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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
भिलाई-3 में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित, नगर निगम क्षेत्र के 26 स्कूलों के 365 शिक्षकों का हुआ सम्मान
भिलाई। शिक्षक राष्ट्र के निर्माता होते हैं और उनका सम्मान करना गौरव की बात है। यह बात पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भिलाई-3 स्थित स्वामी आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जनता में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में कही। महापौर निर्मल कोसरे के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भूपेश बघेल ने अपने संबोधन में कहा कि जिस स्कूल में उन्होंने कभी बस्ता लेकर पढ़ाई की शुरुआत की थी, आज उसी विद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होना उनके लिए भावुक और गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह उनके गुरुजनों के आशीर्वाद का परिणाम है।
‘शिक्षा का व्यावसायीकरण रोकना जरूरी’
भूपेश बघेल ने शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि इसे रोकना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़े। अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा के लिए कई परिवारों को निजी स्कूलों का रुख करना पड़ता है, जहां शिक्षा काफी महंगी होती है।
उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान यह विचार किया गया कि गरीब परिवारों के बच्चे भी निशुल्क अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा प्राप्त कर सकें। इसी उद्देश्य से प्रदेश में स्वामी आत्मानंद स्कूलों की शुरुआत की गई।
उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के परीक्षा परिणामों में शासकीय और स्वामी आत्मानंद स्कूलों के विद्यार्थी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह शिक्षकों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है।
1993 से शिक्षक सम्मान की परंपरा जारी
भूपेश बघेल ने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1993 में विधायक बनने के बाद उन्होंने शिक्षक सम्मान की परंपरा शुरू की थी, जो आज भी जारी है।
उन्होंने नगर निगम भिलाई-चरोदा क्षेत्र के शिक्षकों के सम्मान का अवसर मिलने पर आयोजनकर्ता महापौर निर्मल कोसरे और उनकी पूरी टीम को बधाई एवं धन्यवाद दिया।
‘शासकीय स्कूलों के शिक्षकों की मेहनत का परिणाम’
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने कहा कि उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में सेवा करने का अवसर मिला और उन्होंने अपनी ओर से बेहतर कार्य करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि शासकीय स्कूलों के शिक्षकों की मेहनत का ही परिणाम है कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी लगातार चयनित हो रहे हैं।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सभापति कृष्णा चंद्राकर, समाजसेवी सुजीत बघेल एवं शाला विकास समिति अध्यक्ष धनेश्वरी साहू ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
26 स्कूलों के 365 शिक्षकों का सम्मान
शिक्षक सम्मान समारोह में नगर निगम क्षेत्र के 26 स्कूलों के कुल 365 शिक्षकों का सम्मान किया गया। शिक्षकों को सम्मानित करते हुए उनके शिक्षा के क्षेत्र में योगदान और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में भूमिका को सराहा गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में पप्पू चंद्राकर, मोहन साहू, मनोज मढ़रिया, टेनेन्द्र ठाकरे, संतोष तिवारी, धर्मेंद्र कोसरे, नरेन्द्र वर्मा, पुष्कर चंद्राकर, शरद यादव, ईश्वर साहू, नीलाम्बुज साहू, प्रकाश दुर्गा, हेमंत वर्मा, राकेश वर्मा, राजू लहरे, संदीप सिंह, युवराज कश्यप, आशीष वंजारी, हरमीक सिंह, मोनू माखिजा, शरद डोरा, एम. जॉनी, बी.एन. राजू, गिरिजा बंछोर, टिपेस साहू, मनीष वर्मा, एस. वेंकट रमना, आनंद कुमार, मनोज डहरिया, सतीश धुरंधर, अरुण वर्मा, विनोद प्रसाद, भागी निर्मलकर, डे साहब वर्मा, लावेश मदनकर, देवकुमारी, शारदा मदनकर, विजय राठौर, जुनैद खान, नजरुल इस्लाम, भूपेंद्र वर्मा, आशीष वर्मा, बहल साहू, विनोद निषाद, कुमुद मढ़रिया, विटामिन वर्मा, दुलारी वर्मा, प्रेमलता मढ़रिया, रीना वर्मा, कुमारी धीवर, मंजू साहू, रानी वर्मा, श्रेया बंजारी, विमला, गायत्री साहू, लक्ष्मी वर्मा, सुभाष साहू एवं दीप्ति वर्मा सहित अन्य लोगों की सहभागिता रही।
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन महापौर निर्मल कोसरे ने किया।
बिर्रा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर बिर्रा के दीवान मोहल्ला में मलखंभ एवं आंखों पर पट्टी बांधकर मटका फोड़ प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और आयोजन स्थल पर देर तक उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य पं. जितेंद्र तिवारी अर्जुन महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और फीता काटकर किया। इसके बाद मलखंभ मटका फोड़ प्रतियोगिता शुरू हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी शारीरिक क्षमता और संतुलन का प्रदर्शन किया।
मलखंभ मटका फोड़ प्रतियोगिता में ओमप्रकाश धीवर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने करीब 20 फीट ऊंचे पोल पर चढ़कर मटका फोड़ा और प्रतियोगिता के विजेता बने।
विजेता ओमप्रकाश धीवर को 5001 रुपये नगद पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार स्व. धोधी प्रसाद पाण्डेय की स्मृति में भगवताचार्य दिलीप पाण्डेय अर्जुन महाराज एवं भारतीय जनता युवा मोर्चा बम्हनीडीह उपाध्यक्ष महेंद्र साहू द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
इसके अलावा मटका फोड़ने में सफल होने पर राजमहल बिर्रा की ओर से विजय बहादुर सिंह ने 1100 रुपये, विधायक प्रतिनिधि लोकेन्द्र कश्यप एवं प्रितेश कश्यप ने 1100 रुपये तथा नरेश वस्त्रालय के संचालक नरेश देवांगन ने 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की।
प्रतियोगिता में नन्हीं बालिका मानसी धीवर ने भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने आंखों पर पट्टी बांधकर मटका फोड़ प्रतियोगिता में जीत हासिल की।
मानसी को 2001 रुपये नगद पुरस्कार यमुना/मधुराज सिंह प्रधान, वार्ड क्रमांक 10 पंच की ओर से प्रदान किया गया।
दोनों विजेताओं को सीमा श्रृंगार सदन बुक डिपो के राजेंद्र गुप्ता की ओर से स्मृति चिन्ह, शील्ड एवं मेडल प्रदान किए गए। वहीं सोनू ऑनलाइन सेंटर, दीवान मोहल्ला के सोनू यादव की ओर से गिफ्ट हैम्पर देकर सम्मानित किया गया।
भव्य मटका फोड़ प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता रमाकांत साहू मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथियों में बम्हनीडीह ब्लॉक मीडिया प्रभारी जितेंद्र तिवारी, दिलीप पाण्डेय, महेंद्र साहू, चेतन बाबा, प्रतीक प्रताप सिंह, सोमू बाबा, मधुराज सिंह प्रधान, रामकुमार धीवर, कमल काटकवार, एकांश पटेल, राधेश्याम केशरवानी एवं गोपाल कश्यप शामिल रहे।
