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सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / लद्दाख सीमा पर भारत और चीन के बीच जो समस्या खड़ी हुई है, उसके फौरी निदान की कोशिशें जारी हैं, मगर इससे इतर भी कई मोर्चे हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच तल्खियां बढ़ सकती हैं। डिजिटल क्षेत्र में 59 चीनी एप को प्रतिबंधित करके नई दिल्ली ने बीजिंग को यह साफ कर दिया है कि अब वह उससे बहुत सदाशयता की उम्मीद न रखे। इस बीच एक खबर यह आ रही है कि चीनी कंपनियां तीसरी पार्टी के जरिए भारतीय बाजार में अपना निवेश और उत्पादों का प्रवाह बढ़ाने में जुटी हैं। और इसके लिए वे सिंगापुर व हांगकांग जैसे देशों के व्यापारिक-मार्ग का इस्तेमाल कर रही हैं। जाहिर है, इन देशों के साथ हमारा मुक्त व्यापार समझौता है और इसके अलावा भी अनेक द्विपक्षीय करार हैं। यदि ऐसा है, तो यह न सिर्फ अवैध कारोबार है, बल्कि यह हमारे घरेलू उद्योगों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली धूर्तता है।
फेडरेशन ऑफ इंंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स के आंकडे़ भी इस बात के साफ संकेत दे रहे हैं। इसके मुताबिक, पिछले साल चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को भारत ने जितना पाटा था, लगभग उतना ही हांगकांग के साथ उसका व्यापार घाटा बढ़ गया। यानी भारत का सारा लाभ शून्य हो गया। सिंगापुर के मामले में भी आंकडे़ ऐसे ही इशारे कर रहे हैं। उम्मीद है, वाणिज्य मंत्रालय नई पृष्ठभूमि में इसका संज्ञान लेगा और सरकार समुचित कार्रवाई करेगी। यह कोई ढकी-छिपी बात नहीं है कि पिछले कई वर्षों से दुनिया के बड़े बाजारों पर कब्जा करने के लिए चीन हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। एशिया और अफ्रीका के छोटे-छोटे देशों को बड़े कर्ज देकर या तरह-तरह की परियोजनाओं में निवेश के जरिए वह पहले ही अपना आर्थिक उपनिवेश बना चुका है, पर बडे़ बाजारों में उसकी दाल नहीं गल रही। अमेरिका ने ‘टैरिफ-वॉर’ छेड़कर उसे काफी हद तक झुकने को बाध्य भी किया है। ऐसे में, भारतीय बाजार में यदि चीन चोर दरवाजे से घुसने में कामयाब हुआ, तो हमारे घरेलू उद्योग-धंधों को वह काफी आघात पहुंचा सकता है। खासकर लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्योगों के लिए उसके उत्पादों का सामना करना असंभव हो जाएगा। बडे़ पैमाने पर रोजगार पैदा करने की चुनौती झेल रहा देश इस स्थिति से निपटने के लिए तैयार नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय राजनय के अपने तकाजे होते हैं। हम कई बार मित्र देश के साथ भी कुछ मसलों पर इत्तफाक नहीं रखते और अपनी अलग राह चुनते हैं। चीन पड़ोसी है, मित्र देश नहीं। वह हमारे लिए लगातार चुनौतियां खड़ी कर रहा है। न सिर्फ वैश्विक मंचों पर, बल्कि प्रकारांतर से करीबी पड़ोसियों के मामले में भी। अब हमारे आर्थिक हितों को चोर दरवाजे से नुकसान पहुंचाने की बातें आ रही हैं। इसलिए वक्त आ गया है कि उससे जुड़े तमाम मोर्चों पर पैनी निगाह रखने और त्वरित फैसले में समर्थ एक मुकम्मल विंग का गठन किया जाए। भौगोलिक सीमाओं के अलावा डिजिटल दुनिया व अन्य आर्थिक क्षेत्रों में भी बेकाबू हो रही चीनी महत्वाकांक्षाओं को लगाम लगाने का यही सबसे मुफीद वक्त है। चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने की कवायदों को गति देने के अलावा हमें उन छिद्रों को भी बंद करने की जरूरत है, जिधर से हमारे हितों को हानि पहुंच रही है। बीजिंग को समझना ही होगा कि भारत अब उसके किसी छल का शिकार नहीं बन सकता।
मेलबॉक्स / शौर्यपथ / आज की युवा पीढ़ी काफी ऊर्जावान है। वह न केवल सपने देखती है, बल्कि उनको पूरा करने का हौसला भी रखती है। मगर दुख की बात यह है कि वह बहुत जल्दी विफलताओं के आगे घुटने टेक देती है और अपना जीवन खत्म कर लेती है। नौजवानों को समझना चाहिए कि विफलता तो सफलता की पहली सीढ़ी है। जीवन रहेगा, तो उन्नति के अवसर भी मिलेंगे। जिस प्रकार चलते-चलते थकने पर हम विश्राम कर लेते हैं और फिर नई ऊर्जा के साथ चलना आरंभ करते हैं, उसी प्रकार असफलता भी इंसान के जीवन का विश्राम है, अंत नहीं। आज के महानायक ने भी लगातार अपनी ग्यारह फिल्मों की असफल वैतरणी को पार किया है। बस, हमें खुद पर विश्वास रखकर सब्र और धैर्य के साथ बुरे वक्त के गुजरने का इंतजार करना चाहिए। सामने आई मुश्किलों का हंसकर स्वागत करना ही जीवन है।
विभा गुप्ता, बेंगलुरु
रोकना होगा विस्तार
