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रायपुर / शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष एवं किसान-हितैषी बनाए रखने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा अवैध धान परिवहन, भंडारण, विक्रय एवं मिलिंग अनियमितताओं के विरुद्ध राज्यव्यापी सघन अभियान चलाया जा रहा है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप राजस्व, खाद्य, मंडी एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीमें अंतर्राज्यीय सीमाओं, धान खरीदी केंद्रों एवं राइस मिलों पर सतत निगरानी रखते हुए कठोर कार्रवाई कर रही हैं।
खाद्य सचिव श्रीमती रीना कंगाले ने कहा कि शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि धान उपार्जन का लाभ केवल वास्तविक किसानों को ही मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी टोकन, बिचौलियों, मिलावट, अंतर्राज्यीय अवैध परिवहन तथा कस्टम मिलिंग में गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध प्रारंभिक स्तर पर ही सख़्त कार्रवाई की जा रही है। नियमों के उल्लंघन पर छत्तीसगढ़ चावल उपार्जन आदेश 2016, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 एवं अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इसी क्रम में महासमुंद जिले में सरायपाली क्षेत्र के रेहटीखोल में उड़ीसा से अवैध रूप से लाए जा रहे 694 बोरा (लगभग 319 क्विंटल) धान से भरे एक ट्रक को जब्त किया गया। आवश्यक दस्तावेज नहीं पाए जाने पर वाहन को थाना सिंघोड़ा के सुपुर्द किया गया। जिले में बीते दो दिनों में कुल 2986 कट्टा अवैध धान जब्त किया गया है।
धमतरी जिले में धान उपार्जन में गंभीर अनियमितता पाए जाने पर प्राथमिक कृषि सहकारी साख समिति मर्यादित मोहदी के समिति प्रबंधक एवं ऑपरेटर को सेवा से पृथक कर दिया गया। निरीक्षण में मिलावटयुक्त धान, टोकन दुरुपयोग एवं अवैध बिक्री के प्रकरण सामने आए थे।
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम बिलारी (सोनाखान) में संयुक्त टीम द्वारा 75 कट्टा धान सहित एक पिकअप वाहन जब्त किया गया, जबकि सरगुजा जिले में भौतिक सत्यापन के दौरान दो राइस मिलों में धान की भारी कमी पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ की गई है।
सबसे बड़ी कार्रवाई बिलासपुर जिले में सामने आई, जहां धान उठाव में गंभीर अनियमितता पर अमरनाथ एग्रो प्रोडक्ट राइस मिल को सील कर संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई। मौके से 54 हजार क्विंटल से अधिक धान जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 16 करोड़ रुपये है। खाद्य विभाग के अनुसार जिले में अब तक 56 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का धान जब्त किया जा चुका है।
राज्य शासन ने दो टूक कहा है कि धान खरीदी, परिवहन, भंडारण एवं मिलिंग में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति, संस्था अथवा मिल संचालक के विरुद्ध बिना किसी ढिलाई के कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025 से दूरस्थ गाँवों को सुलभ आवागमन की सौगात
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अंचलों में आवागमन की सुविधा सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025 का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। यह योजना उन ग्रामों तक सार्वजनिक परिवहन पहुँचाने की दिशा में एक निर्णायक पहल है, जहाँ अब तक यात्री बस सुविधा उपलब्ध नहीं थी। योजना के प्रथम चरण में बस्तर एवं सरगुजा संभाग के जिलों को सम्मिलित किया गया है।
अब तक मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत कुल 57 चयनित मार्गों पर 57 बसों का संचालन प्रारंभ किया जा चुका है। इन बसों के माध्यम से कुल 330 नए गाँवों तक पहली बार यात्री बस सुविधा पहुँची है, जिससे ग्रामीण जनजीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
योजना का प्रमुख उद्देश्य ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों को जनपद मुख्यालय, नगरीय क्षेत्र, तहसील मुख्यालय तथा जिला मुख्यालयों से जोडऩा है, जहाँ पूर्व में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं थी। इससे ग्रामीण नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं तक सुगम पहुँच सुनिश्चित हो रही है।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के अंतर्गत बस संचालकों को राज्य शासन द्वारा प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। प्रथम वर्ष ?26 प्रति किलोमीटर, द्वितीय वर्ष ?24 प्रति किलोमीटर तथा तृतीय वर्ष ?22 प्रति किलोमीटर की दर से सहायता दी जा रही है।
