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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन से नक्सली हिंसा से प्रभावित भाई-बहनों का बढ़ा आत्मविश्वास : मुख्यमंत्री साय
छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच का आयोजन, महिला दर्शकों के लिए प्रवेश रहेगा निःशुल्क
रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास के संबंध में हमने राष्ट्रपति महोदया को बस्तर आने का आमंत्रण दिया था। पूर्व में बस्तर के मांझी-चालकी प्रतिनिधियों से भेंट के दौरान भी उनसे बस्तर आने का आग्रह किया गया था, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया था। उनका 22 एवं 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ प्रवास प्रस्तावित है। 23 अक्टूबर को वे जगदलपुर जाएंगी और वहां मुरिया दरबार में शामिल होंगी। राष्ट्रपति महोदया का बस्तर आगमन हम सभी के लिए प्रसन्नता और गौरव का अवसर है।
मुख्यमंत्री साय ने नक्सली हिंसा से प्रभावित एवं अन्य दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर को संबोधित किया है। सरकार का प्रयास है कि नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता मिले और वे सम्मान एवं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।
प्रदेश में पहली बार आयोजित होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच के संबंध में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए प्रसन्नता का विषय है। भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले इस मैच में महिला दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है। इससे प्रदेश की माताओं-बहनों और बेटियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने के साथ उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।
नवा रायपुर में 150 करोड़ से अधिक का निवेश, 3500 से ज्यादा लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार
नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को मिली गति, छत्तीसगढ़ को मिले साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को रोजगार सृजन से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की प्रस्तावित नई औद्योगिक इकाई का भूमिपूजन किया। इस इकाई की स्थापना पर 150 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है, जिससे साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवचयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता उद्योगों के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना और निवेश का लाभ आम परिवारों तक पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि औद्योगिक विकास का वास्तविक लाभ तभी है, जब उससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों, परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिले। यश फैन्स एंड एप्लायंसेस की प्रस्तावित इकाई इसी सोच का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे श्रम आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित कर रही है, जिनमें अपेक्षाकृत कम पूंजी निवेश से बड़ी संख्या में रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। उद्योगों के विस्तार से युवाओं और महिलाओं को अपने ही प्रदेश में कौशल एवं योग्यता के अनुरूप काम मिलने के अवसर बढ़ेंगे। इससे रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन की आवश्यकता भी कम करने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित और समृद्ध राज्य बनाने के लिए औद्योगिक विकास, कौशल उन्नयन, आधुनिक अधोसंरचना और रोजगार सृजन पर एक साथ काम किया जा रहा है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा, मानव संसाधन और बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ उठाकर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश केंद्रों में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचे और स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर मिलें।
नई औद्योगिक नीति से निवेशकों का बढ़ा भरोसा
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 में रोजगारपरक उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और अन्य श्रम आधारित क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ को साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। अब सरकार का जोर इन प्रस्तावों को वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदलने, निर्माण कार्यों को गति देने और उत्पादन शुरू कराकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर है।
उद्योगों की स्थापना एवं संचालन की प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए भी विभिन्न सुधार किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं और जटिलताओं से राहत देने के उद्देश्य से जनविश्वास से जुड़े सुधारों के अंतर्गत 279 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की पहल की गई है। अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाकर निवेशकों को सहयोग दिया जा रहा है, ताकि परियोजनाएं जल्द धरातल पर उतरें और उत्पादन तथा रोजगार सृजन की शुरुआत हो सके।
निवेश के साथ रोजगार सृजन पर विशेष जोर : ओ.पी. चौधरी
