July 23, 2026
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    मैंने ईश्वर से कहा, तुम्हारी जरूरत है

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    जीना इसी का नाम है / शौर्यपथ / करीब छह दशक पहले ब्रिटेन की गुलामी से आजाद हुआ नाइजीरिया बुरी खबरों के लिए ही सुर्खियों में अधिक रहा है। भुखमरी, गरीबी, नस्लवादी हिंसा और स्त्री उत्पीड़न के दाग तो जैसे इसके दामन से ही चिपक गए थे। हालांकि आज यह तेजी से आर्थिक तरक्की करने वाला एक अफ्रीकी देश है। साल 2014 में नाइजीरिया की एक अलग तरह की घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान इसकी ओर मोड़ा। उस वाकये की मुख्य किरदार थीं अडाओरा ओकोली। नाइजीरिया की एक युवा डॉक्टर।

    जुलाई 2014 की बात है। ओकोली लागोस स्थित अपने हॉस्पिटल में तब कार्यरत थीं। एक दिन लाइबेरिया के 40 साल के पैट्रिक सोयर अपने इलाज के लिए उनके पास आए। वह काफी बीमार लग रहे थे। पैट्रिक को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई। अगले दिन जब वह उन्हें देखने गईं, तो पैट्रिक के बेड पर रखे ‘इंट्रावेनस फ्लूड बैग’ को भी हाथ में उठा लिया। यह असावधानी बरतते समय उन्हें जरा भी इलहाम नहीं था कि यह मरीज अतिसंक्रामक वायरस का शिकार भी हो सकता है, क्योंकि तब तक नाइजीरिया में इबोला का एक भी मामला पुष्ट नहीं हुआ था।

    उन्हीं दिनों मानवाधिकार समूह ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ ने एक अपील जारी की थी कि पश्चिम अफ्रीकी देशों को इबोला से लड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की दरकार है। इस बयान के सामने आने के चंद रोज बाद ही पैट्रिक की मौत हो गई। पैट्रिक इबोला वायरस के संक्रमण का शिकार हुए थे। पैट्रिक की मौत के कुछ ही दिनों बाद ओकोली को उल्टियां आने लगीं, पेशाब का रंग बदलने लगा और उनमें डायरिया के लक्षण दिखने लगे। उन्हें समझते देर न लगी कि वह संक्रमित हो चुकी हैं। अगस्त में उनके खून की जांच की गई, जो पॉजिटिव निकली। उन्होंने फौरन अपनी मां को फोन किया कि उनके कमरे को बाहर से बंद कर दें और उसके आसपास किसी को न जाने दें। ओकोली ने मां को कहा, ‘घबराना नहीं, मैं जिंदा लौटूंगी।’

    ओकोली को तुरंत ‘आइसोलेशन रूम’ में पहुंचा दिया गया। जब तक इस वायरस को लेकर लागोस में सतर्कता बरती जाती, तब तक इसने कई लोगों को अपना शिकार बना लिया था। ओकोली खुद एक डॉक्टर थीं, इसलिए हालात की गंभीरता को वह अच्छी तरह जान रही थीं। उनके साथ कई मरीज आइसोलेशन में थे, लेकिन उन सबकी देखभाल करने के लिए तब संक्रामक रोगों का एक ही विशेषज्ञ था। ओकोली कहती हैं, ‘हम प्रामाणिक थिरेपी पाने की स्थिति में नहीं थे। इस बीमारी को परास्त करने वाले किसी व्यक्ति का प्लाज्मा उपलब्ध नहीं था। मैं उन लम्हों में सिर्फ अपने ईश्वर से बातें कर सकती थी और मैंने पल-पल उससे यही गुहार लगाई कि मुझे तुम्हारी जरूरत है।’

    ओकोली को मालूम था कि उन्हें तरल पदार्थ लेते रहना होगा, ताकि उनकी त्वचा में तरलता बनी रहे। अपनी नब्ज भी लगातार टटोलती रहीं। करीब एक हफ्ते के बाद उनकी सेहत में कुछ सुधार नजर आया। और फिर एक सुबह डॉक्टर उनके लिए वही पैगाम लेकर आया, जो किसी डॉक्टर को फरिश्ते के बराबर खड़ा कर देता है। डॉक्टर ने कहा, ‘ओकोली पिछले कई दिनों की जांच में तुम्हारी रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं पाई गई है।’ वह एक नए जन्म की तरह था। एक पखवाडे़ के बाद जब ओकोली को वार्ड से छुट्टी मिली, तो वह एक लाल रिबन काटकर आगे बढ़ीं। यह प्रतीक था कि वह इंसानी दुनिया में फिर से लौट रही हैं।

    नवंबर 2014 में अमेरिकन सोसायटी फॉर ट्रॉपिकल मेडिसिन ऐंड पब्लिक हेल्थ ने एक कॉन्फ्रेंस में अपने अनुभव साझा करने के लिए ओकोली को न्यू ऑरलेन्स आमंत्रित किया। बिल गेट्स इस कॉन्फ्रेंस के मुख्य वक्ता थे। ओकोली को लगा कि बिल गेट्स एक पीड़िता का नजरिया जानना चाहते हैं। कॉन्फ्रेंस के बाद वह नाइजीरिया लौटने वाली थीं, लेकिन टुलेन यूनिवर्सिटी की पब्लिक हेल्थ ऐंड ट्रॉपिकल मेडिसिन विभाग ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वह उनके यहां दाखिले के लिए आवेदन करें। बिल गेट्स ने उनके अनुभवों को अपनी वेबसाइट पर साझा किया है।

    ओकोली ने इनफेक्शियस डिजीज एपिडेमियोलॉजी में मास्टर की पढ़ाई करने का मन बनाया, ताकि वह किसी भी महामारी से निपटने के विभिन्न पहलुओं को अच्छी तरह जान सकें। एक भुक्तभोगी के तौर पर वह जान चुकी थीं कि एक मरीज आखिर उन पलों में क्या सोचता है। वह कहती हैं कि ‘इस एहसास ने मेरी आंखें खोलीं कि संक्रामक रोग दरअसल गरीबी और ऐसे पिछड़े देशों की बीमारी है, जिनके पास इतने संसाधन नहीं कि इसे पसरने से रोक सकें।’

    नाइजीरिया जैसे देशों में ऐसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है, जो जानते हों कि जब जानलेवा संक्रामक रोग का प्रसार हो, तो क्या करना चाहिए। अब एक बच्ची की मां ओकोली अपने मुल्क लौट संक्रामक रोगों से ग्रस्त लोगों की सेवा करना चाहती हैं। उनके शब्द हैं, ‘अंतत: यह ईश्वर की भक्ति और मानवता की सेवा है।’
    (प्रस्तुति : चंद्रकांत सिंह) अडाओरा ओकोली, इबोला को मात दे चुकी डॉक्टर

     

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