इसके अतिरिक्त योजना के तहत गासिक कर में पूर्णत: छूट अधिकतम तीन वर्षों की अवधि के लिए प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण मार्गों पर बस संचालन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाया जा सके।
मार्ग चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है। इस योजना के अंतर्गत मार्गों का चयन जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा के आधार पर राज्य स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है, ताकि वास्तविक आवश्यकता वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता मिल सके।
चयनित मार्गों पर बस संचालन हेतु निविदा प्रक्रिया अपनाई जाती है। निविदा के माध्यम से न्यूनतम वित्तीय दर प्रस्तावित करने वाले पात्र आवेदक का चयन किया जाता है, जिससे शासन पर न्यूनतम वित्तीय भार पड़े और सेवा सतत बनी रहे।
निविदा में चयनित आवेदक से विधिवत परमिट आवेदन प्राप्त कर सुनवाई की प्रक्रिया के उपरांत बस संचालन हेतु परमिट जारी किया जाता है। इससे नियामकीय प्रक्रिया का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाता है। वर्तमान में 12 नवीन ग्रामीण मार्गों पर बस संचालन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। इसके अतिरिक्त 15 नए ग्रामीण मार्गों का चयन कर लिया गया है, जिन पर बस संचालन हेतु निविदाएँ आमंत्रित की गई हैं।
जिलावार स्थिति की बात करें तो सुकमा में 8, नारायणपुर में 4, जगदलपुर में 2, कोण्डागांव में 4, कांकेर में 6, दंतेवाड़ा में 7, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 2, सूरजपुर में 6, कोरिया में 5, जशपुर में 7, बलरामपुर में 4 तथा अंबिकापुर में 2 बसों का संचालन किया जा रहा है। इस प्रकार कुल 57 मार्गों पर 57 बसें संचालित हैं।
आगामी कार्ययोजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 200 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाकर समावेशी विकास, सामाजिक सशक्तिकरण और आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान करेगा।
नई दिल्ली / भाजपा मुख्यालय में आज एक ऐतिहासिक समारोह हुआ, जहां 45 वर्षीय नितिन नबीन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का जिम्मा संभाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, "नितिन नबीन मेरे बॉस हैं। संगठन के मामलों में वे मेरा ष्टक्र (चरित्र रिपोर्ट) लिखेंगे और मैं उनके मार्गदर्शन में कार्य करूंगा।" यह बयान भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र और युवा नेतृत्व को मजबूत करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया।
समारोह में पीएम मोदी ने नितिन नबीन को "मिलेनियल" नेता करार दिया, जो आधुनिक तकनीक और बदलती अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं। नबीन भाजपा के 12वें और अब तक के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनका निर्विरोध चयन हुआ, जिसमें उनके पक्ष में 37 नामांकन सेट दाखिल किए गए। यह चयन पार्टी की एकजुटता को दर्शाता है।
पीएम मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें
हृष्ठ्र में तालमेल : नबीन की जिम्मेदारी केवल भाजपा तक सीमित नहीं, बल्कि हृष्ठ्र सहयोगियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
विकसित भारत का संकल्प : अगले 25 वर्षों को निर्णायक बताते हुए पीएम ने विश्वास जताया कि नबीन के नेतृत्व में पार्टी 'विकसित भारतÓ लक्ष्य हासिल करेगी।
परिवारवाद पर प्रहार : राजनीति में परिवारवाद को अभिशाप बताते हुए मोदी ने कहा, "मैं 1 लाख ऐसे युवाओं को लाना चाहता हूं, जिनके परिवार का कोई राजनीतिक इतिहास न हो।"
नितिन नबीन का राजनीतिक सफर
बिहार से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले पहले नेता नितिन नबीन पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार पांच बार (2006, 2010, 2015, 2020, 2025) विधायक चुने गए हैं। संगठन में उनका लंबा अनुभव रहा- वे छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी, भारतीय जनता युवा मोर्चा (क्चछ्वङ्घरू) के राष्ट्रीय महासचिव और बिहार सरकार में पथ निर्माण व नगर विकास मंत्री रह चुके हैं। जेपी नड्डा की जगह लेते हुए वे पार्टी को नई ऊर्जा प्रदान करने को तैयार हैं।
कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा के अलावा भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री जैसे योगी आदित्यनाथ, भूपेंद्र पटेल और हिमंत बिस्वा सरमा उपस्थित रहे। भाजपा सूत्रों के अनुसार, यह नियुक्ति 2029 लोकसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा है, जिसमें युवा-केंद्रित रणनीति पर जोर दिया जाएगा।
इस समाचार को और आकर्षक बनाने के लिए क्या कोई विशेष कोण या अतिरिक्त विवरण जोडऩा चाहेंगे, जैसे बिहार-छत्तीसगढ़ फोकस या तुलनात्मक विश्लेषण?
