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रायपुर साहित्य उत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल
रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा। राज्यपाल श्री डेका ने आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि‘ के समापन समारोह के अवसर पर उक्त विचार व्यक्त किए। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए। जिस तरह संगीत के सात स्वर हमें जोड़े रखते है उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नई बातों का सीखने का अवसर प्रदान करता है।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन दिनों में इस मंच पर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चाएं हुईं। विचारों का खुलकर आदान-प्रदान हुआ। सबने मिलकर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई विषयों पर बात की। यह उत्सव सभी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार और सीखने वाला अनुभव रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। देश भर से आए नामी प्रकाशकों ने यहां किताबों का बहुत सुंदर संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई-नई किताबें देखने और पढ़ने का अच्छा मौका मिला। यह देखकर अच्छा लगता है कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि है।
श्री डेका ने कहा साहित्य और संगीत का आदान प्रदान जरूरी है और ऐसे साहित्य का उत्सव हमेशा होना चाहिए। उन्होंने तीन दिवसीय सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन राज्य के अन्य शहरों एवं गांवांे के स्तर तक भी किया जाना चाहिए और यह आयोजन सरकारी न होकर समुदाय की भागीदारी वाले होने चाहिए।
श्री डेका ने कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ के रामायण कालीन संस्कृति एवं साहित्य को भूल गयी है। हमारा राज्य बहुत सुंदर है और यहां की संस्कृति भी बहुत समृद्ध है। इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए ताकि राज्य के बाहर के लोग यहां के बारे में जान सकें। श्री डेका ने कहा कि शब्दों में बहुत शक्ति होती है। शब्द का रूप ब्रह्म है। उन्हांेने बंकिमचंद्र चटर्जी के वंदे मातरम गीत का उल्लेख किया और कहा कि सारे देश को इन दो शब्दों ने जागृत कर दिया था। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें जोड़ता है, हमें सोचने की नई दिशा देता है और हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। हम सभी साहित्य को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाएं और विचारों की यह रोशनी लगातार जलाए रखें। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो बिना किसी लेन-देन या व्यक्तिगत स्वार्थ के हो। ऐसे कार्य देश और समाज के समग्र विकास को मजबूती प्रदान करते हैं।
समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा बहती रही है। कालीदास, रविन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि एवं साहित्यकारों का इतिहास भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन अनवरत किए जाते रहेंगे।
समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी, नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक श्री अनुराग बसु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर कृष्णा दास, मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा , राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
बिलासपुर।
बिलासपुर पुलिस महकमे से जुड़ी एक बेहद गंभीर और संवेदनशील खबर सामने आई है। सोशल मीडिया पर प्रसारित समाचारों एवं वीडियो को संज्ञान में लेते हुए नगर पुलिस अधीक्षक (ASP – सिटी) श्री राजेंद्र जायसवाल के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए गए हैं। यह आदेश पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज द्वारा जारी किया गया है, जिसमें पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक, निष्पक्ष और गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं।