वैश्विक स्तर पर आज चीन जिस गति से विस्तार कर रहा है, उससे दुनिया परेशान है। भारत, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, जापान, अमेरिका जैसे देश अब गंभीरता से उसकी नीतियों के विरुद्ध एकजुट हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में चीन ने जो दबदबा हासिल कर लिया है, वह अन्य देशों की संप्रभुता और निजता के लिए खतरा बनकर उभरा है। आज कई देशों के बाजार पर चीन का कब्जा है। चिंता की बात यह भी है कि कई देशों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चीन पर निर्भर हो गई है। ऐसे में, चीन की चुनौतियों का मिलकर मुकाबला करना होगा। समय रहते अगर उसकी चाल पर लगाम नहीं लगाई गई, तो दुनिया गहरे संकट में फंस सकती है।
रोहित गुप्ता, मयूर विहार, दिल्ली
घरेलू कामगारों का दर्द
बेशक हम अनलॉक-2 में अब प्रवेश कर चुके हैं। रोज कमाने-खाने वाले लोगों की जिंदगी पटरी पर आने लगी है। ज्यादातर मजदूर अपने कामों पर लौट चुके हैं। मगर अब भी कुछ वर्ग ऐसे हैं, जिनकी मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। जैसे, घरों में काम करने वाले कामगार। इन्हें अब भी लोग बुलाने से हिचक रहे हैं। लोगों में अब भी उनको लेकर डर पसरा हुआ है। इसलिए घरेलू कामगार काफी तंगी से जूझ रहे हैं। जहां वे पहले औसतन चार-पांच घरों में काम करके गुजारा कर लिया करते थे, आज उन्हें दोनों वक्त का खाना भी बमुश्किल नसीब हो पा रहा है। लोगों को सतर्कता और सावधानी बरतते हुए इन लोगों को भी काम पर बुला लेना चाहिए। कोरोना से बचना आवश्यक है, पर कोई जान-बूझकर यह बीमारी नहीं फैलाता।
अंकिता प्रकाश, रुड़की
अपनी-अपनी राजनीति
प्रधानमंत्री के संबोधन से अपेक्षा थी कि वह कोरोना के कारण आए संकट और सीमा पर बढ़ते तनाव से निपटने में सरकार के प्रयासों की जानकारियां साझा करेंगे, परंतु उनका पूरा भाषण पीएम गरीब कल्याण योजना नवंबर तक बढ़ाने और जन-धन खातों में नकदी जमा कराने तक सीमित रहा। दूसरी ओर, राहुल गांधी कह रहे हैं कि सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है, गरीबों को कमाने की जरूरत नहीं होगी, यदि उनके खाते में प्रतिमाह 7.5 हजार रुपये जमा कराए जाएं। मगर जहां-जहां कांग्रेस सत्ता में है, वहां भी राहुल ऐसी योजना शायद ही लागू करा पाए हैं। हालांकि इसमें यह सवाल शेष रह गया कि शेष 30 करोड़ राशनकार्ड विहीन लोगों और ईमानदार करदाताओं ने आखिर कौन सा गुनाह किया है कि उन्हें इस तरह के लाभों से वंचित कर दिया गया है? यदि सरकारों के पास पैसे हैं, तो आधारभूत ढांचे के निर्माण, राष्ट्र के सशक्तीकरण, विकास-कार्य आदि तेज गति से चलाए जाने चाहिए। क्या यह वक्त नीतियों को बदलने का नहीं है?
राधेश्याम ताम्बटकर, इंदौर, मध्य प्रदेश
ओपिनियन / शौर्यपथ / पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों में हुए ताजा संघर्ष और पहले के तनावों में अंतर यह है कि इस बार पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए), यानी चीन की फौज पूरी तैयारी के साथ आई है। पीएलए की कई डिवीजन नजदीकी इलाकों में तैनात हैं, साथ ही भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में भी एक-दूसरे के करीब बड़ी संख्या में फौजी डटे हुए हैं। भारतीय सेना ने भी इलाके में और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास समान तैयारी कर रखी है। जिस तरह से यहां सैनिकों का भारी जमावड़ा किया गया है और असलहा व तोप मंगवाए जाने की खबरें हैं, उसे देखकर स्पष्ट है कि पीएलए ने पूरी तैयारी और योजना के साथ इस खूनी संघर्ष को अंजाम दिया है। इसका मकसद चीनी सैनिकों का उस सीमा-रेखा की तरफ बढ़कर जमीन हथियाना है, जिसे वे वास्तविक नियंत्रण रेखा कहते हैं।
ऐसा करके चीन दरअसल, भारत के साथ किसी भी तरह की द्विपक्षीय बातचीत के बिना वास्तविक नियंत्रण रेखा का एकतरफा निर्धारण का प्रयास कर रहा है। इससे वह अपनी सीमा तय कर सकेगा और उस पर नियंत्रण की तरफ अपने कदम बढ़ाएगा। मगर भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को रोक दिया है और भारतीय क्षेत्र की अखंडता बनाए रखने के लिए मुस्तैद हो गई है। नतीजतन, इस संघर्ष से पीएलए को जो तमगा हासिल हुआ, वह यह कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए पिछले 25 वर्षों में मजबूत किए गए तमाम सिद्धांतों, मानदंडों व मानक-प्रक्रियाओं का उसने उल्लंघन कर दिया। उसने यह साबित कर दिया है कि खुद उसकी सरकार द्वारा हस्ताक्षरित समझौतों के प्रति उसका क्या नजरिया है?