व्यंगात्मक लेख
दुर्ग। नगर पालिका निगम में इन दिनों विकास, स्वच्छता या जनसमस्याओं की नहीं, बल्कि "चाय पहले क्यों नहीं आई" जैसे गूढ़ प्रशासनिक मुद्दे की चर्चा जोरों पर है। बताया जा रहा है कि मात्र चाय समय पर न पहुँचने की ‘गंभीर चूक’ पर एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को निलंबन और ट्रांसफर की धमकी दे दी गई। कर्मचारी भले निलंबित न हुआ हो, पर उसकी कुर्सी ज़रूर खिसका दी गई—और यही साबित करता है कि चाय हल्की हो सकती है, पर सत्ता की चुस्की भारी होती है।
नगर निगम में यह कोई पहला मामला नहीं है। हाल ही में आयुक्त द्वारा अधीनस्थ कर्मचारियों से घरेलू कार्य कराए जाने का मामला जब अदालत की दहलीज़ तक पहुँचा, तब प्रदेश भर में बहस छिड़ी। अब उसी बहस की आँच में यह पुराना किस्सा फिर से उबल पड़ा है—इस बार चाय के उबाल के साथ।
व्यंग्य यह है कि पाँच साल के लिए चुने गए जनप्रतिनिधि यदि चाय के कप से ही प्रशासनिक ताकत का प्रदर्शन करने लगें, तो शहर की दशा-दिशा का अंदाज़ा लगाना कठिन नहीं। सवाल यह नहीं कि चाय पहले क्यों नहीं आई, सवाल यह है कि अहंकार पहले क्यों आ गया?
नैतिकता की किताब में शायद यह अध्याय नहीं मिलता कि किसी चपरासी को ‘मेरी चाय’ के नाम पर धमकाया जाए। पर निगम की अनकही पाठ्यक्रम में यह अध्याय पढ़ाया जा रहा है—जहाँ हँसी-मज़ाक में कहा जाता है, “काम कर दे, नहीं तो नौकरी से निकलवा दूँगा।” मज़ाक की आड़ में यह वाक्य, कर्मचारियों के लिए डर का स्थायी पोस्टर बन जाता है।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वैसे ही सत्ता के गलियारों में सहमे रहते हैं। ऐसे में यदि जनप्रतिनिधि अपने कार्यकाल को चाय-ट्रांसफर मॉडल से चलाएँ, तो प्रशासनिक अनुशासन नहीं, तानाशाही की सुगंध आती है—भले ही कप में इलायची पड़ी हो।
जिस कर्मचारी का ट्रांसफर हुआ, उसने प्रतिरोध नहीं किया। चुपचाप नई जगह काम संभाल लिया। शायद इसलिए कि उसे मालूम था—यह शहर है, यहाँ चाय ठंडी हो सकती है, पर सत्ता का मिज़ाज नहीं।
आज जब निगम और कर्मचारी के बीच के मामले अदालत तक पहुँच चुके हैं, तब यह किस्सा फिर से हँसी-मज़ाक में उछाला जा रहा है। पर हँसी के पीछे जो कड़वाहट है, वह यह सवाल छोड़ जाती है—
अगर चाय के लिए धमकी है, तो शहर के लिए क्या?