प्राप्त आधिकारिक पत्र के अनुसार, सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो एवं आरोप सामने आए हैं, जिनमें यह दावा किया जा रहा है कि स्पा सेंटर संचालकों से अवैध रूप से धन की मांग की जा रही थी। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले को हल्के में न लेते हुए उच्च स्तर पर जांच का निर्णय लिया गया है।
SSP को सौंपी गई जांच की जिम्मेदारी
इस पूरे मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), जिला बिलासपुर को सौंपी गई है। IG कार्यालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सोशल मीडिया में वायरल वीडियो की दृश्य-श्रव्य सामग्री, उपलब्ध दस्तावेजों तथा शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की सूक्ष्म और वस्तुनिष्ठ जांच की जाए।
पूर्व में भी आई थी शिकायत
आदेश में यह भी उल्लेख है कि इससे पहले लोकेश सेन एवं अमन सेन द्वारा एक लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिसमें सिविल लाइन थाना, बिलासपुर से जुड़े कुछ मामलों में कथित अवैध वसूली, दबाव एवं व्यवसाय को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए थे। उक्त शिकायत पहले ही जांच हेतु अग्रेषित की जा चुकी है और अब उसे भी वर्तमान जांच से संबद्ध कर लिया गया है।
7 दिन में रिपोर्ट तलब
IG बिलासपुर रेंज ने SSP को निर्देशित किया है कि वे 7 दिवस के भीतर सभी तथ्यों की जांच कर स्पष्ट अभिमत सहित विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। साथ ही, जांच में प्रयुक्त समस्त साक्ष्य, दस्तावेज एवं सामग्री को विधिवत संलग्न करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
ASP स्तर के अधिकारी के विरुद्ध इस प्रकार की जांच के आदेश से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सबकी निगाहें SSP द्वारा की जाने वाली जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।
प्रशासन का सख्त संदेश
इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और पद के दुरुपयोग के आरोप चाहे कितने भी उच्च पदस्थ अधिकारी पर क्यों न हों, जांच से कोई भी ऊपर नहीं है।
अब देखना यह होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इस मामले में आगे कोई बड़ी कार्रवाई होती है।
गृह वार्ड में ‘चयनात्मक कार्रवाई’ के आरोप: क्या दुर्ग में अतिक्रमण नीति सबके लिए समान है?
दुर्ग।
शासन-प्रशासन जब किसी शासकीय अधिकारी पर पद के दुरुपयोग का आरोप पाता है, तो निलंबन और बर्खास्तगी जैसी कड़ी कार्रवाइयाँ दिखाई देती हैं। सुशासन की दुहाई दी जाती है। लेकिन सवाल तब उठता है जब यही कसौटी जनप्रतिनिधियों पर लागू होती नहीं दिखती। दुर्ग नगर पालिका निगम के वार्ड क्रमांक 59—जो स्वयं महापौर श्रीमती अलका बाघमार का गृह वार्ड है—में हालिया अतिक्रमण कार्रवाई को लेकर भेदभावपूर्ण व्यवहार के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
वार्ड में एक ऐसी दुकान पर कार्रवाई की गई, जिसके संबंध में न तो यातायात अवरोध की शिकायतें थीं और न ही सड़क जाम जैसी स्थिति। दुकान संचालक रोहित जैन का आरोप है कि महापौर के पदभार ग्रहण करने के बाद से ही उन पर निजी द्वेष के तहत लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि बीते 6–7 महीनों से विभिन्न नीतिगत हथकंडों के जरिए दुकान खाली कराने का प्रयास हो रहा है, यहाँ तक कि खुले तौर पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
बुधवार, 21 जनवरी, को नगर निगम की टीम ने दुकान के सामने सड़क से काफी दूरी पर लगे शेड को अतिक्रमण बताकर तोड़ने की कार्रवाई की। हैरानी इस बात की है कि इसी दौरान शहर के कई अन्य इलाकों में स्पष्ट और प्रत्यक्ष अतिक्रमण प्रशासन की निगाहों से ओझल बने रहे।
स्थानीय लोगों के अनुसार,
महापौर निवास कार्यालय से मात्र 100 मीटर दूर साईं द्वार के पास बढ़ता अतिक्रमण,
चर्च रोड का अवैध बाजार,
समृद्धि बाजार के सामने हालिया कब्जे,
और गणेश मंदिर के सामने सड़क पर कब्जा कर संचालित राम रसोई—
इन सब पर कोई सख्त कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।
आरोप यह भी है कि सड़क पर कब्जा कर राम रसोई चलाने वाले व्यापारी को निगम की प्रेस विज्ञप्ति में ‘समाजसेवी’ बताकर प्रस्तुत किया गया, जबकि नियमों का उल्लंघन प्रत्यक्ष है। यदि अतिक्रमण वास्तव में जनहित और यातायात के आधार पर हटाया जाना है, तो नीति सबके लिए समान क्यों नहीं दिखती?