कार्यक्रम का संचालन जितेंद्र तिवारी, सुभाष यादव (सोनू) एवं एकांश पटेल ने किया। कार्यक्रम में आकर्षण बढ़ाने में डीजे किशन किकीरदा का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सुभाष यादव, राजेंद्र धीवर, कृष्णा धीवर, बबलू यादव, एकांश पटेल, दिलेश्वर धीवर, सौरभ पाल, बजरंग पटेल, बजरंग केशरवानी, अवि केशरवानी, समीर केशरवानी, रोशन सिंह, ओमप्रकाश धीवर, टिंकू केशरवानी, विशेश्वर पटेल (मड़वारी), राज केशरवानी, साहित्य केशरवानी, दक्ष सिंह, जितेन धीवर, रवि धीवर, आरती लाल केवट, तुषार गुप्ता, रामप्यारे, मोहन यादव, लक्ष्मण, शुभम केशरवानी, गोपाल पटेल एवं जगदीश धीवर (जग्गू) सहित समिति के सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित इस प्रतियोगिता ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय खेल और सांस्कृतिक परंपरा को भी जीवंत किया। ओमप्रकाश धीवर की लगातार तीसरी जीत और नन्हीं मानसी के उत्साह ने आयोजन को खास बना दिया।
जांजगीर। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप ने अपने विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों का दौरा कर सघन जनसंपर्क किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रवासियों से मुलाकात कर उन्हें जन्माष्टमी पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हुए।
विधायक ब्यास कश्यप ने अलग-अलग स्थानों पर आयोजित जन्माष्टमी कार्यक्रमों में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की। उन्होंने क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। आयोजन समितियों और श्रद्धालुओं से संवाद करते हुए उन्होंने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं एवं आयोजन की जानकारी ली तथा सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी।
आम लोगों से की मुलाकात, जानी क्षेत्र की समस्याएं
जनसंपर्क के दौरान विधायक ने स्थानीय नागरिकों से उनकी समस्याओं और क्षेत्र की आवश्यकताओं को लेकर भी चर्चा की। उन्होंने लोगों की बात सुनी और क्षेत्र के विकास से जुड़े विषयों पर संवाद किया।
विधायक ब्यास कश्यप ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन सत्य, धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जन्माष्टमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का अवसर भी है।
जगह-जगह हुआ विधायक का स्वागत
विभिन्न स्थानों पर पहुंचने पर स्थानीय नागरिकों और आयोजन समितियों ने विधायक ब्यास कश्यप का स्वागत किया। विधायक ने सभी से आत्मीय मुलाकात कर जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं और धार्मिक आयोजनों में सहभागिता की।
इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे। जन्माष्टमी के अवसर पर क्षेत्र में विभिन्न धार्मिक आयोजनों को लेकर उत्साह का माहौल रहा।
जांजगीर-चांपा/ससहा। शिक्षक दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत ससहा, जनपद पंचायत पामगढ़ के तत्वावधान में शासकीय बालक प्राथमिक शाला ससहा में शिक्षक सम्मान समारोह एवं स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान किया गया। वहीं रक्तदान शिविर के माध्यम से ग्रामीणों और युवाओं ने मानव सेवा का संदेश दिया।
समारोह में सेवानिवृत्त शिक्षक एस. आर. साहू, के. एल. यादव, एस. एन. कुम्भज, आर. आर. रायसागर, बी. पी. साहू, बी. आर. श्रीवास एवं धरम राज पैंकरा का सम्मान किया गया। इस दौरान शिक्षा और समाज निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया।
सम्मानित शिक्षकों ने अपने संबोधन में गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षा के महत्व और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में शिक्षक की भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और जीवन-मूल्यों का विकास करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनपद पंचायत पामगढ़ के सभापति जय कुमार ने गुरु-शिष्य परंपरा में गुरु के योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
सरपंच कुसुम उत्तरा साहू ने कार्यक्रम में उपस्थित गुरुजनों का स्वागत किया और समाज निर्माण में शिक्षकों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। वहीं अधिवक्ता ओंकार रायसागर ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी को शिक्षक दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का संचालन ग्राम पंचायत ससहा के सचिव लखेश्वर यादव ने किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी गांव के स्थायी विकास की मजबूत नींव है। पंचायत और विद्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर गांव के शैक्षणिक वातावरण को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
शिक्षक सम्मान समारोह के साथ आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में ग्रामीणों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रक्तदाताओं ने जरूरतमंद मरीजों की मदद और जीवन बचाने के उद्देश्य से स्वेच्छा से रक्तदान किया।
रक्तदान शिविर का आयोजन संकट मोचन ब्लड बैंक, शिवरीनारायण के प्रायोजन तथा कर्ष हॉस्पिटल, पामगढ़ के सौजन्य से किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में यूथ 11 क्रिकेट टीम, ससहा एवं समस्त ग्रामवासियों का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम के अंत में ग्राम पंचायत की ओर से सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, रक्तदाताओं, विद्यालय परिवार और ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
शिक्षक सम्मान समारोह और रक्तदान शिविर ने शिक्षा और मानव सेवा के दो महत्वपूर्ण संदेशों को एक साथ सामने रखा। जहां शिक्षक ज्ञान और संस्कार देकर भविष्य का निर्माण करते हैं, वहीं रक्तदाता अपने रक्तदान से किसी जरूरतमंद का वर्तमान बचाने में योगदान देते हैं।
दंतेवाड़ा चीनी की बढ़ती कीमतों और महंगाई के मुद्दे को लेकर दंतेवाड़ा में कांग्रेस ने शनिवार को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी ने अंबेडकर प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय ‘चीनी सत्याग्रह’ किया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बढ़ती महंगाई के विरोध में जमकर नारेबाजी की और सरकार से आम जनता को राहत देने की मांग की।
प्रदर्शन का नेतृत्व जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शकील रिज़वी ने किया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई का सीधा असर आम आदमी की रसोई और घरेलू बजट पर पड़ रहा है। पेट्रोल-डीजल, बिजली बिल और रोजमर्रा की जरूरतों के बाद अब खाद्य पदार्थों के बढ़ते दामों ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
सत्याग्रह के दौरान जिलाध्यक्ष शकील रिज़वी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र से लेकर राज्य, जिला और नगर स्तर तक भाजपा की सरकार होने के बावजूद महंगाई पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों की आमदनी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही, रोजगार के अवसर सीमित हैं, जबकि रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
रिज़वी ने कहा कि चावल, तेल, चीनी, गेहूं, दाल और प्याज जैसी आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते दामों का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। ऐसे हालात में परिवारों के लिए घरेलू बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महंगाई के खिलाफ दिल्ली से लेकर रायपुर और जिला स्तर तक जनता की आवाज उठाती रहेगी।
पूर्व विधायक देवती महेंद्र कर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार महंगाई से राहत देने के दावे करती है, लेकिन कांग्रेस के अनुसार जमीनी स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि चीनी की बढ़ती कीमतों के विरोध में आयोजित यह सत्याग्रह जनता की समस्या को सरकार तक पहुंचाने का कांग्रेस का प्रयास है।