व्यंग्य यहीं खत्म होता है, जवाब शहर को देना है।
अवैध परिवहन, भंडारण व मिलिंग पर शासन सख़्त, कई जिलों में बड़ी जब्ती
रायपुर / शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष एवं किसान-हितैषी बनाए रखने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा अवैध धान परिवहन, भंडारण, विक्रय एवं मिलिंग अनियमितताओं के विरुद्ध राज्यव्यापी सघन अभियान चलाया जा रहा है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप राजस्व, खाद्य, मंडी एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीमें अंतर्राज्यीय सीमाओं, धान खरीदी केंद्रों एवं राइस मिलों पर सतत निगरानी रखते हुए कठोर कार्रवाई कर रही हैं।
खाद्य सचिव श्रीमती रीना कंगाले ने कहा कि शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि धान उपार्जन का लाभ केवल वास्तविक किसानों को ही मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी टोकन, बिचौलियों, मिलावट, अंतर्राज्यीय अवैध परिवहन तथा कस्टम मिलिंग में गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध प्रारंभिक स्तर पर ही सख़्त कार्रवाई की जा रही है। नियमों के उल्लंघन पर छत्तीसगढ़ चावल उपार्जन आदेश 2016, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 एवं अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इसी क्रम में महासमुंद जिले में सरायपाली क्षेत्र के रेहटीखोल में उड़ीसा से अवैध रूप से लाए जा रहे 694 बोरा (लगभग 319 क्विंटल) धान से भरे एक ट्रक को जब्त किया गया। आवश्यक दस्तावेज नहीं पाए जाने पर वाहन को थाना सिंघोड़ा के सुपुर्द किया गया। जिले में बीते दो दिनों में कुल 2986 कट्टा अवैध धान जब्त किया गया है।
धमतरी जिले में धान उपार्जन में गंभीर अनियमितता पाए जाने पर प्राथमिक कृषि सहकारी साख समिति मर्यादित मोहदी के समिति प्रबंधक एवं ऑपरेटर को सेवा से पृथक कर दिया गया। निरीक्षण में मिलावटयुक्त धान, टोकन दुरुपयोग एवं अवैध बिक्री के प्रकरण सामने आए थे।
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम बिलारी (सोनाखान) में संयुक्त टीम द्वारा 75 कट्टा धान सहित एक पिकअप वाहन जब्त किया गया, जबकि सरगुजा जिले में भौतिक सत्यापन के दौरान दो राइस मिलों में धान की भारी कमी पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ की गई है।
सबसे बड़ी कार्रवाई बिलासपुर जिले में सामने आई, जहां धान उठाव में गंभीर अनियमितता पर अमरनाथ एग्रो प्रोडक्ट राइस मिल को सील कर संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई। मौके से 54 हजार क्विंटल से अधिक धान जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 16 करोड़ रुपये है। खाद्य विभाग के अनुसार जिले में अब तक 56 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का धान जब्त किया जा चुका है।
राज्य शासन ने दो टूक कहा है कि धान खरीदी, परिवहन, भंडारण एवं मिलिंग में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति, संस्था अथवा मिल संचालक के विरुद्ध बिना किसी ढिलाई के कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्वामी आत्मानंद विद्यालय, नयापारा की छात्रा को दिल्ली आमंत्रण
राज्य में पंजीयन को लेकर उत्साहपूर्ण सहभागिता
रायपुर / शौर्यपथ / परीक्षा पे चर्चा के नवें संस्करण में इस वर्ष भी विद्यार्थियों, पालकों एवं शिक्षकों में व्यापक उत्साह देखने को मिला। पंजीयन की अंतिम तिथि 11 जनवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ राज्य से कुल 29.29 लाख प्रतिभागियों ने पोर्टल पर अपना पंजीयन कराया। यह आंकड़ा गत वर्ष की तुलना में 7.16 लाख अधिक है, जो कार्यक्रम के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