कूटनीतिक रूप से भारत और बाकी दुनिया को चीन यह संकेत दे रहा है कि वह एशिया की सबसे बड़ी शक्ति है और अपनी मनमर्जी से कुछ भी कर सकता है, फिर चाहे वह दक्षिण चीन सागर में हो या भारत-चीन सीमा पर। वह चाहता है कि भारत यह समझे और स्वीकार करे कि चीन की समग्र राष्ट्रीय ताकत उससे कहीं अधिक है और नई दिल्ली को एशिया में उसकी सर्वोच्चता मान लेनी चाहिए, लिहाजा उसे पीछे हट जाना चाहिए। उसके मुताबिक, भारत को यह भी समझ लेना चाहिए कि 21वीं सदी एशिया की नहीं, बल्कि चीन की है।
मगर पूर्वी लद्दाख में भारतीय सैनिकों द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई से चीन को यह संदेश साफ-साफ मिल गया है कि भारत उसके आधिपत्य को स्वीकार नहीं करता और उसकी उकसाने वाली कार्रवाइयों को बर्दाश्त नहीं करेगा। नई दिल्ली अपनी स्थिति से कतई समझौता नहीं करेगी। हमारे देश के बहादुर सैनिकों ने 15 जून की रात गलवान घाटी में ठीक यही किया। यहां पर हमें यह भी याद रखना चाहिए कि बाकी दुनिया साफ-साफ देख रही है। यहां पर चीन ने चुनौती दी है, जिसको भारत ने स्वीकार किया है।
फौज भेजने का सीधा संकेत है कि हम चीन का मुकाबला करने और भारत सहित अन्य राष्ट्रों पर धौंस जमाने के उसके आक्रामक तरीकों का विरोध करने के लिए तैयार हैं। भारत और चीन का रिश्ता अब पहले की तरह आगे नहीं बढ़ सकता। पुरानी लकीर अब व्यवहार में नहीं लाई जा सकती है। क्यों? अगर भारत सरकार को ऐसा ही करना होता, तो वह अपनी सैन्य कार्रवाई का खंडन कर रही होती। इसीलिए भारत को नीतिगत फैसलों के माध्यम से अपने सैन्य संदेश को मजबूत करने और दोहराने की जरूरत है, जो आगे चलकर इस राष्ट्रीय सहमति को स्पष्ट करेगा कि हमें चीन का बड़े भाई जैसा रवैया पसंद नहीं है। इसी वजह से भारत को ऐसे संकेत देने होंगे कि यदि सीमा पर शांति नहीं होती है, तो चीन के साथ सामरिक के अलावा अन्य रिश्ते भी नकारात्मक रूप से प्रभावित होंगे। इस संदेश को स्पष्ट तौर पर दिखाने के लिए हमें अपनी चीन-नीति का फिर से मूल्यांकन करना होगा।
इसी दिशा में हमारा पहला कदम था 59 चीनी एप पर पाबंदी। भारत ने तो सिर्फ शुरुआत की है। देश में 5-जी तकनीक के परीक्षण और उसे लागू करने की प्रक्रिया से चीन की कंपनियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर प्रतिबंधित करना नई दिल्ली की इस सोच को और मजबूत करेगा।
चीन की कार्रवाइयों का एक जवाब यह भी हो सकता है कि भारत अपने रिश्ते अमेरिका, जापान, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और संभवत: इंडोनेशिया जैसे लोकतंत्रों के साथ मजबूत बनाए। भारत को ताइवान के साथ भी अब अपने संबंधों को विस्तार देना चाहिए। दिल्ली अपनी चीन-नीति संयत होकर तैयार करे। बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया जाहिर करने की कतई जरूरत नहीं है। अपने तमाम विकल्पों पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही हमें आगे बढ़ना चाहिए। मगर हां, इसकी समय-सीमा तय होनी चाहिए। नई नीति इसी साल लागू हो जानी चाहिए।
विशेषकर आर्थिक क्षेत्र में भारत की नई चीन-नीति खुद को कुछ दर्द दिए बिना तैयार नहीं की जा सकती है। हालांकि, जब हमने यह तय कर लिया है कि चीन को सख्त संदेश देने की जरूरत है, तो हमें कष्ट सहने के लिए भी तैयार रहना होगा। भारतीय सैनिकों ने ऐसा ही सीमाओं पर किया है, और अब आम भारतीयों के लिए यह दिखाने का वक्त आ गया है कि वे भी ऐसा करने के लिए तैयार हैं। यह कष्ट कई रूपों में मिल सकता है- कुछ उत्पादों की उपभोक्ता कीमतें बढ़ सकती हैं, कुछ कंपनियों के मुनाफे घट सकते हैं, तो कुछ कारोबारियों के राजस्व में कमी आ सकती है। अगर हम खुद के मजबूत व एकजुट होने का संदेश देना चाहते हैं, जिसे चीन ने समझने में गलती की है, तो हमें इस तरह के दर्द सहने ही होंगे। भारत को अपना यह चरित्र पूरी मजबूती से चीन के सामने रखना ही होगा कि हम लकीर के फकीर नहीं हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)गौतम बम्बावाले, चीन में नियुक्त रहे भारतीय राजदूत
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग के वार्ड नंबर 9-10 की शासकीय उचित मूल्य की दूकान में फर्जी तरीके से राशन अहरण करने के मामले को खाद्य विभाग दुर्ग द्वारा मामूली सी रकम के जुर्माने से निपटा दिया गया और इस तरह अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला खाद्य अधिकारी ने मामले में 5000 की मामूली रकम का जुर्माना लगा कर माँ शीतला सहायता समूह द्वारा संचालित शासकीय उचित मूल्य की दुकान को पाक साफ़ कर दिया . जबकि शौर्यपथ समाचार पत्र द्वारा पूर्व में भी कम समय में फोटो से राशन आहरण मामले की जाँच करने का निवेदन जिला खाद्य अधिकारी और क्षेत्र की अधिकारी श्रीमती नेहा तिवारी से किया गया किन्तु अधिकारियों द्वारा सभी मामले की शिकायत मिलने पर ही जाँच की बात कही जाती रही और एक बार फिर फर्जी फोटो से राशन आहारं के मामले में संचालिका श्रीमती सुनीता मिश्रा को राहत मिल गयी जबकि वार्ड के पार्षदों द्वारा खाद्य अधिकारी से मामले की जांच एवं पूर्व में हुए बल्क में फोटो से राशन आहरण की सूक्ष्म जांच के लिए निवेदन किया गया था किन्तु मामला जुर्माना के साथ खत्म हुआ .