यह पूरा प्रकरण केवल एक दुकान या एक वार्ड तक सीमित नहीं रह जाता। यह नगर निगम की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक मुखिया सुमित अग्रवाल और जनप्रतिनिधि नेतृत्व की निष्पक्षता पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है। शहर के विकास के दावे तब खोखले प्रतीत होते हैं, जब कार्रवाई चयनात्मक और व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के आधार पर होती दिखाई दे।
राज्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार सुशासन की बात करती है। ऐसे में दुर्ग नगर निगम में सामने आ रही यह तस्वीर कहीं सरकार के लिए “काला अध्याय” न बन जाए—यह चिंता स्वाभाविक है। शहर की जनता आज यही पूछ रही है:
क्या कानून केवल कुछ के लिए है, या सबके लिए समान?
यदि जवाब दूसरा है, तो फिर निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमसम्मत कार्रवाई की शुरुआत गृह वार्ड से क्यों नहीं होती?
दुर्ग।
मुख्यमंत्री के नाम पर जिस “सुशासन मॉडल” का ढोल पीटा जा रहा है, दुर्ग नगर निगम की हकीकत उस दावे को सरेआम चुनौती दे रही है। नगर निगम दुर्ग के आयुक्त सुमित अग्रवाल पर लगे गंभीर आरोप अब प्रशासनिक गलियारों की फुसफुसाहट नहीं रहे, बल्कि जनता के गुस्से और आक्रोश की खुली आवाज बन चुके हैं। भेदभाव, मनमानी, पद के दुरुपयोग और सत्ता के संरक्षण में चल रहे कथित भ्रष्ट तंत्र ने दुर्ग शहर को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या कानून केवल आम आदमी के लिए है?
हिंदू युवा मंच, दुर्ग के जिला प्रभारी राजा देवांगन के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जिलाधीश को एक तीखा, तथ्यपूर्ण और सवालों से भरा ज्ञापन सौंपते हुए नगर निगम आयुक्त की भूमिका पर सीधे-सीधे उंगली उठाई। ज्ञापन किसी राजनीतिक बयानबाज़ी का दस्तावेज नहीं, बल्कि उन सबूतों का पुलिंदा है जो यह दर्शाता है कि निगम में सत्ता का दुरुपयोग किस तरह खुलकर किया जा रहा है।
ज्ञापन और सामने आए दस्तावेज बताते हैं कि आयुक्त द्वारा अधीनस्थ कर्मचारियों से निजी कार्य कराए गए, व्यक्तिगत सुविधाओं के लिए दबाव बनाया गया और विरोध करने वालों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। हालात इतने बिगड़े कि एक निगम कर्मचारी को न्याय के लिए माननीय उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा। यह घटना अपने आप में निगम प्रशासन की कार्यसंस्कृति पर करारा तमाचा है।
यह कोई एक मामला नहीं है, बल्कि विवादों की पूरी श्रृंखला है—
अशोक परिहार प्रकरण: शिकायतें आईं, पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई शून्य।
लॉलीपॉप विज्ञापन बोर्ड मामला: नियमों की अनदेखी, केवल कागजी खानापूर्ति।
राम रसोई संचालन: नियमों को ताक पर रखकर संचालन।
मंदिर के सामने अवैध राम रसोई शेड: जानकारी होते हुए भी जानबूझकर आंख मूंदना।
इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि निगम में कानून समान नहीं, बल्कि “संपर्क और संरक्षण” देखकर लागू होता है।
हिंदू युवा मंच ने सवाल उठाया है कि जब एक बड़े शहर का शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी ही नियमों को रौंदता दिखाई दे, तो आम नागरिक किससे न्याय की उम्मीद करे? यदि यही सुशासन है, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि पारदर्शिता केवल पोस्टरों और मंचों तक ही क्यों सीमित है?
