January 26, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

दुर्ग। शौर्यपथ विशेष
एक ओर दुर्ग नगर पालिक निगम द्वारा अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती के दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। शहर की सबसे प्रमुख सड़कों में शामिल शानदार रोड (चर्च मार्ग) पर अवैध बाजार खुलेआम अपने पांव पसार रहा है और निगम प्रशासन चंद ₹50 की गंदगी शुल्क वसूली में संतुष्ट होकर आंखें मूंदे बैठा है।
शहर में बढ़ते अतिक्रमण अब महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल बन चुके हैं। अवैध कब्जे निरंतर बढ़ रहे हैं, ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त हो रही है, आम नागरिक परेशान हैं, लेकिन निगम प्रशासन प्रेस विज्ञप्तियों में अपनी पीठ थपथपाने से आगे कुछ करने को तैयार नहीं।
चर्च मार्ग पर लगने वाला यह अवैध बाजार दिन-ब-दिन फैलता जा रहा है। सड़कें सिमट रही हैं, गंदगी बढ़ रही है, दुर्घटनाओं का खतरा मंडरा रहा है, मगर निगम आयुक्त को मानो सिर्फ ₹50 की रसीद से ही मतलब है। यही छोटी-छोटी ‘वसूली’ आने वाले समय में एक बड़े शहरी विवाद का बीज बो रही है, जिसका खामियाजा सीधे शहरवासियों को भुगतना पड़ेगा।
दुर्ग जिले में सुपेला संडे मार्केट पहले ही अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता का बड़ा उदाहरण बन चुका है। अब उसी राह पर दुर्ग नगर निगम को भी धकेला जा रहा है। हर चौक-चौराहे पर अवैध कब्जा, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ छोटे कर्मचारियों को नोटिस और बड़े मामलों पर रहस्यमयी चुप्पी—यही है निगम प्रशासन की असली तस्वीर।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस क्षेत्र में
स्कूल शिक्षा मंत्री का निवास,
दर्जा प्राप्त मंत्री ललित चंद्राकर का घर,
भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे का निवास,
और ‘शहरी सरकार’ भारतीय जनता पार्टी का दबदबा है,


अवैध बाजार के खिलाफ कोई पहल नहीं की जा रही। यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या चुनाव के समय ‘सुशासन’ के नारे सिर्फ सत्ता हासिल करने का साधन थे? क्या अब दुर्ग में सुशासन की जगह मौन शासन ने ले ली है?
शानदार रोड पर लगने वाला अवैध बाजार आज भाजपा और निगम प्रशासन के खोखले दावों का जीता-जागता प्रमाण बन चुका है। अगर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सड़क नहीं, बल्कि निगम की नाक पर लग चुका अवैध तमाचा कहलाएगा—और उसकी गूंज बहुत दूर तक जाएगी।

माननीय नरेंद्र मोदी (प्रधानमन्त्री जी के कलम से )
पीआईबी रायपुर से संकलित
शौर्यपथ विशेष
सोमनाथ... ये शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात में, प्रभास पाटन नाम की जगह पर स्थित सोमनाथ, भारत की आत्मा का शाश्वत प्रस्तुतिकरण है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है। ज्योतिर्लिंगों का वर्णन इस पंक्ति से शुरू होता है...“सौराष्ट्रे सोमनाथं च...यानि ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले सोमनाथ का उल्लेख आता है। ये इस पवित्र धाम की सभ्यतागत और आध्यात्मिक महत्ता का प्रतीक है। शास्त्रों में ये भी कहा गया है:
“सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।
लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥”
अर्थात्, सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है। मन में जो भी पुण्य कामनाएं होती हैं, वो पूरी होती हैं और मृत्यु के बाद आत्मा स्वर्ग को प्राप्त होती है।
दुर्भाग्यवश, यही सोमनाथ, जो करोड़ों लोगों की श्रद्धा और प्रार्थनाओं का केंद्र था, विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बना, जिनका उद्देश्य विध्वंस था।

वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि इस महान तीर्थ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने इस मंदिर पर बड़ा आक्रमण किया था, इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। यह आक्रमण आस्था और सभ्यता के एक महान प्रतीक को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया एक हिंसक और बर्बर प्रयास था।
सोमनाथ हमला मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में शामिल है। फिर भी, एक हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है। साल 1026 के बाद समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुन:निर्मित करने के प्रयास जारी रहे। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका। संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है। 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ वो समारोह ऐतिहासिक था, जब मंदिर के द्वार दर्शनों के लिए खोले गए थे।
1026 में एक हजार वर्ष पहले सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण, वहां के लोगों के साथ की गई क्रूरता और विध्वंस का वर्णन अनेक ऐतिहासिक स्रोतों में विस्तार से मिलता है। जब इन्हें पढ़ा जाता है तो हृदय कांप उठता है। हर पंक्ति में क्रूरता के निशान मिलते हैं, ये ऐसा दुःख है जिसकी पीड़ा इतने समय बाद भी महसूस होती है।
हम कल्पना कर सकते हैं कि इसका उस दौर में भारत पर और लोगों के मनोबल पर कितना गहरा प्रभाव पड़ा होगा। सोमनाथ मंदिर का आध्यात्मिक महत्व बहुत ज्यादा था। ये बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींचता था। ये एक ऐसे समाज की प्रेरणा था जिसकी आर्थिक क्षमता भी बहुत सशक्त थी। हमारे समुद्री व्यापारी और नाविक इसके वैभव की कथाएं दूर-दूर तक ले जाते थे।
सोमनाथ पर हमले और फिर गुलामी के लंबे कालखंड के बावजूद आज मैं पूरे विश्वास के साथ और गर्व से ये कहना चाहता हूं कि सोमनाथ की गाथा विध्वंस की कहानी नहीं है। ये पिछले 1000 साल से चली आ रही भारत माता की करोड़ों संतानों के स्वाभिमान की गाथा है, ये हम भारत के लोगों की अटूट आस्था की गाथा है।
1026 में शुरू हुई मध्यकालीन बर्बरता ने आगे चलकर दूसरों को भी बार-बार सोमनाथ पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया। यह हमारे लोगों और हमारी संस्कृति को गुलाम बनाने का प्रयास था। लेकिन हर बार जब मंदिर पर आक्रमण हुआ, तब हमारे पास ऐसे महान पुरुष और महिलाएं भी थीं जिन्होंने उसकी रक्षा के लिए खड़े होकर सर्वोच्च बलिदान दिया। और हर बार, पीढ़ी दर पीढ़ी, हमारी महान सभ्यता के लोगों ने खुद को संभाला, मंदिर को फिर से खड़ा किया और उसे पुनः जीवंत किया।
महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन सोमनाथ के प्रति हमारी भावना को हमसे छीन नहीं सका। सोमनाथ से जुड़ी हमारी आस्था, हमारा विश्वास और प्रबल हुआ। उसकी आत्मा लाखों श्रद्धालुओं की भीतर सांस लेती रही। साल 1026 के हजार साल बाद आज 2026 में भी सोमनाथ मंदिर दुनिया को संदेश दे रहा है, कि मिटाने की मानसिकता रखने वाले खत्म हो जाते हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज हमारे विश्वास का मजबूत आधार बनकर खड़ा है। वो आज भी हमारी प्रेरणा का स्रोत है, वो आज भी हमारी शक्ति का पुंज है।