एक मामला अभी थमा नहीं कि दूसरा मामला सामने आ गया जिसमे वार्ड नंबर 11 में संचालित उचित मूल्य की दूकान (उ.मू.दु : 431001013 ) में संचालक द्वारा हितग्राही संतोष यादव को 40 किलो चावल दिया गया किन्तु चावल की बिक्री शासकीय रिकार्ड में 50 किलो दिखाई गयी मजे की बात यह है कि चावल की बिक्री 40+5+5) तीन हिस्सों में दी गयी है और राशन कार्ड में 40 किलो ही अंकित की गयी यही नहीं संतोष यादव की माता के राशन कार्ड में भी राशन के आहरण और देय गलत अंकित की गयी . इस बारे में जब संतोष यादव ने वार्ड पार्षद से संपर्क किया तो राशन दूकान के संचालक का कहना है कि आकर कभी भी बची हुई खाद्य सामग्री ले जाए . कम राशन मिलने की जानकारी संतोष यादव ने कार्यालय में जा कर ली तब जानकारी हुई कि राशन कम मिला . किन्तु हर हितग्राही ऐसा नहीं कर पाता जिससे राशन दूकान के संचालको के हौसले बुलंद हो जाते है और जब कभी एकाध बार चोरी पकड़ी भी जाती है तो मामूली जुर्माना से बरी हो सकते है जैसा कि पूर्व में फर्जी तरीके से वार्ड 9-10 के राशन दूकान की संचालिका का हुआ .
क्या कर रही है क्षेत्र की खाद्य अधिकारी
वार्ड नंबर 9-10-11 में खाद्य विभाग ने श्रीमती नेहा तिवारी को तैनात कर रखा है शौर्यपथ संचार पत्र खाद्य विभाग से निवेदन करता है कि इन दुकानों के पूर्व के खरीदी बिक्री की प्रक्रिया की सूक्ष्मता से जाँच करे और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करे ताकि आम जनता का हक़ ना मारा जाए .
// माडमसिल्ली में वाटर स्पोर्टस और माना-तूता में बढ़ाएं पर्यटक सुविधाएं
// होटल प्रबंधन संस्थान में इसी सत्र से शुरू होगा पाठ्यक्रम
// पर्यटन मण्डल के संचालक मण्डल की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में लोकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के प्रमुख बांधों और वाटर बॉडी में वाटर स्पोर्ट, कैफेटेरिया सहित विभिन्न सुविधाएं विकसित की जाएगी। स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जोडऩे के लिए भी इस सत्र से नवा रायपुर स्थित होटल मेनेजमेंट संस्थान में पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया। पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल के संचालक मंडल की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने बैठक में कहा कि कोरोना संकट काल में राज्य के पर्यटन स्थलों में स्थानीय पर्यटकों को आकर्षित करने की रणनित बनायी जाए। पर्यटन स्थलों में बेहतर सुविधाएं विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि पहले चरण में धमतरी जिले के माडम सिल्ली बांध में वाटर टूरिज्म के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार की जाए।
बैठक में मंत्री साहू ने रायपुर स्थित जोहार छत्तीसगढ़ होटल में साज सज्जा कर इसे नया रूपरूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस होटल के परिसर में कामर्शियल दृष्टिकोण से पर्यटन भवन का निर्माण किया जाए ताकि इसका बहुउद्देशीय उपयोग हो सके। उन्होंने अधिकारियों को इस सबंध में जल्द प्रस्तार तैयार करने भी कहा। मंत्री साहू ने राजधानी के निकट स्थित माना-तूता में पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के संचालक मंडल की बैठक में पर्यटन विकास से संबंधित कार्यों को त्वरित गति से संपन्न करने के लिए प्रदेश के सभी पर्यटन क्षेत्रों को दो या तीन जोन में विभाजित करने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान पर्यटन से संबंधित विभिन्न होटल, मोटल, रिसॉर्ट के संचालन, पर्यटन की पोस्ट कोविड तैयारियों, पर्यटन के प्रचार प्रसार, वॉटर टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, राम वन पाथ गमन के विकास कार्य सहित विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा की गई। बैठक में पर्यटन विभाग के सचिव अन्बलगन पी., प्रबंध संचालक इफ्फत आरा, महाप्रबंधक सुनील अवस्थी सहित वाणिज्य, वित्त, परिवहन, वन, संस्कृति, रेलवे, एयरपोर्ट अथॉरिटी, इंडियन एयरलाइंस कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
// स्वास्थ्य मंत्री टी. एस. सिंहदेव ने जो कहा वह जनता से किए वादा के प्रति प्रतिबद्धता और वचनबद्धता को दर्शाता है भाजपा तो चुनाव में किए वादों को चुनावी जुमला बताकर जनता से धोखा बाजी कर रही
// मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की ओर उंगली उठाने से पहले डॉ रमन सिंह को अपने बैंक खाता में आये न्याय योजना की पहली किश्त का आंकलन करना चाहिए
