएगी और यदि अन्तिम परीक्षण में वह वैक्सीन सफल नहीं हुई तो सारा तैयार स्टॉक नष्ट कर दिया जाएगा. यह होती है एक सभ्य शिक्षित जागरूक समाज की सोच.
        अब बात बाबा रामदेव की... ज्ञात रहे कि आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने और बेंचने का धंधा बाबा रामदेव द्वारा पिछले लगभग डेढ़ दशक से किया जा रहा है. अतः हमको आपको, किसी आम आदमी को भले ही ज्ञात नहीं हो लेकिन बाबा रामदेव को यह भलीभांति ज्ञात है कि किसी भी रोग के उपचार की दवा को बाजार में उतारने से पहले कुछ परीक्षणों की औपचारिकताओं की पूर्ति करना अनिवार्य है. अतः इस बार उन औपचारिकताओं की पूर्ति के बिना बाबा रामदेव अपनी दवा लेकर बाजार में क्यों कूद गए.? ध्यान रहे कि केन्द्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने बाबा रामदेव की दवा के गुण-दोष, गुणवत्ता पर कोई टिप्पणी नहीं की है इसके बजाय उन औपचारिकताओं की पूर्ति नहीं किए जाने पर अपनी आपत्तियां दर्ज करायी हैं. आयुष मंत्रालय की वह आपत्तियां शत प्रतिशत सही हैं. उन आपत्तियों को बाबा रामदेव भी नकार नहीं पा रहे हैं. उन आपत्तियों का तार्किक तथ्यात्मक उत्तर देने के बजाय बातों के बताशे फोड़ रहे हैं. ध्यान रहे कि देश में आयुर्वेदिक दवाएं बनाने वाली वैद्यनाथ डाबर, ऊंझा ,झंडू सरीखी बहुत पुरानी और बहुत बड़ी लगभग दर्जन भर कम्पनियां हैं. इन. कम्पनियों की एक साख है देश में. मंझोले और छोटे स्तर की हज़ारों आयुर्वेदिक कम्पनियां भी देश में हैं. एकबार बाबा रामदेव को उन अनिवार्य परीक्षणों की औपचारिकताओं की पूर्ति से छूट देने का अर्थ उन सभी कम्पनियों को ऐसा करने की खुली छूट दे देना होगा. इससे जो अराजकता फैलेगी वह बहुत भयानक होगी.
        रही बात स्वदेशी की तो यह याद रखिए कि कोरोना के उपचार के लिए जिस ग्लेनमार्क कम्पनी की दवा सामने आयी है वो ग्लेनमार्क शत प्रतिशत भारतीय कम्पनी ही है, जो आज दुनिया के कई देशों में व्यापार कर रही है.
अतः बाबा रामदेव की दवा के पक्ष में लाठी भांज रहे समर्थक यह ध्यान रखें कि परीक्षण की औपचारिकताओं की पूर्ति के बिना दवा को बाजार में उतार देना बहुत घातक होगा. जो लोग यह तर्क दे रहे हैं कि वो दवा कोई ज़हर नहीं है तो वो यह भी समझ लें कि दवा पर विश्वास कर 15 दिन खाने वाले व्यक्ति पर यदि दवा प्रभाव नहीं डालेगी तो तब तक बहुत देर हो चुकेगी. अतः परीक्षण की औपचारिकताएं अत्यन्त आवश्यक हैं. या फिर बाबा रामदेव वह दावा वापस लें कि यह कोरोना की दवा है उसके पश्चात उसे बेचे. देश को ऐसी अंधेर नगरी ना बनाये जहां ना खाता ना बही... जो रामदेव कहे वही सही.
       दवा का विरोध कर रहा वर्ग वो है जिसे भारतीय संस्कृति सभ्यता की कोख से उपजी किसी भी विद्या और विधा से ही घृणा है. उसकी यह घृणा इतनी पाशविक हो चुकी है कि उस वर्ग को अब किसी दवा का भी विरोध करने में कोई हिचक नहीं है. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा. इससे पूर्व अतीत में भी बाबा रामदेव की दवाओं और यहां तक कि योग विद्या का तीव्र विरोध भी यह वर्ग करता रहा है. अतः इसबार भी उसका विरोध उसकी पाशविक प्रवृति और प्रकृति के ही अनुरूप है. 