ये हमारा सौभाग्य है कि हमने उस धरती पर जीवन पाया है, जिसने देवी अहिल्याबाई होलकर जैसी महान विभूति को जन्म दिया। उन्होंने ये सुनिश्चित करने का पुण्य प्रयास किया कि श्रद्धालु सोमनाथ में पूजा कर सकें।
1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद भी सोमनाथ आए थे, वो अनुभव उन्हें भीतर तक आंदोलित कर गया। 1897 में चेन्नई में दिए गए एक व्याख्यान के दौरान उन्होंने अपनी भावना व्यक्त की।
उन्होंने कहा, “दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर और गुजरात के सोमनाथ जैसे मंदिर आपको ज्ञान के अनगिनत पाठ सिखाएंगे। ये आपको किसी भी संख्या में पढ़ी गई पुस्तकों से अधिक हमारी सभ्यता की गहरी समझ देंगे।
इन मंदिरों पर सैकड़ों आक्रमणों के निशान हैं, और सैकड़ों बार इनका पुनर्जागरण हुआ है। ये बार बार नष्ट किए गए, और हर बार अपने ही खंडहरों से फिर खड़े हुए। पहले की तरह सशक्त। पहले की तरह जीवंत। यही राष्ट्रीय मन है, यही राष्ट्रीय जीवन धारा है। इसका अनुसरण आपको गौरव से भर देता है। इसको छोड़ देने का मतलब है, मृत्यु। इससे अलग हो जाने पर विनाश ही होगा।”
ये सर्वविदित है कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र दायित्व सरदार वल्लभभाई पटेल के सक्षम हाथों में आया। उन्होंने आगे बढ़कर इस दायित्व के लिए कदम बढ़ाया। 1947 में दीवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा हुई। उस यात्रा के अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, उसी समय उन्होंने घोषणा की कि यहीं सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा। अंततः 11 मई 1951 को सोमनाथ में भव्य मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
उस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित थे। महान सरदार साहब इस ऐतिहासिक दिन को देखने के लिए जीवित नहीं थे, लेकिन उनका सपना राष्ट्र के सामने साकार होकर भव्य रूप में उपस्थित था।
तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस घटना से अधिक उत्साहित नहीं थे। वो नहीं चाहते थे कि माननीय राष्ट्रपति और मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि इस घटना से भारत की छवि खराब होगी। लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे, और फिर जो हुआ, उसने एक नया इतिहास रच दिया।
सोमनाथ मंदिर का कोई भी उल्लेख के.एम. मुंशी जी के योगदानों को याद किए बिना अधूरा है। उन्होंने उस समय सरदार पटेल का प्रभावी रूप से समर्थन किया था। सोमनाथ पर उनका कार्य, विशेष रूप से उनकी पुस्तक ‘सोमनाथ, द श्राइन इटरनल’, अवश्य पढ़ी जानी चाहिए।
जैसा कि मुंशी जी की पुस्तक के शीर्षक से स्पष्ट होता है, हम एक ऐसी सभ्यता हैं जो आत्मा और विचारों की अमरता में अटूट विश्वास रखती है। हम विश्वास करते हैं- नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। सोमनाथ का भौतिक ढांचा नष्ट हो गया, लेकिन उसकी चेतना अमर रही।
इन्हीं विचारों ने हमें हर कालखंड में, हर परिस्थिति में फिर से उठ खड़े होने, मजबूत बनने और आगे बढ़ने का सामर्थ्य दिया है। इन्हीं मूल्यों और हमारे लोगों के संकल्प की वजह से आज भारत पर दुनिया की नजर है। दुनिया भारत को आशा और विश्वास की दृष्टि से देख रही है। वो हमारे इनोवेटिव युवाओं में निवेश करना चाहती है। हमारी कला, हमारी संस्कृति, हमारा संगीत और हमारे अनेक पर्व आज वैश्विक पहचान बना रहे हैं। योग और आयुर्वेद जैसे विषय पूरी दुनिया में प्रभाव डाल रहे हैं। ये स्वस्थ जीवन को बढ़ावा दे रहे हैं। आज कई वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है।
अनादि काल से सोमनाथ जीवन के हर क्षेत्र के लोगों को जोड़ता आया है। सदियों पहले जैन परंपरा के आदरणीय मुनि कलिकाल सर्वज्ञ हेमचंद्राचार्य यहां आए थे और कहा जाता है कि प्रार्थना के बाद उन्होंने कहा,
“भवबीजाङ्कुरजनना रागाद्याः क्षयमुपगता यस्य।
अर्थात्, उस परम तत्व को नमन जिसमें सांसारिक बंधनों के बीज नष्ट हो चुके हैं। जिसमें राग और सभी विकार शांत हो गए हैं।
आज भी दादा सोमनाथ के दर्शन से ऐसी ही अनुभूति होती है। मन में एक ठहराव आ जाता है, आत्मा को अंदर तक कुछ स्पर्श करता है, जो अलौकिक है, अव्यक्त है।
1026 के पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद 2026 में भी सोमनाथ का समुद्र उसी तीव्रता से गर्जना करता है और तट को स्पर्श करती लहरें उसकी पूरी गाथा सुनाती हैं। उन लहरों की तरह सोमनाथ बार-बार उठता रहा है।
अतीत के आक्रमणकारी आज समय की धूल बन चुके हैं। उनका नाम अब विनाश के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है। इतिहास के पन्नों में वे केवल फुटनोट हैं, जबकि सोमनाथ आज भी अपनी आशा बिखेरता हुआ प्रकाशमान खड़ा है। सोमनाथ हमें ये बताता है कि घृणा और कट्टरता में विनाश की विकृत ताकत हो सकती है, लेकिन आस्था में सृजन की शक्ति होती है। करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सोमनाथ आज भी आशा का अनंत नाद है। ये विश्वास का वो स्वर है, जो टूटने के बाद भी उठने की प्रेरणा देता है।
अगर हजार साल पहले खंडित हुआ सोमनाथ मंदिर अपने पूरे वैभव के साथ फिर से खड़ा हो सकता है, तो हम हजार साल पहले का समृद्ध भारत भी बना सकते हैं। आइए, इसी प्रेरणा के साथ हम आगे बढ़ते हैं। एक नए संकल्प के साथ, एक विकसित भारत के निर्माण के लिए। एक ऐसा भारत, जिसका सभ्यतागत ज्ञान हमें विश्व कल्याण के लिए प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है।
जय सोमनाथ !

(नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं और श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं।)

शनिवार, 10 जनवरी 2026
आज चंद्रमा का गोचर कन्या राशि में हो रहा है, जिससे कई राशियों के लिए आत्मविश्वास, सफलता और शुभ समाचार के योग बन रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज का दिन कुछ राशियों के लिए विशेष लाभकारी रहेगा, वहीं कुछ को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। जानिए आज का विस्तृत राशिफल—

? मेष:
मेहनत रंग लाएगी। अटके हुए सरकारी कार्य पूरे हो सकते हैं। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें।

? वृषभ:
व्यापार में लाभ के संकेत हैं। परिवार संग समय आनंददायक रहेगा। नए निवेश से फिलहाल दूरी बनाए रखें।

? मिथुन:
कार्यस्थल पर सराहना मिलेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी, लेकिन फिजूलखर्ची से बचें।

? कर्क:
मानसिक शांति का अनुभव होगा। जीवनसाथी का पूरा सहयोग मिलेगा। पुराने मित्रों से भेंट संभव है।

? सिंह:
यात्रा के योग बन रहे हैं। वाणी पर संयम रखें, विवाद की आशंका है। नए प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए दिन शुभ है।

? कन्या:
चंद्रमा आपकी राशि में होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। सामाजिक कार्यों में सक्रियता रहेगी। धन लाभ की संभावना है।

⚖️ तुला:
दिन भागदौड़ भरा रह सकता है। लेन-देन में सावधानी जरूरी है। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है।

? वृश्चिक:
रुका हुआ धन वापस मिलने के योग हैं। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी। करियर में उन्नति के अवसर मिलेंगे।

? धनु:
कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। घर में मांगलिक कार्य की योजना बन सकती है। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा।

? मकर:
भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। धार्मिक गतिविधियों में मन लगेगा। लंबी दूरी की यात्रा सुखद रहेगी।

? कुंभ:
सावधानी बरतने का दिन है। वाहन चलाते समय सतर्क रहें। अचानक खर्च बढ़ सकते हैं।

? मीन:
दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। साझेदारी के व्यवसाय में लाभ होगा। विद्यार्थियों के लिए दिन सफलतादायक है।

? नोट: राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत परिणाम आपकी कुंडली पर निर्भर करते हैं।

? पढ़ते रहिए—हर दिन का सटीक राशिफल, एक नज़र में!