हिंदू युवा मंच ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक या उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन सड़क से सदन तक आंदोलन करेगा। इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
साथ ही, संगठन ने यह भी मांग की है कि—
की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी सार्वजनिक की जाए
आयुक्त को जांच पूर्ण होने तक पद से पृथक किया जाए
निगम में व्याप्त भ्रष्ट तंत्र को ध्वस्त किया जाए
आज दुर्ग की जनता यह नहीं पूछ रही कि आरोप क्यों लगे, बल्कि यह पूछ रही है कि अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या शासन इस चुनौती को स्वीकार करेगा या फिर यह मामला भी बाकी फाइलों की तरह धूल में दबा दिया जाएगा?
यह लड़ाई किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि दुर्ग की जनता के सम्मान, अधिकार और सुशासन की साख की है।
कैबिनेट के फैसलों से छत्तीसगढ़ को मिला विकास का रोडमैप
शराब नीति से लेकर विश्वस्तरीय शिक्षा, स्टार्ट-अप और स्वास्थ्य सेवाओं तक बड़े निर्णय
रायपुर। शौर्यपथ विशेष
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक में छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास को गति देने वाले अनेक दूरगामी और नीतिगत निर्णय लिए गए। इन फैसलों से जहां राज्य की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और तकनीकी नवाचार को मजबूती मिलेगी, वहीं आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का सीधा लाभ प्राप्त होगा।
आबकारी नीति 2026-27 को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की छत्तीसगढ़ आबकारी नीति के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करते हुए उससे संबंधित समस्त अनुषांगिक कार्यवाहियों के लिए विभाग को अधिकृत किया। यह निर्णय राज्य के राजस्व प्रबंधन को सुदृढ़ करने और नीति में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नवा रायपुर बनेगा शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र
कैबिनेट ने नवा रायपुर अटल नगर में राष्ट्रीय स्तर के उच्च कोटि के शैक्षणिक संस्थान की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। इसके तहत ख्यातिप्राप्त संस्था श्री विले पारले कलावनी मंडल (SVKM) को उनके नरसी मोंजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान (NMIMS) की स्थापना हेतु सेक्टर-18 में लगभग 40 एकड़ भूमि 90 वर्षों की लीज पर आवंटित करने की स्वीकृति दी गई।
वर्ष 1934 से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत SVKM देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं में शामिल है, जिसके 30 से अधिक शैक्षणिक संस्थान संचालित हैं और एक लाख से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वर्ष 2025 की NIRF यूनिवर्सिटी रैंकिंग में 52वां स्थान प्राप्त करने वाली इस संस्था की नवा रायपुर में स्थापना से छत्तीसगढ़ में आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और वैश्विक स्तर की शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
स्टार्ट-अप और आईटी सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट
राज्य को तकनीकी नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में मंत्रिपरिषद ने सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ एमओयू कर नवा रायपुर में चार नवीन उद्यमिता केंद्रों की स्थापना का निर्णय लिया। इससे राज्य में आईटी/आईटीईएस उद्योग और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिलेगा।
इन केंद्रों के माध्यम से आगामी 3 से 5 वर्षों में 133 डोमेन-विशेष स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा दिया जाएगा। एआई, मेडटेक (हर्बल मेडिसिन एवं वन उत्पाद आधारित), स्मार्ट सिटी और स्मार्ट एग्री जैसे क्षेत्रों में युवाओं को अवसर मिलेंगे। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास (ESDD) केंद्र की स्थापना से हर वर्ष 30 से 40 हार्डवेयर स्टार्ट-अप और एमएसएमई को तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता सुधार पर विशेष जोर