व्यंग लेख ( डॉ. सिद्धार्थ शर्मा - दुर्ग ) / एक दिन #बादशाह दरबार लगाकर शिकार की कहानी सुना रहे थे, जोश में आकर बोले :- एकबार तो ऐसा हुआ मैंने आधे किलोमीटर दूर से निशाना लगाकर जो एक हिरन को तीर मारा तो तीर सनसनाता हुआ हिरन की बाईं आंख में लगकर दाएं कान से होता हुआ पिछले पैर के दाएं खुर में जा लगा..!

#जनता ने कोई दाद नहीं दी, वो इस बात पर यकीन करने को तैयार ही नहीं थे..!

?इधर बादशाह भी समझ गया कि मैंने ज़रूरत से ज़्यादा लम्बी छोड़ दी,और अपने #रफूगर की तरफ देखने लगा..!

#रफूगर उठा और कहने लगा:- हज़रात, मैं इस वाक़ये का चश्मदीद गवाह हूँ, दरसल बादशाह सलामत एक पहाड़ी के ऊपर खड़े थे, हिरन काफी नीचे था, हवा भी मुआफ़िक चल रही थी वरना तीर आधा किलोमीटर कहाँ जाता है..?
?जहां तक बात है 'आंख' , 'कान' और 'खुर' की है, तो अर्ज़ करदूँ, जिस वक्त तीर लगा था, उस वक़्त हिरन दाएं खुर से दायाँ कान खुजला रहा था, इतना सुनते ही जनता जनार्दन ने दाद के लिए तालियां बजाना शुरू कर दीं..!

?अगले दिन रफूगर बोरिया बिस्तरा उठाकर जाने लगा, तो बादशाह ने परेशान होकर पूछा कहाँ चले..!

रफूगर बोला:- बादशाह सलामत, मैं छोटी मोटी तुरपाई कर लेता हूँ, शामियाना सिलवाना हो तो #भारतीय_गोदी मीडिया को रख लीजिए..!! ( डॉ. सिदार्थ शर्मा के फेसबुक पेज से ..)

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / मनीला के एक आर्किटेक्ट फर्म ने तैरने वाले घरों का एक ऐसा डिजाइन पेश किया है जो समुद्र के तल में एंकर से बंधे रहेंगे और समुद्र की लहरों के साथ गोते खाएंगे। डाडा डिजाइन नामक कंपनी ने कहा करेंट्स फॉर करेंट्स नामक यह आवास परियोजना कठोर प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति का मुकाबला कर सकती है। वे कहते हैं कि यह अस्थायी घर दूर-दराज के क्षेत्रों में विश्वसनीय बिजली के बुनियादी ढांचे की कमी को भी दूर कर सकते हैं।

हर घर को समुद्र के तल में एंकर की मदद से बांधा जाएगा। इसमें सौर और लहरों से बिजली बनाने के लिए तकनीक लगाई जाएगी। इन्हें प्लास्टिक एंकर से बांधा जाएगा। कंपनी ने कहा, तटों पर रहने वाले समुदायों के पास जमीन और संसाधनों की कमी होती है। इसके अलावा समुद्र की लहरों और तूफानों के कारण भी उन्हें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

वे सबसे अस्थिर परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षित और स्थायी आश्रयों की सख्त जरूरत है। ऐसे में यह घर उनकी समस्याओं का समाधान बनेगा। ये घर समुद्र में आने वाले परिवर्तनों के अनुसार खुद को ढालते रहेंगे।

दक्षिण पूर्वी एशिया में काफी प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं। फिलिपींस, इंडोनेशिया, वियतनाम सबसे संवेदनशील इलाकों में शुमार है। यहां समुद्री तूफानों से लोगों को काफी नुकसान पहुंचता है।

 

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कटहल खाने के शौकीन लोगो को अब स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि सेहतमंद बने रहने के लिए भी कटहल खाने का बहाना मिल गया है। खासकर उन लोगों को जो मधुमेह रोगी है और दवा खाने के बाद भी अपनी डायबिटीज कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। हाल ही में अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के वार्षिक सम्मेलन में शनिवार को शिकागो में एक वीडियो लिंक के माध्यम से एक अध्ययन की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। जिसमें बताया गया कि कटहल का पाउडर प्लाज्मा में ग्लूकोज के स्तर को नीचे ले आता है।