कोलकाता | विशेष रिपोर्ट

भाजपा के दबाव और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहाँ हर बीतता दिन उनकी राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ाता दिख रहा है। कोयला घोटाले की आँच अब सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुँचती नज़र आ रही है—और इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताज़ा कार्रवाई ने सियासी भूचाल ला दिया है।

I-PAC पर ED की रेड, सत्ता में खलबली

गुरुवार (8 जनवरी 2026) की सुबह दिल्ली से आई ED की टीम ने TMC की चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के कोलकाता स्थित साल्टलेक और लाउडन स्ट्रीट कार्यालयों पर छापेमारी शुरू की। जाँच की भनक लगते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुँचीं—वह भी उस वक्त, जब कानूनी प्रक्रिया जारी थी।

छापे के बीच फाइल-लैपटॉप लेकर बाहर निकलीं ममता

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ममता बनर्जी I-PAC कार्यालय से गोपनीय दस्तावेजों से भरी हरी फाइल और लैपटॉप लेकर बाहर निकलती दिखीं। उनके साथ चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी की मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना दिया। सूत्रों का दावा है कि ED इसी फाइल की तलाश में थी—अब एजेंसी उस दस्तावेज़ के लिए हाईकोर्ट का रुख कर चुकी है।

‘घटिया गृहमंत्री’—मीडिया के सामने फूटा गुस्सा

कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री का आक्रोश खुलकर सामने आया। सबूत हाथ से निकलने की आशंका के बीच ममता बनर्जी ने मीडिया के सामने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें ‘घटिया गृहमंत्री’ तक कह डाला।

ममता का आरोप है कि ED उनके उम्मीदवारों की सूची और चुनावी रणनीतियाँ “चुराने” आई है। उन्होंने छापेमारी को राजनीतिक साजिश बताते हुए केंद्र सरकार पर डेटा कब्जाने का आरोप लगाया।

राजनीतिक विश्लेषण

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चुनाव से ठीक पहले I-PAC जैसे रणनीतिक केंद्र पर हुई कार्रवाई TMC की तैयारियों के लिए बड़ा झटका है। यही वजह है कि ममता बनर्जी अब सीधे तौर पर केंद्रीय एजेंसियों और भाजपा नेतृत्व पर हमलावर हैं। सवाल यह है—क्या यह आक्रामकता उनकी मजबूरी का संकेत है, या आने वाले दिनों में सियासत और तीखी होने वाली है?

अब बड़ा सवाल

क्या ED की तलाश में रही फाइल क्या सचमुच सत्ता के सबसे करीब किसी बड़े राज़ की चाबी है? और क्या ममता बनर्जी की यह प्रतिक्रिया उनकी राजनीति को और संकट में धकेल देगी?

आने वाले दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

कांकेर में घटिया डामरीकरण उजागर, SDO व उप अभियंता निलंबित, EE को कारण बताओ नोटिस

  रायपुर / शौर्यपथ / लोक निर्माण विभाग में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं—इस संदेश के साथ राज्य सरकार ने अमानक कार्यों पर कड़ी कार्रवाई जारी रखी है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद कांकेर जिले के दमकसा–पेटेचुआ मार्ग में गुणवत्ताहीन डामरीकरण पाए जाने पर विभाग ने दो अभियंताओं को निलंबित कर दिया है, वहीं कार्यपालन अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
यह कार्रवाई लोक निर्माण विभाग, बस्तर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर की गई। जांच में पाया गया कि 6.80 किमी लंबाई में किया गया संपूर्ण डामरीकरण कार्य अमानक स्तर का है। पुनः डामरीकरण के दौरान आवश्यक सर्वेक्षण नहीं किया गया और तकनीकी मानकों की घोर अनदेखी हुई।

जांच प्रतिवेदन के अनुसार—
लगभग 70 प्रतिशत एम.एस.एस. परत उखड़ चुकी थी,
डामरीकरण में बी.एम. की मोटाई असमान पाई गई,
कोर सैंपल लेने पर टुकड़े-टुकड़े होकर निकलना,
डामर बिछाते समय उचित कम्पैक्शन का अभाव,
तथा बिटुमिन कंटेंट के मानकों का पालन नहीं किया गया।

इन गंभीर अनियमितताओं के लिए लोक निर्माण विभाग, चारामा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री के.एस. कंवर एवं उप अभियंता श्री एम.के. खरे को निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय नवा रायपुर स्थित प्रमुख अभियंता कार्यालय निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
वहीं, कांकेर संभाग के कार्यपालन अभियंता के.के. सरल को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, उदासीनता, स्वेच्छाचारिता एवं कदाचार मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्हें नोटिस प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर लिखित प्रतिवाद प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
लोक निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन से होने वाले कार्यों में गुणवत्ता सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या अमानक निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

