Google Analytics —— Meta Pixel
March 10, 2026
Hindi Hindi
  • devendra yadav birth day

        सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / लॉकडाउन लगाना और चलाना जितना कठिन था, उससे कहीं अधिक कठिन है लॉकडाउन हटाना व सामान्य स्थिति में लौटना। लॉकडाउन खुलते समय जिस तरह का तनाव या विवाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में हुआ है, वह अभूतपूर्व ही नहीं, चिंताजनक भी है। दिल्ली से लोग नोएडा या गाजियाबाद में काम करने निकले, तो उन्हें सीमा पर ही उत्तर प्रदेश की पुलिस ने रोक लिया। ठीक ऐसा ही विवाद हरियाणा-दिल्ली सीमा पर एकाधिक बार देखने में आया है। गुरुग्राम की सीमा पर पिछले सप्ताह एक समय पथराव की स्थिति बन गई थी। स्वाभाविक है, अब दफ्तर खुल रहे हैं, तो किसी को दिल्ली जाना है, किसी को दिल्ली से बाहर जाना है। जहां दिल्ली लॉकडाउन 4 के समय से ही कमोबेश खुल चुकी है, वहीं गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद में स्थिति अभी सामान्य नहीं है। 1 जून को जब दिल्ली के लोगों को सीमाओं पर रोका गया, तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का रोष स्वाभाविक था, उन्होंने भी दिल्ली की सीमाओं को 8 जून तक बंद रखने का आदेश दे दिया।
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? दिल्ली के पड़ोसी राज्यों की दुविधा को कोरोना संक्रमण के आंकड़ों से समझा जा सकता है। जहां दिल्ली में 18,550 लोग संक्रमित हो चुके हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में 7,750 और हरियाणा में महज 1,923 मामले हैं। जहां दिल्ली में 31 मई तक 416 मौतें हो चुकी हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में 201 और हरियाणा में 20 लोगों की जान गई है। आंकड़े गवाह हैं कि संक्रमण की स्थिति दिल्ली में गंभीर है। ऐसे में, दिल्ली से आ रहे लोग उत्तर प्रदेश व हरियाणा, दोनों के लिए चिंता की बात हों, तो कोई आश्चर्य नहीं। दिल्ली अपनी अर्थव्यवस्था से और समझौता करने की मुद्रा में नहीं है, तो इसे समझा जा सकता है, पर ध्यान रहे, यह समय रोष का नहीं, बल्कि होश से कदम आगे बढ़ाने का है।
पूरे एनसीआर क्षेत्र के तमाम प्रशासन को कुछ अलग ढंग से मिलकर सोचना होगा। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें लोगों का परस्पर जुड़ाव व्यापक है, लोगों के व्यावसायिक,सामाजिक, पारिवारिक हित जुडे़ हुए हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को एक इकाई मानकर चलने की जरूरत है। इस वृहद क्षेत्र की जब रूपरेखा तैयार की गई थी, तब पूरे क्षेत्र के सुख-दुख को एक माना गया था, हालांकि राज्य सरकारों की अपनी-अपनी गुणवत्ता के अनुसार ही ये क्षेत्र कुछ-कुछ बंटे रहे हैं। इसलिए यह क्षेत्र कल भी आदर्श नहीं था और आज भी नहीं है। उदाहरण के लिए, सोमवार को ही दिल्ली के मुख्यमंत्री ने एक एप की घोषणा की है, जिससे कोविड-19 के मामलों की निगरानी की जाएगी, लेकिन क्या राष्ट्रीय राजधानी के पूरे क्षेत्र के लोगों को इसमें शामिल किए बिना कोविड-19 की निगरानी में कामयाबी मिल सकेगी? इस एप के जरिए या किसी विशेष स्वास्थ्य जांच तंत्र के जरिए दिल्ली सरकार को आगे बढ़कर नई लकीर खींचनी चाहिए। साथ ही, जो क्षेत्र दिल्ली से जुड़े हुए हैं, उन्हें भी खास दिल्ली और उसके लोगों के रोजगार के बारे में सोचना चाहिए। यह क्षेत्र उत्तर भारत का व्यावसायिक इंजन है, इसके विभिन्न चालक-संचालक तभी कारगर व कामयाब होंगे, जब उनके बीच समन्वय होगा। काम पर निकले लोगों की जगह-जगह पुख्ता निगरानी हो, लेकिन किसी को काम पर जाने से रोका न जाए, तभी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र देश के सामने एक मिसाल पेश कर पाएगा।

 

Rate this item
(0 votes)

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)