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May 26, 2026
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रंक को राजा बना सकते हैं शनिवार के ये 8 सरल उपाय

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शनि मंदिर जा रहे हैं तो यह 7 सावधानी रखें, वर्ना पछताएंगे शनि ग्रह का पेड़ है आपके घर के पास तो जानिए 7 काम की बातें
आस्था / शौर्यपथ / कुंडली में अच्छे स्थान में बैठा शनि व्यक्ति को रंक से राजा बना देने की क्षमता रखता है। एक बार किसी व्यक्ति पर शनि की विशेष कृपा हो जाए तो रंक से राजा बनाती है। शनिवार का नाम हिन्दू धर्म के देवता सूर्य पुत्र शनिदेव को इंगित करता है। इस दिन शनिदेव और हनुमान जी की आराधना तो सभी करते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं शनिवार के दिन इन छोटे-छोटे उपायों को आजमाने से आपकी किस्मत चमक सकती हैं। और आप रंक को राजा बना सकते हैं। आइए जानें 8 सरल उपाय जो विशेष रूप से शनिवार को ही किए जाते हैं।
शनिदेव को प्रसन्न करने के 8 सरल उपाय :
* शनिवार के दिन नीले वस्त्र पहनें।
* हनुमान मंदिर जरूर जाएं।
* हनुमानजी को बना हुआ पान चढ़ाएं।
* हनुमानजी के चरणों में लाल फूल अर्पित करें।
* ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: मंत्र जप कर घर से निकलें।
* शनिवार के दिन तिल का सेवन अवश्य करें।
* नीले या जामुनी फूल शनि मंदिर में चढ़ाएं।
* कार्य पर जाते समय नीला रूमाल साथ में रखकर घर से निकलें।
शनि मंदिर जा रहे हैं तो यह 7 सावधानी रखें, वर्ना पछताएंगे
कई लोग भगवान शनि के मंदिर जाते हैं। परंतु परंपरा के अनुसार कुछ सावधानी रखना भी जरूरी होती है और भी कई बातें हैं जिनका ध्यान रखना होता है अन्यथा शनि महाराज कब नाराज होकर आपके लिए संकट खड़ा दे यह कहा नहीं जा सकता। तो आओ जानेत हैं शनि मंदिर जाने और उनके दर्शन करने के नियम।
1. ऐसा कहा जाता है कि शनि मंदिर में भगवान शनिदेव की प्रतिमा की आंखों में आंखें डालकर देर तक नहीं देखना चाहिए। दर्शन कर सकते हैं परंतु उनके प्रति श्रद्धा का भाव होना चाहिए।
2. शनिदेव पर तेल चढ़ाना चाहिए परंतु इस बात का ध्यान रखें कि वह तेल इधर-उधर ना गिरे और खराब तेल ना हो। अच्छे तेल का उपयोग करें। यदि छायादान कर रहे हो तो उस तेल को नहीं चढ़ाते हैं उसे कटोरी सहित ही शनिदेव के चरणों में रख देते हैं।
3. शनिदेव की मूर्ति के एकदम सामने खड़े होकर कभी भी पूजा या प्रार्थना ना करें।
4. शनि मंदिर में यदि बाहर कोई गरीब, अपंग या भीखारी हो तो उसे दान जरूर दें। नहीं दान दे सकते हो तो कम से कम उनका तिरस्कार ना करें। वहां सभी से अच्छा व्यवहार करें।
5. शनि मंदिर में किसी भी प्रकार की सांसारिक वार्ता ना करें। चुपचाप अपनी पूजा या प्रार्थना करने के बाद मंदिर की सीढ़ियों पर कुछ देर के लिए बैठे और लौट आएं।
6. शनि की पूजा में दिशा का विशेष महत्व होता है। शनि को पश्चिम दिशा का स्वामी माना जाता है इसलिए शनि की पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखना होता है कि आपका मुख पश्चिम दिशा की ओर ही होना चाहिए। इसीलिए जहां पर शिलारूप में शनिदेव हो वहीं जाएं।