सत्याग्रह में जिला उपाध्यक्ष कमलोचन सेठिया, जिला महामंत्री मनीष भट्टाचार्य, विवेक देवांगन, अजय मरकाम, जया कश्यप, रविश सुराना, जिला पंचायत सदस्य सुलोचना कर्मा, आदिवासी प्रदेश कांग्रेस महासचिव विमल सलाम, महिला कांग्रेस अध्यक्ष इंद्रा शर्मा, आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष शंकर कुंजाम, सेवादल अध्यक्ष बुधनी बघेल, जिला कांग्रेस सचिव गौरव गुप्ता, जीतेन्द्र कश्यप, ब्लॉक अध्यक्ष सुमित्रा शोरी और पार्षद राधा नाग सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
रिपोर्टर: कृष्णा मंडल | लोकेशन: दंतेवाड़ा
सड़कों, भवनों और पुल-पुलियों के निर्माण कार्यों में आएगी तेजी, निगरानी के लिए बढ़ेगी विभागीय मौजूदगी
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में सड़कों, भवनों और पुल-पुलियों के निर्माण कार्यों को गति देने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) अब दूरस्थ क्षेत्रों में भी अपने कार्यालयों का विस्तार करेगा। राज्य शासन ने विभाग के 16 नए उप संभागीय, 2 संभागीय और 1 सेतु मंडल कार्यालय के साथ इनके लिए आवश्यक सेट-अप की मंजूरी दे दी है।
नए कार्यालयों की स्थापना का उद्देश्य निर्माण कार्यों की तेज मॉनिटरिंग, विभागीय कामकाज में कसावट और मैदानी स्तर पर अधिकारियों की प्रभावी मौजूदगी सुनिश्चित करना है। दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यालय शुरू होने से निर्माण कार्यों की प्रगति की निगरानी और स्थानीय स्तर पर समस्याओं के निराकरण में भी तेजी आने की उम्मीद है।
सेतु निर्माण के लिए 9 नए कार्यालय
राज्य शासन ने लोक निर्माण विभाग के सेतु परिक्षेत्र के अंतर्गत 9 नए कार्यालयों को मंजूरी दी है। इसके तहत जगदलपुर में अधीक्षण अभियंता कार्यालय और रायपुर में कार्यपालन अभियंता, सेतु संभाग क्रमांक-2 का कार्यालय स्थापित किया जाएगा।
इसके अलावा बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, बालोद, मुंगेली, सारंगढ़ और बैकुंठपुर में अनुविभागीय अधिकारी स्तर के सेतु उप संभागीय कार्यालय खोले जाएंगे।
इन कार्यालयों के शुरू होने से इन जिलों में पुल-पुलियों के निर्माण और संबंधित कार्यों की निगरानी स्थानीय स्तर पर होगी। इससे परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने के साथ निर्माण कार्यों में आने वाली दिक्कतों का जल्द समाधान किया जा सकेगा।
सड़क और भवन निर्माण के लिए 10 नए कार्यालय
भवन एवं सड़क निर्माण कार्यों के लिए भी राज्य शासन ने 10 नवीन कार्यालयों की स्वीकृति दी है। इनमें बैकुंठपुर में कार्यपालन अभियंता (कोरिया संभाग) कार्यालय शामिल है।
वहीं फरसगांव, ओरछा, डोंगरगांव, डौंडी, धमधा, आरंग, खड़गवां, सोनहत और बलौदाबाजार में अनुविभागीय अधिकारी स्तर के उप संभागीय कार्यालय स्थापित किए जाएंगे।
दूरस्थ क्षेत्रों में बढ़ेगी विभागीय निगरानी
PWD के नए कार्यालय खास तौर पर उन क्षेत्रों में खोले जा रहे हैं, जहां भौगोलिक परिस्थितियों और दूरी के कारण निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी चुनौतीपूर्ण रहती है। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी बढ़ने से सड़कों, भवनों और पुल-पुलियों के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समय-सीमा और प्रगति पर अधिक प्रभावी निगरानी हो सकेगी।
सरकार के इस फैसले से दूरस्थ जिलों में चल रही और प्रस्तावित निर्माण परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही और मैदानी स्तर पर समन्वय भी मजबूत होगा।
सनातन संस्कृति की रक्षा कर लोक परंपरा को आगे बढ़ा रहा यादव समाज : उप मुख्यमंत्री अरुण साव
लोरमी में धूमधाम से मना श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव, उप मुख्यमंत्री अरुण साव हुए शामिल
लोरमी / शौर्यपथ / उप मुख्यमंत्री अरुण साव आज मानस मंच लोरमी में सर्व यादव समाज एवं यदुवंशी सेना द्वारा आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने भव्य शोभायात्रा में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया।
उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि यादव समाज सनातन संस्कृति और परंपराओं की मजबूत पहचान है। समाज राउत नाचा जैसी समृद्ध लोक परंपराओं को आज भी सहेजकर आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हमें एकजुटता, प्रेम और उल्लास के साथ अपनी संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश देता है।
जन्माष्टमी उत्सव पर मानस मंच से बाइक रैली निकाली गई। रैली शिवपाट होते हुए लोरमी शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरी। इसके बाद शीतला मंदिर, बाजारपारा से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो मेन रोड होते हुए मानस मंच पहुंची।
मानस मंच में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। छत्तीसगढ़ रत्न प्रसिद्ध लोकगायिका आरु साहू जी ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। इसके साथ ही 'महादेव तांडव' रोड शो और बाइक रैली निकली। बड़ी संख्या में समाज के लोग और श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सर्व यादव समाज लोरमी द्वारा निःशुल्क रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया। शिविर में समाज के साथ इच्छुक लोगों ने भी स्वेच्छा से रक्तदान किया। आयोजकों ने कहा कि रक्तदान मानव सेवा का महत्वपूर्ण कार्य है।
इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता धनीराम यादव जी, संजय यादव , अविश अवनीश यादव , रामप्रकाश यादव , गिरधारी यादव , नरेश यादव, मंडल अध्यक्ष सुशील यादव , शिवशंकर यादव , श्रीमती पूर्णिमा यादव , श्रीमती पुष्पा यादव , संजू यादव , शत्रुहन यादव , तोरन यादव ,,पार्षदगण, भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता साथी एवं नगरवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर मुख्यमंत्री ने किया शंख अभिषेक, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, भक्तों के साथ किया हरे कृष्ण महामंत्र का घोष
रामलला दर्शन और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना से श्रद्धालुओं की तीर्थ यात्रा की अभिलाषा हो रही पूरी
प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आस्था केंद्रों को भव्य स्वरूप देने की दिशा में तेजी से हो रहा कार्य
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के टाटीबंध स्थित इस्कॉन रायपुर के श्री श्री राधा रासबिहारी जी मंदिर में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए। भक्तिमय वातावरण के बीच मुख्यमंत्री श्री साय ने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं शंख अभिषेक किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की।
मुख्यमंत्री साय ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव समाज को धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मयोग का जो संदेश दिया, वह आज भी मानवता को जीवन की चुनौतियों के बीच अपने कर्तव्य पथ पर दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ने की दिशा दिखाता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव नहीं, बल्कि उनके जीवन-दर्शन और आदर्शों को आत्मसात करने का भी अवसर है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और समाज के कमजोर वर्ग के साथ खड़े रहने का संदेश दिया। उनके विचार युगों-युगों से भारतीय समाज को प्रेरित करते आ रहे हैं।