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की औद्योगिक नीति में रोजगार को प्रमुख स्थान दिया गया है। अब औद्योगिक निवेश को केवल उसकी राशि के आधार पर नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न होने वाले रोजगार के अवसरों के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अधिक पूंजी निवेश और अपेक्षाकृत कम रोजगार देने वाले उद्योगों की प्रधानता रही है। नई नीति में श्रम आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देकर इस स्थिति में बदलाव लाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर वित्त एवं उद्योग विभाग के समन्वय से औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 तैयार की गई है। उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए सब्सिडी के बजटीय प्रावधान को लगभग 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक किया गया है। उन्होंने कहा कि यश फैन्स एंड एप्लायंसेस की प्रस्तावित इकाई में 150 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना इस नीति की रोजगारपरक सोच को दर्शाती है।
वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास से प्राप्त संसाधनों का उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत बनाने में किया जाएगा। सरकार सुशासन, अधोसंरचना, तकनीक और औद्योगिक विकास को गति देकर आर्थिक प्रगति के लाभ गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित, 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों में तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके माध्यम से 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। आगामी औद्योगिक परियोजनाओं से डेढ़ लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि निवेश अनुकूल नीतियों और उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। यश ग्रुप की नई इकाई को प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उन्होंने कंपनी प्रबंधन को बधाई दी और परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिलाया।
यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड के सीईओ ए.एन. रविचंद्रन ने प्रस्तावित औद्योगिक इकाई की गतिविधियों, उत्पादन योजनाओं और रोजगार संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में उद्योगों के लिए उपलब्ध अनुकूल वातावरण तथा राज्य सरकार से मिल रहे सहयोग की सराहना की।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, यश ग्रुप के चेयरमैन रितेश नरेडी, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंदन कुमार सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधि, कंपनी प्रबंधन के अधिकारी और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू एवं साथियों ने श्रद्धालुओं और गरबा प्रतिभागियों को दिलाया संकल्प, 24 वर्षों से चला रहे जनजागरूकता अभियान
दल्ली राजहरा। नवरात्रि के पावन पर्व पर धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से 15 अक्टूबर 2026 को दल्ली राजहरा स्थित बीएसपी हायर सेकेंडरी स्कूल क्रमांक-2 के मैदान में आयोजित गरबा उत्सव के पांचवें दिन जनजागरूकता अभियान चलाया गया। पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू एवं उनके साथियों ने श्रद्धालुओं और गरबा प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों से पूजा सामग्री को नदी-तालाबों में विसर्जित नहीं करने तथा जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने की अपील की।
आयोजनकर्ता सूरज गुप्ता एवं प्रशांत बाला बोकडे के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में प्रदीप साहू ने कहा कि माता रानी की आराधना के साथ प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेना भी आवश्यक है। पूजा में इस्तेमाल होने वाली फूल-मालाएं, पत्तियां और अन्य सामग्री जल स्रोतों में डालने से प्रदूषण बढ़ सकता है। उन्होंने फूल-पत्तियों को एकत्रित कर जैविक खाद बनाने तथा प्लास्टिक, पॉलीथिन और थर्मोकोल जैसी सामग्रियों का उचित निपटान करने का आग्रह किया।
पर्यावरण प्रेमी टिकेश्वर साहू ने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। वहीं राजकुमार साहू ने बताया कि उनकी टीम पिछले 24 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता अभियान चला रही है। उन्होंने स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और वन्यजीवों की रक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए लोगों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की।
श्रद्धालुओं को दिलाई पर्यावरण संरक्षण की शपथ
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं और गरबा प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पूजा सामग्री जल स्रोतों में नहीं डालने, प्लास्टिक एवं पॉलीथिन का उचित निपटान करने, फूलों से जैविक खाद बनाने और जल स्रोतों को स्वच्छ रखने का संकल्प दिलाया गया।
आयोजनकर्ता प्रशांत बाला बोकडे ने पर्यावरण प्रेमियों की पहल की सराहना करते हुए आयोजन स्थल पर निकलने वाली प्लास्टिक और पूजा सामग्री के उचित निपटान का आश्वासन दिया। वहीं सूरज गुप्ता ने इस जागरूकता अभियान के लिए पर्यावरण प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर टिकेश्वर साहू, राजकुमार साहू, कौशल साहू, हेमशंकर साहू, चेला राम, ताराचंद रावटे, लोकेंद्र देवांगन सहित आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
संदेश: माता रानी की भक्ति के साथ प्रकृति की रक्षा करें, पूजा सामग्री को नदी-तालाबों में न डालें और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाएं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले—दूरस्थ अंचलों तक पहुंच रही शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं, सेवा डेरों से खुलेंगे रोजगार के नए अवसर
दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय शिविर का शुभारंभ, 768 दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण
रायपुर । केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब उससे प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार नक्सली हिंसा के पीड़ितों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है। अब बस्तर को भय और हिंसा की पहचान से बाहर निकालकर खुशहाल एवं समृद्ध क्षेत्र बनाना है।
श्री शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित शिविर में दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 सहित कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर तथा सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।
पांच दशकों की पीड़ा दूर करना सरकार की जिम्मेदारी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी। आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष नागरिकों ने अपने हाथ-पैर गंवाए। नक्सलवाद समाप्त करना पहला लक्ष्य था, लेकिन अब प्रभावित लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना और उनके जीवन में आत्मविश्वास लौटाना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने बताया कि 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे, जिनमें 1,570 से अधिक बस्तर के थे। श्री शाह ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में स्थानीय जनजातीय समाज, सुरक्षा बलों और प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्लानार और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना जैसी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी भय का वातावरण था, वहां अब खेल, संस्कृति और विकास गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।
आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं पर जोर
श्री शाह ने बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। इनमें 7,328 लोगों के बैंक खाते खोलना, 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि देना शामिल है। इसके अलावा 455 लोगों को नौकरी, 129 लोगों को भूमि आवंटन, 4,014 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास तथा 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए, 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली दी गई तथा सड़क संपर्क बढ़ाने के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं। साथ ही 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके जीवन में स्थायी बदलाव लाना है।
200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’
केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों से स्थानीय लोगों को सरकारी सेवाएं, कौशल प्रशिक्षण और आजीविका संबंधी अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ नक्सलवाद की दशकों पुरानी चुनौती से मुक्त हुआ है। यह उपलब्धि सुरक्षा बलों के साहस, बलिदान और बस्तर की जनता के सहयोग से संभव हुई है। उन्होंने नक्सल हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों और संघर्ष में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में शामिल करना सरकार का लक्ष्य है। ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं तथा इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं। गांवों में राशन दुकानों की व्यवस्था से लोगों को खाद्यान्न प्राप्त करने में भी सुविधा हो रही है।
सेवा डेरों से रोजगार और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है। यहां सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देने के साथ जंगलों में उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियां शुरू की गई हैं। आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों के अनुरूप प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि बस्तर में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग दो हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इनके पूरा होने पर लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
दिव्यांगजनों को मिला आत्मविश्वास, पुनर्वास अभियान जारी रहेगा
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने अंग और आंखों की रोशनी गंवाई। राज्य सरकार का प्रयास है कि नक्सली हिंसा से प्रभावित कोई भी व्यक्ति पुनर्वास और आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने लाभार्थियों से संवाद भी किया। सुकमा के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे फिर चलने लगे हैं। बीजापुर के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में मछली पकड़ने जाते समय आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर चला गया था। कृत्रिम पैर मिलने से उन्हें दोबारा चलने का सहारा मिला है। वहीं दंतेवाड़ा के अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर प्रसन्नता जताई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलमुक्त बस्तर में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, पर्यटन, संस्कृति और अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का संकल्प है कि बस्तर का प्रत्येक गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलें और हिंसा से प्रभावित परिवार सम्मान एवं आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जी सकें।
कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
रायगढ़ में कोलता समाज के नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री; सामुदायिक भवनों के लिए 80 लाख रुपये की घोषणा
केलो परियोजना से किसानों को मिलेगा सिंचाई का लाभ, पीएम आवास योजना के तहत प्रतिदिन बन रहे लगभग 1,600 आवास