मंत्रिपरिषद ने राज्य के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए बड़े निर्णय लिए। जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में लैब सेवाओं को सुदृढ़ और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि निर्धारित मानकों के अनुसार जांचों की संख्या और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हो।
सुशासन की दिशा में ठोस कदम
कैबिनेट के ये निर्णय स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास, सुशासन, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। नवा रायपुर को शिक्षा और स्टार्ट-अप का हब बनाने के साथ-साथ आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की यह पहल छत्तीसगढ़ के भविष्य को नई दिशा देने वाली साबित होगी।
दुर्ग। शौर्यपथ
छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदामों से करोड़ों रुपये मूल्य के धान के कथित रूप से "मुसवा (चूहा)" द्वारा नष्ट किए जाने के भाजपा सरकार के दावे के खिलाफ दुर्ग में कांग्रेस ने ऐसा प्रतीकात्मक और राजनीतिक प्रतिकार किया, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया। किसानों की मेहनत पर पर्दा डालने और धान घोटाले की जिम्मेदारी चूहों पर डालने के आरोपों के बीच जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के नेतृत्व में मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को एक अनोखा "मुसवा प्रदर्शन" आयोजित किया गया।
राजीव भवन से कलेक्टर कार्यालय तक ढोल-नगाड़ों, नारों और प्रतीकात्मक झांकियों के साथ निकली यह रैली पूरी तरह राजनीतिक संदेश से भरी रही। प्रदर्शन का केंद्र बनी "चूहा झांकी", जिसमें चूहे के वेश में सजे कार्यकर्ता नाचते-गाते आगे बढ़े और हाथों में धान लेकर यह जताते रहे कि भाजपा सरकार अपनी नाकामी और भ्रष्टाचार को "चूहा खा गया" कहकर छुपाने की कोशिश कर रही है।
इस प्रदर्शन में दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल की भूमिका सबसे प्रमुख रही। उन्होंने कहा कि धान किसानों की मेहनत का प्रतीक है और उसे चूहों के खाते में डालना सरकार की असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। "यदि सरकार का दावा है कि धान चूहे खा गए, तो आज कांग्रेस वही चूहे सरकार को सौंप रही है। अब जवाब सरकार दे," उन्होंने तीखे शब्दों में कहा। धीरज बाकलीवाल ने इसे केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि किसानों के आत्मसम्मान पर सीधा हमला बताया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने प्रतीकात्मक रूप से पिंजरे में बंद चूहे प्रशासन को सौंपे। इन चूहों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि असल जिम्मेदारी किसी जानवर की नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की है। कलेक्टर कार्यालय परिसर में भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश और किसान आक्रोश साफ दिखाई दिया।
इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष ने कहा कि सरकार धान खरीदी की समय-सीमा नहीं बढ़ा रही है और टोकन व्यवस्था को सीमित रखकर किसानों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है और बड़ी मात्रा में धान खरीदी से बाहर रह जाने का खतरा है।
प्रदर्शन के बाद दुर्ग कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें करोड़ों के धान घोटाले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों व मंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई, किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित करने, टोकन सीमा बढ़ाने और खरीदी की समय-सीमा में विस्तार की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।
कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार ने किसानों के हित में तुरंत निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेशव्यापी और उग्र रूप लेगा। दुर्ग में निकली यह "मुसवा बारात" अब भाजपा सरकार की कथित विफलता, भ्रष्टाचार और किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ एक मजबूत राजनीतिक प्रतीक बनकर सामने आ गई है।