इस अवसर पर मंदिर परिसर ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे’ के महामंत्र से गुंजायमान रहा। मुख्यमंत्री साय ने भी भक्तवृंद के साथ हरे कृष्ण महामंत्र का घोष किया और वृंदावन बिहारीलाल के प्राकट्य उत्सव पर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्तिभाव से पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।
छत्तीसगढ़ की धार्मिक विरासत हमारी अमूल्य धरोहर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन काल से ही धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की पुण्यभूमि रही है। यह माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। हमारे गांवों, नगरों, मंदिरों, तीर्थों और लोक परंपराओं में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत जीवंत है। इस गौरवशाली धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सहेजना, उसका संवर्धन करना तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भोरमदेव, गंधेश्वर महादेव, मधेश्वर महादेव और कुलेश्वर महादेव जैसे प्रसिद्ध शिवधाम हैं, वहीं मां बमलेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, माता दंतेश्वरी और मां चंद्रहासिनी जैसे शक्तिपीठ एवं आस्था केंद्र प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान को समृद्ध करते हैं। राज्य सरकार इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने और उन्हें भव्य स्वरूप देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के भोरमदेव मंदिर क्षेत्र को प्रसाद योजना के अंतर्गत लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।
हर श्रद्धालु को तीर्थ दर्शन का अवसर देने का प्रयास
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आस्था हमारे समाज की बड़ी शक्ति है। आर्थिक अथवा अन्य कारणों से कोई श्रद्धालु तीर्थ दर्शन की अपनी अभिलाषा से वंचित न रहे, इस भावना के साथ राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर में रामलला के विराजमान होने के बाद छत्तीसगढ़ के लोगों में अपने आराध्य के दर्शन को लेकर अपार उत्साह है। राज्य सरकार की श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम की यात्रा कराई जा रही है। अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इसी प्रकार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत प्रदेश के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। जीवन के इस पड़ाव पर तीर्थ दर्शन की उनकी अभिलाषा पूरी होते देखना सरकार के लिए भी संतोष का विषय है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास से हमारी विरासत का संरक्षण तो होता ही है, साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार से पर्यटन बढ़ता है और स्थानीय युवाओं, स्व-सहायता समूहों, छोटे व्यवसायियों तथा कारीगरों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर निर्मित होते हैं। सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख आस्था केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं।
भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा महा-महोत्सव
उल्लेखनीय है कि इस्कॉन रायपुर के 26वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में 03 से 05 सितम्बर तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की आराधना, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महोत्सव में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरन्दर मिश्रा, इस्कॉन रायपुर के पदाधिकारीगण, संतजन एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना का प्रावधान नहीं, सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक जानकारियों से बचने की अपील
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 के माध्यम से साक्षात्कार के लिए चिन्हांकित अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रांतियों को स्पष्ट किया है। आयोग ने कहा है कि राज्य सेवा परीक्षा-2025 में निर्धारित संख्या से कम अभ्यर्थियों का चिन्हांकन किसी त्रुटि के कारण नहीं, बल्कि निर्धारित न्यूनतम अर्हकारी अंक प्राप्त नहीं करने के कारण हुआ है।
आयोग के अनुसार, राज्य सेवा परीक्षा-2025 के विज्ञापन की कंडिका 3 (iv) एवं छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग प्रक्रिया नियम की कंडिका 7 के तहत प्रत्येक प्रश्न-पत्र में अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 23 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों द्वारा निर्धारित अर्हकारी अंक प्राप्त नहीं किए जाने के कारण साक्षात्कार के लिए चिन्हांकित अभ्यर्थियों की संख्या वांछित संख्या से कम हो सकती है। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 में भी इसी कारण 795 अभ्यर्थियों के स्थान पर कुल 608 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए चिन्हांकित किया गया है।
पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना का प्रावधान नहीं
आयोग ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन की कंडिका 11 (V) के अनुसार आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पुनर्मूल्यांकन तथा पुनर्गणना का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए किसी भी प्रश्न-पत्र के संबंध में पुनर्मूल्यांकन अथवा पुनर्गणना की प्रक्रिया नहीं की जा सकती।
वेबसाइट पर उपलब्ध होगी मेरिट सूची और कट ऑफ
आयोग ने बताया कि चयन परिणाम जारी होने के बाद प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों की मेरिट सूची तथा मुख्य परीक्षा की कट ऑफ आयोग की वेबसाइट पर जारी की जाती है। इसके अतिरिक्त अभ्यर्थी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्रारंभिक परीक्षा की ओएमआर उत्तर पत्रक तथा मुख्य परीक्षा की प्रश्न सह उत्तर पुस्तिका की प्रति प्राप्त कर अपने परीक्षा परिणाम के संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
प्रश्नवार और पहचान रहित मूल्यांकन प्रक्रिया
आयोग ने कहा कि सभी लिखित परीक्षाओं का मूल्यांकन विषय विशेषज्ञों के माध्यम से गंभीरता और निष्पक्षता के साथ कराया जाता है। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में प्रश्नवार मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो पूरी तरह पहचान रहित होती है। इससे मूल्यांकन कार्य में शामिल किसी भी व्यक्ति के लिए यह जानना संभव नहीं होता कि संबंधित उत्तर पुस्तिका किस अभ्यर्थी की है।
आयोग के अनुसार, प्रत्येक अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में बड़ी संख्या में विषय विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ता शामिल होते हैं। निर्धारित प्रक्रिया, नियमों एवं निर्देशों के माध्यम से मूल्यांकन की शुचिता, गोपनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाती है।
भ्रामक जानकारी से प्रभावित न होने की अपील
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से प्रसारित की जा रही भ्रामक जानकारियों से प्रभावित न हों। आयोग ने कहा कि राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 के माध्यम से साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के चिन्हांकन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों एवं निर्देशों के अनुरूप पूर्णतः सही ढंग से की गई है।
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से नई दिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की मुलाकात
मुख्यमंत्री ने कहा - नई औद्योगिक नीति में टेक्सटाइल को थ्रस्ट सेक्टर का दर्जा, निवेश के साथ बड़े पैमाने पर खुलेंगे रोजगार के अवसर
एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार देने वाले उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान
नवा रायपुर में टेक्सटाइल यूनिट्स की स्थापना को मिल रही गति, सेंट्रल इंडिया के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में उभरेगा छत्तीसगढ़
NIFT से आधुनिक तकनीक और डिजाइन को मिलेगा बढ़ावा, चांपा के कोसा सहित छत्तीसगढ़ की समृद्ध वस्त्र परंपरा को मिलेगा नया बाजार
केंद्रीय वस्त्र मंत्री ने तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में हरसंभव सहयोग का दिया भरोसा
नई दिल्ली / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार, निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति में टेक्सटाइल सेक्टर को दिए गए विशेष प्रोत्साहनों तथा इस क्षेत्र में आ रहे निवेश की जानकारी दी। दोनों नेताओं के बीच छत्तीसगढ़ को मध्य भारत के प्रमुख टेक्सटाइल और अपैरल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने तथा आधुनिक तकनीक, डिजाइन और नवाचार को राज्य के पारंपरिक वस्त्र कौशल से जोड़ने को लेकर भी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल सेक्टर के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में टेक्सटाइल सेक्टर को थ्रस्ट सेक्टर के रूप में शामिल किया है। इसके अंतर्गत इस क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्यमियों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन एवं अनुदान का प्रावधान किया गया है। इन प्रावधानों के परिणामस्वरूप टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है और प्रदेश में नई इकाइयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की औद्योगिक नीति का प्रमुख उद्देश्य निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना है। इसी दृष्टि से एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग श्रम आधारित होने के कारण बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। नई नीति के इन प्रावधानों से छत्तीसगढ़ टेक्सटाइल निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य के रूप में तेजी से उभर रहा है।
नवा रायपुर में आकार ले रहा टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग इको-सिस्टम
मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि नवा रायपुर अटल नगर में टेक्सटाइल क्षेत्र की नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना को गति मिल रही है। राज्य सरकार का प्रयास है कि यहां केवल उत्पादन इकाइयां ही स्थापित न हों, बल्कि टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र का एक समग्र इको-सिस्टम विकसित हो, जिसमें डिजाइन, उत्पादन, कौशल विकास, आधुनिक तकनीक और बाजार की सुविधाएं एक-दूसरे से जुड़ी हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग की विशेषता यह है कि अपेक्षाकृत बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ इसमें महिलाओं और युवाओं के लिए भी व्यापक अवसर उपलब्ध होते हैं। इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और सहायक उद्योगों तथा स्थानीय उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
छत्तीसगढ़ की परंपरा और आधुनिक फैशन टेक्नोलॉजी का होगा संगम
बैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश का कोसा सिल्क देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। विशेष रूप से चांपा और आसपास के क्षेत्रों की कोसा परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि इस पारंपरिक कौशल को आधुनिक डिजाइन, तकनीक, ब्रांडिंग और व्यापक बाजार से जोड़कर नई ऊंचाई दी जाए।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के युवाओं को फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी और इससे जुड़े आधुनिक क्षेत्रों में उच्च स्तरीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे। साथ ही स्थानीय बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों को डिजाइन एवं तकनीकी नवाचार का लाभ मिलने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
NIFT जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान और नई टेक्सटाइल इकाइयों के बीच समन्वय से राज्य में डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक मजबूत वैल्यू चेन विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वस्त्र कला को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप नए उत्पादों और डिजाइनों से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
सेंट्रल इंडिया के बड़े टेक्सटाइल हब के रूप में उभरने की क्षमता
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के साथ वैश्विक स्तर पर भी टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास के लिए उपलब्ध संसाधन, राज्य सरकार की निवेश-अनुकूल नीति और रोजगार आधारित प्रोत्साहन इसे इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण निवेश गंतव्य बना सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल यूनिट्स के विस्तार से छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना है। राज्य जिस प्रकार इस क्षेत्र को प्राथमिकता देकर आगे बढ़ रहा है, उससे आने वाले समय में छत्तीसगढ़ सेंट्रल इंडिया के एक प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सकता है।
तकनीक और नवाचार में केंद्र देगा सहयोग
श्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार के लिए हरसंभव सहयोग करेगी। उन्होंने विशेष रूप से आधुनिक तकनीक, नवाचार, कौशल विकास और टेक्सटाइल सेक्टर में नई संभावनाओं के विस्तार के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय पर जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग तेजी से बदल रहा है और आधुनिक तकनीक तथा नवाचार इसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के महत्वपूर्ण आधार हैं। केंद्र सरकार इस दिशा में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में ऐसा टेक्सटाइल इको-सिस्टम विकसित करना है, जिसमें निवेश और रोजगार के साथ स्थानीय कौशल, पारंपरिक वस्त्र कला, आधुनिक डिजाइन और तकनीक का समन्वय हो। नई औद्योगिक नीति के प्रोत्साहन, नवा रायपुर में विकसित हो रहे औद्योगिक वातावरण और NIFT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के माध्यम से छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में टेक्सटाइल और अपैरल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में देश के प्रमुख केंद्रों में अपनी जगह बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुजनों के नाम लिखा आत्मीय पत्र
अपने विद्यार्थी जीवन के संघर्षों को किया याद, कहा - परिस्थितियाँ किसी बच्चे के सपनों की सीमा तय न करें
गुरुजनों से आत्मीय आग्रह: अभाव, संकोच या किसी कारण पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ अवश्य थामिए
शिक्षकों से मिले संस्कार और सीख को बताया अपने जीवन की पूँजी