गत वर्ष पंजीयन के मामले में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर रहा था, जबकि इस वर्ष अंडमान एवं निकोबार, चंडीगढ़ एवं लक्षद्वीप के बाद राज्य को चौथा स्थान प्राप्त हुआ है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इस वर्ष राज्य से 1.41 लाख पालकों द्वारा पंजीयन किया गया, जो पालकों की शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का स्पष्ट संकेत है।
प्रथम चरण की चयन प्रक्रिया
प्रथम चरण में विद्यार्थियों के चयन हेतु जिलों से विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों से संबंधित वीडियो आमंत्रित किए गए थे। निर्धारित तिथि तक कुल 171 विद्यार्थियों के वीडियो प्राप्त हुए। गठित समिति द्वारा इन वीडियो का गहन परीक्षण किया गया, जिसके उपरांत 18 विद्यार्थियों का चयन कर उनका विवरण केंद्र को भेजा गया। चयनित विद्यार्थियों में पीएमश्री विद्यालय से 04, सेजस से 06, निजी विद्यालयों से 04, शासकीय विद्यालयों से 03 तथा केजीबीव्ही से 01 विद्यार्थी शामिल हैं।
कु. सृष्टि साहू का केंद्रीय स्तर पर चयन
केंद्र की समिति द्वारा महासमुंद जिले के स्वामी आत्मानंद विद्यालय, नयापारा की गणित संकाय की कक्षा 12वीं की छात्रा कु. सृष्टि साहू का चयन किया गया है। कु. सृष्टि साहू, पिता श्री नरेन्द्र कुमार साहू एवं माता श्रीमती दिनेश्वरी साहू को 21 जनवरी 2026 को दिल्ली में आयोजित परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में सम्मिलित होने हेतु आमंत्रित किया गया है।
प्रशासन एवं शाला परिवार की प्रतिक्रिया
कु. सृष्टि साहू के चयन पर जिला कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगहे ने उनसे भेंट कर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। शाला की प्राचार्या श्रीमती अमी रूफस ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि कु. सृष्टि एक अनुशासित, परिश्रमी एवं अध्ययनशील छात्रा है। उन्होंने यह भी बताया कि कु. सृष्टि बाल दिवस के अवसर पर शाला नायक की भूमिका में प्राचार्य की कुर्सी पर बैठकर नेतृत्व प्रदान कर चुकी है।
परिवार का गर्व और सहयोग
कु. सृष्टि साहू के पिता शासकीय विद्यालय में शिक्षक हैं तथा माता गृहणी हैं। दोनों ने अपनी पुत्री के चयन पर गर्व एवं प्रसन्नता व्यक्त की है और इसे परिवार के साथ-साथ जिले के लिए भी गौरव का विषय बताया है।
शाला एवं विभागीय प्रयासों की सराहना
शाला प्राचार्य के अनुसार विद्यालय के सभी शिक्षकों द्वारा परीक्षा पे चर्चा में विद्यार्थियों के पंजीयन हेतु विशेष प्रयास किए गए। विद्यालय में 100 प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित किया गया तथा विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास भी कराया गया, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया।
कु. सृष्टि साहू के चयन पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री विजय कुमार लहरे एवं शिक्षा विभाग द्वारा हार्दिक बधाई दी गई। छात्रा के दिल्ली प्रवास से संबंधित आवश्यक व्यवस्थाएं समय-सीमा में पूर्ण कराने में जिला परियोजना समन्वयक श्री रेखराज शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा रायपुर द्वारा भी महासमुंद जिले को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं प्रेषित की गई हैं।
आगामी चरण की प्रतीक्षा