विधायक ललित चंद्राकर एवं महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
दुर्ग / शौर्यपथ / श्री रामलला दर्शन (अयोध्या धाम) योजनाÓ के तहत आज दुर्ग जिले से रामभक्तों का एक बड़ा जत्था स्पेशल ट्रेन से अयोध्या के लिए रवाना हुआ। जय श्री राम नारों से गूंजता दुर्ग रेलवे स्टेशन से 182 श्रद्धालुओं को ट्रेन के माध्यम से रवाना किया गया।
दुर्ग रेलवे स्टेशन से श्रद्धालुओं से भरी स्पेशल ट्रेन को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व विधायक श्री ललित चंद्राकर, महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम के दौरान स्टेशन परिसर में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। यात्रा से पहले सभी यात्रियों को भोजन, पेयजल, चिकित्सकीय सुविधा एवं आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं। प्रशासन द्वारा पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा और सुविधा की विशेष व्यवस्था की गई है। इस अवसर पर गणमान्य नागरिक एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
चार फरार आरोपियों की पुलिस तलाश जारी
फर्जी वाहन, ओवरलोडिंग व रिसायक्लिंग के मामले में जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
मुंगेली / शौर्यपथ / मुंगेली जिले में धान खरीदी एवं परिवहन के मामले में गड़बड़ी के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। आईसीसीसी मार्कफेड रायपुर से प्राप्त अलर्ट के आधार पर की गई जांच में धान के अवैध ओवरलोडिंग, फर्जी वाहनों से परिवहन तथा रिसायक्लिंग के गंभीर मामले उजागर हुए हैं। जांच में यह सामने आया कि धान उठाव करने वाले वाहनों द्वारा वास्तविक क्षमता से 200 प्रतिशत से लेकर 1116 प्रतिशत तक अधिक ओवरलोडिंग कर अवैध परिवहन किया गया।
कलेक्टर श्री कुंदन कुमार एवं पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल के निर्देशानुसार खाद्य विभाग एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम द्वारा की गई विस्तृत जांच में राइस मिलरों, समिति प्रबंधकों एवं अन्य संलिप्त व्यक्तियों द्वारा संगठित रूप से फर्जीवाड़ा कर शासन को 8 करोड़ 14 लाख रुपए से अधिक की आर्थिक क्षति पहुंचाने का खुलासा हुआ है। इस गंभीर प्रकरण में विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज कर 04 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कुछ आरोपी फरार हैं।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों द्वारा जानबूझकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए, पीडीएस चावल का वितरण नहीं किया गया, फर्जी वाहन नंबरों के माध्यम से धान का परिवहन दर्शाया गया तथा वास्तविक मात्रा से अधिक धान उठाव दिखाकर शासन को नुकसान पहुंचाया गया। प्रारंभिक जांच में लगभग 11 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी एवं परिवहन में अनियमितता के प्रमाण मिले हैं।
नवागांव घुठेरा समिति द्वारा उपलेटा राइस मिल से मिलीभगत कर 74 जीपीएस युक्त एवं 40 से अधिक बिना जीपीएस वाहनों के माध्यम से धान का अवैध परिवहन किया गया। इसी प्रकार, सिंघनुपरी उपार्जन केन्द्र द्वारा एसएस फूड के साथ मिलकर 4,542 क्विंटल धान का बिना जीपीएस वाहन से परिवहन, छटन उपार्जन केन्द्र द्वारा दीपक राइस मिल एवं नवकार मिल के साथ मिलकर 3,589 क्विंटल धान का अवैध परिवहन तथा झगरहट्टा उपार्जन केन्द्र द्वारा वर्धमान राइस मिलर्स के साथ अनियमितता किए जाने पर कार्रवाई की गई है।
इन मामलों में अब्दुल सत्तार पिता गुलाम कादर निवासी दाउपारा, विकास पाण्डेय पिता विनय पाण्डेय निवासी भटगांव-मुंगेली, महावीर जैन पिता ललित जैन, संतोष साहू पिता बलदाऊ, श्रीधर परिहार पिता हितकिशोर को गिरफ्तार किया गया है। वहीं अब्दुल समद, ललित जैन, नवेन्द मेनन एवं अनिल जांगड़े फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश पुलिस द्वारा की जा रही है।