रायगढ़ । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि किसानों की खुशहाली और समृद्धि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और संस्कृति के केंद्र में अन्नदाता हैं। किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। हमारा संकल्प है कि सुशासन और जनसेवा के माध्यम से विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री गुरुवार को रायगढ़ के शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम में आयोजित कोलता समाज के नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मां रणेश्वरी रामचण्डी की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम कोतरलिया के चंडी डोंगरी में सामुदायिक भवन के लिए 30 लाख रुपये तथा नगर पंचायत पुसौर में कोलता समाज के मंगल भवन के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने बाउंड्रीवॉल निर्माण की भी घोषणा की।
नुआखाई कृषि संस्कृति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व
मुख्यमंत्री श्री साय ने नुआखाई पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व नई फसल के स्वागत, किसानों के परिश्रम के सम्मान और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल दिलाने, खेती की लागत कम करने और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है। रायगढ़ अंचल में केलो परियोजना के माध्यम से किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में विकास को गति देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की नई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इनका उद्देश्य अधोसंरचना मजबूत करने के साथ किसानों, युवाओं और आम नागरिकों को विकास का प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाना है।
गरीब परिवारों को पक्के आवास, शिकायतों के समाधान पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जरूरतमंद परिवारों के पक्के मकान का सपना साकार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन लगभग 1,600 आवासों का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि पक्का घर गरीब परिवारों के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का आधार है। सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र परिवार आवास से वंचित न रहे।
सुशासन पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, सेवा सेतु और अटल डिजिटल सेवा केंद्र जैसी व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। तकनीक और आधुनिक प्रशासनिक प्रणालियों के माध्यम से शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की गारंटी के अनुरूप सरकार ने अपने ढाई वर्षों के कार्यकाल में अधिकांश वादों को पूरा किया है। शासन की योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी है, जब उनका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुंचे।
नक्सलवाद से शांति की ओर, विकास को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प, सुरक्षा बलों के साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से प्रदेश में नक्सलवाद के विरुद्ध महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बस्तर में शांति और विश्वास का वातावरण बनाने के साथ प्रभावित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर लौटने वालों के पुनर्वास के लिए सरकार प्रयासरत है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराना और प्रदेश में स्थायी शांति स्थापित करना है।
प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान, युवाओं को बड़े लक्ष्य तय करने की प्रेरणा
समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए कहा कि शिक्षा व्यक्ति, परिवार और समाज की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है। युवाओं को अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बल पर बड़े लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए तथा प्रदेश और समाज का नाम रोशन करना चाहिए।
उन्होंने समाज द्वारा प्रतिभाओं को सम्मानित करने की परंपरा को सराहनीय बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं और शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाते हैं।
वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी ने कोलता समाज की संस्कृति, ईमानदारी, परिश्रम और संस्कारों की सराहना की। उन्होंने युवाओं को शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने रायगढ़ क्षेत्र में विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए बेलरिया में विधायक निधि से 25 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन बनवाने की घोषणा भी की।
लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया ने सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अच्छे संस्कार और बुजुर्गों के सम्मान को समाज की प्रगति का आधार बताया।
समारोह में मुख्यमंत्री ने समाज प्रमुखों और जनप्रतिनिधियों के साथ नुआखाई का पारंपरिक भोजन भी ग्रहण किया। इस अवसर पर महापौर जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक सिदार सहित अन्य जनप्रतिनिधि, समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
वनोपज के लिए एनपीओपी प्रमाणन पाने वाली प्रदेश की पहली महिला किसान उत्पादक कंपनी बनी माँ दंतेश्वरी एफपीसी
1,080 महिला शेयरधारकों और 2,100 वनोपज संग्राहक महिलाओं से जुड़ी कंपनी ने दो वर्षों में किया एक करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार
रायपुर । बस्तर की महिला किसानों और वनोपज संग्राहकों के उत्पादों को अब राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। वनोपज के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के अंतर्गत जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त करने वाली प्रदेश की पहली महिला किसान उत्पादक कंपनी बनी माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड की इस उपलब्धि पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने महिलाओं को बधाई दी। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, बेहतर ब्रांडिंग और निर्यात की तैयारियों पर विशेष जोर दिया।
उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शर्मा ने दंतेवाड़ा सर्किट हाउस में कंपनी की पदाधिकारियों और महिला सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उन्हें अपने ‘दण्डक ब्रांड’ का चावल भेंट किया। चर्चा में दण्डक ब्रांड को छत्तीसगढ़ के ‘छत्तीसकला’ ब्रांड से जोड़कर व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
जैविक प्रमाणन से खुलेंगे बाजार के नए रास्ते
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि एनपीओपी प्रमाणन मिलने के बाद दण्डक ब्रांड के उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना होगा। उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ उनकी पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने महिलाओं को निर्यात के लिए आवश्यक तैयारियां करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि बस्तर के प्राकृतिक वनोपज की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का लाभ स्थानीय महिलाओं और वनोपज संग्राहकों तक पहुंचना चाहिए, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो और आजीविका के नए अवसर विकसित हों।
श्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका को बढ़ावा दे रही है। बस्तर के ऐसे गांवों के कृषि उत्पादों और वनोपज को भी निर्धारित मानकों के अनुरूप जैविक प्रमाणीकरण से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, जहां परंपरागत रूप से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं हुआ है। इससे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
1,080 महिला शेयरधारक, 2,100 संग्राहकों को लाभ
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत वर्ष 2023 में दंतेवाड़ा जिले में माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया था। कंपनी को हाल ही में वनोपज के लिए एनपीओपी प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह राज्य में बिहान के अंतर्गत गठित पहली किसान उत्पादक कंपनी है, जिसे वनोपज के लिए यह प्रमाणन मिला है।
कंपनी से वर्तमान में 1,080 महिला शेयरधारक प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हैं। इसके अतिरिक्त जिले के 60 उत्पादक समूहों से संबंधित 2,100 वनोपज संग्राहक महिलाएं भी इसकी गतिविधियों से लाभान्वित हो रही हैं। कंपनी के माध्यम से महिलाओं को वनोपज के संग्रहण, खरीदी-बिक्री, मूल्य संवर्धन और विपणन के अवसर मिल रहे हैं। कंपनी ने पिछले दो वर्षों में एक करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है।
दण्डक ब्रांड से स्थानीय उत्पादों को पहचान
महिलाओं द्वारा तैयार और संग्रहित स्थानीय उत्पादों को बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने के उद्देश्य से दण्डक ब्रांड की शुरुआत की गई है। इसके अंतर्गत एचएमटी, लाल चूड़ी और बासमती चावल के साथ नीम फूल, अमचूर, इमली, महुआ, कोदो, कुटकी और रागी जैसे उत्पादों का मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और पैकेजिंग कर विपणन किया जा रहा है। कंपनी ने दंतेवाड़ा में विशेष बिक्री केंद्र भी शुरू किया है, जहां विभिन्न स्थानीय उत्पाद एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं।
कंपनी की अध्यक्ष विमला ठाकुर ने बताया कि पहले महिलाओं द्वारा संग्रहित वनोपज की बिक्री मुख्य रूप से स्थानीय बाजारों तक सीमित थी। बिहान मिशन के सहयोग से दण्डक ब्रांड की शुरुआत और अब एनपीओपी प्रमाणन मिलने से महिलाओं में उत्साह है। इससे उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने और बेहतर कीमत प्राप्त करने की उम्मीद बढ़ी है।
कार्यक्रम में विधायक चैतराम अटामी, जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम. भार्गव सहित कंपनी की कोषाध्यक्ष सरिता ठाकुर, सचिव मीना ठाकुर और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
कोलता समाज के नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में हुए शामिल, पुसौर में समाज भवन के लिए 50 लाख और कोतरलिया चंडी डोंगरी में सामुदायिक भवन हेतु 30 लाख रुपये देने की घोषणा
रायगढ़ । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा और अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को रायगढ़ में पत्रकारों से चर्चा के दौरान यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय रायगढ़ में आयोजित कोलता समाज के नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने समाजजनों को नुआखाई और शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए आयोजन के आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त किया।
कोलता समाज के भवनों के लिए 80 लाख रुपये की घोषणा
मुख्यमंत्री ने कोलता समाज को शिक्षित, संगठित और प्रगतिशील बताते हुए कहा कि समाज के लोग शिक्षा, कृषि और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है।
समाज की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और सामुदायिक सुविधाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री ने नगर पंचायत पुसौर में कोलता समाज के भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपये तथा ग्राम कोतरलिया चंडी डोंगरी में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 30 लाख रुपये देने की घोषणा की। इन घोषणाओं से सामाजिक आयोजनों और सामुदायिक गतिविधियों के लिए सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैचों को लेकर उत्साह