7. माना जाता है कि शनिदेव को लाल रंग पसंद नहीं है इसलिए शनिवार को पूजा में भूलकर भी लाल रंग के फूल या कोई लाल सामाग्री का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
शनि ग्रह का पेड़ है आपके घर के पास तो जानिए 7 काम की बातें
प्रत्येक ग्रह का एक प्रतिनिधि पेड़, पौधा या वृक्ष होता है। जैसे गुरु का पेड़ पीपल है, सूर्य के तेजफल का वृक्ष, चंद्र का पोस्त का पौधा या दूध वाले वृक्ष, मंगल नेक के लिए नीम और मंगल बद के लिए ढाक, बुध के लिए केला या चौड़े पत्ते वाले वृक्ष, शुक्र के लिए कपास या बेलदार पौधे, राहु के लिए चंदन, नारियल या कुत्ता घास, केतु के लिए इमली का पेड़ होता है उसी तरह शनि का भी पेड़, पौधा या वृक्ष होता है। कहीं आपके घर के अंदर या आसपास शनि का पौधा तो नहीं है। आओ जानते हैं इस संबंध में 7 खास बातें।
1. शमी, कीकर, आम और खजूर का वृक्ष शनि ग्रह का कारक है। इसके अलावा पादपों में जहरीले और कांटेदार पौधे, खारी सब्जियां, बिच्छोल की जड़ और तम्बाकू पर भी शनि का अधिकार होता है। पशुओं में भैंस या भैंसा, पोशाक में जुराब और जूता बताया गया है। वस्तुओं में शहद, लोहा या फौलाद और नग में नीलम। उल्लेखनीय है कि धनिष्ठा नक्षत्र का कारण भी शमी पेड़ है।
2. इनमें से शमी के वृक्ष को छोड़कर कोई सा भी वृक्ष नहीं लगाना चाहिए। शमी के वृक्ष को भी कुंडली की स्थिति जानकर ही उचित दिशा में लगाना चाहिए। वायव दिशा शनि की होती है। इस वृक्ष के पूजन से शनि प्रकोप शांत हो जाता है क्योंकि यह वृक्ष शनिदेव का साक्षात्त रूप माना जाता है।
3. इसके अलावा लोहा तो सभी के घरों में होता है। लोहे के भारी सामान को दक्षिण दिशा में रखना चाहिए। पोशाक में जुराब और जूता को भी उचित दिशा में रखें। घर में शहद रखने और खाने से शनि शांत रहता है।
4. जिस व्यक्ति को राहु के दोष दूर करना हो उसे चंदन का वृक्ष लगाना चाहिए। जिस व्यक्ति को शनि से संबंधित बाधा दूर करना हो उसे शमी का वृक्ष लगाना चाहिए।
5: दशहरे पर खास तौर से सोना-चांदी के रूप में बांटी जाने वाली शमी की पत्त‍ियां, जिन्हें सफेद कीकर, खेजडो, समडी, शाई, बाबली, बली, चेत्त आदि भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म की परंपरा में शामिल है। आयुर्वेद में भी शमी के वृक्ष का काफी महत्व बताया गया है। मान्यता अनुसार बुधवार के दिन गणेश जी को शमी के पत्ते अर्पित करने से तीक्ष्ण बुद्धि होती है। इसके साथ ही कलह का नाश होता है।
6. आयुर्वेद के अनुसार यह वृक्ष कृषि विपदा में लाभदायक है। इसके कई तरह के प्रयोग होते हैं। विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष पूजा करने से घर में तंत्र-मंत्र का असर खत्म हो जाता है। जहां भी यह वृक्ष लगा होता है और उसकी नित्य पूजना होती रहती है वहां विपदाएं दूर रहती हैं।
7. प्रदोषकाल में शमी वृक्ष के समीप जाकर पहले उसे प्रणाम करें फिर उसकी जड़ में शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद वृक्ष के सम्मुख दीपक प्रज्वलित कर उसकी विधिवत रूप से पूजा करें। शमी पूजा के कई महत्वपूर्ण मंत्र का प्रयोग भी करें। इससे सभी तरह का संकट मिटकर सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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