अन्य थानों में भी दर्ज हुए प्रकरण
थाना फास्टरपुर में अपराध क्रमांक 12/2026 एवं थाना लालपुर में अपराध क्रमांक 09/2026 के तहत भी धान उपार्जन केन्द्रों में फर्जी परिवहन, धोखाधड़ी एवं अनियमितताओं के मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में भी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।
जिला प्रशासन का कहना है कि धान खरीदी एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार अथवा फर्जीवाड़ा किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी तथा फरार आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।
'वीबीजीरामजीÓ के नाम पर रोजगार गारंटी खत्म करने का आरोप, दुर्ग में उबाल
दुर्ग / शौर्यपथ।
केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का स्वरूप बदलकर वीबीजीरामजी किए जाने के विरोध में कांग्रेस का आक्रोश तेज हो गया है। दुर्ग जिला युवा कांग्रेस (ग्रामीण) के अध्यक्ष जयंत देशमुख के नेतृत्व में युवा कांग्रेस ने दुर्ग सांसद विजय बघेल के निवास का घेराव करने की चेतावनी दी है। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर 7 दिनों के भीतर ठोस निर्णय लेने की मांग की गई है। चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो सांसद निवास का घेराव किया जाएगा।
कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे 'मनरेगा बचाओ संग्रामÓ अभियान के तहत युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मनरेगा में किए गए बदलावों से गरीब मजदूरों की रोजगार गारंटी को कमजोर किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा बजट कैपिंग कर योजना की मांग-आधारित प्रकृति को समाप्त किया जा रहा है, वहीं फंडिंग का बोझ राज्यों पर डालकर केंद्र अपना दायित्व निभाने से पीछे हट रहा है।
दुर्ग ग्रामीण युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष जयंत देशमुख ने कहा कि मनरेगा देश के गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों की जीवनरेखा है, लेकिन केंद्र सरकार इसे योजनाबद्ध तरीके से कमजोर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 100 दिनों की रोजगार गारंटी को 125 दिनों का भ्रम बताकर प्रचार किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में बजट कटौती, बढ़ता केंद्रीकरण और राज्यों पर दबाव डालकर मजदूरों के अधिकार छीने जा रहे हैं।
जयंत देशमुख ने दुर्ग सांसद विजय बघेल से स्पष्ट शब्दों में मांग की कि वे केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर मनरेगा में किए गए बदलावों को वापस करवाएं, अन्यथा नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि यदि 7 दिनों के भीतर कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो युवा कांग्रेस सांसद निवास का घेराव कर आंदोलन को और तेज करेगी।
इस विरोध प्रदर्शन में प्रभारी आस मोहम्मद खान, इंदु वर्मा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष गुरदीप सिंह भाटिया, ब्लॉक अध्यक्ष गोपी वर्मा, यशवंत देशमुख, हेमंत साहू, पंकज सिंह, आशीष वर्मा, शशांक साहू, समीर साहू, नज़रुल इस्लाम, अहमद चौहान, दीपांकर साहू, सूरज, फिरोज खान, विकास साहू, आकाश सेन, राम वर्मा, कय्यूम खान, प्रवीण देवांगन, राकेश निषाद, प्रांजल कुर्रे, शुभम देशमुख, राहुल साहू सहित सैकड़ों युवा कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
युवा कांग्रेस ने दो टूक कहा कि गरीब मजदूरों के हक पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो यह आंदोलन सड़क से संसद तक ले जाया जाएगा।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय पटल पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करने के उद्देश्य से रायपुर साहित्य उत्सव–2026 का भव्य आयोजन 23 से 25 जनवरी 2026 तक नवा रायपुर अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में किया जा रहा है। आम नागरिकों, साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों एवं युवाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा उत्सव स्थल तक सुगम एवं नि:शुल्क यातायात की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग बिना किसी बाधा के इस तीन दिवसीय साहित्यिक महोत्सव में सहभागिता कर सकें।