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैचों के आयोजन पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों से महिला क्रिकेट को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, प्रदेश की बेटियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से मैचों में पहुंचकर महिला खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन छत्तीसगढ़ में खेल संस्कृति को मजबूत करने और महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
सारसमाल में कर्मा पूजा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास और वीर महापुरुषों के योगदान को किया याद
युवाओं को शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान; जनजातीय अंचलों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई
रायगढ़ । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की परंपरा ने पूरी दुनिया को सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा दी है। कर्मा पर्व इसी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकजुटता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक है।
मुख्यमंत्री गुरुवार को रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारसमाल में उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र द्वारा आयोजित कर्मा पूजा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भगवान करम देव तथा भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे और महिला-पुरुषों के साथ पारंपरिक कर्मा नृत्य किया। उनकी सहभागिता से आयोजन में उत्साह और उल्लास का माहौल बन गया।
जनजातीय महापुरुषों का बलिदान हमारी अमूल्य विरासत
मुख्यमंत्री श्री साय ने कर्मा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने देश की संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे महानायकों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। नई पीढ़ी को उनके त्याग और बलिदान से परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के कल्याण के लिए अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल और आजीविका जैसी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आसीन होना और छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज के प्रतिनिधि को मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का अवसर मिलना समाज के बढ़ते सम्मान और भागीदारी का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने नया रायपुर स्थित जनजातीय संग्रहालय को जनजातीय इतिहास, संस्कृति, जीवनशैली और परंपराओं से नई पीढ़ी को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए जनजातीय समाज को विकास के आधुनिक अवसरों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
संस्कृति हमारी पहचान, शिक्षा उज्ज्वल भविष्य का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मा पर्व नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति आभार और सामूहिक जीवन की भावना को अभिव्यक्त करता है। ऐसे आयोजन समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ युवाओं को अपनी भाषा, परंपराओं और जड़ों से जोड़े रखते हैं। उन्होंने समाजजनों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का आह्वान किया।
युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा जीवन में प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है। युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित कर परिश्रम करना चाहिए और उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रयास आवासीय विद्यालयों तथा नालंदा परिसर जैसी अध्ययन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट की गई है। इससे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से युवा प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, तकनीक, उद्योग और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ा सकते हैं।
रोजगार और कौशल विकास पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दे रही है। शासकीय भर्तियों, रोजगार मेलों और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों, रोजगार मेलों और स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी लेकर उनका अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार काम कर रही हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक आवास, सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि दूरस्थ अंचलों में रहने वाला कोई भी परिवार विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
शिक्षा और सामाजिक एकता से मजबूत होगा समाज
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज ने अपनी संस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। जनजातीय महापुरुषों के योगदान को व्यापक पहचान दिलाना और युवाओं को शिक्षा के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक एकता को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया।
उरांव समाज विकास समिति के अध्यक्ष पनत राम भगत ने स्वागत उद्बोधन में कर्मा पर्व की प्राचीन परंपराओं, उरांव समाज की भाषा, संस्कृति, लोककला और प्रकृति से जुड़े गोत्रों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज की सांस्कृतिक पहचान और एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया।
मांदर और ढोल की थाप पर झलकी जनजातीय संस्कृति