// मोदी द्वारा जनता से की गई वादा को चुनावी जुमला बताने वाली भाजपा और रमन सिंह को स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव के बयान को पूरा पढऩा चाहिए
// मोदी-भाजपा देश से की हुई वादों को पूरा करने में असफल रमन सिंह भाजपा से इस्तीफा देने की नैतिक साहस करें
रायपुर /शौर्यपथ / पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के बयान पर कांग्रेस ने तीखा जवाब दिया। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की ओर उंगली उठाने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को अपने बैंक खाता में आए न्याय योजना की पहली किस्त की राशि का आकलन करना चाहिए। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से 5700 करोड़ रुपए किसानों को धान की अंतर राशि चार किस्तों में मिलेगी। प्रदेश के किसानों के खाते में 1500 करोड़ की पहली किस्त जमा हुई है। लोकसभा चुनाव में मोदी के द्वारा जनता से की गई वादा को चुनावी जुमला बताने वाले भाजपा और डॉ रमन सिंह को स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव के बयान को पढऩा चाहिए।
रमन सिंह और भाजपा के नेताओं ने तो निरंतर प्रदेश और देश की जनता को गुमराह करने का काम किया है। 2013 के विधानसभा चुनाव में रमन सिंह ने सरकार बनने पर किसानों को धान के कीमत ?2100 क्विंटल और ?300 बोनस प्रति क्विंटल देने का वादा किया था। ठीक वैसे ही लोकसभा चुनाव के दौरान भी मोदी-भाजपा ने दो करोड़ युवाओं को प्रतिवर्ष रोजगार, 15 लाख रुपए जनता के खाते में आएंगे, महंगाई कम होगी अच्छे दिन आएंगे, पेट्रोल-डीजल ?30-?35 लीटर में मिलेगा, रसोई गैस के दाम कम होंगे, बेटियां सुरक्षित होगी, पाकिस्तान को करारा जवाब देंगे, भारत की ओर आंख दिखाने वाले दुश्मनी को ईट का जवाब पत्थर से देंगे, आतंकवाद खत्म होगा सहित अनेक लोक लुभावने वादा मोदी ने लच्छेदार भाषणों के माध्यम से जनता से किया था। मोदी ने नोटबंदी के दौरान 50 दिन जनता से मांगे थे 50 दिनों में अगर नोटबंदी फेल होती है तो किसी भी चैराहा में आकर जनता के द्वारा दिए हुए सजा को भुगतने का वादा किया था। बीते 6 साल में मोदी-भाजपा-रमन जनता से किये वादा को पूरा करने में असफल रही है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार 36 बिंदुओं में जनता से किए वादों में से 22 बिंदुओं से अधिक में काम करने में सफल हुई है किसानों का कर्ज माफी, बिजली बिल हाफ, धान की कीमत ?2500, आदिवासियों की जमीन लौटाना, जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों को जेल से बाहर निकालना बस्तर में मक्का प्रोसेसिंग प्लांट लगाना, 25 से अधिक वनोपज को समर्थन मूल्य में खरीदना, तेंदूपत्ता का मानक दर 2500रुपया से बढ़ाकर 4 हजार प्रति बोरा करना, एनएमडीसी में बस्तर में स्थानीय स्तर पर परीक्षा आयोजित करना, 15,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती, ढाई हजार से अधिक पुलिस विभाग में भर्ती, 3000 नर्सों की भर्ती सहित नरवा, गरवा, घुरवा, बारी के माध्यम से 22 सौ से अधिक गोठानो का निर्माण, राजीव गांधी न्याय योजना के माध्यम से धान के अंतर राशि के अलावा गन्ना एवं मक्का उत्पादकों को भी लाभ देना और आने वाले दिनों में दलहन-तिलहन सहित भूमिहीन किसानों को भी न्याय योजना के माध्यम से करना, यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम राइट टू फूड मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक मुख्यमंत्री शहरी स्लम क्लीनिक, शिक्षककर्मियों का संविलियन, पुलिस विभाग के भत्ता में बढ़ोत्तरी, छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री, शराबबंदी हेतु राजनीतिक सामाजिक और प्रशासनिक कमेटी का गठन 60 से अधिक शराब दुकानों को बंद करना, कोरोना संकटकाल में प्रवासी मजदूरों के सकुशल घर वापसी उनके रहने खाने का प्रबंध उनके रोजगार की व्यवस्था सहित अनेक जन हितेषी कार्य किए हैं।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के जनहितैषी कार्यो के आगे भाजपा मुद्दाविहीन हो चुकी है। भाजपा किसानों और मजदूरों के नाम से झूठ बोलकर स्तरहीन मंगढ़तन बात कर गुमराह कर जो राजनीति कर रही है। इससे दुखी होकर टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि अगर 20 अगस्त को न्याय योजना की दूसरी किस्त किसानों को नहीं मिलेगी तो वह इस्तीफा दे देंगे। ये जनता से किए वादों के प्रति कांग्रेस नेताओं की प्रतिबद्धता और वचनबद्धता का जीता जागता प्रमाण है।