इस व्यवस्था के अंतर्गत रायपुर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से पुरखौती मुक्तांगन, नवा रायपुर तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कुल 6 विशेष बस रूट निर्धारित किए गए हैं। ये बसें तीनों दिन सुबह 9 बजे, 10.30 बजे, दोपहर 12 बजे, 1.30 बजे, 3 बजे तथा शाम 4.30 बजे निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संचालित होंगी।
रूट क्रमांक 1 टाटीबंध से प्रारंभ होकर सरोना, रायपुरा चौक, कुशालपुर, भाठागांव चौक, संतोषी नगर चौक, पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए पुरखौती मुक्तांगन पहुंचेगा।
रूट क्रमांक 2 रेलवे स्टेशन से फाफाडीह चौक, डी. नगर, मेकाहारा, शास्त्री चौक, कालीबाड़ी, सिद्धार्थ चौक, पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए उत्सव स्थल तक जाएगा।
रूट क्रमांक 3 रेलवे स्टेशन से फाफाडीह चौक, मेकाहारा, घड़ी चौक, गांधी उद्यान, भगत सिंह चौक, तेलीबांधा, अवंतीबाई चौक, पं. दीनदयाल चौक, वीआईपी चौक, कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी, जोरा, नवा रायपुर एवं कैपिटल कॉम्प्लेक्स के मार्ग से पुरखौती मुक्तांगन पहुंचेगा।
इसी प्रकार रूट क्रमांक 4 यूनिवर्सिटी गेट से साइंस कॉलेज, आयुर्वेदिक कॉलेज, आश्रम, आमापारा, आज़ाद चौक, कालीबाड़ी, सिद्धार्थ चौक, पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए उत्सव स्थल तक संचालित होगा।
रूट क्रमांक 5 कचना से मोवा, लोधीपारा, पंडरी, शास्त्री चौक, कालीबाड़ी चौक, सिद्धार्थ चौक, पचपेड़ी नाका, महावीर नगर, तेलीबांधा, अवंतीबाई चौक, पं. दीनदयाल चौक, वीआईपी चौक, कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी, जोरा, नवा रायपुर एवं कैपिटल कॉम्प्लेक्स के रास्ते पुरखौती मुक्तांगन पहुंचेगा।
रूट क्रमांक 6 भाठागांव से पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए उत्सव स्थल तक संचालित किया जाएगा।
तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव–2026 छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा, लोक परंपराओं और साहित्यिक चेतना को नई पीढ़ी से जोडऩे का सशक्त माध्यम बनेगा। इस अवसर पर देशभर से प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, कथाकार, विचारक, कलाकार, पत्रकार, रंगकर्मी एवं साहित्य प्रेमी सहभागिता करेंगे। उत्सव के दौरान साहित्यिक संवाद, विचार-मंथन, समकालीन विषयों पर परिचर्चाएँ, कविता पाठ, कथा सत्र, पुस्तक विमोचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं कला-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे, जो साहित्यिक और वैचारिक विमर्श को नई दिशा देंगे।
उत्सव के अंतर्गत ओपन माइक सत्र का भी आयोजन किया जाएगा, जिसके माध्यम से आम नागरिकों, युवाओं एवं नवोदित रचनाकारों को कविता, कहानी, गीत, विचार अथवा नाट्य अंश के रूप में अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, राज्य के विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में उत्सव की जानकारी व्यापक रूप से साझा की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों और युवाओं में साहित्य, भाषा और संस्कृति के प्रति रुचि विकसित हो सके।
आयोजन के दौरान देश के ख्यातिनाम प्रकाशन समूहों की पुस्तक स्टॉल भी लगाई जाएंगी, जहां पाठकों को विविध विषयों, भाषाओं और विधाओं की पुस्तकों से रूबरू होने और उन्हें खरीदने का अवसर मिलेगा।
रायपुर साहित्य उत्सव–2026 में सहभागिता के लिए इच्छुक नागरिक, विद्यार्थी एवं साहित्य प्रेमी आधिकारिक वेबसाइट 222.ह्म्ड्डद्बश्चह्वह्म्ह्यड्डद्धद्बह्ल4ड्डह्वह्लह्यड्ड1.शह्म्द्द के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