परीक्षा पे चर्चा 2026 के आगामी चरणों में और विद्यार्थियों के चयन की प्रक्रिया जारी है, जिसके परिणामों की प्रतीक्षा की जा रही है।
20 जनवरी से 5 फरवरी तक मेगा एक्सपो, प्रदेशभर के नागरिकों को मिलेगा सीधा लाभ
रायपुर / शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ के वाहन खरीदारों के लिए बड़ी सौगात के रूप में ऑटो एक्सपो–2026 का शुभारंभ 20 जनवरी से किया जा रहा है। परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के तत्वावधान में यह मेगा ऑटो एक्सपो 20 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक श्री राम बिजनेस पार्क, सड्डू, रायपुर में आयोजित होगा।
इस अवधि में एक्सपो के अंतर्गत विक्रय होने वाले वाहनों पर 50 प्रतिशत जीवनकाल आरटीओ टैक्स में छूट प्रदान की जा रही है, जिससे आम नागरिकों को वाहन खरीदी पर उल्लेखनीय आर्थिक राहत मिलेगी। एक्सपो की खास बात यह है कि इसका लाभ प्रदेश के सभी जिलों के नागरिक अपने-अपने क्षेत्र के पंजीकृत डीलरों के माध्यम से भी ले सकेंगे और वाहन का पंजीयन अपने गृह जिले के आरटीओ कार्यालय में करा सकेंगे।
मेगा ऑटो एक्सपो में रायपुर सहित अन्य जिलों के कुल 266 डीलर्स भाग ले रहे हैं। साथ ही देश के प्रमुख बैंक, फाइनेंस एवं इंश्योरेंस कंपनियां कम ब्याज दरों पर ऋण एवं बीमा सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। इससे उपभोक्ताओं को एक ही मंच पर बेहतर विकल्प, नई तकनीक के वाहन और किफायती सौदे मिल सकेंगे।
दुर्ग / शौर्यपथ।
ग्राम चिंगरी में आयोजित शिव महापुराण कथा के षष्ठ एवं सप्तम दिवस (अंतिम दो दिवस) अत्यंत भव्य, भावविभोर एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए। मां अंबे दुर्गा उत्सव नवयुवक मंडल एवं सर्व समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पावन कथा श्रृंखला का समापन शिव-पार्वती विवाह, गणेश एवं कार्तिकेय जन्म-विवाह, पार्थिव शिवलिंग पूजन, तर्पण, हवन तथा महाप्रसाद वितरण के साथ श्रद्धा और दिव्यता के शिखर पर पहुंचा।
कथा व्यास पं. महेंद्र पांडेय जी ने अंतिम दो दिवसों में शिव-पार्वती विवाह की अमर लीला का अत्यंत रसपूर्ण, भावनात्मक एवं प्रेरणादायी वर्णन किया। सती के आत्मदाह के पश्चात माता पार्वती का हिमालय के घर जन्म, कठोर तपस्या द्वारा भगवान शिव को पुनः प्रसन्न करना तथा दिव्य विवाह का प्रसंग श्रोताओं को भाव-विभोर कर गया। विवाह अवसर पर हिमालय द्वारा कन्यादान, देवताओं की उपस्थिति और शिव-पार्वती के पावन मिलन ने प्रेम, तप और त्याग की अमर कथा को जीवंत कर दिया।
इसके पश्चात भगवान गणेश के जन्म की मार्मिक कथा सुनाई गई। माता पार्वती द्वारा उबटन से निर्मित पुत्र गणेश का द्वारपाल बनना, शिव द्वारा अनजाने में उनका मस्तक विच्छेदन और पश्चात हाथी का मस्तक धारण कर पुनर्जीवन — इस प्रसंग ने माता की ममता और शिव की करुणा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। गणेश के विघ्नहर्ता एवं प्रथम पूज्य बनने का प्रसंग श्रद्धालुओं के हृदय में गहराई तक उतर गया।
तत्पश्चात भगवान कार्तिकेय (स्कंद) के जन्म एवं विवाह की दिव्य कथा का वर्णन हुआ। तारकासुर के अत्याचार से पीड़ित देवताओं की प्रार्थना पर शिव-पार्वती के मिलन से उत्पन्न कार्तिकेय द्वारा तारकासुर वध और धर्म की विजय का प्रसंग शक्ति, साहस और धर्मरक्षा का प्रतीक बना।
समापन अवसर पर पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने जल, दूध, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष आदि से भगवान शिव का अभिषेक किया। तदुपरांत तर्पण एवं हवन संपन्न हुआ, जिसमें पूर्वजों एवं पुण्यात्माओं की शांति के लिए आहुतियां अर्पित की गईं। कार्यक्रम के अंत में महाप्रसाद का वितरण हुआ, जिसे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं भक्ति भाव से ग्रहण किया।