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस ( 5 सितंबर) के अवसर पर प्रदेश के गुरुजनों के नाम आत्मीय पत्र लिखकर उन्हें सादर नमन किया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्र में अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए बचपन के संघर्ष, उस दौर में शिक्षा प्राप्त करने की कठिनाइयों और आज शिक्षा के क्षेत्र में आए व्यापक बदलाव का भावपूर्ण उल्लेख किया है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया है कि वे प्रत्येक बच्चे के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानें और विशेष रूप से उन बच्चों का हाथ थामें, जो अभाव, संकोच अथवा किसी अन्य कारण से पीछे छूट रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने लिखा है कि आज मुख्यमंत्री के दायित्व का निर्वहन करते हुए जब उन्हें प्रदेश के बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा से जुड़े निर्णय लेने का अवसर मिलता है, तब अपने बचपन और विद्यार्थी जीवन के वे दिन और अधिक याद आते हैं। जीवन कितना भी आगे बढ़ जाए, अपने शिक्षकों के प्रति आदर और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होता।
बगिया के छोटे से स्कूल से शुरू हुआ शिक्षा का सफर
मुख्यमंत्री साय ने पत्र में अपने बचपन को याद करते हुए बताया है कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गाँव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ और गाँव के स्कूल से ही उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई। जीवन ने बहुत छोटी उम्र में उनकी कठिन परीक्षा ली। जब वे लगभग दस वर्ष के थे और चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी पिता का साया सिर से उठ गया। परिवार, खेती और छोटे भाइयों की चिंता कम उम्र में ही उनके जीवन का हिस्सा बन गई।
गाँव में पाँचवीं तक पढ़ने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा। वहाँ लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक छोटे से कमरे में रहकर पढ़ाई की। आगे भी पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा का क्रम जारी नहीं रख सके। उन्होंने खेती की जिम्मेदारी संभाली और अपने छोटे भाइयों की पढ़ाई को आगे बढ़ाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय गाँव के एक बच्चे के लिए शिक्षा तक पहुँचना आज जितना सहज नहीं था। विद्यालय दूर होते थे, आवागमन के साधन सीमित थे, पढ़ाई के संसाधनों का अभाव था और आर्थिक कठिनाइयाँ भी कई बच्चों के सपनों की राह में बाधा बन जाती थीं।
स्लेट-तख्ती से स्मार्ट क्लास तक:मुख्यमंत्री ने याद किया शिक्षा का बदलता दौर
मुख्यमंत्री साय ने अपने विद्यार्थी जीवन और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर यह सुखद अनुभूति होती है कि शिक्षा की दुनिया कितनी बदल गई है। जिस समय उनकी पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से पढ़ाई शुरू की थी, आज उसी छत्तीसगढ़ के बच्चे स्मार्ट क्लास में पढ़ रहे हैं। डिजिटल माध्यमों से दुनिया भर के ज्ञान तक उनकी पहुँच बनी है और वे विज्ञान एवं आधुनिक तकनीक से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कभी दूरस्थ अंचलों में विद्यालय तक पहुँचना भी बच्चों के लिए चुनौती हुआ करता था, वहीं आज इन क्षेत्रों में बेहतर विद्यालय, आधुनिक शैक्षणिक संसाधन और नए अवसर बच्चों के द्वार तक पहुँच रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा में आए इस व्यापक परिवर्तन के बावजूद एक बात तब भी सत्य थी और आज भी उतनी ही सत्य है- शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार शिक्षक ही है।
तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन शिक्षक ही बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाता है
मुख्यमंत्री साय ने गुरुजनों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीक बच्चों को जानकारी दे सकती है, पुस्तकें उन्हें ज्ञान दे सकती हैं और आधुनिक संसाधन सीखने की राह आसान कर सकते हैं, लेकिन किसी बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाने, उसके संस्कार गढ़ने, उसकी प्रतिभा पहचानने और उसे एक अच्छा मनुष्य बनाने का सामर्थ्य एक संवेदनशील शिक्षक में ही होता है।
उन्होंने कहा कि उनके अपने जीवन में भी गुरुजनों से मिली सीख ने कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का साहस दिया। यही कारण है कि वे शिक्षक को केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि जीवन की दिशा दिखाने वाला पथ-प्रदर्शक मानते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि जिन अभावों और कठिनाइयों के कारण कभी किसी बच्चे की पढ़ाई रुक जाती थी, वे आज किसी बच्चे के सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। कोई बच्चा केवल इसलिए पीछे न रह जाए कि उसका जन्म किसी छोटे गाँव, वनांचल अथवा दूरस्थ क्षेत्र में हुआ है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इसी सोच के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को अधिक सहज, आधुनिक, व्यावहारिक और बच्चों की प्रतिभा के अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। कौशल और व्यावहारिक ज्ञान को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है तथा डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन क्षेत्रों में भी विद्यालयों की घंटियाँ फिर सुनाई दे रही हैं, जहाँ परिस्थितियों के कारण वर्षों तक स्कूल बंद रहे थे। यह बदलाव केवल भवन, तकनीक और सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर देने का संकल्प है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना चाहते हैं, जहाँ किसी बच्चे की परिस्थितियाँ उसके सपनों की सीमा तय न करें।
हर बच्चे में छिपी हैं अनगिनत संभावनाएँ
मुख्यमंत्री साय ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस संकल्प को धरातल पर उतारने की सबसे बड़ी शक्ति प्रदेश के शिक्षक हैं। शिक्षक के सामने कक्षा में बैठा हर बच्चा अपने भीतर अनगिनत संभावनाएँ लेकर आता है। कोई भविष्य का वैज्ञानिक हो सकता है, कोई खिलाड़ी, डॉक्टर, किसान, शिक्षक, कलाकार या जनसेवक।
उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे को स्वयं अपनी क्षमता का पता नहीं होता, लेकिन शिक्षक की पारखी दृष्टि उसकी प्रतिभा पहचान लेती है। शिक्षक द्वारा कहा गया प्रोत्साहन का एक वाक्य भी किसी बच्चे को जीवन भर आगे बढ़ने की शक्ति दे सकता है।
मुख्यमंत्री का गुरुजनों से विशेष आग्रह:पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ थामिए
मुख्यमंत्री साय ने शिक्षक दिवस पर गुरुजनों से अत्यंत आत्मीय आग्रह करते हुए कहा कि हर बच्चे के भीतर छिपी संभावना को पहचानिए। विशेषकर उस बच्चे का हाथ अवश्य थामिए, जो अभाव में है, संकोच में है या किसी कारण पीछे छूट रहा है। हो सकता है आपका थोड़ा-सा विश्वास उसके पूरे जीवन की दिशा बदल दे।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का विश्वास किसी बच्चे के लिए जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन सकता है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संस्कार और उसकी क्षमताओं को विकसित करना भी है।
मुख्यमंत्री साय ने अपने पत्र में अत्यंत भावपूर्ण ढंग से गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर वे मुख्यमंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि कभी गाँव के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाले उस विद्यार्थी के रूप में भी सभी गुरुजनों के प्रति कृतज्ञ हैं, जिसने अपने शिक्षकों से मिले संस्कार और सीख को जीवन की पूँजी माना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समय बदल गया है, स्कूल बदल रहे हैं और पढ़ाने तथा सीखने के साधन भी बदल रहे हैं। आने वाले समय में आधुनिक तकनीक इन्हें और अधिक बदलेगी, लेकिन गुरु और शिष्य के बीच विश्वास, स्नेह और संस्कार का जो संबंध भारतीय परंपरा की आत्मा है, उसका महत्व कभी कम नहीं होगा।