दरअसल, टाइप 2 डा‍यबिटिज से ग्रस्त 40 लोगों पर एक शोध किया गया। इस शोध में 24 पुरुष और 16 महिलाएं शामिल थीं। उनकी औसत आयु 40 से 90 वर्ष थी। अध्ययन के दौरान, प्रतिभागियों को हरे कटहल के आटे का सेवन करने के लिए कहा गया। बेसलाइन पर उनका स्तऑर HbA1c 7.23 ± 0.47 फीसदी था। 12-सप्ताह के अध्ययन के अंत में उनका एचबीए 1 सी 6.98 ± 0.48 प्रतिशत था। जोसेफ ने बताया कि “उपवास और पोस्टपैंडियल प्लाज्मा ग्लूकोज लेवल में भी समान सुधार देखा गया।”

डोसा, इडली और ब्रेड में भी मिला सकते हैं ये आटा-
अध्ययन में पाया गया कि जब इस आटे को स्थानीय भोजन में मिलाकर इस्तेमाल किया गया तो परिणाम कमाल के थे। इस शोध में प्रतिदिन 30 ग्राम कटहल का आटा मधुमेह रोगियों के भोजन में शामिल किया गया। जिसकी वजह से रक्त शर्करा के स्तर में महत्वपूर्ण कमी देखी गई। कटहल के पाउडर को इडली, डोसा के आटे के मिश्रण में मिलाया जा सकता है और आटा ब्रेड बनाने में भी शामिल किया जा सकता है।

कैसे कर सकते हैं कटहल के आटे का सेवन-
मणिपाल ग्लोबल के बोर्ड के अध्यक्ष मोहनदास पई ने कहा कि वह पिछले दो साल से रोजाना रात के खाने के बाद अपने नाश्ते में दलिया और ग्रीन टी में एक चम्मच कटहल पाउडर ले रहे थे। “यह निश्चित रूप से मेरे रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मददगार साबित हुआ।

 

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / जिंदगी की भागदौड़ में कई बार लोग इतने व्यस्त हो जाते हैं कि उन्हें खुद यह महसूस होने लगता है कि वो सिर्फ एक मशीन बनकर रह गए हैं। रोजाना की तरह ऑफिस से घर, घर से ऑफिस करते-करते वो खुद के लिए ही क्वालिटी टाइम निकालना भूल जाते हैं। जिसकी वजह से तनाव, डिप्रेशन जैसी समस्याएं व्यक्ति को घेरने लगती हैं और वो अपसेंड माइंड रहने लगता है। अगर आपको भी खुद से यही शिकायत है तो जानें उन 5 उपायों के बारे में जो आपको हमेशा माइंडफुल रहने में करेंगे मदद।

1-जागरूक रहें-
जागरुक रहने पर व्यक्ति न सिर्फ हर पल को एन्जॉय करता है बल्कि उसे हर घटना उसके अनुक्रम में भी याद रहती है। तो हर बार जब आपका मन इधर-उधर भटकने लगे, तो उसे वापस काम पर ले आएं।

2-प्रोडक्टिविटी-
जब भी आपको लगे कि आपका शरीर थक रहा है, तो अपने काम को थोड़ा ब्रेक दें, जिससे शरीर को फि‍र से तरोताजा होने का मौका मिलेगा। इससे आप ज्‍यादा प्रोडक्टिविटी दे पाएंगे।

3-आभार करें व्यक्त-
कई शोध में यह कहा गया है कि आभार व्यक्त करने और महसूस करवाने का हमारे स्वास्थ्य और भावनाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।अपनी जिंदगी में मौजूद हर वह चीज आपके लिए खास है, जो आपको दूसरों से अलग बनाती है। इन छोटी-छोटी चीजों के प्रति ग्रेटफुल होना आपको संतोष का अहसास करवाता है।

4-नए लक्ष्य करें तय-
अपने लक्ष्यों की अलाइनमेंट करने के लिए शांत दिमाग से खुद अपने लक्ष्यों पर फोकस करें। ऐसा करने से आपके लिए क्या सही है, क्या गलत है और क्या कम जरूरी है। इसका फैसला करके आप खुद की राह को ज्यादा बेहतर बना पाएंगे।

