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दुर्ग / शौर्यपथ /
राजनीती
लोकसभा चुनाव के मतदान की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है . कांग्रेस नेत्रितत्व द्वारा आम जनता के लिए बड़े बड़े वादे किये जा रहे है किन्तु दुर्ग लोकसभा में अभी केन्द्रीय नेत्रित्व के वादों की बयार बहने की अपेक्षा अंतर्कलह खुलकर सामने आ रही है . एक तरफ विधानसभा चुनाव में जिस तरह से दुर्ग कांग्रेस के कई कार्यकर्त्ता खुलकर वोरा का विरोध करते नजर आये वही अब लोकसभा चुनाव में भी यही स्थिति नजर आ रही है . दुर्ग लोकसभा के प्रत्याशी के रूप में केन्द्रीय नेत्रित्व ने भले ही राजेंद्र साहू के नाम की घोषणा की है किन्तु चुनावी जंग कार्यकर्ताओ के बलबूते लड़ा जाता है . किन्तु दुर्ग शहर में जहाँ कांग्रेस हाल ही में संपन्न हुए विधान सभा चुनाव में लगभग ५० हजार मतों से पराजित हुई उसके बाद वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत नहीं होता कि कांग्रेसी कार्यकर्त्ता ५० हजार के बड़े अंतर को पाट पायेंगे . दुर्ग की राजनीती में उठापठक का आलम यह है कि दुर्ग के कांग्रेसी जनप्रतिनिधि दुर्ग निगम पार्षद और एमआईसी मेंबर को कारण बताओ नोटिस जिलाध्यक्ष द्वारा जारी किया जा चुका है और पिछले कई दिनों से यह सोशल मिडिया में वाइरल भी हो रहा है जिसमे दुर्ग जिलाध्यक्ष गया पटेल के लेटर पेड में जारी हुए नोटिस की अब अलग ही कहानी नजर आ रही है .
जिलाध्यक्ष ने इस नोटिस के बारे में जवाब देते हुए कहा कि यह नोटिस उनके द्वारा नहीं किया गया जबकि इस नोटिस को सोशाल मिडिया में हर ग्रुप में देखा गया . कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक वोरा के ख़ास समर्थक प्रकाश गीते सहित कई कांग्रेसियों ने इसे वाइरल किया . इस पर जिलाध्यक्ष की अनिभिज्ञता और लापरवाही साफ़ नजर आ रही है . राष्ट्रिय पार्टी के जिलाध्यक्ष होने के बाद भी इस नोटिस की जिम्मेदारी ना लेना और इसे फर्जी करार देने के बावजूद भी इसके खिलाफ पुलिस प्रशासन में शिकायत ना करना वही इस नोटिस का सोशल मिडिया प्लेट फ़ार्म में भी खंडन ना करना ही जिलाध्यक्ष कीई काबिलियत को दर्शा रहा है वही पिछले चुनाव में बड़ी हार और निष्क्रिय जिलाध्यक्ष होने के बावजूद भी पद में बने रहना ही यह साफ़ इशारा कर्ता है कि कांग्रेस दुर्ग में सिर्फ एक औपचारिकता मात्र ही रह गई है . सालो से ब्लाक अध्यक्ष के रूप में एक ही व्यक्तियों द्वारा पद में जमे रहने के कारण कांग्रेसियों में भी नाराजगी साफ झलक रही .
हाल ही में कांग्रेस के सैकड़ो कार्यकर्ताओ सहित निगम पार्षदों और एमआईसी सदस्य का भाजपा में प्रवेश करना उन कांग्रेसियों के मनोबल को तोड़ रहा जो सालो से कांग्रेस के लिए कार्य कर रहे . वही अब जब लोकसभा चुनाव के मतदान की तिथि करीब आ गई ऐसे में एक बार फिर कांग्रेसियों को झंडा उठाने की जिम्मेदारी तो मिल रही किन्तु अब भी अंतर्कलह साफ़ नजर आ रही . ऐसे में शहर की जनता में भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है कि कांग्रेस प्रत्याशी क्या भाजपा प्रत्याशी के पिछले जीत के रिकार्ड को रोक पायेंगे या एक और नया जीत का रिकार्ड सामने आएगा .
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