भाजपा के नेताओं को टी.एस. सिंहदेव से सीख लेनी चाहिए और मोदी-भाजपा ने जनता के साथ जो वादा खिलाफी किया है इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, भाजपा के 9 सांसद और विधायक को तत्काल अपने पद से और भाजपा से इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि भाजपा नेताओं में वादा निभाने में असफल नरेंद्र मोदी से इस्तीफा मांगने की क्षमता नहीं है।
कोरोना के कहर से जूझ रहे ज्यादातर देश 'लॉकडाउनÓ से 'अनलॉकÓ की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। ब्रिटेन सहित तमाम मुल्कों में जुलाई से जिम तक खोलने की योजना है। हालांकि, तीन महीने की शारीरिक असक्रियता के बाद जिम जाकर कठिन व्यायाम करने पर लेने के देने पड़ सकते हैं। आपको मांसपेशियों में खिंचाव से लेकर कंधे, पीठ, कमर, कूल्हे, जांघ आदि में चोट की शिकायत हो सकती है। ब्रिटेन की जानी-मानी फिटनेस एक्सपर्ट मरियम अलरूबी ने इसी के मद्देनजर पांच ऐसे व्यायाम सुझाए हैं, जिनसे मांसपेशियों को खोलने और शरीर को लचीचा बनाने में मदद मिल सकती है। आइए इन पर नजर डालें-
1.कंधे-गर्दन में दर्द से ऐसे बचें
-एक डंडा हाथ में लेते हुए फर्श पर सीधे खड़े हो जाएं। अब डंडे को दोनों हाथों से पकड़ते हुए बाजुओं को कंधे की सीध में सामने की ओर ले जाएं। ध्यान रखें कि इस दौरान कोहनियां एकदम सीधी होनी चाहिए। धीरे-धीरे जितना हो सके, हाथ सिर के ऊपर ले जाएं और फिर वापस कंधे की सीध में ले आएं। इस प्रक्रिया को 15 से 20 बार दोहराएं। यह एक सेट हुआ। ऐसे कम से कम पांच सेट करें।
2.पीठ में खिंचाव का खतरा यूं घटाएं
-एक मोटी इलास्टिक की डोरी लें। उसे बंद दरवाजे के हैंडल में अपने कमर जितनी ऊंचाई पर फंसाएं। अब हैंडल से दो फीट की दूरी पर खड़े होकर डोरी के दोनों सिरों को हाथों में थाम लें और जितना हो सके पीछे की ओर खींचें। ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में आपके दोनों हाथ पेट के किनारे से सटे होने चाहिए, ताकि कंधे की भी एक्सरसाइज हो सके। इस प्रक्रिया को दस के सेट में दो से तीन बार दोहराएं।
3.कमर की मांसपेशियां लचीली बनाएं
-फर्श पर चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं। अब दाएं पैर के घुटने को दोनों हाथों से पकड़ते हुए ऊपर उठाएं। इस दौरान दाएं पैर के पंजे बाएं पैर के ऊपर आ जाने चाहिए। इसके बाद घुटने को हाथों से सहारा देते हुए पैर दाईं और बाईं तरफ ले जाएं, ताकि जांघों की मांसपेशियों में हल्का खिंचाव महसूस हो। संभव हो तो घुटने को गोलाई में भी घुमाएं। दोनों पैरों से इस प्रक्रिया दस-दस के सेट में पांच बार दोहराएं।
4.कूल्हे में खिंचाव की शिकायत नहीं होगी
-दायां घुटना फर्श पर टिकाते हुए कुछ इस तरह बैठें कि शरीर का सारा भार बाएं पंजों पर आए। इस दौरान यह सुनिश्चित करें कि दाएं पैर का घुटना और बाएं पैर का पंजा एक सीध में हो। अब दायां हाथ ऊपर उठाएं और कमर के पास से बाईं ओर मुड़ें। 30 सेकेंड तक इसी अवस्था में रहें। ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में कंधे, कोहनी और रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। अब वापस उसी मुद्रा में जाएं। दोनों घुटनों से इस प्रक्रिया को दो-दो बार करें।
5.जांघों की मांसपेशियां आसानी से खुलेंगी
-जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। अब दाएं पैर को ऊपर उठाएं और तलुए के किनारे एक तौलिया फंसाएं। तौलिये के सहारे पैरों को दस सेकेंड तक जितना हो सके, चेहरे की तरफ खींचने की कोशिश करें। इसके बाद पैर ऊपर रखते हुए तौलिये को पांच से सात सेकेंड के लिए थोड़ा ढीला छोड़ दें। दोनों पैरों पर पूरी प्रक्रिया को तीन से चार बार दोहराएं। इससे शारीरिक सक्रियता की कमी से स्थिर हुईं जांघों और कूल्हे की मांसपेशियां आसानी से खुल जाएंगी।
आधे से ज्यादा लोगों का वजन बढ़ा
-लॉकडाउन में 67त्न लोगों ने चॉकलेट-चिप्स ज्यादा खाने की बात मानी ।
-35त्न ने सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा कोल्डड्रिंक पीने का खुलासा किया।
-55त्न लोगों ने कहा, शारीरिक सक्रियता घटने से उनका वजन काफी बढ़ गया।