5-मेडिटेट करें-
मेडिटेशन माइंडफुल होने की कुंजी है। शुरूआत गहरी सांस लेने और छोड़ने से करें। आप जितनी प्रैक्टिस करेंगी, यह आपके लिए उतना ज्यादा फायदेमंद होगा।

 

धर्म संसार / शौर्यपथ / चार धाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने एक जुलाई से चार धाम यात्रा राज्य के भीतर के लोगों के लिए शुरू करने की मांग की। सीएम त्रिवेंद्र रावत से मिल कर उन्होंने पहले चार मैदानी जिलों को छोड़ कर पहाड़ी जिलों से यात्रा शुरू कराने की मांग की।

सीएम से मुलाकात के दौरान आचार्य ममगाईं ने कहा कि राज्य के पर्वतीय जिले जहां कोरेाना संक्रमण अधिक नहीं है और उन जिलों की स्थिति ठीक है। वहां के लोगों को चार धामों में दर्शन करने की अनुमति दी जाए। ताकि राज्य के भीतर लोगों को चार धाम यात्रा का लाभ मिल सके। अभी देहरादून, हरिद्वार, यूएसनगर, नैनीताल के लोगों को छोड़ कर बाकि जिलों को मंजूरी दी जाए। उन्होंने बताया कि सीएम ने सभी पक्षों से बात कर जल्द कोई ठोस फैसला लेने का आश्वासन दिया है।

अभी चार धाम यात्रा एक जुलाई से शुरू किए जाने का कोई फैसला नहीं लिया गया। अभी सभी जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। सभी पक्षों से बात कर ही शासन स्तर से कोई फैसला लिया जाएगा। - रविनाथ रमन, सीईओ उत्तराखंड चार धाम श्राइन बोर्ड

 

खेल / शौर्यपथ / वेस्टइंडीज के खिलाफ 8 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए इंग्लैंड के सिलेक्टर्स टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों के सिलेक्शन को लेकर दुविधा में पड़ गए हैं। सिलेक्टर एड स्मिथ, जेम्स टेलर और कोच क्रिस सिल्वरवुड पहले टेस्ट के लिए टॉप ऑर्डर को लेकर रॉरी बर्न्स, डोम सिबली, जो डेनली और जैक क्राउली के नामों पर विचार कर सकते हैं। बर्न्स ने पिछले करीब 18 महीनों के दौरान दो शतकों के साथ शानदार प्रदर्शन कर टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज के रूप में अपनी दावेदारी मजबूत की है।


दक्षिण अफ्रीका दौरे में लगी चोट से बर्न्स पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं और ऐसा माना जा रहा है कि वो सलामी बल्लेबाज के रूप में इंग्लैंड की ओर से पारी की शुरुआत करेंगे। वहीं दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगातार तीन टेस्ट जीतने में क्राउली, सिबली और डेनली ने इंग्लिश टीम की ओर से शानदार प्रदर्शन किया था। सिबली ने उस सीरीज में अपने करियर का पहला शतक जमाया था। इंग्लैंड का टॉप ऑर्डर इस समय उतना मजबूत नहीं है, जितना कि पहले था। एंड्रयू स्ट्रॉस और फिर उसके बाद जॉनाथन ट्रॉट के संन्यास लेने के बाद इंग्लैंड की टीम में सलामी बल्लेबाज की कमी खलती रही है।


विशेषज्ञों का मानना है कि सिबली और बर्न्स सलामी जोड़ी के रूप में इंग्लिश पारी की शुरुआत कर सकते हैं, जबकि क्राउली या डेनली तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी कर टीम के बैटिंग ऑर्डर को मजबूती दे सकते हैं। क्राउली ने टीम में खुद के सिलेक्शन की संभावना को लेकर कहा, 'मुझे नहीं लगता कि अभी तक कोई फैसला लिया गया है। मुझे विश्वास है कि आने वाले कुछ सप्ताह में प्रैक्टिस मैच में बेहतर प्रदर्शन कर मैं अपनी दावेदारी को मजबूत कर सकता हूं।'