  बालोद / शौर्यपथ / राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम दुधली में प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का आज भव्य शुभारंभ हुआ। राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि जंबूरी केवल एक शिविर ही नहीं बल्कि एकता, विविधता, भाईचारा और साझा उद्देश्यों का उत्सव है। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जैन, मुख्य राज्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा, राष्ट्रीय व राज्य स्तर के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में देश के विभिन्न राज्यों से आए रोवर-रेंजर उपस्थित थे।
राज्यपाल डेका एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं आसमान में गुब्बारा छोड़कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। समारोह में राज्यपाल एवं अतिथियों द्वारा जंबूरी पत्रिका एवं नए बैज का विमोचन भी किया गया। राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि स्काउट-गाइड युवाओं को नेतृत्व कौशल, अनुशासन और सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज के लिए कम से कम एक सकारात्मक कार्य अवश्य करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। देश में पहली बार आयोजित हो रही यह राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि स्काउट-गाइड युवाओं को जीवन मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक दायित्वों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि रोवर-रेंजर देश के वे युवा हैं, जो समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए कुछ अच्छा करने का जज्बा रखते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए इस आयोजन को छत्तीसगढ़ और देश के युवाओं के लिए सौभाग्यपूर्ण अवसर बताया।
इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन करते हुए भारत स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. केके खण्डेलवाल ने ग्राम दुधली में इस प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी आयोजन को एतिहासिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मुख्य राज्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा ने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ के स्वर्णिम अध्याय में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
विभिन्न राज्यों से उपस्थित रोवर एवं रेंजरों द्वारा आकर्षक मार्चपास्ट कर राज्यपाल श्री डेका एवं अतिथियों को सलामी दी गई। इस प्रथम नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न राज्यों से उपस्थित रोवर रेंजरों ने नैनाभिराम सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति से भारतीय संस्कृति की बहुरंगी छटा बिखेरी। उल्लेखनीय है कि इस 5 दिवसीय आयोजन में देश के सभी राज्यों के अलावा रेल्वे, नवोदय विद्यालय सहित कुल 33 राज्यों के प्रतिभागी रोवर रेंजर शामिल हो रहे हैं। भारत स्काउट्स गाइड्स के अधिकारी, रोवर रेंजर के अलावा अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आम नागरिकगण उपस्थित थे

  रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ का बालोद जिला आज देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा और गौरव का नया केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जिला बालोद के ग्राम दुधली में 9 से 13 जनवरी तक आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी में देश-विदेश से आए लगभग 15 हजार रोवर-रेंजर अपनी सेवा भावना, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का जीवंत प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह ऐतिहासिक जंबूरी छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति को राष्ट्रीय मंच पर लाने का सुनहरा अवसर है। राष्ट्रीय स्तर के कैंपिंग, रोवर-रेंजर प्रशिक्षण, सांस्कृतिक संध्याओं और सामुदायिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से युवा प्रतिभागी अनुशासन, सेवा और नेतृत्व के मूल्यों के साथ राष्ट्र निर्माण की भावना को सशक्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बालोद की धरती पर उमड़ा यह उत्साह भारत की भावी पीढ़ी की ऊर्जा, समर्पण और संकल्प को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के खेल, कौशल विकास और नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अनुशासित, प्रशिक्षित और आत्मविश्वासी युवा शक्ति ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगी। उन्होंने जंबूरी में भाग ले रहे सभी रोवर-रेंजरों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनका उत्साह और सेवा भाव छत्तीसगढ़ का परचम देश-दुनिया में और ऊँचाई तक ले जाएगा।

गोवा में लोकोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जनजातीय नायकों को किया नमन