यह संपूर्ण आयोजन देवी इशर गौरा-गौरी (माता पार्वती) की कृपा से संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य ग्रामवासियों की आत्मिक उन्नति, सुख-शांति एवं सामूहिक कल्याण रहा। अंतिम दो दिवसों में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच गई और पूरा ग्राम ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘जय माता दी’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
शिव महापुराण कथा की यह पावन श्रृंखला ग्राम चिंगरी के लिए एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन सिद्ध हुई, जिसने जन-जन के हृदय में शिव-पार्वती भक्ति की अमिट छाप छोड़ दी।
दुर्ग / शौर्यपथ / ग्राम चिंगरी में शिव महापुराण कथा का षष्ठ एवं सप्तम दिवस (अंतिम दो दिवस) अत्यंत भव्य, भावपूर्ण और समापन की दिव्यता से परिपूर्ण रहा। मां अंबे दुर्गा उत्सव नवयुवक मंडल एवं सर्व समाज द्वारा आयोजित इस पावन श्रृंखला का समापन शिव-पार्वती विवाह, गणेश जन्म, कार्तिकेय जन्म एवं विवाह, पार्थिव शिवलिंग पूजन, तर्पण, हवन तथा महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिससे पूरा ग्राम शिव-पार्वती की कृपा से आलोकित हो उठा।
कथा व्यास पं. महेंद्र पांडेय जी ने अंतिम दो दिवसों में शिव-पार्वती विवाह की महान लीला का रसपूर्ण वर्णन किया। सती के आत्मदाह के बाद माता पार्वती ने हिमालय के घर जन्म लिया और कठोर तप से भगवान शिव को पुनः प्रसन्न किया। विवाह अत्यंत भव्य रूप से संपन्न हुआ, जहां हिमालय ने कन्यादान किया, देवताओं ने उपस्थित होकर आशीर्वाद दिया और शिव ने पार्वती को अपनी अर्धांगिनी बनाया। यह कथा प्रेम, तपस्या और दिव्य मिलन की अमर गाथा है।
इसके पश्चात भगवान गणेश के जन्म की कथा सुनाई गई। माता पार्वती ने स्नान के समय अपने उबटन से एक बालक की रचना की और उसे अपना पुत्र घोषित किया। जब भगवान शिव आए तो गणेश ने माता की आज्ञा से द्वार रक्षक बने, जिससे क्रोधित होकर शिव ने उनका सिर काट दिया। बाद में हाथी का सिर लगाकर गणेश को पुनर्जीवित किया गया, और वे विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य बने। यह कथा माता की ममता और शिव की करुणा का प्रतीक है।
तत्पश्चात कार्तिकेय (स्कंद) के जन्म एवं विवाह की दिव्य कथा का वर्णन हुआ। तारकासुर के अत्याचार से व्यथित देवताओं की प्रार्थना पर शिव-पार्वती के मिलन से कार्तिकेय का जन्म हुआ। वे छह मुखों वाले, वीर योद्धा के रूप में प्रकट हुए और तारकासुर का संहार कर देवताओं की रक्षा की। बाद में उनका विवाह भी संपन्न हुआ, जो शक्ति और विजय का प्रतीक है।
समापन पर पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने जल, दूध, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष आदि से लिंग पूजा की। इसके बाद तर्पण एवं हवन संपन्न हुआ, जिसमें पूर्वजों और पुण्यात्माओं की शांति के लिए आहुतियां दी गईं। पूजन पश्चात महाप्रसाद वितरित किया गया, जिसे ग्रामवासियों ने भक्ति-भाव से ग्रहण किया।
यह समस्त कार्यक्रम देवी इशर गौरा गौरी (माता पार्वती) की कृपा से संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य ग्रामवासियों की आत्मोन्नति, सुख-शांति तथा पूर्वजों एवं पुण्यात्माओं की शांति प्राप्ति था। अंतिम दो दिवसों में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच गई, और पूरा ग्राम 'हर हर महादेव' तथा 'जय माता दी' के जयकारों से गूंज उठा।