हर स्कूल बने सपनों का द्वार, हर कक्षा संभावनाओं का संसार
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के शिक्षकों से आह्वान किया कि हम सब मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ गढ़ें, जहाँ हर स्कूल सपनों का द्वार बने, हर कक्षा संभावनाओं का संसार बने और हर शिक्षक अपने विद्यार्थी के जीवन में आशा का दीप जलाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों के ज्ञान से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो, उनके संस्कारों से समाज समृद्ध हो और उनके मार्गदर्शन से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए, यही उनकी कामना है।
मुख्यमंत्री साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी गुरुजनों को सादर नमन करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और यशस्वी जीवन की कामना की तथा सभी शिक्षकों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं।
रिंग रोड, पुल, केलो रिवर फ्रंट, मरीन ड्राइव, ऑक्सीजोन और आधुनिक अधोसंरचना परियोजनाओं को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश
आने वाले एक-दो वर्षों में रायगढ़ के विकास की तस्वीर जमीन पर स्पष्ट दिखाई देगी : वित्त मंत्री श्री चौधरी
रायपुर / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को नई गति मिल रही है। इसी क्रम में रायगढ़ शहर को आधुनिक, सुव्यवस्थित और बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी ने शुक्रवार को शहर की प्रमुख विकास परियोजनाओं का मैराथन निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता और समय-सीमा की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों को कार्यों में तेजी लाने तथा निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
वित्त मंत्री चौधरी ने दूध डेयरी ऑक्सीजोन से निरीक्षण की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने गोवर्धनपुर में केलो नदी पर निर्माणाधीन पुल, खर्राघाट स्थित केलो रिवर फ्रंट, नालंदा परिसर, एसईसीएल रोड मरीन ड्राइव, कयाघाट पुल, मिनी स्टेडियम स्थित स्केटिंग रिंग, कौहाकुंडा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, स्टेडियम और एफसीआई ऑक्सीजोन सहित विभिन्न विकास कार्यों का स्थल निरीक्षण किया।
रायगढ़ के सुनियोजित विकास के लिए बड़े अधोसंरचनात्मक कार्यों को प्राथमिकता
वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि रायगढ़ के विकास के लिए जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, इंजीनियरों और निर्माण एजेंसियों के समन्वय से लगातार कार्य किया जा रहा है। हमारा उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि शहर की अधोसंरचना को मजबूत करते हुए नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है। प्रत्येक परियोजना की गहन निगरानी की जा रही है, ताकि विकास कार्य तेजी के साथ उच्च गुणवत्ता में पूरे हों।
उन्होंने कहा कि रायगढ़ औद्योगिक विकास के क्षेत्र में प्रदेश के महत्वपूर्ण शहरों में शामिल है। औद्योगिक गतिविधियों के अनुरूप शहर में जिस स्तर की अधोसंरचना विकसित होनी चाहिए थी, वह लंबे समय तक अपेक्षित गति से नहीं बन पाई। इसके चलते यातायात, भारी वाहनों के दबाव, दुर्घटनाओं, धूल और प्रदूषण जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। अब इन चुनौतियों के स्थायी समाधान के लिए सुनियोजित ढंग से बड़े अधोसंरचनात्मक कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
रिंग रोड परियोजना से यातायात व्यवस्था होगी सुगम
वित्त मंत्री चौधरी ने रिंग रोड परियोजना को रायगढ़ के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। घरघोड़ा रोड से झारसुगुड़ा रोड को जोड़ने के लिए प्रथम चरण में कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना पर 400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में रायगढ़ से घरघोड़ा तक सड़क को फोरलेन करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
हरित क्षेत्र और आधुनिक सार्वजनिक सुविधाओं पर भी जोर
वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि रायगढ़ में बेहतर सड़कों और पुलों के साथ-साथ हरित क्षेत्रों, खेल सुविधाओं, आधुनिक सार्वजनिक सुविधाओं और नागरिक अधोसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केलो रिवर फ्रंट, मरीन ड्राइव, ऑक्सीजोन, नालंदा परिसर और खेल सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं शहर के स्वरूप को नया आयाम देंगी। उन्होंने कहा कि आने वाले एक-दो वर्षों में रायगढ़ के विकास की तस्वीर जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगी।
उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा आपसी समन्वय से आने वाली बाधाओं का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान महापौर जीवर्धन चौहान, सभापति डिग्रीलाल साहू, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, नगर निगम आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय, स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, विभागीय अधिकारी, इंजीनियर तथा संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
साभार - धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद स्कूलों में घंटियां बजने लगी हैं, जो इस शिक्षक दिवस पर बस्तर और उसके आस-पास के क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक और भावुक बदलाव का प्रतीक है। जहाँ कभी बारूद की गंध और बंदूक की आवाजें हुआ करती थीं, वहाँ अब बच्चे राष्ट्रगान गा रहे हैं।
5 सितंबर को देशभर में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर ‘शिक्षक दिवस’ की धूमधाम रहेगी। इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ का बस्तर और अन्य दूरस्थ अंचल एक नई उम्मीद के साथ मुस्कुरा रहा है। कभी बंदूक के साए और नक्सली खौफ के कारण दशक भर से बंद पड़े स्कूल आज फिर से गुलजार हो चुके हैं। दूर-दराज के गांवों में जब वर्षों बाद फिर से स्कूल की घंटी बजती है, तो वह केवल पढ़ाई की शुरुआत नहीं होती, बल्कि उस क्षेत्र में लौटते लोकतंत्र, शांति और सुरक्षा की गूंज होती है।
बंद पड़े स्कूल फिर से हुए संचालित
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास, सुरक्षा और जन कल्याणकारी नीतियों (‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाओं) के प्रभाव से दक्षिण बस्तर के सुदूर नक्सल प्रभावित इलाकों में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों में लगभग दो से ढाई दशकों से बंद पड़े 600 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को जिला प्रशासन और पुलिस बल के सहयोग से दोबारा खोल दिया गया है। जो इमारतें कभी नक्सलियों द्वारा ध्वस्त कर दी गई थीं या सुरक्षा बलों के कैंप के लिए इस्तेमाल होती थीं, उन्हें फिर से संवारकर बाल-सुलभ रूप दिया गया है।
शिक्षकों का अदम्य साहस और समर्पण
नक्सलमुक्त होते क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जलाने का वास्तविक श्रेय उन स्थानीय शिक्षकों को जाता है, जिन्होंने विपरीत और भयावह परिस्थितियों के बावजूद अपना कर्तव्य नहीं छोड़ा।
• स्थानीय भाषा में अध्यापन: दूरस्थ वनांचल में नियुक्त शिक्षक न केवल बच्चों को बुनियादी अक्षर ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि गोंडी, हलबी और डोरली जैसी स्थानीय बोलियों में संवाद कर बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत कर रहे हैं।