मनोरंजन / शौर्यपथ / सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद से नेपोटिज्म को लेकर बड़ी बहस चल रही है। सोनू निगम ने कुछ दिनों पहले म्यूजिक इंडस्ट्री के माफिया को लेकर वीडियो शेयर किया था। उन्होंने भूषण कुमार पर आरोप लगाए थे कि वह नए टैलेंट को मौका नहीं देते और सिर्फ अपने सिंगर्स के साथ काम करते हैं। सोनू के आरोपों पर भूषण कुमार की पत्नी दिव्या खोसला कुमार ने हाल ही में वीडियो शेयर कर सोनू की हर बातों का जवाब दिया। इतना ही नहीं, दिव्या ने सोनू से पूछा कि आपने खुद कितने नए टैलेंट को मौका दिया है।

दिव्या के इस वीडियो के अपलोड करने के बाद सभी को सोनू के जवाब का इंतजार था, लेकिन सोनू ने जवाब देने की बजाय दिव्या का वीडियो ही अपने अकाउंट पर पोस्ट कर दिया और लिखा- प्रेजेंटिंग दिव्या खोसला कुमार। लगता है अपने कॉमेंट्स सेक्शन को खोलना भूल गईं। आइए इसमें उनकी मदद करें।

क्या कहा दिव्या ने

वीडियो में दिव्या कहती हैं, 'कुछ दिनों से सोनू निगम जी टी सीरीज और भूषण कुमार के खिलाफ कैंपेन चला रहे हैं। मैं बता दूं कि टी सीरीज ने कई नए लोगों को मौका दिया है जिसमें एक्टर्स, गायक, संगीतकार, डायरेक्टर शामिल हैं। मैंने खुद अपनी फिल्म यारियां में 10 नए लोगों को चांस दिया था जिसमें 4 लोग नेहा कक्कड़, हिमांश कोहली, रकुल प्रीत और कंपोजर आरको आज बड़े स्टार हैं।'

सोनू जी से मैं पूछना चाहती हूं कि आप तो बहुत बड़े कलाकार हैं तो आपने कितनो लोगों की मदद की है। आप तो कभी टी सीरीज में नहीं आए कि इस न्यूकमर के पास टैलेंट है आप इन्हें लॉन्च कीजिए। कैमरे के पीछे बोलना बहुत आसान है, लेकिन आपने कितने टैलेंट को इंडस्ट्री में चांस दिया जबकि टी सीरीज में 97 प्रतिशत लोग जो काम कर रहे हैं, वो आउटसाइडर थे। हम सभी को चांस देते हैं।

दिव्या ने कहा, सोनू निगम खुद दिल्ली की रामलीला में 5 रुपये के लिए गाना गाते थे। वहां से गुलशन कुमार जी ने इन्हें स्पॉट किया, इन्हें मुंबई की फ्लाइट की टिकट दी और इनसे कहा कि मैं तुम्हें बहुत बड़ा स्टार बनाऊंगा। बताइए सोनू निगम जी आपसे ये बात कही गई थी या नहीं। गुलशन जी ने आपको इतने ऊंचे मुकाम पर पहुंचाया और आपने क्या किया।

दिव्या ने आगे कहा, सोनू जी ने अपने वीडियो में कहा कि भूषण जी इनके पास आए और कहा कि प्लीज मुझे अबू सलेम से बचा लो। अब मैं आपसे ये पूछना चाहती हूं सोनू निगम जी कि अबू सलेम से बचने के लिए वह आपके पास मदद मांगने क्यों आए। प्लीज इस बात की तहकीकात की जाए कि क्या सोनू निगम के अबू सलेम से रिश्ते थे?

 