यह शिव महापुराण कथा श्रृंखला ग्राम चिंगरी के लिए एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन सिद्ध हुई, जिससे सभी के हृदय में शिव-पार्वती की भक्ति स्थायी रूप से बस गई।
दुर्ग। शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट ।
पूर्व महापौर पर नियम विरुद्ध आवंटन और अनियमितताओं के आरोप लगाने वाली वर्तमान महापौर श्रीमती अलका बाघमार के सामने अब वही मामला निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। बस स्टैंड जैसे अति-व्यस्त और बेशकीमती इलाके में संचालित राम रसोई का एक वर्ष का अस्थायी अनुबंध समाप्त हुए लगभग तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन न तो संस्था पर कोई कार्रवाई हुई और न ही अवैध कब्जों को हटाया गया। विभागीय जानकारी अनुसार अब राम रसोई के संचालकों द्वारा पुनः समय-सीमा बढ़ाने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर दिया गया है, जिस पर अंतिम निर्णय नगर निगम की MIC (मेयर इन काउंसिल) को लेना है।
गौरतलब है कि जिस राम रसोई को पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बिना पंजीकरण संस्था को अस्थायी स्थान दिया गया था, उसी अनियमितता के लिए वर्तमान महापौर ने पूर्व महापौर को सार्वजनिक रूप से जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन आज जब अनुबंध खत्म हो चुका है और नियमों के उल्लंघन के बावजूद संस्था का संचालन जारी रहा, तब बाजार विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। नियमों के अनुसार केवल पंजीकृत संस्थाओं को ही इस प्रकार की सुविधा दी जा सकती है, बावजूद इसके न तो समय पर कार्रवाई हुई और न ही अवैध अतिक्रमण हटाए गए।
स्थिति यह है कि राम रसोई की आड़ में बस स्टैंड की लगभग उतनी ही अतिरिक्त जमीन पर अन्य लोगों द्वारा कब्जा कर लिया गया है, जिससे यातायात दबाव, पार्किंग अव्यवस्था और आम नागरिकों की परेशानी बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं, गणेश मंदिर के सामने सड़क पर कथित रूप से किए गए अवैध निर्माण ने एक पुराने मंदिर को पूरी तरह ढक दिया है, लेकिन इस पर भी निगम प्रशासन सहित धर्म के रक्षक भी मौन है जो कही ना कही धनवानों के आगे नतमस्तक नजर आ रहे है की चुप्पी सवालों के घेरे में है।
राजनीतिक और नैतिक प्रश्न तब और गहरे हो जाते हैं जब राम रसोई के संचालक(संरक्षक) चतुर्भुज राठी और शहरी सरकार की मुखिया श्रीमती अलका बाघमार का एक साथ मंच साझा करना सामने आता है। इससे यह संकेत मिलता है कि जिन अनियमितताओं पर पहले आरोप लगाए गए, उन्हीं मामलों में अब शहरी सरकार असहज या बेबस नजर आ रही है।
अब गेंद पूरी तरह MIC के पाले में है। परिषद के 12 सदस्य, जिन्हें शहरी सरकार के ‘मंत्री’ कहा जाता है, यह तय करेंगे कि क्या शासन के नियमों के विरुद्ध एक गैर-पंजीकृत संस्था को फिर से बस स्टैंड जैसी कीमती जमीन मुफ्त या रियायती रूप में दी जाएगी, या फिर जनहित, यातायात व्यवस्था और नियमों की मर्यादा को प्राथमिकता दी जाएगी।
पुरानी सरकार पर आरोप लगाना आसान था, लेकिन अब जब फैसला वर्तमान शहरी सरकार के हाथ में है, तो जनता यह देखना चाहती है कि क्या महापौर और MIC जनहित में कठोर निर्णय लेंगे या फिर पूर्व सरकार की कथित गलतियों को दोहराते हुए हर चूक का ठीकरा एक बार फिर अतीत पर फोड़ा जाएगा।
परिषद की बैठक न सिर्फ राम रसोई के भविष्य का, बल्कि शहरी सरकार की नीयत और नीति का भी आईना साबित होगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