• समुदाय से संवाद: शिक्षकों ने ग्रामीणों और नक्सलियों के डर से सहमे अभिभावकों के बीच जाकर उनका विश्वास जीता, जिससे आज सैकड़ों बच्चे वापस ब्लैकबोर्ड और किताबों से जुड़ चुके हैं।
तकनीक और नवाचार से जुड़ रहा बस्तर का बचपन
बस्तर संभाग के बीजापुर (जैसे पीड़िया, गंपूर, तमोड़ी गांव) और सुकमा के कई अंदरूनी इलाकों में सालों से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खोला गया है। नक्सलियों द्वारा जिन पक्के स्कूल भवनों को आईईडी से उड़ा दिया गया था, वहाँ ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ मिलकर अस्थायी बांस और तिरपाल की झोपड़ियां (छप्पर) तैयार की हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई न रुके। स्थानीय भाषाओं (जैसे गोंडी, हल्बी) की चुनौती से निपटने और बच्चों में विश्वास जगाने के लिए स्थानीय शिक्षित युवाओं को शिक्षा दूत के रूप में नियुक्त किया गया है, जो इस शिक्षक दिवस के असली नायक हैं। पुनः संचालित हो रहे स्कूलों में अब केवल पुरानी लीक पर पढ़ाई नहीं हो रही है। राज्य शासन द्वारा इन स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं:
• स्मार्ट क्लासेस और टैबलेट: कई वनांचल स्कूलों में डिजिटल कंटेंट और टैबलेट के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
• खेलकूद और न्योता भोजन: स्कूलों में मध्याह्न भोजन (न्योता भोजन) के साथ-साथ खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है, जिससे बच्चों की उपस्थिति में भारी उछाल आया है।
• सुरक्षित माहौल: नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत कैंपों के आसपास सुरक्षा का दायरा बढ़ने से शिक्षक बिना किसी खौफ के रोजाना स्कूल पहुंच रहे हैं।
शिक्षक दिवस पर संदेश
छत्तीसगढ़ में इस बार का शिक्षक दिवस उन शिक्षकों को समर्पित है जो राज्य के सबसे कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में 'शिक्षादूत' बनकर कार्य कर रहे हैं। बंदूक की आवाज को दबाकर जब कलम और किताब की ताकत आगे बढ़ती है, तो समाज की नई तस्वीर बनती है। छत्तीसगढ़ के नक्सलमुक्त इलाकों मं। गूंजती स्कूलों की घंटी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि शिक्षा ही बदलाव और शांति की सबसे मजबूत नींव है।
रायपुर, / छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान लंबे समय से खनिज और प्राथमिक प्रसंस्करण पर आधारित रही है। अब राज्य इस पहचान को बदलते हुए कच्चे संसाधनों की बजाय वैल्यू एडेड और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंगका केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार की औद्योगिक रणनीति में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, रक्षा उपकरण, एआई और ग्रीन स्टील जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी जा रही है।
राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में इस बदलाव का आधार तैयार किया गया है। इस नीति में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और उनके मूल्य संवर्धन के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, एआई, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मा, रक्षा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन दिया गया है। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ को केवल खनिजों का आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि तैयार उत्पादों और उन्नत तकनीक आधारित उद्योगों का केंद्र बनाना है।
करीब 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव
औद्योगिक नीति लागू होने के बाद से राज्य में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है। राज्य के निवेश प्रोत्साहन पोर्टल के अनुसार पिछले करीब 18 महीनों में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावप्राप्त हुए हैं। इनसे 1.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। खास बात यह है कि इन प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा पारंपरिक खनिज आधारित उद्योगों से आगे बढ़कर एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे विशेष क्षेत्रों से जुड़ा है।
नवा रायपुर में एआई और डेटा सेंटर से जुड़े निवेश तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव राज्य की बदलती औद्योगिक दिशा को दर्शाते हैं। इसी क्रम में राजनांदगांव मेंइलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0)को मंजूरी मिली है। इससे 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और करीब 9,000 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार आने की उम्मीद है।
स्टील से आगे ग्रीन स्टील की ओर
स्टील उत्पादन में मजबूत आधार रखने वाला छत्तीसगढ़ अब इस क्षेत्र में भी अगली पीढ़ी के उत्पादन पर जोर दे रहा है। देश में कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित विनिर्माण को बढ़ावा देने के बीचग्रीन स्टीलराज्य के लिए बड़ा अवसर बनकर उभरा है। पिछले महीने आयोजित छत्तीसगढ़ ग्रीन स्टील डायलॉग के दौरान करीब 13,840 करोड़ रुपये के निवेश प्रतिबद्धताओंने इस क्षेत्र की संभावनाओं को मजबूत किया है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष स्टील के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई जैसी योजनाएं चल रही हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ अपने खनिज संसाधन, मौजूदा स्टील उद्योग और ऊर्जा आधार का इस्तेमाल उच्च मूल्य वाले स्टील उत्पादों के निर्माण में कर सकता है।
फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स में नई संभावनाएं
फार्मास्यूटिकल्स भी राज्य की नई औद्योगिक तस्वीर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। पिछले 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र में करीब992.53 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावआए हैं, जबकि 216 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट कार्यान्वयन के चरण में हैं।इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विस्तार हो रहा है। केंद्र की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत देशभर में 69 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। छत्तीसगढ़ में EMC 2.0 जैसी पहल इस राष्ट्रीय सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का अवसर देती है।
संसाधन से उत्पाद तक
बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में भी औद्योगिक विकास की रणनीति केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है। वन उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के जरिए क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ सकते हैं।
निवेश को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने सिंगल विंडो व्यवस्था, SIPB और ऑनलाइन स्वीकृति तंत्र को मजबूत किया है। 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता आधारित सुविधाएं और त्वरित अनुमोदन की व्यवस्था भी की गई है।
छत्तीसगढ़ के पास खनिज, ऊर्जा और औद्योगिक आधार की ताकत पहले से मौजूद है। अब लक्ष्य इन संसाधनों से आगे बढ़करउच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्माणकरना है। इलेक्ट्रॉनिक्स से ग्रीन स्टील और फार्मा से एआई तक नए क्षेत्रों में बढ़ता निवेश संकेत दे रहा है कि राज्य अपनी औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी में है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