-80त्न ने लॉकडाउन खुलने के बाद कसरत के जरिये मोटापा घटाने का वादा किया।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / हर साल 1 जुलाई को देशभर में डॉक्टर्स डे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह खास दिन डॉक्टर्स के योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। बता दें, 1 जुलाई को देश के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉक्टर बिधानचंद्र रॉय का जन्मदिन और पुण्यतिथि होती है। डॉक्टर बिधानचंद्र रॉय के साथ देश की सेवा में लगे समस्त चिकित्सकों को सम्मान देने के लिए हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे (राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस) मनाया जाता है। आज पूरा विश्व कोरोना महामारी की चपेट में है। ऐसे में जीवन रक्षा करने वाले डॉक्टरों ने लोगों को 'कोविड-19' नाम के इस दानव से बचे रहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी हैं। आइए जानते हैं आखिर क्या हैं ये जरूरी सलाह।
राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सुधीर रावल की मानें तो पहले से किसी रोग से ग्रस्त व्यक्ति में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा काफी अधिक होता है। ऐसे में रोगी को इस बात की पूरी जानकारी होनी चाहिए कि किस परिस्थिति में उसे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह-
डॉ. सुधीर रावल का कहना है कि कोरोना काल एक ऐसा समय है, जिसके बारे में किसी को भी पहले से कोई अनुमान नहीं था। ऐसे में सतर्कता ही लोगों के लिए कोरोना से बचने के लिए सबसे बड़ा कवच है। मौजूदा हालात में कैंसर मरीजों का उदाहरण देते हुए डॉ. सुधीर कहते हैं कि कैंसर मरीजों का इम्यून कमजोर होता है। इसकी वजह से ऐसे लोगों का कोविड-19 संक्रमण की चपेट में आने का खतरा ज्यादा बना रहता है।
ऐसे में कोविड-19 से बचने के लिए न सिर्फ कैंसर रोगियों को बल्कि उन सभी लोगों को जो पहले से ही किसी न किसी रोग से पीड़ित हैं सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
- जहां तक संभव हो बाहर नहीं निकलना चाहिए।
-संतुलित आहार लेना चाहिए और सकारात्मक विचार रखना चाहिए।
-इलाज करा रहे मरीजों को लगातार अपने डॉक्टर्स के संपर्क में रहना चाहिए।
इम्यून कंप्रोमाइज्ड लोग रहें बेहद सतर्क-
डॉ. रावल ने कहा कि इस समय इम्यून कंप्रोमाइज लोगों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। इम्यून सिस्टम का प्राथमिक काम संक्रमण से लड़ना होता है। ’इम्यून कंप्रोमाइज’ का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जिसका इम्यून सिस्टम सामान्य स्वस्थ व्यक्ति की तुलना में कमजोर हो। ऐसे लोगों में कोविड-19 जैसे संक्रमणों की चपेट में आने की आशंका ज्यादा रहती है।
कैसे होता है इम्यून सिस्टम कमजोर-
कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियां व्यक्ति के इम्यून को कमजोर करती हैं। इसी तरह बड़ी उम्र और धूम्रपान, ज्यादा शराब पीने, आलसी जीवन जीने और जंक फूड खाने वाली लाइफस्टाइल से भी इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। कैंसर के मरीजों में कीमोथेरेपी जैसे इलाज के दौरान इम्यून ज्यादा कमजोर होने का खतरा रहता है। डॉ. रावल ने कहा कि हर डॉक्टर लोगों को ऐसी आदतों से बचने की सलाह देता है, जो सेहत पर भारी पड़ सकती है। इस डॉक्टर दिवस के मौके पर अगर हर व्यक्ति डॉक्टर की सलाह मानने का निश्चय कर ले तो कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव हो सकता है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कोरोनावायरस ने न सिर्फ लोगों के जीने का तरीका बदल दिया है बल्कि शादी के तौर-तरीकों और रिवाजों में भी बदलाव कर दिया है। लॉकडाउन के बाद ब्रिटेन की सरकार ने शादी के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार दूल्हा-दुल्हन को एक-दूसरे को अंगूठी पहनने से पहले और बाद में हाथ धोना पड़ेगा। वहीं, नए नियमों में लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखने का आग्रह किया गया। शनिवार से सामाजिक दूरी एक मीटर से ज्यादा होगी। नए नियमों में शादी के दौरान एक-दूसरे से कम संपर्क रखने और जल्द से जल्द समारोह को खत्म कर देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने कहा है कि शादियों को सुरक्षित वातावरण में किया जाए।
पिता हाथ में हाथ डालकर बेटियों को नहीं ला सकेंगे-
नए नियमों के कारण पिता और ब्राइड्समेड दुल्हन के हाथ में हाथ डालकर उन्हें चर्च में नहीं ला सकेंगे। इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्य भी दुल्हन या किसी अन्य को न तो गले लगा सकेंगे न चूम सकेंगे। ये गतिविधियां सिर्फ समारोह के कानूनी रिवाज के लिए ही की जा सकेगी। सरकार ने कहा है कि शादी समारोह में कम से कम लोग शामिल हों। समारोह में 30 से ज्यादा लोगों को शामिल होने की अनुमति नहीं होगी। इसमें दूल्हा-दुल्हन, गवाह, अधिकारी, मेहमान और फोटोग्राफर या सुरक्षा गार्ड जैसे कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि, इसमें स्थान के कर्मचारी शामिल नहीं होंगे।