कर्मा पूजा महोत्सव में पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुषों ने मांदर, मृदंग और ढोल की थाप पर सामूहिक कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया। लोकधुनों और लयबद्ध नृत्य ने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक उल्लास से भर दिया। समाज के पदाधिकारियों ने गजमाला पहनाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
कर्मा पर्व ने एक बार फिर जनजातीय समाज की प्रकृति के प्रति आस्था, सामाजिक एकजुटता और समृद्ध लोकपरंपराओं की झलक प्रस्तुत की। आयोजन के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ शिक्षा, युवा सशक्तिकरण और समाज की प्रगति का संदेश भी दिया गया।
नई दिल्ली:
भारतीय बैंकिंग जगत के इतिहास में एक ऐसा अभूतपूर्व 'टर्नअराउंड' देखने को मिला है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। IDBI Bank आज पूरी तरह से मुनाफे के शिखर पर है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक बैंक ने अपने इतिहास का सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹9,513 करोड़ का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) कमाकर इतिहास रच दिया है।
नुकसान का दौर खत्म, मुनाफे की नई इबारत
कुछ साल पहले तक जिस बैंक की माली हालत बेहद नाजुक थी, उसने वित्तीय सुधारों और कड़े फैसलों के दम पर पासा पलट दिया है। आज बैंक का डूबा कर्ज (Net NPA) घटकर न के बराबर यानी मात्र 0.15% रह गया है, जो इसकी बेहद मजबूत और सुरक्षित स्थिति को दर्शाता है।
दिलचस्प बात यह है कि बैंक को घाटे के समय नहीं, बल्कि जब वह अपने सबसे बेहतरीन और रिकॉर्ड-तोड़ मुनाफे के दौर में है, तब इसका निजीकरण किया जा रहा है। सरकार और LIC को बैंक की इसी शानदार वित्तीय सेहत और भारी-भरकम मुनाफे के कारण अपने निवेश की सबसे बेहतरीन कीमत (₹52,878 करोड़) मिली है, जिससे कनाडा की दिग्गज फर्म फेयरफैक्स ने इसे खरीदने में भारी दिलचस्पी दिखाई।
दुर्ग / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम दुर्ग के वार्ड क्रमांक 39 में उद्यानों के संधारण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य अब जमीनी रूप लेने जा रहा है। वार्ड पार्षद गुलाब वर्मा के प्रयासों से 41.37 लाख रुपये की लागत से होने वाले इन विकास कार्यों का भूमिपूजन महापौर अलका बाघमार ने किया। इस पहल से वार्ड के उद्यानों की स्थिति बेहतर होने के साथ नागरिकों को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है।
भूमिपूजन कार्यक्रम में नगर निगम सभापति श्याम शर्मा, लोक कर्म प्रभारी देव नारायण चन्द्राकर, पर्यावरण विभाग प्रभारी काशीराम कोसरे, एमआईसी सदस्य ज्ञानेश्वर ताम्रकर, पार्षद मनीष कोठारी, उपअभियंता पंकज साहू सहित वार्ड के नागरिक उपस्थित रहे।
उद्यानों के संधारण एवं सौंदर्यीकरण से बच्चों, बुजुर्गों और परिवारों को सुबह-शाम घूमने, बैठने तथा समय बिताने के लिए बेहतर स्थान मिल सकेगा। साथ ही हरित क्षेत्रों का रखरखाव बेहतर होने से वार्ड की सुंदरता बढ़ेगी और नागरिकों को स्वास्थ्य एवं मनोरंजन के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा।
इस अवसर पर महापौर अलका बाघमार ने कहा कि शहर के विकास के साथ नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की प्राथमिकता है। उद्यान नागरिकों के स्वास्थ्य, मनोरंजन और शहर की सुंदरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप तय समय-सीमा में पूरे किए जाएं, ताकि नागरिकों को इनका लाभ मिल सके।
वार्ड क्रमांक 39 में उद्यानों के विकास की दिशा में इस पहल को पार्षद गुलाब वर्मा के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। विकास कार्यों के पूर्ण होने के बाद वार्डवासियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
फिटनेस शुल्क ₹800, वसूली ₹5,000 तक! परिवहन विभाग में कथित वसूली पर कांग्रेस का सरकार से सवाल
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग में वाहन फिटनेस से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन स्वामित्व हस्तांतरण तक निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त रकम मांगने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब वाहन फिटनेस का निर्धारित शुल्क 800 रुपये है, तो वाहन मालिकों से 5,000 रुपये तक वसूले जाने की शिकायतों पर सरकार जवाब क्यों नहीं दे रही है और अतिरिक्त रकम आखिर किसके पास जा रही है?
फिटनेस जांच या सिर्फ प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया?
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि वाहन फिटनेस का उद्देश्य सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यदि तकनीकी रूप से खराब, जर्जर टायरों और खराब लाइटों वाले वाहनों को भी पैसे लेकर फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने फिटनेस जांच की वास्तविक प्रक्रिया और निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने फिटनेस जांच का ठेका लेने वाली निजी कंपनी के विरुद्ध सामने आ रही शिकायतों की स्वतंत्र जांच पर भी जोर दिया।
परिवहन कार्यालयों से नाकों तक वसूली के आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि परिवहन कार्यालयों, सड़कों और परिवहन नाकों पर भी अवैध वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं। वाहन चालकों के हवाले से उन्होंने कहा कि रात के समय वाहनों को रोककर निजी व्यक्तियों के माध्यम से पैसे मांगे जाने तथा इनकार करने पर दुर्व्यवहार और मारपीट की शिकायतें हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि निजी व्यक्तियों को किस अधिकारी के आदेश पर वाहनों को रोकने, जांच करने या पैसे वसूलने का अधिकार दिया गया है। कांग्रेस ने परिवहन उड़नदस्तों और नाकों पर निजी व्यक्तियों की भूमिका तथा संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी की जांच करने की मांग की है।