रायपुर / शौर्यपथ /
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गोवा के आदर्श ग्राम अमोन, पोंगुइनिम में आयोजित आदि लोकोत्सव पर्व–2025 में शामिल हुए। उन्होंने लोकोत्सव को लोकसंस्कृति, जनजातीय गौरव और राष्ट्रबोध का सशक्त संगम बताते हुए आयोजन की सराहना की। इस अवसर पर गोवा के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. रमेश तावड़कर भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत गांवों का देश है और गांवों की लोकसंस्कृति ही देश की आत्मा है। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्र और परंपराएं हमारी सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखती हैं। उन्होंने कहा कि गोवा सरकार द्वारा पिछले 25 वर्षों से आदि लोकोत्सव का आयोजन इस सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का सराहनीय प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि जनजातीय इतिहास गौरवशाली रहा है। अल्पायु में अंग्रेजों को चुनौती देने वाले बिरसा मुंडा सहित अनेक जनजातीय सेनानियों को आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशव्यापी सम्मान और पहचान मिल रही है। उन्होंने रानी दुर्गावती के बलिदान का स्मरण करते हुए जबलपुर में निर्मित संग्रहालय का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय सेनानियों—शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधुर, गेंद सिंह—के योगदान को रेखांकित किया और बताया कि राज्य में लगभग 32 प्रतिशत जनजातीय आबादी निवास करती है। उन्होंने कहा कि इन नायकों की स्मृति को संरक्षित करने के लिए नया रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह डिजिटल संग्रहालय का निर्माण किया गया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री मोदी ने किया। उन्होंने सभी को छत्तीसगढ़ आकर संग्रहालय देखने का आमंत्रण दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जनजातीय समाज का गौरव है कि आज देश के सर्वोच्च पद पर भी जनजातीय समाज की बेटी विराजमान हैं। उन्होंने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना का उल्लेख करते हुए जनजातीय विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान अब नक्सल प्रभावित राज्य से बदलकर शांति, विकास और निवेश के नए केंद्र के रूप में बन रही है। नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो राज्य के उज्ज्वल भविष्य का संकेत हैं।

रायपुर / शौर्यपथ /
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में शुक्रवार को 21वाँ स्थापना दिवस एवं सांस्कृतिक संगीत कार्यक्रम ‘श्रुति 2025’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों, नवाचार, शोध, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का उत्सवपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव रहे। उनके साथ डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) डॉ. मनोज चोपकर, हेड, करियर डेवलपमेंट सेल डॉ. समीर बाज़पाई, सभी विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, कर्मचारी, पूर्व छात्र, विद्यार्थी एवं उनके परिवारजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

समारोह का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन में डॉ. मनोज चोपकर ने एनआईटी रायपुर की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थान ने एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज से आगे बढ़कर आज स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रमों में उत्कृष्टता हासिल करने वाला अग्रणी तकनीकी संस्थान बनने का गौरव प्राप्त किया है। उन्होंने शिक्षण, शोध, नवाचार और इनोवेशन सेल जैसी पहलों के माध्यम से छात्रों के रचनात्मक विचारों को प्रोत्साहित करने की बात कही।

डॉ. समीर बाज़पाई ने कहा कि एनआईटी रायपुर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों को क्लबों और समितियों द्वारा आयोजित सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि डॉ. एन. वी. रमना राव ने अपने संबोधन में संस्थान की गौरवशाली परंपरा, तकनीकी उन्नति और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में संकाय सदस्यों एवं छात्रों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनआईटी रायपुर तकनीकी कौशल के साथ-साथ शोध, सांस्कृतिक गतिविधियों और खेलकूद को समान महत्व देता है। उन्होंने नए विचार अपनाने, कड़ी मेहनत करने और बड़े सपने देखने का संदेश देते हुए संकाय, विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।

इसके पश्चात पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।

डिस्टिंग्यूश्ड एल्युमिनस अवार्ड केमिकल इंजीनियरिंग (1990 बैच) के पूर्व छात्र प्रो. अनुराग प्रभाकर मैरल को प्रदान किया गया।

लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड सिविल इंजीनियरिंग (1975 बैच) के पूर्व छात्र श्री संतोष कुमार अग्रवाल तथा केमिकल इंजीनियरिंग (1975 बैच) के पूर्व छात्र श्री सुधीर वर्मा को प्रदान किया गया।