नजरिया / शौर्यपथ / बादलों के तूफान के रूप में इकट्ठा होने से आकाशीय बिजली बनने की शुरुआत होती है। बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े और बेहद ठंडे पानी की बूंदें आपस में टकराते हैं और इनके बीच विपरीत ध्रुवों के विद्युत कणों का प्रवाह होता है। वैसे तो, धन और ऋण एक-दूसरे को चुंबक की तरह अपनी ओर आकर्षित करते हैं, किंतु वायु के अच्छा संवाहक न होने के कारण विद्युत आवेश में बाधाएं आती हैं। अत: बादल की ऋणावेशित निचली सतह को छूने के प्रयास करती धनावेशित तरंगें भूमि पर गिर जाती हैं। चूंकि धरती विद्युत की सुचालक है। यह बादलों के बीच की परत की तुलना में अपेक्षाकृत धनात्मक रूप से चार्ज होती है। तभी इस तरह पैदा हुई बिजली का कुछ प्रवाह धरती की ओर हो जाता है। भारत में हर साल करीब 2,000 लोग इस तरह बिजली गिरने से मारे जाते हैं। मवेशियों और मकान आदि का भी नुकसान होता है।
गुरुवार को बिहार और उत्तर प्रदेश के अनेक हिस्सों में बिजली गिरी और करीब 125 लोग मारे गए। यह एक असामान्य घटना है। अमेरिका में हर साल बिजली गिरने से औसतन 30 और ब्रिटेन में तीन लोगों की मृत्यु होती है, जबकि भारत में यह आंकड़ा बहुत अधिक है। इसका मूल कारण यह है कि हमारे यहां आकाशीय बिजली गिरने के पूर्वानुमान व चेतावनी की व्यवस्था विकसित नहीं हो पाई है। आंकडे़ गवाह हैं कि हमारे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने की घटनाएं ज्यादा होती हैं, और आमतौर पर दिन में ही लोग इसके शिकार बनते हैं। यदि तेज बरसात हो रही हो और बिजली कड़क रही हो, तो ऐसे में पानी भरे खेत के बीच में, किसी पेड़ के नीचे, और पहाड़ी स्थान पर जाने से बचना चाहिए। मोबाइल का इस्तेमाल भी खतरनाक होता है।
हमें यह समझना होगा कि इस तरह बहुत बडे़ इलाके में एक साथ घातक बिजली गिरने का असली कारण धरती का लगातार बदल रहा तापमान है। पहले आषाढ़ महीने में बहुत भारी बारिश नहीं होती थी, लेकिन अब बहुत थोड़े समय में जोरदार बारिश का होना और सावन-भादों का सूखा रह जाना, जलवायु परिवर्तन का त्रासद नतीजा है। एक बात और। बिजली गिरना जलवायु परिवर्तन का दुष्परिणाम तो है ही, इसके अधिक गिरने से जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया को भी गति मिलती है। सनद रहे, बिजली गिरने के दौरान नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है और यह एक घातक ग्रीन हाउस गैस है। हालांकि, अभी बिजली गिरने और जलवायु परिवर्तन पर उसके प्रभाव को लेकर शोध कम हुए हैं, पर कई शोध इस बात को स्थापित करते हैं कि जलवायु परिवर्तन ने बिजली गिरने के खतरे को बढ़ाया है। इस दिशा में गहराई से काम करने के लिए ग्लोबल क्लाइमेट ऑब्जर्विंग सिस्टम के वैज्ञानिकों ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन के साथ मिलकर एक विशेष शोध दल का गठन किया है। पर जलवायु परिवर्तन के बारे में हुए अध्ययनों से पता चला है कि यदि जलवायु में अधिक गरमाहट हुई, तो गरजदार तूफान कम, तेज आंधियां ज्यादा आएंगी और हर एक डिग्री ग्लोबल वार्मिंग के चलते धरती तक बिजली की मार की मात्रा 10 फीसदी तक बढ़ सकती है।
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले के वैज्ञानिकों ने वायुमंडल को प्रभावित करने वाले अवयवों और बिजली गिरने के बीच के संबंध पर एक शोध मई 2018 में प्रारंभ किया था। उनका आकलन था कि आकाशीय बिजली के लिए दो प्रमुख अवयवों की आवश्यकता होती है : तीनों अवस्थाओं (तरल, ठोस व गैस) में पानी और बर्फ बनाने से रोकने वाले घने बादल। वैज्ञानिकों ने 11 जलवायु मॉडल पर प्रयोग किए और पाया कि भविष्य में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में गिरावट आने से रही, अत: आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ेंगी।
एक और गौर करने की बात यह है कि अभी जिन इलाकों में बिजली गिरी है, उनमें से बड़ा हिस्सा धान की खेती का है और जहां धान के लिए पानी को एकत्र किया जाता है, वहां से ग्रीन हाउस गैस जैसे मीथेन का उत्सर्जन अधिक होता है। मौसम जितना अधिक गरम होगा, ग्रीन हाउस गैसें जितनी उत्सर्जित होंगी, उतनी ही अधिक बिजली ताकत के साथ धरती पर गिरेगी। साफ है, ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर नियंत्रण व जलवायु परिवर्तन पर काबू न पाया गया, तो समुद्री चक्रवातों, बिजली गिरने, बादल फटने जैसी भयावह त्रासदियां बढ़ती ही जाएंगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)पंकज चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार

 

     दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के नवनियुक्त कलत्र डॉ. भूरे शिक्षा के प्रोत्साहन के लिए हमेशा कोई ना कोई पहल करते है और छात्रों के मनोबल को बढाने सदैव आगे रहते है . पिछले वर्ष जिले के कलेक्टर डॉ. भूरे मुंगेली जिले में पदस्त थे तब जिले के प्रावीण्य सूचि प्राप्त छात्र का प्रोत्साहन बढाने सपत्निक छात्र के गृह निवास गए और तोहफा देकर उत्साह वर्धन किया और मेरिट प्राप्त छात्र को शुभकानाए प्रेषित कर उज्जवल भविष्य की कामना के साथ रूचि अनुसार क्षेत्र में आगे बढऩे की सलाह दी थी . आज साल भर बाद मुंगेली के कलत्र की पदस्थापना अब दुर्ग जिले में हो गयी और एक बार फिर सीजी बोर्ड में प्रावीण्य सूचि पर आये छात्रों से मुलाक़ात की एवं उज्जवल भविष्य की शुभकामनाये देते हुए कहा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए हर विद्यार्थी कड़ी मेहनत करता है इनमें से सबसे कड़ी मेहनत करने वाले प्रावीण्य सूची में चुने जाते हैं। इन मेधावी विद्यार्थियों को आज सुबह कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे की ओर से भी उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं मिली। कलेक्टर ने इन्हें गिफ्ट दिया और कहा कि यह आप लोगों के जीवन का बहुत सुखद पड़ाव है। इसी तरह मेहनत करते रहोगे तो आगे का रास्ता और भी खूबसूरत होगा।
      उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षाएं बहुत अहम होती हैं और इनमें अच्छा स्कोर करना महत्वपूर्ण है लेकिन यह पढ़ाई का केवल एक पड़ाव है। आगे बहुत सी चुनौतियां होती हैं जो विद्यार्थी लगातार अध्ययनशील रहते हैं। सीखने की उत्सुकता रखते हैं। उनके लिए तकलीफें कम होती है और वे आगे बढ़ते जाते हैं। जितनी ज्यादा कड़ी मेहनत करेंगे, दुनिया को जानने के लिए उत्सुक रहेंगे। उतनी ही ज्यादा तरक्की आप जीवन में करेंगे। इस मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल, सहायक संचालक अमित घोष सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
       कलेक्टर से इस अवसर पर बच्चों ने अपनी आकांक्षाएं भी साझा की। दसवीं में जिले के दो छात्राओं और एक छात्र ने प्रावीण्य सूची में अपनी जगह बनाई है। इनमें से महक शकुंतला विद्यालय की है आदर्श कुम्हारी के ज्योति अंग्रेजी माध्यम स्कूल का छात्र है और संजना करंजा उच्चतर माध्यमिक शाला की छात्रा है। महक और आदर्श इंजीनियरिंग की तैयारी करना चाहते हैं और संजना आईआईटी की तैयारी करना चाहती हैं। बारहवीं के टापर सौरभ साहू जिन्होंने चैाथी रैंक पाई है। नीट की तैयारी करना चाहते हैं। मीनल एग्रीकल्चर की तैयारी करना चाहती हैं। कलेक्टर ने सभी को कहा कि अपने पसंद की पढ़ाई करें। अभी खूब सारी सामग्री आपके पास मौजूद है इसलिए जितना जानना है उतना जानने के लिए आगे बढिय़े। कलेक्टर ने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि जिले के बच्चों को सबसे अच्छी शिक्षा मिले। जहां किसी तरह की गाइडेंस में दिक्कत आ रही है तो विशेष कक्षाओं के माध्यम से हम यह सुनिश्चित करा रहे हैं। कलेक्टर ने आगे के करियर के रास्तों के बारे में भी विद्यार्थियों को बताया। उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं के बाद अपनी रुचि के मुताबिक अच्छा विषय चुनने से आपका करियर भी अच्छा बनता है। उन्होंने कहा कि आपकी पसंद के विषयों में भी बहुत से करियर हैं इस संबंध में जितनी जानकारी प्राप्त करेंगे। आपके लिए बेहतर होगा।

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)