लाइसेंस और वाहन ट्रांसफर में भी परेशानी का आरोप
ठाकुर ने कहा कि आम नागरिकों को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहन का स्वामित्व हस्तांतरित कराने और अन्य परिवहन संबंधी कार्यों के लिए निर्धारित शुल्क जमा करने के बावजूद कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अतिरिक्त रकम दिए बिना काम नहीं होने की शिकायतें सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती हैं।
कांग्रेस की मांग—शुल्क और भुगतान का ब्योरा सार्वजनिक हो
कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि फिटनेस शुल्क और वाहन मालिकों से ली जा रही वास्तविक राशि का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। प्रत्येक परिवहन कार्यालय, फिटनेस केंद्र और नाके पर निर्धारित शुल्क की सूची प्रदर्शित हो तथा हर भुगतान की अनिवार्य रसीद दी जाए।
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि अवैध वसूली में संलिप्त पाए जाने वाले निजी व्यक्तियों, कंपनी संचालकों और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों का निष्पक्ष पालन कराने की मांग भी की। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि और परिवहन विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
दुर्ग / शौर्यपथ / ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित सेवा सेतु शिविर नागरिकों के लिए उपयोगी साबित हुई। विकासखंड एवं विधानसभावार आयोजित इन शिविरों के माध्यम से विभिन्न विभागों की शासकीय सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गई, ताकि नागरिकों को अपने आवश्यक कार्यों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
इसी कड़ी में श्री शांति लाल यादव को भवन निर्माण की अनुमति से संबंधित प्रक्रिया के लिए भूमि के दस्तावेजों की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने सेवा सेतु शिविर में बी-1 (खतौनी) एवं पी-2 (खसरा) की प्रतिलिपियां प्राप्त करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। शिविर में संबंधित अधिकारियों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए उन्हें मौके पर ही आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए। इससे उन्हें दस्तावेजों के लिए अलग-अलग राजस्व कार्यालयों में जाने और अनावश्यक समय व्यतीत करने से राहत मिली।
इसी तरह श्री कमल नारायण एवं श्री संतराम पटेल ने भी अपने अलग-अलग कार्यों के लिए भू-अभिलेख संबंधी दस्तावेज प्राप्त करने हेतु सेवा सेतु शिविर में आवेदन प्रस्तुत किया। संबंधित अधिकारियों ने उनके आवेदनों पर कार्यवाही करते हुए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की। श्री कमल नारायण ने बताया कि भूमि से संबंधित बी-1 (खतौनी) और पी-2 (खसरा) की प्रतिलिपियां विभिन्न राजस्व एवं अन्य शासकीय प्रक्रियाओं में उपयोगी होती हैं। इन दस्तावेजों के माध्यम से भूमि खाते और संबंधित खसरे में दर्ज विवरण की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु शिविर में इन दस्तावेजों की उपलब्धता से नागरिकों को आवश्यक जानकारी और सेवाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। सेवा सेतु शिविरों के माध्यम से मौके पर ही आवश्यक दस्तावेज मिलने से समय और श्रम बच रहा है। उन्होंने इस सुविधा के लिए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
डिजिटल तकनीक से न्यायिक प्रक्रिया हुई सुगम, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कर रहा नागरिकों को जागरूक
दुर्ग / शौर्यपथ / न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग से दूरी और आवागमन की बाधाओं को कम करने की दिशा में दुर्ग न्यायालय में महत्वपूर्ण पहल की गई है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक जमानत आवेदन पर सुनवाई कर उसका निराकरण किया गया। वहीं, मुंबई और चेन्नई में मौजूद महत्वपूर्ण गवाहों के बयान एवं प्रतिपरीक्षण की कार्यवाही भी पूरी कराई गई।
एक प्रकरण में अधिवक्ताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर जमानत आवेदन पर अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आवेदन का निराकरण किया। इस व्यवस्था से आवागमन में लगने वाले समय और संसाधनों की बचत में मदद मिली।
इसी तरह, एक अन्य विचाराधीन प्रकरण में मुंबई और चेन्नई में निवासरत महत्वपूर्ण गवाहों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया। निर्धारित तकनीकी एवं विधिक प्रक्रियाओं के तहत उनके बयान दर्ज किए गए और प्रतिपरीक्षण पूरा कराया गया। इससे लंबी दूरी की यात्रा की आवश्यकता कम हुई और साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।
डिजिटल न्याय के साथ विधिक जागरूकता पर जोर
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन और प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के निर्देशन में डिजिटल न्याय एवं विधिक जागरूकता को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके तहत नागरिकों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों को न्यायिक एवं विधिक सेवाओं में उपलब्ध तकनीकी सुविधाओं की जानकारी दी जा रही है। साथ ही पात्र व्यक्तियों को विधिक सहायता प्राप्त करने के उपलब्ध माध्यमों से परिचित कराया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने के साथ तकनीक के लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाना है।
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