श्री एस. के. अग्रवाल ने सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को संस्थान की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही छात्रों एवं संकाय सदस्यों को शैक्षणिक और खेलकूद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुवेंदु रूप, फैकल्टी इन-चार्ज, कल्चरल कमेटी द्वारा प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में नृत्यम – द डांस क्लब द्वारा मनमोहक नृत्य प्रस्तुति दी गई, वहीं ‘श्रुति 2025’ के अंतर्गत रागा – द म्यूजिक क्लब ने विविध संगीत शैलियों में शानदार गायन प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति गीतों से लेकर रेट्रो, रॉक, 90 के दशक के लोकप्रिय गीतों और आधुनिक माशअप तक की प्रस्तुतियों ने भारत की “एकता में विविधता” की सांस्कृतिक भावना को सशक्त रूप से दर्शाया। परेशान, मेरे ढोलना, जाने जान, कायदे से जैसे गीतों पर सभागार तालियों से गूंज उठा।

एनआईटी रायपुर का 21वाँ स्थापना दिवस न केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव बना, बल्कि संस्कृति, नवाचार और सामूहिक गौरव का यादगार प्रतीक भी सिद्ध हुआ।

“अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलें और दुनिया को अपनी आवाज़ सुनने दें” —जेन-ज़ी के लिए श्री ओ. पी. चौधरी का संदेश

रायपुर / शौर्यपथ /
हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय , रायपुर ने स्वामी विवेकानंद के जीवन और दर्शन को समर्पित '5वें स्वामी विवेकानंद स्मृति वार्षिक व्याख्यान' का भव्य आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रदेश के माननीय वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी उपस्थित रहे, जिन्होंने "जेन-ज़ी (Gen Z) के लिए स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएँ" विषय पर प्रेरक उद्बोधन दिया। विश्वविद्यालय द्वारा यह आयोजन स्वामी विवेकानंद के रायपुर से गहरे ऐतिहासिक संबंधों और राष्ट्रीय युवा दिवस की स्मृति में प्रतिवर्ष किया जाता है।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एचएनएलयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन ने श्री ओ. पी. चौधरी के सार्वजनिक जीवन और सेवा भाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहाँ सफलता का पैमाना सोशल मीडिया 'फॉलोअर्स' बन गए हैं, वहीं श्री चौधरी जैसे व्यक्तित्व हमें याद दिलाते हैं कि नेतृत्व की असली पहचान सेवा और समर्पण है। कुलपति ने जोर दिया कि स्वामीजी के देहावसान के 123 वर्ष बाद भी उनके विचार आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) के लिए एक प्रकाश स्तंभ की तरह हैं।

अपने मुख्य व्याख्यान में वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने स्वामी विवेकानंद के 1893 के शिकागो संबोधन का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को संचार और नेतृत्व के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि किसी भी विचार को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने से पहले लोगों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ना अनिवार्य है। उन्होंने स्वामीजी को भारतीय संस्कृति का 'वैश्विक राजदूत' बताते हुए विद्यार्थियों से 'सादा जीवन और उच्च विचार' के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।मंत्री महोदय ने विद्यार्थियों से अपने 'कम्फर्ट ज़ोन' से बाहर निकलने और साहस के साथ अपने जुनून का पीछा करने का आग्रह किया। उन्होंने अनुशासन और ईमानदारी को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य ही वास्तविक संपदा है। उन्होंने अपने स्वयं के संघर्षों को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक सरकारी स्कूल से पढ़कर देश के सबसे युवा आईएएस अधिकारियों में शामिल होने और फिर जनसेवा के लिए राजनीति में आने का निर्णय उनके साहसिक कदम थे। उन्होंने संदेश दिया कि चुनौतीपूर्ण रास्ते ही व्यक्ति को वास्तविक और सार्थक सफलता तक ले जाते हैं।

इस गरिमामयी अवसर पर एचएनएलयू प्रेस द्वारा प्रकाशित 'एचएनएलयू गज़ट न्यूज़लेटर' (खंड 3, अंक 2) का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव (प्रभारी) डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण दिया, जबकि डीन (छात्र कल्याण) डॉ. अविनाश सामल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का कुशल समन्वय फैकल्टी सलाहकार श्री अभिनव शुक्ला और डॉ. अनीता सिंह द्वारा किया गया। इस व्याख्यान में एचएनएलयू के साथ-साथ कलिंगा विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।

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