रिसेप्शन पार्टी नहीं कर सकेंगे-
नए निर्देशों के अनुसार शादी के बाद रिसेप्शन पार्टी का आयोजन नहीं किया जा सकेगा। छोटे समारोह आयोजित किए जा सकेंगे जिसमें दो घरों के समूह के अलावा बाहर से सिर्फ छह लोगों को आने की अनुमति होगी।
चर्च में गाने या चिल्लाने की अनुमति नहीं-
नए निर्देशों के अनुसार शादी के दौरान चर्च में गाने, चिल्लाने, चीखने या संगीत बजाने की अनुमति नहीं होगी। चिल्लाने या गाने से कोरोनावायरस के प्रसार का जोखिम बढ़ता है इसलिए इस पर पाबंदी लगाई गई है। अगर कोई एक व्यक्ति गाना चाहता है तो उसे फेश शील्ड पहनकर गाना पड़ेगा ताकि उसकी थूक से अन्य लोगों को खतरा न हो। सरकार ने गाना गाने की जगह रिकॉर्डिंग वाले गानों का इस्तेमाल करने को कहा है।
सामाजिक दूरी का पालन करें-
सभी मेहमानों को सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करना होगा। इसके अलावा समारोह स्थल के बैठने की व्यवस्था में बदलाव करना होगा। इसके अलावा वेंटिलेशन में सुधार करना होगा और सभी को मास्क का इस्तेमाल करना होगा। मेहमानों से कहा गया है कि वे किसी दूसरे का सामान न छुएं।
अंगूठी पहनाने से पहले और बाद हाथ धोएं-
नए नियमों के अनुसार दूल्हा-दुल्हन को अंगूठी पहनाने से पहले और बाद में हाथ धोना पड़ेगा। यह ध्यान रखना होगा कि अंगूठी ज्यादा हाथों में न जाए। समारोह स्थल पर किसी तरह के पैर धोने या शरीर के अन्य अंगों को धोने का रिवाज करने की इजाजत नहीं होगी। इन रिवाजों को घर से ही पूरा करके आना पड़ेगा। वेन्यू मैनेजरों को नकद दान को हतोत्साहित करने और जहां संभव हो ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग जारी रखने के लिए कहा गया है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस तिथि को पद्मनाभा, विष्णुशयन भी कहा जाता है। देवशयन के साथ ही चातुर्मास भी प्रारंभ हो जाता है। देवशयनी एकादशी पर श्रीहरि भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी समय से चातुर्मास का आरंभ हो जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में श्रीहरि भगवान विष्णु, पाताल के राजा बलि के यहां चार मास निवास करते हैं। इस अवधि में भगवान शिव पृथ्वीलोक पर आते हैं और चार मास तक संसार की गतिविधियों का संचालन करते हैं। भगवान शिव गृहस्थ होते हुए भी संन्यासी हैं। अत: उनके राज में विवाह आदि कार्य वर्जित होते हैं।
देवशयनी एकादशी के बाद चार माह तक सूर्य, चंद्रमा और प्रकृति का तेजस तत्व कम हो जाता है। देवशयनी एकादशी से साधुओं का भ्रमण भी बंद हो जाता है। वह एक जगह रुककर प्रभु की साधना करते हैं। मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान सभी धाम ब्रज में आ जाते हैं। इसलिए इस दौरान ब्रज की यात्रा शुभकारी मानी जाती है। देवशयन की अविधि में पत्तल पर भोजन करें। वाक-सिद्धि प्राप्त करने के लिए इस अवधि में मीठे पदार्थों का त्याग करें। आरोग्य की प्राप्ति के लिए इस अवधि में तली हुई वस्तुओं का त्याग करें। संतान की उन्नति के लिए देवशयन की अवधि में दूध एवं दूध से बनी वस्तुओं का त्याग करें। देवशयनी एकादशी का व्रत करने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। मन शुद्ध होता है, सभी विकार दूर हो जाते हैं। दुर्घटनाओं के योग टल जाते हैं।
अब 5 महीने बाद होंगे मांगलिक कार्य
देवशयनी एकादशी के साथ बुधवार को भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में शयन को चले जाएंगे और चार महीने तक खरमास रहेगा। इस दौरान मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। 25 नवंबर को देव जागृत होने के साथ फिर से सहालग शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषविदों के अनुसार इस बार नवंबर व दिसम्बर में कम ही सहालग हैं।
मंगलवार को आखिरी सहालग के चलते शादी समारोह हुए। अब 25 नवंबर से फिर से समारोह होंगे। ज्योतिषविद् विनोद त्रिपाठी बताते हैं कि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देशयनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन से चतुर्मास की शुरुआत मानी जाती है। नवंबर में 25, 27 व 30 यानि तीन दिन ही साए हैं जबकि दिसंबर में 1, 6, 7, 9, 10 व 11 को शादी समारोह किए जा सकते हैं। वह कहते हैं कि 17 जनवरी को गुरु अस्त होगा, जो 15 फरवरी को उदय होगा। इससे दो दिन पहले 13 फरवरी को शुक्र डूब जाएगा। इसके बाद 18 अप्रैल से मांगलिक कार्य शुरू हो पाएंगे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
